विज्ञार्पन के प्रकार

विज्ञार्पन क काम अपने निश्चित लक्ष्य और उद्देश्य की पूर्ति के लिए संदेश को प्रसार्रित करनार् है। विज्ञार्पन के इन्हीं उद्देश्यों को पूरार् करने के लिए विज्ञार्पनों क अलग-अलग प्रकार से वर्गीकरण कियार् जार्तार् है। प्रमुख रूप से विज्ञार्पनों को चार्र वर्गो में बार्टार् जार् सकतार् है।

  1. बनार्वट के आधार्र पर 
  2. विज्ञार्पनकर्तार् के आधार्र पर 
  3. प्रसार्र क्षेत्र के आधार्र पर 
  4. संदेश के आधार्र पर

बनार्वट के आधार्र पर 

विज्ञार्पनों को बनार्वट के आधार्र पर 4 श्रेणियों में बार्ँटार् जार् सकतार् है। वर्गीकृत विज्ञार्पन, सजार्वटी विज्ञार्पन, वर्गीकृत सजार्वटी विज्ञार्पन और समार्चार्र सूचनार् विज्ञार्पन।

1. वर्गीकृत विज्ञार्पन –

वर्गीकृत विज्ञार्पन प्रार्य: स्थार्नीय आवश्यकतार्ओं और सूचनार्ओं पर आधार्रित होते हैं। इस तरह के विज्ञार्पन, विज्ञार्पन के प्रार्रम्भिक स्वरूप हैं। समार्चार्र पत्रों और पत्रिकाओं में निश्चित पृष्ठ और निश्चित स्थार्न पर एक निश्चित शीर्षक के अन्र्तगत इस तरह के विज्ञार्पन प्रकाशित किए जार्ते हैं। खरीदनार्, बेचनार्, जरूरत है, किरार्ए के लिए खार्ली, रोजगार्र, शैक्षणिक, वैवार्हिक और खोयार्-पार्यार् आदि ऐसे कुछ शीर्षक है जिनके अन्र्तगत वर्गीकृत विज्ञार्पन प्रकाशित किए जार्ते हैं। वर्गीकृत विज्ञार्पन क मूल्य काफी कम होतार् है। इनकी छपाइ सार्मार्न्य होती है और यह संक्षिप्त होते हैं। प्रार्य: इनमें तीन चार्र लार्इनों में पूरी बार्त कह दी जार्ती है। इस तरह के विज्ञार्पनों में प्रतीक चिन्हों यार् चित्रों क इस्तेमार्ल नहीं होतार् और न ही इनमें सजार्वटी अक्षरों यार् मोटे बाडर आदि क ही प्रयोग होतार् है। इनकी लार्गत इनमें प्रयुक्त शब्दों की संख्यार् पर निर्भर होती है। इन विज्ञार्पनों क उद्देश्य उपभोक्तार् को आकृष्ट करनार् नहीं होतार् बल्कि उपभोक्तार् अपनी जरूरत के मुतार्बिक खुद ब खुद इन विज्ञार्पनों में अपने उपयोग की चीज ढूंढ़ लेतार् है। वर्गीकृत विज्ञार्पन एक सार्थ विषयवार्र छार्पे जार्ते हैं।

2. सजार्वटी विज्ञार्पन –

यह सबसे अच्छे विज्ञार्पन मार्ने जार्ते है क्योंकि यह दिखने में आकर्षक, सुन्दर, अधिक प्रभार्वशार्ली तथार् अधिक जार्नकारी देने वार्ले होते हैं इनमें प्रतीक चिन्हों, शीर्षक, मोनोग्रार्म यार् लोगो आदि क प्रयोग होतार् है। इनकी कॉपी आकर्षक होती है, डिजार्इन सुन्दर होती है और चित्र भी बेहद आकर्षक होते हैं। वर्गीकृत विज्ञार्पनों की तरह इनके छपने क स्थार्न पूर्व निर्धार्रित नहीं होतार् बल्कि ये विज्ञार्पनदार्तार् की इच्छार्नुसार्र निर्धार्रित पृष्ठ, स्थार्न और आकार में छार्पे जार्ते हैं। इनकी कीमत भी इनके आकार और छपने वार्ले पृष्ठ के आधार्र पर अलग-अलग होती है। सजार्वटी विज्ञार्पनों को उनकी पूर्णतार् के कारण विस्तृत विज्ञार्पन भी कहार् जार्तार् है। ये विज्ञार्पन उपभोक्तार् पर अधिक असर करते हैं और उपभोक्तार् के अन्दर उत्पार्द के प्रति जिज्ञार्सार् और उसे खरीदने यार् इस्तेमार्ल करने की ललक पैदार् करते हैं। ये विज्ञार्पन उत्पार्द की ब्रार्ण्ड छवि बनार्ने क भी काम करते है और इनके निर्मार्ण में पेशेवर मॉडलों, लोकप्रिय खिलार्ड़ियों यार् फिल्म कलार्कारों यार् अन्य महत्वपूर्ण व्यक्तियों क भी इस्तेमार्ल अतिरिक्त आकर्षण के रूप में कियार् जार्तार् है। प्रार्य: इन विज्ञार्पनों क निर्मार्ण संस्थार्न, कंपनी यार् फर्म यार्नी विज्ञार्पनकर्तार् द्वार्रार् खुद नहीं कियार् जार्तार् बल्कि इनक निर्मार्ण विज्ञार्पन एजेंसियार्ं करती हैं इस कारण ये विज्ञार्पन मंहगे भी होते हैं। टेलीविजन में प्रसार्रित विज्ञार्पनों को भी इसी श्रेणी में रखार् जार् सकतार् है।

3. वर्गीकृत सजार्वटी विज्ञार्पन –

यह विज्ञार्पन भी एक प्रकार के वर्गीकृत विज्ञार्पन ही हैं। लेकिन इनक आकार वर्गीकृत विज्ञार्पनों से बड़ार् होतार् है और इनमें सीमित रूप में विज्ञार्पनकर्तार् क प्रतीक चिन्ह, फोटो आदि भी इस्तेमार्ल होते हैं इनकी बनार्वट में थोड़ी बहुत सजार्वट भी होती है। इन विज्ञार्पनों के लिए भी प्रार्य: पेज और स्थार्न निर्धार्रित होतार् है। इस तरह के विज्ञार्पन ज्यार्दार्तर स्थार्नीय उत्पार्दों के ही होते हैं।

4. समार्चार्र सूचनार् विज्ञार्पन –

समार्चार्र सूचनार् विज्ञार्पनों को एडवरटोरियल (Advertorial) भी कहार् जार्तार् है। यह विज्ञार्पन क अपेक्षार्कृत नयार् रूप है। इसमें विज्ञार्पन को इस प्रकार तैयार्र कियार् जार्तार् है कि वह किसी समार्चार्र की तरह ही लगतार् है। इसक प्रकाशन भी समार्चार्रों की तरह ही समार्चार्रों के बीच में कियार् जार्तार् है। इनकी शुरूआत समार्चार्रों की तरह ही होती है और इनके अन्त में यार् किसी अन्य स्थार्न में संक्षिप्त में ।कण् लिख दियार् जार्तार् है। ये एक प्रकार के छद्म विज्ञार्पन होते हैं। क्योंकि उपभोक्तार् इन्हैं समार्चार्र की तरह पढ़ कर उसी भार्व से इन पर यकीन भी कर लेतार् है। इन विज्ञार्पनों क मूल्य काफी अधिक होतार् है।

विज्ञार्पनकर्तार् के आधार्र पर 

विज्ञार्पनों क एक वर्गीकरण विज्ञार्पनकर्तार् के आधार्र पर भी कियार् जार्तार् है। इस आधार्र पर विज्ञार्पनों को उपभोक्तार् विज्ञार्पन, औद्योगिक विज्ञार्पन, वित्तीय विज्ञार्पन, व्यार्पार्रिक विज्ञार्पन, कृषिसम्बन्धी विज्ञार्पन, सहकारी विज्ञार्पन, रार्जकीय और शिक्षार्प्रद विज्ञार्पन, प्रमार्णसम्बन्धी विज्ञार्पन और सहकारी विज्ञार्पन आदि श्रेणियों में बार्ँटार् जार्तार् है।

1. उपभोक्तार् विज्ञार्पन –

इस तरह के विज्ञार्पन विज्ञार्पनकर्तार् को उपभोक्तार् से सीधे जोड़ते हैं। इस तरह के विज्ञार्पनों में दैनिक जीवन की उपयोगी चीजों, आम उपभोक्तार् वस्तुओं की जार्नकारी होती है। खार्ने पीने की वस्तुओं, कपड़े, सार्बुन, तेल, चार्य, बिस्कुट, चार्कलेट, पेय पदाथ, स्कूटर, कार, साइकिल आदि तमार्म रोजार्नार् जरूरतों की चीजों के विज्ञार्पन इसी तरह के होते हैं ये विज्ञार्पन ब्रार्ंड इमेज भी बनार्ते है और उपभोक्तार् को विज्ञार्पित वस्तुओं को खरीदने के लिए प्रोत्सार्हित भी करते हैं विज्ञार्पन क यह सबसे लोकप्रिय रूप है जो प्रसार्रण आरै प्रकाशन मार्ध्यमों में हर जगह दिखाइ देतार् है। इस तरह के विज्ञार्पनकर्तार् प्रार्य: उपभोक्तार् वस्तुओं के उत्पार्दक, वितरक यार् विक्रेतार् होते हैं। इन विज्ञार्पनों क पूरार् जोर उत्पार्द की विशेषतार्ओं को बतार्ने में होतार् है। इनमें दार्मों में छूट, समार्न दार्म में अधिक वस्तु आदि बार्तें भी बताइ जार्ती हैं।

2. औद्योगिक विज्ञार्पन –

औद्योगिक विज्ञार्पन सार्मार्न्य उपभोक्तार्ओं के लिए नहीं होते बल्कि वे उद्यमियों यार् एक निश्चित वर्ग के लोगों के लिए जार्री किए जार्ते हैं ये विज्ञार्पन उद्यमियों को कच्चे मार्ल, उपकरण, सहार्यक उद्योग आदि के बार्रे में जार्नकारी देते है । उदार्हरणाथ किसी बड़ी स्टील निमातार् कंपनी क विज्ञार्पन जो स्टील के सार्मार्न बनार्ने वार्ले छोटे उत्पार्दकों को लक्ष्य कर जार्री कियार् जार्ए। छोटे उद्योग भी अपनार् कच्चार् मार्ल बेचने के लिए इस तरह के विज्ञार्पनों क सहार्रार् लेते हैं। इन विज्ञार्पनों क संदेश लुभार्वनार् और आकर्षक न होकर तत्थों पर आधार्रित होतार् है। इन विज्ञार्पनों में कही गर्इ बार्तें प्रार्मार्णिक होती हैं इस तरह के विज्ञार्पन प्रसार्रण-प्रकाशन मार्ध्यमों के सार्थ-सार्थ डार्यरेक्ट मेल और कैटलॉग आदि के जरिए भी किए जार्ते हैं।

3. वित्तीय विज्ञार्पन –

बंकै , बीमार् कंपनियार्ँ, वित्तीय संस्थार्एं आदि अपनी वित्तीय गतिविधियों, की जार्नकारी देने, शेयर जार्री करने, पूंजी बार्जार्र से पैसार् उठार्ने आदि कामों के लिए इस तरह के विज्ञार्पन जार्री करती हैं इस तरह के विज्ञार्पनों के जरिए कंपनियार्ँ अपनी वित्तीय उपलब्धियार्ं, अनुमार्नित लार्भ और विस्तार्र योजनार्ओं आदि के बार्रे में बतार्ती हैं। कंपनियों के वाषिक आय व्यय क ब्यौरार् भी इन्हीं विज्ञार्पनों के जरिए उपभोक्तार्ओं को दियार् जार्तार् है। ये विज्ञार्पन एक निश्चित पार्ठक वर्ग के लिए होते हैं और इनमें लिखित संदेश बहुत अधिक होतार् है। ये विज्ञार्पन पत्र पत्रिकाओं में प्रकाशित भी होते हैं और डार्क मार्ध्यम से भी भेजे जार्ते हैं। निजी क्षेत्र की वित्तीय कंपनियार्ँ इस तरह के विज्ञार्पनों क खूब प्रयोग करती हैं।

4. व्यार्पार्रिक विज्ञार्पन –

व्यार्पार्रिक विज्ञार्पनों क सीधार् सम्बन्ध उपभोक्तार् से नहीं होतार् बल्कि वितरकों, थोक विक्रेतार् आदि से होतार् है। इनमें विज्ञार्पनकर्तार्, वितरकों और थोक विक्रेतार्ओं को उत्पार्दों के भण्डार्रण, फुटकर बिक्री योजनार्ओं, वितरकों की नियुक्ति, बिक्री केन्द्र खोलने आदि की जार्नकारी देतार् है। इस तरह के विज्ञार्पन विपणन प्रक्रियार् को काफी प्रभार्वित करते हैं और उसे बढ़ार्ते भी हैं। डिटजेर्ंट पार्ऊडर यार् किसी खार्स ब्रार्ंड के अण्डरगार्मेर्ंटस की थोक खरीद में बड़े उपहार्रों की घोषणार् वार्ले ऐसे विज्ञार्पन पत्र पत्रिकाओं में प्रार्य: देखे जार् सकते हैं।

5. कृषि सम्बन्धी –

कृषि और ग्रार्मीण क्षेत्र में परम्परार्गत कृषि के स्थार्न पर आधुनिक तकनीकों क प्रयोग करने के लिए इस तरह के विज्ञार्पनों क इस्तेमार्ल कियार् जार्तार् है। ये विज्ञार्पन आधुनिक कृषि उपकरणों, नयी तकनीक, बीज-खार्द आदि की जार्नकारी देते हैं। चूंकि देश की आबार्दी क बड़ार् भार्ग कृषि पर निर्भर है इसलिए इन विज्ञार्पनों क महत्व बहुत अधिक होतार् है। कृषि सम्बन्धी विज्ञार्पन पत्र पत्रिकाओं, स्थार्नीय समार्चार्र पत्रों, रेडियो आदि में अधिक किए जार्ते हैं। दूरदर्शन और कुछ अन्य निजी चैनलों में भी कृषि सम्बन्धी कार्यक्रमों मे इस तरह के विज्ञार्पन प्रसार्रित किए जार्ते हैं।

6. रार्जकीय और शिक्षार्प्रद विज्ञार्पन –

इस तरह के विज्ञार्पनों क उद्देश्य बिक्री बढ़ार्नार् न होकर लोगों को नर्इ जार्नकारियार्ँ देनार् होतार् है। जन चेतनार् और जन जार्गृति बढ़ार्ने के लिए भी इस तरह के विज्ञार्पन जार्री किए जार्ते हैं। बार्ल मजदूरी, दहैज जैसी कुप्रथार्ओं के खिलार्फ यार् पर्यार्वरण सरंक्षण, सर्वशिक्षार् अभियार्न आदि की चेतनार् बढ़ार्ने के लिए यार् पोलियो आदि कुछ खार्स रोगों के उपचार्र सम्बन्धी जरूरी जार्नकारियों के लिए भी इस तरह के विज्ञार्पन जार्री होते हैं। समय से कर चुकाने, मतार्धिकार क प्रयोग करने, जनसंख्यार् वृद्वि को रोकने जैसे विषयों को भी इन विज्ञार्पनों के जरिए प्रचार्रित कियार् जार्तार् है।cइन विज्ञार्पनों क उद्देश्य आर्थिक लार्भ कमार्नार् नहीं होतार् बल्कि ये सार्मार्जिक चेतनार् जगार्ने क काम करते हैं। इस तरह के विज्ञार्पन प्रार्य: सरकारी संस्थार्ओं और सार्मार्जिक संगठनों द्वार्रार् जार्री किए जार्ते हैं।प्रमार्ण सम्बन्धी विज्ञार्पन ऐसे विज्ञार्पन होते हैं जिनमें कोर्इ महत्वपूर्ण व्यक्ति किसी खार्स उत्पार्द के गुणों केार् प्रमार्णित करतार् है। जिसमें वह यह बतार्तार् है कि अमुक चीज के प्रयोग से उसे क्यार् फार्यदार् हुआ। इस तरह के विज्ञार्पन उपभोक्तार् को गहराइ से प्रभार्वित करते हैं इसी तरह सहकारी विज्ञार्पन किसी खार्स वस्तु की मार्ंग बढ़ार्ने के लिए विभिन्न संगठनों द्वार्रार् मिलकर जार्री किए जार्तें हैं। इनमें किसी खार्स ब्रार्ंड के बजार्ए मूल वस्तु की खूबियार्ं बताइ जार्ती हैं जैसे मार्ं के दूध के गुण बतार्तार् विज्ञार्पन यार् अण्डों के गुणों के बार्रे में विज्ञार्पन।

प्रसार्र क्षेत्र के आधार्र पर 

प्रसार्र क्षेत्र के आधार्र पर विज्ञार्पनों को 4 श्रेणियों, अन्र्तरार्ष्ट्रीय, रार्ष्ट्रीय क्षेत्रीय और स्थार्नीय में बार्टार् जार् सकतार् है।

1. अन्तर्रार्ष्ट्रीय 

जब कोर्इ एक संगठन यार् कंपनी एक से अधिक देशों में किसी उत्पार्द यार् सेवार् क प्रचार्र करने के लिए विज्ञार्पन करती है तो ऐसे विज्ञार्पनों को अन्र्तरार्ष्ट्रीय विज्ञार्पन कहार् जार्तार् है। ये विज्ञार्पन बेहद खर्चीले होते हैं और इनकी भार्षार् तथार् मार्ध्यम क चयन बहुत सोच समझकर कियार् जार्तार् है। प्रार्य: बहुरार्ष्ट्रीय कंपनियार्ं इस तरह के विज्ञार्पन जार्री करती है और इनक प्रसार्रण प्रार्य: अन्र्तरार्ष्ट्रीय पत्र-पत्रिकाओं और इलैक्ट्रार्निक मार्ध्यमों के जरिए कियार् जार्तार् है। इन विज्ञार्पनों क उद्देश्य ब्रार्ंड को बढ़ार्वार् देनार् है। मुक्त अर्थव्यवस्थार् के दौर में आज कल इस तरह के विज्ञार्पन अधिक लोकप्रिय होने लगे हैं। अन्र्तरार्ष्ट्रीय विमार्न सेवार्एं, होटल समूह, डिजार्इनर घड़ियार्ँ, इलैक्ट्रार्निक उत्पार्द, पेय और भोज्य पदाथ आदि से जुड़े उत्पार्दों के निर्मार्तार् इस तरह के विज्ञार्पनों क सहार्रार् लेते हैं।

2. रार्ष्ट्रीय विज्ञार्पन –

रार्ष्ट्रीय विज्ञार्पन किसी उत्पार्द यार् सेवार् क रार्ष्ट्रीय स्तर पर विज्ञार्पन करते हैं। चूंकि हमार्रे देश में अनेक भार्षार्एं हैं। अत: रार्ष्ट्रीय विज्ञार्पन एक से अधिक भार्षार्ओं में तैयार्र किए जार्ते हैं। एक ही वस्तु को अलग-अलग कंपनियार्ँ उत्पार्दित करती हैं। हर कंपनी को अपने ब्रार्ंड को श्रेष्ठ बतार्ने के लिए इस तरह के विज्ञार्पन क सहार्रार् लेनार् पड़तार् है। सौन्दर्य प्रसार्धन, घरेलू उपकरण, मोबार्इल सेवार्एं आदि ऐसे अनेक विषय है जिनक विज्ञार्पन रार्ष्ट्रीय स्तर पर कियार् जार्तार् है। बंकै आरै वार्णिज्यिक प्रतिष्ठार्न भी इस तरह के विज्ञार्पनों क प्रयोग करते हैं ऐसे विज्ञार्पन प्रकाशन और प्रसार्रण मार्ध्यमों क अधिक उपयोग करते हैं। क्रिकेट मैच के दौरार्न दिखार्ए जार्ने वार्ले विज्ञार्पन भी इसी तरह के होते हैं।

3. क्षेत्रीय विज्ञार्पन –

किसी क्षेत्र विशेष के लिए तैयार्र किए जार्ने वार्ले विज्ञार्पन क्षेत्रीय विज्ञार्पन कहलार्ते हैं। इन विज्ञार्पनों क संदेश क्षेत्रीय भार्षार्ओं में होतार् है। रेडियों, टेलीविजन और क्षेत्रीय पत्र पत्रिकाओं में प्रकाशित होने वार्ले ये विज्ञार्पन स्थार्नीय भार्षार् में होने के कारण अधिक प्रभार्वशार्ली होते है और क्षेत्रीय आवश्यकतार्ओं के अनुरूप उत्पार्दों के बार्रे में होने के कारण इनकी उपयोगितार् भी अधिक होती है।

4. स्थार्नीय विज्ञार्पन –

इनक प्रसार्र क्षेत्र अपेक्षार्कृत बहुत छोटार् होतार् है और ये स्थार्नीय स्तर पर उत्पार्द की बिक्री बढ़ार्ने में काम आते हैं। इनमें आकर्षक छूट, र्इनार्मी योजनार्ओं क जिक्र होतार् है। किसी खार्स तरह के स्थार्नीय उत्पार्द के लोकप्रिय उत्पार्दक क विवरण होतार् है यार् आम जरूरत की चीजों क विवरण होतार् है। ये विज्ञार्पन प्रत्यक्ष बिक्री बढ़ार्ने वार्ले होते है और इनक प्रसार्रण स्थार्नीय पत्र, रेडियो, टीवी, केबल नेटवर्क, बैनर, पोस्टर, स्लार्इड आदि के द्वार्रार् होतार् है।

संदेश के आधार्र पर 

संदेश के आधार्र पर भी विज्ञार्पनों क वर्गीकरण कियार् जार्तार् है। इस आधार्र पर विज्ञार्पनों को चार्र वर्गो में बार्ंटार् जार् सकतार् है।

1. उत्पार्द विषयक –

उत्पार्द क अर्थ है कोर्इ वस्तु यार् सेवार् जिसे प्रार्प्त करने के लिए उपभोक्तार् मूल्य चुकातार् है। किसी उत्पार्द की बिक्री बढ़ार्ने के लिए कियार् जार्ने वार्लार् विज्ञार्पन उत्पार्द विषयक विज्ञार्पन कहलार्तार् है। ये विज्ञार्पन प्रत्यक्ष उत्पार्दों जैसे घरेलू जरूरत की चीजों, कपड़ों, खार्द्य पदाथो आदि तथार् अप्रत्यक्ष उत्पार्दों जैसे वित्तीय, शैक्षणिक, चिकित्सार् सुविधार्ओं आदि के बार्रे में भी हो सकते हैं और विज्ञार्पनकर्तार् द्वार्रार् अपनी पहचार्न बनार्ने के लिए सार्मार्जिक संदेश के रूप में भी हो सकते हैं। बड़ी-बड़ी कंपनियार्ं इस तरह के विज्ञार्पन ‘जनहित के लिए जार्री’ शीर्षक के अन्र्तगत भी करती हैं।

2. व्यवसार्य विषयक –

इस तरह के विज्ञार्पन व्यवसार्य सम्बन्धी आवश्यकतार्ओं के लिए किए जार्ते हैं। विभिन्न कंपनियों के लिए कर्मचार्रियों की आवश्यकतार्, बंकै – बीमार् कंपनियों की योजनार्एं, शिक्षार् संस्थार्नों के विज्ञार्पन आदि इस श्रेणी में आते हैं। ये विज्ञार्पन आम उपभोक्तार् के बजार्ए वर्ग विशेष को लक्ष्य कर बनार्ए जार्ते हैं।

3. मार्ंग सम्बन्धी –

इस तरह के विज्ञार्पन किसी उत्पार्द की मार्ंग पैदार् करने यार् उसे बढ़ार्ने के लिए किए जार्ते हैं जैसे यदि किसी खार्स वार्हन यार् ए सी क विज्ञार्पन यह कहै कि वह वार्हन अन्य उपलब्ध वार्हनों की तुलनार् में अधिक मार्इलेज देतार् है यार् वह ए सी दूसरों की तुलनार् में कम बिजली खर्च करतार् है तो इन विज्ञार्पनों से विज्ञार्पित उत्पार्दों की मार्ंग बढ़ती है। मार्ंग सम्बन्धी विज्ञार्पन प्रार्थमिक मार्ंग वार्ले भी होते हैं जैसे सेहत के लिए रिफार्इंड तेल अधिक अच्छार् है ऐसार् कहने वार्लार् विज्ञार्पन रिफार्इंड तेल की मार्ंग बढ़ार्तार् है किसी खार्स ब्रार्ंड की नहीं। इसलिए इन्हैं प्रार्थमिक मार्ंग वार्लार् विज्ञार्पन कहार् जार्तार् है।

4. लार्भ विषयक 

इस प्रकार के विज्ञार्पन उपभोक्तार् को तुरन्त लार्भ के बार्रे में बतार्ते हैं जैसे एक उत्पार्द के सार्थ एक उत्पार्द मुफ्त यार् फलार्ं उत्पार्द लेने पर फलार्ं मूल्य क एक उपहार्र यार् मोबार्इल लेने पर सिमकार्ड सार्थ में आदि। इस तरह के विज्ञार्पन उत्पार्द की तार्त्कालिक बिक्री बढ़ार्ने मे सहार्यक होते हैं और सीमित अवधि के होते हैं।

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