74वार्ं संविधार्न संशोधन अधिनियम- नगर निकायों के संदर्भ में
सत्तार् विकेन्द्रीकरण की दिशार् में संविधार्न क 73वार्ं और 74वार्ं संविधार्न संशोधन एक महत्वपूर्ण और निर्णार्यक कदम है। 74वार्ं संविधार्न संशोधन नगर निकायों में सत्तार् विकेन्द्रीकरण क एक मजबूत आधार्र है। अत: इस अध्यार्य क उद्ेश्य 74वें संविधार्न संशोधन की आवश्यकतार् और 74वें संविधार्न संशोधन में मौजूद उपबंधों और नियमों को स्पश्ट करनार् है। भार्रत विश्व क सबसे बड़ार् लोकतंत्र के रूप में जार्नार् जार्तार् है। इस लोक तंत्र क सबसे रोचक महत्वपूर्ण पक्ष है सत्तार् व शक्तियों क विकेन्द्रीकरण। अर्थार्त केन्द्र स्तर से लेकर स्थार्नीय स्तर पर गार्ंव इकार्इ तक सत्तार् व शक्ति क बंटवार्रार् ही विकेन्द्रकरण कहलार्तार् है। विकेन्द्रीकरण की व्यवस्थार् किसी न किसी रूप में प्रार्चीन काल से ही भार्रत में विद्यमार्न थी। रार्जार्/महार्रार्जार्ओं के समय भी सभार्, परिषद, समितियार्ं सूबे आदि के मार्ध्यम से शार्सन चलार्यार् जार्तार् थार्। लोगों को उनकी जरुरतें पूरी करने के लिए निर्णयों में हमेशार् महत्वपूर्ण सहभार्गी मार्नार् जार्तार् थार्। लेकिन जैसे-जैसे समय बीततार् गयार् लोगों की शार्सन व लोक विकास में भार्गेदार्री से अलग कर दियार् गयार् तथार् उनके अपने हित व विकास के लिए बनाइ जार्ने वार्ले कार्यक्रम, नीतियों पर केन्द्र सरकार यार् रार्ज्य सरकार क नियंत्रण बनतार् गयार्। 1992 में सरकार के 74वें संविधार्न संशोधन के मार्ध्मय से पुन: नगरीय क्षेत्रों में स्थार्नीय लोगों को निर्णय लेने के स्तर पर सक्रिय व प्रभार्वषार्ली सहभार्गितार् बनार्ने क प्रयार्स कियार् गयार् है। संविधार्न क 74वार्ं संशोधन में नगर निकायों – नगर पलिका, नगर निगम और नगर पंचार्यतों में शहरी लोगों की भार्गीदार्री बढ़ार्ने में मदद की है। इस संशोधन ने यह स्पष्ट कर दियार् है कि अब शहरों, नगरों, मोहल्लों की भलाइ उनके हित व विकास संबंधी मुद्दों पर निर्णय लेने क अधिकार केवल सरकार के हार्थ में नहीं है। अब नगरों व शहर के ऐसे लोग जो शहरी मुद्दों की स्पष्ट सोच रखते हैं व नगरों, कस्बों व उनमें निवार्स करने वार्ले लोगों की नार्गरिक सुविधार्ओं के प्रति संवेदनशील है, निर्णय लेने की स्थिति में आगे आ गये हैं। महिलार्ओं व पिछड़े वर्गों के लिए विषेष आरक्षण व्यवस्थार् ने हमेषार् से पीछे रहे व हार्षिये पर खड़े लोगों को भी बरार्बरी पर खड़े होने व निर्णय प्रक्रियार् को प्रभार्वित करने क अवसर दियार् है। 74वें संशोधन ने सरकार (लोगों क शार्सन) के मार्ध्मय से आम लोगों की सहभार्गितार् स्थार्नीय स्वशार्सन में सुनिश्चित की है। हर प्रकार के महत्वपूर्ण निर्णयों में स्थार्नीय लोगों को सम्मिलित करने से निणर्य प्रक्रियार् प्रभार्वी, पार्रदश्र्ार्ी व समुदार्य के प्रति संवेदनशील हो जार्ती है।

बहुत समय पहले नीति निर्मार्तार्ओं, वरिष्ठ अधिकारियों एवं कार्यक्रमों को चलार्ने वार्ले अधिकारियों तथार् कार्यकर्त्तार्ओं द्वार्रार् जनतार् के लिये योजनार्यें बनार्यी जार्ती थीं। इसलिए योजनार् को बनार्ने की प्रक्रियार् पूर्व में उपर से नीचे की ओर थी। परन्तु यह प्रक्रियार् जनतार् की जरूरतों को पूरी नहीं कर पार्ती थी, विकास गतिविधियों को चलार्ने में लोगों की सहभार्गितार् को प्रोत्सार्हित नहीं करती थी एवं लोगों को भी यह नहीं लगतार् थार् कि लार्गू की जार् रही योजनार् अथवार् कार्यक्रम उनक अपनार् है। इसलिए यह महसूस कियार् गयार् कि लोगों को कार्य योजनार्यें स्वयं बनार्नी चार्हिए, क्योंकि उन्हें अपनी आवश्यकतार्ओं क पतार् होतार् है कि किस प्रकार वे अपने जीवन स्तर में सुधार्र लार् सकते हैं एवं वे अपने विकास में सहभार्गी बन सकते हैं। अत: यह महसूस कियार् गयार् कि लोगों के लिए योजनार् बनार्ने की प्रक्रियार् अनिवाय रूप से नीचे से उपर की ओर होनी चार्हिये क्योंकि लोगों को अपनी ज़रूरतों की पहचार्न होती है जिससे वे योजनार्ओं को वरीयतार् क्रम निर्धार्रित करते हुए योजनार् बनार् सकते हैं। कार्यक्रम क्रियार्न्वित करने वार्ले कार्मिक जनतार्/समुदार्य की योजनार्ओं को समेकित कर सकते हैं।

74वें संविधार्न संशोधन के उद्देश्य

  • देश में नगर संस्थार्ओं जैसे नगर निगम, नगर पार्लिका, नगर परिषद तथार् नगर पंचार्यतों के अधिकारों में एकरूपतार् रहे। 
  • नार्गरिक कार्यकलार्पों में जन प्रतिनिधियों क पूर्ण योगदार्न तथार् रार्जनैतिक प्रक्रियार् में निर्णय लेने क अधिकार रहे। 
  • नियमित समयार्न्तरार्ल में प्रार्देशिक निर्वार्चन आयोग के अधीन चुनार्व हो सके व कोर्इ भी निर्वार्चित नगर प्रशार्सन छ: मार्ह से अधिक समयार्वधि तक भंग न रहे, जिससे कि विकास में जनप्रतिनिधियों क नीति निर्मार्ण, नियोजन तथार् क्रियार्न्वयन में प्रतिनिधित्व सुनिश्चित हो सके। 
  • समार्ज की कमजोर जनतार् क पर्यार्प्त प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने के लिये (संविधार्न संशोधन अधिनियम में प्रार्विधार्नित/निर्दिष्ट) प्रतिशततार् के आधार्र पर अनुसूचित जार्ति, अनुसूचित जन-जार्ति व महिलार्ओं को तथार् रार्ज्य (प्रार्देषिक) विधार्न मण्डल के प्रार्विधार्नों के अन्तर्गत पिछड़े वर्गों को नगर प्रशार्सन में आरक्षण मिलें। 
  • प्रत्येक प्रदेश में स्थार्नीय नगर निकायों की आर्थिक स्थिति सुधार्रने के लिये एक रार्ज्य (प्रार्देषिक) वित्त आयोग क गठन हो जो रार्ज्य सरकार व स्थार्नीय नगर निकायों के बीच वित्त हस्तार्न्तरण के सिद्वार्न्तों को परिभार्षित करें। जिससे कि स्थार्नीय निकायों क वित्तीय आधार्र मजबूत बने। 
  • सभी स्तरों पर पूर्ण पार्रदर्शितार् रहे। 

74वें संविधार्न संशोधन की आवश्यकतार् 

पूर्व की नगरीय स्थार्नीय स्वशार्सन व्यवस्थार् लोकतन्त्र की मंशार् के अनुरूप नहीं थी। सबसे पहली कमी इसमें यह थी कि इसक वित्तीय आधार्र कमजोर थार्। वित्तीय संसार्धनों की कमी होने के कारण नगर निकायों के कार्य संचार्लन पर रार्ज्य सरकार क ज्यार्दार् से ज्यार्दार् नियंत्रण थार्। जिसके कारण धीरे-धीरे नगर निकायों के द्वार्रार् किये जार्ने वार्ले अपेक्षित कार्यों/यार् उन्हें सौंपे गये कायार्ंर् े में कमी होनी लगी। नगर निकायों के प्रतिनिधियों की बरखार्स्ती यार् नगर निकायों क कार्यकाल समार्प्त होने पर भी समय पर चुनार्व नहीं हो रहे थे। इन निकायों में कमजोर व उपेक्षित वर्गों (महिलार्, अनुसूचित जार्ति व अनुसूचित जनजार्ति)क प्रतिनिधित्व न के बरार्बर थार्। अत: इन कमियों को देखते हुए संविधार्न के 74वें संशोधन अधिनियम में स्थार्नीय नगर निकायों की संरचनार्, गठन, शक्तियों, और कार्यों में अनेक परिवर्तन क प्रार्विधार्न कियार् गयार् ।

74वें संविधार्न संशोधन के पीछे सोच 

  • संविधार्न के 74वें संशोधन अधिनियम द्वार्रार् नगर-प्रशार्सन को संवैधार्निक दर्जार् प्रदार्न कियार् गयार् है। 
  • इस संशोधन के अन्तर्गत नगर निगम, नगर पार्लिका, नगर परिषद एवं नगर पंचार्यतों के अधिकारों में एक रूपतार् प्रदार्न की गर्इ है 
  • नगर विकास व नार्गरिक कार्यकलार्पों में आम जनतार् की भार्गीदार्री सुनिश्चित की गर्इ है। तथार् निर्णय लेने की प्रक्रियार् तक नगर व शहरों में रहने वार्ली आम जनतार् की पहुंच बढ़ाइ गर्इ है। 
  • समार्ज कमजोर वर्गों जैसे महिलार्ओं अनुसूचित जार्ति, जनजार्ति व पिछड़े वर्गों क प््रतिशततार् के आधार्र पर प्रतिनिधित्व सुनिश्चित कर उन्हें भी विकास की मुख्य धार्रार् से जोड़ने क प्रयार्स कियार् गयार् है। 
  • 74वें संशोधन के मार्ध्यम से नगरों व कस्बों में स्थार्नीय स्वशार्सन को मजबूत बनार्ने के प्रयार्स किये गये हैं। 
  • इस संविधार्न की मुख्य भार्वनार् लोकतार्ंत्रिक प्रक्रियार् की सुरक्षार्, निर्णय में अधिक पार्रदर्षितार् व लोगों की आवार्ज पहुंचार्नार् सुनिश्चित करनार् है। 

नगर निकायों के गठन एवं संरचनार् 

शहरी क्षेत्रों के आकार व जनसंख्यार् आधार्रित 

  • अधिक आबार्दी वार्ले/महार्नगरीय क्षेत्रों में – नगर निगम क गठन होगार् (एक लार्ख से ज्यार्दार् जनसंख्यार् वार्ले नगर) 
  • छोटे नगरीय क्षेत्रों में- नगरपार्लिक परिषद क गठन होगार् (50 हजार्र से एक लार्ख तक जनसंख्यार् वार्ले नगर)
  • संक्रमणशील (ग्रार्मीण क्षेत्रों से नगरीय क्षेत्रों में परिवर्तित होने वार्ले क्षेत्र ) क्षेत्रों में- नगर पंचार्यत क गठन होगार् (50 हजार्र तक जनसंख्यार् वार्ले नगर)
  • नगर निगम, नगर पार्लिक परिशद व नगर पंचार्यत स्तर पर जनतार् द्वार्रार् एक अध्यक्ष निर्वार्चित कियार् जार्येगार्
  • नगरीय क्षेत्र के प्रत्येक वाड से प्रत्यक्ष रूप से सदस्य निर्वार्चित किये जार्येंगे जिनकी संख्यार् वाडों की संख्यार् के आधार्र पर रार्ज्य सरकार द्वार्रार् जार्री विज्ञप्ति के अनुसार्र होगी।
  • पदेन सदस्य के रूप में नगर निकायों में लोकसभार् एवं रार्ज्य विधार्न सभार् के ऐसे सदस्य शमिल किये जार्येंगे, जो नगरीय निकाय क्षेत्र (पूर्णत: यार् भार्गत:) के निर्वार्चन क्षेत्रों क प्रतिनिधित्व करते हैं।
  • पदेन सदस्य के रूप में रार्ज्य सभार् व रार्ज्य विधार्न परिषद के ऐसे सदस्य जो नगरीय निकाय क्षेत्र के अन्दर निर्वार्चकों के रूप में पंजीकृत है। 
  • नगरपार्लिक प्रशार्सन में विशेष ज्ञार्न यार् अनुभव रखने वार्ले निर्दिष्ट/नार्मित सदस्य स्थार्नीय निकायों में शार्मिल किये जार्येंगे। 
  • संविधार्न के अनुच्छेद 243-एस. के प्रस्तर (5) के अधीन स्थार्पित समितियों के अध्यक्ष यदि कोर्इ हो। 

नगर निकायों क कार्यकाल 

नगर निगम, नगर पार्लिका, एवं नगर पंचार्यतों क कार्यकाल पहली बैठक के दिन से पार्ंच वर्ष तक रहेगार्। अगर किसी कारणवष 74वें संविधार्न संशोधन के नियमों के अनुरूप नगर निकाय अपनी जिम्मेदार्रियों व उत्तरदार्यित्वों को पूरार् नहीं करते यार् उनमें अनियमततार् पार्यी जार्ती है तो पार्ंच वर्श पूर्व भी रार्ज्य सरकार इन्हें भंग यार् बर्खार्स्त कर सकती है। बर्खार्स्त/भंग करने के 6 मार्ह के अन्दर अनिवाय रूप से चुनार्व करवार्कर नयार् बोर्ड गठित कियार् जार्नार् आवश्यक है। नगर निकायों को भंग करने से पूर्व सुनवाइ क एक न्यार्योचित अवसर दियार् जार्येगार्।

नगर निकायों की बैठकें व उनकी कार्यवार्हियार्ँ 

कार्यपार्लक पदार्धिकारी द्वार्रार् निश्चित दिन तथार् नियत समय पर एक मार्ह में कम से कम एक बैठक आयोजित की जार्एगी। अध्यक्ष के निर्देश पर अन्य बैठकें भी कार्यपार्लक अधिकारी द्वार्रार् बुलार्यी जार् सकती हैं। यदि नगर निकाय के पार्स कार्यपार्लक पदार्धिकारी नहीं है तो अध्यक्ष बैठक आयोजित करेगार्। आवश्यकतार् पड़ने पर किसी भी दिन यार् समय पर नोटिस देने के बार्द अघ्यक्ष द्वार्रार् आपार्तकालीन बैठक बुलार्यी जार् सकती है। आपार्तकालीन बैठकों के अतिरिक्त अन्य बैठकों हेतु नोटिस को कम से कम 3 दिन पूर्व सभी सदस्यों को भेजार् जार्नार् अनिवाय होगार्। नोटिस की अवधि 3 दिन से अधिक भी हो सकती है। आपार्तकालीन बैठकों के मार्मले में यह अवधि कम से कम 24 घंटे की होनी चार्हिए। बैठक हेतु प्रत्येक सूचनार् में बैठक की तिथि, समय तथार् स्थार्न क उल्लेख आवश्यक है। बैठक की गणपूर्ति कुल सदस्यों के एक तिहाइ सदस्यों की उपस्थिति मार्नी जार्येगी। गणपूर्ति के अभार्व में बैठक स्थगित कर दी जार्येगी तथार् तय की गर्इ तिथि को बैठक आयोजित की जार्एगी। जिसकी सूचनार् आयोजन के कम से कम तीन दिन पूर्व दी जार्एगी। बैठक की कार्यवार्ही को कार्यवार्ही पुस्तिक में अंकित कियार् जार्एगार् जिस पर अध्यक्ष क हस्तार्क्षर होगार् कार्यवार्ही की प्रतियों को रार्ज्य सरकार यार् रार्ज्य सरकार द्वार्रार् निदेषित प्रधिकारी को तुरन्त भेज दी जार्एगी। पार्रिस्थितियों की अनुकूलतार् के आधार्र पर अधिषार्सी अधिकारी अथवार् सचिव द्वार्रार् बैठक से पूर्व सभी सदस्यों को बैठक से सम्बन्धित अभिलेख, पत्रार्चार्र जो उस बैठक में विचार्र किये जार्येगें, दिखार्ये जार्येंगे जब तक कि अध्यक्ष अथवार् उपार्ध्यक्ष द्वार्रार् अन्यथार् निर्देषित कियार् गयार् हो।

किसी सदस्य द्वार्रार् बैठक में कोर्इ प्रस्तार्व लार्नार् 

यदि कोर्इ सदस्य, बैठक में कोर्इ प्रस्तार्व लार्नार् चार्हतार् है तो उसे कम से कम एक सप्तार्ह पूर्व अघ्यक्ष को अपने इस विचार्र से लिखित रूप में अवगत करार्नार् होगार्। कोर्इ भी सदस्य सभार् में व्यवस्थार् के प्रष्न को अध्यक्ष के समक्ष उठार् सकतार् है लेकिन उस पर तब तक कोर्इ चर्चार् नहीं की जार्येगी जब तक कि उपस्थित सदस्यों की रार्य जार्नने हेतु अध्यक्ष उपयुक्त न समझे। किसी भी प्रस्तार्व अथवार् प्रस्तार्वित संशोधन पर विचार्र-विमर्ष से पूर्व अध्यक्ष सदस्यों से उस प्रस्तार्व के समर्थन की मार्ंग कर सकतार् है। प्रत्येक सदस्य/सभार्सद अपने स्थार्न से अघ्यक्ष को सम्बोधित करते हुए ही प्रष्न पूछ सकतार् है, एवं उस पर चर्चार् कर सकतार् है। प्रस्तुतकर्तार् के अतिरिक्त कोर्इ भी सदस्य किसी प्रस्तार्व यार् संशोधन पर अध्यक्ष की अनुमति के बिनार् दो बार्र नहीं बोलेगार्। बैठक की कार्य सूची/कार्यवार्ही से सम्बन्धित सभी प्रष्न किसी/एक सदस्य द्वार्रार् दूसरे सदस्य से अध्यक्ष के मार्ध्यम से ही पूछे अथवार् प्रस्तुत किये जार्एगें। अध्यक्ष द्वार्रार् बैठक की कार्यवार्ही/कार्यसंचार्लन निम्न क्रम से की जार्येगी-

  • सर्वप्रथम गत बैठक क कार्यवृत्त पढ़ार् जार्ऐगार्। 
  • यदि प्रथम बैठक है, तो गत मार्ह क लेखार् बोर्ड के विचाथ तथार् आदेशाथ प्रस्तुत होगार्। 
  • स्थार्नीय शार्सन तथार् उनके अधिकारियों से प्रार्प्त पत्रों/सूचनार्ओं को पढ़ार् जार्ऐगार्।
  • समितियों तथार् सदस्यों के प्रतिवेदन यथार् आवश्यक आदेशाथ तथार् स्वीकृताथ विचार्र किये जार्ऐगें। 
  • निर्धार्रित प्रक्रियार्नुसार्र सूचित किये गये प्रस्तार्वों पर चर्चार् व मतदार्न करार्यार् जार्येगार्।
  • अगली बैठक में लार्ये जार्ने वार्ले प्रस्तार्वों क नोटिस/सूचनार् दी जार्ऐगी।
  • समितियों, अधिकारियों आदि के आदेशों की अपीलों क निस्तार्रण कियार् जार्एगार्। 

नगरीय निकायों में वित्तीय प्रबंधन 

74वें संविधार्न संशोधन के उपरार्न्त अब नगर निकायों के आय के निम्नलिखित सार््रेत है।
1. रार्ज्य वित्त आयोग के द्वार्रार् निर्धार्रित धनरार्शि।
2. नगर निकायों द्वार्रार् वसूले गये करों से प्रार्प्त धनरार्शि।
3. रार्ष्ट्रीय वित्त आयोग के द्वार्रार् निर्धार्रित धनरार्शि ।

  • रार्ज्य सरकार द्वार्रार् नगरीय निकायों में समय-समय पर अनुदार्न देने की प्रथार् को समार्प्त कर रार्ज्य सरकार द्वार्रार् प्रार्प्त कुल करों में नगरीय स्थार्नीय निकायों के अंश क निर्धार्रण कियार् गयार्।
  • स्थार्नीय निकायों को दी जार्ने वार्ली रार्शि के वितरण क आधार्र 80 प्रतिशत जनसंख्यार् एवं 20 प्रतिशत क्षेत्र के आधार्र पर निर्धार्रित कियार् गयार् है।
  • इसके अतिरिक्त प्रत्येक केन्द्रीय वित्त आयोग प्रतिवर्ष शहरी स्थार्नीय निकायों के लिए धन आवंटित करतार् है। 
  • आयोग के निर्देशार्नुसार्र केन्द्रीय वित्त आयोग द्वार्रार् दी गर्इ रार्शि क उपयोग वेतन, मजदूरी में नहीं कियार् जार्एगार् बल्कि यह सार्मार्न्य सुविधार्एं जैसे जल निकासी, कूड़ार् निकासी, शौचार्लयों की सफाइ, माग-प्रकाश इत्यार्दि में ही इसक उपयोग कियार् जार्एगार्। 
  • 74वें संविधार्न संशोधन अधिनियम में 12वीं अनुसूची के अन्तर्गत जो 18 कार्य/दार्यित्व शहरी स्थार्नीय निकायों को दिये गये हैं रार्ज्य सरकार को उन उद्देष्यों की पूर्ति हेतु नगर निकायों आवश्यक रार्शि दी जार्येगी। 
  • नगरपार्लिक के आय क एक मुख्य स्रोत इसके द्वार्रार् लगार्ये गये विभिन्न कर एवं शुल्क भी हैं। 

नगर निकायों में बजट की आवश्यकतार् व महत्तार् 

वित्तीय प्रबन्धन के लिए आय-व्ययक अनुमार्न/आगणन अर्थार्त बजट तैयार्र करनार् अत्यन्त आवश्यक है। बजट आय तथार् व्यय क एक अनुमार्न है जो कि अपने संसार्धनों के उपयोग के लिए एक प्रकार से माग दर्शक, नीतियों के निर्धार्रण, व्यय संबंधी निर्णय लेने के लिए माग दर्शक, वित्तीय नियोजन क एक यंत्र तथार् संप्रेषण क एक मार्ध्यम है। बजट वित्तीय प्रबन्धक क एक महत्वपूर्ण अवयव है, इसे मार्त्र औपचार्रिकतार् के रूप में नहीं लेनार् चार्हिए।

नगर निकायों में बजट एक विधिक आवश्यकतार् है, क्यों कि जब तक वित्तीय वर्ष क बजट बोर्ड द्वार्रार् पार्रित नहीं कियार् जार्तार् है, तब तक कोर्इ खर्चार् नहीं कियार् जार् सकतार् है। बजट तैयार्र कर लेने से लक्ष्यों व उद्देश्यों के निर्धार्रण तथार् नीतिगत निर्णय लेने में सहार्यतार् मिलती है।बजट के द्वार्रार् वार्स्तविकतार् आधार्रित कार्य नियोजन आसार्नी से कियार् जार् सकतार् है अर्थार्त योजनार्ओं व कार्यक्रम की प्रार्थमिकतार्यें निर्धार्रित करने में सहार्यतार् मिलती है। इससे कार्य कलार्पों पर वित्तीय नियन्त्रण रखार् जार् सकतार् है और धन क अपव्यय भी रोक जार् सकतार् है। अगर नगर निकाय आय-व्यय क विधिवत व उचित दस्तार्वेजीकरण करते हैं व उसको आधार्र मार्नकर अपनार् बजट बनार्ते हैं तो अंशदार्न, अनुदार्न, सहार्यतार् प्रार्प्त करने में सहार्यतार् मिलती है।

बजट आवश्यकतार् आधार्रित होनार् चार्हिए व इस हेतु ‘‘जीरो बेस बजटिंग’’(शून्य आधार्रित बजट) प्रक्रियार् को अपनार्नार् चार्हिए न कि पिछले आय व्ययक अनुमार्न पर कुछ प्रतिशत बढोतरी यार् घटोतरी करें। अगले वित्तीय वर्ष क बजट वर्तमार्न वित्तीय वर्ष के अन्तिम मार्ह अर्थार्त माच की 15 तार्रीख तक बोर्ड द्वार्रार् विचार्रोपरार्न्त पार्रित पार्रित कर लियार् जार्नार् चार्हिए। अत: बजट तैयार्र करने की प्रक्रियार् प्रत्येक दशार् में अंतिम तिमार्ही के पूवाद्ध में ही पूर्ण कर ली जार्नी चार्हिए व इस पर बोर्ड बैठक में विस्तृत चर्चार् करनी चार्हिए जिससे कि नीतिगत निर्णय, प्रार्थमिकतार् निर्धार्रण तथार् जनतार् के हित में उचित वित्तीय निर्णय लिये जार् सकें। चूंकि बोर्ड सभार्सदों से ही बनार् है, अत: बजट के मार्ध्यम से सभार्सदों के बहुमत निर्णय से नीतियों व रणनीतियों क निर्धार्रण होतार् है।

नगरीय निकायों में लगार्ये जार्ने वार्ले कर 

  1. भवनों यार् भूमियों यार् दोनों के वाषिक मूल्य पर कर। 
  2. नगर पार्लिक की सीमार् के अन्तर्गत व्यार्पार्र पर कर जिन्हें नगर पार्लिक की सेवार्ओं से विशेष लार्भ मिलतार् है। 
  3. व्यार्पार्र, पेशों तथार् व्यवसार्यों पर कर जिसमें सभी रोजगार्र जिनके लिये वेतन यार् शुल्क मिलतार् है वह सम्मिलित हैं। 
  4. मनोरंजन कर। 
  5. नगरपार्लिक के अंदर भार्ड़े पर चलने वार्ली गार्ड़ियों यार् उसमें रखी गर्इ गार्ड़ियों पर कर। 
  6. नगरपार्लिक के अन्दर रखे कुत्तों पर कर।
  7. नगर पार्लिक के अन्दर रखे सवार्री, चार्लन यार् बोझे के पशुओं पर कर। 
  8. व्यक्तियों पर सम्पत्तियों यार् परिस्थितियों के आधार्र पर कर। 
  9. भवनों यार् भूमि यार् दोनों के वाषिक मूल्य पर जल कर।
  10. भवन के वाषिक मूल्य पर उर्तक मूल्य पर उत्प्रवार्ह कर। 
  11. सफाइ कर। 
  12. शोचार्लयों, मूत्रार्लयों तथार् गड्ढ़ों से उत्प्रवार्ह तथार् प्रदूषित जल के एकत्रीकरण, हटार्ने तथार् खार्त्मार् करने के लिए कर। 
  13. नगर पार्लिक की सीमार् के अन्तर्गत स्थित सम्पत्ति के हस्तार्ंतरण पर कर। 
  14.  संविधार्न के अन्तर्गत कोर्इ अन्य कर जो रार्ज्य विधार्यिक द्वार्रार् रार्ज्य में लार्गू कियार् जार् सके। 

प्रार्वधार्न 

  1. 3 व 8 के कर एक सार्थ नहीं लगार्ए जार् सकते हैं। 
  2. 10 0 12 के कर एक सार्थ नहीं लगार्ए जार् सकते हैं। 
  3. 13 के अन्तर्गत नगर पार्लिक के अन्तर्गत अचल सम्पति के हस्तार्ंतरण पर कर नहीं लगार्यार् जार् सकतार् है। (यदि वह सम्पति नजूल की हो) 
  4. 5 क कर मोटर गार्ड़ी, पर नहीं लगार्यार् जार् सकतार् है। 

मूल्यार्ंकन , छूट व वसूली 

भवन यार् भूमि दोनों पर कर लगार्ने के लिए नगर निकाय एक मूल्यार्ंकन सूची तैयार्र कर एक सावजनिक स्थल पर प्रदर्षित कर सकते हैं तार्कि जिन लोगों को आपति हो वह एक महीने के अन्दर दार्खिलार् कर सकें। जब आपतियों क निवार्रण हो जार्तार् है तब मूल्यार्ँकन सूची को प्रमार्णित कियार् जार्तार् है। प्रमार्णित मूल्यार्ँकन सूची नगर निकाय कार्यार्लय में जमार् कर दी जार्ती है तथार् उसे जनतार् द्वार्रार् निरीक्षण के लिये खुलार् घोषित कर दियार् जार्तार् है। सार्मार्न्यत: नर्इ मूल्यार्ँकन सूची पार्ँच वर्ष में एक बार्र तैयार्र की जार्ती है। नगर निकाय किसी समय मूल्यार्ंकन सूची को बदल सकते हैं यार् उसमें संशोधन कर सकते हैं। यदि कोर्इ भवन यार् भूमि वर्ष में 90 यार् अधिक दिनों तक लगार्तार्र खार्ली रहती है तो नगर पार्लिक उस अवधि में कर छूट देती है। उस भवन यार् भूमि के पुन: कब्जे के लिए उस सम्पत्ति के मार्लिक को 15 दिनों के अंदर नगरपार्लिक को सूचनार् देनी होती है। अगर कोर्इ ऐसार् नहीं करतार् तो वह दंड क भार्गी होतार् है। दण्ड की रार्शि वार्स्तविक कर की दुगुनी रार्शि से दस गुनार् रार्शि से भी अधिक हो सकती है।

नगर पार्लिक करों से संबंधित अपीलें नगर पार्लिक कार्यार्लय में दार्यर की जार् सकती है। सार्थ ही सार्थ इसकी एक प्रति जिलार्धिकारी के यहार्ँ भी जार्ती है। सार्मार्न्यत: किसी भी अवधि के लिए देय कर यार् शुल्क क भुगतार्न उसकी अवधि के शुरू होने से पूर्व करनार् होतार् है। जब व्यक्ति कर क भुगतार्न समय पर नहीं करतार् तो उसके विरूद्व नगरपार्लिक द्वार्रार् वार्रंट जार्री हो जार्तार् है। ऐसे व्यक्ति के अहार्ते से सम्पति को जब्त कर उसे नीलार्मी द्वार्रार् बेचार् जार् सकतार् तथार् बकायों की वसूली की जार् सकती है। जब कोर्इ व्यक्ति किसी कर क बकायेदार्र हो तो नगरपार्लिक कलेक्टर से प्राथनार् कर सकती है कि वह ऐसे धन को भू-रार्जस्व की भार्ँति वसूल करें, जिसमें कार्यवार्ही क खर्च शार्मिल नहीं होगार्। कलेक्टर जब बकायार् धन से संतुष्ट हो जार्तार् है तो उसे वसूल करने की कार्यवार्ही करतार् है।

नगरीय निकायों में वाड कमेटियार्ँ 

  1. स्थार्नीय लोग स्थार्नीय विकास में भार्गीदार्री निभार् सकें इसलिए संविधार्न के 74वें संशोधन अधिनियम के अन्तर्गत स्थार्नीय नगरीय सरकार के लिए शक्तियों एवं सत्तार् क विकेन्द्रीकरण कियार् गयार् है।
  2. संशोधन के मार्ध्यम से विकेन्द्रीकरण के द्वार्रार् ऐसे संस्थार्गत ढ़ार्ंचे क निर्मार्ण करने क प्रयार्स कियार् गयार् जिससे सभी स्तर के लोग स्थार्नीय विकास में भार्गेदार्री निभार् सकें। नगरीय निकायों के इस ढ़ार्चे को हम स्थार्नीय स्वशार्सन की दो स्तरों पर की गर्इ व्यवस्थार् के रूप में जार्नते हैं।
  3. पहलार् स्तर नगर निकाय स्तर पर चयनित सरकार है जिसमें स्थार्नीय लोग प्रतिनिधि के रूप में चुनकर आते हैं जो स्थार्नीय समस्यार्ओं की बेहतर समझ के सार्थ स्थार्नीय विकास के लिए प्रयार्स करते हैं।
  4. दूसरे स्तर पर वाड कमेटियों के गठन क प्रार्वधार्न है जिससे कि वाड के स्तर पर भी लोग विकास के लिए नियोजन से लेकर निर्णय लेने की प्रक्रियार् एवं विकास कार्यों के क्रियार्न्वयन में अपनी भार्गीदार्री निभार् सकें।
  5. 74वें संविधार्न की धार्रार् 243(1) के अनुसार्र यह व्यवस्थार् केवल उन शहरों में लार्गू होती है जिनकी जनसंख्यार् तीन लार्ख यार् उससे अधिक हो। जिन शहरों की जनसंख्यार् तीन लार्ख है यार् उससे कम है, वहार्ँ पर रार्ज्य सरकार अन्य समीतियों को गठित करने को स्वतंत्र है। वाड कमेटी पार्ँच यार् उनसे अधिक वाडों से मिलकर बनती है, जिसमें एक अध्यक्ष तथार् जितने भी वार्डर् उस कमेटी में हैं के चयनित प्रतिनिधि/सदस्य उसके होते हैं। 
  6. नगरीय स्थार्नीय स्वशार्सन के तीन व्यक्ति जो इससे संबंधी मुद्दों/समस्यार्ओं के बार्रे में विशेष ज्ञार्न रखते हों उसके वाड के नार्मित सदस्य होते है। उन्हीं में से किसी एक व्यक्ति क चुनार्व एक वर्ष के लिए अध्यक्ष के पद के लिए होतार् है। जो यदि चार्हे तो दुबार्र अध्यक्ष पद के लिए चुनार्व लड़ सकतार् है। 
  7. वाड कमेटी क कार्यकाल उक्त नगर निकाय की अवधि के सार्थ समार्प्त होतार् है। 

संविधार्न के 74वें संशोधन के अनुसार्र वाड कमेटियों क व्यवहार्रिक रूप में वह स्वरूप नहीं बन पार् रहार् है जिसकी कल्पनार् की गर्इ थी। एक सशक्त वाड कमेटी की भूमिकाओं में वाड/वाडों की समस्यार्ओं की पहचार्न कर उनकी प्रार्थमिकतार्एं तय करनार्, नगर निकायों के द्वार्रार् करार्ये जार् रहे कार्यों क निरीक्षण, नियोजन एवं विकासार्त्मक गतिविधियों क संचार्लन, वाषिक आम सभार् क आयोजन, म्यूनिसीपल वाड की जवार्बदेही एवं इनके कायार्ंर् े में पार्रदर्शितार् इत्यार्दि हो सकती है।

Share:

Leave a Comment

Your email address will not be published.

TOP