अस्तित्ववार्द क अर्थ, परिभार्षार्, मार्न्यतार्ए, महत्त्व एवं कमियार्

अस्तित्ववार्द बीसवीं सदी क दर्शन है हार्लार्ंकि यह संज्ञार्न में काफी पहले आ गयार् थार्। अस्तित्ववार्द से हमार्रार् परिचय सार्हित्यिक आंदोलन के रूप में होतार्…

अस्तित्ववार्द (शिक्षार् दर्शन)

अस्तित्ववार्द बीसवी शतार्ब्दी क नयार् दर्शन है। जहार्ँ विज्ञार्न और भौतिकवार्दी प्रवार्ह ने मनुष्य के अस्तित्व को ही मूल्यविहीन कियार् वही लोकतंत्रार्त्मक व समार्जवार्दी रार्जनैतिक…