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ग्राम पंचायत का गठन, चुनाव प्रणाली, कार्य, And शक्तियां 0

ग्राम पंचायत का गठन, चुनाव प्रणाली, कार्य, And शक्तियां

संविधान के 73वें संशोधन अधिनियम द्वारा पंचायती राज संस्थाओं को मजबूती प्रदान की गर्इ है। इस अधिनियम के द्वारा स्थानीय स्वशासन व विकास की इकार्इयों को Single पहचान मिली है। त्रिस्तरीय पंचायत व्यवस्था में...

क्षेत्र पंचायत का गठन, चुनाव प्रणाली, अधिकार And शक्तियां 0

क्षेत्र पंचायत का गठन, चुनाव प्रणाली, अधिकार And शक्तियां

तिहत्तरवें संविधान संषोधन के अन्र्तगत नर्इ पंचायत राज व्यवस्था में पंचायतें तीन स्तरों पर गठित की गर्इ है। विकेन्द्रीकरण की नीति ही यह कहती है कि सत्ता, शक्ति व संसाधनों का बंटवारा हर स्तर...

जिला पंचायत का गठन, चुनाव प्रणाली, अधिकार, And शक्तियां 0

जिला पंचायत का गठन, चुनाव प्रणाली, अधिकार, And शक्तियां

तिहत्तरवें संविधान संषोधन के अन्र्तगत त्रिस्तरीय पंचायत व्यवस्था में जिला स्तर पर जिला पंचायत के गठन का प्रावधान Reseller गया है। प्रत्येक जिले के लिए Single जिला पंचायत होगी जिसका नाम उस जिले के...

पंचायत की समितियाँ And महत्व 0

पंचायत की समितियाँ And महत्व

पंचायती राज संस्थाओं को ग्रामीण समुदाय के आर्थिक विकास व सामाजिक न्याय की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी प्रदान की गयी है। इन जिम्मेदारियों को पूर्ण करने हेतु पंचायत को 29 विषयों से सम्बन्धित विभिन्न कार्य सौंपे...

74वां संविधान संशोधन अधिनियम- नगर निकायों के संदर्भ में 0

74वां संविधान संशोधन अधिनियम- नगर निकायों के संदर्भ में

सत्ता विकेन्द्रीकरण की दिशा में संविधान का 73वां और 74वां संविधान संशोधन Single महत्वपूर्ण और निर्णायक कदम है। 74वां संविधान संशोधन नगर निकायों में सत्ता विकेन्द्रीकरण का Single मजबूत आधार है। अत: इस अध्याय...

नगर-निकाय के कार्य And शक्तियां 0

नगर-निकाय के कार्य And शक्तियां

किसी भी संगठन या संस्था के आस्तित्व का कोर्इ औचित्य नहीं है जब तक कि उसे उसके गठन व स्वReseller के अनुReseller कार्यों व शक्तियां प्रदान नहीं की जाती। बिना कार्यों व जिम्मेदारियों के...

शहरी विकास की योजनाएं 0

शहरी विकास की योजनाएं

1992 में संविधान के 74वें संशोधन के माध्मय से पुन: नगरीय क्षेत्रों में स्थानीय लोगों को निर्णय लेने के स्तर पर सक्रिय व प्रभावशाली भागीदारी बनाने का प्रयास Reseller गया है। इसके माध्यम से...

विधिशास्त्र तथा विधिक सिद्धान्त का Means, परिभाषा 0

विधिशास्त्र तथा विधिक सिद्धान्त का Means, परिभाषा

मनुष्य Single सामाजिक प्राणी है तथा समूह में रहना उसकी नैसर्गिक प्रवृत्ति है। यह नैसर्गिक प्रवृत्ति मनुष्य को अन्य मनुष्यों से सम्बन्ध रखने को बाध्य करती है। सामाजिक जीवन इन्हीं संबंधों पर आधारित है।...

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सामाजिक समूह कार्य का Means, परिभाषा

जहॉ सामाजिकता ने मनुष्य को अस्तित्व प्रदान Reseller है वही पर दरिद्रता, निर्धनता, बेरोजगारी, स्वास्थ, विचलन, सामायोजन सम्बन्धी समस्याओं का विकास हुआ। जिसके फलस्वReseller समाज अनेक प्रकार के Saftyत्मक कदम उठायें। सामाजिक सामूहिक सेवाकार्य...

श्रम की अवधारणा And विशेषताएं 0

श्रम की अवधारणा And विशेषताएं

उद्योग And श्रम परस्पर सम्बन्धित हैं। बिना श्रम के उद्योग की कल्पना नहीं की जा सकती। यह श्रम शारीरिक And मानसिक दोनों तरह का होता था। First उद्योग में शारीरिक श्रम को महत्ता प्राप्त...