भोज्य ग्रार्हितार् क्यार् है ?

‘‘किसी भी भोज्य पदाथ को बिनार् चखे उसके रंग, रूप, बनार्वट, सुगंध के द्वार्रार् ही उसके स्वार्द को निर्धार्रित कर लेते है तथार् उसे ग्रहण…