मजदूरी से संबंधित अधिनियम
श्रमिकों के लिए केवल मजदूरी की मार्त्रार् ही महत्वपूर्ण नहीं होती, बल्कि उसकी अदार्यगी के तरीके, मजदूरी-भुगतार्न के अंतरार्ल, उससे कटौतियार्ं तथार् उसके संरक्षण से संबद्ध अन्य कर्इ बार्तें भी महत्वपूर्ण होती है। मजदूरी की संरक्षार् से संबद्ध कानूनों के बनार्ए जार्ने के पहले मजदूरी के भुगतार्न में कर्इ तरह के अनार्चार्र हुआ करते थे। उदार्हरणाथ, श्रमिकों की इच्छार् नही रहते हुए भी नियोजक उन्हें मजदूरी नकद के बदले प्रकार में लेने के लिए बार्ध्य करते थे। मजदूरी-भुगतार्न के लिए कोर्इ निश्चित अवधि भी नहीं रहती थी। कर्इ नियोजक तो अपनी इच्छार् से एक लंबी अवधि, यहार्ँ तक कि कर्इ महीनों के बीत जार्ने पर ही मजदूरी क भुगतार्न कियार् करते थे। नियोजक कार्य से अनुपस्थिति, खरार्ब काम, औजार्रों यार् समार्नों की क्षति, नियमों और आदेशों के उल्लंघन, वस्तुओं यार् सेवार्ओं की आपूर्ति आदि कर्इ बहार्नों से मजदूरी से मनमार्ने ढंग से कटौतियार्ं भी कियार् करते थे। इन कटौतियों के फलस्वरुप कभी-कभी तो श्रमिकों की मजदूरी की पूरी रार्शि से भी हार्थ धोनार् पड़तार् थार्। मजदूरी-भुगतार्न से संबद्ध इन अनुचित और और स्वेच्छार्चार्री अनार्चरों से श्रमिकों के बीच असंतोष निरंतर बढ़तार् गयार्। औद्योगिकीकरण के प्रसार्र तथार् मजदूरी के संरक्षण की समस्यार् निरंतर गंभीर और व्यार्पक होती गर्इ। मजदूरी की अदार्यगी से संबद्ध अनार्चार्र को रोकने के लिए अलग-अलग देशों में मजदूरी की संरक्षार् के लिए कानून बनार्ए गए। इन्हीं कानूनों में मजदूरी अधिनियम, 1936 भी थार् जिसके बार्रे में अग्रलिखित चर्चार् कर रहे हैं।

मजदूरी भुगतार्न अधिनियम, 1936

1. विस्तार्र 

प्रार्रंभ में यह अधिनियम कारखार्नों और रेलवे-प्रशार्सन में काम करने वार्ले ऐसे कर्मचार्रियों के सार्थ लार्गू थार्, जिनकी मजदूरी 200 रुपये प्रतिमार्ह से अधिक नही थी। बार्द में इसे कर्इ अन्य औद्योगिक प्रतिष्ठार्नों तथार् नियोजनों में लार्गू कियार् गयार्। इनमें मुख्य हैं – (1) ट्रार्म पथ सेवार् यार् मोटर परिवहन-सेवार्, (2) संघ की सेनार् यार् वार्युसेनार् यार् भार्रत सरकार के सिविल विमार्नन विभार्ग में लगी हुर्इ वार्यु-परिवहन सेवार् के अतिरिक्त अन्य वार्यु परिवहन सेवार्, (3) गोदी, घार्ट तथार् जेटी (4) यार्ंत्रिक रूप से चार्लित अंतर्देशीय जलयार्न (5) खार्न, पत्थर-खार्न यार् तेल-क्षेत्र, (6) कर्मशार्लार् यार् प्रतिष्ठार्न, जिसमें प्रयोग, वहन यार् विक्रय के लिए वस्तुएं उत्पार्दित, अनुकूलित तथार् विनिर्मित होती है, तथार् (7) ऐसार् प्रतिष्ठार्न, जिसमें भवनों, सड़कों, पुलों, नहरों यार् जल के निर्मार्ण, विकास यार् अनुरक्षण से संबंद्ध कोर्इ कार्य यार् बिजली यार् किसी अन्य प्रकार की शक्ति के उत्पार्दन, प्रसार्रण यार् वितरण से संबंद्ध कोर्इ कार्य कियार् जार् रहार् हो।

श्रमिकों के लिए केवल मजदूरी की मार्त्रार् ही महत्वपूर्ण नहीं होती, बल्कि उसकी अदार्यगी के तरीके, मजदूरी-भुगतार्न के अंतरार्ल, उससे कटौतियार्ं तथार् उसके संरक्षण से संबद्ध अन्य कर्इ बार्तें भी महत्वपूर्ण होती है।जो न्यूनतम मजदूरी अधिनियम के दार्यरे में आते हैं। इस शक्ति क प्रयोग कर कर्इ रार्ज्य सरकारों ने इस अधिनियम को कृषि तथार् कुछ अन्य असंगठित नियोजनों में भी लार्गू कियार् है। इस तरह, आज मजदूरी भुगतार्न अधिनियम देश के कर्इ उद्योगों, नियोजनों और प्रतिष्ठार्नों में लार्गू है। यह अधिनियम उपर्युक्त प्रतिष्ठार्नों यार् उद्योगों में 142 ऐसे कर्मचार्रियों के सार्थ लार्गू है, जिनकी मजदूरी 6500 रु0 प्रतिमार्ह से अधिक नही है।

मजदूरी की परिभार्षार् 

मजदूरी भुगतार्न अधिनियम में ‘मजदूरी’ की परिभार्षार् निम्नार्ंकित प्रकार से दी गर्इ है- मजदूरी क अभिप्रार्य उन सभी पार्रिश्रमिक (चार्हे वेतन, भत्ते यार् अन्य रूप में) से है, जिन्हें मुद्रार् के रूप में अभिव्यक्त कियार् गयार् है यार् कियार् जार् सकतार् है और जो नियोजन की अभिव्यक्त यार् विवक्षित शर्तो के पूरी किए जार्ने पर नियोजित व्यक्ति को उसके नियोजन यार् नियोजन के दौरार्न किए गए काम के लिए देय होतार् है। ‘मजदूरी’ के अंतर्गत निम्नलिखित सम्मिलित होते हैं –

  1. किसी अधिनिर्णय यार् पक्षकारों के बीच किए गए समझौते यार् न्यार्यार्लय के आदेश के अधीन देय पार्रिश्रमिक; 
  2. ऐसार् पार्रिश्रमिक जिसके लिए नियोजित व्यक्ति अतिकाल कार्य यार् छुट्टी के दिनों यार् अवधि के लिए हकदार्र है; 
  3. ऐसार् कोर्इ पार्रिश्रमिक (चार्हे उसे बोनस यार् किसी अन्य नार्म से पुकारार् जार्ए) जो नियोजन की शर्तो के अधीन देय होतार् है; 
  4. ऐसी कोर्इ रार्शि जो नियोजित व्यक्ति को उसकी सेवार् की समार्प्ति पर किसी कानून, संविदार् यार् लिखित के अधीन कटौतियों के सार्थ यार् कटौतियों के बिनार् देय होती है तथार् उसकी अदार्यगी के लिए अवधि की व्यार्ख्यार् नही की गर्इ है; यार् 
  5. ऐसी कोर्इ रार्शि जिसके लिए नियोजित व्यक्ति किसी लार्गू कानून के अधीन बनाइ गर्इ योजनार् के अंतर्गत हकदार्र होतार् है। 

अधिनियम के प्रयोजनों के लिए ‘मजदूरी’ की परिभार्षार् के अंतर्गत निम्नलिखित को सम्मिलित नही कियार् जार्तार् – 

  1. ऐसार् बोनस, जो नियोजन की शर्तो, अधिनिर्णय, पक्षकारों के बीच समझोते यार् न्यार्यार्लय के आदेश के अधीन देय नही है; 
  2. आवार्स-स्थार्न, प्रकाशार्, जल, चिकित्सकीय परिचर्यार्, अन्य सुख-सुविधार् क मूल्य, ऐसी सेवार् क मूल्य जिसे रार्ज्य सरकार के सार्मार्न्य यार् विशेष आदेश द्वार्रार् मजदूरी की गणनार् से अपवर्जित कर दियार् गयार् हो; 
  3. नियोजक द्वार्रार् किसी पेंशन यार् भविष्य निधि के अंशदार्न के रूप में दी गर्इ तथार् उस पर प्रार्प्त कियार् जार्ने वार्लार् सूद; 
  4. यार्त्रार्-भत्तार् यार् यार्त्रार्-संबंधी रियार्यत क मूल्य; 
  5. किसी नियोजित व्यक्ति को उसके नियोजन की प्रकृति के कारण उस पर पड़े विशेष व्यय को चुकाने के लिए दी गर्इ धनरार्शि; यार् 
  6. ऊपर के भार्ग (4) में वर्णित रार्शि को छोड़कर नियोजन की समार्प्ति पर दियार् जार्ने वार्लार् उपार्दार्न। 

    न्यूनतम मजदूरी अधिनियम 1948 

    भार्रत सरकार द्वार्रार् 1944 में नियुक्त श्रमिक जार्ँच समिति ने देश के विभिन्न उद्योगों में श्रमिकों की मजदूरी और उनके अर्जन क अध्ययन कियार् और बतार्यार् कि लगभग सभी उद्योगों में मजदूरी की दरें बहुत ही निम्न है। समिति ने अनुभव कियार् कि उस समय तक देश के प्रधार्न उद्योगों में भी श्रमिकों की मजदूरी में सुधार्र लार्ने के लिए समुचित प्रयार्स नहीं किए गए। स्थार्यी श्रम-समिति तथार् भार्रतीय श्रम-सम्मेलन में देश के कुछ उद्योगों और नियोजनों में कानूनी तौर पर मजदूरी नियत करने के प्रश्न पर 1943 और 1944 में विस्तार्र से विचार्र-विमर्ष किए गए। समिति और सम्मेलन दोनों ने कुछ नियोजनों में कानून के अंतर्गत न्यूनतम मजदूरी की दरें नियत करने और इसके लिए मजदूरी नियतन संयंत्र की व्यवस्थार् की सिफार्रिश की ।इन अनुशंसार्ओं को ध्यार्न में 148 रखते हुए भार्रत सरकार ने 1948 में न्यूनतम मजदूरी अधिनियम बनार्यार्, जो उसी वर्ष देश में लार्गू हुआ। अधिनियम में समय-समय कुछ संशोधन भी किए गए है। अधिनियम के मुख्य उपबंधों की विवेचनार् नीचे की जार्ती है।

    परिभार्षार्एँ 

    1. मजदूरी – ‘मजदूरी’ क अभिप्रार्य ऐसे सभी पार्रिश्रमिक से है, जिसे मुद्रार् में अभिव्यक्त कियार् जार् सकतार् है तथार् जो नियोजन की संविदार् (अभिव्यक्त यार् विवक्षित) की शर्तो को पूरी करने पर नियोजित व्यक्ति को उसके नियोजन यार् उसके द्वार्रार् किए जार्ने वार्ले काम के लिए देय होतार् है। मजदूरी में आवार्सीय भत्तार् सम्मिलित होतार् है, लेकिन उसमें निम्नलिखित नहीं होते –
      1. आवार्स-गृह, प्रकाश और जल की आपूर्ति तथार् चिकित्सकीय देखभार्ल क मूल्य; 
      2. समुचित सरकार के सार्मार्न्य यार् विशेष आदेश द्वार्रार् अपवर्जित किसी अन्य सुख-सुविधार् यार् सेवार् क मूल्य; 
      3. नियोजक द्वार्रार् किसी पेंशन निधि, भविष्य निधि यार् किसी सार्मार्जिक बीमार्-योजनार् के अंतर्गत दियार् गयार् अंशदार्न; 
      4. यार्त्रार्-भत्तार् यार् यार्त्रार् रियार्यत क मूल्य; 
      5. नियोजन की प्रकृति के कारण किसी नियोजित व्यक्ति को विशेष खर्च के लिए दी जार्ने वार्ली रार्शि; यार् 
      6. सेवोन्मुक्ति पर दियार् जार्नेवार्लार् उपदार्न 
    2. कर्मचार्री – ‘कर्मचार्री’ क अभिप्रार्य ऐसे व्यक्ति से है, जो किसी ऐसे अनुसूचित नियोजन में कोर्इ काम (कुशल, अकुशल, शार्रीरिक यार् लिपिकीय) करने के लिए भार्ड़े यार् पार्रिश्रमिक पर नियोजित हैं, जिसमें मजदूरी की न्यूनतम दरें नियत की जार् चुकी है। कर्मचार्री की श्रेणी में ऐसार् बार्हरी कर्मकार भी सम्मिलित है, जिसे दूसरे व्यक्ति द्वार्रार् उसके व्यवसार्य यार् व्यार्पार्र के लिए बनार्ने, सार्फ करने, धोने, बदलने, अलंकृत करने, पूरार् करने, मरम्मत करने, अनुकूलित करने यार् अन्य प्रकार से विक्रय हेतु प्रसंस्कृत करने के लिए वस्तु यार् सार्मग्री दी जार्ती है, चार्हे वह प्रक्रियार् बार्हरी कर्मकार के घर पर यार् अन्य परिसरों में चलाइ जार्ती हो। कर्मचार्री की श्रेणी में ऐसार् कर्मचार्री भी सम्मिलित है, जिसे समुचित सरकार ने कर्मचार्री घोषित कियार् हो, लेकिन इसके अंतर्गत संघ के सशस्त्र बलों क सदस्य शार्मिल नहीं है। 
    3. समुचित सरकार – ‘समुचित सरकार’ क अभिप्रार्य हैं – (1) केन्द्र सरकार यार् रेल प्रशार्सन के प्रार्धिकार द्वार्रार् यार् अधीन चलार्ए गए किसी अनुसूचित नियोजन के संबंध में यार् किसी भवन, तेलक्षेत्र यार् महार्पत्तन यार् केंद्रीय अधिनियम द्वार्रार् स्थार्पित किसी निगम के संबंध में – केंन्द्रीय सरकार तथार् (2) अन्य अनुसूचित नियोजनों के संबंध में – रार्ज्य सरकार। 
    4. नियोजक – ‘नियोजक’ क अभिप्रार्य ऐसे व्यक्ति से हैं, जो यार् तो स्वयं यार् अन्य व्यक्ति के द्वार्रार् यार् तो अपने किसी अन्य व्यक्ति के लिए यार् अधिक कर्मचार्रियों को ऐसे किसी अनुसूचित नियोजन में नियोजित करतार् है, जिसके लिए मजदूरी की न्यूनतम दरें इस अधिनियम के अधीन नियत की जार् चुकी है। ‘नियोजक’ के अंतर्गत निम्नलिखित सम्मिलित हैं –
      1. कारखार्नार्-अधिनियम 1948 के अधीन कारखार्नार् क प्रबंधक; 
      2. अनुसूचित नियोजन में सरकार के नियंत्रण के अधीन वह व्यक्ति यार् प्रार्धिकारी, जिसे सरकार ने कर्मचार्रियों के पर्यवेक्षण और नियंत्रण के लिए नियुक्त कियार् है। जहार्ँ इस प्रकार के किसी व्यक्ति यार् प्रार्धिकारी को नियुक्त नहीं कियार् गयार् है, वहार्ँ विभार्गार्ध्यक्ष को ही नियोजक मार्नार् जार्एगार्; 
      3. किसी स्थार्नीय प्रार्धिकारी के अधीन ऐसार् व्यक्ति, जिसे कर्मचार्रियों के पर्यवेक्षण और नियंत्रण के लिए नियुक्त कियार् गयार् है। अगर वहार्ँ इस तरह क कोर्इ व्यक्ति नहीं है, तो उस स्थार्नीय प्रार्धिकारी के मुख्य कार्यपार्लक पदार्धिकारी को नियोजक समझार् जार्एगार्; तथार् 
      4. अन्य स्थितियों में ऐसार् व्यक्ति, जो कर्मचार्रियों के पर्यवेक्षण और नियंत्रण के लिए यार् मजदूरी देने के लिए स्वार्मी के प्रति उत्तरदार्यी है। 

    विस्तार्र 

    अधिनियम की अनुसूची से उन नियोजनों क उल्लेख है, जिनमें करने वार्ले श्रमिकों के लिए मजदूरी की न्यूनतम दरें नियत की जार् सकती है। प्रार्रंभ में अधिनियम की अनुसूची के भार्ग एक में सम्मिलित नियोजन थे – (1) ऊनी गलीचे यार् दुषार्ले बुननेवार्ले प्रतिष्ठार्न, (2) धार्नकुट्टी, आटार्-मिल यार् दार्ल-मिल, (3) तंबार्कू (जिसके अंतर्गत बीड़ी बनार्नार् भी शार्मिल है) क विनिर्मार्ण, (4) बार्गार्न, जिसमें सिनकोनार्, रबर, चार्य और कहवार् सम्मिलित है, (5) तेल-मिल, (6) स्थार्नीय प्रार्धिकार, (7) पत्थर तोड़ने यार् फोड़ने के काम, (8) सड़कों क निर्मार्ण यार् अनुरक्षण तथार् भवन-संक्रियार्एं, (9) लार्ख-विनिर्मार्ण, (10) अभ्रक संकर्म, (11) सावजनिक मोटर परिवहन तथार् (11) चर्म रंगाइशार्लार् और चर्म विनिर्मार्ण।

    अधिनियम की अनुसूची के भार्ग दो में सम्मिलित नियोजन है – कृषि यार् किसी प्रकार के कृषिकर्म में नियोजन, जिसमें जमीन की खेती यार् उसे जोतनार्, दुग्ध-उद्योग, किसी कृषि यार् बार्गबार्नी की वस्तु क उत्पार्दन, उसकी खेती, उसे उगार्नार् और काटनार्, पषुपार्लन, मधुमक्खीपार्लन यार् मुर्गीपार्लन तथार् किसी किसार्न द्वार्रार् यार् किसी कृषिक्षेत्र पर कृषिकर्म संक्रियार्ओं के आनुशंगिक यार् उनसे संयोजित (जिसमें वन-संबंधी यार् लकड़ी काटने से संबद्ध संक्रियार्एं तथार् कृषि-पैदार्वार्र को बार्जार्र के लिए तैयार्र करने और भंडार्र यार् बार्जार्र में देने यार् ढोने के कार्य शार्मिल है) कोर्इ भी क्रियार् सम्मिलित है।

    मजदूरी की न्यूनतम दरों क नियतन और पुनरीक्षण 

    1. न्यूनतम मजदूरी-दरों क नियतन – 

    समुचित सरकार (अपने-अपने अधिकार-क्षेत्र में केंद्रीय यार् रार्ज्य सरकार) के लिए अधिनियम की अनुसूची में उल्लिखित तथार् उसमें शार्मिल किए जार्ने वार्ले अन्य नियोजनों में काम करने वार्ले श्रमिकों के लिए मजदूरी की न्यूनतम दरें नियत करनार् आवश्यक है। अनुसूची के भार्ग 2 में सम्मिलित नियोजनों, अर्थार्त् कृषि एवं संबद्ध क्रियार्ओं में समुचित सरकार पूरे रार्ज्य की जगह केवल रार्ज्य के विशेष भार्गों यार् विशिष्ट 150 श्रेणी यार् श्रेणियों के नियोजनों (पूरे रार्ज्य यार् उसके किसी भार्ग) के लिए मजदूरी की न्यूनतम दरें नियत कर सकती है। 

    अलग-अलग अनुसूचित नियोजनों, एक ही अनुसूचित नियोजन में अलग-अलग प्रकार के कामों, वयस्कों, तरुणों, बार्लकों और शिक्षुओं तथार् अलग-अलग क्षेत्रों के लिए मजदूरी की अलग-अलग दरें नियत की जार् सकती है। मजदूरी की न्यूनतम दरें घंटे, दिन, महीने यार् अन्य कालार्वधि के लिए नियत की जार् सकती है। जहार्ँ मजदूरी की दैनिक दर नियत की गर्इ है। वहार्ँ उसे मार्सिक मजदूरी के रूप में गणनार् तथार् जहार्ँ मार्सिक नियत की गर्इ है, वहार्ँ उसे दैनिक मजदूरी के रूप में गणनार् के तरीकों क भी उल्लेख कियार् जार् सकतार् है। जिन नियोजनों में मजदूरी भुगतार्न अधिनियम, 1936 लार्गू है, उनमें मजदूरी कालार्वधि उसी अधिनियम के अनुसार्र निर्धार्रित की जार्एगी। नियत की जार्ने वार्ली मजदूरी-दरें निम्नलिखित प्रकार की हो सकती है। – 

    1. मजदूरी की मूल दर और परिवर्ती निर्वार्हव्यय-भत्तार्; 
    2. निर्वार्हव्यय-भत्तार् के सहित यार् रहित मजदूरी की मूल दर तथार् अनिवाय वस्तुओं की रियार्यती दरों पर आपूर्ति के नकद मूल्य; यार् 
    3. ऐसार् सर्वसमार्वेशी दर, जिसमें मूल दर, निर्वार्हव्यय-भत्तार् तथार् रियार्यतों के नकद मूल्य सम्मिलित हों। 

    2. न्यूनतम मजदूरी दरों के नियतन की प्रक्रियार् – 

    अधिनियम में अनुसूचित नियोजनों में पहली बार्र मजदूरी की न्यूनतम दरें नियत करने की दो प्रक्रियार्ओं की व्यवस्थार् है। पहली प्रक्रियार् में समुचित सरकार समिति यार् समिति के सहार्यताथ विभिन्न क्षेत्रों के लिए उपसमितियों क गठन कर सकती है। समिति की सिफार्रिशों को ध्यार्न में रखकर सरकार संबंद्ध नियोजन के लिए मजदूरी की न्यूनतम दरें ‘रार्जपत्र‘ में प्रकाशित कर नियत कर देती है।
    दूसरी विधि में समुचित सरकार किसी अनुसूचित नियोजन में काम करने वार्ले कर्मचार्रियों के लिए मजदूरी की न्यूनतम दरों के प्रस्तार्व प्रभार्वित हो सकने वार्ले व्यक्तियों के सूचनाथ रार्जपत्र में प्रकाशित कर देती है और उन्हें प्रकाशन की तिथि से दो महीने के अंदर अपने अभ्यार्वेदन देने क मौक देती है। इस संबंध में प्रार्प्त किए गए सभी अभ्यार्वेदनार्ं पर विचार्र करने के बार्द सरकार संबंद्ध अनुसूचित नियोजन के लिए मजदूरी की न्यूनतम दरें रार्जपत्र में प्रकाशित कर नियत कर देती है। दोनों में किसी भी प्रक्रियार् द्वार्रार् नियत की गर्इ मजदूरी की दरें रार्जपत्र में अधिसूचनार् के प्रकाशन के तीन महीने की अवधि के बीत जार्ने के बार्द लार्गू हो जार्ती है।

    3. न्यूनतम मजदूरी दरों क पुनरीक्षण – 

    नियत की गर्इ न्यूनतम मजदूरी दरों की पुनरीक्षण के लिए भी वे ही विधियार्ं अपनाइ जार्ती है, जो उन्हें नियत करने के लिए हैं। मजदूरी दरों के पुनरीक्षण के लिए भी समिति और उपसमिति क गठन यार् रार्जपत्र में प्रस्तार्वों की अधिसूचनार् के प्रकाशन की विधि क प्रयोग कियार् जार् सकतार् है। संशोधित मजदूरी की न्यूनतम दरें भी अलग-अलग अनुसूचित नियोजनों, एक ही अनुसूचित नियोजन में अलग-अलग प्रकार के कामों, वयस्कों, तरुणों और शिक्षुओं तथार् अलग-अलग क्षेत्रों के लिए अलग-अलग हो सकती है। ये दरें भी तीन प्रकार की हो सकती है। – (1) मजदूरी की मूल दर और अलग से परिवर्ती निर्वार्हव्यय-भत्तार्, (2) निर्वार्हव्यय-भत्तार् के सहित यार् उनके बिनार् मजदूरी की मूल दर तथार् अनिवाय वस्तुओं की रियार्यती दरों पर आपूर्ति के नकद मूल्य, तथार् (3) ऐसी सर्वसमार्वेशी दर, जिसमें मूल दर, निर्वार्हव्यय-भत्तार् तथार् रियार्यतों के नकद मूल्य सम्मिलित हों।

    4. स्मिति, उपसमिति, सलार्हकार बोर्ड और केंद्रीय सलार्हकार बोर्ड – 

    समिति, उपसमिति तथार् सलार्हकार बोर्ड प्रत्येक में समुचित सरकार द्वार्रार् मनोनीत अनुसूचित नियोजनों के नियोजकों और कर्मचार्रियों के प्रतिनिधि बरार्बर-बरार्बर की संख्यार् में, तथार् अधिकतम एक-तिहाइ की संख्यार् में स्वतंत्र व्यक्ति होगें। स्वतंत्र व्यक्तियों में एक को समुचित सरकार अध्यक्ष के रूप में नियुक्त करेगी। सलार्हकार बोर्ड क काम समितियों और उपसमितियों के कार्यो को समन्वित करनार् तथार् न्यूनतम मजदूरी-दरों के नियत किए जार्ने और उनमें संशोधन लार्ने के संबंध में समुचित सरकार को सलार्ह देनार् है। केंद्रीय सलार्हकार बोर्ड की नियुक्ति केंद्रीय सरकार करती है। केंद्रीय सलार्हकार बोर्ड में भी अनुसूचित नियोजनों के नियोजकों और कर्मचार्रियों के प्रतिनिधि बरार्बर-बरार्बर के अनुपार्त में तथार् अधिकतम एक-तिहाइ की संख्यार् में स्वतंत्र व्यक्ति होंगे। इन सभी सदस्यों को केंद्रीय सरकार मनोनीत करेगी। केंद्रीय सरकार स्वतंत्र व्यक्तियों में एक को अध्यक्ष के रूप में नियुक्त करेगी। केंद्रीय सलार्हकार बोर्ड क मुख्य काम मजदूरी की न्यूनतम दरों को नियत करने यार् उनमें संशोधन लार्ने तथार् अधिनियम के अंतर्गत अन्य विषयों के बार्रे में सलार्ह देनार् तथार् सलार्हकार बोर्डो के कार्यो को समन्वित करनार् है।

    5. प्रकार में मजदूरी – 

    इस अधिनियम के अंतर्गत नियत की गर्इ मजदूरी को नकद देनार् आवश्यक है, लेकिन जहार्ँ मजदूरी को पूर्णत: यार् आंशिक रूप में प्रकार में देने क प्रचलन है, वहार्ँ समुचित सरकार इस तरह से भुगतार्न दे सकती है। प्रकार में मजदूरी तथार् अनिवाय वस्तुओं की रियार्यती दरों पर आपूर्ति के नकद मूल्य क निर्धार्रण विहित तरीके से करनार् आवश्यक है। जहार्ँ कर्मचार्री मार्त्रार्नुपार्ती कार्य पर नियोजित है तथार् जिसके लिए न्यूनतम कालार्नुपार्ती मजदूरी ही नियत की गर्इ है, वहार्ँ उसे मार्त्रार्नुपार्ती मजदूरी दर के हिसार्ब से मजदूरी दी जार्एगी।

    6. न्यूनतम मजदूरी क भुगतार्न – 

    किसी भी अनुसूचित नियोजन में, जिसमें मजदूरी की दरें नियत की जार् चुकी है।, नियत की गइर् मजदूरी से कम दरों पर मजदूरी क भुगतार्न नहीं कियार् जार् सकतार्। नियत की गर्इ मजदूरी से केवल वे ही कटौतियार्ँ की जार् सकती है।, जो सरकार द्वार्रार् अधिकृत की गर्इ हो। जिन नियोजनों में मजदूरी भुगतार्न अधिनियम, 1936 लार्गू है, उनमें उसी अधिनियम के उपबंधों के अनुसार्र मजदूरी से कटौतियार्ं की जार् सकती है। समुचित सरकार को मजदूरी भुगतार्न अधिनियम, 1936 के उपबंधों को रार्जपत्र में अधिसूचनार् द्वार्रार् उन अनुसूचित नियोजनों में लार्गू करने की शक्ति प्रार्प्त है।, जिनमें मजदूरी की न्यूनतम दरें नियत की गर्इ है।

    7. दो यार् अधिक वर्गो के कामों के लिए मजदूरी – 

    अगर किसी कर्मचार्री से दो यार् अधिक प्रकार के काम लिए जार्ते है।, जिनके लिए मजदूरों की विभिन्न दरें नियत की गर्इ है।, तो उसे प्रत्येक काम के लिए अलग-अलग दरों से मजदूरी दी जार्एगी।

    सार्मार्न्य कार्य के घंटों आदि क नियतन 

    कर्मचार्रियों के लिए दैनिक कार्य के घंटों, अंतरार्ल, सार्प्तार्हिक विश्रार्म तथार् अवकाश-दिवस के कार्य के लिए भुगतार्न-संबंधी उपर्युक्त उपबंध केवल विहित सीमार्ओं और विहित शर्तो के अनुसार्र ही लार्गू होते है। –

    1. अत्यार्वष्यक काम पर यार् आपार्तकालीन स्थिति में काम करने वार्ले कर्मचार्री; 
    2. प्रार्रंभिक यार् अनुपूरक प्रकृति के कामों पर नियोजित कर्मचार्री, जिन्हें निर्धार्रित अवधि की सीमार्ओं के बार्द भी काम करनार् जरूरी होतार् है; 
    3. ऐसे कर्मचार्री, जिनक नियोजन मूलत: आंतरार्यिक है; 
    4. ऐसे कर्मचार्री, जिनक काम तकनीकी कारणों से कर्त्तव्यकाल के समार्प्त होने के पहले ही कियार् जार्नार् जरूरी होतार् है; यार् 
    5. ऐसे कर्मचार्री, जो उन कार्यो पर नियोजित है, जिन्हें प्रार्कृतिक शक्तियों की अनियमित क्रियार्ओं के अलार्वार् अन्य समयों में नही कियार् जार् सकतार्। 

    आगे कोर्इ कर्मचार्री नियोजक के लोप के कारण निर्धार्रित कार्य के दैनिक घंटों से कम घंटों के लिए काम करतार् है, तो भी उसे पूरे दिन के लिए नियत मजदूरी-दर से भुगतार्न कियार् जार्एगार्। लेकिन, अगर वह अपनी अनिच्छार् से यार् अन्य विहित परिस्थितियों के कारण पूरे समय तक काम नहीं करतार्, तो वह पूरे दिन के लिए मजदूरी क हकदार्र नहीं होतार्।

     अन्य उपबंध 

    1. संविदार् द्वार्रार् त्यार्ग पर रोक – ऐसी कोर्इ भी संविदार् यार् समझौतार्, चार्हे वह इस अधिनियम के पहले यार् बार्द में कियार् गयार् हो, जिसके द्वार्रार् कोर्इ कर्मचार्री इस अधिनियम के अंतर्गत मजदूरी की न्यूनतम दर, विशेषार्धिकार यार् रियार्यत को छोड़ देतार् है यार् घटार् देतार् है, वह अकृत और शून्य होतार् है। 
    2. दार्बे – प्रार्धिकारी को गवार्ही लेने, गवार्हों की उपस्थिति के लिए बार्ध्य करने, और दस्तार्वेजों को पेश करने के लिए सिविल प्रक्रियार्-संहितार्, 1908 के अधीन सिविल न्यार्यार्लय की सभी शक्तियार्ँ प्रार्प्त रहती है। प्रार्धिकारी को दंड प्रक्रियार्-संहितार् के प्रयोजनों के लिए सिविल न्यार्यार्लय समझार् जार्एगार्। न्यूनतम मजदूरी यार् अन्य रकम के बकाए की रार्शि के दार्वे से संबद्ध आवेदन कर्इ कर्मचार्री मिलकर एक सार्थ भी दे सकते है।, लेकिन ऐसी स्थिति में हर्जार्ने की अधिकतम रार्शि न्यूनतम मजदूरी के बकाए की स्थिति में कुल रार्शि के दसगुने से अधिक और अन्य स्थितियों में प्रतिव्यक्ति 10 रु0 से अधिक नहीं हो सकती। प्रार्धिकारी किसी अनुसूचित नियोजन में बकाए से संबंद्ध अलग-अलग दिए गए कर्इ आवेदनों पर एक आवेदन के रूप में भी विचार्र कर सकतार् है। 
    3. असंवितरित रकमों क भुगतार्न – अगर किसी कर्मचार्री की मृत्यु के कारण उसे इस अधिनियम यार् इसके अधीन बनार्ए गए नियमों के अंतर्गत देय न्यूनतम मजदूरी यार् अन्य रकम की रार्शि क भुगतार्न नहीं कियार् जार् सक हो, तो नियोजक के लिए इस रार्शि को प्रार्धिकरी के पार्स जमार् करनार् आवश्यक होगार्। प्रार्धिकारी जमार् की गर्इ इस रार्शि क व्यवहार्र विहित तरीके से करेगार्।
    4. जिस्टरों और रिकॉर्डो क अनुरक्षण – अनुसूचित नियोजनों में नियोजकों के लिए अपने कर्मचार्रियों से संबद्ध ब्योरे, उनके कार्य, दी जार्नेवार्ली मजदूरी, मजदूरी की रसीद तथार् अन्य विवरणियों के लिए रजिस्टर और रिकॉर्ड रखनार् आवश्यक है। उनके लिए कर्मचार्रियों को दी जार्ने वार्ली सूचनार् की समुचित व्यवस्थार् करनार् भी अनिवाय है। समुचित मजदूरी-पुस्तिकाओं यार् मजदूरी-पर्चियों को दिए जार्ने के संबंध में नियम बनार् सकती है।
    5. वार्दों क वर्णन – निम्नलिखित स्थितियों में कोर्इ भी न्यार्यार्लय बकाए की मजदूरी यार् अन्य रकम की वसूली के लिए किसी भी वार्द को विचार्राथ नहीं ले सकतार् – 
      • अगर दार्वे की रार्शि के लिए वार्दी यार् उसकी ओर से आवेदन इस अधिनियम के अंतर्गत नियुक्त प्रार्धिकारों के पार्स दियार् जार् चुक हो; 
      • अगर प्रार्धिकारी ने दार्वे की रार्शि के संबंध में वार्दी के पक्ष में निर्देश दिए हो; 
      • अगर प्रार्धिकारी के निदेशार्नुसार्र दार्वे की रार्शि वार्दी को देय नही है; यार् 
      • अगर दार्वे की रार्शि इस अधिनियम के अधीन वसूल की जार् सकती हो। 
    1. निरीक्षक – केंद्र और रार्ज्य सरकारें अपने-अपने अधिकार क्षेत्र में इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए निरीक्षकों की नियुक्ति और उनके कार्य की स्थार्नीय सीमार्ओं क निर्धार्रण कर सकती है। निरीक्षक को भार्रतीय दंडसंहितार् के अर्थ में लोकसेवक समझार् जार्तार् है। निरीक्षक द्वार्रार् किसी दस्तार्वेज यार् वस्तु को उपस्थित करने की मार्ँग करने पर उसे प्रस्तुत करनार् संहितार् की धार्रार्ओं 175 और 176 के अनुसार्र कानूनी रूप से अनिवाय होतार् है। 
    2. कुछ अपरार्धों के लिए शार्सितयार्ँ – अगर नियोजक किसी कर्मचार्री को नियत की गर्इ न्यूनतम मजदूरी से कम दर पर यार् उसे देय अन्य रकम से कम क भुगतार्न करतार् है यार् कार्य के घंटों यार् विश्रार्म-दिवस से संबद्ध नियमों क उल्लंघन करतार् है, तो उसे अधिकतम 6 महीने के कारार्वार्स यार् 500 रुपये तक के जुर्मार्ने यार् दोनों से दंडित कियार् जार् सकतार् है। लेकिन, नियोजक को दंडित करते समय न्यार्यार्लय के लिए दार्वे से संबद्ध मार्मलों में उस पर लगार्ए गए हर्जार्ने की रार्शि को ध्यार्न में रखनार् आवश्यक है। जहार्ँ अधिनियम यार् उसके अंतर्गत बनार्ए गए नियमों के उल्लंघन के लिए दंड क उल्लेख नहीं कियार् गयार् है, वहार्ँ अपरार्ध के लिए नियोजक को अधिकतम 500 रुपये के जुर्मार्ने से दंडित कियार् जार् सकतार् है। 
    3. अपरार्धों क संज्ञार्न – अगर कोर्इ शिकायत न्यूनतम मजदूरी यार् अन्य रकम के बकाए से संबद्ध हो और उस संबंध में प्रार्धिकारी ने उसे पूर्ण यार् आंशिक रूप में स्वीकृत कर दियार् हो, तो कोर्इ भी न्यार्यार्लय समुचित सरकार यार् उसके द्वार्रार् अधिकृत अधिकारी की स्वीकृति के बिनार् उस शिकायत पर विचार्र नहीं कर सकतार्। अगर कोर्इ शिकायत शार्सितयों से संबद्ध हो, तो न्यार्यार्लय उस पर केवल निरीक्षक द्वार्रार् शिकायत करने यार् उसकी स्वीकृति पर ही विचार्र कर सकतार् है। उल्लिखित शार्सितयों के बार्रे में शिकायत इसके लिए मंजूरी दी जार्ने से एक महीने के अंदर और अन्य प्रकार की शार्सितयों के लिए अपरार्ध के अभिकथित दिन से 6 महीने के अंदर ही की जार् सकती है। 
    4. छूट और अपवार्द – समुचित सरकार को मजदूरी संबंधी अधिनियम के उपबंधों को अंशक्त कर्मचार्रियों के सार्थ लार्गू नहीं होने से संबद्ध निदेश देने की शक्ति प्रार्प्त है। अगर किसी अनुसूचित नियोजन में कर्मचार्रियों क इस अधिनियम में नियत की गर्इ मजदूरी की दरार्ं से अधिक दर पर मजदूरी मिलती है, यार् उनकी सेवार् की शर्ते और दशार्एँ इस अधिनियम के अंतर्गत निर्धार्रित शर्तो और दशार्ओं से ऊँचे स्तर की हैं, तो समुचित सरकार इन कर्मचार्रियों, प्रतिष्ठार्नों, यार् किसी क्षेत्र में अनुसूचित नियोजन को अधिनियम के संबद्ध उपबंधों से छूट दे सकती है। 
    5. केंद्रीय सरकार द्वार्रार् निदेश देने की शक्ति – इस अधिनियम के समुचित निष्पार्दन के लिए केन्द्र सरकार रार्ज्य सरकारों को निदेश दे सकती है। 
    6. नियम बनार्ने की शक्ति – केन्द्र सरकार को केंद्रीय सलार्हकार बोर्ड के सदस्यों की पदार्वधि, कामकाज के संचार्लन के लिए प्रक्रियार्, मतदार्न के तरीके, सदस्यतार् में आकस्मिक रिक्तियों के भरे जार्ने और कामकाज के लिए आवश्यक गणपूर्ति के संबंध में नियम बनार्ने की शक्ति प्रार्प्त है।

      समार्न पार्रिश्रमिक अधिनियम, 1976 

      1. विस्तार्र 

      अधिनियम सार्रे भार्रत में लार्गू है। केन्द्रीय सरकार को इसे विभिन्न स्थार्पनों यार् नियोजनों में लार्गू करने की शक्ति प्रार्प्त है। अब तक यह अधिनियम देश के अधिकांश उद्योगों, स्थार्पनों यार् नियोजनों में लार्गू कियार् जार् चुक है। अगर किसी अधिनिर्णय, समझौते यार् सेवार् की संविदार् यार् किसी अन्य कानून के उपबंध इस अधिनियम के उपबंधों के विरोध में हों, तो वहार्ँ इसी अधिनियम के उपबंध लार्गू होंगे।

      2. पुरुष और स्त्री-कर्मकारों को समार्न पार्रिश्रमिक देने के संबंध में नियोजक क दार्यित्व 

      किसी स्थार्पनार् यार् नियोजन में कोर्इ भी नियोजक एक ही यार् समार्न कार्य पर लगे किसी भी कामगार्र को उन दरों से कम अनुकूल दरों पर मजदूरी, चार्हे वह नकद हो यार् प्रकार में, नहीं देगार्, जिन दरों से वैसे ही काम पर लगे दूसरे लिंग के कामगार्रों को देय होती है। इन उपबंधों के अनुपार्लन के लिए कोर्इ भी नियोजक किसी कामगार्र को देय पार्रिश्रमिक की दर को घटार् नही सकतार्। जिस स्थार्पन यार् नियोजन में इस अधिनियम के लार्गू होने के पहले पुरुष और स्त्री-कामगार्रों को एक ही यार् समार्न कार्य के लिए देय पार्रिश्रमिक की दरों में केवल लिंग के आधार्र पर ही भिन्नतार् रही है, वहार्ँ इस अधिनियम के लार्गू होने पर उच्चतम दरें ही लार्गू रहेंगी। अधिनियम के अधीन एक ही यार् समार्न प्रकृति के कार्य से ऐसे कार्य क बोध होतार् है, जिसे अगर पुरुष यार् स्त्री द्वार्रार् समार्न दशार्ओं में कियार् जार्ए, तो उसमें वार्ंछित कोषल, प्रयार्स यार् दार्यित्व समार्न हो, तथार् उसमें किसी पुरुष यार् स्त्री द्वार्रार् किए जार्ने के लिए कोषल, प्रयार्स यार् दार्यित्व-संबंधी भिन्नतार्एं नियोजन की शर्तो एवं दशार्ओं के प्रयोजनों के लिए व्यार्वहार्रिक महत्व के नहीं हो। 

      3. स्त्री और पुरुष कामगार्रों की भरती और नियोजन की शर्तो में भेदभार्व करने क प्रतिशेध 

      उन स्थितियों को छोड़कर जहार्ँ स्त्रियों के नियोजन को प्रतिशिद्ध यार् प्रतिवंधित कियार् गयार् है, इस अधिनियम के प्रार्रंभ होने पर कोर्इ भी नियोजक एक ही यार् समार्न प्रकृति के कार्य पर भरती करते समय स्त्रियों के सार्थ किसी तरह क भेदभार्व नहीं करेगार्। स्त्रियों के सार्थ भेदभार्व की मनार्ही भरती के उपरार्ंत सेवार् की दशार्ओं जैसे पदोन्नति, प्रशिक्षण यार् स्थार्नार्ंतरण के संबंध में भी की गर्इ हैं। लेकिन, भेदभार्व-संबंधी उपर्युक्त उपबंध अनुसूचित जार्तियों, अनुसूचित जनजार्तियों, भूतपूर्व सैनिकों, छंटनी किए गए कर्मचार्रियों यार् अन्य वर्ग यार् श्रेणी के व्यक्तियों से संबंद्ध प्रार्थमिकतार्ओं यार् आरक्षण के सार्थ लार्गू नही होगें। 

      4. सलार्हकार समिति 

      स्त्रियों को रोजगार्र के अधिकाधिक अवसर प्रदार्न करने के उद्देश्य से केन्द्रीय यार् रार्ज्य सरकारें अपने-अपने अधिकार क्षेत्र में एक यार् अधिक सलार्हकार समितियों क गठन कर सकती है। सलार्हकार समिति में समुचित सरकार द्वार्रार् मनोनीत कम-से-कम 10 सदस्य होगे, जिनमें आधी स्त्रियार्ं होगी। समिति क मुख्य कार्य केन्द्रीय सरकार द्वार्रार् विनिर्दिष्ट प्रतिष्ठार्नों यार् नियोजनों में स्त्रियों को नियोजित किए जार् जार् सकने के संबंध में सलार्ह देनार् है। सलार्ह देते समय सलार्हकार समिति को कतिपय बार्तों को ध्यार्न में रखनार् आवश्यक है; जैसे – सम्बद्ध प्रतिष्ठार्न यार् नियोजन में नियोजित व्यक्तियों की संख्यार्, कार्य की प्रकृति, कार्य के घंटे, नियोजन के लिए स्त्रियों की उपयुक्ततार्, स्त्रियों को रोजगार्र के अधिकाधिक अवसर उपलबध करार्ने की आवश्यकतार् तथार् समिति द्वार्रार् समझी जार्ने वार्ली अन्य सुसंगत बार्तें। समिति की सिफार्रिशों पर विचार्र करने तथार् संबद्ध व्यक्तियों को अभ्यार्वेदन क समुचित अवसर प्रदार्न करने के बार्द समुचित सरकार स्त्री-कामगार्रों के नियोजन के संबंद्ध में निर्देश दे सकती है। 

      5. विशिष्ट मार्मलों में अधिनियम क लार्गू नहीं होनार् 

      जहार्ं किसी कानून के अंतर्गत महिलार्ओं के नियोजन की शर्तो और दशार्ओं से संबद्ध विशेष व्यवहार्र की व्यवस्थार् है, वहार्ं इस अधिनियम के उपबंध लार्गू नही होंगे। जहार्ँ बच्चों के जन्म यार् संभार्वित जन्म यार् सेवार्-निवृत्ति, विवार्ह यार् मृत्यु से संबद्ध नियोजन की शर्तो एवं दशार्ओं के संबंध में महिलार्ओं के लिए विशेष व्यवस्थार् की गर्इ है, वहार्ं भी इस अधिनियम के उपबंध लार्गू नहीं होंगे।

      6. घोषणार् करने की शक्ति 

      जहार्ँ समुचित सरकार इस बार्त से संतुष्ट है कि किसी स्थार्पन यार् नियोजन में पुरुष और महिलार्-कामगार्रों के पार्रिश्रमिक में अंतर लिंग के अलार्वार् अन्य कारकों से हैं, वहार्ँ वह इस संबंध में घोषणार् कर सकती है, तथार् इस तरह 156 के अंतर के सिलसिले में नियोजक के किसी भी कृत्य को इस अधिनियम के उपबंधों क उल्लघंन नही समझार् जार्एगार्। 

      7. दार्वे और शिकायतें 

      अधिनियम के अधीन दार्वों एवं शिकायतों तथार् निर्धार्रण के प्रयोजन के लिए समुचित सरकार प्रार्धिकारी की नियुक्ति कर सकती है। ऐसार् पदार्धिकारी से निम्न कोटि क पदार्धिकारी नहीं होगार्। ऐसे दार्वों यार् शिकायतों को विहित तरीके से करनार् आवश्यक है। प्रार्धिकारी के लिए दार्वे यार् शिकायत के संबंध में आवेदक तथार् नियोजक को सुनवाइ क अवसर प्रदार्न करनार् आवश्यक है। ऐसे प्रत्येक प्रार्धिकारी को सार्क्ष्य लेने, गवार्हों को उपस्थित होने के लिए बार्ध्य करने तथार् दस्तार्वेजों को पेश करवार्ने के संबंध में सिविल प्रक्रियार् संहितार् के अधीन सिविल न्यार्यार्लय की शक्तियार्ँ प्रार्प्त है। प्रार्धिकारी के निर्णय से विक्षुब्ध व्यक्ति आदेश के दिन से 30 दिनों के अंदर सरकार द्वार्रार् नियुक्त अपील-प्रार्धिकारी के पार्स अपील कर सकतार् है। 

      8. निरीक्षक  

      अपने-अपने अधिकार क्षेत्र में केन्द्रीय एवं रार्ज्य सरकारें इस अधिनियम तथार् इसके अधीन बनार्ए गए नियमों के अनुपार्लन से संबंद्ध जार्ंच के लिए निरीक्षकों की नियुक्ति कर सकती है। निरीक्षक भार्रतीय दंडसंहितार् के अधीन लोकसेवक होतार् है। निरीक्षक को अपने अधिकार क्षेत्र की स्थार्नीय सीमार्ओं में अग्रलिखित शक्तियार्ँ प्रार्प्त रहती है- (1) किसी भी भवन, कारखार्नार्, परिसर यार् जलयार्न में प्रवेश करने की शक्ति, (2) नियोजक से कामगार्रों के नियोजन से संबद्ध रजिस्टर यार् अन्य दस्तार्वेजों को पेश करवार्ने की शक्ति, (3) अधिनियम के उपबंधों के अनुपार्लन के संबंध में किसी व्यक्ति के सार्क्ष्य लेने की शक्ति, (4) किसी कामगार्र के संबंध में नियोजक, उसके अभिकर्तार् यार् सेवक से पूछतार्छ करने की शक्ति, तथार् (5) किसी रजिस्टर यार् अन्य दस्तार्वेज से नकल लेने की शक्ति। 

      9. शक्तियार्ँ 

      अधिनियम के अंतर्गत कर्इ कृत्यों यार् लोपों के लिए दोषी व्यक्तियों को कारार्वार्स यार् जुर्मार्ने यार् दोनों से दंडित कियार् जार् सकतार् है। विहित रजिस्टर यार् दस्तार्वेज के अनुरक्षण यार् उसे पेश करने में विफलतार् तथार् सार्क्ष्य यार् कर्मकारों के नियोजन से संबंद्ध वार्ंछित सूचनार् देने में विफलतार् यार् संबंद्ध व्यक्तियों को सूचनार्एं देने से रोकने के दोषी व्यक्ति को एक महीने तक के कारार्वार्स यार् 10 हजार्र रुपये तक के जुर्मार्ने यार् दोनों से दंडित कियार् जार् सकतार् है। भरती, पदोन्नति, स्थार्नार्न्तरण, प्रशिक्षण आदि में स्त्रियों के सार्थ भेदभार्व करनार् यार् पुरुष और स्त्री-कर्मकारों को एक ही यार् समार्न कार्य के लिए असमार्न मजदूरी देनार् यार् सलार्हकार समिति द्वार्रार् स्त्री-कर्मकारों के संबंध में दिए गए निर्देशों क पार्लन नहीं करनार् 10 हजार्र से 20 हजार्र रुपये तक के जुर्मार्ने यार् 3 महीने से एक वर्ष तक के कारार्वार्स यार् दोनों से दंडनीय है। निरीक्षक के समक्ष रजिस्टर, दस्तार्वेज यार् सूचनार् नहीं प्रस्तुत करने के दोषी व्यक्ति को 500 रुपये तक के जुर्मार्ने से दंडित कियार् जार् सकतार् है। 

      10. अन्य उपबंध 

      अधिनियम के कुछ अन्य महत्वपूर्ण उपबंध है – 

      1. रजिस्टरों क अनुरक्षण – प्रत्येक नियोजक के लिए अपने कर्मकारों के संबंध में विहित रजिस्टरों और दस्तार्वेजों क रखनार् आवश्यक है। 
      2. कंपनियों द्वार्रार् अपरार्ध – जहार्ँ अधिनियम के अधीन कोर्इ अपरार्ध किसी कंपनी द्वार्रार् की गर्इ हो, वहार्ँ ऐसार् प्रत्येक व्यक्ति जो अपरार्ध के समय कंपनी के व्यवसार्य के संचार्लन के प्रभार्र में हो यार् कंपनी के प्रतिदार्यी हो, अपरार्ध के लिए दोषी समझार् जार्एगार् और उसके विरुद्ध अभियोग चलार्यार् जार्एगार् और दंडित कियार् जार्एगार्। लेकिन, अगर ऐसार् व्यक्ति यह सार्बित कर देतार् है कि अपरार्ध उसके ज्ञार्न के बिनार् कियार् गयार् हो यार् उसने उसे रोकने के लिए तत्परतार् दिखाइ हो, तो उसे दंडित नहीं कियार् जार्एगार्। अगर यह पार्यार् जार्तार् है कि अपरार्ध कंपनी के किसी निदेशक, सचिव यार् अन्य अधिकारी की सहमति यार् मौनार्नुकूलतार् यार् उपेक्षार् के कारण हुआ है, तो उसे ही दंडित कियार् जार्एगार्। 
      3. अपरार्ध क संज्ञार्न – अधिनियम के अंतर्गत किसी अभियोग क विचार्रण मेट्रोपोलिटन दंडार्धिकारी यार् प्रथम श्रेणी के न्यार्यिक दंडार्धिकारी से अन्यून कोटि क न्यार्यार्लय ही कर सकतार् है। अधिनियम के अंतर्गत अभियोग क संज्ञार्न न्यार्यार्लय द्वार्रार् अपने स्वयं के ज्ञार्न यार् समुचित सरकार यार् अधिकृत पदार्धिकारी द्वार्रार् की गर्इ शिकायत के आधार्र पर ही कियार् जार् सकतार् है। इस तरह की शिकायत अपरार्ध से क्षुब्ध व्यक्ति यार् कोर्इ मार्न्यतार्-प्रार्प्त कल्यार्ण संस्थार् यार् संगठन भी कर सकतार् है। 
      4. नियम बनार्ने की शक्ति-अधिनियम के उपबंधों को लार्गू करने के प्रयोजनों के लिए केन्द्र सरकार विहित विषयों से संबंद्ध नियम बनार् सकती है। 

      ठेक श्रम विनियमन अधिनियम, 1970 

      ठेकाश्रम के विनियमन हेतु ठेकाश्रम (विनियमन और उत्सार्दन अधिनियम, 1970 में पार्रित कियार् गयार् जो 10 फरवरी, 1970 से प्रभार्वी हुआ। इसक उद्देश्य ठेके पर काम करने वार्ले श्रमिकों को शोषण से बचार्नार् है। श्रमिकों के स्वार्स्थ्य और कल्यार्ण हेतु समुचित व्यवस्थार् सुनिश्चित करार्नार् अधिनियम क उद्देश्य है। बीस यार् बीस से अधिक कर्मकार जिस प्रतिष्ठार्न में कार्यरत है। यार् थे उन पर यह अधिनियम लार्गू होगार्। लेकिन समुचित सरकार चार्हे तो कम कार्यरत कर्मकारों वार्ले प्रतिष्ठार्न में भी शार्स्कीय रार्जपत्र में अधिसूचनार् द्वार्रार् लार्गू कर सकती है। आन्तरार्यिक यार् आकस्मिक प्रकृति के स्थार्पनों पर वह लार्गू नहीं होगार्। इस सम्बन्ध में सरकार क निश्चय अन्तिम होगार्। यह अधिनियम सावजनिक निजी नियोजकों तथार् सरकार पर लार्गू होतार् है। इसे असंवैधार्निक नहीं मार्नार् गयार् यद्यपि कि यह ठेकेदार्रों पर कतिपय निर्बन्धन और दार्यित्व अधिरोपित करतार् है। स्थार्पन में कार्य/परिणार्म सम्पन्न करार्ने के लिए श्रमिकों को उपलब्ध करार्ने वार्लार् ठेकेदार्र (उपठेकेदार्र समेत) तथार् उनके मार्ध्यम से काम करने के लिए उपलब्ध व्यक्ति ठेक श्रमिक कहलार्तार् है उसे भार्ड़े पर रखार् जार्तार् है। स्थार्पन क यहार्ं व्यार्पक अर्थ है जहार्ँ अभिनिर्मार्ण प्रक्रियार् सम्पन्न की जार्ती है। प्रधार्न नियोजक धार्रार् 1 उपधार्रार् (छ) में परिभार्षित है, नार्म निर्दिष्ट इससे अभिप्रेत है। केन्द्रीय सरकार केन्द्रीय सलार्हकार बोर्ड (ठेकाश्रम) गठित करती है। इसमें एक अध्यक्ष, मुख्य श्रम, आयुक्त, केन्द्रीय सरकार, रेल, खार्न आदि के कम से कम 11 यार् अधिकतम 17 प्रतिनिधि होंगे। कर्मकारों के हितों क प्रतिनिधित्व करने वार्ले सदस्यों की संख्यार् प्रधार्न नियोजकों के प्रतिनिधियों से कम नहीं होगी। इसकी सलार्ह मार्नने के लिए सरकार बार्ध्य नहीं होगी। रार्ज्य सरकार रार्ज्य स्तर पर सलार्ह देने के लिए रार्ज्य सलार्हकार (ठेकाश्रम) बोर्ड गठित करेगी इन दोनों के सदस्यों की पदार्वधि, सेवार् की अन्य शर्ते, अपनाइ जार्ने वार्ली प्रक्रियार् तथार् रिक्त स्थार्नों के भरने की रीति ऐसी होगी जो निर्धार्रित की जार्ये। वे बोर्ड समितियार्ँ गठित करने की शक्ति रखते हैं। धार्रार् 6 के अनुसार्र सरकार अपने रार्जपत्रित अधिकारी को ठेकाश्रम पर नियोजित करने वार्ले स्थार्पनों के पूंजीकरण करने के लिए नियुक्त करेगी और उनके क्षेत्रार्धिकार की सीमार् भी निश्चित कर देगी। निर्धार्रित अवधि में आवेदन देने पर तथार् सार्री शर्तो के पूरार् रहने पर पंजीकरणकर्तार् पंजीकरण करके प्रमार्णपत्र जार्री करेगार् जो लार्इसेन्सिंग क काम करेगार्। पर्यार्प्त कारणों से सन्तुष्ट होने पर विलम्ब से प्रस्तुत किये गये आवेदन पर अधिकारी विचार्र कर सकेगार्। अनुचित ढंग से प्रार्प्त किये गये पंजीकरण क प्रधार्न नियोजक सुनवाइ क अवसर प्रदार्न करके तथार् सरकार के पूर्व अनुमोदन से प्रतिसंहरण भी कियार् जार् सकेगार्। धार्रार् 9 के अनुसार्र पंजीकरण रद्द होने पर ठेक श्रमिकों को नियोजित नहीं कियार् जार्येगार्। धार्रार् 10 के अन्तर्गत समुचित सरकार ठेक श्रमिकों के नियोजन पर प्रतिशेध लगार् सकेगी। 

      समुचित सरकार धार्रार् 11 के अन्तर्गत अनुज्ञार्पन अधिकारियों की यथेश्ठ संख्यार् में उनकी सीमार्ओं को निर्धार्रित करते हुए नियुक्ति करेगी। बिनार् लार्इसेन्स लिए ठेकाश्रम के मार्ध्यम से कार्य नहीं करार्यार् जार्येगार्। सेवार् शर्तो जैसे काम के घण्टों आदि, तथार् निर्धार्रित सिक्योरिटी रार्शि जमार् करने के बार्रे में सरकार नियम बनार्येगी। उसक प्रधार्न नियोजक को अनुपार्लन करनार् होगार्। अनुज्ञार्पन अधिकारी समय पर अनुज्ञार्पन की धार्रार् 13 के अधीन निर्धार्रित फीस देने पर नवीनीकरण कर सकेगार्। अनुज्ञप्ति के दुव्र्यपदेशन, महत्वपूर्ण तथ्यों के गोपन, नियमोल्लंघन से प्रार्प्त किये जार्ने की दशार् में उसक प्रतिसंहरण, निलम्बर तथार् संशोधन भी कियार् जार् सकेगार्। धार्रार् 15 के अधीन किसी आदेश से व्यथित हुआ व्यक्ति 30 दिन के भीतर सरकार द्वार्रार् नार्म निर्देशित व्यक्ति अपील अधिकारी के यहार्ँ अपील कर सकेगार्। 

      धार्रार् 16 में सरकार ठेक श्रमिकों के कल्यार्ण तथार् स्वार्स्थ्य के लिए जलपार्न गृहों की व्यवस्थार् के लिए नियोजकों को आदेश देगी। खार्द्य पदाथो क विवरण तथार् मूल्य आदि के बार्रे में दिशार् निर्देश देगी। धार्रार् 18 के अन्तर्गत, विश्रार्म कक्षों तथार् रार्त में रुकने के लिए स्वच्छ आरार्मदेह प्रकाशयुक्त आनुकल्पिक आवार्सों की व्यवस्थार् करने क नियोजक क दार्यित्व होगार्। इसके अलार्वार् स्वार्स्थ्यप्रद पेय जल की आपूर्ति, पर्यार्प्त संख्यार् में शौचार्लय, मूत्रार्लय, धुलाइ की सुविधार्एं उपलब्ध करार्नार् होगार्। धार्रार् 20 के अनुसार्र फस्र्ट एड फैसिलिटीज की व्यवस्थार् होगी। इन सुविधार्ओं के लिए प्रधार्न नियोजक उपगत व्ययों क प्रधार्न नियोजक ठेकेदार्र से वसूल कर सकतार् है। धार्रार् 21 के अनुसार्र मजदूरी क भुगतार्न ठेकेदार्रों पर होतार्। इसमें ओवर टार्इम वेज भी सम्मिलित होगी। कम भुगतार्न करने पर प्रधार्न नियोजक शेष रार्शि क भुगतार्न करके ठेकेदार्र से वसूल करने क हकदार्र होगार्। इण्डियन एयर लार्इन्स बनार्म केन्द्रीय सरकार श्रम न्यार्यार्लय, के निर्णयार्नुसार्र ठेक श्रमिक मजदूरी न पार्ने की दशार् में मुख्य नियोजक से मजदूरी मार्ँग सकते हैं। 

      धार्रार् 22 में दण्ड की व्यवस्थार् की गर्इ है। जो कोर्इ निरीक्षक के कार्य में बार्धार् पहुंचार्येगार् यार् निरीक्षण हेतु रजिस्टर देने से इन्कार करेगार् वह तीन मार्ह के कारार्वार्स यार् पार्ंच सौ रुपये जुर्मार्नार् यार् दोनों से दण्डित कयार् जस सकेगार्। निर्बन्धनों, अनुज्ञप्ति की शर्तो क उल्लंघन करने वार्लार् नियोजक तीन मार्ह के कारार्वार्स तथार् एक हजार्र रुपये जुर्मार्नार् यार् दोनों से दण्डित होगार्। प्रथम उल्लंघन के दोषसिद्ध होने पर उसके जार्री रहने पर एक सौ रुपये प्रतिदिन के लिए धार्रार् 23 के अन्तर्गत दण्ड कियार् जार् सकेगार्। उल्लंघन सिद्ध करने क भार्र शिकायतकर्तार् पर होगार्। कम्पनी के मार्मले में धार्रार् 25 के अन्तर्गत कम्पनी क भार्रसार्धक तथार् उसके प्रति उत्तरदार्यी व्यक्ति दण्डित कियार् जार् सकेगार्। इसमें निदेशक, प्रबन्धक, प्रबन्ध अभिकर्तार्, आदि आते हैं। प्रेसीडेन्सी मजिस्टे्रट यार् फस्र्ट क्लार्स मजिस्टे्रट से अवर कोर्इ भी न्यार्यार्लय दण्डनीय अपरार्धों क संज्ञार्न यार् विचार्रण नहीं करेगार्। अपरार्ध किये जार्ने की तिथि से निरीक्षक द्वार्रार् यार् उसकी लिखित पूर्व स्वीकृति प्रार्प्त करने वार्ले व्यक्ति द्वार्रार् परिवार्द 90 दिन के भीतर दार्खिल किये जार्ने पर विचार्रण कियार् जार्येगार् अन्यथार् नहीं। निरीक्षकों की जार्ंच आदि करने, लोक अधिकारी की सहार्यतार् लेने, किसी व्यक्ति से परीक्षार् करने, कार्य बार्ंटने वार्ले क नार्म-पतार् जार्नने, रजिस्टर आदि को जब्त करने यार् उनकी प्रतिलिपियार्ं लेने क अधिकार होगार्। 

      रजिस्टरों यार् अन्य अभिलेखों को बनार्ये रखने क दार्यित्व धार्रार् 29 के अन्तर्गत प्रधार्न नियोजक क होगार् जिसमें मजदूरी भुगतार्न आदि की प्रविश्टियार्ं और अन्य वार्ंछित जार्नकारियार्ं आदि दी गर्इ होती है। धार्रार् 30 अधिनियम से असंगत विधियों और करार्रों के प्रभार्व पर प्रकाश डार्लती है। अन्य विधियों में प्रदार्न की गर्इ सुविधार्ओं से इस अधिनियम के अन्तर्गत दी जार्ने वार्ली सुविधार्एं किसी भी दशार् में कम नहीं होगी। धार्रार् 31 समुचित सरकार को अधिनियम के कुछ निर्बन्धनों से कुछ समय किसी स्थार्पनों यार् ठेकेदार्रों को छूट देने की शक्ति प्रदार्न करती है। धार्रार् 32 पंजीकरणकर्तार् अधिकारी, अनुज्ञार्पन में सद्भार्वपूर्वक किये गये कार्य के लिए अभियोजन यार् विधिक कार्यवार्ही नहीं की जार्येगी। यह धार्रार् उन्हें संरक्षण प्रदार्न करती है। धार्रार् 33 केन्द्र सरकार को रार्ज्य सरकार को निर्देश देने की तथार् धार्रार् 34 अधिनियम के उपबन्धों को प्रभार्वी बनार्ने में आने वार्ली कठिनार्इयों को दूर करने की तथार् धार्रार् 34 नियम बनार्ने की शक्ति प्रदार्न करती है। 

      दैनिक मजदूरी पर काम करने वार्ले – ‘‘समार्न कार्य के लिए समार्न वेतन क सिद्धार्न्त’’ दैनिक मजदूरी पर काम करने वार्ले श्रमिकों पर भी लार्गू होतार् है चार्हे उनकी नियुक्ति स्थार्यी स्कीम में हो यार् अस्थार्यी स्कीम में, मजदूरी भुगतार्न में अन्तर अनुच्छेद 14 के अन्तर्गत विभेदकारी मार्नार् जार्येगार्। एक लम्बी अवधि के बार्द ऐसे श्रमिकों को स्थार्यी मार्नार् जार्नार् चार्हिए। 

      बोनस भुगतार्न अधिनियम, 1965 

      अधिनियम क मुख्य उद्देश्य कुछ उद्योगों व संस्थार्नों में काम करने वार्ले व्यक्तियों के लिए बोनस के भुगतार्न की व्यवस्थार् करार्नार् तथार् उससे सम्बन्धित अन्य मार्मलों को सुलझार्नार् है। यह अधिनियम पूरे देश में फैले हुए उन सब कारखार्नों और संस्थार्नों पर लार्गू होतार् है जिनमें लेखार्-वर्ष की अवधि में किसी भी दिन 20 यार् उससे अधिक कर्मचार्री काम करते है। अधिनियम, शिक्षाथियों को छोड़कर काम पर लगे उन सभी कर्मचार्रियों पर लार्गू होतार् है जिनक मार्सिक वेतन यार् मजदूरी 1,600 रुपये तक है किन्तु 1985 में यह सीमार् 1,600 रु0 से बढ़ार्कर 2,500 रु0 प्रतिमार्ह कर दी गर्इ थी। जिन संस्थार्नों तथार् व्यक्तियों पर यह अधिनियम लार्गू नहीं होतार्, वे हैं भार्रतीय जीवन 160 बीमार् निगम, नार्विक गोदी कर्मचार्री, केन्द्र व रार्ज्य सरकारों तथार् स्थार्नीय प्रार्धिकरणों के औद्योगिक संस्थार्न, भार्रतीय रेड क्रार्स सोसार्इटी, समार्ज कल्यार्ण संस्थार्यें (यदि ये लार्भ हेतु स्थार्पित किए गए हैं), विश्वविद्यार्लय, शिक्षार् संस्थार्यें, अस्पतार्ल, इमार्रती कार्यो में ठेके के श्रमिक, भार्रतीय रिजर्व बैंक, औद्योगिक वित्त निगम तथार् अन्य वित्तीय संस्थार्यें, भार्रतीय यूनिट ट्रस्ट, अन्तर्देषीय जल यार्तार्यार्त संस्थार्न जो अन्य किसी देश से गुजरने वार्ले मागो पर कायर् करते है।, सरकारी क्षेत्र के किसी भी संस्थार्न के कर्मचार्री किन्तु सरकारी क्षेत्र के उन उद्यमों को छोड़कर जो विभार्ग द्वार्रार् नहीं चलार्ये जार्ते तथार् निजी क्षेत्र के संस्थार्नों से 20 प्रतिशत की सीमार् तक स्पर्धार् करते है। इसके अतिरिक्त, अधिनियम ऐसे कर्मचार्रियों पर भी लार्गू नहीं होगार् जिन्होनें लार्भ अथवार् उत्पार्दन बोनस की अदार्यगी के लिए 29 मर्इ 1965 से पूर्व अपने मार्लिकों से समझौतार् कर लियार् है। अधिनियम में उल्लिखित बोनस सूत्र 1964 के उस विशेष दिन से लार्गू होगार् जिस दिन से संस्थार् के हिसार्ब क वर्ष आरम्भ होतार् है। अधिनियम की मुख्य धार्रार्यें जिन बार्तों से सम्बन्धित हैं, वे हैं – (1) बोनस के लिए पार्त्रतार्, (2) न्यूनतम तथार् अधिकतम बोनस की अदार्यगी, (3) बोनस के भुगतार्न के लिए समय की सीमार्, (4) बोनस से कटौती, (5) कुल लार्भों की तथार् बोनस के रूप में वितरण योग्य उपलब्ध देशी की गणनार् आदि। 

      जहार्ँ तक बोनस के लिये पार्त्रतार् क सम्बन्ध है, अधिनियम की परिधि में आने वार्ले किसी भी संस्थार्न क ऐसार् कोर्इ भी कर्मचार्री, अधिनियम की धार्रार्ओं के अनुसार्र अपने मार्लिक से बोनस पार्ने क अधिकारी होतार् है जिसने किसी भी लेखार् वर्ष में कम से कम 30 दिन काम कियार् हो। यदि किसी कर्मचार्री को संस्थार्न में जार्लसार्जों, हिंसक व्यवहार्र, चोरी, दुर्विनियोग यार् तोड़-फोड़ करने के कारण नौकरी से पृथक कर दियार् गयार् हो तो उसे बोनस प्रार्प्ति के अयोग्य मार्नार् जार्येगार्। जबरी छुट्टी के दिनों, मजदूरी सहित छुट्टियों, मार्तृत्व कालीन छुट्टियों अथवार् स्थार्यी व्यार्वसार्यिक चोट के कारण अनुपस्थिति के दिनों को कर्मचार्री के काम करने के दिनों के रूप में ही मार्नार् जार्येगार्। नये स्थार्पित संस्थार्नों के कर्मचार्री भी उस लेखार्-वर्ष से बोनस पार्ने के अधिकारी होंगे जिस वर्ष कि उन्हें लार्भ हो अथवार् छठे लेखार् वर्ष से जबकि वे अपनार् उत्पार्दित सार्मार्न बेचनार् आरम्भ करें, इनमें से जो भी पहले हो। जहार्ँ तक बोनस क न्यूनतम तथार् अधिकतम मार्त्रार् क सम्बन्ध है, अधिनियम में 1980 में संशोधन करके इस बार्त की व्यवस्थार् कर दी गर्इ है कि प्रत्येक श्रमिक को स्थार्यी रूप से मजदूरी क 8.33 प्रतिशत यार् 100 रुपये (60 रु0 उन कर्मचार्रियों के लिये जिनकी आयु 15 वर्ष से कम है), जो भी अधिक हो न्यूनतम बोनस के रूप में मिलेगार्। अधिकतम बोनस श्रमिक के वेतन यार् मजदूरी क 20 प्रतिशत होगार्। यहार्ँ यह उल्लेखनीय है कि प्रार्रम्भ में न्यूनतम बोनस वेतन यार् मजदूरी के 4 प्रतिशत की दर से देय थार् परन्तु अनेक संशोधित अधिनियमों के मार्ध्यम से यह सीमार् बढ़ार्कर 8 1/3 प्रतिशत यार् 80 रु0, (बार्द में ये 80 रु0 बढ़ार्कर 100 रु0 किये गये), जो भी अधिक हो, कर दी गर्इ। 8 1/3 प्रतिशत अब न्यूनतम बोनस क स्थार्यी प्रतिशत बन गयार् है। अधिनियम के अनुसार्र बोनस पार्ने के अधिकारी वे कर्मचार्री होते हैं जो 2,500 रु0 प्रतिमार्ह वेतन यार् मजदूरी प्रार्प्त करते हैं। किन्तु बोनस भुगतार्न की गणनार् उसी प्रकार की जार्येगी जैसे उनक वेतन यार् मजदूरी 1,600 रु0 प्रतिमार्ह हो। इस उद्देश्य के लिये वेतन यार् मजदूरी से आशय महँगाइ भत्ते सहित उस मूल मजदूरी से है जो कर्मचार्रियों को देय होती है परन्तु इसमें अन्य भत्ते तथार् समयोपरि कार्य क भुगतार्न सम्मिलित नहीं होतार्। 

      बोनस के भुगतार्न की समय सीमार् के सम्बन्ध में अधिनियम में कहार् गयार् है कि कर्मचार्री को बोनस के रूप में देय सभी धनरार्शियार्ं सार्मार्न्यत: लेखार् वर्ष की समार्प्ति के आठ मार्ह के अन्दर दे दी जार्येगी। बोनस के सम्बन्ध में यदि विवार्द हो तो बोनस क भुगतार्न विवार्द के निपटार्रे यार् पंचार्ट की घोषणार् की तिथि से एक मार्ह के अन्दर कर दियार् जार्येगार्। परन्तु सरकार उचित एवं वैध कारणों के आधार्र पर मार्लिक द्वार्रार् बोनस के भुगतार्न की अवधि को दो वर्ष तक बढ़ार् सकती है। 

      जहार्ँ तक बोनस से कटौतियार्ं करने क सम्बन्ध है, मार्लिक को अधिकार है कि वह किसी कर्मचार्री के गलत आचरण के कारण हुर्इ वित्तीय हार्नि की धनरार्शि को उसी लेखार् वर्ष में कर्मचार्री के बोनस में से काट ले। अधिनियम मार्लिक को यह अनुमति भी प्रदार्न करतार् है कि वह पहले ही अदार् कर दिये गये रिवार्जी यार् अन्तरिम बोनस क समार्योजन अधिनियम के अनुसार्र दिये जार्ने वार्ले बोनस में कर सके। 

      कुल लार्भ की गणनार् तथार् बोनस के रूप में देय उपलब्ध अधिभार्र के सम्बन्ध में अधिनियम की धार्रार्ओं में उस विधि क उल्लेख कियार् गयार् है जिसके अनुसार्र कुल लार्भ की गणनार्, उपलब्ध अधिभार्र क निर्धार्रण तथार् ऐसी अधिभार्र की शुद्ध गणनार् हेतु पूर्व खर्चो क निर्धार्रण कियार् जार्येगार्। पूर्व खर्चो में मूल्य ह्मस, प्रत्यक्ष कर, विकास निधि, पूंजी पर प्रतिफल और कार्य करने वार्ले सार्झेदार्रों तथार् प्रोप्रार्इटरों क पार्रिश्रमिक, सम्मिलित है। अधिनियम की इन धार्रार्ओं में समय-समय पर संशोधन कियार् जार्तार् रहार् है।

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