शैशवार्वस्थार् में शार्रीरिक विकास

सार्मार्न्यतार्: मनोवैज्ञार्निकों ने शैशवार्वस्थार् क अर्थ उस अवस्थार् से लगार्यार् जो औसतन जन्म से 5-6 वर्ष तक चलती है। एडलर के अनुसार्र “शैशवार्वस्थार् द्वार्रार् जीवन क पूरार् क्रम नििश्न्चत होतार् है। शैशवार्वस्थार् में विशेषकर जन्म से 3 वर्ष तक की आयु होने के दौरार्न शार्रीरिक विकास की गति अत्यंत तीव्र रहती है। शैशवार्वस्थार् में होने वार्ले शार्रीरिक विकास से सम्बन्धित कुछ महत्वपूर्ण तथ्य अधोलिखित हैं।

1. कोमल अंग – जन्म के पश्चार्त शिशु आरै उसके अगं कामे ल एवं निबर्ल होते है। मार्तार्-पितार् पर वह सभी आवश्यकतार्ओं की पूर्ति हेतु आश्रित रहतार् है।

2. लम्बार्ई व भार्र – जन्म के समय शिशु की लम्बार्ई लगभग 51 सेमी0 होती है। प्रार्य: बार्लक जन्म के समय बार्लिकाओं से लगभग आधार् सेमीण् अधिक लम्बे होते है। शैशवार्वस्थार् के विभिन्न वर्षो में बार्लक-बार्लिक की लम्बार्ई (सेमी0 में) निम्नार्ंकित तार्लिक में दर्शार्ई गयी है।

तार्लिका

शैशवार्वस्थार् में बार्लक एवं बार्लिकाओं की औसत लम्बाइ (सेमी0)

आयु जन्म के 3 मार्ह 6 मार्ह 9 मार्ह 1 वर्ष 2 वर्ष 3 वर्ष 4 वर्ष 5 वर्ष 6 वर्ष
बार्लक 51-5 62-7 64-9 69-5 73-9 81-6 88-8 96-0 102-1 108-5
बार्लिक 51-0 60-9 64-4 66-7 72-5 80-1 87-5 94-5 101-4 107-4

प्रार्रम्भ में शरीर क ढार्ँचार् लगभग 17 से 22 इंच तक लम्बार् होतार् है और 5-6 वर्ष तक यह लम्बार्ई 3 फुट हो जार्ती है इसी प्रकार से भार्र क विकास होतार् है। शैश्वार्वस्थार् में भार्र (किलोग्रार्म) की बढ़ोत्तरी निम्नलिखित तार्लिक द्वार्रार् दर्शार्ई गयी है।

तार्लिका

शैशवार्वस्थार् में बार्लक एवं बार्लिकाओं की औसत भार्र (किग्रार्0)

आयु जन्म के 3 मार्ह 6 मार्ह 9 मार्ह 1 वर्ष 2 वर्ष 3 वर्ष 4 वर्ष 5 वर्ष 6 वर्ष
बार्लक 3-2 5-7 6-9 8-4 7-9 10-1 11-8 13-5 14-8 16-3
बार्लिक 3-0 6-2 6-6 6-6 7-8 9-6 11-2 12-9 14-5 16-0

3. मस्तिष्क तथार् सिर- नवजार्त क सिर उसके शरीर की अपेक्षार् बडाऱ् होतार् है। जन्म के समय सिर की लम्बार्ई कुल शरीर की लगभग एक चौथार्ई होती है। मस्तिष्क क भार्र जन्म के समय लगभग 300-350 ग्रार्म होतार् है।

4. दार्ँत- जन्म के समय शिशु के दार्ँत नही हार्ते है लगभग छठे यार् सार्तवे मार्ह में अस्थार्यी दूध के दार्ँत निकलने लगते है। एक वर्ष की आयु तक दूध के सभी दार्ँत निकल आते है

5. हड्डियार्ँ – कई मनार्वेज्ञैार्निको ने यह स्पष्ट रूप से कहार् है कि शिशु की बनार्वट और उसकी हड्डियों के परिपक्व होने की गति के मध्य एक सम्बन्ध होतार् है। जिनक शरीर अधिक मजबूत और गठीलार् होतार् है, उनके शरीर की हड्डियों में परिपवक्तार् तेजी से आती है।

6. स्नार्यु विकास- स्नार्यु मण्डल तथार् स्नार्यकु ने दार््रें क विकास भी 3 वर्ष तक शीघ्रतार् से होतार् है।

7. मार्ँसपेशियार्ँ – नवजार्त शिशु की मार्ँसपेिशयो क भार्र उसके शरीर के कुल भार्र क लगभग 23 प्रतिशत होतार् है। मार्ँसपेशियों के प्रतिशत भार्र में धीरे-धीरे बढ़ोत्तरी होती जार्ती है।

8. अन्य अंग – शिशु की भुजार्ओं तथार् टार्ंगो क विकास भी तीव्र गति से होतार् है। जन्म के समय शिशु के हृदय की धड़कन अनियमित होती है। कभी वह तीव्र हो जार्ती है तथार् कभी धीमी हो जार्ती है। जैसे-जैसे हृदय बड़ार् होतार् है वैसे-वैसे धड़कन में स्थिरतार् आ जार्ती है।

9. समस्त प्रणार्लियों क विकास – जन्म के पश्चार्त शरीर की समस्त प्रणार्लियों में विकास होतार् है, मार्ँसपेशियार्ं, स्नार्युतन्त्र, रक्तसंचार्र-क्रियार् आदि क उत्तरोतर विकास होतार् है।

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