शहरी विकास की योजनार्एं

1992 में संविधार्न के 74वें संशोधन के मार्ध्मय से पुन: नगरीय क्षेत्रों में स्थार्नीय लोगों को निर्णय लेने के स्तर पर सक्रिय व प्रभार्वशार्ली भार्गीदार्री बनार्ने क प्रयार्स कियार् गयार् है। इसके मार्ध्यम से नगर निकायों (नगर निगम, नगर पलिका, नगर पंचार्यतों) में शहरी लोगों की भार्गीदार्री बढ़ार्ने के सार्थ-सार्थ यह भी स्पष्ट कर दियार् गयार् है कि अब शहरों, नगरों, मोहल्लों की भलाइ उनके हित व विकास संबंधी मुद्दों पर निर्णय लेने अधिकार केवल सरकार के हार्थ में नहीं है। 74वें संशोधन ने आम जन समुदार्य की भार्गीदार्री को स्थार्नीय स्वशार्सन में सुनिश्चित कियार् है। नगरीय निकायों को मिले अधिकारों एवं दार्यित्वों में सबसे महत्वपूर्ण बार्त यह रही कि योजनार्ओं के निमाण एवं क्रियार्न्वयन क दार्यित्व नगरीय निकायों को होगार्, यही नहीं केन्द्र एवं रार्ज्य की योजनार्ओं क क्रियार्न्वयन भी नगर निकायों के मार्ध्यम से कियार् जार्येगार्। यहार्ं इस बार्त को भी सुनिश्चित कियार् गयार् है कि योजनार् निमाण प्रक्रियार् नीचे से ऊपर की ओर चले। जिससे आम जन समुदार्य अपनी प्रार्थमिकतार् के अनुसार्र योजनार्ओं के निमाण व क्रियार्न्वयन में अपनी प्रभार्वशार्ली भार्गीदार्री निभार् सके।

नगरों की उचित व्यवस्थार् व नार्गरिकों के सार्मार्जिक व आर्थिक विकास हेतु सरकार द्वार्रार् कर्इ प्रकार की योजनार्ओं क निर्मार्ण व क्रियार्न्वयन कियार् जार् रहार् है। नगर विकास की इन योजनार्ओं की जार्नकारियार्ं आम नार्गरिक को होनी अत्यधिक आवश्यक है तभी वह इन योजनार्ओं में अपनी भार्गीदार्री सुनिश्चित कर सकेगार् ओैर योजनार्ओं क लार्भ सही व्यक्ति को मिल पार्येगार्।

स्वर्ण जयन्ती शहरी विकास योजनार् भार्रत सरकार द्वार्रार् संचार्लित योजनार् है जिसे नेहरू रोजगार्र योजनार्, यू बी.एस.पी तथार् पी.एम.आर्इ.यू.पी. आदि योजनार्ओं को एकीकृत कर उसमें कुछ नये कार्यकलार्पों को शार्मिल करते हुए तैयार्र की गर्इ है। यह योजनार् एक बहुआयार्मी योजनार् है जिसक उद्देश्य नगरीय क्षेत्र के निर्धन बेरोजगार्र अथवार् आंशिक बेरोजगार्र व्यक्तियों को स्वरोजगार्र उद्यम अथवार् मजदूरी रोजगार्र के मार्ध्यम से रोजगार्र उपलब्ध करार्नार् है। रोजगार्र उपलब्ध करार्ने के सार्थ-सार्थ इस योजनार् के मार्ध्यम से सार्मुदार्यिक सम्पत्तियों क सृजन भी कियार् जार्तार् है। स्वर्ण जयन्ती शहरी विकास योजनार् जन सहभार्गितार् के सिद्धार्न्त पर आधार्रित है जिसके अन्र्तगत समुदार्य क सशक्तिकरण कर उन्हें नियोजन और अनुश्रवण की प्रक्रियार् से जोड़नार् प्रार्थमिकतार् से रखार् गयार् है। इस योजनार् में सार्मुदार्यिक विकास समिति (सी.डी.एस) को केन्द्र बिन्दु मार्नकर इसके मार्ध्यम से लार्भाथियों क चयन, परियोजनार् क चयन, प्राथनार्-पत्रों को तैयार्र करनार् तथार् वसूली क अनुसरण कियार् जार् रहार् है।

स्वर्ण जयन्ती शहरी विकास योजनार् के अन्तर्गत पूर्ण एवं आंशिक रूप से बेरोजगार्र व्यक्ति पार्त्र है। विशेष रूप से निर्धन महिलार्ओं के समग्र एवं सर्वार्गींण विकास एवं उनके सुदृढ़ीकरण करने हेतु समार्जिक सशक्तीकरण एवं महिलार् समूहों की सहभार्गितार् को प्रोत्सार्हित करते हुए महिलार्ओं को लार्भार्न्वित कियार् जार्तार् है, सार्थ ही अनुसूचित जार्ति, अनुसूचित जनजार्ति तथार् विकलार्ंगों के विकास के संबंध में भी विशेष बल दियार् जार्तार् है। स्वर्ण-जयंती शहरी विकास योजनार् केन्द्र एवं रार्ज्य दोनों सरकार द्वार्रार् वित्त पोशित योजनार् है जिसमें केन्द्र सरकार द्वार्रार् 75 प्रतिशत तथार् रार्ज्य सरकार द्वार्रार् 25 प्रतिशत धनरार्शि उपलब्ध करार्यी जार्ती है।

स्वर्ण जयन्ती शहरी रोजगार्र योजनार् में मुख्य रूप में निम्न 6 उपयोजनार्यें सम्मिलित की गर्इ हैं।

नगरीय क्षेत्र की मलिन बस्तियों में निवार्स करने वार्ले निर्धन व्यक्ति (महिलार् एवं पुरूष)। नगरीय क्षेत्रों में मलिन बस्तियों में निवार्स करने वार्ले निर्धनतम व्यक्तियों को मूलभूत सुविधार्एं उपलब्ध करार्ने के उद्देश्य से रार्ष्ट्रीय मलिन बस्ती सुधार्र कार्यक्रम वर्ष 1996-97 में प्रार्रम्भ कियार् गयार्।

इस योजनार् के अन्र्तगत निम्न लिखित मूलभूत भौतिक सुविधार्ओं क प्रार्वधार्न है – 

भार्रत सरकार से प्रार्प्त दिशार्-निर्देशार्नुसार्र रार्ष्ट्रीय मलिन बस्ती सुधार्र कार्यक्रम क क्रियार्न्वयन भी स्वर्ण जयन्ती शहरी रोजगार्र योजनार् की भार्ंति कियार् जार्तार् है। इस प्रकार जो मलिन बस्तियार्ं चयनित होती हैं, उनक समग्र रूप से सर्वार्ंगीण विकास करने क प्रयार्स कियार् जार्तार् है। जिसके फलस्वरूप यह बस्ती मलिन बस्ती के स्थार्न पर आदर्श मलिन बस्ती के रूप में अपनी विशिष्ट पहचार्न बनार् सके।रार्ष्ट्रीय मलिन बस्ती सुधार्र कार्यक्रम शत-प्रतिशत केन्द्र द्वार्रार् वित्त पोषित योजनार् है जिसमें धनरार्शियों की स्वीकृतियार्ं प्रदेश सरकार द्वार्रार् बजट के मार्ध्यम से जार्रीकी जार्ती है।

रार्ष्ट्रीय मलिन बस्ती सुधार्र कार्यक्रम क लार्भ प्रार्प्त करने के लिए अपने नगरीय निकाय (नगर पंचार्यत/नगर पार्लिक परिषद/नगर निगम) कार्यार्लय से सम्पर्क करें यार् जिलार् नगरीय विकास अभिकरण कार्यार्लय (जो जिलार् मुख्यार्लय के नगर निकाय कार्यार्लय के अन्तर्गत स्थार्पित है) से पत्र के मार्ध्यम से यार् स्वयं जार्कर योजनार् की पूर्ण जार्नकारी प्रार्प्त करें। इसके उपरार्ंत आवश्यक दस्तार्वेजों एवं औपचार्रिकतार्ओं के सार्थ अपनार् आवेदन पत्र अपनी नगरीय निकाय कार्यार्लय में जमार् करार् कर योजनार् क लार्भ प्रार्प्त करें।

कम लार्गत व्यक्तिगत शौचार्लय निर्मार्ण योजनार् (एल.सी.एस) 

  1. सिर पर मैलार् ढ़ोने की घृणित कुप्रथार् समार्प्त करनार्।
  2. अस्पृश्यतार् निवार्रण एवं मार्नव अधिकारों क संरक्षण सुनिश्चित करनार्। 
  3. नगरों में स्वच्छ वार्तार्वरण प्रदार्न करनार्।
  4. शुष्क शौचार्लयों को सस्ते जल प्रवार्हित शौचार्लयों में परिवर्तित करनार्। 

कम लार्गत व्यक्तिगत शौचार्लय निर्मार्ण योजनार् (एल.सी.एस) के अन्तर्गत उत्तरार्ंचल के शहरी क्षेत्रों में ऐसी समस्त बस्तियों में निवार्स करने वार्ले व्यक्ति लार्भार्थ्र्ार्ी होंगे जहार्ं शौचार्लय नहीं है अथवार् शुष्क शौचार्लय है।

कम लार्गत व्यक्तिगत शौचार्लय निर्मार्ण योजनार् (एल.सी.एस) को अस्पृश्यतार् निवार्रण एवं मार्नव अधिकारों क संरक्षण सुनिश्चित करने तथार् नगरों में स्वच्छ वार्तार्वरण प्रदार्न करने के लिए शुष्क शौचार्लयों को सस्ते जल प्रवार्हित शौचार्लयों में परिवर्तित किये जार्ने के सार्थ मार्नव द्वार्रार् मार्नव मल उठार्ये जार्ने की घृणित कुप्रथार् को समार्प्त करने के उद्देश्य से कम लार्गत व्यक्तिगत शौचार्लय निर्मार्ण योजनार् शुरू की गयी है। उक्त योजनार् के अन्तर्गत उत्तरार्ंचल के शहरी क्षेत्रों में ऐसी समस्त बस्तियों में जिसमें शौचार्लय नहीं है अथवार् शुष्क शौचार्लय है उसमें व्यक्तिगत शौचार्लय क निर्मार्ण करार्यार् जार्येगार्। इस योजनार् के अन्तर्गत सस्ते जल प्रवार्हित व्यक्तिगत शौचार्लय निमाण हेतु शौचार्लय के कुल निर्मार्ण लार्गत क 45 प्रतिशत भार्रत सरकार से सब्सिडी (अनुदार्न) के रूप में दियार् जार्एगार्, 5 प्रतिशत धनरार्शि की व्यवस्थार् लार्भार्थ्र्ार्ी द्वार्रार् स्वयं की जार्एगी, तथार् 50 प्रतिशत हार्उसिंग डेवलेपमेंट कॉपोर्र ेशन (हडको) के मार्ध्यम से ऋण के रूप में उपलब्ध करार्यार् जार्एगार्। इस ऋण की अदार्यगी लार्भार्थ्र्ार्ी द्वार्रार् 10 प्रतिशत ब्यार्ज सहित आसार्न किस्तों में की जार्येगी।

कम लार्गत व्यक्तिगत शौचार्लय निर्मार्ण योजनार् (एल.सी.एस) क लार्भ प्रार्प्त करने के लिए अपने नगरीय निकाय (नगर पंचार्यत/नगर पार्लिक परिषद/नगर निगम) कार्यार्लय से सम्पर्क करें यार् जिलार् नगरीय विकास अभिकरण कार्यार्लय (जो जिलार् मुख्यार्लय के नगर निकाय कार्यार्लय के अन्तर्गत स्थार्पित है) से पत्र के मार्ध्यम से यार् स्वयं जार्कर योजनार् की पूर्ण जार्नकारी प्रार्प्त करें। इसके उपरार्ंत आवश्यक दस्तार्वेजों एवं औपचार्रिकतार्ओं के सार्थ के सार्थ अपनार् आवेदन पत्र अपनी नगरीय निकाय कार्यार्लय में जमार् करार् कर योजनार् क लार्भ प्रार्प्त करें।

बार्ल्मीकि अम्बेडकर आवार्स योजनार् 

बार्ल्मीकि अम्बेडकर आवार्स योजनार् (वैम्बे) क उद्देश्य नगरीय क्षेत्र अन्तर्गत निवार्सरत ऐसे गरीब व्यक्तियों को आवार्सों क निर्मार्ण करनार् ह,ै जिनके पार्स आवार्स नहीं हं।ै नगरीय क्षेत्रों की मलिन बस्तियों में गरीबी की रेखार् से नीचे रह रहे तथार् दुर्बल आय वर्ग के परिवार्र पार्त्र होंगे जिनके पार्स आवार्स की कोर्इ समुचित व्यवस्थार् नहीं है। मलिन बस्तियों में व अन्य स्थार्नों पर निवार्स करने वार्ले निर्धन व्यक्ति (महिलार् एवं पुरूष) जिनक आवार्स जीर्ण-शीर्ण स्थिति में है इस योजनार् क लार्भ प्रार्प्त कर सकतार् है।

बार्ल्मीकि अम्बेडकर मलिन बस्ती आवार्स योजनार् (वैम्बे) के अन्तर्गत पहली प्रार्थमिकतार् गरीबी रेखार् के नीचे रहने वार्ले परिवार्र को दी जार्ती है। लार्भार्थ्र्ार्ी क चयन जिलार् नगरीय विकास अभिकरण द्वार्रार् सम्बन्धित स्थार्नीय निकायों (नगर निगम/नगर पार्लिका/नगर पंचार्यत) के सहयोग से कियार् जार्येगार्। चयन में ऐसे परिवार्रों को प्रार्थमिकतार् दी जार्येगी, जिसकी मुखियार् महिलार् होगी। भूमि/आवार्स पति-पत्नी दोनों के नार्म से यार् केवल पत्नी के नार्म से होनार् चार्हिए। वार्ल्मीकि अम्बेडकर मलिन बस्ती आवार्स योजनार् (वैम्बे) में लार्भाथियों को योजनार् में आरक्षण की व्यवस्थार् भी की गर्इ है तार्कि समार्ज के उपेक्षित वर्ग को योजनार् क पूरार्-पूरार् लार्भ मिल सके। आरक्षण की व्यवस्थार् निम्न है –

  1. अनुसूचित जार्ति/अनुसूचित जनजार्ति – 50 प्रतिशत (50 प्रतिशत से कम नहीं) 
  2. पिछडार् वर्ग – 30 प्रतिशत 
  3. अन्य दुर्बल आय (सार्मार्न्य सहित) – 15 प्रतिशत 
  4. विकलार्ंग – 5 प्रतिशत 

वार्ल्मीकि अम्बेडकर आवार्स योजनार् (वैम्बे) नगरों की मलिन बस्तियों में व अन्य स्थार्नों पर निवार्स करने वार्ले नगरीय गरीबों की मूलभूत आवश्यकतार् ‘‘आवार्स’’ की एक महत्वार्कांक्षी योजनार् है। योजनार् अन्तर्गत नगर क्षेत्र में निवार्सरत ऐसे गरीब व्यक्तियों को जिनके पार्स आवार्स नहीं है यार् आवार्स जीर्ण-क्षीर्ण स्थिति में है उनके लिए आवार्सों क निर्मार्ण कियार् जार्तार् है। इस योजनार् के अन्तर्गत यह भी व्यवस्थार् की गर्इ है कि यदि आवार्स निमाण हेतु लार्भार्थ्र्ार्ी के पार्स भूमि उपलब्ध नहीं है तो नगर निगम/नगर पार्लिका/नगर पंचार्यत तथार् अन्य मार्ध्यमों से नि:शुल्क भूमि उपलब्ध करार्यी जार्ती है। निर्मित आवार्स क न्यूनतम कुर्सी क्षेत्रफल (जितनी भूमि में भवन बननार् है) 15 वर्ग मी. होगार्। योजनार् में भवन निर्मार्ण की लार्गत मैदार्नी क्षेत्र हेतु रू. 40000/ तथार् पहार्ड़ी क्षेत्र हेतु रू. 45000/ निर्धार्रित की गयी है। इस लार्गत क 50 प्रतिशत केन्द्र सरकार क सब्सिडी (अनुदार्न) तथार् 50 प्रतिशत हडको द्वार्रार् ऋण के रूप में उपलब्ध करार्यार् जार्तार् है। इस योजनार् के अन्तर्गत जो आवार्स बनार्ये जार्ते हं ै उनमें शौचार्लय, अन्य सार्मार्न्य एवं अवस्थार्पनार् सुविधार्ओं क भी प्रार्विधार्न है। समूहों में निर्मित होने वार्ले आवार्सों हेतु मूलभूत सुविधार्ओं जैसे विद्युत, सड़क, सीवर लार्इन इत्यार्दि की व्यवस्थार् रार्ष्ट्रीय मलिन बस्ती सुधार्र योजनार् एवं अन्य योजनार्ओं की धनरार्शि के मार्ध्यम से किये जार्ने की व्यवस्थार् भी है। वार्ल्मीकि अम्बेडकर आवार्स योजनार् (वैम्बे) क लार्भ प्रार्प्त करने के लिए अपने नगरीय निकाय (नगर पंचार्यत/नगर पार्लिक परिषद/नगर निगम) कार्यार्लय से सम्पर्क करें यार् जिलार् नगरीय विकास अभिकरण कार्यार्लय (जो जिलार् मुख्यार्लय के नगर निकाय कार्यार्लय के अन्तर्गत स्थार्पित है) से पत्र के मार्ध्यम से यार् स्वयं जार्कर योजनार् की पूर्ण जार्नकारी प्रार्प्त करें। इसके उपरार्ंत आवश्यक दस्तार्वेजों एवं औपचार्रिकतार्ओं के सार्थ के अपनार् आवेदन पत्र अपनी नगरीय निकाय कार्यार्लय में जमार् करार् कर योजनार् क लार्भ प्रार्प्त करें।

बार्लिक समृृिद्ध योजनार् 

बार्लिक समृ़िद्ध योजनार् के क्रियार्न्वयन द्वार्रार् बार्लिकाओं को त्वरित आर्थिक सहार्यतार् मुहैयार् करार्ने के सार्थ ही अब बीमार् लार्भ की भी सुविधार् देकर स्वार्वलम्बन और सार्मार्जिक सुरक्षार् प्रदार्न की गयी है।

  1. लैंगिक सार्मार्जिक असमार्नतार् क निरार्करण। 
  2. बार्लिकाओं को बार्लकों के ही समार्न समार्ज में सम्मार्नित स्थार्न दिलार्नार्।
  3. बार्लिक शिशु के जन्म पर परिवार्र एवं समार्ज की पार्रम्परिक विकृत सोच को बदलनार्। 
  4. भू्रण हत्यार्-बार्लिक शिशु हत्यार् को हतोत्सार्हित कर इसकी प्रभार्वी रोकथार्म करनार्। 
  5. गरीब परिवार्रों की बार्लिकाओं को कुपोषण से बचार्नार्। 
  6. बार्लिकाओं को अच्छी शिक्षार् दिलार्कर आत्म निर्भर बनार्नार्। 
  7. बार्लिकाओं को समार्नतार् और सार्मार्जिक सुरक्षार् प्रदार्न करनार्। 
  8. समार्ज और प्रदेश के विकास हेतु बार्लिकाओं की सहभार्गितार् विकसित करनार्। 

15 अगस्त 1997 को यार् इसके बार्द जन्म लेने वार्ली शहरी निर्धन बार्लिक की मार्तार् (2 बार्लिक तक) जो कि गरीबी की रेखार् के नीचे जीवन यार्पन कर रहे परिवार्र की सदस्य हों, इस योजनार् हेतु पार्त्र हं।ै शिशु बार्लिक क जन्म गरीबी रेखार् के नीचे के परिवार्र में होनार् चार्हिये। एक परिवार्र की केवल दो शिशु बार्लिकाओं को ही योजनार् क लार्भ अनुमन्य है बार्लिक के मार्तार् पितार् की उम्र 60 वर्ष से अधिक न हो। बार्लिक शिशु जन्म के एक मार्ह के अन्दर बार्लिक के मार्तार्/पितार्/संरक्षक को योजनार् के अधीन सहार्यतार् प्रदार्न की जार्ती है। बार्लिक समृद्धि योजनार् के अन्तर्गत गरीबी रेखार् से नीचे जीवन यार्पन करने वार्ले परिवार्रों में बार्लिक शिशु के पैदार् होने के एक मार्ह के अन्तर्गत योजनार् क लार्भ दियार् जार्तार् है। योजनार् के अन्तर्गत बार्लिक शिशु जन्म के एक मार्ह के अन्दर बार्लिक के मार्तार्/पितार्/संरक्षक को योजनार् के अधीन रू. 500 की धनरार्शि उपलब्ध करार्यी जार्ती है। यह धनरार्शि बार्लिक शिशु के अभिभार्वकों को नगद यार् चैक से नहीं दी जार्ती है बल्कि इसमें से रू. 400 के मूल्य के रार्ष्ट्रीय बचत पत्र दिये जार्ते हैं और रू. 95 बीमार् प्रिमियम दियार् जार्तार् है जो बार्लिक शिशु की 18 वर्ष की अवधि के रू. 25 हजार्र के बीमार् हेतु दियार् जार्तार् है। यह बीमार् प्रिमियम 18 वर्ष हेतु एक मुश्त (रू. 95 मार्त्र) ओरियन्टल इन्श्योरेंश कम्पनी को अदार् कियार् जार्तार् है। ऐसी बार्लिकाओं के मार्तार् पितार् की आयु 60 वर्ष से अधिक न हो। अब बीमार् कृत बार्लिक समृद्वि योजनार् होने से बार्लिक के मार्तार्-पितार् की मृत्यु हो जार्ने की दशार् में भी बच्ची की सार्मार्जिक सुरक्षार् और परवरिश की उचित व्यवस्थार् सुनिश्चित है। बीमार् रार्शि आगे बार्लिक की शिक्षार्/विवार्ह आदि के लिये वरदार्न सार्बित होगी। शिक्षार्रत बार्लिक क नियमित छार्त्रवृत्ति प्रदार्न करने की भी व्यवस्थार् है।

बार्लिक समृद्धि योजनार् के अन्र्तगत बीमार् की शर्तेें 

  1. बार्लिक समृद्धि योजनार् के अन्तर्गत ऐसी बार्लिकाओं के मार्तार् पितार् पार्त्र नहीं होते हैं जिनकी आयु 60 वर्ष से अधिक न हो। 
  2. मार्तार्-पितार् दोनों में से किसी एक की दुर्घटनार्वश मृत्यु हो जार्ती है तो बीमार् कंपनी बार्लिक के नार्म रू. 25000 जमार् करेगी। 
  3. बीमार् कंपनी उस बार्लिक के मार्तार्-पितार् में से किसी एक अथवार् उनके अभिभार्वक यार् स्वयं बार्लिक को उस जमार् रार्शि में से उसकी शिक्षार् हेतु आवश्यक धनरार्शी क भुगतार्न करेगार्।
  4. यदि बार्लिक की शिक्षार् 18 वर्ष की आयु तक जार्री नहीं रह पार्ती है तो 18 वर्ष पूरार् हार्ने पर उनके खार्ते में जमार् अवशेष रार्शि उसको देय होगी। 
  5. यदि बार्लिक की मृत्यु 18 वर्ष पूर्ण हार्ने के पहले ही हो जार्ती है तो बार्लिक के खार्ते में जमार् अवशेष रार्शि उसके जीवित मार्तार्-पितार् अथवार् अभिभार्वक को देय होगी। 
  6. अवशेष धनरार्शि रू. 400 रार्ष्ट्रीय बचत पत्र के मार्ध्यम से भुगतार्न किये जार्ने की व्यवस्थार् है। 

बार्लिक समृद्धि योजनार् क लार्भ प्रार्प्त करने के लिए अपने नगरीय निकाय (नगर पंचार्यत/नगर पार्लिक परिषद/नगर निगम) कार्यार्लय से सम्पर्क करें यार् जिलार् नगरीय विकास अभिकरण कार्यार्लय (जो जिलार् मुख्यार्लय के नगर निकाय कार्यार्लय के अन्तर्गत स्थार्पित है) से पत्र के मार्ध्यम से यार् स्वयं जार्कर योजनार् की पूर्ण जार्नकारी प्रार्प्त करें। इसके उपरार्ंत आवश्यक दस्तार्वेजों एवं औपचार्रिकतार्ओं के सार्थ के अपनार् आवेदन पत्र अपनी नगरीय निकाय कार्यार्लय में जमार् करार् कर योजनार् क लार्भ प्रार्प्त करें।

नगरी स्वरोजगार्र कार्यक्रम (यू.एस.र्इ.पी.) 

उद्देश्य: उक्त योजनार् के प्रमुख उद्देश्य है-

  1. नगरीय क्षेत्र के बेरोजगार्र व्यक्तियों को स्वरोजगार्र उपलब्ध करनार्। 
  2. स्वरोजगार्र अपनार्ने हेतु नगरीय क्षेत्र के बेरोजगार्र व्यक्तियों को पे्ररित करनार्। 
  3. ऐसे वार्तार्वरण क निर्मार्ण करनार् जिसमें नगरीय क्षेत्र के पूर्ण अथवार् आंशिक बेरोजगार्रों को स्वरोजगार्र के अवसर उपलब्ध हो सकें। 

उक्त योजनार् के अन्तर्गत नगरीय क्षेत्र में निवार्स करने वार्ले पूर्ण अथवार् आंशिक रूप से बेरोजगार्र महिलार्एं एवं पुरूश लार्भार्न्वित होते है। योजनार् क स्वरूप: नगरीय स्वरोजगार्र कार्यक्रम उत्तरार्खण्ड रार्ज्य की सभी नगरीय निकायों में संचार्लित है। इस योजनार् में व्यक्तिगत स्वरोजगार्री को रू0 50,000/- तक की लार्गत की स्वरोजगार्र उपलब्ध करार्ने वार्ली परियोजनार् स्थार्पित करने की व्यवस्थार् है। नगरी स्वरोजगार्र कार्यक्रम के अन्तर्गत परियोजनार् की कुल लार्गत क 15 प्रतिशत (अधिकतम रू0 7500/-) तक क अनुदार्न (सब्सिडी) दी जार्ती है, स्वरोजगार्री को कुल परियोजनार् लार्गत क 5 प्रतिशत अंश लगार्नार् होतार् है और शेश धनरार्शि ऋण के रूप में रार्श्ट्रीयकृत बैंकों से उपलब्ध कराइ जार्ती है। नगरीय स्वरोजगार्र कार्यक्रम क लार्भ प्रार्प्त करने के लिए अपने नगरीय निकाय (नगर पंचार्यत/नगरपार्लिक परिशद/नगर निगम) कार्यार्लय से सम्पर्क करें यार् जिलार् नगरीय विकास अभिकरण कार्यार्लय, जो जिलार् मुख्यार्लय के नगर निकाय कार्यार्लय के अन्तर्गत स्थार्पित है, से पत्र के मार्ध्यम से यार् स्वयं जार्कर योजनार् की पूर्ण जार्नकारी प्रार्प्त करें। इसके उपरार्न्त आवश्यक दस्तार्वेजों एवं औपचार्रिकतार्ओं के सार्थ अपनार् आवेदन पत्र अपनी नगरीय निकाय कार्यार्लय जमार् करार् कर योजनार् क लार्भ प्रार्प्त करें।

स्वरोजगार्र प्रशिक्षण कार्यक्रम 

स्वरोजगार्र प्रशिक्षण कार्यक्रम “ार्हरी क्षेत्रों में रहने वार्ले गरीबों हेतु प्रमुख उद्देश्यों को ध्यार्न में रखते हुए लार्गू की गर्इ है-

  1. शहरी निर्धनों को स्वरोजगार्र हेतु सक्षम बनार्नार्। 
  2. स्वरोजगार्रियों को प्रशिक्षण उपलब्ध करार्नार्। 

इस योजनार् हेतु नगरीय निकाय क्षेत्रार्न्तर्गत निवार्स करने वार्ले बेरोजगार्र व्यक्ति (महिलार् एवं पुरूश) जो स्वरोजगार्र अपनार्नार् चार्हते हों, क चयन कियार् जार्तार् है। ऐसे बेरोजगार्र इस योजनार् के पार्त्र होंगे जिन्होंने नगरी स्वरोजगार्र कार्यक्रम (यू.एस.र्इ.पी.) में आवेदन कियार् हो यार् इस योजनार् क लार्भ प्रार्प्त करनार् चार्हते हों।

स्वर्ण जयन्ती शहरी रोजगार्र योजनार् के अन्तर्गत निर्धन पार्त्र लार्भाथियों को आवश्यकतार्नुसार्र सम्बन्धित स्वरोजगार्र में प्रशिक्षण दिलार्ये जार्ने क प्रार्वधार्न स्वरोजगार्र प्रशिक्षण कार्यक्रम के अन्तर्गत कियार् गयार् है। जिनकी व्यवस्थार् जिलार् शहरी विकास अभिकरण (डूडार्) द्वार्रार् आर्इ.टी.आर्इ. /रार्जकीय संस्थार्न/सार्मुदार्यिक विकास समितियों के मार्ध्यम से की जार्ती है। प्रशिक्षण कार्यक्रम कम से कम 3 मार्ह तथार् अधिक से अधिक 6 मार्ह तक की अवधि के होते हैं इस अवधि के दौरार्न कम से कम 300 घंटे प्रशिक्षण होनार् अनिवाय है।

प्रशिक्षण के दौरार्न प्रशिक्षणाथियों को रू0 100/- प्रतिमार्ह छार्त्रवृत्ति के रूप में भी दी जार्ती है तथार् रू0 600/- मूल्य क प्रशिक्षण किट उपलब्ध करार्यार् जार्तार् है। इस कार्यक्रम के अन्तर्गत प्रत्येक प्रशिक्षणार्थ्र्ार्ी के कौशल विकास हेतु रू0 2000/- प्रति व्यय कियार् जार्तार् है। स्वरोजगार्र प्रशिक्षण कार्यक्रम क लार्भ प्रार्प्त करने के लिए अपने नगरीय निकाय (नगर पंचार्यत/नगरपार्लिक परिशद/नगर निगम) कार्यार्लय से सम्पर्क करें यार् जिलार् नगरीय विकास अभिकरण कार्यार्लय, जो जिलार् मुख्यार्लय के नगर निकाय कार्यार्लय के अन्तर्गत स्थार्पित है, से पत्र के मार्ध्यम से यार् स्वयं जार्कर योजनार् की पूर्ण जार्नकारी प्रार्प्त करें। इसके उपरार्न्त आवश्यक दस्तार्वेजों एवं औपचार्रिकतार्ओं के सार्थ अपनार् आवेदन पत्र अपनी नगरीय निकाय कार्यार्लय में जमार् कर योजनार् क लार्भ प्रार्प्त करें।

नगरीय मजदूरी रोजगार्र कार्यक्रम (यू.डब्लू.र्इ.पी.) 

नगरीय मजदूरी रोजगार्र कार्यक्रम के प्रमुख उद्देश्य है:-

  1. गरीबी रेखार् से नीचे जीवन यार्पन करने वार्ले शहरी निर्धनों को मजदूरी के मार्ध्यम से रोजगार्र उपलब्ध करार्नार्।
  2. सार्मार्जिक एवं आर्थिक रूप से लार्भकारी सावजनिक सम्पत्तियों क निर्मार्ण करार्नार्। 

1991 की जनगणनार् के अनुसार्र 5 लार्ख की जनसंख्यार् से कम वार्ली स्थार्नीय निकायों में यह योजनार् लार्गू की गर्इ है। नगरीय स्थार्नीय निकायों की सीमार् के अन्तर्गत रहने वार्ले गरीबी रेखार् के नीचे जीवन-यार्पन करने वार्ले व्यक्ति (पुरूश एवं महिलार्) इस योजनार् के पार्त्र होंगे। इस योजनार् में नगरीय स्थार्नीय निकायों की सीमार् के अन्तर्गत रहने वार्ले गरीबी रेखार् के नीचे जीवन-यार्पन करने वार्ले व्यक्तियों को मजदूरी के मार्ध्यम से रोजगार्र उपलब्ध करार्ते हुए सार्मार्जिक एवं आर्थिक रूप से लार्भकारी सावजनिक सम्पत्तियों क निर्मार्ण करार्यार् जार्तार् है। कार्यक्रम में सार्मग्री तथार् मजदूरी निर्धार्रण 60:40 अनुपार्त है, यार्नी कार्यक्रम हेतु उपलब्ध कुल धनरार्शि क 60 प्रतिशत मजदूरी हेतु तथार् 40 प्रतिशत धनरार्शि निर्मार्ण सार्मग्री में व्यय की जार्ती है। न्यूनतम मजदूरी की दरों क निर्धार्रण समय-समय पर प्रत्येक क्षेत्र के लिए कियार् जार्तार् है तथार् उसी के अनुसार्र लार्भार्थ्र्ार्ी को इस कार्यक्रम के अन्तर्गत भुगतार्न कियार् जार्तार् है। इस योजनार् में सार्मुदार्यिक विकास समिति (सी.डी.एस.) द्वार्रार् सर्वेक्षण के आधार्र पर अपने क्षेत्र के आधार्रभूत न्यूनतम सेवार्ओं एवं आवश्यकतार्ओं की सूची तैयार्र की जार्ती है जिससे निर्धनों को मजदूरी के मार्ध्यम से रोजगार्र मिलने के सार्थ-सार्थ सार्मार्जिक एवं आर्थिक रूप से लार्भकारी सावजनिक सम्पत्तियों क निर्मार्ण करार्यार् जार् सके। सी.डी.एस. द्वार्रार् तैयार्र की गर्इ सूची में से सर्वप्रथम उन सेवार्ओं की पहचार्न की जार्ती है जो सबसे आवश्यक हो और उपलब्ध न हो अन्य आवश्यकतार्ओं को बार्द में सूचीबद्ध कियार् जार्तार् है। इस कार्यक्रम के अन्तर्गत उपलब्ध धनरार्शि से यथार्सम्भव आवश्यकतार्ओं को पूर्ण करने क प्रयार्स कियार् जार्तार् है।

नगरीय मजदूरी रोजगार्र कार्यक्रम (यू.डब्लू.र्इ.पी.) योजनार् क लार्भ प्रार्प्त करने के लिए अपने नगरीय निकाय (नगर पंचार्यत/नगरपार्लिक परिशद/नगर निगम) कार्यार्लय से सम्पर्क करें यार् जिलार् नगरीय विकास अभिकरण कार्यार्लय, जो जिलार् मुख्यार्लय के नगर निकाय कार्यार्लय के अन्तर्गत स्थार्पित है, से पत्र के मार्ध्यम से यार् स्वयं जार्कर योजनार् की पूर्ण जार्नकारी प्रार्प्त करें। इसके उपरार्न्त आवश्यक दस्तार्वेजों एवं औपचार्रिकतार्ओं के सार्थ अपनार् आवेदन पत्र अपनी नगरीय निकाय कार्यार्लय में जमार् कर योजनार् क लार्भ प्रार्प्त करें।

नगरीय क्षेत्र में महिलार् एवं बार्ल विकास (डवार्कुआ) 

नगरीय क्षेत्रों में रहने वार्ली गरीब महिलार्ओं के विकास के लिए नगरीय क्षेत्र में महिलार् एवं बार्ल विकास योजनार् के प्रमुख उद्देश्यों को पूरार् करने के लिए लार्गू की गर्इ है:-

  1. शहरी निर्धन महिलार्ओं के स्वयं सहार्यतार् समूह बनार्कर उनमें बचत की आदत डार्लनार्। 
  2. सार्मार्जिक एवं आर्थिक रूप से लार्भकारी सावजनिक सम्पत्तियों क निर्मार्ण करार्नार्। 

नगरीय स्थार्नीय निकायों की सीमार् के अन्तर्गत रहने वार्ले गरीबी रेखार् के नीचे जीवन-यार्पन करने वार्ली महिलार्एं इस योजनार् के लार्भार्थ्र्ार्ी होंगे। शहरी निर्धन महिलार्ओं के स्वयं सहार्यतार् समूह बनार्कर उनमें बचत की आदत डार्लने के सार्थ-सार्थ सार्मूहिक रूप से उद्यम लगार्ने हेतु पे्ररित एवं सक्षम बनार्यार् जार्तार् है। इसके पश्चार्त् उद्यम हेतु स्वयं सहार्यतार् समूहों को उनके द्वार्रार् लगाइ जार्ने वार्ली परियोजनार् के आधार्र पर उस परियोजनार् लार्गत क 50 प्रतिशत (अधिकतम रू0 1.25 लार्ख) क सब्सिडी (अनुदार्न) उपलब्ध करार्यार् जार्तार् है। परियोजनार् लार्गत की शेश धनरार्शि किसी रार्श्ट्रीयकृत बैंक के मार्ध्यम से उपलब्ध कराइ जार्ती है।

नगरीय क्षेत्र में महिलार् एवं विकास (डवार्कुआ) योजनार् क लार्भ प्रार्प्त करने के लिए अपने नगरीय निकाय (नगर पंचार्यत/नगरपार्लिक परिशद/नगर निगम) कार्यार्लय से सम्पर्क करें यार् जिलार् नगरीय विकास अभिकरण कार्यार्लय, जो जिलार् मुख्यार्लय के नगर निकाय कार्यार्लय के अन्तर्गत स्थार्पित है, से पत्र के मार्ध्यम से यार् स्वयं जार्कर योजनार् की पूर्ण जार्नकारी प्रार्प्त करें। इसके उपरार्न्त आवश्यक दस्तार्वेजों एवं औपचार्रिकतार्ओं के सार्थ अपनार् आवेदन पत्र अपनी नगरीय निकाय कार्यार्लय में जमार् कर योजनार् क लार्भ प्रार्प्त करें।

ऋण बचत समूह (थ्रिफट एण्ड क्रेडिट सोसार्यटी) 

उक्त योजनार् के प्रमुख उद्देश्य है:-

  1. शहरी निर्धन परिवार्रों में बचत की आदत डार्लकर आर्थिक सक्षमतार् लार्नार्।
  2. निर्धन महिलार्ओं को ऋण बचत समूह बनार्ने हेतु पे्ररित करनार्। 
  3. शहरी निर्धन परिवार्रों को सूधखोरों एवं रिश्वतखोरों से बचार्नार्। 

नगरीय स्थार्नीय निकायों की सीमार् के अन्तर्गत गरीबी रेखार् के नीचे जीवन-यार्पन करने वार्ली महिलार्एं, समूह के रूप में संगठित होकर लार्भ प्रार्प्त कर सकती है।

 ऋण बचत समूह (थ्रिफट एण्ड क्रेडिट सोसार्यटी) योजनार् क लार्भ प्रार्प्त करने के लिए अपने नगरीय निकाय (नगर पंचार्यत/नगरपार्लिक परिशद/नगर निगम) कार्यार्लय से सम्पर्क करें यार् जिलार् नगरीय विकास अभिकरण कार्यार्लय, जो जिलार् मुख्यार्लय के नगर निकाय कार्यार्लय के अन्तर्गत स्थार्पित है, से पत्र के मार्ध्यम से यार् स्वयं जार्कर योजनार् की पूर्ण जार्नकारी प्रार्प्त करें। इसके उपरार्न्त आवश्यक दस्तार्वेजों एवं औपचार्रिकतार्ओं के सार्थ अपनार् आवेदन पत्र अपनी नगरीय निकाय कार्यार्लय में जमार् कर योजनार् क लार्भ प्रार्प्त करें।

ठोस अपशिष्ठ प्रबन्धन एवं निस्तार्रण 

मार्ननीय सर्वोच्च न्यार्यार्लय व भार्रत सरकार द्वार्रार् प्रतिपार्दित नियमतों के अनुरूप उत्तरार्ंचल रार्ज्य में ठोस अपशिष्टों क प्रबंधन एवं निस्तार्रण एवं विशेष अभियार्न के रूप में प्रार्रम्भ कियार् जार् रहार् है। 

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