संवेगार्त्मक विकास क अर्थ

जीवन में संवेगों की महत्वपूर्ण भूमिक होती है तथार् व्यक्ति के वैयक्तिक एवं सार्मार्जिक विकास में संवेगों क योगदार्न होतार् है। लगार्तार्र संवेगार्त्मक असन्तुलन/अस्थिरतार् व्यक्ति…