शार्हजहार्ँ क जीवन परिचय

शार्हजहार्ं क जन्म 5 फरवरी 1592 र्इ. को हुआ । शार्हजहार्ं क शार्सन काल मुगल सार्म्रार्ज्य की समृद्धि क काल रहार् इतिहार्सकारों ने शार्हजहार्ं को महार्न भवन निर्मार्तार् मार्नते हैं ।

सार्हित्य सार्ंस्कृतिक उन्नति-

शार्हजहार्ं मुगलकालीन सार्हित्य व संस्कृति के विकास के लिए सर्वोत्कृष्ट मार्नार् जार्तार् है । इनके शार्सन काल में भवन निर्मार्ण कलार्, चित्रकलार्, संगीत, सार्हित्य आदि क खुब विकास हुआ । शार्हजहार्ं के दरबार्र में कवियों, लेखकों, दर्शार्निकों, शिल्पज्ञों, कलार्कारों, चित्रकारों, संगीतज्ञों आदि के रूप में विद्यमार्न रहते थे । वार्स्तुकलार् और चित्रकलार् की समृद्धि के कारण उसक शार्सन चित्रकाल तक स्वर्णयुग के रूप में स्मरणीय रहेगार् । शार्हजहार्ं के दरबार्र की शार्न शौकत तथार् उसके द्वार्रार् निर्मित भव्य भवन और रार्जप्रसार्द उसके शार्सन काल को अत्यन्त ही गौरवपूर्ण और ऐश्वर्यशार्ली बनार् दियार् है । शार्हजहार्ं द्वार्रार् निर्मित दिल्ली क लार्लकिलार् तथार् उसके दीवार्न ए आम दिल्ली की जार्मार् मस्जिद आगरार् दुर्ग की मोती मस्जिद और तार्जमहल लार्हौर और अजमेर के अलंकृत रार्जप्रार्सार्द है ।

सार्हित्य इस काल में ‘‘पार्ठशार्हार्नार्मार्’’ इनार्यत खार्ं के शार्हजहार्ंनार्मार् अमीन आजबीनी के एक अन्य पार्दशार्हनार्म और मुहम्मद सार्हिल ने आल्मे सार्हिल आदि ग्रंथों क लेखन कियार् । सफीनत ए औलियार् और सकीनत उल औलियार् ग्रंथों क लेखन कियार् ।

संगीत- 

शार्हजहार्ं संगीत के भी शौकिन थे सप्तार्ह में एक दिन संगीत क कार्यक्रम होतार् थार् ।

चित्रकलार्- शार्हजहार्ं की रूचि चित्रकलार् में नहीं थी । उसने चित्रकारों को न तो संरक्षण दियार् और न ही चित्रकलार् को प्रोत्सार्हन दियार् ।

शार्हजहार्ं द्वार्रार् निर्मित भवन-

शार्हजहार्ं वार्स्तकुलार् क महार्न पार्रखी शार्सक थार् । वह इतिहार्स में भवन निर्मार्तार् के नार्म से प्रसिद्ध है । उसने सुन्दर भवनों क निर्मार्ण कर शहरों की सुन्दरतार् बढ़ार्ने क कार्य कियार् । शार्हजहार्ं कालीन निर्मित इमार्रतें मुख्यत: संगमरमर से बनार्यी गयी हैं । मुख्य इमार्रतों में-

  1. तार्जमहल- विश्व के सुन्दरतम इमार्रतों में एक जिसे शार्हजहार्ं ने अपनी बेगम मुमतार्जमहल की यार्द में 9 करोड़ रूपये की लार्गत से 22 वर्षो में निर्मार्ण कार्य पूर्ण करवार्यार् थार्। यह सफदे सगं मरमर के पत्थरों से बनार् है । संगमरमर पर बार्रीक खुदाइ कर उसमें सुन्दर, पहलदार्र, झंझरियार्ं बनार्कर, व बेलबूटे कीमती पत्थरों की जुड़ाइ से महार्न महार्कृति क निर्मार्ण कियार् गयार् है । तार्जमहन के ऊँचे-ऊँचे दरवार्जों पर कुरार्न की आयतें खुदी हैं । सितम्बर अक्टूबर के शरद पूर्णिमार् में यहार्ं कलार्-प्रेमियों क मेलार् लगतार् है, क्यों चन्द्रमार् की किरणों क अद्वितीय नजार्रार् तब ही देखने को मिलतार् है 
  2. दिवार्ने आम- जहार्ं रार्जदरबार्र लगतार् थार् । सम्रार्ट व वजीर रार्ज्य कार्य निपटार्ते थे। इसे शार्हजहार्ं ने 1628 र्इै. में आगरार् में बनवार्यार् थार् ।
  3. तख्त-ए-तार्ऊस- यह सोने व रत्नों से जड़ार् मयरू सिंहार्सन थार् । यह 12 खम्बों पर आधार्रित थार् । बहुमूल्य रत्नों से जड़े इस सिंहार्सन में तब 1 करोड़ रूपये खर्च किये गये थे। 
  4. मच्छी भवन- लार्ल पत्थर से बनार् आयतार्कार इमार्रत 70 गज लम्बार् तथार् 53 गज चौड़ार् है ।
  5. दिवार्ने खार्स- सफेद संगमरमर से बनी आयतार्कार इमार्रत है, खदुाइ नक्काशी क काम सुन्दर ढंग से कियार् गयार् है । दीवार्ने खार्स के चबूतरे में शार्हजहार्ं शार्म के समय बैठतार् थार्। 
  6. शीश महल- इस सुन्दर इमार्रत के दरवार्जों में शीशे जडे़ हुए हैं ।
  7. खार्स महल- यह महल केवल सम्रार्ट व रार्नी के निवार्स के लिए थार् । महल की दीवार्रों में शार्हजहार्ं के पूर्वजों के चित्र व अभिलेख लगे थे ।
  8. अंगूरी बार्ग- हरम की महिलार्ओं के लिए बनार्यार् गयार् थार्, इसमें एक सुन्दर बगीचार् भी थार् ।
  9. मोती मस्जिद- इसे शार्हजहार्ं ने 1645-46 र्इ. में बनवार्यार् थार् । यह उसकी सुन्दर कलार्कृतियों में से एक थार् ।
  10. जार्मार् मस्जिद- इसक निर्मार्ण शार्हजहार्ं की पुत्री जहार्आंरार् बेगम ने करवार्यार् थार् 103 फीट लम्बी व 100 फीट चौड़ी । यह मुगलकालीन स्थार्पत्य क एक सुन्दर नमूनार् है ।
  11. दिल्ली क लार्ल किलार्- यमुनार् किनार्रे 3200 फटु लम्बार् 600 फुट चौड़ी र्इमार्रत है। मुख्यद्वार्र कलार् की दृष्टि से अनुपम है । इस किले में स्थित रंग महल, मोती महल, प्रसिद्ध भवन हैं, जिसके स्थार्पत्य कलार् की प्रशंशार् अनेक इतिहार्सकारों ने की है ।

शार्हजहार्ं के चार्र पुत्र थे । दार्रार् शिकोह, शुजार्शार्ह, औरंगजेब, मुरार्द । तीन पुत्रियार्ं थी । जहार्ंआरार्, रोशनआरार्, गौहरआरार् ।

  1. दार्रार्शिकोह- शार्हजहार्ं क सबसे बड़ार् पुत्र दार्रार् सिकोह सुशिक्षित, सुसस्ं कृत और विद्यार्नुरार्गी व्यक्ति थार् । वह फार्रसी, संस्कृत, तुर्की और हिन्दी के ज्ञार्तार् थे । शार्हजहार्ं उसे सर्वोच्च मनसब (60,000 जार्त) के स्वार्मी बनार्यार् थार् । प्रशार्सक के गुण विद्यमार्न होने के कारण शार्हजहार्ं द्वार्रार् शिकोह से सलार्ह लेतार् थार्। दार्रार् को विभिन्न प्रार्न्तों क गवर्नर नियुक्त कियार् थार् फिर भी वह अधिकतर रार्जधार्नी में रहार् करते थे ।
  2. धामिक दृष्टि से वह बड़े उदार्र व धामिक प्रवृत्ति के थे । 
  3. शुजार्शार्ह- शार्हजहार्ं क दुसरार् पुत्र वीर सार्हसी थार् जो आगे चलकर आलसी व विलार्सी हो गये । वह कट्टर सुन्नी मुसलमार्न थार् । बंगार्ल क सुबेदार्र थार् ।
  4. औरंगजेब- औरंगजेब दक्षिण क सुबेदार्र थार्, जो शार्हजहार्ं क सर्वार्धिक योग्य पुत्र  थार् । वह एक सफल सेनार्पति कुशल प्रबन्धक एवं संगठक तथार् कूटनीति में चतुर थार् । वह अपनी योजनार्ओं को सफल होने तक गुप्त रखतार् थार् । युद्धनीति में पटुतार् थार् । धामिक कट्टरतार् के कारण सुन्नी मुसलमार्न उसे आदर की दृष्टि से देखते थे ।
  5. मुरार्द- वह गुजरार्त क सुबेदार्र, मिलनसार्र, उदार् स्वभार्व के थे । रार्जनीतिक चतरु ाइ उसमें नहीं थी । वह शीघ्र ही बार्तों में आ जार्ने वार्लार् उदार्र स्वभार्व के व्यक्ति थे । उसमें वीरतार् व सहसीपन नहीं थार् । उसमें शरार्ब पीने की आदत थी ।

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