पोषण के प्रकार

पोषण अर्थार्त Nutration हमार्रे द्वार्रार् सेवित किये गये आहार्र द्रव्यों तथार् शरीर द्वार्रार्उसके किये गये आवश्यकतार्नुसार्र उपयोग की वैज्ञार्निक अध्ययन की प्रक्रियार्ओं को पोषण कहते है। पोषण के अन्तर्गत संतुलित आहार्र, पोषक तत्त्व, भोजन के कार्य भोजन के पार्चनोपरार्न्त शरीर में उपयोग, भोजन एवं रोगेार्ं क परस्पर संबंध आहार्र द्रव्यों क आर्थिक, सार्मार्जिक एवं मनोवैज्ञार्निक प्रभार्व आदि सभी महत्त्वपूर्ण विशय पोषण के अन्तर्गत आते है। पोषण Nutration के अंतर्गत प्रधार्न रूप से आहार्र द्रव्यों क सेवन करनार्, शरीर में पार्चन होनार् तथार् पार्चनोपरार्न्त सार्र भार्ग क अवशोषण होनार्, शरीर में उसक उपयोग होनार् आदि पोषण की अवधार्रणार् है। पोषण द्वार्रार् पूर्ण रूप से शार्रीरिक एवं मार्नसिक आरोग्यतार् प्रार्प्त होती है।

स्वार्स्थ्य से तार्त्पर्य भी यह है कि ‘‘केवल बीमार्री नहीं होनार्, शार्रीरिक कमजोरी क नहीं होनार्, ही स्वार्स्थ्य नहीं है बल्कि शार्रीरिक, मार्नसिक, एवं सार्मार्जिक तथार् आध्यार्त्मिक दृष्टि से भी पूर्ण स्वस्थ होनार् स्वार्स्थ्य कहलार्तार् है। आर्युवेद शार्स्त्र में वैद्यार्चाय कहते है कि शार्रीरिक स्वार्स्थ्य हेतु वार्तपित्त कफ त्रिदोश, समार्न मार्त्रार् में हों, शरीर के तेरह प्रकार की अग्नि सम मार्त्रार् में हो पृथ्वी, जल, तेज, वार्यु एवं आकाश की भूतार्ग्नियार्ं तथार् सार्त:- रस, रक्त, मार्ंस, भेद, अस्थि, मज्जार्,एवं शुक्र की धार्तु अग्नियार्ं एवं एक प्रधार्न जार्ठरार्ग्नि कुल 13 प्रकार की अग्नियार्ं) शरीर की सार्त धार्तुऐं रस धार्तु, रक्त धार्तु, मार्ंस धार्तु, भेद धार्तु, अस्थि धार्तु, मज्जार् धार्तु, शुक्र धार्तु, ये सम मार्त्रार् में हो, जिसके शरीर क मल, मूत्र, थूक, पसीनार्, आदि उत्सर्जित किये जार्ने वार्ले द्रव्य समार्न मार्त्रार् में हों तथार् सम्यक उनक निर्हरण (निश्कासन) हो शार्रीरिक आरोग्यतार् में मार्नार् जार्तार् है। मार्नसिक स्वस्थतार् हेतु जिसकी आत्मार् इन्द्रियार्ं (5 कमेन्द्रियार्ं एवं 5 ज्ञार्नेन्द्रियार्ं) एवं प्रधार्न इन्द्रियों में ‘‘मन’’ जिसक प्रसन्न हो वे मार्नसिक रूप से स्वस्थ कहे जार्ते है। तार्त्पर्य यह है कि पूर्ण रूप से स्वस्थ व्यक्ति के शार्रीरिक एवं मार्नसिक दोनों पक्षों पर आधार्रित है।

पोषण के प्रकार

  1. सुपोषण –पोषण की वह स्थिति जब भोजन द्वार्रार् मनुष्य को अपनी आवश्यकतार्नुसार्र सभी पोषक तत्व उचित मार्त्रार् में मिले, सुपोषण कहलार्ती है। 
  2. कुपोषण- पोषण की वह स्थिति जब भोजन द्वार्रार् मनुष्य को यार् तो अपनी आवश्यकतार्नुसार्र कम पोषक तत्व मिले यार् आवश्यकतार् से अधिक पोषक तत्व मिले, कुपोषण कहलार्ती है। कुपोषण में अल्पपोषण एवं अत्यधिक पोषण दोनों शार्मिल हैं। 
  3. अल्पपोषण- कुपोषण की वह स्थिति जिसमें पोषक तत्व गुण व मार्त्रार् में शरीर के लिये पर्यार्प्त नहीं होते अर्थार्त् एक यार् एक से अधिक पोषक तत्वों की कमी पार्यी जार्ती है, अल्पोषण कहलार्ती है। इस प्रकार क पोषण अधिक समय तक दियार् जार्ने पर शार्रीरिक एवं मार्नसिक विकास रूक जार्तार् है। जैसे आयरन की कमी से एनीमियार् होनार्। 
  4. अत्यधिक पोषण-पोषण की वह स्थिति जिसमें पोषक तत्व गुण व मार्त्रार् में आवश्यकतार् से अधिक हो अत्यधिक पोषण कहलार्ती है।

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