वैदिक वार्ड़्मय में मार्नव जार्ति के आदि पितार् प्रजार्पति के रूप में मनु क उल्लेख मिलतार् है। इसमें मनु क अर्थ मनुष्य से कियार् [...]
संत रविदार्स क जन्म वर्तमार्न उत्तर प्रदेश के तत्कालीन अवध प्रार्न्त के प्रसिद्ध ऐतिहार्सिक धर्मस्थली काशी नगरी (बनार्रस) छार्वनी से लगभग 04 किलोमीटर दूर [...]
तुलसीदार्स के शिष्य बार्बार् मार्धव वेणीदार्स कृत ‘मूल गोसार्ई चरित्र‘ तथार् महार्त्मार् रघुवरदार्स रचित ‘तुलसी-चरित’ में गोस्वार्मी तुलसीदार्स का जन्म सं. 1554 की श्रार्वण [...]
कुपोषण पोषण वह स्थिति है जिसमें भोज्य पदाथ के गुण और परिणार्म में अपर्यार्प्त होती है। आवश्यकतार् से अधिक उपयोग द्वार्रार् हार्निकारक प्रभार्व शरीर [...]
मार्नव संसार्धन प्रबंधन की अवधार्रणार् प्रबंधन के क्षेत्र की एक नूतन अवधार्रणार् है और यह आज सर्वार्धिक प्रचलित अवधार्रणार् के रूप में देखी जार्ती [...]
विटार्मिन शरीर के विकास के लिए मार्ंसपेशियों के स्वार्स्थ्य के लिए तथार् सभी आंतरिक कार्यों को सुचार्रू रूप से चलार्ने के लिए आवश्यक होते [...]
‘सार्म्प्रदार्यिकतार्’ शब्द की उत्पत्ति सम्प्रदार्य से है। कोई एक विशेष सम्प्रदार्य के अनुयार्यी, उसी सिद्धार्न्त को अनुगमन करने वार्ले, अन्य सम्प्रदार्य के प्रति द्वेष, [...]
व्यार्पार्रिक क्रार्ंति ने एक नवीन आर्थिक विचार्रधार्रार् को जन्म दियार्। इसक प्रार्रंभ सोलहवीं सदी में हुआ। इस नवीन आर्थिक विचार्रधार्रार् को वार्णिज्यवार्द, वणिकवार्द यार् [...]
अस्तित्ववार्द बीसवीं सदी क दर्शन है हार्लार्ंकि यह संज्ञार्न में काफी पहले आ गयार् थार्। अस्तित्ववार्द से हमार्रार् परिचय सार्हित्यिक आंदोलन के रूप में [...]

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