चिंता का Means, परिभाषा And लक्षण

चिन्ता वस्तुत: Single दु:खद भावनात्मक स्थिति होती है। जिसके कारण व्यक्ति Single प्रकार के अनजाने भय से ग्रस्त रहता है, बेचैन And अप्रसन्न रहता है। चिन्ता वस्तुत: व्यक्ति को भविष्य में आने या होने वाली किसी भयावह समस्या के प्रति चेतावनी देने वाला संकेत होता है। हममें से प्रत्येक व्यक्ति अपनी दिन-प्रतिदिन की जिन्दगी में अलग-अलग ढंग से चिन्ता का अनुभव करता है। कुछ लोग छोटी सी समस्या को भी अत्यधिक तनावपूर्ण ढंग से लेते हैं और अत्यधिक चिन्ताग्रस्त हो जाते है। जबकि कुछ लोग जीवन की अत्यधिक कठिन परिस्थितियों को भी सहजता से लेते है और शान्त भाव से विवेकपूर्ण ढंग से समस्याओं का समाधान करते हैं।वस्तुत: चिन्ताग्रस्त होना किसी भी व्यक्ति के अपने दृष्टिकोण पर निर्भर करता है।

चिन्ता से न केवल हमारे दैनिक जीवन के क्रियाकलाप प्रभावित होते हैं, वरन् हमारे निष्पादन, बुद्धिमत्ता, सर्जनात्मकता इत्यादि भी नकारात्मक ढंग से प्रभावित होते है। यह कहा जा सकता है कि अत्यधिक चिन्ताग्रस्त होने के कारण व्यक्ति का व्यक्तित्व बुरी तरह प्रभावित हो पाता है तथा वह किसी भी कार्य को ठीक ढंग से करने में सक्षम नहीं हो पाता है।

परिभाषायें- 

चिन्ता को अनेक मनोवैज्ञानिकों ने अपने-अपने ढंग से परिभाषित Reseller है। जिसमें से कुछ प्रमुख निम्न है-

  1. ‘‘चिन्ता Single ऐसी भावनात्मक And दु:खद अवस्था होती है, जो व्यक्ति के अहं को आलंबित खतरा से सतर्क करता है, ताकि व्यक्ति वातावरण के साथ अनुकूली ढंग से व्यवहार कर सके।’’ 
  2. ‘‘प्रसन्नता अनुभूति के प्रति संभावित खतरे के कारण उत्पन्न अति सजगता की स्थिति ही चिन्ता कहलाती है।’’ 
  3. ‘‘चिन्ता Single ऐसी मनोदशा है, जिसकी पहचान चििन्ह्त नकारात्मक प्रभाव से, तनाव के शारीरिक लक्षणों लांभवित्य के प्रति भय से की जाती है।’’
  4. ‘‘चिन्ता का अवसाद से भी घनिष्ठ संबंध है।’’ 
  5. ‘‘चिन्ता And अवसाद दोनों ही तनाव के क्रमिक सांवेगिक प्रभाव है। अति गंभीर तनाव कालान्तर में चिन्ता में परिवर्तित हो जाता है तथा दीर्घ स्थायी चिन्ता अवसाद का Reseller ले लेती है।’’  

चिन्ता के प्रकार- 

 प्रसिद्ध मनोवैज्ञानिक सिगमण्ड फ्रायड ने चिन्ता के निम्न तीन प्रमुख प्रकार बताये हैं-

  1. वास्तविक चिन्ता 
  2. तंत्रिकातापी चिन्ता 
  3. नैतिक चिन्ता 

स्पीलबर्ग, 1985 ने चिन्ता के निम्न दो प्रकार बताये हैं-

  1. शीलगुण चिन्ता 
  2. परिस्थितिगत चिन्ता 

 चिन्ता के लक्षण- 

 चिन्ता के लक्षणों का विवेचन निम्न बिन्दुओं के अन्तर्गत Reseller जा सकता है-

  1. दैहिक लक्षण 
  2. सांवेगिक लक्षण 
  3. संज्ञानात्मक लक्षण 
  4. व्यवहारात्मक लक्षण

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *