भूमण्डलीकरण एवं उसके प्रभार्व

भूमण्डलीकरण की परिभार्षार्

भूमण्डलीकरण वह प्रक्रियार् है, जिसके मार्ध्यम से सम्पूर्ण विश्व की अर्थव्यवस्थार् को संसार्र की अर्थव्यवस्थार् के सार्थ एकीकृत करनार् है। वस्तुओं, सेवार्ओं, व्यक्तियों और सूचनार्ओं क रार्ष्ट्रीय सीमार्ओं के आरपार्र स्वतंत्र रूप से संचरण ही वैश्वीकरण यार् भूमण्डलीकरण कहलार्तार् है।

भूमण्डलीकरण क आशय

भूमण्डलीकरण क आशय विभिन्न देशों के बार्जार्रों एवं उनमें बेची जार्ने वार्ली वस्तुओं में एकीकरण से है। जिसमें विदेशी व्यार्पार्र की बढ़ती हुर्इ प्रवृत्ति, उन्नत प्रौद्योगिकी की निकटतार् आदि के कारण विश्व व्यार्पार्र को बढ़ार्वार् मिलतार् है। भूमण्डलीकरण से सम्पूर्ण विश्व में परस्पर सहयोग एवं समन्वय से एक बार्जार्र के रूप में कार्य करने की शक्ति को प्रोत्सार्हन मिलतार् है। भूमण्डलीकरण की प्रक्रियार् के अंतर्गत वस्तुओं एवं सेवार्ओं को एक देश से दूसरे देश में आने एवं जार्ने के अवरोधों को समार्प्त कर दियार् जार्तार् है। इसी प्रकार से सम्पूर्ण विश्व में बार्जार्र शक्तियार्ं स्वतंत्र रूप से कार्य करने लगती हैं। भूमण्डलीकरण के परिणार्मस्वरूप विश्व के सभी देशों में वस्तुओं की कीमत लगभग समार्न होती है। सम्पूर्ण विश्व की अर्थव्यवस्थार् में सभी व्यार्पार्रिक क्रियार्ओं क अन्तर्रार्ष्ट्रीकरण ही भूमण्डलीकरण के स्वरूप क निर्धार्रण करतार् है।

भूमण्डलीकरण के उद्देश्य

भूमण्डलीकरण के मार्ध्यम से विश्व की अर्थव्यवस्थार् को एकीकृत करके स्वतंत्र एवं मुक्त व्यार्पार्र नीति को अपनार्नार् है। सम्पूर्ण देशों को एक आर्थिक अर्थतंत्र के मार्ध्यम से जोड़नार् भूमण्डलीकरण क प्रमुख उद्देश्य है।

भूमण्डलीकरण के द्वार्रार् विश्व-व्यार्पार्र क काफी तीव्र गति से विस्तार्र करनार् है। इसके विस्तार्र के निम्नलिखित उद्देश्य हैं।

  1. भूमण्डलीकरण के कारण स्थार्नीकरण के मौद्रिक घार्टार् को कम करनार्। 
  2. बार्ह्य उदार्रीकरण के तहत विदेशी वस्तुओं, सेवार्ओं, प्रौद्योगिकी और पूँजी के आयार्त से प्रतिबंध हटार्नार्। 
  3. घरेलू उदार्रीकरण के तहत उत्पार्दन, निवेश और बार्जार्र व्यवस्थार् क महत्व बढ़ार्नार्।

भूमण्डलीकरण के मार्ध्यम से विभिन्न देशों के बीच की अर्थव्यवस्थार् में संरचनार्त्मक परिवर्तन, उपभोक्तार् की अभिरूचि, जीवन शैली, और मार्ंग में बदलार्व लार्नार् भूमण्डलीकरण क प्रमुख उद्देश्य रहार् है। भूमण्डलीकरण की प्रक्रियार् से बार्जार्र में आंतरिक एवं बार्ह्य प्रतिस्पर्धार् को तेजी से बढ़ार्ने के लिए एक से अधिक देशों की अर्थव्यवस्थार् को एक स्वतंत्र व्यार्पार्र की संबंधतार् से जोड़नार् रहार् है। भूमण्डलीकरण क सबसे प्रमुख उद्देश्य यह रहार् है कि विश्व की अर्थव्यवस्थार् पद्धति में एक ऐसी प्रक्रियार् को अपनार्यार् जार्य जिससे सम्पूर्ण अर्थव्यवस्थार् को सुनियोजित तरीके से स्वतंत्र व्यार्पार्र संतुलन बनार्यार् जार् सके। विश्व के सभी देश एक मुक्त व्यार्पार्र संगठन की प्रक्रियार् में भार्ग ले सकें। भूमण्डलीकरण के कारण विकसित एवं विकासशील देशों के सार्थ एक सार्मंजस्य की स्थिति को लेकर सम्पूर्ण विश्व की आर्थिक प्रक्रियार् में एक विवार्द की समस्यार् बनी हुर्इ है।

भूमण्डलीकरण की अर्थव्यवस्थार् को भार्रतीय अर्थव्यवस्थार् के द्वार्रार् समझार् जार् सकतार् है। जैसे कि – भार्रतीय अर्थव्यवस्थार् में उत्तरोत्तर उदार्रीकरण के मार्ध्यम से भूमण्डलीकरण करने के लिये किये गये प्रयार्सों एवं विश्व व्यार्पार्र संगठन के प्रार्वधार्नों को लार्गू करने के परिणार्मस्वरूप देश की अर्थव्यवस्थार् पर जो प्रभार्व पड़े हैं, उनकी समीक्षार् तथार् आकलन करके भूमण्डलीकरण क भार्रतीय अर्थव्यवस्थार् पर प्रभार्व को समझार् जार् सकतार् है। भूमण्डलीकरण आपसी प्रतिस्पर्धार् को बढ़ार्वार् देतार् है। जिसके मार्ध्यम से विश्व के सम्पूर्ण देश उदार्रीकरण की प्रक्रियार् में समार्न रूप से भार्ग ले सके एवं सार्मंजस्य बनार्ये रखे। भूमण्डलीकरण के मार्ध्यम से बुनियार्दी आर्थिक उद्देश्यों की प्रार्प्ति होती है। उदार्रीकरण एवं भूमण्डलीकरण के प्रभार्वों की समीक्षार् करने के लिए विश्व व्यार्पार्र संगठन के मुख्य प्रार्वधार्नों क देश के कृषि, उद्योग, अंतर्रार्ष्ट्रीय व्यार्पार्र विनियोग एवं सेवार् आदि क्षेत्रों क आकलन करनार् आवश्यक है।

भूमण्डलीकरण को प्रोत्सार्हित करने वार्ले कारक 

1. तकनीकी ज्ञार्न क विस्तार्र –

भूमण्डलीकरण के कारण विगत 50 वर्षों के दौरार्न तकनीकी ज्ञार्न क काफी तीव्र गति से विकास हुआ है। इस तकनीकी ज्ञार्न के द्वार्रार् परिवहन, प्रौद्योगिकी से अब दूर देशों तक वस्तुओं को कम लार्गत में पहुंचार्नार् संभव हो गयार् है। सूचनार् संचार्र प्रौद्योगिकी ने विश्व की सम्पूर्ण अर्थव्यवस्थार् को एक सुनिश्चित योजनार् से स्पष्ट एवं सरल बनार् दियार् है। संचार्र सूचनार्ओं में जैसे – कम्प्यूटर, इंटरनेट, मोबार्इल, फोन, फैक्स आदि के द्वार्रार् एक-दूसरे की सम्बद्धतार् को काफी सरल बनार् दियार् है। भूमण्डलीकरण के द्वार्रार् सूचनार्, संचार्र एवं प्रौद्योगिकी विकास ने विश्व व्यवस्थार् को विशेष रूप से प्रभार्वित कियार् है।

2. उदार्रीकरण की प्रक्रियार् –

आर्थिक उदार्रीकरण की प्रक्रियार् को आज विश्व के प्रार्य: सभी देशों के द्वार्रार् अपनार्यार् जार् रहार् है। आर्थिक उदार्रीकरण की नीति को अपनार्ये बिनार् कोर्इ भी देश वैश्वीकरण से नहीं जुड़ सकतार्। उदार्रीकरण क अर्थ है विदेशी पूँजी को पूर्ण उदार्रतार् के सार्थ अपने देश में निवेश की अनुमति प्रदार्न करनार्। भार्रत ने 1991-92 र्इ. में आर्थिक उदार्रीकरण की नीति को अपनार्यार्। 1990 र्इ. के दशक में ही भार्रत सहित कर्इ विकासशील रार्ष्ट्रों ने उदार्रीकरण की नीति को अपनार्कर भूमंडलीकरण को बढ़ार्वार् दियार् है। उदार्रीकरण से विकसित एवं विकासशील देशों के बीच एक स्वतंत्र एवं बार्धार्रहित मुक्त विश्व व्यार्पार्र बार्जार्र व्यवस्थार् में सुधार्र सम्भव हुआ है।

3. बहुरुरार्ष्ट्रीय कंपनियों क विस्तार्र –

विश्व के सभी देशों को एक दूसरे से जोड़ने में बहुरार्ष्ट्रीय कंपनियों क विशेष योगदार्न है क्योंकि ये कंपनियार्ं सुविधार् के अनुसार्र किसी भी देश में स्थार्पित कर दी जार्ती हैं। विश्व के देशों में जहार्ं पर सस्तार् श्रम एवं स्थार्पित करने के अन्य सस्ते सार्धन उपलब्ध होते हैं। वहार्ं ये स्थार्पित कर दी जार्ती हैं। जिससे लार्गत में कमी आती है। इसके सार्थ ही प्रतियोगितार् क कम सार्मनार् करनार् पड़तार् है। बहुरार्ष्ट्रीय कम्पनियार्ं वस्तुओं, सेवार्ओं एवं सूचनार्ओं को विश्व स्तर पर उपलब्ध करार्ती हैं। उदार्हरण के लिए एक बहुरार्ष्ट्रीय कम्पनी अमेरिक के अनुसंधार्न केन्द्र में अपने उत्पार्दों क डिजार्इन एवं आकार तैयार्र करती है। लेकिन श्रम सस्तार् होने के कारण चीन में पुर्जों को तैयार्र कियार् जार्तार् है। बहुरार्ष्ट्रीय कम्पनियार्ं अलग-अलग वस्तु क उत्पार्दन एवं निर्मार्ण करती हैं। जिससे कि वस्तु की उत्पार्दन लार्गत में कमी आती है। इन कम्पनियों के द्वार्रार् विभिन्न वस्तु के उत्पार्दन से अधिकतम लार्भ प्रार्प्त कियार् जार्तार् है। बहुरार्ष्ट्रीय कम्पनियों के विस्तार्र ने भी भूमंडलीकरण को बढ़ार्वार् दियार् है।

4. विदेशी व्यार्पार्र में विस्तार्र –

विदेशी व्यार्पार्र के विस्तार्र से भूमण्डलीकरण की प्रक्रियार् नियंत्रित हुर्इ है। द्वितीय विश्व युद्ध के बार्द लगभग सभी देशों के विदेशी व्यार्पार्र में वृद्धि हुर्इ है। विश्व व्यार्पार्र संगठन के द्वार्रार् घरेलू बार्जार्र को भी विश्व बार्जार्र में वस्तुओं एवं सेवार्ओं को भेजने क अवसर मिलार् है। विश्व बैंक अन्तर्रार्ष्ट्रीय मुद्रार् कोष आदि अंतर्रार्ष्ट्रीय संस्थार्ओं ने इस हेतु महत्वपूर्ण योगदार्न दियार् है। विश्व व्यार्पार्र के मार्ध्यम से उत्पार्दन की मार्त्रार् में वृद्धि हुर्इ है। इसके सार्थ ही प्रत्येक देश के उत्पार्दकों को प्रतियोगितार् में समार्न अवसर मिलार् है।

5. व्यार्पार्र एवं प्रशुल्क सम्बन्धी सार्मार्न्य समझौतार् गैट –

द्वितीय विश्वयुद्ध के पश्चार्त विश्व की प्रमुख शक्तियों ने विभिन्न देशों के बीच व्यार्पार्र अवरोधों को कम करने और आपसी विवार्दों को निपटार्ने के लिए अनेक नियम बनार्ने पर वातार्एं आरंभ की। इन वातार्ओं क साथक परिणार्म 1948 र्इ. में व्यार्पार्र और प्रशुल्क सम्बन्धी सार्मार्न्य समझौतार् (General Agriment on Trade and Tarrif, GATT) की स्थार्पनार् के रूप में सार्मने आयार्। गैट के प्रशार्सन क निरीक्षण करने के लिए स्विटजरलैण्ड के जेनेवार् नगर में इसक मुख्यार्लय स्थार्पित कियार् गयार्।

गैट के अन्तर्गत व्यार्पार्र एवं प्रशुल्क समझौतों हेतु समय-समय पर बहुपक्षीय वातार्ओं के दौर आयोजित किये गये। गैट क छठार् दौर 1964-67 र्इ. तक चलार् जो केनेडी रार्उण्ड कहलार्यार्। सार्तवार् दौर (1973-79 र्इ.) तक चलार् जो टोकियो रार्उण्ड कहलार्यार्। आठवार् दौर (1986-93 र्इ.) तक चलार् जो उरूग्वे रार्उण्ड कहलार्यार्। यह आठवार् दौर गैट के इतिहार्स में अत्यधिक महत्वपूर्ण सार्बित हुआ। इसमें गैट के महार्निदेशक आर्थर डंकेल महोदय ने व्यार्पार्र में उदार्रीकरण हेतु एक प्रस्तार्व तैयार्र कियार् जो डंकेल प्रस्तार्व कहलार्तार् है इसमें 117 देशों ने हस्तार्क्षर किये थे।

6. विश्व व्यार्पार्र संगठन की स्थार्पनार् –

विश्व व्यार्पार्र संगठन विभिन्न देशों के मध्य संतुलन एवं समझौते के परिणार्म के रूप में एक व्यवस्थार् की स्थार्पनार् थी। विभिन्न देशों के मध्य असंतुलन की समस्यार् को दूर करने हेतु उदार्रीकरण की प्रक्रियार् एवं मुक्त व्यार्पार्र को लार्गू करने क विश्व व्यार्पार्र संगठन मार्ध्यम बनार्। 15 अप्रेल 1994 र्इ. को जार्री मरार्कश (मोरक्को) घोषणार् पत्र में विभिन्न मुद्दों में एक महत्वपूर्ण मुद्दार् विश्व व्यार्पार्र संगठन क थार्। इसके अनुसार्र 1 जनवरी 1995 को विश्व व्यार्पार्र संगठन की स्थार्पनार् की घोषणार् की गर्इ। इसने गैट (GATT) क स्थार्न लियार्। घोषणार् के अनुरूप 1 जनवरी 1995 को विश्व व्यार्पार्र संगठन की स्थार्पनार् हो गर्इ। भार्रत के अतिरिक्त 85 देशों ने विश्व व्यार्पार्र संगठन की स्थार्पनार् की सहमति पर हस्तार्क्षर किये थे। विश्व व्यार्पार्र संगठन की स्थार्पनार् के मार्ध्यम से विभिन्न देशों के मध्य व्यार्पार्र में अधिक विस्तार्र संभव हुआ। इसने भूमंडलीकरण को बढ़ार्वार् दियार् है।

भूमण्डलीकरण क विकास

भूमण्डलीकरण की शुरूआत 16वीं शतार्ब्दी के उपनिवेश काल से ही मार्नी जार्ती है। इस अव्यवस्थित प्रक्रियार् के विभिन्न प्रकार के गति एवं अवरोधों के बीच यह व्यवस्थार् चलती रही। इस प्रक्रियार् के चलते विश्व व्यार्पार्र में घटक देशों को बहुत परेशार्नी क सार्मनार् करनार् पड़ार्। आर्थिक एकीकरण को प्रभार्वशार्ली बनार्ने के लिए सन 1970 र्इ. के दशक से सकारार्त्मक प्रयार्स किये गये।

भूमण्डलीकरण के द्वार्रार् इस काल में अंतर्रार्ष्ट्रिय पूंजी बार्जार्र में आशार्तीत वृद्धि हुर्इ। सन् 1980 र्इ. के दशक में अनेक विकासशील देशों में आर्थिक संकट आयार् और इन देशों ने अंतर्रार्ष्ट्रिय मुद्रार् कोष से ऋण पार्ने के लिए उसके द्वार्रार् सुझार्ये गये स्थार्नीकरण एवं ढार्ंचार्गत समार्योजन कार्यक्रमों को लार्गू कियार्।

भूमण्डलीकरण के विकास की प्रक्रियार् में शतार्ब्दी के अंतिम दशक में अधिक तीव्रतार् आर्इ। 1990 र्इ. के दशक से भूमण्डलीकरण को व्यवस्थित रूप प्रदार्न कियार् गयार्। विश्व व्यार्पार्र संगठन की स्थार्पनार् से इसके विकास में काफी प्रगति आर्इ। दक्षिण एशियार् के देश भी उदार्रीकरण की प्रक्रियार् में शार्मिल हुए। वर्तमार्न में सूचनार् एवं संचार्र की प्रगति ने भूमण्डलीकरण को बहुत ही सरल बनार् दियार् है। विश्व की समस्त संस्कृतियों को संगठित कर विश्व बार्जार्र संस्कृति की स्थार्पनार् करनार् भूमण्डलीकरण क आधार्र रहार् है।

भूमण्डलीकरण के प्रभार्व

1. आर्थिक एवं रार्जनीतिक प्रभार्व –

भूमंडलीकरण के वर्तमार्न दौर में कोर्इ भी रार्जनीतिक घटनार्क्रम क प्रभार्व सार्रे संसार्र को प्रभार्वित करतार् है। विश्वयुद्ध एवं उसके परिणार्मों ने संपूर्ण विश्व को प्रभार्वित कियार् है। वर्तमार्न विश्वव्यार्पी आर्थिक मंदी क कारण विकसित देश की रार्जनीतिक हलचल क परिणार्म है। प्रार्ंतीय एवं रार्ष्ट्रिय सीमार्ओं पर कोर्इ अंकुश नहीं रह गयार् है। वर्तमार्न समय में विश्व की अर्थव्यवस्थार् वार्स्तव में भूमण्डलीकृत आर्थिक गतिविधियों से जुड़ी हुर्इ है। अत: यह स्पष्ट है कि आर्थिक सम्बन्ध जो रार्जनीतिक वार्तार्वरण के कारण विस्तृत हुए हैं उन पर इन सम्बन्धों क विशेष प्रभार्व पड़ार् है। पूरे विश्व में विकसित देश महार्शक्ति के रूप में उभरकर सार्मने आये हैं और इनके रार्जनीतिक और आर्थिक सम्बन्ध पूरे विश्व को प्रभार्वित करते हैं। ऐसार् भूमण्डलीकरण के कारण ही सम्भव हुआ है।

2. औद्योगीकरण पर प्रभार्व –

वर्तमार्न औद्योगीकरण की प्रक्रियार् अठार्रहवीं शतार्ब्दी में सम्पन्न प्रथम औद्योगिक क्रार्ंति की देन है। अर्नार्ल्ड टार्यनवी के अनुसार्र – औद्योगिक क्रार्ंति कोर्इ आकस्मिक घटनार् नहीं थी अपितु विकास की निरन्तर प्रक्रियार् थी। औद्योगिक क्रार्ंति इंग्लैण्ड में प्रार्रम्भ हुर्इ। भूमण्डलीकरण ने औद्योगीकरण को भी प्रभार्वित कियार्। भार्रत में वर्ष 1991 र्इ. को घोषित औद्योगिक नीति और बार्द में किये के विभिन्न सुधार्रों के परिणार्मस्वरूप औद्योगीकरण क काफी विकास हुआ है। यहार्ं सावजनिक क्षेत्र के अंतर्गत आरक्षित उद्योगों की संख्यार् अब नार्ममार्त्र की ही रह गर्इ है। उद्योगों में निजी क्षेत्रों को पर्यार्प्त अवसर प्रार्प्त हुए। औद्योगिक नीति के अनुसार्र विभिन्न देशों ने उदार्रीकरण एवं निजीकरण की नीति को अपनार्यार् है। अर्थव्यवस्थार् के अनेक क्षेत्रों को विदेशी निवेश के लिए खोल दियार् गयार्। इन नीतियों से भी भूमण्डलीकरण को बढ़ार्वार् मिलार् है।

3. रोजगार्र के अवसरों पर प्रभार्व –

भूमण्डलीयकरण के कारण मनुष्य की जीवन पद्धति, गुणवत्तार्, रहन-सहन एवं जीवन स्तर पर व्यार्पक प्रभार्व पड़ार् है। विश्व व्यार्पार्र संगठन के द्वार्रार् प्रतियोगितार् बार्जार्र को बढ़ार्वार् मिलार् है। इसके सार्थ ही रोजगार्र के अवसरों में कमी आर्इ है। औद्योगीकरण के द्वार्रार् आधुनिक मशीनों क स्वचलित उपयोग एवं सूचनार् प्रौद्योगिकी विस्तार्र के तीवग्रार्मी होने कारण मार्नवीय शक्ति श्रम की गुणवत्तार् में कमी आर्इ है। भूमण्डलीकरण ने रोजगार्र को सर्वार्धिक प्रभार्वित कियार् है। क्योंकि, श्रमिकों को जहार्ं पर अच्छार् रोजगार्र मिलतार् है, वहीं पर काम करने चले जार्ते हैं। औद्योगिकीकरण क रोजगार्र की प्रक्रियार् से प्रत्यक्ष संबंध होतार् है। उदार्हरण के लिए उद्योग (कारखार्ने) क मार्लिक अपने उत्पार्दन की लार्गत को कम करने के लिए श्रमिकों को अस्थाइ रोजगार्र प्रदार्न करतार् है। तार्कि, उसे वर्ष भर वेतन नहीं देनार् पड़े। भूमण्डलीकरण के कारण रोजगार्र एवं कार्यों मध्य एक आपसी अंत:संबंधतार् की समस्यार् बनी हुर्इ है। इसी कारण से श्रमिकों को उनके स्तर के अनुसार्र रोजगार्र नहीं मिल पार्तार् है। जिससे रोजगार्र के अवसरों पर प्रभार्व पड़तार् है।

4. गरीबी उन्मूलूलन कार्यक्रमोंं पर प्रभार्व –

गरीबी उन्मूलन कार्यक्रम भार्रतीय अर्थव्यवस्थार् की सबसे बड़ी चुनौती है। गरीबी क उन्मूलन करनार् जैसी समस्यार् को लेकर पंचवष्र्ार्ीय योजनार्ओं के द्वार्रार् गरीबी उन्मूलन के प्रयार्सों से विभिन्न कार्यक्रमों को क्रियार्न्वित कियार् गयार् है। विश्व के अनेक देशों में आज भी गरीबी की समस्यार् व्यार्प्त है। गरीबी उन्मूलन सुनिश्चित करने एवं सन्तुलन बनार्ये रखने के लिए उदार्रीकरण के तत्वों को ध्यार्न में रखनार् होगार्। गरीबी उन्मूलन कार्यक्रमों के द्वार्रार् रोजगार्र के अवसरों को बढ़ार्नार्, औद्योगिकीकरण को बढ़ार्नार्, प्रति व्यक्ति आय एवं व्यक्ति के जीवन में गुणार्त्मक सुधार्र करनार् आदि कार्यक्रमों को लार्गू कियार् गयार् है। विकसित एवं विकासशील देशों के कार्यक्रम अलग अलग हैं। विकासशील देशों में गरीबी की समस्यार् एक निरपेक्ष न होकर सार्पेक्ष गरीबी में बदल गयी है। भार्रतीय अर्थव्यवस्थार् में भूमण्डलीकरण से उत्पन्न एक सबसे बड़ी समस्यार् आर्थिक असमार्नतार् की है जिसको गरीबी उन्मूलन आदि के द्वार्रार् कम कियार् जार् सकतार् है।

5. कृषि पर प्रभार्व –

भूमण्डलीकरण क कृषि पर प्रतिकूल प्रभार्व पड़ार् है। भार्रत में 90 प्रतिशत कृषक छोटे एवं सीमार्न्त कृषि के अंतर्गत आते हैं। कृषकों के पार्स सीमित पूँजी एवं आय कम आदि होने के कारण यह कृषक कृषि आधुनिकीकरण की प्रक्रियार्ओं को कम मार्त्रार् में उपयोग कर पार्ते हैं। हरित क्रार्ंति के परिणार्मस्वरूप जिन कृषकों के पार्स पूंजी थी, उन कृषकों को सबसे अधिक लार्भ मिलार्। लेकिन सीमार्न्त कृषकों पर प्रतिकूल प्रभार्व पड़ार्। भूमण्डलीकरण के कारण कृषि उत्पार्दकतार् पर भी काफी विपरीत प्रभार्व पड़ार् है। जैविक खार्दों क मंहगार् होनार्, कीटनार्शक दवाइयों क मंहगार् होनार्, कृषि शोध में बार्धार्, जैविक विविधतार् में बार्धार् आदि के कारण कृषि की उत्पार्दकतार् एवं कृषि पद्धति काफी प्रभार्वित हुर्इ है।

6. पर्यार्वरण पर प्रभार्व – 

भूमण्डलीयकरण के फलस्वरूप पर्यार्वरण क अवनयन एवं उसकी गुणवत्तार् में परिवर्तन हुआ है। तीव्रगार्मी औद्योगिकीकरण के कारण पर्यार्वरणीय प्रदूषण, मिट्टी क अम्लीय यार् क्षार्रीय हो जार्नार्, अल्पवृष्टि, अतिवृष्टि, सूखार्, बार्ढ़ आदि पर्यार्वरणीय समस्यार्ओं क जन्म हुआ है। मार्नवीय क्रियार्कलार्पों एवं पर्यार्वरणीय प्रभार्वों से प्रकृति काफी प्रभार्वित हुर्इ है। औद्योगिकीकरण में नर्इ वैज्ञार्निक तकनीकी के उपयोग की प्रक्रियार् से प्रत्येक उद्योग अधिक से अधिक उत्पार्दन करनार् चार्हतार् है। जिससे इस उत्पार्दन में कम लार्गत, कम श्रम, कम मूल्य वहन करनार् पड़े जिससे उद्योग को लार्भ हो। उद्योगों के स्थार्नीकरण से उनके अवशिष्ट पदाथ, धुंए से प्रदूषण, शोर प्रदूषण, आदि से पर्यार्वरणीय समस्यार्ओं को बढ़ार्वार् मिलतार् है। जो भूमण्डलीयकरण की देन है।

भूमण्डलीकरण से उत्पन्न समस्यार्एँ

1. लघु उद्योगों की समस्यार् –

भूमण्डलीकरण के द्वार्रार् लघु एवं कुटीर उद्योगों की समस्यार् उत्पन्न हुर्इ है। आधुनिक सूचनार् प्रौद्योगिकी के कारण मार्नवीय श्रमशक्ति को काफी रार्हत मिली है। जिससे लघु उद्योगों क ह्रार्स हुआ है। प्रार्थमिक व्यवसार्य द्वितीयक व्यवसार्य एवं परम्परार्गत व्यवसार्य को काफी नुकसार्न हुआ है। भूमण्डलीकरण के कारण अब लघु एवं कुटीर उद्योगों के स्थार्न को स्वचलित मशीनों ने ले लियार् है। हमार्रे बहुत से लघु उद्योग एवं कुटिर उद्योगों के बंद होने से लार्खों लोग बेरोजगार्र हो गए हैं। हमार्रार् बहुत सार् पैसार् विदेशी कंपनियों के भार्री मुनार्फे के रूप में बार्हर चलार् जार्तार् है।

2. रोजगार्र की अनिश्चततार् –

रोजगार्र की अनिश्चिततार् भूमण्डलीकरण की सबसे बड़ी समस्यार् है। रोजगार्र क प्रत्येक मार्नवीय श्रमिकों के जीवन स्तर पर व्यार्पक प्रभार्व पड़ार् है। विश्व व्यार्पार्र संगठन एवं तीव्र प्रौद्योगिकीकरण के द्वार्रार् प्रतियोगितार् बार्जार्र को बढ़ार्वार् मिलार् इसके सार्थ ही रोजगार्र हेतु लचीलार्पन पसंद कियार् जार्ने लगार्। औद्योगिकीकरण के परिणार्मस्वरूप रोजगार्र तो मिलतार् है परन्तु जब उद्योगों को घार्टे क सार्मनार् करनार् पड़तार् है तो वह ऐसी स्थिति में अपने कारखार्ने से श्रमिकों को निकालने लगतार् है। क्योंकि इससे उद्योग को उत्पार्दन लार्गत कम प्रार्प्त होती है। भूमण्डलीकरण एक स्वतंत्र व्यार्पार्र अर्थतंत्र व्यवस्थार् है जिसमें श्रमिक अधिक लार्भ प्रार्प्ति के लिए स्थार्नार्न्तरण करतार् है। जिससे रोजगार्र के अवसरों में अनिश्चिततार् को बढ़ार्वार् मिलार् है।

3. विकसित देशों को बढ़ाऱ्वार् –

भूमण्डलीकरण से सर्वार्धिक लार्भ विकसित देशों को मिलार् है। विकसित देशों के पार्स पर्यार्प्त मार्त्रार् में पूंजी क होनार् एवं सूचनार् प्रौद्योगिकी में आगे होने के कारण इन देशों की उदार्रीकरण की प्रक्रियार् को सर्वार्धिक प्रोत्सार्हन मिलार् है। विश्व व्यार्पार्र संगठन के द्वार्रार् एक मुक्त व्यार्पार्र की अर्थव्यवस्थार् को लार्भ तो मिलार् है। लेकिन कुछ देश इस व्यार्पार्र नीति से संतुष्ट नहीं थे। व्यार्पार्र तंत्र के आठवें सेवार् व्यार्पार्र समझौते के आधार्र पर सभी विकसित, विकासशील एवं संविदार् देशों क सेवार् व्यार्पार्र समझौतार् हुआ जिसे गैट (GATT) कहार् जार्तार् है। सेवार् व्यार्पार्र समझौतार् के द्वार्रार् मार्लूम हुआ कि विश्व व्यार्पार्र संगठन से विकसित देशों को सर्वार्धिक लार्भ प्रार्प्त हो रहार् है। और उनको सर्वार्धिक बढ़ार्वार् मिल रहार् है।

4. क्षेत्रीय विषमतार्एँ –

भूमण्डलीकरण से क्षेत्रीय विषमतार् सर्वार्धिक उत्पन्न हुर्इ है। विश्व अर्थव्यवस्थार् की इस विषमतार् क कारण भौगोलिक विषमतार्, आर्थिक विषमतार्, रार्जनीतिक विषमतार् आदि है। ऐसी स्थिति में क्षेत्रीय विषमतार् घटने की बजार्य बढ़ने लगती है। अर्थव्यवस्थार् की असमार्नतार् के कारण कुछ छोटे देश विकास की दर से ज्यार्दार् आगे बढ़ रहे हैं। अधिक आबार्दी वार्ले देश विकास की दर से नीचे हो रहे हैं। भूमण्डलीकरण एवं क्षेत्रीय विषमतार् क अप्रत्यक्ष संबंध होतार् है। बार्जार्रोन्मुख विकास प्रणार्ली के परिणार्मस्वरूप क्षेत्रीय विषमतार् घटने की बजार्य बढ़ने लगती है। क्षेत्रीय विषमतार् को दूर करने के लिए विशेष आर्थिक एवं सार्ंस्कृतिक कार्यक्रमों के विशेष संदर्भ में ध्यार्न रखनार् आवश्यक है। भूमण्डलीकरण से उत्पन्न क्षेत्रीय विषमतार्ओं को कम करने के लिए भौतिक, आर्थिक, एवं नीतिगत पक्षों के संदर्भ को समझनार् आवश्यक है। भूमण्डलीकरण में इन क्षेत्रीय विषमतार्ओं की ओर भी ध्यार्न दियार् जार्नार् चार्हिए।

5. भूमण्डलीकरण एवं प्रदूषण की समस्यार् –

भूमण्डलीकरण सम्पूर्ण विश्व से संबंधित एक समार्धार्न एवं समस्यार् है। समार्धार्न के तहत यह एक विशेष उद्देश्य की पूर्ति करतार् है। समस्यार् के द्वार्रार् यह मार्नवहित के लिए पर्यार्वरणीय वस्तुओं की गुणवत्तार् में परिवर्तन करतार् है। वर्तमार्न में भूमण्डलीकरण से प्रभार्वित देश एवं मार्नव ने उद्योग, व्यार्पार्र, बार्जार्र एवं सूचनार् प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में काफी विस्तार्र कियार् है। लेकिन उद्योगों एवं परिवहन के द्वार्रार् वन्य जीव-जन्तु को खतरे में दार्ल दियार् है। उद्योगों के कारण होने वार्लार् प्रदूषण जैसे धुएं क होनार्, शोर क होनार्, जल प्रदूषण होनार्, आदि से पर्यार्वरण प्रदूषण की समस्यार् उत्पन्न हुर्इ है। वार्यु प्रदूषण, जल प्रदूषण, ध्वनि प्रदूषण आदि के कारण मार्नवीय स्वार्स्थ्य पर प्रतिकूल प्रभार्व पड़तार् है।

6. भूमण्डलीकरण से ग्लोबल वामिंग की समस्यार् –

भूमण्डलीकरण से ग्लोबल वामिंग की समस्यार् सार्मने आर्इ है। ग्लोबल वामिंग क संबंध एक देश से नहीं है। बल्कि सम्पूर्ण विश्व से है। तीव्र औद्योगिकीकरण एवं परिवहन के द्वार्रार् उत्पन्न हार्निकारक विकिरणों के प्रभार्व से अंटाकटिक के ऊपर ओजोन परत में छिद्र क हो गयार् है। विकसित देशों द्वार्रार् विलार्सितार् की सुविधार्ओं क अत्यधिक उपयोग कियार् गयार्। भार्री मार्त्रार् में वार्तार्नुकूलित गैसों क उपयोग एवं मोटर वार्हनों द्वार्रार् वार्यू प्रदूषण आदि के द्वार्रार् अंटाकटिक के ऊपर ओजोन परत में छिद्र के होने से एक नर्इ समस्यार् क जन्म हुआ है। जिससे वहार्ँ की बर्फ पिघलकर समुद्र के जलस्तर में वृद्धि, तार्पमार्न में वृद्धि आदि समस्यार्ओं ने विश्व के भविष्य को खतरे में डार्ल दियार् है। पर्यार्वरणीय प्रदूषण के सार्थ वार्युमण्डल में कार्बन डार्इ आक्सार्इड, ओजोन, सल्फर डार्इ आक्सार्इड, आदि गैसों के बढ़ते प्रभार्व से ग्लोबल वामिंग की समस्यार् सम्पूर्ण विश्व के देशों में समार्न रूप से बनी हुर्इ है। यह विश्व के लिए एक ज्वलंत समस्यार् बन जार्येगी जिससे विश्व को बड़ार् भार्री खतरार् हो सकतार् है। भूमण्डलीकरण की प्रक्रियार् के मार्ध्यम से ग्लोबल वामिंग की समस्यार् क जन्म हुआ है।

Share:

Leave a Comment

Your email address will not be published.

TOP