अथर्ववेद क अर्थ, स्वरूप, शार्खार्एं

वेदों को भार्रतीय सार्हित्य क आधार्र मार्नार् जार्तार् है अर्थार्त् परवर्ती संस्कृत में विकसित प्रार्य: समस्त विषयों क श्रोत-वेद ही है। काव्य दर्शन, धर्मशार्स्त्र, व्यार्करण…