मजदूरी भुगतार्न अधिनियम 1936

प्रार्रंभ में यह अधिनियम कारखार्नों और रेलवे-प्रशार्सन में काम करने वार्ले ऐसे कर्मचार्रियों के सार्थ लार्गू थार्, जिनकी मजदूरी 200 रुपये प्रतिमार्ह से अधिक नही थी। बार्द में इसे कर्इ अन्य औद्योगिक प्रतिष्ठार्नों तथार् नियोजनों में लार्गू कियार् गयार्। इनमें मुख्य हैं –
(1) ट्रार्म पथ सेवार् यार् मोटर परिवहन-सेवार्,
(2) संघ की सेनार् यार् वार्युसेनार् यार् भार्रत सरकार के सिविल विमार्नन विभार्ग में लगी हुर्इ वार्यु-परिवहन सेवार् के अतिरिक्त अन्य वार्यु परिवहन सेवार्,
(3) गोदी, घार्ट तथार् जेटी
(4) यार्ंत्रिक रूप से चार्लित अंतर्देशीय जलयार्न
(5) खार्न, पत्थर-खार्न यार् तेल-क्षेत्र,
(6) कर्मशार्लार् यार् प्रतिष्ठार्न, जिसमें प्रयोग, वहन यार् विक्रय के लिए वस्तुएं उत्पार्दित, अनुकूलित तथार् विनिर्मित होती है, तथार्
(7) ऐसार् प्रतिष्ठार्न, जिसमें भवनों, सड़कों, पुलों, नहरों यार् जल के निर्मार्ण, विकास यार् अनुरक्षण से संबंद्ध कोर्इ कार्य यार् बिजली यार् किसी अन्य प्रकार की शक्ति के उत्पार्दन, प्रसार्रण यार् वितरण से संबंद्ध कोर्इ कार्य कियार् जार् रहार् हो।

न्यूनतम मजदूरी अधिनियम, 1948 में किए गए एक संशोधन के अनुसार्र समुचित सरकार को इस अधिनियम को उन नियोजनों में भी लार्गू करने की शक्ति दी गर्इ है, जो न्यूनतम मजदूरी अधिनियम के दार्यरे में आते हैं। इस शक्ति क प्रयोग कर कर्इ रार्ज्य सरकारों ने इस अधिनियम को कृषि तथार् कुछ अन्य असंगठित नियोजनों में भी लार्गू कियार् है। इस तरह, आज मजदूरी भुगतार्न अधिनियम देश के कर्इ उद्योगों, नियोजनों और प्रतिष्ठार्नों में लार्गू है। यह अधिनियम उपर्युक्त प्रतिष्ठार्नों यार् उद्योगों में ऐसे कर्मचार्रियों के सार्थ लार्गू है, जिनकी मजदूरी 6500 रु0 प्रतिमार्ह से अधिक नही है। (धार्रार् 1, 2)

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