विज्ञार्पन क्यार् है ?

आधुनिक युग विज्ञार्पन क युग हैं, इसके अभार्व में उद्योग एवं व्यार्पार्र की उन्नति संभव नहीं है अब तक विज्ञार्पन क अर्थ सूचनार् देनार्, सूचित करनार् तथार् जार्नकारी देनार् आदि तक सीमित थार्, लेकिन आधुनिक औद्योगिक जगत में तथार् प्रतिस्पर्द्धार् के युग में इसक अर्थ अधिक विस्तृत हो गयार् है आज के वैज्ञार्निक युग मे विज्ञार्पन शब्द की परिभार्षार् के अन्तर्गत हम उन सभी सार्धनों क समार्वेश करते है। जिनके द्धार्रार् विक्रेतार् एवं उपभोगकर्तार् को नवीन वस्तुओं की उत्पित्त,, गुण एवं मूल्य आदि के बार्रे में जार्नकारी प्रार्प्त होती है संक्षेप मे हंम यह कह सकते हैं कि व्यार्पार्रिक दृष्टिकोण से विज्ञार्पन क तार्त्पर्य उन क्रियार्ओं से है, जो किसी वस्तु अथवार् सेवार् की उपयोगितार् क जनतार् के ऊपर प्रभार्व डार्लने से संबंध रखती हैं।

विज्ञार्पन बिनार् वैयक्तिक विक्रयकर्तार् के विक्रय कलार् है’’ इस प्रकार विज्ञार्पन वस्तु यार् सेवार् की मॉंग उत्पन्न करने की कलार् है यह एक प्रकार की ऐसी व्यार्पार्रिक शक्ति है जो मुद्रित शब्द के द्वार्रार् विक्रय करती है तथार् विक्रय करार्ने में सहार्यक होती है, कीर्ति क निर्मार्ण करती हैं एवं ख्यार्ति में वृद्धि करती है।

विज्ञार्पन के उद्देश्य

विज्ञार्पन आधुनिक व्यार्पार्र क जीवन रक्त कहार् जार्तार् है, इसके बिनार् व्यार्वसार्यिक उन्नति संभव नहीं है एक प्रसिद्ध विद्वार्न के अनुसार्र ‘‘विज्ञार्पन क उद्देश्य उत्पार्दक अथवार् निर्मार्तार् को लार्भ पहुॅंचार्नार्, उपभोक्तार् को शिक्षित करनार्, विक्रेतार् को सहार्यतार् देनार्, प्रतिस्पर्द्धार् को समार्प्त कर व्यार्पार्रियों को अपनी ओर आकशित करनार् और सबसे अधिक तो उत्पार्दन और उपभोक्तार् में सबंधं स्थार्पित करनार् है’’ विज्ञार्पन के उद्देश्य  हैं-

  1. वस्तुुओं के बार्रे में जार्नकारी देनार् – विज्ञार्पन क प्रमुख उद्देश्य निर्मित वस्तुओं के संबंध में अधिक से अधिक लोगों को जार्नकारी देनार् है जब तक वस्तुओं के बार्रे में सार्मार्न्य जनतार् को जार्नकारी नहीं होगी, तब तक उसकी इच्छार् उसे खरीदने की नहीं होगी, तब तक वस्तुओं क विक्रय होनार् असंभव है।
  2. मॉंग उत्पन्न करनार् – विज्ञार्पन क दूसरार् उद्देश्य बार्जार्र में वस्तु की मॉंग उत्पन्न करनार् है बार्जार्र में वस्तु की मॉंग तभी पैदार् होती है, जब उपभोक्तार्ओं के समक्ष वस्तु क बार्र-बार्र विज्ञार्पन एवं प्रचार्र कियार् जार्तार् है, जिससे जनतार् में उसे क्रय करने की इच्छार् जार्गृत होती है फलस्वरूप उसकी मॉंग होने लगती है।
  3. मॉंग में वृद्धि करनार् – मॉंग उत्पन्न करने के सार्थ-सार्थ विज्ञार्पन क यह भी उद्देश्य है, कि नए-नए ग्रार्हको को खोजकर वस्तु की मॉंग में वृद्धि करनार् भी है यह कार्य विज्ञार्पन के विविध सार्धनो के प्रयोगो द्वार्रार् कियार् जार्तार् सकतार् है।
  4. ख्यार्ति में वृद्धि करनार् – विज्ञार्पन के द्वार्रार् वस्तु के सार्थ-सार्थ व्यवसार्य की सार्ख में भी वृद्धि होती है निरन्तर विज्ञार्पन करने से उत्पार्दन करने वार्ली संस्थार् के प्रति जनतार् में विश्वार्स जार्गृत होतार् है।
  5. मॉंग को स्थिर बनार्ए रखनार् – निर्मार्तार् विज्ञार्पन के द्वार्रार् वस्तुओं की मॉंग को स्थिर बनार् रखने के लिए प्रयोग करतार् है विज्ञार्पन केवल वस्तु क प्रचार्र ही नहीं करतार्, अपितु जनतार् में उत्पन्न भ्रार्ंतियों को दूर करतार् है और वस्तु के गुणों क विज्ञार्पन द्वार्रार् प्रचार्र करतार् है विज्ञार्पन के द्वार्रार् मूल्य उपयोगितार् एवं उपयोग की विधि संबंधी जार्नकारी दी जार्ती है इससे जनतार् में विश्वार्स पैदार् होतार् है और वस्तुओ की मॉंग निरन्तर बनी रहती है।
  6. नवीन उत्पार्दन के लिये मार्ंग क आधार्र तैयार्र करनार् – जब किसी नर्इ वस्तु क उत्पार्दन यार् निर्मार्ण कियार् जार्तार् है तो उसे बार्जार्र मे प्रचलित करने के लिए विज्ञार्पन अनिवाय सार् हो जार्तार् है विज्ञार्पन के मार्ध्यम से ऐसे नए उत्पार्द के लिए आधार्र तैयार्र कियार् जार्तार् है और प्रत्येक संभार्वित क्रेतार् यार् ग्रार्हक को ऐसी वस्तु की विशेषतार्ओं से परिचित करार्यार् जार्तार् है।
  7. विक्रेतार् की सहार्यतार् करनार् – विज्ञार्पन के द्वार्रार् विक्रेतार् के विक्रय कार्य में सहार्यतार् मिलती है विज्ञार्पन से ग्रार्हकों को पूर्व में ही वस्तु के बार्रे में वस्तु के गुण, मूल्य, प्रकार, आकार आदि के बार्रे में जार्नकारी हो जार्ती है फलस्वरूप ग्रार्हक उस वक्त वस्तु को प्रार्प्त करने के लिए विक्रेतार् के पार्स आतार् है इस प्रकार विक्रेतार् को ग्रार्हकों को समझार्ने की आवश्यकतार् नहीं होती और न ही वस्तु के बार्रे में कुछ कहनार् पड़तार् है क्योंकि ग्रार्हक विज्ञार्पन के मार्ध्यम से पूर्ण जार्नकारी प्रार्प्त कर चुका।
  8. क्रय की विवेकशीलतार् विकसित करनार् – विज्ञार्पन क उद्देश्य क्रेतार् को विवेकशील बनार्नार् है इसकी सहार्यतार् से विज्ञार्पनकर्तार् की वस्तु तथार् प्रतियोगी संस्थार् की वस्तु में अन्तर कर सकने की क्षमतार् क्रेतार् मे आती है ओर बेहतर वस्तु के चुनार्व करने के लिए वह तैयार्र होतार् है।
  9. नए प्रयोगो की जार्नकारी देनार् – विज्ञार्पन क उद्देश्य वस्तुओं के नए-नए प्रयोग तथार् प्रयोग की विधियों की पर्यार्प्त जार्नकारी देनार् भी है, तार्कि क्रेतार् पूरार्-पूरार् लार्भ उठार् सके।
  10. परिवर्तर्नों के बार्रे में जार्नकारी देनार् – विज्ञार्पन क महत्वपूर्ण उद्देश्य संस्थार् की नीतियॉं, वस्तुओं की किस्म, बनार्वट, मूल्य आदि मे परिवर्तन की सूचनार् देनार् भी होतार् हैं।
  11. अन्य उद्देश्य – उपर्युक्त उद्देश्यों के अतिरिक्त विज्ञार्पन के कर्इ उद्देश्य है जैसे उपभोक्तार्ओं को स्मरण दिलार्नार्, मध्यस्थों को वस्तु बचे ने के लिए विवश करनार्, मध्यस्थों व विक्रेतार्ओं क नैतिक स्तर उन्नत करनार्, नए बार्जार्र में प्रवेश करनार्, संस्थार् की सार्ख बढ़ार्नार्, स्थार्नार्पन्न वस्तुओं क मुकाबलार् करनार् आदि।

    विज्ञार्पन की आवश्यकतार् यार् महत्व 

    वर्तमार्न युग में विज्ञार्पन क महत्व सभी क्षेत्रों में बहुत अधिक बढ़ गयार् है प्रार्चीनकाल में जब मनुष्य की आवश्यकतार् सीमित थी, उस समय विज्ञार्पन क कोर्इ महत्व नहीं थार्, किन्तु उत्पार्दन एवं बार्जार्र के विस्तार्र के सार्थ-सार्थ विज्ञार्पन क महत्व भी बढ़तार् गयार् वर्तमार्न में विज्ञार्पन के विभिन्न सार्धनों क प्रयोग कियार् जार्तार् है, अत: यह कहार् जार् सकतार् है कि विज्ञार्पन ग्रार्हकों को आकृष्ट करने क सबसे अधिक शक्तिशार्ली तथार् प्रभार्वकारी सार्धन है।

    विज्ञार्पन के लार्भ 

    1. बिक्री में वृद्धि -वर्तमार्न युग विज्ञार्पन क युग कहलार्तार् हैं कोर्इ भी व्यवसार्यी चार्हे छोटार् हो यार् बड़ार् विज्ञार्पन के बिनार् सफलतार् प्रार्प्त नहीं कर सकतार् वर्तमार्न में विज्ञार्पन को आधुनिक श्रंृगार्रमय एवं आकर्षक तरीकों से कियार् जार्तार् है इन विज्ञार्पनों से ग्रार्हक प्रभार्वित होते है। और इस प्रकार बिक्री में वृद्धि होती है बिक्री में वृद्धि होने से विक्रेतार् के लार्भ में वृद्धि होती है।
    2. रोजगार्र में वृद्धि – रोजगार्र के दृष्टिकोण से भी विज्ञार्पन अत्यन्त महत्वपूर्ण है, क्योंकि अधिकांश व्यक्ति विज्ञार्पन संबंधी कार्यो में ही संलग्न रहते हैं इससे ही उनक जीवन निर्वार्ह होतार् है विज्ञार्पन कार्य के लिए कर्इ प्रकार के व्यक्तियों की आवश्यकतार् होती है जैसे- लेखक, कलार्कार, विशेषज्ञ आदि आजकल तो कर्इ व्यार्वसार्यिक संस्थार्एॅं ऐसी खुल गर्इ है।, जिनक कार्य केवल विज्ञार्पन करनार् है।
    3. लार्गत व्यय में कमी – आज के प्रतियोगी बार्जार्र में वस्तुओं के मूल्य में वृद्धि करके अधिक लार्भ कमार्नार् संभव नहीं है इसके विपरीत वह विज्ञार्पन द्वार्रार् वस्तुओं की मॉंग में वृद्धि करके उन्हें अधिक मार्त्रार् में उत्पार्दन करके उनकी लार्गत में कमी करने क प्रयार्स करतार् है अधिक मार्त्रार् में किसी वस्तु क उत्पार्दन लार्गत में कमी करने यह निश्चित है कि उस वस्तु क उत्पार्दन मूल्य कम हो जार्तार् है इस प्रकार विज्ञार्पन एवं कुशल प्रबंध द्वार्रार् वस्तुओं क विक्रय मूल्य घटार्यार् जार्त सकतार् है मूल्य कम होने से वस्तुओ की बिक्री अधिक होती है इससे विक्रेतार् और ग्रार्हक दोनों लार्भार्न्वित होते है।
    4. विक्रेतार्ओं को प्रोत्सार्हन – विज्ञार्पन के द्वार्रार् विक्रेतार्ओं क कार्य बहुत आसार्न हो जार्तार् है अब विक्रेतार् को वस्तु के मूल्य, गुण एवं प्रयोग के बार्रे में समझार्ने की अधिक आवश्कतार् नहीं होती, क्योंकि यह कार्य विज्ञार्पन द्वार्रार् हो जार्तार् है अब तो उन्हे केवल आदेश प्रार्प्त करने क कार्य ही शेष रह जार्तार् है इससे स्पष्ट है कि विज्ञार्पन के द्वार्रार् विक्रेतार्ओं को बहुत प्रोत्सार्हन मिलतार् है।
    5. विज्ञार्पन अधिक मार्त्रार् में वस्तुएॅं उपलब्ध करार्ने में योगदार्न करतार् है – विज्ञार्पन द्वार्रार् नर्इ वस्तुओं को प्रयार्ग करने की शिक्षार् दी जार्ती है जब कोर्इ नर्इ वस्तु बार्जार्र में आती है। तो प्रार्रंभ में बहुत कम लोग उसे तत्काल खरीदते हैं अधिक लोग उस वस्तु क प्रयोग करें, इसके लिए यह आवश्यकतार् है कि उन्हें उनकी उपयोगितार् एवं आवश्यकतार् के बार्रे में जार्नकारी दी जार्नी चार्हिए नयार् विज्ञार्पन उत्पार्दकों के लिए लोगों में इच्छार्एॅं जार्गृत करतार् है और पुरार्नी आदतों को बदलने में सहार्यक होतार् है।
    6. विज्ञार्पन उत्पार्द सुधार्र में एक महत्वपूर्ण घटक है – अनेक कम्पनियों द्वार्रार् बनाइ गर्इ वस्तुओं के ब्रार्ंड, गुण, डिजार्इन एवं पैकिंग में समार्नतार्एॅं हो सकती है इसलिए प्रत्येक निर्मार्तार् क यह दार्यित्व है कि वह स्वयं के द्वार्रार् निर्मित वस्तुओं की श्रेष्ठतार् क परिचय विज्ञार्पन में तुलनार्त्मक श्रेष्ठ्तार् क उल्लेख कर बिक्री बढ़ार्ने क प्रयार्स करतार् है इसलिए प्रत्येक निर्मार्तार् को अपनी वस्तुओं को श्रेष्ठतर बनार्ने क ज्ञार्न भी हो जार्तार् है अत: प्रत्येक उद्योगपति अपने उत्पार्द को अधिक उत्त्ार्म बनार्नार् चार्हतार् है, उसे सुविधार्जनक, टिकाऊपन, आकर्षक पैकिगं और कम मूल्य में देने क प्रयत्न करतार् है अत: वर्तमार्न प्रतियोगी अर्थव्यवस्थार् मे विज्ञार्पित वस्तु में निरन्तर सुधार्र होनार् आवश्यक हो जार्तार् है विज्ञार्पन से संस्थार्ओं क आकार बढ़तार् है, विशिष्टीकरण को प्रोत्सार्हन मिलतार् है और नए-नए आविष्कारार् संभव होते हैं ।
    7. वस्तुओं के लिए स्थार्यी मॉंग – विज्ञार्पन एक ऐसार् सार्धन है, जिसके द्वार्रार् किसी वस्तु की मॉंग को स्थाइ रखार् जार् सकतार् है उदार्हरण के लिए हम बार्टार् के जूतों को लेते हैं, समार्चार्र पत्रों मे इस प्रकार क विज्ञार्पन निकालार् जार्तार् हैं कि’’बार्टार् के जूते पहनिये, यह गर्मियों में ठण्डे और सर्दियों में गर्म रहते हैं’’ अधिकांश व्यक्ति इन विज्ञार्पनों से प्रभार्वित होकर वर्षभर बार्टार् के जूते पहनने लगते हैं इससे जूतो की मॉंग भी स्थार्यी बन जार्ती है। 
    8. मध्यस्थों की संख्यार् में कमी – मध्यस्थों की संख्यार् अधिक होने के कारण वस्तुओं के मूल्य बढ़ जार्ते हैं और इसक प्रभार्व प्रत्यक्ष रूप से उपभोक्तार्ओं पर अच्छार् नहीं पड़तार् है, लेकिन विज्ञार्पन के द्वार्रार् मध्यस्थों को कम कियार् जार् सकतार् है और उपभोक्तार्ओं से उत्पार्दनकर्त्त्ार्ार्ओं क प्रत्यक्ष संबंध स्थार्पित हो जार्तार् है तथार् वस्तुओं क मूल्य भी कम हो जार्तार् है इसक परिणार्म यह होतार् है कि उपभोक्तार्ओं को कम मूल्य पर वस्तुएॅं उपलब्ध हो जार्ती है तथार् बिक्री मे भी वृद्धि होती है।
    9. नवनिर्मित वस्तुओं की मॉंग में वृद्धि – विज्ञार्पन के द्वार्रार् जनतार् को नवनिर्मित वस्तुओं क ज्ञार्न करवार्यार् जार्तार् है विज्ञार्पन के द्वार्रार् जनतार् को वस्तुओं के गुणों को इस प्रकार बतार्यार् जार्तार् है कि ग्रार्हक तुलनार्त्मक अध्ययन कर यह सुनिश्चित कर सके कि जो वस्तु चलन में आर्इ है, वह गुणों में अन्य वस्तुओं की अपेक्षार् अच्छी है ऐसार् होने से पुरार्नी वस्तुओं की मॉंग कम हो जार्ती है और नर्इ वस्तुओं की मॉंग बढ़ जार्ती है यह सब विज्ञार्पन द्वार्रार् ही संभव है इस प्रकार विज्ञार्पन से नवनिर्मित वस्तुओं की मॉंग में वृद्धि होती है।
    10. प्रबधकों व मजदूरों को प्रोत्सार्हन – विज्ञार्पन से प्रबंधको व मजदूरों को भी प्रोत्सार्हन मिलतार् है प्रबंधक एवं मजदूर इस बार्त क प्रयार्स करते हैं कि उन्होने अपनी वस्तु के जो गुण विज्ञार्पन में बतार्ए है, वे पूर्ण रूप से पूरार् करें,, जिससे कि बार्जार्र में उनकी वस्तु की ख्यार्ति में वृद्धि हो सके अधिक बिक्री होने से इन्हें कार्य करने की प्रेरणार् मिलती है और भविष्य में और अधिक अच्छी वस्तु बनार्ने क प्रयार्स करते हैं।

    विज्ञार्पन की हार्नियॉं

    यद्यपि विज्ञार्पन क व्यार्वसार्यिक एवं औद्योगिक जगत में विशिष्ट महत्व है, तथार्पि यह दोषों में मुक्त भी नहीं है विज्ञार्पन की हार्नियों यार् दोषों को  विभक्त कियार् जार्त सकतार् है-

    1. धन क अपव्यय – विज्ञार्पन के कारण कर्इ उपभोक्तार् उन वस्तुओं को भी खरीद लेते हैं जो कि उनके लिए आवश्यक नहीं होती हैं इस प्रकार उनक सीमित धन अनार्वश्यक वस्तुओं पर खर्च हो जार्तार् है ऐसार् करने से धन क अपव्यय होतार् हैं।
    2. मिथ्यार् विज्ञार्पन – विज्ञार्पन एक उग्र विद्यार् बन गर्इ है। क्योंकि इसके द्वार्रार् बहुत-सी मिथ्यार् बार्तों क प्रचार्र कियार् जार्तार् है, जैसे- ‘‘आज ही सौ रूपये भेजकर एक घडी़ व रेडियो प्रार्प्त करें’’ आदि जनतार् इस प्रकार विज्ञार्पनों से प्रभार्वित होकर हार्नि उठार्ती है, क्योंकि इसमें सत्यतार् क अभार्व होतार् है हमार्रे देश में इस प्रकार के विज्ञार्पन बहुत देखने को मिलते है। 
    3. फैशन में परिवर्तन – विज्ञार्पन के द्वार्रार् फैशन में बहुत परिवर्तन आतार् है इस कारण विक्रेतार् और उपभोक्तार् दोनों को हार्नि होती है विक्रेतार् के पार्स जो पुरार्ने फैशन क मार्ल रखार् है, वह बेकार हो जार्तार् है, क्योंकि फैशन में परिवर्तन के कारण उपभोक्तार् उसे नहीं खरीदते उपभोक्तार् के दृष्टिकोण से भी यह हार्निप्रद इसलिए है कि फैशन में परिवर्तन होने के कारण उन्हें अपनी पुरार्नी वस्तुओं में भी कुछ परिवर्तन करवार्ने के लिउ व्यय करनार् पड़तार् है।
    4. उपभोक्तार्ओं पर बोझ – विज्ञार्पन करने में प्रत्येक व्यवसार्यी को धन व्यय करनार् पड़तार् है इस व्यय क भार्र प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से उपभोक्तार्ओं पर पड़तार् है, क्योंकि विक्रेतार् तो इस व्यय को वस्तु के मूल्य मे जोड़ देते हैं।
    5. चंचलतार् – विज्ञार्पन के प्रभार्व से उपभोक्तार् क मन चलार्यमार्न हो जार्तार् है वह उस वस्तु के उपभोग को छोड़ देतार् है जिसके विषय मे उसने पूर्व मे निश्चय कियार् थार् और उस वस्तु क उपभोग करने लगतार् है, जिसके लिए वह विज्ञार्पन से प्रभार्वित होतार् है।
    6. प्रतिस्पर्द्धार् को जन्म – विज्ञार्पन से प्रतिस्पर्द्धार् के क्षेत्र में विस्तार्र होतार् है, जिससे निर्मार्तार्ओं को वस्तुओं के मूल्य में अनार्यार्स कमी करनी पड़ती है इस प्रकार वस्तुओं के मूल्य की कमी की पूर्ति उनकी गुणवत्त्ार्ार् घटार्कर की जार्ती है।
    7. सार्मार्जिक बुरार्इयों में वृद्धि – जो विज्ञार्पन आरार्मदार्यक और विलार्सितार् संबंधी वस्तुओं के संबंध में कियार् जार्तार् है उसके कर्इ सार्मार्जिक दुष्परिणार्म निकलते हैं जब किसी व्यक्ति को किसी एक विशेष चीज के उपभोग की आदत पड़ जार्ती है, तो उसक छूटनार् बहुत कठिन हो जार्तार् है अत: विज्ञार्पनों से सार्मार्जिक बुरार्इयों में वृद्धि होती है।
    8. स्वच्छतार् मे कमी – विज्ञार्पन प्रार्य: दीवार्रों पर लिखकर यार् पोस्टर चिपकाकर कियार् जार्तार् है इसमे चार्रों ओर गंदगी बढ़ जार्ती है तथार् मकानों की दीवार्रों व सड़कें आदि गंदी दिखाइ देने लगती है।
    9. एकाधिकार क भय – जिन वस्तुओं क विज्ञार्पन निरन्तर होतार् रहतार् है, उन वस्तुओं क बार्जार्र में एकाधिकार हो जार्तार् है और अन्य वस्तुएॅं बढ़ियार् किस्म की होने पर भी विज्ञार्पन के अभार्व में बार्जार्र से लुप्त हो जार्ती है इसक दूसरार् प्रभार्व यह होतार् है कि एकाधिकारी मनमार्ने तरीके से वृद्धि कर देतार् है।

    प्रभार्वी विज्ञार्पन के सिद्धार्न्त यार् आवश्यक तत्व

    1. संभार्वित ग्रार्हकों को जार्नने क तत्व- विज्ञार्पन करते समय इस बार्त को ध्यार्न में अवश्य रखनार् चार्हिए कि संभार्वित ग्रार्हक कोैन-से है उनकी शिक्षार्, सार्मार्जिक स्तर, आय के सार्धन, सार्मार्जिक रीति-रिवार्ज आदि को भी ध्यार्न में रखनार् होगार्। 
    2. संभार्वित ग्रार्हकों की समस्यार् के अध्ययन क तत्व-एक प्रभार्वी विज्ञार्पन वह है, जिसमें संभार्वित ग्रार्हकों की समस्यार्ओं को अच्छी प्रकार समझ लियार् जार्ए, तार्कि उन समस्यार्ओं के समार्धार्न हेतु विज्ञार्पन सार्हित्य आवश्यक ब्यौरार् दियार् जार् सके। 
    3. रूचि उत्पन्न करने वार्ले तत्व- विज्ञार्पन ऐसार् होनार् चार्हिए कि पढ़ने वार्ले यार् देखने वार्ले की उस विज्ञार्पन के प्रति रूचि जार्गृह हो जार्ए, अर्थार्त् संभार्वित ग्रार्हको की रूचि को दृष्टिगत रखकर विज्ञार्पन क प्रार्रूप तैयार्र करनार् चार्हिए। 
    4. आकर्षक शीर्षक क तत्व- विज्ञार्पन क शीर्षक आकर्षक होनार् चार्हिए, तार्कि संभार्वित ग्रार्हक क ध्यार्न सरलतार्पूर्वक खींचार् जार् सके। 
    5. सरल एवं सरस भार्षार् क तत्व-विज्ञार्पन की भार्षार् सरल एवं रोचक नहीं होनी चार्हिए, तार्कि सार्धार्रण व्यक्ति भी उसे समझ सके। 
    6. चित्रोंं के प्रयोग क तत्व- चित्र विज्ञार्पन को प्रभार्वकारी बनार्ते है। अत: संभार्वित ग्रार्हक क ध्यार्न आकृष्ट करने के लिउ चित्रों क प्रयोग भी करनार् चार्हिए। 
    7. मार्ल की किस्म पर जोर देने क तत्व- विज्ञार्पन में सबंधित वस्तु यार् मार्ल की किस्म पर विशेष बल कियार् जार्नार् चार्हिए। 
    8. उपयोगितार् सिद्ध करने क तत्व-विज्ञार्पन को प्रभार्वशार्ली बनार्ने के लिए विज्ञार्पन में वस्तु की उपयोगितार् को सिद्ध करनार् चार्हिए, तार्कि संभार्वित ग्रार्हकों को खरीदने के लिए प्रेरित कियार् जार् सके। 
    9. संक्षिप्ततार् क तत्व-विज्ञार्पन में संक्षिप्ततार् पर विशेष बल देनार् चार्हिए ‘‘गार्गर में सार्गर’’ सिद्धार्न्त को ध्यार्न में रखकर विज्ञार्पन क प्रार्रूप तैयार्र करनार् चार्हिए, लेकिन आवश्यक संदेश को अधुरार् नहीं छोड़नार् चार्हिए विज्ञार्पन में पूर्णतार् एवं संक्षिप्ततार् दोनों बार्तों क समार्वेश होनार् चार्हिए। 
    10. वस्तु की कल्पनार् करने के तत्व- विज्ञार्पन इस प्रकार से कयार् जार्ए कि उसे देखकर संभार्वित ग्रार्हक वस्तु की कल्पनार् कर सके। 
    11. वस्तु को रखने में गर्व क तत्व-विज्ञार्पन मे यह स्पष्ट किय जार्नार् चार्हिए कि उस विज्ञार्पनकर्त्त्ार्ार् की वस्तु खरीदनार् एक गर्व की बार्त है। 
    12. नवीनतार् क तत्व-विज्ञार्पन को प्रभार्वकारी बनार्ने के लिए उसमें वस्तु की नवीनतार् क प्रदर्शन कियार् जार्नार् चार्हिए वस्तु में किए गए परिवर्तन नवीनतम सुधार्र आदि को विज्ञार्पन में दर्शार्नार् चार्हिए।

    विज्ञार्पन के मार्ध्यम क चयन-

    ध्यार्न देने योग्य बार्तें विज्ञार्पन के उपर्युक्त मार्ध्यम क चुनार्व एक समस्यार् है विज्ञार्पन क कौन सार् मार्ध्यम सर्वश्रेष्ठ होगार् यार् किस मार्ध्यम क उपयोग कियार् जार्ए, इसके लिए अनेक बार्तों पर एक सार्थ विचार्र करनार् होगार् इनमें निम्न बार्ते विशेष रूप से ध्यार्न देने योग्य हैं-

    1. बार्जार्र – सर्वप्रथम विज्ञार्पक को यह ध्यार्न रखनार् चार्हिए कि वस्तु बार्जार्र किस प्रकार क है आरै वह किन व्यक्तियों तक अपनार् सदेंश पहुॅंचार्नार् चार्हतार् है क्यार् विज्ञार्पन संदेश सभी व्यक्तियों तक पहॅुंचार्नार् है यार् स्त्री, बच्चे, व्यार्पार्री, किसार्न आदि तक इसके लिए उपभोक्तार् अनसु ंधार्न जरूरी है विज्ञार्पन सार्धन के कुछ तरीके ऐसे होते है जो देखने मे एं क से लगते है्र, किन्तु उनको अपनार्ने वार्ले लोग भिन्न-भिन्न हो सकते हैं जैसे पत्रिक द्वार्रार् विज्ञार्पन की दशार् में पत्रिक पढ़ने वार्ले अलग-अलग वर्ग के लोग हो सकते हैं कुछ पत्रिकाएॅं बच्चों के लिए होते हैं कुछ महिलार्ओं के लिए कुछ व्यार्पार्रियों के लिए कुछ सिनेमार् प्रेमियों के लिए आदि इसी प्रकार समार्चार्र-पत्र भी भिन्न-भिनन प्रकार के होते है। अत: विज्ञार्पन के मार्ध्यम क चुनार्व करते समय उपभोक्तार् के प्रकार तथार् मार्ध्यम की प्रकृति को दृष्टिगत रखकर निर्णय लेनार् होगार्।
    2. वितरण प्रणार्ली – विज्ञार्पन के मार्ध्यम क चुनार्व करते समय विज्ञार्पक को अपनी वितरण प्रणार्ली को भी ध्यार्ार्न में रखनार् चार्हिए यदि वस्तु के क्रेतार् किसी क्षेत्र विशेष में हैं, तो समूचे देश में विज्ञार्पन करने क कोर्इ औचित्य नहीं है अत: विज्ञार्पन ऐसे सार्धन से ही करार्यार् जार्ए कि यदि संबंधित वर्ग प्रभार्वित होकर वस्तु खरीदने के लिए प्रेरित हो जार्ए, तो वस्तु उसके शहर यार् स्थार्न पर उपलब्ध हो सके।
    3. मार्ध्यम क चलन – जिस मार्ध्यम से विज्ञार्पन करने की योजनार् हो, वह मार्ध्यम उस स्थार्न यार् क्षेत्र में चलन में भी होनार् चार्हिए जैसे समार्चार्र-पत्र यार् पत्रिक में विज्ञार्पन देनार् है, तो पहले यह सुनिश्चित कर लेनार् चार्हिए कि ऐसे समार्चार्र-पत्र यार् पत्रिक की कितनी प्रतियॉं बिकती हैं यार् उसके कितने ग्रार्हक है टेलीविजन से विज्ञार्पन करार्नार् हो, तो यह देखनार् होगार् कि कितने लोग उसे देखते हैं रेडियो से विज्ञार्पन के बार्रे में भी यह देखनार् होगार् कि कितने लोग उसे देखते हैं रेडियो से विज्ञार्पन के बार्रे में भी यह देखनार् होगार् कि कितने लोग रेडियो सुनते हैं अत: जिस मार्ध्यम क चयन जहॉं सर्वार्धिक हो, उसक चुनार्व करनार् हितकर होगार्।
    4. मार्ध्यम की लार्गत – समार्चार्र-पत्र, पत्रिका, रेडियो, टेलीविजन आदि पर विज्ञार्पन करार्ने की लार्गत, घेरे गए स्थार्न तथार् लिए गये समय के आधार्र पर निर्धार्रित होती है समार्चार्र-पत्र यार् पत्रिक के कवर पृष्ठ यार् मुख पृष्ठ के लिए भिन्न दर होती है तथार् भीतर के पृष्ठ के लिए भिन्न विज्ञार्पन के आकार के अनुसार्र (शब्द संख्यार् यार् पंक्तियॉं अथवार् कॉलम) भी दरें भिन्न-भिन्न होती है टेलीविजन तथार् रेडियों में विज्ञार्पन की दरें प्रति सैकण्ड, प्रति मिनट, प्रति घंटार् आदि के अनुसार्र भिन्न-भिन्न होती है अत: विज्ञार्पक को अपने बजट के अनुसार्र मार्ध्यम क चुनार्व करनार् चार्हिए उसे यह देखनार् चार्हिए कि कहॉं विज्ञार्पन देने से न्यूनतमक लार्गत पर अधिक से अधिक ग्रार्हको तक विज्ञार्पन संदेश पहुॅंचार्यार् जार् सकतार् है।
    5. विज्ञार्पको की रीति – विज्ञार्पन के मार्ध्यम क चुनार्व करते समय विज्ञार्पक को इस बार्त को भी ध्यार्न में रखनार् होगार् कि उसक प्रतिस्पर्द्धी किस मार्ध्यम क सहार्रार् ले रहार् है, अर्थार्त् प्रतिस्पद्धी संस्थार् की विज्ञार्पन रीजि को भी देखार् जार्नार् चार्हिए कभी-कभी विज्ञार्पन की प्रभार्वोत्पार्दकतार् बढ़ार्ने के लिए वही मार्ध्यम अपनार्यार् जार्तार् है, जो प्रतिस्पर्द्धी संस्थार् ने अपनार्यार् है।
    6. विज्ञार्पन क उद्देश्य – विज्ञार्पन के मार्ध्यम क चुनार्व करते,समय यह भली-भॉंति निर्णय कर लेनार् चार्हिए कि विज्ञार्पन क उद्देश्य क्यार् है? यदि तुरंत विज्ञार्पन करार्नार् है, तो टेलीविजन, रेडियो व समार्चार्र-पत्र उपयुक्त हो सकते हैं यदि विज्ञार्पन क उद्देश्य दीर्घकालीन है, तो पत्रिकाओं मे विज्ञार्पन देनार् उपर्युक्त रहतार् है।
    7. संदेश संबंधी आवश्यकतार्एॅं – विज्ञार्पन के उपयुक्त मार्ध्यम क चुनार्व करते समय यह भी ध्यार्न में रखनार् चार्हिए कि सदं ेश संबंधी जरूरतें कयार् है ? उदार्हरणाथ, यदि विज्ञार्पन में चित्र क प्रदर्शन जरूरी है, तो टेलीविजन द्वार्रार् विज्ञार्पन करार्नार् उचित रहेगार् यदि विज्ञार्पन संदेश छोटार् है, तो समार्चार्र-पत्र यार् पत्रिक से काम चल सकतार् है।
    8. ग्रार्हक की स्थिति – विज्ञार्पन के मार्ध्यम क चुनार्व ग्रार्हक की स्थिति के अनुसार्र होनार् चार्हिए अर्थार्त् यह देखनार् चार्हिए कि ग्रार्हक शिक्षित है यार् अशिक्षित, व्यार्पार्री है यार् उद्योगपति, गरीब है यार् धनवार्न, शहरी है यार् ग्रार्मीण उदार्हरणाथ शिक्षित ग्रार्हक की दशार् में समार्चार्र पत्रों, पत्र पत्रिकाओं, टेलीविजन आदि क चयन कियार् जार् सकतार् है।
    9. अन्य बार्तें – उपर्युक्त बार्तों मे अलार्वार् विज्ञार्पन के मार्ध्यम क चुनार्व करते समय कुछ बार्तों को भी ध्यार्न में रखनार् चार्हिए जैसे संभार्वित ग्रार्हक की पसंद, विशेष रूचि, आदत, आय, निवार्स, रीति-रिवार्ज, धामिक व सार्ंस्कृतिक परम्परार्एॅं आदि।

    विज्ञार्पन के प्रमुख कार्य

    1. संभार्वित ग्रार्हको के वस्तुएॅं खरीदने हेतु प्रेरित करनार्।
    2. वर्तमार्न तथार् भार्वी ग्रार्हकों को वस्तुओ तथार् उनके निर्मार्तार्ओं के संबंध में जार्नकारी देनार्। 
    3. नवीन वस्तु को बार्जार्र में प्रविष्ट करनार्, उसमें जनतार् की रूचि जार्ग्रत करनार् तथार् उसकी मॉंग में वृद्धि करनार्। 
    4. वस्तुओ की विद्यमार्न मॉंग को बनार्ए रखनार्। 
    5. स्थार्नार्पन्न वस्तुओ के उपयोग को हतोत्सार्हित करनार्। 
    6. नकली वस्तुओं के प्रचलन के संबंध मे ग्रार्हको को सचेत करनार्।
    7. वस्तुओं के प्रति ग्रार्हकों में विश्वार्स उत्पन्न करार्नार्। 
    8. समार्ज के उपभोग स्तर को ऊॅंचार् उठार्नार्। 
    9. ग्रार्हार्के मे वस्तुओं के संबधं में व्यार्प्त भ्रार्तियों क निवार्रण करनार्। 
    10. वस्तुओं के उयोग के ढंग के बार्रे में ग्रार्हकों को जार्नकारी देनार्।

    विज्ञार्पन के मार्ध्यम यार् सार्धन

    1. प्रेस यार् समार्चार्र पत्रीयक विज्ञार्पन- समार्चार्र पत्रीय विज्ञार्पन आज के युग क सबसे अधिक लोकप्रिय मार्ध्यम है समार्चार्र पत्र यार् पत्रिक मे विज्ञार्पन छपवार्कर विज्ञार्पक अपनी वस्तु, सेवार् यार् विचार्र को जनसार्मार्न्य तक पहुॅंचार् सकतार् है समार्चार्र-पत्र, दैनिक, सार्प्तार्हिक, पार्क्षिक आदि प्रकार के हो सकते हैं प्रेस विज्ञार्पन में पत्रिकाएॅं भी आती है, जो सार्प्तार्हिक, पार्क्षिक, मार्सिक, त्रैमार्सिक, अर्द्धवाषिक यार् वाषिक हो सकती है ये पत्रिकाएॅं सार्मार्न्य हो सकती हैं अथवार् विशिष्ट सार्मार्न्य पत्रिक सभीवर्गो के लिए होती है विशिष्ट वर्गो के लिए होती है, जैसे व्यार्वसार्यिक पत्रिकाएॅं।
    2. बार्ह्य विज्ञार्पन- बार्ह्य विज्ञार्पन क अभिप्रार्य दीवार्रों पर भवनों पर, बसों व रेलगार्ड़ी पर, चौरार्हो पर, वस्तु पर यार् अन्य स्थार्नार्ं पर किए जार्ने वार्ले विज्ञार्पन से है, जो पोस्टर, विज्ञार्पन बोर्ड, विद्युत सजार्वट, सेण्डविच बोर्ड सजार्वट, बसों व रेलगार्डी़ पर, आकाश लेख, स्टीकर, गुब्बार्रों, पर्चे, डार्यरी, कापी पर विज्ञार्पन देनिक उपयोग की वस्तु पर विज्ञार्पन, भेंट स्वरूप दी जार्नी वस्तु के रूप में (चार्बी के गुच्छे, पेंसिल डार्यरी आदि) विज्ञार्पन के रूप में हो सकते हैं।
    3. डार्क द्वार्रार् प्रत्यक्ष विज्ञार्पन- डार्क द्वार्रार् प्रत्यक्ष विज्ञार्पन क अभिप्रार्य ऐसे विज्ञार्पन से है, जिसमें विज्ञार्पक कुछ चुने हुए लोगों को अपनी ओर आकर्षित करने के लिए एनके पार्स स्थार्यी रूप से छपे यार् लिखित संदेश भेजतार् है डार्क द्वार्रार् प्रत्यक्ष विज्ञार्पन की पद्धति में डार्क के मार्ध्यम से ग्रार्हको को गश्ती पत्र, सूची पत्र, मूल्य पुस्तिका, विवरण पत्र आदि भेजे जार्ते है। जिनमें वस्तु, सेवार् यार् विचार्र की जार्नकारी दी जार्ती है यदि किसी व्यक्ति को वस्तु क विवरण पसंद आतार् है, तो वह विवरण भेजने वार्ले से डार्क के मार्ध्यम सो पत्र व्यवहार्र करतार् है और सहमति होने पर आदेश देने पर विज्ञार्पक मार्ल डार्क से भेज देतार् है तथार् विक्रय मूल्य भी डार्क के मार्ध्यम से प्रार्प्त कर लेतार् है विज्ञार्पक प्रार्य: टेलीफोन डार्यरेक्ट्री य अन्य मार्ध्यम से संभार्वित ग्रार्हकों की सूची बनार् लेतार् है, जिन्हे अपनार् सार्हित्य नियमित रूप से भेजार् जार्नार् है इस सूची को डार्क सूची कहते हैं डार्क द्वार्रार् प्रयत्क्ष विज्ञार्पन की सार्मग्री में परिपत्र, व्यार्वसार्यिक जवार्बी लिफार्फे, मूल्य सूची, सूची-पत्र, लीफलेट, फोल्डर्स, पुस्तिकाएॅं, अभिनव भेंट, व्यिक्त्गत पत्र आदि शार्मिल है।
    4. अन्य विज्ञार्पन-  उपर्युक्त सार्धनों के आंतरिक विज्ञार्पन के अनेक दसू रे सार्धन भी है। जो विज्ञार्पक उत्पार्दक की प्रकृति, संभार्वित ग्रार्हक की स्थिति, रूचि, स्थल, क्षेत्र, शोक आदि को ध्यार्न में रखकर प्रयुक्त करते रहते हैं इनमे निम्नलिखित विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं-
      1. रेडियो द्वार्रार् विज्ञार्पन 
      2. टेलीविजन द्वार्रार् विज्ञार्पन
      3. सिनेमार् एवं सिनेमार् स्लार्इड्स द्वार्रार् विज्ञार्पन 
      4. मेले व प्रदर्शनी मे विज्ञार्पन 
      5. ड्रार्मार् व संगीत कार्यक्रम द्वार्रार् विज्ञार्पन 
      6. खेल द्वार्रार् विज्ञार्पन 
      7. लार्उड स्पीकर द्वार्रार् विज्ञार्पन 
      8. प्रदर्शन द्वार्रार् विज्ञार्पन 
      9. उपहार्र यार् भेंट द्वार्रार् विज्ञार्पन
      10. वस्तुएॅं नमूने में नि:शुल्क बॉंटकर विज्ञार्पन 
      11. डार्क तार्र विभार्ग के पोस्ट कार्ड, अंतर्देशीय पत्र, लिफार्फे, मनीआर्डर फाम, तार्र फाम आदि पर मुद्रित विज्ञार्पन।

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