भार्रत की प्रमुख फसलें

चॉवल- 

चार्वॅल भार्रत की प्रमुख खार्द्यार्न्न फसल है। देश की कुल कृषि भूमि के लगभग 30प्रतिशत भार्ग में इसकी कृषि की जार्ती है। शीतकालीन को अगहनी अमन ग्रीष्मकालीन (दिसम्बर से अप्रेल) चॉवल के बोरों तथार् “ार्रदकालीन (जून से अक्टूबर) चॉवल को ओस के नार्म से जार्नार् जार्तार् हैं।

उत्पार्दन:- चार्ँवल उत्पार्दन एंव क्षेत्रफल की दृष्टि से विश्व में भार्रत क द्वितीय स्थार्न हैं। 1988-89 में 1686 किलोग्रार्म हो गयार् हैं।

गेहूँ –

चॉवल के बार्द गेहूँ देश क दूसरार् महत्वपूर्ण खार्द्य पदाथ हैं। भार्रत विश्व क चार्थैार् उत्पार्दक देश हैं। विश्व क 8 प्रतिशत गेहूँ उत्पार्दित करतार् है।

अन्य:- गेहूँ शीघ्र ही मृदार् के उपजार्ऊ तत्वों को ग्रहण कर लेतार् हैं। अत: उवर्रकों की आवश्यकतार् होती हैं।

उत्पार्दक क्षेत्र:- गेहूँ मुख्य रूप से उत्तरभार्रत की फसल हैं। उत्तरी मैदार्न के रार्ज्य पंजार्ब, हरियार्ार्णार्, उत्तरप्रदेश प्रमुख गेहूँ उत्पार्दक रार्ज्य हैं। इसके अतिरिक्त मध्यप्रदेश, बिहार्र, रार्जस्थार्न, गुजरार्त, महार्रार्ष्ट्र एंव पश्चिम बंगार्ल में भी गेहूँ क उत्पार्दन कियार् जार्तार् हैं।

कपार्स –

कपार्स भार्रतीय मूल क रेशेदार्र व्यार्पार्रिक फसल हैं। इसके रेशे से सूती वस्त्र तैयार्र कियार् जार्तार् हैं।भार्रत में इसकी खेती प्रार्चीन काल से ही की जार् रही हैं। भार्रत की कुल भूमि के 5 प्रतिशत भार्ग में कपार्स की खेती की जार्ती हैं।

कपार्स की किस्में:-1. लम्बें रेशे वार्ली कपार्स- जिसक रेशार् 22 मिमी. से अधिक होतार् हैं। 2. मध्यम रेशे वार्ली कपार्स- इसक रेशार् 18 से 22 मिमी. होतार् हैं। 3. छोटे रेशे वार्ली कपार्स- इसक रेशार् 18 मिमी. से कम होतार् हैं।

उत्पार्दक रार्ज्य- महार्रार्ष्ट्र कपार्स उत्पार्दन में इस रार्ज्य क स्थार्न देश में प्रथम हैं। प्रदेश के कुल उत्पार्दन क 26.65 प्रतिशत हैं। आंध्रप्रदेश में मंगार्री किस्म की कपार्स पैदार् की जार्ती हैं। देश के कुल उत्पार्दन क 18.55 प्रतिशत हैं। गुजरार्त देश के कपार्स क्षेत्र की 18.5 प्रतिशत भूमि इसी रार्ज्य में हैं जो कि देश के कुल उत्पार्दन क 16.87 प्रतिशत हैं। पंजार्ब कपार्स क प्रति हैक्टेयर उत्पार्दन अन्य रार्ज्यों से सर्वार्धिक 386 किग्रार्. हैं। यह रार्ज्य भार्रत क 12.95 प्रतिशत कपार्स उत्पार्दित करतार् हैं। हरियार्णार् और अन्य रार्ज्यों में कपार्स क उत्पार्दन होतार् हैं।

गन्नार् –

भार्रत गन्ने की जन्मभूमि है। गन्नार् बार्सँ पज्र ार्ति क पौधार् है। इसमें से मीठार् रस निकलतार् हैं। जिसक प्रयोग चीनी, खार्ण्डसार्री व गुड़ बनार्ने में कियार् जार्तार् हैं। खोर्इ से कागज तथार् शीरार् से शरार्ब तैयार्र कियार् जार्तार् हैं। गन्ने क प्रति हैक्टेयर उत्पार्दन 670 क्विंटल हैं।

उत्पार्दक क्षेत्र:- उत्तर प्रदेश क गन्नार् उत्पार्दन करने में प्रथम स्थार्न हैं। यहार्ं भार्रत के कुल उत्पार्दन क 38.73 प्रतिशत गन्नार् उत्पार्दन कियार् जार्तार् हैं। उत्तर प्रदेश में चार्र क्षेत्रों में उत्पार्दन कियार् जार्तार् हैं। 1. गंगार् जमुनार् दोआब, 2. रूहेलखंड क मैदार्न, 3. तराइ क्षेत्र, 4. मध्यपूर्व उत्तरप्रदेश। महार्रार्ष्ट्र गन्नार् के उत्पार्दन की दृष्टि से दूसरार् स्थार्न हैं। 15 प्रतिशत गन्नार् क उत्पार्दन यही कियार् जार्तार् हैं। तमिलनार्डु में प्रति हैक्टेयर गन्नार् उत्पार्दन में प्रथम तथार् कुल उत्पार्दन में इसक तीसरार् स्थार्न हैं। 2002 में यहार्ं 363.36 लार्ख टन गन्नार् क उत्पार्दन हुआ थार्। देश क कुल उत्पार्दन 12.11 प्रतिशत हैं।

अन्य रार्ज्य- कर्नार्टक, आधं्रपदे्रश, गुजरार्त, हरियार्णार्, पंजार्ब, उत्तरार्ंचल, बिहार्र, उडी़सार्, छत्तीसगढ़ प्रमुख हैं। चार्य चार्य एक मुद्रार्दार्यिनी रोपणी पौधार् हैं। यह दक्षिण पूर्व एशियार् के पवर्तीय भार्गों क मूल पौधार् है। चार्य एक सदार्पण्री पौधार् हैं। जिसकी सुखाइ हुर्इ पत्ती पये पदाथो के काम आती हैं। चार्य में थीन नार्मक तत्व होतार् हैं। जिसके प्रभार्व से हल्क नषार् व स्फूर्ति पैदार् होती हैं। चार्य की अति महत्वपूर्ण बार्गार्नी फसल है। जिसके निर्यार्त से विदेशी मुद्रार् प्रार्प्त होती हैं।

चार्य –

असम, के पहार्ड़ी भार्गों में काफी समय पहले से उगती आयी हैं लेकिन व्यार्वसार्यिक पैमार्ने पर इसके उत्पार्दन क श्रेय सन् 1840 में तत्कालीन गर्वनर विलियम बैंटिक द्वार्रार् कराइ गर्इ। वर्तमार्न में भार्रत विश्व में सर्वार्धिक चार्य पैदार् करने वार्लार् देश हैं।

उत्पार्दक रार्ज्य:-चार्य उत्पार्दन में असम क प्रथम स्थार्न हैं। यहार्ं भार्रत की कुल चार्य क 57 प्रतिशत उत्पार्दन कियार् जार्तार् हैं। यहार्ं 8.05 लार्ख मीट्रिक टन चार्य क उत्पार्दन होतार् हैं। यहार्ं मुख्य उत्पार्दक जिले शिवसार्गर, कद्दार्र, लखीमपुर, दरार्ंग, नवगार्ंव कामरूप गोलपार्डार् हैं। दूसरार् स्थार्न पश्चिम बंगार्ल, तीसरार् तमिलनार्डु एंव चौथार् स्थार्न केरल क हैं। इसके अतिरिक्त हिमार्चल प्रदेश के कांगड़ार्. उत्तरार्ंचल. महार्रार्ष्ट्र, कर्नार्टक, मणिपुर, त्रिपुरार्, मेघार्लय, व अरूणार्चल प्रदेश में भी चार्य क उप्पार्दन कियार् जार्तार् हैं।

जूट –

जूट भार्रत क मूल पौधार् हैं। इससे रेशार् प्रार्प्त होतार् हैं। जूट से टार्ट, बोरे, परदे, गलीचार्, दरी आदि बनार्ये जार्ते हैं। ‘‘ इसे भार्रत क सुनहरार् रेशार् भी कहार् जार्तार् हैं। ‘‘

उत्पार्दक रार्ज्य:-जूट की खेती पूर्वी भार्रत में होती हैं। पश्चिम बंगार्ल क जूट की खेती मेंप्रथम स्थार्न हैं। भार्रत क 83 प्रतिशत से अधिक जूट प. बंगार्ल में पैदार् कियार् जार्तार् हैं। बिहार्र, उड़ीसार्, पूर्वी उत्तर प्रदेश में इसक उत्पार्दन होतार् हैं। भार्रत विश्व क लगभग एक तिहाइ जूट क उत्पार्दन कर प्रथम स्थार्न पर हैं।

फल –

विश्व में कुल उत्पार्दन क 10 प्रतिशत उत्पार्दन भार्रत में होतार् हैं। विश्व में आम, केले, चीकू, नीबू, के उत्पार्दन में भार्रत एक अग्रणी देश हैं। फलों की बहुत सार्री किस्में भार्रत में उगार्यी जार्ती हैं। आम, केलार्, नार्रंगियार्, कटहल, नार्शपार्ती, बेर, जार्मुन, खुबार्नी, रतार्लू, बार्दार्म, अखरोट, इत्यार्दि फल शीतोष्ण जलवार्यु वार्ले क्षेत्र के हैं जो देश में प्रार्य: पहार्ड़ी भार्गों में उगार्यें जार्ते हैं। शुष्क भार्गों में आंवलार्, बेर, अनार्र, अंजीर उगार्ये जार्ते हैं।

सब्जियार्ँ –

विश्व में चीन के बार्द दूसरार् सबसे अधिक सब्जी उत्पार्दन करने वार्लार् देश भार्रत हैं। विश्व में कुल उत्पार्दन क 15 प्रतिशत उत्पार्दन भार्रत में होतार् हैं। फूल गोभी, उत्पार्दन में प्रथम, प्यार्ज में दूसरार्, एंव पत्तार् गोभी में तीसरार् स्थार्न हैं। अन्य सब्जियों में आलू, टमार्टर आदि भार्रत में 50 से अधिक किस्मों की सब्जियार्ं उगार्यी जार्ती हैं।

फूलों की खेती –

फलों, सब्जियों एवं फूलों क अंतर्रार्ष्ट्रीय व्यार्पार्र- विपणन बहुत लार्भदार्यक हो गयार् हैं। फूलों के निर्यार्त से भार्रत बहतु सी विदेशी मुद्रार्यें कमार् सकतार् हैं। फूलों में गुलार्ब , जूही, चमेली, गुलमोहर, गुलदार्उदी, इत्यार्दि फूलों की खेती की जार्ती हैं। कर्नार्टक, रार्जस्थार्न, आंध्रपद्रेश, पश्चिम बंगार्ल, महार्रार्ष्ट्र रार्ज्य में फूलों की खेती होती हैं।

मसार्लें –

भार्रत में अनेक प्रकार के मसार्लों क उत्पार्दन होतार् हैं। जिनमे काली मिर्च, इलार्यची, मिर्च हल्दी, अदरक, लौंग इत्यार्दि। भार्रतीय मसार्लों की मार्ंग एंव गुणवत्तार् के कारण पूरे विश्व में विख्यार्त हैं। भार्रत वर्ष को मसार्लों क घर कहार् जार्तार् हैं।

मिर्च- मसार्लों मे सबसे महत्वपूर्ण फसल हैं। मसार्लों के कुल उत्पार्दन में मिर्च क उत्पार्दन लगभग एक तिहाइ यार् 34 प्रतिशत के बरार्बर आतार् हैं। तमिलनार्डु, आंध्रप्रदेश, महार्रार्ष्ट्र, एवं कर्नार्टक रार्ज्य मिर्च उत्पार्दन में अग्रणी हैं।

हल्दी-मसार्लार् में हल्दी की फसल महत्वपूर्ण हैं। मसार्लों के कुल उत्पार्दन में हल्दी के उत्पार्दन क हिस्सार् 21.6 प्रतिशत है। हल्दी की फसल लगार्ने वार्ले रार्ज्य आंध्रप्रदेश, तमिलनार्डु, महार्रार्ष्ट्र, उड़ीसार् बिहार्र हैं। मसार्लार् उत्पार्दन करने वार्ले रार्ज्यों के बीच केरल एक ऐसार् रार्ज्य हैं जहार्ं बड़े पैमार्ने पर मसार्ले जैसे लौंग, इलार्यची, काली मिर्च क उत्पार्दन कियार् जार्तार् हैं। इसके बार्द कर्नार्टक, तमिलनार्डु, महार्रार्ष्ट्र, उड़ीसार्, और बिहार्र हिमार्चल प्रदेश रार्ज्यों क स्थार्न आतार् हैं।

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