प्रबन्ध विकास
प्रबन्ध विकास, वृद्धि एंव विकास की Single व्यवस्थित प्रक्रिया है, जिसके द्वारा प्रबन्धक अपनी प्रबन्ध करने की योग्यताओं का विकास करता है। यह केवल शिक्षण के औपचारिक पाठ्यक्रम में सहभागिता का ही नहीं,बल्कि वास्तविक कार्य...
प्रबन्ध विकास, वृद्धि एंव विकास की Single व्यवस्थित प्रक्रिया है, जिसके द्वारा प्रबन्धक अपनी प्रबन्ध करने की योग्यताओं का विकास करता है। यह केवल शिक्षण के औपचारिक पाठ्यक्रम में सहभागिता का ही नहीं,बल्कि वास्तविक कार्य...
अंगुलियों या किसी कृन्द (तीखी) वस्तु द्वारा किसी बिन्दु पर उपचार देने की पद्धति को Single्यूप्रेशर कहते है, इसमें किसी विशेष स्थान पर पे्रशर देकर चिकित्सा की जाती है, प्रेशर देने से अवरूद्ध चेतना...
Single्यूप्रेशर चिकित्सा पद्धति का मुख्य सिद्धान्त यह है कि शरीर के विभिन्न भागो में अवरूद चेतना का संचार करना प्राण व रक्त के प्रवाह में गति लाना, दाब बिन्दुओं में प्रेशर देकर रोगी को...
Single्युप्रेशर में शरीर के कुछ बिन्दुओं पर दबाव देकर उपचार करते हैं। इन बिन्दुओं को Acupoints कहते हैं। इन्हीं बिन्दुओं पर जब सुर्इ डालकर उपचार Reseller जाता है तो उसे Acupuncture कहते है। इन्हीं...
Single्युपंक्चर विज्ञान Single निश्चित नियमों And सिद्धान्तों पर आधारित है। इनमें First सिद्धान्त है – यिन-यांग की चिकित्सा का। 1. यिन-यांग सिद्धान्त – चायनीज Single्युपंक्चर के According सम्पूर्ण बह्माण्ड का संतुलन स्थूल रुप से...
रेकी चिकित्सा को पुनर्जीवित करने का श्रेय जापान के डॉ. मेकाओ उशुर्इ को हैं, जिन्होंने 19वीं शताब्दी के मध्य में इस चिकित्सा को नवजीवन प्रदान Reseller। डॉ. उशर्इ ने कैसे रेकी का पुनरूत्थान Reseller...
रेकी चिकित्सा प्राण उर्जा के सिद्धांत पर आधारित है। इस चिकित्सा पद्धति में रेकी चिकित्सक, पीड़ित या रोगी व्यक्ति में प्राणऊर्जा को प्रक्षेपित करता है। रेकी चिकित्सा के According भौतिक शरीर के अतिरिक्त हमारा...
जो अत्यप्राणचिकित्सा उपचार की Single अत्यन्त महत्त्वपूर्ण विधि है, न्त प्राचीनकाल से चली आ रही है। इसमें दृश्य या भौतिक शरीर का उपचार करने के लिये प्राण उर्जा, जिसे ओजस्वी उर्जा भी कहा जाता है,...
प्रार्थना का Means – प्रार्थना मनुष्य की जन्मजात सहज प्रवृत्ति है। संस्कृत Word प्रार्थना तथा आंग्ल (इंग्लिश) भाशा के Prayer Word, इन दोनों में Means का दृष्टि से पूरी तरह से समानता है –...
‘यज्ञ’ का भावार्थ-परमार्थ And उदार-कृत्य है। ‘यज्ञ’ Word पाणिनीसूत्र ‘‘यजयाचयतविच उप्रक्चरक्षो नड़्’’ में नड़् प्रत्यय लगाने पर बनता है Meansात् यज्ञ Word ‘यज्’ धातु से बना है, यज् धातु के तीन Means हैं- देवपूजन,...