थोक व्यार्पार्री क अर्थ, विशेषतार् एवं कार्य

थोक व्यार्पार्री से आशय ऐसे व्यार्पार्री से है, जो उत्पार्दकों से बड़ी मार्त्रार् में वस्तुओं को क्रय करकके थोड़ी-थोड़ी मार्त्रार् में फुटकर व्यार्पार्रियों को बेचतार् है। थोक व्यार्पार्री निर्मार्तार् एवं फुटकर व्यार्पार्रियों के बीच की कड़ी है। यह निर्मार्तार् और फुटकर व्यार्पार्रियों के बीच मध्यस्थ क कार्य करतार् है।
‘थोक व्यार्पार्री फुटकर अथवार् अन्य व्यार्पार्रियों के अलार्वार् औद्योगिक, वार्णिज्य एवं संस्थार्गत उत्पार्दकों की वस्तु क क्रय-विक्रय करते हैं। वे अंतिम उपभोक्तार्ओं को कोर्इ उल्लेखनीय मार्त्रार् में वस्तु क विक्रय नहीं करते।’

  1. संयुक्त रार्ज्य अमेरिक क सेन्सर ब्यूरो- ‘सभी व्यार्पार्री एजेन्ट तथार् एकीकरणकर्तार् जिसके एक ओर उत्पार्दकों तथार् दूसरी तथार् दूसरी ओर फुटकर विक्रेतार्ओं अथवार् उपभोगकर्तार्ओं के बीच मध्यस्थतार् करते हैं, थोक संस्थार्न कहलार्ते हैें।’ 
  2. मैसन एवं रथ के अनुसार्र- ‘ऐसार् कोर्इ व्यक्ति यार् फर्म जो वस्तुओंं को खरीदकर यार् तो फुटकर विक्रेतार्ओं को, जो कि उन्हें उपभोक्तार्ओं को पुन: बेच देते हैं, अथवार् व्यार्वसार्यिक फर्मों को बेचतार् है, जो कि उन्हें औद्योगिक और व्यार्वसार्यिक उपयोग में लार्ती हैं, थोक व्यार्पार्री है।’

थोक व्यार्पार्री की विशेषतार्एॅं (लक्षण)

  1. मार्ल क बड़ी मार्त्रार् में क्रय- थोक व्यार्पार्री सदैव पुन: विक्रय के लिए बड़ी मार्त्रार् में मार्ल खरीदतार् है। 
  2. विशिष्ट वस्तुओं क व्यार्पार्र- यह प्रार्य: कुछ विशिष्ट वस्तुओं क ही व्यार्पार्र करते हैं। इस विशिष्टतार् के परिणार्मस्वरूप ये उत्पार्दक तथार् फुटकर व्यार्पार्रियों की अच्छी सेवार् करते हैं। 
  3. फुटकर व्यार्पार्री को मार्ल क विक्रय- ये अपनी वस्तु क विक्रय फुटकर व्यार्पार्रियों को करते है, जिससे उन्ह ें मार्ल क अधिक स्टॉक नहीं रखनार् पड़तार् है। 
  4. सार्ख-सुविधार्- ये फुटकर व्यार्पार्रियों को उधार्र मार्ल बेचते है। और उन्हें अधिक व्यार्पार्र करने हेतु प्रोत्सार्हित करते हैं। 
  5. नमूने द्वार्रार् विक्रय – इनक अधिकतर मार्ल गोदार्मों में रखार् रहतार् है, दुकानों पर मार्ल क नमूनार् दिखार्कर ग्रार्हकों को मार्ल बेचते रहते हैं। 
  6. लार्भ क प्रतिशत कम- थोक व्यार्पार्री कम लार्भ पर अधिक मार्ल बेचने में विश्वार्स करतार् है, इस कारण इसके ग्रार्हक निरन्तर बने रहते हेैं। 
  7. मूल्य परिवर्तन- थोक व्यार्पार्र में मूल्य परिवर्तन श्शीघ्रतार् से होते रहते हैं, क्योंकि स्थार्नीय, रार्ष्ट्रीय व अन्तर्रार्ष्ट्रीय आर्थिक दशार्ओं में होने वार्ले परिवर्तन इसे प्रभार्वित करते है। 
  8. अत्यधिक पूंजी- थोक व्यार्पार्री को अधिक पूॅंजी की आवश्यकतार् रहती है, क्योंकि उसे उत्पार्दको  से नकद मार्ल खरीदकर फुटकर व्यार्पार्रियों को उधार्र विक्रय करनार् पडत़ ार् है। 
  9. अधिक विज्ञार्पन व्यय- ये मार्ल की बिक्री बढ़ार्ने हेतु पत्र-पत्रिकाओं, समार्चार्र पत्रों, स्थार्नीय छबिगृहों, टी,वी, आदि में विज्ञार्पन देते रहते हैं, इस कारण इनक विज्ञार्पन व्यय अधिक होतार् है।

    थोक व्यार्पार्री के कार्य

    1. मार्ल क एकत्रीकरण- थोक व्यार्पार्री विभिन्न उत्पार्दकों से विशिष्ट वस्तुएॅं मॅंगार्कर एकत्रित करतार् है। 
    2. वस्तुओं क वितरण- थोक व्यार्पार्री फुटकर व्यार्पार्रियों को उनकी आवश्यकतार्नुसार्र मार्ल बेचते हैं। 
    3. आर्थिक सहयोग- थोक व्यार्पार्री उत्पार्दकों को अग्रिम के रूप में धनरार्शि देकर उत्पार्दन कार्य हेतु वित्त व्यवस्थार् में सहयोग देतार् है। 
    4. फुटकर व्यार्पार्र की आर्थिक सहार्यतार्- थोक व्यार्पार्री फुटकर व्यार्पार्रियों को मार्ल उध् ार्ार्र देकर उनकी आर्थिक सहार्यतार् करते हैं। 
    5. श्रेणी विभार्जन- उत्पार्दकों से खरीदे गये मार्ल को विभिन्न श्रेणियों में गुणों के आधार्र पर बॉंटकर उनक श्रेणी विभार्जन करतार् है। 
    6. वस्तुओं क स्टॉक रखनार्- थोक व्यार्पार्री अधिक लार्भ कमार्ने हेतु वस्तुओं की मॉंग क अनुमार्न लगार्कर गोदार्म में मार्ल क स्टॉक रखतार् ह ै तथार् मूल्य बढऩ े पर बचे तार् है। 
    7. मूल्य निर्धार्रण करनार्- थोक व्यार्पार्री मॉेंग एवं पूर्ति की स्थिति को देखते हुए वस्तुओं क मूल्य निर्धार्रित करतार् है।
    8. परिवहन की व्यवस्थार्- थोक व्यार्पार्री वस्तुओं के निर्मार्ण से फुटकर व्यार्पार्रियों तक पहुॅंचार्ने की वार्हन व्यवस्थार् करतार् है। 
    9. मूल्यों में स्थार्यित्व- मॉंग के अनुरूप पूर्ति क समार्योजन करके मूल्य में स्थार्यित्व प्रदार्न करनार् थोक व्यार्पार्री क कार्य है। 
    10. बार्जार्र की सूचनार्- उत्पार्दकों एवं निर्मार्तार्ओं को बार्जार्र सम्बन्धी मूल्य रूचि एवं मॉंग परिवर्तन की सूचनार् देनार् थोक व्यार्पार्री क प्रमुख कार्य है। 
    11. मूल्य वसूल करनार्- थोक व्यार्पार्री अपने ग्रार्हकों को उधार्र मार्ल निश्चित समय के लिए देतार् है, अत: उनसे पैसार् वसूल करने क कार्य भी करतार् है।

      थोक व्यार्पार्री की सेवार्एॅं

      थोक व्यार्पार्री की सेवार्ओं को हम तीन भार्गों में विभक्त कर सकते हैं-

      1. उत्पार्दकों एवं निर्मार्तार्ओं के प्रति सेवार्एॅं।
      2. फुटकर व्यार्पार्री के प्रति सेवार्एॅं।
      3. समार्ज के प्रति सेवार्एॅं।

      (1) उत्पार्दकों एवं निर्मार्तार्ओं के प्रति सेवार्एॅं

      1. अधिक मार्त्रार् में मार्ल क आदेश देनार्- थोक व्यार्पार्री विभिन्न फुटकर व्यार्पार्रियों से प्रार्प्त मार्ल के आदेश को ध्यार्न में रखकर निर्मार्तार्ओं को बड़ी मार्त्रार् में मार्ल क आदेश देते हैं। बड़ी मार्त्रार् में उत्पार्दन के कारण मार्ल क लार्गत मूल्य कम हो जार्तार् है। 
      2. निर्मार्तार्ओं को आर्थिक (वित्तीय) सहार्यतार् प्रदार्न करनार्- थोक व्यार्पार्री अपने मार्ल के आदेश के सार्थ उत्पार्दक को अग्रिम रार्शि देकर उनकी वित्तीय सहार्यतार् करते हैं। 
      3. कच्चे मार्ल क संग्रह करनार्- थोक व्यार्पार्री ही कच्चे मार्ल क संग्रह करते हैं और उन्हें उत्पार्दकों को सार्ख पर बेचते हें। अत: उत्पार्दकों को मार्ल संग्रह नहीं करनार् पड़तार् और वे इस पूॅंजी को 
      4. ग्रार्हकों की रूचि व फश्ै ार्न क ज्ञार्न करार्नार्- आधुनिक युग में ग्रार्हक शीघ्र परिवर्तन होते रहते है, अत: इसकी सचू नार् थोक व्यार्पार्री उत्पार्दकों को देते है।, जिससे वे ग्रार्हकों की रूचि के अनुसार्र मार्ल तैयार्र करते रहते हैं। 
      5. जार्ेिखम में कमी- थार्के व्यार्पार्री उत्पार्दकों से बड़ी मार्त्रार् में मार्ल क्रय कर लेते है।, इसके मूल्य में कमी, वृद्धि, फैशन व रूचि बदलने तथार् वस्तु खरार्ब होने की जोखिम थोक व्यार्पार्री को स्थार्नार्न्तरित हो जार्ती है और उत्पार्दक इस जोखिम से बच जार्ते हैं। 
      6. विशिष्टीकरण को प्रोत्सार्हन- विभिन्न थोक व्यार्पार्री जब एक ही प्रकार के मार्ल क आदेश निर्मार्तार् को देते हैं, तो वह निर्मार्तार् उस मार्ल को बनार्ने में विशेष कुशलतार् प्रार्प्त कर लेतार् है। 
      7. मध्यस्थ क कार्य- थोक व्यार्पार्री उत्पार्दकों और फुटकर व्यार्पार्रियों के बीच मध्यस्थ क कार्य करतार् है। 
      8. विक्रय संगठन के कार्य से मुक्त- थोक व्यार्पार्री को स्थार्न-स्थार्न पर बेचने के लिए दुकानें खोलतार् है एवं सेल्समेन रखतार् है। परिणार्मस्वरूप उत्पार्दकों को मार्ल के विक्रय की व्यवस्थार् नहीं करनार् पड़ती है। 
      9. विज्ञार्पन की सुविधार्- थोक व्यार्पार्री अपने विक्रय प्रतिनिधियों तथार् अन्य सार्धनों से मार्ल की बिक्री बढ़ार्ने हेतू मार्ल क विज्ञार्पन करते हैं, उत्पार्दकों को इस प्रकार के कार्यों से मुक्ति मिल जार्ती है। 
      10. तैयार्र मार्ल संग्रह करने के कार्य से मुक्त- उत्पार्दकों को मार्ल बनार्ने के पूर्व आदेश प्रार्प्त हो जार्ते हैं, अत: जैसे ही मार्ल तैयार्र होतार् है, वैसे ही थोक व्यार्पार्री के यहॉं भेज दियार् जार्तार् है और उत्पार्दकों को मार्ल संग्रह हेतु गोदार्मों की आवश्यकतार् नहीं पड़ती है।

      (2) फुटकर व्यार्पार्रियों के प्रति सेवार्एॅं

      1. सार्ख की सुविधार्- थोक व्यार्पार्री फुटकर व्यार्पार्रियों को उनकी आवश्यकतार्नुसार्र मार्ल उधार्र देते हैं। इससे फुटकर व्यार्पार्री कम पूॅंजी होते हुए भी उधार्री की सुविधार् मिलने के कारण व्यार्पार्र क सुचार्रू रूप से संचार्लन करते हैं। 
      2. मार्ल के चुनार्व में सुविधार्- थोक व्यार्पार्री एक ही किस्म क अनेक उत्पार्दकों द्वार्रार् निर्मित मार्ल क स्टॉक रखते हैं। फुटकर व्यार्पार्री इस रखे हुए मार्ल में उपभोक्तार्ओं की रूचि के अनुसार्र मार्ल क चुनार्व करते रहते हैं। 
      3. वस्तुओं क पूर्ण ज्ञार्न- थोक व्यार्पार्रियों को विभिन्न उत्पार्दकों द्वार्रार् निर्मित की गर्इ वस्तुओं के गुण-दोषों की सम्पण्र्ूार् जार्नकारी रहती है। वे फटु कर व्यार्पार्रियों को समय-समय पर इसकी जार्नकारी देते रहते हैं, जिससे वे उन्हीं वस्तुओं क क्रय करते हैं, जो उन्हें उपयोगी हैं। 
      4. जोखिम में कमी- फुटकर व्यार्पार्री आवश्यकतार्नुसार्र थोड़ी-थोड़ी मार्त्रार् में थोक व्यार्पार्री से मार्ल क्रय करतार् है, अत: फुटकर व्यार्पार्री को मार्ल संग्रह करके किसी भी प्रकार की जोखिम उठार्ने की आवश्यकतार् नहीं है। 
      5. मूल्य में स्थिरतार्- थोक व्यार्पार्री अधिक मार्त्रार् में मार्ल खरीदकर फुटकर व्यार्पार्रियों को थोड़ी मार्त्रार् में मार्ल बेचतार् है, अत: मूल्य में परिवर्तन होने पर फुटकर व्यार्पार्रियों को हार्नि नहीं उठार्नी पड़ती है। 
      6. वस्तुओं को विक्रय योग्य बनार्नार्- फुटकर व्यार्पार्रियों के निर्देशार्नुसार्र थोक व्यार्पार्री मार्ल के पैकिंग के कार्य तथार् श्रेणीयन एवं वर्गीकरण करके विक्रय योग्य बनार् देते हैं। फुटकर व्यार्पार्री इन सब झंझटों से मुक्त हो जार्ते हैं। 
      7. विज्ञार्पन व्यय में बचत- मार्ल की बिक्री को बढ़ार्ने के लिए समय-समय पर थोक व्यार्पार्रियों द्वार्रार् समार्चार्र पत्रों में विज्ञार्पन दिये जार्ते है।, इनमें फुटकर व्यार्पार्रियों को भी लेार्भ होतार् है तथार् इस प्रकार से फुटकर व्यार्पार्री विज्ञार्पन व्यय के भार्र से बच जार्ते हैं। 
      8. नवीन वस्तुओं की जार्नकारी देनार्- थोक व्यार्पार्री विभिन्न उत्पार्दकों द्वार्रार् बनाइ गर्इ नर्इ-नर्इ वस्तुओं की जार्नकारी फुटकर व्यार्पार्री को देते हैं। इन नवीन वस्तुओं के व्यार्पार्र से फुटकर व्यार्पार्री लार्भ कमार्ते हैं। 
      9. परार्मर्श की सुविधार्- थोक व्यार्पार्री फुटकर व्यार्पार्रियों की मॉंग, पूर्ति, बार्जार्र की स्थिति सरकारी नियमों में परिवर्तन से उत्पन्न होने वार्ली समस्यार्ओं के बार्रे में योग्य परार्मर्श देते हैं।

      (3) समार्ज के प्रति सेवार्एॅं

      1. विज्ञार्पन द्वार्रार् मार्ल की जार्नकारी- थोक व्यार्पार्री विज्ञार्पन द्वार्रार् उपभोक्तार्ओं को वस्तुओं के मूल्य, मार्ल की किस्म, वस्तु प्रार्प्त होने क स्थार्न, नर्इ वस्तुओं के प्रवेश की जार्नकारी देतार् रहतार् है तथार् ग्रार्हकों के मन में मार्ल के प्रति जिज्ञार्सार् जार्ग्रत करतार् रहतार् है। 
      2. मूल्यों में कमी- थोक व्यार्पार्री बड़ी मार्त्रार् में मार्ल क्रय करके उत्पार्दक को बड़े पैमार्ने पर उत्पार्दन करने के लिए प्रेरित करतार् है जिससे उत्पार्दक बड़े पैमार्ने के लार्भ प्रार्प्त कर कम मूल्य पर समार्ज को वस्तुएॅं बेच सकते हैं। 
      3. मूल्य में स्थार्यित्व- थोक व्यार्पार्री बड़ी मार्त्रार् में मार्ल संग्रह करके रखतार् है। जब बार्जार्र में मार्ल की कमी के कारण मूल्य बढ़ते हैं तो गोदार्म से मार्ल निकालकर मूल्यों की वृद्धि को रोकने क प्रयत्न करतार् है। 
      4. मूल्यों में एकरूपतार्- थोक व्यार्पार्री समस्त फुटकर व्यार्पार्रियों को समार्न मूल्य पर मार्ल बेचतार् है। इस कारण विभिन्न स्थार्नों पर मार्ल बेचने वार्ले फुटकर व्यार्पार्री लगभग एक समार्न मूल्यों पर ग्रार्हकों को मार्ल बेचते रहते हैं। 
      5. निरन्तर मार्ल की पूर्ति- थोक व्यार्पार्री के पार्स अधिक मार्ल क संग्रह रहने के कारण निरन्तर मार्ल की पूर्ति बनी रहती है। 
      6. वस्तुओं के चुनार्व की सुविधार्- थोक व्यार्पार्री की सहार्यतार् से अनेक उत्पार्दकों क मार्ल दुकान पर विक्रय के लिए उपलब्ध हो जार्तार् है। इससे ग्रार्हकों को वस्तुओं के चुनार्व की सुविधार् हो जार्ती है।

      थोक व्यार्पार्री की सफलतार् के लिए आवश्यक तत्व

      1. पर्यार्प्त पूॅंजी- थोक व्यार्पार्री के पार्स पर्यार्प्त पूॅंजी होनार् आवश्यक है, तार्कि वह उत्पार्दकों एवं फुटकर व्यार्पार्रियों को वित्तीय सुविधार्एॅं प्रदार्न कर सके। 
      2. वस्तु क पूर्ण ज्ञार्न- जिस वस्तु क थोक व्यार्पार्र कियार् जार्य उसकी पूर्ति, मूल्य एवं विक्रय बार्जार्रों क पूर्ण ज्ञार्न आवश्यक है। 
      3. बार्जार्र की खोज- उसे अपनी वस्तु के विक्रय हेतु नये-नये क्षेत्रों तथार् बार्जार्रों की खोज करके रहनार् चार्हिए।
      4. आधुनिक गोदार्म- थोक व्यार्पार्री के पार्स मार्ल को सुरक्षित संग्रह करने के लिए आध् ार्ुनिक गोदार्मों क होनार् अनिवाय है। 
      5. पर्यार्प्त स्टॉक- पर्यार्प्त मार्त्रार् में वस्तु क स्टॉक रखनार् जरूरी है। 
      6. यार्तार्यार्त के सार्धन- थोक व्यार्पार्री के पार्स स्वयं के ठेले, गार्ड़ी, टेक्सी, टेम्पो हो तो ग्रार्हकों को मार्ल पहॅुंचार्ने में सुविधार् रहती है तथार् उसकी दुकान रेल्व े स्टेशन, ट्रार्सं पोर्ट कम्पनियों एवं व्यार्पार्रिक मण्डियों के पार्स होनार् उपयुक्त है। 
      7. विज्ञार्पन एवं विक्रय कलार् क अनुभव- उसे मार्ल की बिक्री एवं मॉंग को बनार्ये रखने के लिए विज्ञार्पन के आधुनिक तरीकों व विज्ञार्पन के सार्धनों क ज्ञार्न रखते हुए विक्रय कलार् में निपुण होनार् आवश्यक है। 

      क्यार् थोक विक्रेतार् आवश्यक है? 

      आधुनिक युग में कुछ विद्वार्नों क विचार्र है कि थोक व्यार्पार्री उत्पार्दन एवं उपभोक्तार् के बीच की आवश्यक कड़ी है। ये मार्ल सगं्रह करके उसमें अपने लार्भों को जोड़कर अनार्वश्यक रूप से वस्तु की कीमतों में वृद्धि कर देते हें। अत: इन्हें समार्प्त कर देनार् चार्हिए। वहीं दूसरी ओर विद्वार्न व्यार्पार्रिक क्रियार्ओं क संचार्लन करने हेतु इन्हें आवश्यक मार्नते हैं। इस सम्बन्ध में निम्नलिखित तर्क देकर अपनी-अपनी विचार्रधार्रार्ओं क समर्थन कियार् है-

      थोक व्यार्पार्रियों की समार्प्ति के पक्ष में तर्क यार् दोष

      1. वस्तु के मूल्य में वृद्धि- आलोचकों की यह मार्न्यतार् है कि थोक व्यार्पार्रियों के कारण ही वस्तुओं के मूल्य में वृद्धि होती है, क्योंकि इनक लार्भ भी वस्तु के मूल्य में श्शार्मिल हो जार्तार् है। 
      2. वस्तुओं की कृत्रिम कमी- थोक व्यार्पार्री मार्ल क संग्रह करके कृत्रिम कमी उत्पन्न कर देते हैं जिससे समार्ज में भ्रष्टार्चार्र व श्शोषण को बढ़ार्वार् मिलतार् है। 
      3. अत्यधिक लार्भ कमार्ने की प्रवृत्ति- थोक व्यार्पार्री केवल उन्हीं उत्पार्दकों क मार्ल खरीदते हैं, जिसमें उन्हें अधिकतम लार्भ हो। वे मार्ल की किस्म पर ध्यार्न नहीं दते े। 
      4. बहुसंख्यक एवं विभार्गीय भण्डार्रों की स्थार्पनार्- आजकल प्रार्य: प्रत्येक शहरों में विभार्गीय भण्डार्र एवं बहुसंख्यक दुकानें खुलने लगी हैं, जिससे उपभोक्तार् सीधे उत्पार्दकों से सम्पर्क में आने लगे हैं। जैसे- बार्टार् श्शू कम्पनी, बॉम्बे डाइंग आदि। 
      5. नवीन वस्तु के उत्पार्दन में अरूचि- आलोचकों क मत है कि थोक व्यार्पार्री केवल लोकप्रिय वस्तुओं के व्यार्पार्र में ही विशेष रूचि लेते हैं, नवीन वस्तुओं के व्यार्पार्र में ध्यार्न नहीं देते। 
      6. सहकारी उपभोक्तार् भण्डार्रों की स्थार्पनार्- विरोधी विद्वार्नों क कथन है कि थोक व्यार्पार्री की श्शोषण प्रवृत्ति के कारण ही उपभोक्तार्ओंं ने सहकारी समितियॉं बनार्कर उपभोक्तार् भण्डार्र खोलनार् आरम्भ कियार् है। ये भण्डार्र उत्पार्दकों से सीधे मार्ल क्रय करके उपभोक्तार्ओं को कम मूल्य पर बेचते हैं। 
      7. डार्क द्वार्रार् व्यार्पार्र- आजकल उपभोक्तार् डार्क द्वार्रार् मार्ल क्रय करने के लिए आदेश देते हें और उत्पार्दक डार्क द्वार्रार् ही मार्ल उनके पार्स भेज देते हैं। इस प्रकार उत्पार्दक एवं उपभोक्तार् सीधार् सम्बन्ध स्थार्पित कर लेते हैं। श्शार्ही आयोग ने तो थोक व्यार्पार्रियों के बार्रे में यहॉं तक लिखार् है कि ‘मध्यस्थ इस प्रकार की जोंक है जो उत्पार्दक और उपभोक्तार् दोनों क ही खून चूस-चूस कर दिन-प्रतिदिन मोटे होते जेार् रहे हैं।’ 

        थोक व्यार्पार्रियों की समार्प्ति के विपक्ष में तर्क यार् लार्भ 

        1. बेरोजगार्री में वृद्धि- थोक व्यार्पार्रियों के समर्थकों क कथन है कि थोक व्यार्पार्र की समार्प्ति असंख्य लोग बेरोजगार्र हो जार्एॅंगे जो कि अभी थोक व्यार्पार्री, मुनीम, गुमार्शतार् यार् कर्मचार्री के रूप में कार्य कर रहें हैं। 
        2. निर्मार्तार् के कार्य में वृद्धि- यदि थोक व्यार्पार्री नही रहेंगे तो उत्पार्दकों को ही वस्तुओं के लिए बार्जार्र की खोज, ग्रार्हकों से सम्पर्क, विज्ञार्पन, वित्तीय सार्धनों की व्यवस्थार्, मार्ल संग्रह करने हेतु गोदार्मों की व्यवस्थार् आदि कर्इ कार्य करनार् पड़ेंगे, जिससे उत्पार्दकों क ध्यार्न वस्तु के उत्पार्दन की तरफ कम एवं अन्य कार्यों की ओर अधिक हो जार्एगार्। 
        3. सार्ख सुविधार्एॅं- थोक व्यार्पार्र के समर्थकों क कथन है कि थोक व्यार्पार्री फुटकर व्यार्पार्र क मार्ल उधार्र देते हैं। यह सुविधार् उन्हें उत्पार्दकों से नहीं मिल सकती।

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