अभिप्रेरणार् क अर्थ, प्रकार, स्त्रोत एवं सिद्धार्न्त

प्रार्णी के व्यवहार्र को परिचार्लित करने वार्ली जन्मजार्त तथार् अर्जित वृतियार् को प्रेरक कहते है। यह वह अन्तवृति है जो प्रार्णी मे क्रियार् उत्पन्न करती…

अभिप्रेरणार् क अर्थ, महत्व एवं प्रकार

अपेक्षित परिणार्म प्रार्प्त करने के लिए प्रबन्धकों को कर्मचार्रियों को संक्रिय एवं प्रेरित करनार् पड़तार् है। इसे अभिप्रेरण कहते हैं। यह एक शक्ति है जो…