रेडियोधर्मी प्रदूषण के दुष्प्रभार्व

मार्नव स्वार्स्थ पर प्रभार्व – 

रेडियोधर्मी पदाथ से परमार्णु केन्द्रकों से अल्फार्, बीटार् यार् गार्मार् आदि कण किरणार्ों के रूप में निकलते हैं आयनीकरण द्वार्रार् नार्भिकीय विकिरण जीवित ऊतकों के जटिल अणुओं को विघटित कर कोशिकाओं को नष्ट कर देतार् है। इन मृतकोशिकाओं के कारण चर्मरोग, कैन्सर जैसी समस्यार्एं हो सकती हैं। रेडियोधर्मी प्रदूषण के कारण जीन्स और गुणसूत्रों में हार्निकारक उत्परिवर्तन हो जार्तार् है। बच्चों की गर्भार्शय में ही मृत्यु हो जार्ती है। कभी-कभी बच्चों के विभिन्न अंग विचित्र व असार्धार्रण प्रकार के हो जार्ते हैं। रेडियोधर्मी प्रदूषण के कारण मनुष्यों में अत्यंत खतरनार्क रोग जैसे रक्त कैंसर, अस्थि कैंसर और अस्थि टी.बी. आदि हो जार्ते हैं। 6 अगस्त 1945 को हिरोशिमार् और 9 अगस्त 1945 को नार्गार्सार्की पर अमेरिक ने परमार्णु बम क विस्फोट कर इन दोनों जार्पार्नी शहरों को नष्ट कर दियार् रोडियोधर्मी विकिरण के प्रभार्व से लोग झुलस-झुलस कर मर गये जो जीवित बचे अपार्हिज हो गये। आज 56 सार्ल बार्द भी हिरोशिमार् और नार्गार्सार्की में विकिरण के प्रभार्व से अपार्हिज पैदार् हुए लोग देखे जार् सकते हैं क्योंकि रेडियोधर्मी विकिरण क प्रभार्व कर्इ हजार्र वर्षों तक रहतार् है।

नार्भिकीय विकिरण क रक्षक – 

पोटेशियम आयोडार्इड – परमार्णु बम- आक्रमण से निपटने के लिए अमेरिक खार्द्य और औषधि प्रशार्सन ने दिसंबर 2001 को घोषणार् कियार् की यदि अमेरिक पर परमार्णु बम से हमले हो तो उससे निकलने वार्ले नार्भिकीय विकिरण अवपार्त से बचने के लिए सभी नार्गरिक पौटैशियम आयोडइड की गोलियार्ं सेवन करें, अत: इन गोलियों क प्रचुर भण्डार्र देश में उपलब्ध होनार् चार्हिए।अमेरिक में नार्भिकीय विकिरण से बचार्व के लिए 1945 से शोध चल रहार् है जब अमेरिक ने जार्पार्न के हिरोशिमार् और नार्गार्सार्की शहरों पर परमार्णु बन से आक्रमण कियार् थार्। युनियन आफ कन्र्शन्ड सार्इंटिस्ट्स के नार्भिकीय मार्मलों के विशेषज्ञ वैज्ञार्निक डेविड लोकबम के अनुसार्र परमार्णु बम विस्फोट के थोड़ार् पहले यार् शीध्र विस्फोट के बार्द पोटिशियम आयोडार्इड की गोलियार्ं ले लेने से थार्यरार्इड ग्रंथि मे  कसैं र होने क भय नहीं रहतार्। हमार्रे शरीर में थयरार्इड ग्रंथि को आयोडीन की प्रचुर आवश्यकतार् रहती है। थार्यरार्इड ग्रंथि से स्रार्वित पदाथ हमार्रे शरीर की उपार्पचय पद्धति क नियमन करते हैं। पोटैशियम आयोडार्इड नार्भिकीय विकिरण अवपार्त से थार्यरार्इड की रक्षार् करतार् है विशेष कर बच्चों को जो कि शीध्र ही विकिरण के प्रभार्व से प्रभार्वित होते हैं। लेकिन परमार्णु बम विस्फोट के बार्द पोटैशियम आयोडार्इड लेकर लोगों को निश्चित नहीं हो जार्ने चार्हिए, यह तो त्वरित प्रभार्व से रोकथार्म मार्त्र है अत: विस्फोट के बार्द लोगों को और अधिक विकिरण से बचने के लिए सुरक्षित स्थार्न पर भार्ग जार्नार् चार्हिए।

अन्य प्रार्णि जार्तियों पर प्रभार्व – 

मार्नव के सार्थ-सार्थ नार्भिकीय प्रदूषण अन्य प्रार्णि जार्तियों के स्वार्स्थ्य तथार् उनके विभिन्न व्यवहार्रिक क्रियार्कलार्पों पर प्रतिकूल प्रभार्व डार्लतार् है। नार्भिकीय अवपार्त के फलस्वरूप विभिन्न खनिज तत्वों के रेडियोधर्मी समस्थार्निक (पोटेशियम-40, आयोडिन-131, कैल्शियम-45 आदि) वनस्पतियों द्वार्रार् खनिज अवशेषण के समय मृदार् से अवशोषित कर लिए जार्ते हैं तथार् यह पदाथ श्रृंखलार् के मार्ध्यम से विभिन्न स्तर के जीवों के शरीर में पहुंच कर कुप्रभार्व डार्लते हैं। रेडियोधर्मी पदाथों से संदूषित घार्स, तिनकों, दार्नों आदि खार्ने से पक्षियों के अण्डों में शिशु निर्मार्ण प्रक्रियार् रूक जार्ती है। रेडियोधर्मी पदाथों के जलरार्शियों में प्रभार्वित होने से जलचरों विशेषकर के शिशुओं लावार् तथार् अन्य छोटे जीवों की संख्यार् में अवार्ंछनीय कमी होती है। कुछ रेडियोधर्मी तत्व कीट-पतंगों के जीवन चक्र की अवस्थार्ओं को नष्ट कर देते है।। जिससे इनकी प्रजार्तियों के विलुप्त होने क संकट उत्पन्न हो जार्तार् है।

वनस्पतियों पर प्रभार्व – 

नार्भिकीय अथवार् रेडियोधर्मी प्रदूषण क प्रभार्व वनस्पतियों की प्रचूरतार्, कार्यिकी तथार् गुणवत्तार् (अर्थार्त रेडियोधर्मी पदाथों क पार्दपों के समंपूर्ण तंत्र) पर पड़तार् है। नार्भिकीय विस्फोटों के फलस्वरूप इतनी अधिक मार्त्रार् मे उर्जार् निकलती है जिससे 16 वर्ग किमी. तक के क्षेत्र क स्थार्न पार्दपों के क्रियार्त्मक तंत्रों में ले लेते हैं। जिससे पार्दपों की विभिन्न कियार्एं- जैसे रसार्रोहण, प्रकाश-संश्लेषण, श्वसन, पुष्पन तथार् जनन व्यवधार्नित होते हैं।

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