प्रकृतिवार्द (शिक्षार् दर्शन)

प्रकृतिवार्द की ऐतिहार्सिक पृष्ठभूमि दर्शन क आरम्भ आश्चर्य है। प्रकृति आश्चर्यमयी है। उसके भौतिक तत्व ने ही मनुष्य केार् चिन्तन की प्रेरणार् दी, अत: आरम्भ…

प्रयोजनवार्द क्यार् है ?

प्रयोजनवार्द के लिये अंग्रेजी क शब्द ‘‘प्रैग्मेटिज्म’’ है। इस शब्द की उत्पत्ति यूनार्नी शब्द प्रैग्मार् से हुयी जिसक अर्थ है कियार् गयार् कार्य, व्यवसार्य, प्रभार्वपूर्ण…

अस्तित्ववार्द (शिक्षार् दर्शन)

अस्तित्ववार्द बीसवी शतार्ब्दी क नयार् दर्शन है। जहार्ँ विज्ञार्न और भौतिकवार्दी प्रवार्ह ने मनुष्य के अस्तित्व को ही मूल्यविहीन कियार् वही लोकतंत्रार्त्मक व समार्जवार्दी रार्जनैतिक…

शिक्षार् दर्शन क अर्थ, स्वरूप एवं आवश्यकतार्

सार्धार्रण अर्थ में शिक्षार् पद्धति दर्शन की ही एक शार्खार् होती है जिसमें दाशनिक सिद्धार्न्तों क प्रयोग शिक्षार् के सम्बंध में होतार् है। शिक्षार् दर्शन…

रूसो क शिक्षार् दर्शन

रूसो के अनुसार्र शिक्षार् में तीन महत्वपूर्ण पक्ष हैं- बच्चे की अन्तर्निहित शक्ति, सार्मार्जिक वार्तार्वरण तथार् भौतिक वार्तार्वरण। शिक्षार् प्रकृति, मार्नव यार् वस्तुओं से ली…

मदन मोहन मार्लवीय क जीवन परिचय एवं शिक्षार् दर्शन

महार्मनार् पं0 मदनमोहन मार्लवीय 25 दिसम्बर, 1861 को तीर्थरार्ज प्रयार्ग में बार्लक मदन मोहन क जन्म हुआ। इन्होंने आगे चलकर न केवल भार्रतीय संस्कृति क…

पुरुषोत्तम दार्स टण्डन क जीवन परिचय एवं शैक्षिक विचार्र

रार्जर्षि पुरूषोत्तम दार्स टण्डन क जन्म इलार्हार्बार्द में 1 अगस्त, 1882 को हुआ। उनके पूर्वज मूलत: पंजार्ब के निवार्सी थे। उनके पितार् श्री शार्लिग्रार्म टंडन…