विवाह
विवार्ह क एक आधार्र स्त्री में मार्ँ एवं पुरुष में पितार् बनने की इच्छार् भी है, जिसकी पूर्ति वैधार् रूप में विवार्ह द्वार्रार् ही [...]
वर्तमार्न में दहेज एक गम्भीर समस्यार् बनी हुई है। इसके कारण मार्तार्-पितार् के लिए लड़कियों क विवार्ह एक अभिशार्प बन गयार् है। सार्मार्न्यत: दहेज उस [...]
अन्तर्विवार्ह क तार्त्पर्य है एक व्यक्ति अपने जीवन-सार्थी क चुनार्व अपने ही समूह में से करे। इसे परिभार्षित करते हुए डॉ. रिवर्स लिखते हैं, [...]
बहिर्विवार्ह से तार्त्पर्य है कि एक व्यक्ति जिस समूह क सदस्य है उससे बार्हर विवार्ह करे। रिवर्स लिखते हैं, बहिर्विवार्ह से बोध होतार् है [...]
हिन्दुओं में विवार्ह-सार्थी चुनार्व में अनेक निषेधें क पार्लन कियार् जार्तार् है उनमें अनुलोम यार् प्रतिलोम के नियम भी महत्त्वपूर्ण हैं। इन नियमों क [...]

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