एनजीओ (NGO) में खार्ते बनार्नार् और वित्तीय विवरण तैयार्र करनार्

एक ट्रस्ट/एसोसिएशन को अपने वित्तीय लेन-देन क रिकार्ड रखने के लिए खार्तों की उचित और नियमित पुस्तकें रखनी चार्हिए। खार्ते डबल एंट्री सिस्टम से तैयार्र करने चार्हिएं और नियमित रूप से एक ही लेखार्करण विधि को अपनार्यार् जार्नार् चार्हिए, चार्हे वह cash method हो यार् mercantile method।

कानूनी आवश्यकतार्एं : सोसार्इटीज रजिस्ट्रेशन एक्ट के अतर्गत सोसार्इटियों क अकाउंट व्यवस्थित रखनार् चार्हिए और वाषिक रिटर्न रार्जिस्ट्रार्र आफ सोसार्इटीज के कार्यार्लय में भेजनी चार्हिए। वित्तीय विवरणों के फाम और उनकी विषय वस्तु विनिर्दिष्ट नहीं है। भार्रतीय ट्रस्ट अधिनियम के अधीन ट्रस्टियों को निश्चित ही ट्रस्ट की सम्पत्ति के सार्फ और सही अकाउंट रखने होते हैं। उन्हें सभी उचित समयों पर लार्भार्विन्त व्यक्तियों के मार्ंगने पर ट्रस्ट की सम्पत्ति की धनरार्शि और स्थिति के बार्रे में पूरी-पूरी और सही जार्नकारी देनी चार्हिए। धर्माथ और धामिक ट्रस्ट अधिनियम के अधीन कोर्इ भी व्यक्ति, किसी भी सावजनिक ट्रस्ट के मार्मले में ट्रस्ट के अकाउंट के ब्यौरे मार्ंग सकतार् है। आयकर अधिनियम के अंतर्गत, चैरिटेबल संगठनों को छूट प्रार्प्त करने के लिए उचित अकाउंट व्यवस्थित रखने चार्हिए और उनकी लेखार् परीक्षार् भी करार् लेनी चार्हिए।

लेखार्करण अवधि : लेखार्करण अवधि 12 महीने की अवधि की होती है, जो सार्मार्न्यतयार् एक वित्तीय वर्ष (पहले वर्ष की 1 अप्रैल से अगले वर्ष की 31 माच तक) की होती है जिसके लिए खार्ते बनार्ये जार्ने चार्हिए। कुछ अपवार्दिक मार्मलों में (जैसे कि जब किसी संस्थार् की स्थार्पनार् वर्ष के दौरार्न की गर्इ हो तो स्थार्पनार् के पहले वर्ष के लिए खार्ते तैयार्र करने के लिए) लेखार्करण अवधि बदल सकती है (अर्थार्त् यह 12 महीने से कम यार् ज्यार्दार् भी हो सकती है)

खार्तों के प्रकार : मूल रूप से खार्ते तीन प्रकार के होंते है- वार्स्तविक (real), निजी (personal), और नार्मित (nominal)। वार्स्तविक खार्ते वस्तुओं से संबंधित होते हैं जैसे कि अचल परिसम्पत्तियार्ं, मार्ल, नगदी, बैंक आदि। देनदार्रों और लेनदार्रों आदि (debtors and creditors) के खार्ते निजी खार्ते कहे जार्ते है।ं नार्मित खार्तें में आय, व्यय, हार्नि और लार्भ आते हैं।

लेखार्करण के मूल सिद्धार्न्त : निजी खार्ते: जो लेन-देन व्यक्तियों, व्यार्पार्रियों निकायों यार् अन्य संगठनों के सार्थ किये जार्ते हैं, उन्हें निजी खार्ते से संबंधित (transaction) के रूप में वर्गीकृत कियार् जार्तार् है। निजी खार्तों के अंतर्गत कोर्इ व्यक्ति किसी अन्य व्यक्ति के कुछ प्रार्प्त करतार् है यार् उसे देतार् है इस तरह के लेन-देन के लिए नियम यह है- प्रार्प्तकर्तार् के नार्म डार्लो और देने वार्ले के नार्म जमार् करो।

उदार्हरण के तौर पर, अगर A ने B को कुछ रकम दी है। तो, A की पुस्तकों में B के नार्म रकम डार्ली जार्एगी। क्योंकि B प्रार्प्तकर्तार् है, और B की पुस्तकों में A के नार्म रकम डार्ली जार्एगी क्योंकि A देने वार्लार् है।

वार्स्तविक खार्ते: बार्की लेन-देन वार्स्तविक खार्तों में अंतर्गत वर्गीकृत कियार् गयार् है। इसमें वे सभी लेन-देन शार्मिल होंगे, जो व्यार्पार्र में पार्वतियों को चार्हे वे सम्पत्तियों, वस्तुओं यार् सेवार्ओं से की हों और व्यार्पार्र की सभी बहिर्गार्मी अदार्यगियों को दर्शार्ते हैं। वार्स्तविक खार्तों में लेन-देन दर्ज करने क मूल सिद्धार्न्त यह है- जो आयार् हो उसे नार्म से दिखार्ओ और जो बार्हर गयार् हो उसे जमार् में दिखार्ओ ।

उदार्हरण के तौर पर, यदि कोर्इ व्यार्पार्रिक संस्थार्न कुछ सार्मार्न खरीदतार् है तो यह सार्मार्न को प्रार्प्त करनार् दर्शार्तार् है, और सार्मार्न खरीदने के नार्म में दिखार्यार् जार्नार् चार्हिए। जबकि, बिक्री यह दर्शार्ती है कि कुछ वस्तुएं और अन्य सार्मग्री स्टार्क से बार्हर गर्इ हैं इसलिए बिक्री को व्यार्पार्र की पुस्तकें में जमार् में दिखार्यार् जार्नार् चार्हिए।

नार्मित खार्तें: व्यार्पार्र के जो लेन-देन खचर् करने यार् हार्नि से संबंधित हं,ै यार् आय अर्जित करने यार् लार्भ से संबंधित हैं उन्हें नार्मित खार्तों के वर्ग में रखार् जार्तार् है। नार्मित खार्तों में लेन-देन करने क मूल सिद्धार्न्त यह है- सभी खर्चों और हार्नियों के नार्मों में डार्लों और सभी आय यार् लार्भों को जमार् में डार्लो । उदार्हरण के लिए अगर कोर्इ व्यक्ति अपने कर्मचार्री को एक महीने के वेतन की अदार्यगी के तौर पर 500 रुपये खर्च करतार् है तो वह रकम व्यय दर्शार्ती है और इसे व्यार्पार्र खार्तों के नार्म में दिखार्नार् चार्हिए। इसी तरह कमीशन प्रार्प्त होनार् ब्यार्ज पार्नार् आय को दर्शार्तार् है, इसलिए इसे खार्तों के जमार् में दिखार्नार् चार्हिए। इस तरह, लेखार्करण की डबल एंट्री प्रणार्ली के सिद्धार्न्त नीचे दिये गये हैं।

XYZ ट्रस्ट में एक दिन निम्न घटनार्ंए और लेन-देन हुए :-

उपर्युक्त से यह पतार् लगतार् हैं कि हर एक लेन-देन के दो पहलू है। इस प्रकार हर नार्म क एक बरार्बर जमार् भी है। लेन-देन के क्रमार्नुसार्र लिखे गए इस नार्म और जमार् रिकार्ड को इन लेन-देन की प्रविष्टि कहार् जार्तार् है। नार्म मूल्यों क योग हमेश जमार् मूल्यों के जोड़ के बरार्बर होतार् है।

खार्तार् किसी मद यार् व्यक्ति यार् किसी आय क खर्च से संबंधित लेन-देन क एक औपचार्रिक प्रस्तुतीकरण है। खार्तार्, आमतौर पर र्फार्म में तैयार्र कियार् जार्तार् है। जिसमें बाइ तरफ के भार्ग के नार्म भार्ग और दार्यें तरफ के भार्ग को जमार् भार्ग कहार् जार्तार् है।

उपयुक्त खार्तार् शीर्षक क चयन करनार् : एक ट्रस्ट कर्इ मदों में और कर्इ व्यक्तियों के सार्थ कार्य व्यार्पार्र करतार् है। इसको कर्इ तरह के लेन-देन करने पड़ते हैं और कर्इ तरह के खर्च करने पड़ते है। हार्लार्ंकि हर एक लेन-देन क दर्ज करनार् पड़तार् है, परन्तु महत्वपूर्ण बार्त यह है कि इसे उपयुक्त खार्तार् शीर्षक के अंतर्गत दर्ज कियार् जार्ए। चूंकि ऐसार् संभव और व्यवहाय नहीं है कि हर एक लेन-देन के लिए एक अलग खार्तार् खोलार् जार्ए, इसलिए कुछ चुने गए खार्ते खोलें जार्एं और हर एक खार्ते से संबंधित लेन-देन को तत्संबंधित खार्ते में दर्ज कर दियार् जार्ए। उदार्हरण के तौर पर यदि कोर्इ व्यक्ति दो बिजली के बल्ब, एक सार्बुन, चार्र बार्ल प्वार्इंट पैन और एक रार्इटिंग पैड खरीदतार् है तो हर एक मद के लिए एक अलग खार्तार् खोलनार् उपयुक्त नहीं होगार्। इसके बदले, एक ‘‘रख रखार्व संबंधी खर्च खार्तार्’’ खोलार् जार्तार् है और उसमें बल्ब और सार्बुन के खर्च नार्म कर दिये जार्ते है। इसी तरह बार्ल पार्ंइट पैन आरै रार्इटिंग पैड दोनों को ‘‘प्रिटिंग और स्टेशनरी खर्च खार्ते’’ में डार्लार् जार्तार् है। अगले दिन यदि वह कुछ दस्तार्वेजों की फोटो कापियार्ं करवार्तार् है तो इस खर्च को भी ‘‘ प्रिटिंग और स्टेशनरी खर्च खार्ते’’ में नार्म कर दियार् जार्ए।

विभिन्न छोटे-छोटे खर्चों के लिए आमतौर पर ‘‘विविध खर्च खार्तार्’’ यार् ‘‘ सार्मार्न्य खर्च खार्तार्’’ नार्म क एक अलग खार्तार् खोल दियार् जार्तार् है। इस खार्ते में सिर्फ वही खर्च दर्ज किए जार्एं जो कि बहुत छोटे-छोटे हों यार् कभी-कभी किए जार्ते हों, और वे मौजूदार् किसी भी खार्ते के अंतर्गत वर्गीकृत न किए गए हों। उपयुक्त खार्तार् शीर्षकों के अंतर्गत लेन-देन क वर्गीकरण सिर्फ वार्स्तविक और नार्मित खार्तों में संभव है। निजी खार्तों के मार्मले में हर एक व्यक्ति यार् पाटी का, जिसके सार्थ कार्य व्यार्पार्र कियार् जार्तार् है, एक अलग खार्तार् होनार् चार्हिए।

हार्लार्ंकि आम तौर पर सभी, ट्रस्ट/एसोसिएशन अपने आकार, प्रकार और क्रियार्कलार्पों के आधार्र पर कैश बुक और लेजर रखते हैं, फिर भी, नीचे लिखी खार्तार्-पुस्तकें आवश्यक समझी जार्ती हैं:-

ट्रस्ट/एसोसिएशन को विदेशी अंशदार्न सरकारी अनुदार्न, कुछ स्थार्नीय एजेंसियों से प्रार्प्त अनुदार्न और विदेशी एजेंसियों से प्रार्प्त अनुदार्न के संबंध में अलग-अलग खार्तार् पुस्तकों के सेट रखने चार्हिए। इस बार्रे में, निम्नलिखित रजिस्टर रखे जार् सकते है’-

  1. कार्यपार्लक करने वार्ली एजेंसियों/अधिकारियों/वार्लंटीयरों को दिये जार्ने वार्ली ‘अग्रिम रार्शि’ क रजिस्टर।
  2. ग्रार्ट-इन-एड अनुसार्र/योजनार् अनुसार्र रजिस्टर जिसमें योजनार् क विवरण, आरम्भ करने की तार्रीख समार्पन/अवधि समार्प्ति की तार्रीख प्रार्प्त किए गए फंड, खर्च के स्वीकृत शीर्षों के अंतर्गत किए गए खर्च क ब्यौरार्, तत्संबधी बजट आबटंन के सार्थ दिखार्यार् गयार् हो।
  3. एक रार्जिस्टर जिसमें विभिन्न क्रियार्कलार्पों/कार्यक्रमों/योजनार्ओं के लिए तत्संबंधित आबंटित बजट के प्रतिरूप किए गए खर्च आदि की प्रगति क पुनरीक्षण कियार् गयार् है। 
  4. स्थार्यी अग्रिम अकाउंट (पैटी कैश बुक और क्षतिपूर्ति वार्उचर्स)। 

डबल एंट्री प्रणार्ली के अतंर्गत किसी लेन-देन को रिकार्ड करनार् सबसे पहले एक वार्उचर से शुरू होतार् है। उसके बार्द िरार्कर्ड की प्रमुख पुस्तकों में एक एंट्री की जार्ती है अर्थार्त् वह एंट्री जर्नल यार् कैश बुक में की जार्ती है। उसे लेजर में दर्ज कियार् जार्तार् है और प्रत्येक खार्ते क शेष निकालकर वित्तीय विवरणों के रूप में प्रस्तुत कियार् जार्तार् है। इस प्रणार्ली के अंतर्गत जो मुख्य दस्तार्वेज और खार्तार् पुस्तकें रखनी जरूरी है, उनके बार्रे में नीचे चर्चार् की गर्इ है’-

वार्उचर 

यह बहुत जरूरी है कि खार्तार् पुस्तकों में दर्ज किए गए हर एक लेन-देन के उचित समर्थन में लेनदेन को प्रमार्णित करने वार्लार् एक दस्तार्वेज होनार् चार्हिए। इसे वार्उचर क नार्म दियार् जार्तार् है। अत: वार्उचर उस लेन-देन को समर्थन देने वार्लार् एक प्रमार्णिक दस्तार्वेज है। ये दस्तार्वेज आन्तरिक और बार्हरी कोर्इ भी हो सकतार् है। ट्रस्ट/सोसार्इटी के संबंध में यह सुनिश्चित करनार् बहुत जरूरी है कि:

  1. सभी खर्चों ार्के प्रार्धिकृत कियार् गयार् हो और उन्हें जार्ंच लियार् गयार् है। 
  2. किसी भी धोखार्धड़ी, गलती यार् गलत प्रयेग से बचने के लिए आवश्यक बचार्व के तरीके अपनार्ए जार्ने चार्हिए 
  3. एक दक्ष लेखार्करण संचार्लन प्रक्रियार् को अपनार्यार् जार्नार् चार्हिए। इन सभी के लिए वार्उचर प्रणार्ली के द्वार्रार् उपयुक्त रिकॉड रखे जार्ने चार्हिए। 

एक वार्उचर किसी लेन-देन क एक लिखित प्रार्धिकरण है, उसक लेखार्करण रिकार्ड है। और उसकी अदार्यगी आदि क सार्बूत है।

अदार्यगी : इन वार्उचरों क प्रयोग सभी अदार्यगियों और अन्य नकद भुगतार्न किये गए खर्चों के लिए कियार् जार्तार् है। खर्चों के मार्मले में जहार्ं तक हो सकें, उन खर्चों के समर्थन में कैश मैमो यार् बिल आदि भी नत्थी कर दिये जार्ने चार्हिए।

बैंक वार्उचर : कभी-कभी बैंक आदयगी क रिकार्ड रखने के लिए एक अलग वार्उचर डार्लार् जार्तार् है। बैंक अदार्यगी के वार्उचर क फाम भी वैसार् ही होतार् है। जसै ार् कि नकद अदार्यगी क वार्उचर होतार् है। लेकिन जिस बैंक के मार्ध्यम से भुगतार्न कियार् गयार्, उस बैंक क नार्म, चैक नम्बर और तार्रीख संबंधी जार्नकारी भी उस वार्उचर में दी जार्नी चार्हिए।

रसीद : यह वार्उचर सभी तरह की रकम की प्रार्प्तियों क रिकार्ड रखने के लिए तैयार्र कियार् जार्तार् है। चार्हे वह नकद हो यार् चैक द्वार्रार् प्रार्प्त हो, और वे चार्हे किसी भी खार्ते के हों। कभी-कभी कैश बुक में दर्ज करने के लिए भुगतार्न कर्त्तार् को दी गर्इ रसीद की एक अतिरिक्त प्रतिलिपि वार्उचर के तौर पर इस्तेमार्ल में लाइ जार्ती है। अदार्यगी और रसीद वार्उचरों के नमूने नीचे दिये गये हैं:-

अदार्यगी वार्उचरों के नमूने 

अदार्यगी वार्उचरों के नमूने

रसीद वार्उचरों के नमूने 

रसीद वार्उचरों के नमूने

कैश बुक : कैश बुक सभी पार्वतियों और अदार्यगियों क एक रिकार्ड होतार् है, और इसे दैनिक आधार्र पर तैयार्र कियार् जार्तार् है, और इसमें हर रोज के अन्त में यार् किसी निर्धार्रित अवधि के अन्त में (जो कि एक महीने के अवधि से अधिक न हो) उपलब्ध कैश शेष दिखार्यार् जार्तार् है। कैश बुक में सभी नकद लेन-देन क रिकार्ड रखार् जार्तार् है। कैश बुक को सार्मार्न्यतयार् दो भार्गों में बार्ंटार् जार्तार् है।

  • बाइ तरफ के भार्ग में दिन प्रतिदिन के आधार्र पर सभी नकद पार्वतियों को रिकार्ड कियार् जार्तार् हैं चार्हे वह ट्रस्ट द्वार्रार् प्रार्प्त किए गए ऋण, यार् आय यार् सदस्यों क चंदार् हों। 
  • दार्ये तरफ क भार्ग में सभी तरह की अदार्यगियार्ं रिकार्ड की जार्ती है। चार्हे वे खर्च के लिए की गर्इ अदार्यगियार्ं हो यार् ऋण की वार्पसी हो यार् ट्रस्टियों द्वार्रार् निकालार् गयार् फंड हो।
  • दिन के अन्त में पिछले बकायार् कैश सहित पार्वती भार्ग क कुल योग अदार्यगी भार्ग के योग में अधिक होतार् है और उन दोनों में जो अन्तर होतार् है वह अन्तिम बकायार् रकम होतार् है। 

कैश बुक क नमूनार् नीचे दियार् गयार् हैं और इसमें दृष्टार्न्त भी दियार् गयार् है जिसमें कैश बुक में रिकार्ड किए गए लेन-देन रिकार्ड किए गए हैं।
दृष्टार्न्त
1.8.2009 X,Y और Z सदस्यों ने अपनार् वाषिक चन्दार्
1000 रुपये प्रति व्यक्ति जमार् करार्यार्
2.8.2009 दवार्इयार्ं खरीदी गर्इ-600 रुपये नकद
3.8.2009 दार्न प्रार्प्त हुआ-800 नकद रुपये
4.8.2009 पिछले महीने क वेतन दियार् गयार्, 2000 रुपये
5.8.2009 बिजली क बिल प्रार्प्त हुआ- 1500 रुपये
6.8.2009 सरकारी अनुदार्न चैक द्वार्रार् प्रार्प्त हुआ- 30,000 रुपये

कैश बुक

कैश बुक


टिप्पणी : 5 तरीख को बिजली के बिल की प्रति और6 तरीख को चैक द्वार्रार् अनुदार्न को कैश बुक में नहीं दिखार्यार् जार्एगार्, लेकिन जब बिल की अदार्यगी हो जार्एगी और चैक बैंक में जमार् करार् दियार् जार्एगार् तो इनकी एंट्री कैशबुक में कर दी जार्एगी। 

कैश बुक क फाम सार्मार्न्यतयार् उपरोक्त जैसार् ही होतार् है। परन्तु कहीं-कहीं कैश बुक में कुछ प्रचलित भिन्नतार्एं पाइ जार्ती है इनको नीचे स्पष्ट कियार् गयार् है।

पैटी कैश बुक: मुख्य कैश बुक के अतिरिक्त शार्खार् कार्यार्लय, विक्रय कार्यार्लय आदि में एक पैटी कैश बुक भी रखी जार्ती है। जिसमें बार्र-बार्र होने वार्ली छोटी पार्वतियार्ं और अदार्यगियों को रिकार्ड कियार् जार्तार् है। पैटी कैश बुक की पार्वतियार्ं और अदार्यगियों क मार्सिक यार् एक अवधि क सार्र मुख्य कैशबुक में रिकार्ड कर दियार् जार्तार् है। पैटी कैश बुक क एक नमूनार् दियार् गयार् है। इसे आम तौर पर कालमों के आधार्र पर तैयार्र कियार् जार्तार् है। विभिन्न प्रकार की अदार्यगियों के अलग-अलग कालम होते हैं।

पैटी कैश बुक क एक नमूनार्

दिनार्ंक पार्वतियार्ं विवरण कुल रकम किरार्यार् और
भार्ड़ार्
प्रिटिग और
स्टेशनी
अन्य
रु. पैं. रु. पैं. रु. पैं. रु. पैं. रु. पैं.


खर्च के कालम व्यार्पार्र की जरूरत के मुतार्बिक उपयुक्त रूप से बदले जार् सकते हैं।

जर्नल 

एक जर्नल को ‘मूल एंट्रियों की बुक’ भी कहार् जार्तार् है, और जहार्ं खार्ते मर्केटार्इल आधार्र पर रखे जार्ते हं,ै वहार्ं जर्नल रखनार् अनिवाय है। जर्नल में दी गर्इ एट्री एक औपचार्ार्रिक रिकार्ड होतार् है और यह उस लेन-देन को तत्संबंधी लेजन खार्ते में दर्ज करने की भी प्रार्धिकृत करतार् है। लेजर खार्ते में कोर्इ भी डेबिट यार् क्रेडिट तब तक दर्ज नहीं कियार् जार् सकतार् जब तक कि उस लेन-देन की पूरी एंट्री पहले जर्नल में रिकार्ड न कर दी गर्इ हो। जर्नल क समीकरण करने की जरूरत नहीं है क्योंकि सभी डेबिट क योग हमेशार् सभी क्रेडिट के योग के बरार्बर होतार् है। एक जर्नल क नमूनार् नीचे दियार् गयार् है:-

जर्नल क नमूनार् दिनार्ंक विवरण लेजर पृ.सं. डेबिट रकम क्रेडिट रकम रु. पैं. रु. पैं. एक जर्नल में लेन-देन को दर्ज करते समय निम्नलिखित मुद्दों को अवश्य ध्यार्न में रखनार् चार्हिए:

  • हर एक लेन-देन के लिए पहले कालम में तार्रीख के सार्थ महीनार् और वर्ष भी लिख दियार् जार्ए। 
  • विवरण के कालम में खार्ते क नार्म लिखार् जार्ए जिसमें डेबिट करनार् है यह नार्म तार्रीख के कालम के बिल्कुल पार्स लिखार् जार्ए और रकम डेबिट रकम को कालम में लिखी जार्ए। 
  • जिस खार्ते में क्रेडिट करनार् हो उसक नार्म सीधे डेबिट अकाउंट के नीचे लिखार् जार्ए, लेकिन आधार् इंच यार् एक इंच दार्ए और लिखार् जार्ए तार्कि यह पतार् लगे कि यह डेबिट से अलग है, और रकमे क्रेडिट कालम में लिख दी जार्ए। 
  • जर्नल में दी गर्इ एंट्रियों के बीच में लार्इन खार्ली छोड़ दी जार्ए तार्कि दो अलग-अलग लेन-देनों को सार्फ-सार्फ देखार् जार् सके। जर्नल में एंट्री रिकार्ड के बार्रे में विस्तृत जार्नकारी प्रार्प्त करने के लिए अनुच्छेद खार्ते लिखने की प्रक्रियार् खार्तार् पुस्तक देखें। 

लेजर 

लेजर मुख्य खार्तार् पुस्तक है। इसमें लेन-देन और अन्य कार्य व्यार्पार्र को उनके प्रकार के अनुसार्र वर्गीकृत कियार् जार्तार् है और सार्र रूप में लिखार् जार्तार् है। तार्त्पर्य यह है कि विभिन्न प्रकार के खर्चों से संबंधित सभी लेन-देन विभिन्न खार्तों में रिकार्ड किए जार्एं तार्कि वह विशेष प्रकार के खर्च एक ही जगह पर दिखाइ दें। लेजर में जो एंट्रियार्ं की जार्ती हैं उनक मूल आधार्र कैश बुक आरै जर्नल होतार् है। एक लेजर अकाउंट यार् तो में T- form तैयार्र कियार् जार्तार् है यार् नीचे दिये गए प्रार्रूप में तैयार्र कियार् जार्तार् है।

लेजर क नमूनार्

दिनार्ंक विवरण पृ.सं. डेबिट रकम क्रेडिट रकम शेष रकम
रु. पैं. रु. पैं. Dr. or
Cr.रु. पैं.

आरम्भिक एंट्रियार्ं: लेखार्करण वर्ष के सार्मार्प्ति पर, खार्तार् पुस्तकों में अन्तिम एंट्री कर के बंद कर दी जार्ती है। अगले वर्ष के लिए खार्तार् पुस्तार्कों क एक नयार् सैट तैयार्र कियार् जार्तार् है। वर्ष के प्रार्रम्भिक दिन ट्रस्ट को अपने जर्नल में प्रार्रम्भिक एंट्री दर्ज कर देनी चार्हिए। इस तरह वे पिछले वर्ष की कितार्बों से नए वर्ष की कितार्बों में विभिन्न खार्तों के जो प्रार्रम्भिक शेष आन्तरित करते हैं, उन्हें रिकार्ड कियार् जार्तार् है।

        बुक्स में की गर्इ प्रार्रम्भिक एंट्री सार्मार्न्यतयार् इस प्रकार दिखाइ जार्ती है: 
        उपलब्ध नकदी (Cash in hand A/C)         Dr.         1,5000
         बैंक में नकदी (Cash in hand A/C)         Dr.         1,5000 
        निवेश A/C Dr. 1,5000 फर्नीचर A/C         Dr.         1,5000 
        मोटर कार A/C         Dr.                 1,5000 
        To देय खर्च A/C                 4,100 
        To बैंक ओवर ड्रार्फ्टA/C                 20,800 
        To कार्पस फंड A/C                 23,700
        (ये परिसंपत्तियों और देनदार्रियों के प्रार्रम्भिक शेष हैं जिन्हें पिछले खार्तार् पुस्तकों सें आगे लियार् गयार् है।

लेजर खार्तार् 

खार्तार् एक औपचार्ार्रिक प्रस्तुतीकरण है जिसमें किसी एक मद यार् व्यक्ति यार् आयार् यार् व्यय संबंधी लेन-देन दर्शार्यार् जार्तार् है। खार्तार् आम तौर पर ‘ज्श् फाम में तैयार्र कियार् जार्तार् है। इसमें बाइ तरफ के भार्ग को डेबिट भार्ग कहार् जार्तार् है और दाइ तरफ के भार्ग को क्रेडिट भार्ग कहार् जार्तार् है। सभी खार्ते (सिवार्य कैश यार् बैंक के, जो कैश बुक में रखे जार्ते हैं) इस अंतरण प्रक्रियार् को पोस्ंिटग कहार् गयार् है।

लेजर में ऐंट्री : मूल लेखार् पुस्तकों में रिकार्ड किए गए सभी लेन-देन की डेबिट तथार् क्रेडिट रकमों को लेजर के उपयुक्त लेखों में अंतरित कर दियार् जार्तार् है। इस अंतरण प्रक्रियार् को पोस्टिंग कहार् जार्तार् है।

लेजर क शेष निकालनार्: जब किसी खार्ते में संबंधित लेन-देन रिकार्ड कर दिये जार्ते है। तो आवश्यक हो जार्तार् है कि अन्तिम स्थिति क पतार् लगार्यार् जार्ए। उदार्हरण के लिए अगर कोर्इ एक व्यक्ति अनेक परिणार्मों (संख्यार्ओं) में कुछ सार्मार्न सप्लाइ करतार् है, और इसी तरह अदार्यगियार्ं भी अनेक बार्र की जार्ती है तो यह पतार् लगार्नार् जरूरी हो जार्तार् है कि किसी एक समय पर उसे कितनी रकम देय है यार् उससे वार्पिस ली जार्नी है। यह उस खार्ते के समीकरण की मदद से ही कियार् जार्तार् है। समीकरण प्रतिदिन, सप्तार्ह,तिमार्ही,वाषिक, किसी भी समय कारोबार्र की जरूरत के मुतार्बिक कियार् जार् सकतार् है।

किसी एक खार्ते के एक तरफ के भार्ग की गर्इ एंट्रियों क कुल योग अगर उस खार्ते के दूसरी तरफ के भार्ग में की गर्इ एंट्रियों के कुल योग से अधिक हो तो उस अधिक रार्शि को उस खार्ते क शेष कहते है। अगर डेबिट भार्ग क्रेडिट भार्ग से अधिक हो तो वह डेबिट बंलै ेस दर्शार्तार् हैं और अगर क्रेडिट भार्ग डेबिट भार्ग हो तो क्रेडिट बंलै ेस दर्शार्तार् है।

डेबिट बैलेंस क अर्थ है: 

  1. निजी खार्तों में मार्मले में तार्त्पर्य है कि उस व्यक्ति ने वह रकम ट्रस्ट को देनी है। 
  2. वार्स्तविक खार्तों के मार्मले में तार्त्पर्य है कि ट्रस्ट कुछ सम्पत्ति क मार्लिक है। 
  3. नार्मित खार्तों के मार्मलों में तार्त्पर्य है कि ट्रस्ट से कुछ रकम की हार्नि हुर्इ है यार् ट्रस्ट ने कुछ खर्च कियार् है। 

क्रेडिट बैंलेस क अर्थ 

  1. निजी खार्तों के मार्मले में ट्रस्ट ने वह रकम उस व्यक्ति को देनी है। 
  2. वार्स्तविक खार्तों के मार्मले में ट्रस्ट ने उतनी सम्पत्ति छोड़ दी है, और 
  3. नार्मित, खार्तों के मार्मले में ट्रस्ट ने कुछ आय अर्जित की है। 

लेजर में सभी खार्तों के बंलै ेस एक निध िरत अवधि पर निश्चित कर लिये जार्ते हैं आरै उन्हें बैंलेंस कालम में लिख दियार् जार्तार् है सार्थ ही यथार्नुसार्र क्रेडिट यार् डेबिट भी लिख दियार् जार्तार् है। बैंक सार्मार्धार्न विवरण : सैद्धार्न्तिक रूप से कहार् जार्ए तो बैंक खार्ते क शेष (यार् कैश बुक के बैंक कालम क शेष) एक विशेष तार्रीख के दिन बैंक द्वार्रार् बनार्ए गए ग्रार्हक के खार्ते के शेष से बैक पार्स बुक/विवरण के मुतार्बिक, मेल खार्नार् चार्हिए। परन्तु कर्इ बार्र ये आपस में मेल नहीं खार्ते अगर कोइ्र गलती न भी हो तो भी अन्तर आ ही जार्तार् है। इसके निम्नलिखित कारण हो सकते है।

  1. चैक प्रार्प्त हो जार्ते हैं और उन्हें बैंक अगार्उंट में दर्ज भी कर दियार् जार्तार् है परन्तु उन्हें रकम वसूली के लिए बैंक नहीं भेजार् जार्तार्। इस मार्मले में लेजर के मुतार्बिक बैंक बैलेंस, बैंक के विवरण के मुतार्बिक बनार्ए गए बैलेंस से अधिक होगार्।
  2. चैक जार्री कर दियार् जार्ते हैं आरै बैंक अकाउंट में दर्ज भी कर दिये जार्ते है परन्तु उन्हें रकम वसूली के लिए बैंक में पेश नहीं कियार् जार्तार् ह। इस मार्मले में लेजर में जो बैंक बलै ेस होगार् वह बैंक के विवरण के बैलेंस से कम होगार्।
  3. ब्यार्ज बैंक द्वार्रार् क्रेडिट कर दियार् जार्तार् है। लेकिन उसे लेखार् पुस्तकों में रिकार्ड में नहीं कियार् जार्तार् बैंक खार्तों की यथाथतार् और सही-सही होने की जार्ंच करने के लिए यह महत्वपूर्ण है कि बैंक वलै ेंस बैंक के विवरण से मेल खार्तार् हैं इसलिए एक बैंक समार्धार्न विवरण तैयार्र कियार् जार्तार् है। तार्कि अन्तर के कारणों क पतार् लगार्यार् जार् सके। अत: बैंक समार्धार्न विवरण तैयार्र करनार् एक महत्वपूर्ण नियंत्रण की तकनीक है। 

बैंक समार्धन विवरण तयै ार्र करने की तकनीक बहतु आसार्न है। कैश बुक यार् पार्स बुक के बैलेंस से शुरू करें और फिर यह देखें कि दूसरी कितार्बों में क्यार् कियार् गयार् हैं और क्यार् नहीं कियार् गयार् है। अत: अगर कोर्इ व्यक्ति कैश बुक के बैलेंस से शुरू करतार् हैं तो उसे पार्स बुक की एंट्रीज के सार्थ उनक मिलार्न करनार् होतार् है। बैंक समार्धार्न विवरण क नमूनार् नीचे दियार् गयार् है

बैंक समार्धार्न विवरण दिनार्ंक 31……………………………………….20………………………………………………को कैश बुक के मुतार्बिक बैलेंस 

जोडे़   चैक जार्री किए गए लेकिन वसूली के बैंक में पेश नहीं किए 
          गए- चैक नं. दिनार्ंक पाटी         रकम …………… …………… 


जोडे़   ब्यार्ज जो पार्स बुक में क्रेडिट कर दियार् गयार्
           पर कैश बुक में रिकार्ड नहीं कियार् गयार्         ………….. ………….. 

घटार्यें   चैक प्रार्प्त हुए और बैंक में जमार् कर दिये गए पर उनकी निकासी नहीं हुर्इ 
          चेक नं. दिनार्ंक पाटी रकम         …………. …………… 

घटार्यें   बैंक शुल्क जो पार्स बुक में डेबिट कर दियार् गयार् परन्तु उसे 
            कैश बुक में रिकार्ड नहीं कियार् गयार्।         ……………… …………….. 

पार्स बुक के मुतार्बिक बैलेंस         ……………….

वित्तीय विवरण तैयार्र करनार् 

किसी ट्रस्ट/एसोसिएशन की खार्तार् पुस्तकों में निम्नलिखित वित्तीय विवरण तैयार्र की जार्ती है। यह विवरण आमतौर पर हर एक वित्तीय वर्ष के अन्त में नियमित रूप से तैयार्र की जार्ती है।

1. ट्रार्यल बैलेंस- ट्रार्यल बैलेंस डेबिट और क्रेडिट बैलेंसों की सूची होती है। इस मुख्य कैश बुक और लेजर से एक निर्दिष्ट समय पर तैयार्र कियार् जार्तार् है। क्योंकि डबल एंट्री प्रणार्ली के अंतर्गत हर एक डेबिट क तत्संबंधी एक क्रेडिट होतार् है। इसलिए ट्रार्यल बैलेंस के डेबिट को योग क्रेडिट के योग के बरार्बरार् होनार् चार्हिए। अगर दोनों के योग मेल खार् जार्ते हैं तो प्रत्यक्ष रूप से यह सिद्ध हो जार्तार् है। कि कितार्बें गणित की दृष्टि से सहीं हैं। हार्लार्ंकि यह यथाथतार् क अन्तिम प्रमार्ण नहीं है। अगर ट्रार्यल बैलेंस मेल नहीं खार्तार् तो भूल-चूक को ढूंढनार् पडे़गार्।

2. आय और व्यय खार्तार्: आय और व्यय खार्तार् संबंधित अवधि की आय और खर्च क सार्र होतार् है। इसमें मूल हार्स और बकायार् क प्रार्वधार्न भी होतार् है। पिछले वर्ष यार् आगार्मी वर्षों संबंधी मदों पर इसमें विचार्र नहीं कियार् जार्तार् है। इसमें सिर्फ गैर-पूंजीगत मदों को ही ध्यार्न में रखार् जार्तार् है। इसमें कोर्इ पूंजीगत लेन-देन नहीं दिखार्ए जार्ते है। खर्च को डेबिट भार्ग में रिकार्ड कियार् जार्तार् है। आय को क्रेडिट भार्ग में दिखार्यार् जार्तार् है। इसमें होनार् प्रकट करतार् है आय और व्यय खार्तें में यदि कोर्इ अधिशेष घार्टार् तो उसे बैलेंस शीट में अन्तरित कर दियार् जार्तार् है और पूंजी निवेश फंड में समार्योजित कर लियार् जार्तार् है।

3. बैलेंस शीट- बैलेंस शीट में संगठन की वित्तीय स्थिति की झलक मिलती है इसमें परिसम्पत्तियार्ं देनदार्रियों और उसक निवल धन (कार्पस फंड अन्य फंड, रिजर्व और सरप्लस) प्रकट होते है। बैलेंस शीट पार्वतियों और अदार्यगियों के खार्ते और आय व्यय के खार्ते के आधार्र पर तैयार्र की जार्ती है। पार्वतियों और अदार्यगियों के खार्तें आय और व्यय खार्तार् और बैलेंस शीट के नमूने नीचे दिए गये है।

पार्वतियों और अदार्यगियों क खार्तार् 
पार्वतियार्ं                       श्रकम            अदार्यगियार्            श्रकम 
To आरिम्भक शेष                       By खर्चे            
To सदस्यों क चन्दार्                       By पूंजीगत खर्च            
To आदार्न                       By निवेश            
To आय                       By ऋण और अग्रिम            
To सरकारी अनुदार्न                      By अन्तिम शेष            
To ऋण और अग्रिम                       
To निवेश की बिक्री यार् वसूली                    

आय और व्यय खार्तार् 
आय                   श्रकम आय                   रकम 
To आय संबंधी व्यय (इसमें देय खर्च शार्मिल हैं              By सदस्यों क चन्दार् 
परन्तु पूर्वदत्त खर्च शार्मिल नहीं है) 
To परिसम्पत्तियों/निवेश की बिक्री पर घार्टार्                   By आदार्न यार् सरकारी अनुदार्न (कार्पस फंड अन्य                                                                                                                                विशिष्ट फंड में दिये गये 
                                                                                  दार्न के अतिरिक्त) 
To मूल्य हृार्स                                                              By आय (इसमें प्रार्प्त होने 
                                                                                   वार्ली आय शार्मिल हैं परन्तु पूर्व 
                                                                                   प्रार्प्त आय शार्मिल नहीं हैं 
To खर्च से अधिक आय की रार्शि जो बैलेंस शीट            By परिसम्पत्तियों/निवेश की बिक्री पर लार्भ
                                                                                  को आन्तरित कर दी गर्इ है। 
                                                                                 By आय से अधिक खर्च की रार्शि जो बैलेंस शीट को 
                                                                                 अन्तरित कर दी गर्इ हैं

बैलेंस शीट 
देनदार्रियार्ं                   रकम परिसम्पत्तियार्ं                   रकम 
कार्पस फंड अन्य विशिष्ट/प्रोजेक्ट                     अचल परिसम्पत्तियार्ं जमार् 
 फंड                                                               रार्शि, ऋण और 
                                                                       अग्रिम विविध देनदार्र

                                                        
खर्च से अधिक आय की रार्शि                         मार्ल बार्की पूर्वदत्त
                                                                    कैश और बैंक
विविध देनदार्न  ऋण 
और अग्रिम देय खर्चें                                       बैलेंस                                                                     
                                                                    आय से अधिक खर्च की रार्शि

पार्वतियों और अदार्यगियों के खार्ते से आय और व्यय खार्तार् तैयार्र करने के विभिन्न चरण 

  1. पार्वतियों और अदार्यगियों के खार्ते से प्रार्रम्भिक और अन्तिम कैश/बैंक इतिशेषों को छोड़ दे। 
  2. पार्वतियों और अदार्यगियों के खार्ते में पंजीगत प्रकार की सभी मदें छोड़ दें। 
  3. पिछले वर्ष यार् आगार्मी वर्ष की आय और व्यय यदि कोर्इ हो, तो उसे अवश्य निकाल दियार् जार्ए। 
  4. मूल्य हृार्स, बट्टे खार्ते की रकम आदि को, जिसकी अदार्यगी नकद नहीं की जार्ती केवल आय और व्यय में ही लेने चार्हिए। 
  5. पार्वतियों और अदार्यगियों के अकाउंट में दर्शाइ गर्इ पूंजीगत प्रकार की सभी मदों को, जिन्हें आय और व्यय में खार्ते में नहीं दिखार्यार् गयार् है, बैलेंस शीट में दिखार्यार् जार्नार् चार्हिए। 

आय और व्यय से संबंधित विशेष मदों क विवेचन 

प्रवेश शुल्क अगर प्रेवश शुल्क की रकम कम हो तो इसे आय मार्नार् जार् सकतार् है।आम तौर पर स्कूल और कालेजों के मार्मले में, प्रेवश शुल्क यार् दार्खिले फीस को आय मार्नार् जार् सकतार् है। क्लब और मार्मले में भी प्रवेश शुल्क को आय मार्नार् जार् सकतार् है। क्योंकि कर्इ सदस्यगण प्रतिवर्ष पव्र ेश पार्ते हैं और कर्इ सदस्यतार् छोड़ जार्ते हैं। परन्तु सार्मार्न्यतयार्, क्लबों के मार्मले में इसे पूंजीगत धन में जमार् कियार् जार्तार् है, क्योंकि कुछ विशिष्ट संख्यार् में ही सदस्यों को प्रवेश मिलतार् है, और सदस्यतार् भी प्रतिबन्धित होती है।प्रयोग में लार्ए गए खेलकूद क सार्मार्न और समार्चार्र पत्र की बिक्री-इन्हें आय मार्नार् जार्नार् चार्हिए।

आजीवन सदस्यतार्- यह शुल्क बार्र-बार्र प्रार्प्त नहीं होतार्। इस रकम को पूंजीगत फंड में जमार् कियार् जार्नार् चार्हिए, क्योंकि सदस्य क्लब की सेवार्ओं क लार्भ पूरे जीवन भर तक के लिए प्रार्प्त कर सकेगार्।

वसीयत संपदार्- वसीयत संपदार् की रकम, सार्मार्न्यतयार्, पूंजीगत धन में जमार् की जार्ती है, क्योंकि यह आवर्ती नहीं है (अर्थार्त बार्र-बार्र प्रार्प्त नहीं होती रहती)। फिर भी ऐसी छोटी रकमों को आय मार्नार् जार् सकतार् है।

पुरार्नी परिसम्पत्तियों की बिक्री – इससे होने वार्ले किसी भी लार्भ यार् हार्नि को आय और व्यय खार्ते में दियार्खार् जार्तार् है।

दृष्टार्ंत :एक स्पोर्ट्स क्लब के 31 माच 2009 को समार्प्त होने वार्ले वर्ष के लिए पार्वतियों और अदार्यगियों क खार्तार् नीचे दियार् गयार् है।

पार्वतियार्ं रु. रु.
 To आजीवन सदस्यतार् 3,000  By टूर्नार्मेट 1,800
 To प्रवेश शुल्क 5,000  By फर्नीचर  4,200
 To टूर्नार्मेंट शुल्क 20,000  By  ठल भवन  80,000
 To आदार्न 1,00,0000  By वेतन 3,600
 To चन्दार् प्रार्प्ति 6,400  By क्रिकेट पर खर्च  2,280
 To ब्यार्ज  400  By बीमार्  720
 To अन्य प्रार्प्तियार्ं   2,000  By बार्गवार्नी  340
 By मुद्रण (प्रिटिंग)  560 
 By विविध खर्च  300
  By बैलेंस c/d  36,000
     7,0000
 1,36,800      1,36,800

अनुसूचियार्ं 

वित्तीय विवरण सिर्फ सार्र होते हैं और इनके समर्थन में विस्तृत जार्नकारी अनुसूचियों के रूप में यार् अन्य विवरणों में दी जार्ती हैं जहार्ं कहीं भी आवश्यक हों।

  1. परिसम्पत्तियों की अनुसूची , इसमें वर्ष के दौरार्न अधिग्रहीत की गर्इ परिसम्पत्तियों और वर्ष के दौरार्न मूल्य हृार्स को भी शार्मिल कियार् जार्तार् है। 
  2. ग्रार्ंट/सबसिडी और विशेष शीर्षों के अंतर्गत प्रार्प्त आय की अनुसूची, इसमें विदेशी अंशदार्न भी शार्मिल होतार् है और हर एक शीष्र के अतंर्गत कियार् गयार् खर्च भी दिखार्यार् जार्तार् है।
  3. बैंक में रखे गए फंड पर अर्जित ब्यार्ज की अनुसूची 
  4. प्रतिष्ठार्न खर्चों की अनुसूची 
  5. अन्य प्रशार्सनिक खर्चों की अनुसूची। 

विधिक पुस्तकें 

सोसार्इटीज रार्जिस्ट्रेशन अधिनियम, 1860 के अधीन रजिस्टर्ड सोसार्इटियों को निम्नलिखित दो विधिक पुस्तकें तैयार्र करनी होती है।

  1. मिनट्स बुक : मिनट्स बुक में आम बैठकों संचार्लन समिति की बैठकों और अन्य बोर्ड यार् कार्यकारी परिषदों की बैठकों की कार्यवार्हियों क सार्र होतार् है। विभिन्न निकायों की बैठकों की कार्यवार्हियों को अलग-अलग मिनट्स बुक में रिकार्ड करनार् चार्हिए। विस्तृत जार्नकारी के लिए अध्यार्य मिनट्स देखें।
  2. सदस्यतार् रजिस्टर : सदस्यतार् रजिस्टर के हर एक सस्दय के प्रवेश की तार्रीख, नार्म, कारोबार्र, सदस्यतार् से हटार्ने की तार्रीख आदि संबंधित विस्तृत जार्नकारी दी जार्ती है

सरकारी अनुदार्नों के लिए लेखार्करण 

अनुदार्न निम्नलिखित रूप में प्रार्प्त हो सकते है:

  1. प्रवर्तकों के अंशदार्न के रूप में 
  2. किसी खार्स परिसम्पत्तिय क अधिग्रहण करने के लिए पूंजीगत ग्रार्ंट-इन-एड के रूप में 
  3. गैर-मौद्रिक परिसम्पत्तियों के रूप में पूंजीगत ग्रार्ंट के रूप में 
  4. कुछ खार्स खर्चों को पूरार् करने के लिए गैर-पूंजीगत ग्रार्ंट के रूप में 
  5. सार्मार्न्य गैर-पूंजीगत ग्रार्ंट के रूप में। अनुदार्नों क विमोचन खार्स उद्देश्यों के लिए यार् कुछ खार्स कार्यों को पूरार् करने के लिए कियार् जार्तार् है और ऐसे अनुदार्नों के विमोचन के सार्थ कुछ शर्तें भी जुड़ी हुर्इ शर्तों को अनुकूलतार् से परिचार्लन करने में सक्षम हो और उसे अन्तत: प्रार्प्त कर पार्नार् निश्चित हो। 
  • सार्मार्न्यतयार् ग्रार्ंट-इन-एड को उपाजन के आधार्र पर अर्थार्त् उसकी वार्स्तविक प्रार्प्ति क इंतजार्र किये बिनार्, खार्तों में लिख लेनार् चार्हिए। 
  • अगर ग्रार्ंट प्रवर्तकों के अंशदार्न के रूप में प्रार्प्त होती है, तो इसे बैलेंस शीट में कैपिटल रिजर्व के तौर पर दिखार्यार् जार्एगार्। जब इसे वार्पस करनार् हो यार् वार्स्तव में वार्पिस कर दियार् गयार् हो, तो इसे कैपिटल रिजर्व से कम करके दिखार्यार् जार्एगार्। 
  • गैर-मौद्रिक परिसम्पत्ति (पूरी यार् भार्ग में) के रूप में ग्रार्ंट को उसकी नार्मित मूल्य पर दिखार्यार् जार्एगार् और अगर उसके एक भार्ग की अदार्यगी की गर्इ है तो उस रकम को भुगतार्न दिखार्यार् जार्एगार्। 
  • अगर वह सार्मार्न्य उद्देश्य की ग्रार्ंट के रूप में प्रार्प्त हुर्इ हो, तो इसे आय के रूप में दिखार्यार् जार्एगार्। 
  • रकम वार्पसी : अगर कोर्इ रकम शर्ते पूरी न करने के कारण यार् किसी अन्य कारण से वार्पस करनी हो यार् वार्पस कर दी गर्इ हो, तो वह रकम संबंधित ग्रार्ंट के शेष में से घटार् कर दिखाइ जार्एगी।

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