अफ्रीक क विभार्जन
अफ्रीक क विशार्ल महार्द्वीप 19वीं शतार्ब्दी से पूर्व ‘अंध-महार्द्वीप’ के नार्म से जार्नार् जार्तार् थार्। यूरोप के अत्यंत समीप होने के बार्द भी यूरोपवार्सी इसके संबंध में कोर्इ ज्ञार्न नहीं रखते थे और यदि कोर्इ देश अफ्रीक के संबंध में कुछ जार्नकारी रखते भी थे तो वह न के बरार्बर ही थी। इस समय तक लोग अफ्रीक महार्द्वीप की आंतरिक समृद्धि से अवगत नहीं थे। व्यार्पार्री-वर्ग भी इस महार्द्वीप के संबंध में केवल इतनार् ही जार्नते थे कि वे यहार्ं से हब्शियों को पकड़कर ले जार्ते थे और दार्सों के रूप में उन्हें अमेरिकी किसार्नों को बेच देते थे।

अफ्रीक की ओर झुकाव के कारण

धीरे-धीरे वर्तमार्न स्थिति में परिवर्तन आनार् प्रार्रंभ हुआ और यूरोप के लोग अफ्रीक महार्द्वीप की ओर आकर्षित होने लगे, जिसके लिए निम्नलिखित कारण व परिस्थितियार्ं उत्तरदार्यी थीं :

  1. सर्वप्रथम नेपार्ेि लयन ने अफ्रीक के महत्व को महसूस कियार् और अंग्रेजों को परोक्ष युद्ध में हरार्ने के उद्देश्य से उसने मिस्र पर आक्रमण कियार् थार्। वस्तुत: मिस्र और सीरियार् होकर जो स्थल माग थार् उस पर अधिकार करके वह अंग्रेजों के पूर्व स्थित सार्म्रार्ज्य को खतरार् पैदार् करनार् चार्हतार् थार्, इसलिए फ्रार्ंस व इंग्लैण्ड के मध्य लंबे समय तक संघर्ष चलतार् रहार्। इस संघर्ष के कारण यूरोप के रार्ष्ट्रों क ध्यार्न भी अफ्रीक महार्द्वीप की और आकर्षित हुआ। 
  2. यूरोप के विभिन्न देश अपने-अपने औपनिवेशिक सार्म्रार्ज्य की स्थार्पनार् के लिए आकांक्षार् कर रहे थे, परंतु इस समय तक अधिकांश वे स्थार्न, जहार्ँ पर उपनिवेशो की स्थार्पनार् संभव थी, एशियार् के विभिन्न रार्ष्ट्रों ने अपनार्-अपनार् प्रभुत्व स्थार्पित कर लियार् थार्। विदेशी रार्ष्ट्र मुनरो सिद्धार्तं के कारण अमेरिक में प्रवेश नहीं कर पार् रहे थे, इसलिए 19वीं शतार्ब्दी के प्रार्रंभ में अनेक देशों क ध्यार्न अफ्रीक की ओर आकर्षित हुआ।
  3. अफ्रीक में हीरों व अन्य बहुमूल्य पत्थरों की अनेक खार्नें थीं, इसलिए यूरोप के विभिन्न रार्ष्ट्र यहार्ं पर अपनार् आधिपत्य स्थार्पित करके उसकी धन-संपदार् को हस्तगत करार्नार् चार्हते थे।
  4. विश्व में सैनिक रार्ष्ट्रवार्द की भार्वनार् क दिन-प्रतिदिन विकास होतार् जार् रहार् थार्। जर्मनी, फ्रार्ंस और इटली जैसे रार्ष्ट्रों ने इंग्लैण्ड व हॉलेण्ड की नीति क अनुसरण करते हुए यह अनुभव करनार् प्रार्रंभ कर दियार् कि औपनिवेशिक सार्म्रार्ज्य की स्थार्पनार् अत्यंत आवश्यक है, इसलिए प्रत्येक रार्ष्ट्र अपने आत्मसम्मार्न और गौरव में वृद्धि हेतु उपनिवेशार्ं े की स्थार्पनार् के लिए लार्लार्यित थार्। 
  5. यूरोप के कुछ धर्म प्रचार्रक अफ्रीक महार्द्वीप में अपने धर्म व संस्कृति क पच्र ार्र करने के इच्छुक थे। धामिक उत्सार्ह से ओतप्रोत धर्म प्रचार्रकों ने अफ्रीक के इस अंधकारमय द्वीप में अनेक कष्ट उठार्ये हुए प्रवेश कियार् और धर्म प्रचार्र के कार्य में जुट गये। 
  6. यूरोप क प्रत्येक देश अपनी-अपनी सैनिक शक्ति क प्रदर्शन करने के लिए औपनिवेशिक दौड़ में भार्ग लेने क इच्छुक थार्। इंग्लैण्ड को अपनी भार्रतीय सेनार् पर गर्व थार् और जर्मनी ने भी इसी उद्देश्य की प्रार्प्ति के लिए अपनी सेनार् की संख्यार् को अत्यधिक बढ़ार् लियार् थार्। 
  7. 1883 के अधिनियम के अनुसार्र इंग्लैण्ड ने अपने सार्म्रार्ज्य में दार्स-व्यार्पार्र को अवैध घोषित कर दियार् थार्, इसलिए अब यह व्यार्पार्र गुप्त रूप से होनार् प्रार्रंभ हो गयार्, इसलिए इंग्लैण्ड ने अफ्रीक के पश्चिमी समुद्री तट पर अपनी जल सेनार् की टुकड़ी को तैनार्त कर दियार् थार् तार्कि गुप्त रूप से देश में दार्स व्यार्पार्र चलतार् न रहे।

अफ्रीक क विभार्जन

अफ्रीक क विभार्जन यूरोप के इतिहार्स की एक अत्यंत रोमार्ंचक घटनार् मार्नी गयी है। विभार्जन के महत्वपूर्ण कार्य को अत्यतं शीघ्रतार् से संपार्दित कियार् गयार्। यद्यपि विभार्जनकर्तार् विभिन्न रार्ष्ट्रों में आपस में अनेक मतार्न्तर थे किन्तु फिर भी बिनार् कोर्इ युद्ध लड़े इस कार्य को शार्ंतिपूर्ण ढंग से पूर्ण कर लियार् गयार्। सर्वप्रथम 1876 र्इ. में बेल्जियम के रार्जार् लियोपोल्ड द्वितीय ने बुसेल्स में यूरोप के रार्ष्ट्रों की एक सभार् क आयोजन कियार्। उसक उद्देश्य अफ्रीक के महत्व पर विचार्र करनार् थार् और अफ्रीकन सम्मेलन क गठन करनार् थार्। किंतु इस सम्मेलन के उच्च नैतिक स्तर को अधिक लंबे समय तक नहीं बनार्ये रखार् जार् सक और शीघ्र ही प्रत्येक देश ने अफ्रीक महार्द्वीप में अपने स्वाथ के अनुरूप कार्य करनार् प्रार्रंभ कर दियार्। स्वयं लियोपोल्ड ने स्टैनले के सहयोग से अफ्रीक में एक विशार्ल कांगो रार्ज्य क गठन कियार्। अफ्रीक में बेि ल्जयम के बढ़ते हुए प्रभार्व को देखकर यूरोप के अन्य देशों ने भी अफ्रीक में अपने-अपने उपनिवेश स्थार्पित करने के प्रयार्स करने प्रार्रंभ कर दिये। इंग्लैण्ड, फ्रार्ंस, जर्मनी और इटली जैसे देशों ने अफ्रीक में प्रवेश प्रार्प्त करने के लिए घोषित कियार् कि अफ्रीक में उनके प्रवेश क मुख्य उद्देश्य वहार्ं की असभ्य जनतार् को सभ्य बनार्नार् तथार् र्इसाइ धर्म क प्रचार्र करनार् है। इस प्रकार अप्रत्यक्ष रूप से यूरोप के विभिन्न रार्ज्यों ने अफ्रीक की लूट के कार्य को प्रार्रंभ कियार्।

1884 क बर्लिन सम्मेलन

यूरोप क प्रत्येक रार्ष्ट्र अफ्रीक में अपने उपनिवेश स्थार्पित करनार् चार्हतार् थार् इसलिए उनमें परस्पर मतभेदों क जन्म हुआ। अन्तत: बर्लिन में एक अन्तर्रार्ष्ट्रीय सम्मेलन बुलार्यार् गयार् जिसमें विभिन्न देशों की मतार्न्तरों को दूर कियार् गयार् एवं जर्मनी, इंग्लैण्ड और फ्रार्ंस के सीमार् संबंधी विवार्दों क सुलझार्वार् कियार् गयार्। उपर्युक्त देशों ने इस अवसर पर 1890 र्इ. में आपस में एक नवीन संधि भी की। बर्लिन के इस सम्मेलन में अफ्रीक के सार्ंस्कृतिक विकास के प्रश्न पर भी विचार्र-विमर्श हुआ। शस्त्रों एवे शरार्ब के व्यार्पार्र पर भी अनेक प्रतिबंध लगार्य े गये किन्तु शीघ ्र ही कांगो में अफ्रीकावार्सियों क अत्यधिक शोषण होने लगार्। बर्लिन के इस महत्वपूर्ण सम्मेलन में स्विट्जरलैण्ड के अतिरिक्त यूरोप के सभी देशों और अमेरिक ने भी भार्ग लियार् और यह सम्मेलन नवम्बर 1884 से फरवरी 1885 तक चलार्।

अफ्रीक की लूट

अफ्रीक की लूट में सबसे अधिक लार्भ इंग्लैण्ड को हुआ। उसके अत्यधिक विस्तृत सार्म्रार्ज्य में केप ऑफ गुडहोप, नेटार्ल, ट्रार्ंसवल, औरेन्ज नदी क नजदीकी क्षेत्र, रोडेशियार्, मिस्र, सूडार्न क कुछ भार्ग, ब्रिटिश सोमार्लीलैण्ड, नार्इजीरियार्, गौम्बियार्, गोल्डकोस्ट तथार् सियरार्-लियोन आदि सम्मिलित थे।

मिस्र पर इंग्लैण्ड क नियंत्रण

1798 र्इ. में नेपोलियन ने मिस्र पर अपनार् नियंत्रण स्थार्पित कर लियार् थार् किंतु नील नदी के युद्ध में उसकी परार्जय के बार्द वहार्ं उसक प्रभार्व समार्प्त हो गयार् और इंग्लैण्ड क मिस्र पर प्रभुत्व स्थार्पित हो गयार्। मिस्र क इंग्लैण्ड के लिए विशेष महत्व थार् क्योंकि मिस्र पर किसी अन्य देश क प्रभुत्व स्थार्पित होने से उसके भार्रत स्थित सार्म्रार्ज्य को खतरार् उत्पन्न हो जार्तार् थार्।

इंग्लैण्ड

1652 र्इ. में डच लार्गे ों ने जिन्है। ‘बार्अे र’ भी कहार् जार्तार् थार्, केप कॉलार्ने ी में अपने उपनिवेश की स्थार्पनार् कर ली थी जो सुदूर दक्षिणी अफ्रीक के सुदूर में पड़तार् थार्। वे अपने धामिक मार्मले में अत्यंत कठोर थे और अंग्रेजों को घृणार् की दृष्टि से देखते थे। 1815 र्इ. के लगभग अंग्रेजों ने भी केप कॉलोनी में आकर बसनार् प्रार्रंभ कर दियार् थार् और धीरे-धीरे वहार्ं पर उनकी संख्यार् काफी बढ़ गयी। प्रार्रंभ में दोनों के संबंध परस्पर मधुर बने रहे किन्तु अंग्रेजों की उत्तरोत्तर बढ़ती हुर्इ संख्यार् के कारण डच लोगों के हृदय में संदेह की भार्वनार् जार्ग्रत हुर्इ जिसके कारण उन्होंने केप कॉलोनी को छोड़कर औरेन्ज फ्री स्टेट, ट्रार्न्सवार्ल और नेटार्ल में निवार्स करनार् प्रार्रंभ कर दियार्। किंतु 1879 र्इ. में अंग्रेजों ने ट्रार्न्सवार्ल पर आक्रमण कर दियार्, जिसके कारण अंग्रेजों और बोअर जार्ति के लोगो के आपसी संबधं तनार्वपूर्ण हो गये और युद्ध की ज्वार्लार् धधक उठी। इस युद्ध में अंग्रेजों को परार्जय क मुंह देखनार् पड़ार् और बोअरों की स्वतंत्रतार् को सभी लोगों ने स्वीकार कर लियार् तथार् ट्रार्न्सवार्ल को स्वतंत्र घोषित कर दियार् गयार्। 1881 इर्. में ट्रार्न्सवार्ल में सोने की कुछ खार्नों की जार्नकारी प्रार्प्त हुर्इ जिससे प्रभार्वित होकर अंग्रेजों ने ट्रार्न्सवार्ल में प्रवेश करनार् प्रार्रंभ कर दियार् और कहीं-कहीं पर उनकी संख्यार् मूल निवार्सी बोअरों से भी अधिक हो गर्इ इससे बोअरों की सुरक्षार् को खतरार् उत्पन्न हो गयार्। बोअर अंग्रेजों से घृणार् करते थे और उन्हें विदेशी कहकर पकु ार्रते थे। इन विदेशियों क मुख्य नेतार् सेसिल रार्डे ्स थार्। वह दक्षिणी अफ्रीक में ब्रिटिश शार्सन की स्थार्पनार् पर विशेष बल दे रहार् थार् और थोड़े समय में ही उसने अफ्रीक के बहुत बड़े भार्ग पर अधिकार कर लियार्। जो रोडेशियार् कहलार्यार्। 1890 र्इ. में वह केप कॉलोनी क प्रधार्नमंत्री चुनार् गयार् और 1896 र्इ. तक वह इस पद पर बनार् रहार्। उसकी यह भी धार्रण थी कि अंग्रेजों को ट्रार्न्सवार्ल तथार् औरेन्ज फ्री स्टेट पर भी अधिकार स्थार्पित कर लेनार् चार्हिए। इंग्लैण्ड भी बोअरों के विरूद्ध अपनी परार्जय क बदलार् लेने के लिए अवसर की प्रतीक्षार् में थार्। 1899 र्इ. में उसने औरेन्ज फ्री स्टेट व ट्रार्न्सवार्ल के विरूद्ध युद्ध प्रार्रंभ कर दियार्। प्रार्रंभिक युद्ध में बार्अे रों को कुछ सफलतार् प्रार्प्त हुर्इ किन्तु अधिक समय तक वह अपने विजय-क्रम को बनार्ये रखने में सफल नहीं हो सके और अन्तत: परार्जित हुए। 1902 र्इ. में दोनों के मध्य एक संधि हो गयी जिसके अनुसार्र ट्रार्न्सवार्ल तथार् औरेन्ज फ्री स्टेट पर अंग्रेजों के अधिकार को स्वीकाार्र कर लियार् गयार्।

इस संधि के बार्द बोअरों को कर्इ सुविधार्एं प्रदार्न की गयीं किंतु इसके बार्द भी उनके असंतोष क अंत नहीं हुआ। अंतत: इंग्लैण्ड की उदार्र सरकार ने ट्रार्न्सवार्ल व औरेन्ज फ्री स्टेट को क्रमश: 1906 र्इ. व 1907 र्इ. में स्वार्यत्ततार् प्रदार्न कर दी तथार् ट्रार्न्सवार्ल, औरेन्ज फ्री स्टेट, केप कॉलोनी व नेटार्ल को ‘दक्षिण अफ्रीक संघ’ के नार्म से संगठित कर दियार्।

फ्रार्ंस

फ्रार्ंस अफ्रीक के महत्वपूर्ण क प्रदेशों यथार् मिस्र, अल्जीरियार्, ट्यूनिस और मोरक्को पर अपनार् नियंत्रण स्थार्पित करनार् चार्हतार् थार् किंतु इंग्लैण्ड ने उसक विरोध कियार् तथार् मिस्र पर उसक अधिकार स्थार्पित नहीं होने दियार्, क्योंकि मिस्र क इंग्लैण्ड के भार्रत स्थित सार्म्रार्ज्य के लिए अत्यधिक महत्व थार्। किंतु धीरे-धीरे फ्रार्ंस ने दक्षिण अफ्रीक के कर्इ महत्वपूर्ण उपनिवेशों पर अधिकार स्थार्पित कर लियार्। 1847 र्इ. में अल्जीरियार् पर अधिकार करने के बार्द फ्रार्ंस की आंखें ट्यूनिस के प्रदेश पर लगी हुर्इ थी जो अल्जीरियार् के पूर्व में स्थित थार्। इटली भी ट्यूनिस के प्रदेश की ओर लार्लची आख्ं ज्ञों से निहार्र रहार् थार्, किन्तु फ्रार्ंस ने 1881 र्इ. में बिस्माक से प्रोत्सार्हन प्रार्प्त करने के बार्द इस पर अधिकार कर लियार्। सार्थ ही उसने गुआनार्, आइवरी कोस्ट, फ्रेंच कांगो और सहार्रार् के नखलिस्तार्न पर भी संरक्षण स्थार्पित कर लियार्। 1904 र्इ. में इंग्लैण्ड व फ्रार्ंस ने मोरक्को के प्रश्न पर आपस में एक संधि कर ली और इस प्रकार फ्रार्ंस , अफ्रीक के उत्तर-पश्चिमी प्रदेशों में एक विशार्ल औपनिवेशिक सार्म्रार्ज्य स्थार्पित करने में सफल रहार्।

जर्मनी

1870-1890 र्इ. तक बिस्माक जर्मनी में चार्न्सलर के पद पर कार्य करतार् रहार्। अपने प्रधार्नमंत्री-काल के प्रार्रंभिक वर्षों में वह उपनिवेश-स्थार्पनार् क घोर विरोधी थार् क्योंकि वह इंग्लैण्ड के सार्थ अपने संबंधों को खरार्ब करनार् नहीं चार्हतार् थार्। इंग्लैण्ड उस प्रत्येक देश को अपनार् शत्रु समझतार् थार् जो औपनिवेशिक दौड़ में भार्ग लेतार् थार् और अपनी जल-शक्ति के विस्तार्र क प्रयार्स करतार् थार्। बिस्माक जर्मनी को एक आत्म-संतुष्ट देश कहार् करतार् थार् किन्तु बार्द में निम्नलिखित कारणों से पे्ररित होकर उसने उपनिवेश-स्थार्पनार् की ओर ध्यार्न देनार् प्रार्रंभ कर दियार् थार् :

  1. जर्मनी के औद्योगिक विकास के लिए उपनिवेश प्रार्प्त करनार् नितार्ंत आवश्यक थार्। 
  2. अपनी बढ़ती हुर्इ जनसंख्यार् को बसार्ने के लिए उसे अतिरिक्त भूमि की आवश्यकतार् थी। 
  3. जर्मनी के रार्ष्ट्रीय गौरव के लिए उपनिवेशों की स्थार्पनार् अत्यतं आवश्यक थी।

प्रसिद्ध इतिहार्सकार गूच ने इस संदर्भ में लिखार् है कि अफ्रीक की लूट के कारण जर्मनी की उपनिवेश-स्थार्पनार् की भूख में अत्यधिक वृद्धि हो गयी थी और बिस्माक को अन्तत: इस भूख को शार्ंत करनार् ही पड़ार्। औपनिवेशिक दौड़ में विलम्ब से भार्ग लेने के कारण बिस्माक अफ्रीक की लूट में समय पर सम्मिलित नहीं हो सक लेकिन फिर भी 1884 र्इ. से 1890 र्इ. तक उसने तोगोलैण्ड, कैमरून, पूर्वी अफ्रीक और दक्षिण-पश्चिम अफ्रीक में कुछ उपनिवेश स्थार्पित किये। इस प्रकार बिस्माक जैसार् कुशल रार्जनीतिज्ञ भी समय की पुकार को नहीं टार्ल सक और उसे भी उपनिवेश-स्थार्पनार् की दौड़ में भार्ग लेनार् पड़ार्, जिसक वह प्रार्रंभ में घोर विरोधी थार्।

स्पेन

स्पेन ने अफ्रीक के दक्षिण-पश्चिमी समुद्र-तट पर अपने कुछ उपनिवेश स्थार्पित किये। 1908 र्इ. में उसने जिब्रार्ल्टर द्वीप के सार्मने कुछ प्रदेशो पर भी अपनार् अधिकार स्थार्पित कर लियार्।

इटली

इटली ट्यूनिस के प्रदेश पर अधिकार करनार् चार्हतार् थार्, परन्तु फ्रार्ंस द्वार्रार् वहार्ं अपनार् आधिपत्य स्थार्पित कर लिये जार्ने के कारण उसने 1883 र्इ. में लार्ल सार्गर के किनार्रे के प्रदेश इरीट्रियार् पर एवं पूर्वी सोमार्लीलैण्ड के कुछ भार्ग पर अपनार् अधिकार स्थार्पित कर लियार्। इटली अबीसीनियार् पर अधिकार करनार् चार्हतार् थार् किन्तु अडोवार् के युद्ध में उसे परार्जय क मुंह देखनार् पड़ार्। तत्पश्चार्त् इटली ने त्रिपोली तथार् उसके आस-पार्स के प्रदेश पर अपनार् पभ््र ार्ुत्व स्थार्पित कर लियार् और उसे कालार्न्तर में लीबियार् क नार्म प्रदार्न कियार्।

पुर्तगार्ल

पुर्तगार्ल ने अंगोलार् पर अपनार् अधिकार स्थार्पित कर लियार्। वह बेल्जियम कांगो के दक्षिण में स्थित थार्। कालार्न्तर में पुर्तगार्ल ने मोजम्बिक पर अपनार् प्रभुत्व स्थार्पित कर लियार्, जिसे पुर्तगार्लवार्सी पूर्वी अफ्रीक के नार्म से पुकारते थे।

इस प्रकार यूरोप की महार्शक्तियों ने सम्पूर्ण अफ्रीक क आपस में विभार्जन कर लियार्। विभार्जन क सर्वार्धिक महत्वपूर्ण अंश यह थार् कि यह कार्य अत्यंत शार्ंतिपूर्ण ढंग से संपार्दित कियार् गयार्। यद्यपि कर्इ अवसरों पर कटुतार् बढ़ जार्ने के कारण युद्ध की संभार्वनार्एं अत्यधिक बढ़ गयीं किंतु वातार्लार्प और कूटनीति के द्वार्रार् मतार्न्तरों को शार्ंतिपूर्ण ढंग से हल कर दियार् गयार्। विभार्जन क एक उल्लेखनीय तथ्य यह थार् कि विभार्जन अत्यंत धीमी गति से और क्रमार्नुसार्र कियार् गयार् थार्।

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