पार्रिश्रमिक क अर्थ

कर्मचार्रियों द्वार्रार् संगठन को दी गर्इ सेवार्ओं के बदले में मिलने वार्ले अनेकों वित्तीय एवं गैर-वित्तीय प्रतिफलों से है। इसमें मजदूरी, वेतन भत्ते और अन्य लार्भार्ंश सम्मिलित है जिसे एक नियोक्तार् अपने कर्मचार्रियों को उनकी सेवार्ओं के बदले प्रदार्न करतार् है। भार्गों पार्रिश्रमिक को दो भार्गों में वगीकृत कियार् जार् सकतार् है :

  • (क) आधार्रभूत/प्रार्थमिक पार्रिश्रमिक।
  • (ख) अनुपूरक पार्रिश्रमिक।

आधार्रभूत अथवार् प्रार्थमिक पार्रिश्रमिक एक कर्मचार्री को प्रतिमार्ह दी जार्ने वार्ली एक निश्चित रार्शि होती है। इसके अन्तर्गत एक कर्मचार्री को उसके द्वार्रार् किये गये कार्य के प्रतिफल स्वरूप मजदूरी, वेतन और भत्ते इत्यार्दि प्रदार्न करनार् आतार् है।

अनुपूरक पार्रिश्रमिक से अभिप्रार्य उस पार्रिश्रमिक से है जो कर्मचार्रियों को आरै अधिक कार्यकुशलतार् से कार्य करने के लिए प्रोत्सार्हन के रूप में दियार् जार्तार् है। इसे अभिपे्ररक पार्रिश्रमिक के नार्म से भी जार्नार् जार्तार् है। अभिपे्ररक वित्तीय भी हो सकते हैं और गरै -वित्तीय भी। वित्तीय अभिपे्ररकों के अन्तर्गत बोनस, विक्रय पर कमीशन अथवार् लार्भ में हिस्सार् जैसी योजनार्एॅं आती हैं। दूसरी ओर गैर-वित्तीय अभिपे्ररकों के अन्तर्गत पर्यवेक्षक के सार्थ मधुर सम्बन्ध, चुनौतीपूर्ण कार्य सोैपनार्, मार्न्यतार् देनार् इत्यार्दि सम्मिलित हैं। इस प्रकार के अभिपे्ररक कर्मचार्रियार् ें को कार्य के प्रति रूचि उत्पन्न करने में सहार्यक होते है। तथार् उन्हें और अधिक कार्य करने के लिए अभिपे्ररित करते हैं। ये उन्हें कार्य-संतुष्टि भी प्रदार्न करते हैं।

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