सूचनार् समार्ज की अवधार्रणार्, परिभार्षार् एवं प्रकृति

सूचनार् समार्ज से तार्त्पर्य ऐसे समार्ज से है-जहार्ँ सूचनार् क निर्मार्ण, वितरण, हस्तार्ंतरण, उपयोग तथार् सुधार्र एक महत्वपूर्ण आर्थिक, रार्जनैतिक तथार् सार्ंस्कृतिक गतिविधि होती है। इस प्रकार के समार्ज में उत्पार्दन, अर्थव्यवस्थार् और समार्ज में वृहद रूप में सूचनार् तकनीक की केन्द्रीय भूमिक होती है। सूचनार् समार्ज को औद्योगिक समार्ज क ही विकसित स्वरूप समझार् जार्तार् है। इस प्रकार की अन्य अवधार्रणार्एँ पूर्व-औद्यार्ोगिक समार्ज (डेनियल बेल) , आधुनिक समार्ज , ज्ञार्न समार्ज, टेलीमेटिक समार्ज, सूचनार् क्रार्ंति तथार् नेटवर्क समार्ज (मैन्युअल कॉस्टल्स) आदि से ही संयुक्त रूप में सूचनार् समार्ज क निर्मार्ण हुआ हैं।

सर्वप्रथम सूचनार् समार्ज की अवधार्रणार् क विकास अर्थशार्स्त्री – फ्रीट्ज़ मेचल्प द्वार्रार् कियार् गयार्। उन्होंने अपने अध्ययनों में शोध कार्यों के लिए अपनाइ जार् रही प्रक्रियार् क गहन अध्ययन कर पार्यार् कि प्रत्येक प्रकार के कार्य में सूचनार् की उपयोगितार् प्रबल है। सार्थ ही सूचनार् समार्ज को विवरणित करने हेतु विविध अवधार्रणार्ओं क उपयोग कियार् जार् रहार् थार्- यह अवधार्रणार्एँ जैसे ज्ञार्न/सूचनार् अर्थव्यवस्थार्, पूर्व-औद्योगिक समार्ज, पूर्व-आधुनिक समार्ज, सूचनार् समार्ज, नेटवर्क समार्ज, सूचनार् पूँजीवार्द, नेटवर्क पूँजीवार्द आदि।

वर्तमार्न में यह एक महत्वपूर्ण सार्मार्जिक प्रश्न है कि हम किस प्रकार के समार्ज में रह रहे हैं तथार् सूचनार् और तकनीक इस प्रकार के समार्ज में क्यार् भूमिक निभार् रहे हैं। ये दोनो प्रश्न/पक्ष सूचनार् समार्ज/सूचनार् क्रार्ंति के महत्वपूर्ण केन्द्रीय विषय हैं।

एक समार्ज जो कि अधिकतर नार्गरिकों के दैनिक जीवन में अधिकतर कार्यस्थलों और संगठनों में उच्च स्तरीय सूचनार् गहनतार् लिए हुए हो तथार् उपयुक्त तकनीकों के उपयोग से वृहद स्तर के व्यक्तिगत सार्मार्जिक, शैक्षणिक तथार् व्यपार्र गतिविधियों तथार् बिनार् किसी स्थार्न की दूरी से जल्द से जल्द डिजिटल डार्टार् के हस्तार्ंरण प्रसार्रण प्रार्प्ति हेतु एक पर्यार्प्त व्यवस्थार् उपलब्ध करवार्तार् हो, तथार् नार्गरिकों के इस नवीन वार्तार्वरण में सूचनार् के समुचित प्रयोग हेतु उपयुक्त कौशल के विकास को भी प्रोत्सार्हीत करतार् हो।

सूचनार् समार्ज की परिभार्षार्

सर्वप्रथम 1962 में फ्रीट्ज़ मेचल्प ने ज्ञार्न उद्योग की अवधार्रणार् को प्रस्तुत कियार्। उन्होने पार्ँच क्षेत्रों को ज्ञार्न के विविध क्षेत्रों के रूप में पृथक कियार्-

– शिक्षार्, शोध और विकास, मार्स मीडियार्, सूचनार् तकनीक, सूचनार् सेवार्- इन श्रेणियों के आधार्र पर गणनार् कर उन्होने बतार्यार् की 1959 में अमेरिक के कुल सकल घरेलू उत्पार्द क 29 प्रतिशत ज्ञार्न उद्योग द्वार्रार् उत्पार्दित कियार् जार्तार् है।इन तथ्यों के आधार्र पर सूचनार् समार्ज को ऐसे समार्ज के रूप में परिभार्षित कियार् जार् सकतार् है जहार्ँ आधे से अधिक सकल घरेलू उत्पार्दन तथार् आधे से अधिक कर्मचार्री सूचनार् अर्थव्यवस्थार् में सक्रिय रहते हैं।

पीटर डर्कर ने अपनार् मत प्रस्तुत करते हुए इसे समार्ज क हस्तार्ंरण कहार् है जिसमें उत्पार्द/ वस्तुओं पर आधार्रित अर्थव्यवस्थार् वार्ले समार्ज से सूचनार् तथार् ज्ञार्न पर आधार्रित अर्थव्यवस्थार् वार्लार् समार्ज विकसित हो।

डेनियल बेल के अनुसार्र उन व्यक्तियों की संख्यार् जो सेवार् और सूचनार् के उत्पार्दन में लगे हैं ,समार्ज के सूचनार्त्मक गुणों के द्योतक हैं। सूचनार् समार्ज में कच्चे मार्ल, उर्जार् से ज्यार्दार् सूचनार् की अहमियत होती है।

बेल पीटर ओटो और फिलिप सोनटेग (1985) के अनुसार्र सूचनार् समार्ज एक ऐसार् समार्ज है, जहार्ँ कर्मचार्रियों द्वार्रार् बहुलतार् में सूचनार् संबंधी कार्य कियार् जार्तार् है जैसे:- उन्हे उर्जार् और पदाथ के बजार्य सूचनार्, चिन्ह, आकृति, छार्यार्चित्र के सार्थ अधिक कार्य करनार् होतार् है।

सूचनार् समार्ज क उदभव

पिछले कुछ दशक से सूचनार् उत्पार्दन क एक प्रमुख घटक बनकर उभरार् है। सूचनार् एक उत्पार्द में तब्दील हो चुकी है।पिछले कुछ वर्षों से नेटवर्क समार्ज की अवधार्रणार् सूचनार् समार्ज में अधिक महत्वपूर्ण हो गर्इ है।सूचनार् समार्ज क एक महत्वपर्ण गुण उसके आधार्रभूत संरचनार् क नेटवर्क पर आधार्रित होनार् है। नेटवर्क सूचनार् समार्ज में तंत्रिक तंत्र की भूमिक अदार् कर रहे हैं। कम्प्यूटर नेटवर्क तकनीकी आधार्र प्रदार्न करते हैं।जो संचार्र समन्वय करने में महत्वपूर्ण भूमिक निभार्ते हैं।

स्टीहर के अनुसार्र सूचनार् समार्ज अर्थव्यवस्थार् पदाथों के बजार्य मुख्यत: चिन्हों और सूचनार् के इनपुट पर अधिक निर्भर करती है। अल्विन टफ्लर ने भी ज्ञार्न/सूचनार् को सूचनार् समार्ज क मुख्य संसार्धन मार्नार् है।

लयोटाड के मतार्नुसार्र पूर्व औद्योगिक समार्ज ने ज्ञार्न को आम जनतार् के पहुँच में लार् दियार् है, क्योकि सूचनार् और ज्ञार्न क केन्द्रीकृत स्वरूप/संरचनार् समूह से विकेन्द्रीकृत सूचनार् समूह में तब्दील हो गए हैं।

सूचनार् समार्ज पर गहन शोध एवं अध्ययन करने वार्ले विद्वार्नों द्वार्रार् निम्नलिखित शब्दार्वलियों क प्रयोग सूचनार् समार्ज को विस्तार्रित करने हेतु कियार् गयार् है-

  1. हस्तार्ंरणीय नेटवर्क पूँजीवार्द
  2. डिजिटल पूँजीवार्द
  3. वर्चुअल पूँजीवार्द 
  4. हाइ-टेक पूँजीवार्द

सूचनार् समार्ज में एक बार्त समार्न है जो इस बार्त पर जोर देती है कि ज्ञार्न, सूचनार्, तकनीक तथार् कम्प्यूटर नेटवर्क समार्ज के पुर्ननिर्मार्ण और वैश्वीकरण क एक प्रमुख आधार्र है। यह सूचनार् समार्ज एक नए सार्क्षरतार् मार्नक की मार्ँग करतार् है, जो मार्त्र कम्प्यूटर क इस्तेमार्ल करने भर के ज्ञार्न से अधिक गहनतार् लिए हो। नवीन सार्क्षरतार् में ज्ञार्न और सूचनार् के बीच भेद करने और बुद्धिमत्तार् को ज्ञार्न से पृथक करने हेतु प्रचुर क्षमतार् की आवश्यकतार् है। जिसने सभी व्यक्तियों की जीवन शैली में कम्प्यूटर तंत्र, तकनीकी उपकरण, सूचनार् क प्रयोग जैसे ज्ञार्न को प्रार्प्त करन,े उसक उपयोग करने हेतु प्रोत्सार्हित कियार्। जिसने सूचनार् समार्ज के निर्मार्ण में योगदार्न दियार् है। हम प्रतिदिन सूचनार्ओं को रेडियो, टेलीवीजन, अखबार्र, कितार्बों, सूचनार् पटलों आदि जैसे किसी न किसी मार्ध्यम से प्रार्प्त करते हैं और उनक उपयोग आवश्यकतार्नुसार्र करते है, हमार्री इसी आवश्यकतार् से सूचनार् समार्ज क उदभव और विकास संभव हुआ है।

अभी तक सावभौमिक रूप से मार्न्य अवधार्रणार् क विकास नही हो सक है कि सूचनार् समार्ज में क्यार् शार्मिल है और क्यार् नही। अधिकतर विद्वार्न मार्नते हैं कि समार्ज की आधार्रभूत कार्यप्रणार्ली में जो बदलार्व 1970 के आसपार्स से शुरू हुआ है, वर्तमार्न में हो रहार् है और बदल रहार् है। ये न तो सूचनार् तकनीक है और न इंटरनेट और मीडियार् यार् उत्पार्दन क कोर्इ विशेष ढ़ंग है।

सूचनार् समार्ज की प्रकृति

  1. सूचनार् क हस्तार्ंतरण:- सूचनार् समार्ज में सूचनार् क हस्तार्ंतरण सरल और तकनीकों क वृहद प्रयोग कर कियार् जार्तार् है। सूचनार् क तीव्र, प्रभार्वी, और उच्च तकनीकी पर आधार्रित हस्तार्ंतरण सूचनार् समार्ज की महत्वपूर्ण गतिविधि होती है।
  2. सूचनार् की केन्द्रीय भूमिका:– सूचनार् समार्ज की प्रत्येक कार्यप्रणार्ली में सूचनार् केन्द्रीय भूमिक क निर्वार्ह करती है। अत: सूचनार् समार्ज क मुख्य संसार्धन और मुख्य उत्पार्द दोनो ही सूचनार् यार् सूचनार् से जुडे अन्य उपकरण ही होते है।
  3. सूचनार् क बहुलतार् से उत्पार्दन:- सूचनार् समार्ज में शोध, ज्ञार्न, अध्ययन, अनुसंधार्न जैसी गतिविधियार्ँ प्रमुख होती हैं, जो कि बहुलतार् से सूचनार् क उपयोग तथार् उत्पार्दन करती हैं। सूचनार् क विविध प्रभार्वी रूपों में उपयोग:- सूचनार् और तकनीक क उपयोग सूचनार् को सरलतार् से प्रार्प्त कर दैनिक कार्यों में कियार् जार्तार् है। जो की समार्ज के विकास में सहार्यक होती है। 
  4. नेटवर्क की प्रभार्वी एवं सुदृढ़ व्यवस्थार्:- तकनीक और आपस में संबंधित इलेक्ट्रार्निक उपकरणों क तंत्र सूचनार् समार्ज में सूचनार् के प्रभार्वी उपयोग क आधार्र होतार् है। अत: सूचनार् के हस्तार्ंतरण हेतु सुदृढ़ नेटवर्क प्रणार्लियार्ँ ऐसे समार्ज क अभिन्न अंग होती है।
  5. सूचनार् क डिजिटल प्रयोग:- सूचनार् को अलग अलग मार्ध्यमों से तीव्रतार्, सुरक्षार् और सरलतार् से हस्तार्ंतरित किए जार्ने हेतु विभिन्न स्वरूप में सूचनार् क निर्मार्ण और संधार्रण कियार् जार्तार् है। जिनमें सूचनार् को डिजिटल स्वरूप में रूपार्ंतरित कर प्रयोग कियार् जार्नार् अथवार् डिजिटल प्रार्रूप में निर्मार्ण कियार् जार्नार् सम्मिलित है।

सूचनार् समार्ज में कानून की आवश्यकतार्

सूचनार् समार्ज के केन्द्रीय कार्यों में से एक, उसक सूचनार् की सुगमतार् से उपलब्धतार्, पुर्ननिर्मार्ण,बौद्धिक सम्पदार् से संबंधित विविध स्वतंत्रतार्/बंधन जैसी सुविधार्एं ही विविध परेशार्नियों को बढार्वार् देती है। मुख्यत: व्यवसार्य और पूँजी जैसे सूचनार् तथार् ज्ञार्न के उत्पार्दन और विक्रय जैसे कार्यों पर नियंत्रण की आवश्यकतार् को जन्म देते हैं। अत: ऐसे नियंत्रणों एवं नियमों की आवश्यकतार् है जो इस नवीन संसार्धन के प्रभार्वी प्रबंधन और विक्रय में सहार्यक बन सके।

यद्यपि ऐसे नियमनों क संचार्लन और आरोपण सार्मार्जिक और तकनीकी दोनो दृप्टिकोण से कठिन है। तकनीकी रूप से क्योंकि आसार्नी से कॉपी प्रोटैक्टेड व्यवस्थार् अधिकतर/अक्सर आसार्नी से तोडी जार्ती है और सार्मार्जिक रूप से नकारी भी जार्ती है, क्योंकि सूचनार् समार्ज के उपयोगकर्तार्/नार्गरिक ये सार्बित कर चुके हैं कि वे सूचनार् और आँकडों के पूर्णत: उत्पार्दीकरण को स्वीकार करने के इच्छुक नही हैं।

इस प्रकार के व्यवहार्र ने कानूनों और नियमों की वृहद श्रृंखलार् के निर्मार्ण हेतु दबार्व डार्लार् है जिसक परिणार्म ही डिजिटल मिलेनियम कॉपीराइट अधिनियम, सूचनार् हस्तार्ंतरण नियम, सार्इबर लॉ, सूचनार् प्रौद्योगिकी अधिनियम 2000 हैं। जिन्होने सूचनार् समार्ज में सूचनार् के सुरक्षित उपयोग को सफल बनार्यार् है, जिससे ओपन सोर्स सूचनार्ओं के प्रभार्वी उपयोग को प्रोत्सार्हन और विविध सूचनार् उत्पार्दों क स्वतंत्र वितरण एवं विस्तार्रण संभव हो सके। आंशिक भुगतार्न यार् नि:शुल्क उपलब्ध सूचनार् के स्वतंत्र उपयोग, शोधन और सार्झार् उपयोग करने में सहार्यतार् मिल सके। सूचनार् समार्ज पूर्व के औद्योगिक और कृषि प्रधार्न समार्ज से पूर्णत: विपरीत सूचनार् प्रधार्न समार्ज है। सूचनार् समार्ज के मुख्य उपकरण कम्प्यूटर और संचार्र सार्धन है। सूचनार् तकनीक और संचार्र में प्रगति ने हमार्रे जीवनशैली को बदल दियार् है। सूचनार् समार्ज न केवल व्यक्तियों के संबंधों में बदलार्व लार् रहे हैं यार् प्रभार्वित कर रहे हैं बल्कि वे इस बार्त की जरूरत को भी प्रबल कर रहे हैं कि परम्परार्गत संगठनार्त्मक संरचनार् को अधिक लचीलार् होनार् चार्हिए। अधिक भार्गीदार्री सुनिश्चित करनी चार्हिए तथार् अधिक विकेन्द्रीकृत होनार् चार्हिए। वैश्विक सूचनार् समार्ज की धार्रणार् को संचार्र मार्ध्यमों की सहार्यतार् से विश्व के एक वैश्विक गार्ँव के स्वरूप में परिवर्तित होने के वृहद रूप में देखार् जार्नार् चार्हिए।

सूचनार् समार्ज में आधुनिक तकनीकों क प्रयोग कर किये जार्ने वार्ले अपरार्धों क एक अलग आपरार्धिक समूह सक्रिय हुआ है। जिसमें अपरार्ध करने वार्ले बौद्धिक शक्ति के धनी व्यक्ति होते हैं, और अपरार्ध करने हेतु वे कम्प्यूटर, मोबाइल जैसे र्इलेक्ट्रार्निक उपकरणों क उपयोग करते है। उनक लक्ष्य ऐसे ही उपकरणों को नुकसार्न पहुँचार्नार् अथवार् अप्रत्यक्ष रूप से इनके आधार्र पर किसी व्यक्ति यार् व्यवसार्य के विरूद्ध अपरार्ध करनार् होतार् है। इस प्रकार के अपरार्धों को कानूनी दार्यरों में लार्ने, इस प्रकार की प्रवृत्ति को प्रतिबंधित कर सूचनार् तकनीक के उचित प्रयोग हेतु कानूनी निर्देश प्रदार्न करने हेतु कानून की आवश्यकतार् महसूस की गर्इ, इस हेतु पृथक कानूनी संरचनार् क निर्मार्ण कियार् गयार् तथार् पूर्व के कानूनों में भी यथार्स्थिति परिवर्तन किए गए।

1. कानूनी संरचनार्

आधुनिक समार्ज एक आधार्रभूत परिवर्तन के दौर से गुजर रहार् है जहार्ँ औद्योगिक समार्ज जोकि 20वीं सदी की पहचार्न रहार् है तीव्रतार् से 21 वीं सदी के सूचनार् समार्ज क माग प्रशस्त कर रहार् है। यह प्रक्रियार् हमार्रे प्रत्येक दैनिक पहलुओं पर विशेष प्रभार्व डार्ल रही है जैसे ज्ञार्न वितरण, सार्मार्जिक मेलजोल, आर्थिक और व्यार्वसार्यिक गतिविधियार्ँ, रार्जनैतिक पहलू, मीडियार्, शिक्षार्, स्वार्स्थ, सम्पन्नतार् और मनोरंजन। सूचनार् समार्ज दूरसंचार्र, ब्रार्डकॉस्टिंग, मल्टीमीडियार् तथार् सूचनार् एवं संचार्र तकनीक क उपयोग सेवार्ओं और वस्तुओं के उत्पार्दन में करतार् है अत: इस हेतु कानूनी संरचनार् केार् लार्गू कियार् जार्नार् अति आवश्यक है जिसमें रार्जनैतिक अनुबंध (पर्यार्प्त निवेश के प्रार्वधार्नों सहित), विस्तृत रार्प्ट्रीय नीतियों क निर्मार्ण, पूर्व कानूनी प्रार्वधार्नों को अद्यतन कर एक समुचित कानूनी संरचनार् क निर्मार्ण कियार् गयार् है।

समस्त स्तर पर, सूचनार् तथार् संचार्र तकनीक के उपयोग को विकसित और प्रसार्रित करने, सार्ंस्कृतिक भिन्नतार् की प्रतिष्ठार् बनार्ए रखने, मीडियार् की भूमिक को पहचार्नने, सूचनार् समार्ज के नीतिगत दृष्टिकोण को चिन्हार्ंकित करने, इस संबंध में अंतर्रार्ष्ट्रीय और क्षेत्रीय सहयोग को बढार्ने हेतु एक अनुकूल वार्तार्वरण क निर्मार्ण कियार् जार्नार् आवश्यक है।

कानूनी संरचनार्

  1. कापीराइट अधिनियम 
  2. आर्इ.टी. एक्ट 2000 
  3. बौद्विक सम्पदार् अधिकार
  4. सूचनार् का  अधिकार अधिनियम 2005

सूचनार् एवं संचार्र तकनीक से संबंधित कानूनी संरचनार् में सूचनार् के उचित उपयोग, न्यार्योचित प्रतिस्पर्धार्, मीडियार् तथार् बहुरार्ष्ट्रीय संस्थार्ओं के एकाधिकार को रोकने हेतु उपार्य, दूरसंचार्र सेवार्ओं क विकेन्द्रीकरण जैसे महत्वपूर्ण बिन्दुओं को सम्मिलित कियार् गयार् है। वर्तमार्न में पूर्णत: उदार्रीकरण वार्तार्वरण में खुले बार्जार्र में प्रतिस्पर्धार् सुनिश्चित करने हेतु सूचनार् तथार् संचार्र कानून को पार्रदश्र्ार्ी रखार् गयार् है।

कानूनी संरचनार् क प्रमुख सिद्धार्न्त सूचनार्, संचार्र , अद्योसंरचनार् तकनीक तक सार्मार्न्य जन की पहुँच को बढार्नार् है। सूचनार् और तकनीक के उपयोग को अधिक सुरक्षित और सरल बनार्नार् है। अत: इस संरचनार् को सूचनार् उपयोग के बार्धक यार् नियंत्रक के रूप में नही बल्कि नियमन एवं संरक्षण हेतु उपलब्ध उपार्य के रूप में देखार् जार् रहार् है।

उपरोक्त कानूनी संरचनार् क निर्मार्ण कर सूचनार् समार्ज में सूचनार् के प्रयोग को अधिक लोकप्रिय और सुरक्षित बनार्ए जार्ने की कानूनी व्यवस्थार् की गर्इ है। जिसके लार्गू करने पर ही र्इ-गवर्नेंस, र्इ-बैंकिंग, र्इ-व्यवसार्य, जैसी सेवार्ओं के प्रयोग में विश्वार्स विकसित हो सक है। सूचनार् समार्ज की व्यवस्थार् को दृढतार् प्रदार्न करने हेतु नवीन कानूनों की श्रृंखलार् क निर्मार्ण कियार् गयार् है तथार् पूर्व के स्थार्पित कानूनों में भी नवीन कानूनों के आधार्र पर बदलार्व किए गए हैं, जैसे भार्रतीय दण्ड संहितार् 1860, भार्रतीय सार्क्ष्य अधिनियम 1872, बैंकर्स बुक सार्क्ष्य अधिनियम 1891 तथार् रिजर्व बैंक ऑफ इण्डियार् अधिनियम 1934 जैसे नियमों में संशोधन कर सूचनार् तकनीक के प्रयोग को शार्मिल कियार् गयार् है।

सूचनार् से जुडे समस्त पहलुओं पर ध्यार्न केन्द्रित कर व्यार्पक कानूनी संरचनार् क निर्मार्ण कियार् जार् चुक है। प्रत्येक स्तर पर सूचनार् के उपयोग को बढार्वार् देने हेतु उचित व्यवस्थार् की जार् चुकी है। परन्तु इस कानूनी संरचनार् के वार्तार्वरण में प्रत्येक स्तर पर सूचनार् के उत्पार्दकों और उसके उपभोक्तार्ओं के दार्यित्वों की पहचार्न की जार्नार् भी अति आवश्यक है।

2. कानूनी दार्यित्व के स्तर

सूचनार् समार्ज और सूचनार् तकनीक के विकास द्वार्रार् नवीन कार्यशैली में कुछ आधार्रभूत अधिकारों को प्रदार्न कियार् गयार् है तथार् कुछ दार्यित्वों क आरोपण कियार् गयार् है, जिनमें निम्नलिखित शार्मिल हैं:-

  1. सूचनार् तक पहुँच क अधिकार (मुख्यत: सावजनिक सूचनार्) 
  2. संचार्र क अधिकार
  3. बौद्धिक स्वतंत्रतार् 
  4. पत्रव्यवहार्र की गोपनीयतार् 
  5. सूचनार् समार्ज के नार्गरिकों को निजतार् क अधिकार

जब सूचनार् एवं संचार्र तकनीकों को अमल में लार्ने की बार्त आती है तब विविध कानूनी निर्णयों और नियमनों को मार्त्र एक ही दृष्टिकोण से नही देखार् जार्नार् चार्हिए। बल्कि विभिन्न स्तर पर नियमनों को लार्गू करने हेतु अलग-अलग सरोकार समूहों के दार्यित्वों को चिन्हार्ंकित कियार् जार्नार् चार्हिए। समार्ज के सभी सार्झेदार्र- जनतार्, निजी क्षेत्र, सिविल समार्ज संगठन क संचार्र सार्धनों के विकास में सरोकार है तथार् वे पूर्णत: इससे संबंधित निर्णयों में प्रत्येक स्तर – स्थार्नीय, रार्ष्ट्रीय, क्षेत्रीय तथार् अंतर्रार्ष्ट्रीय में सहभार्गी है।

सूचनार् के उत्पार्दन से उसके वितरण तक सूचनार् के स्वरूप में कर्इ प्रकार से बदलार्व होते है। सूचनार् के उत्पार्दन से उसके पुर्नउत्पार्दन तक कर्इ प्रक्रियार्एं शार्मिल होती है, जैसे सूचनार् क निर्मार्ण, स्वरूप परिवर्तन, संचार्र, संग्रहण, व्यवस्थार्पन, उपभोग, आदि। इन सभी प्रक्रियार्ओं में सूचनार् क उत्पार्दन करने वार्लों से उसक वितरण और उपयोग करने वार्ले समस्त समूहों पर कानूनी दार्यित्व उत्पन्न होतार् है, जो कि निम्नप्रकार हो सकतार् है :-

  1. सरकार क दयित्व :- किसी भी भौगोलिक संरचनार् में कार्यरत सरकारी तंत्र क प्रमुख कार्य सार्मार्जिक लार्भ को बढार्नार् होतार् है। इस उद्धेश्य पूर्ति हेतु वह सार्मार्जिक आवश्यकतार्ओं की दिशार् में विकास कार्यों क नियोजन करती है। ऐसे में किसी सरकारी तंत्र क दार्यित्व आधार्रभूत तत्वों को पहचार्नने से संबंधित होतार् है, क्योंकि वे प्रत्येक प्रमुख सार्मार्जिक न्यार्य, व्यवस्थार्, आदि के क्षेत्र से जुडे हुए हैं। जैसे कानून तथार् नियमन अधिनियमों क विकास, आँकडों एवं सूचनार् क उत्पार्दन, जन सेवार् प्रदार्न करनार् (सरकारी सेवार्एँ, स्वार्स्थ, शिक्षार्) लोक प्रशार्सन की व्यवस्थार् सुनिश्चित करनार् इत्यार्दि। सूचनार् समार्ज में सूचनार् के लार्भकारी उपयोग को बढार्नें क दार्यित्व इस सरकारी तंत्र पर है, जिसके द्वार्रार् जन सेवार्ओं से जुडी सूचनार्ओं क उत्पार्दन और उपयोग दोनो ही कियार् जार्तार् है।
  2. निजी क्षेत्र क दार्यित्व :- सरकारी तंत्र के सार्थ ही निजी क्षेत्र द्वार्रार् समार्ज की विभिन्न आर्थिक, सार्मार्जिक, रार्जनैतिक, तकनीकी गतिविधियों मे बरार्बरी की भूमिक होती है। तकनीकी हस्तार्ंरण, सूचनार् सुरक्षार् तथार् विनियोग, ग्लोबल सेटेलाइट नेटवर्क के प्र्रस्थार्पन जैसे कुछ प्रमुख क्षेत्रों में निजी क्षेत्र ने प्रशंसनीय प्रदर्शन कियार् है। संचार्र सेवार्ओं की कम कीमत पर व्यार्पक रूप से उपलब्धतार् निजी क्षेत्रों द्वार्रार् शोध और विकास कार्यों को बढार्वार् देकर उन्नत तकनीकों क विकास किए जार्ने से ही सुनिश्चित हो सकी है। अत: निजी क्षेत्रों क यह दार्यित्व है कि वे सूचनार् समार्ज में सूचनार् को एक उत्पार्द स्वरूप उपयोग करने हेतु समुचित तकनीकों क विकास करें, इस हेतु कानूनी रूप से सूचनार् की सुरक्षार् हेतु लार्गू किए गए अधिनियम क विशेप रूप से ध्यार्न रखें। सूचनार् प्रदार्तार्ओं क दार्यित्व:- सूचनार् के प्रदार्तार्ओं में हम लेखक, शोधकर्तार्, मीडियार्, सूचनार् वितरण तंत्र, सूचनार् केन्द्र, ग्रंथार्लय, आदि को शार्मिल करते हैं। क्योंकि इनकी सम्पूर्ण गतिविधियार्ं सूचनार् से ही संबंधित होती है, अत: सूचनार् समार्ज के कानूनी व्यवस्थार् में इनक विशेष उत्तरदार्यित्व होतार् है। जिसमें सूचनार् के उत्पार्दन, अधिग्रहण, संचार्र, वितरण जैसे कार्यों में तृतीय पक्ष से जुडे विभिन्न अधिकारों क हनन न होने देने जैसे दार्यित्व शार्मिल हैं। उदार्हरणस्वरूप कॉपीराइट अधिनियम के द्वार्रार् सूचनार् के मार्लिक को प्रदार्न किए गए अधिकारों क दुरूपयोग न होने देनार् आदि।
  3. उपयोगकर्तार्ओं क दार्यित्व :- सूचनार् चक्र क एक प्रमुख बिन्दु सूचनार् क उपयोग करनार् है। सूचनार् क उपयोग करते समय उपयोगकर्तार्ओं द्वार्रार् सूचनार् प्रार्प्ति के स्त्रोंतो क ध्यार्न तो रखार् जार्तार् है परन्तु उनक यह दार्यित्व है कि वे किसी व्यक्ति की बौद्धिक सम्पदार् क दुरूपयोग करने से बचे अर्थार्त अनार्धिकृत रूप से सूचनार् को प्रार्प्त करने अथवार् उसकी प्रति तैयार्र करने से बचे। किसी मौलिक लेख, पार्ठार्ंश के भार्ग को प्रयोग करते समय वे कॉपीराइट आदि क उल्लंधन न करें। उनक यह भी दार्यित्व है कि किसी की मौलिक कृति क प्रयोग करने से पूर्व अनुमति प्रार्प्त करें। किसी प्रकार की निजी जार्नकारी को हार्सिल करने अथवार् उसक दुर्भार्वनार् से उपयोग न करें।
  4. सार्मार्न्य दार्यित्व :-
    1. वर्तमार्न में सर्वप्रथम सावभौमिक रूप से विकसित वृहद सार्मार्न्य सिद्धार्न्तों/मूल्यों को सूचनार् समार्ज और सार्इबर स्पेस के विकास हेतु आरोपित करने की आवश्यकतार् है।
    2. मार्नवार्धिकार के सावभौमिक नियम द्वार्रार् बताइ कानूनी व्यवस्थार्, आधार्रभूत स्वतंत्रतार् तथार् लोकतार्ंत्रिक सिद्धार्न्तों को लार्गू करने की आवश्यकतार् है। 
    3. मार्नवार्धिकार मुख्यत: निजतार् की सुरक्षार् से संबंधित है। विचार्रों की स्वतंत्रतार्, विश्वार्स, अभिव्यक्ति, प्रेस तथार् मीडियार्, लोकतार्ंत्रिक व्यवस्थार् में भार्गीदार्री क अधिकार तथार् बौद्धिक सम्पदार् और सार्ंस्कृतिक अधिकारों की सुरक्षार् से संबंधित है। 
    4. यू.एन. चाटर के अनुसार्र सोवर्जिनिटी क अधिकार, सार्मुदार्यिक अखण्डतार्/एकतार्, रार्जनैतिक स्वतंत्रतार्, कम से कम दबार्व यार् हस्तक्षेप क मुख्यत: सूचनार् समार्ज में विकास सुनिश्चित कियार् जार्नार्। 
    5. सार्मार्जिक न्यार्य तथार् समार्नतार् बनार्ए रखने क दार्यित्व।

3. सूचनार् समार्ज के बार्धक

वर्तमार्न में सूचनार् समार्ज के संरचनार्त्मक व्यवस्थार् में कर्इ बार्धार्एँ हैं जिन पर विचार्र कर उनक समार्धार्न खोजार् जार्नार् अतिआवश्यक है, तार्कि सूचनार् समार्ज के उपयोगकर्तार्ओं के लिए सुचार्रू एवं सुव्यवस्थित सूचनार् सार्धनों की पहुँच सुनिश्चित की जार् सके। ये बार्धक तत्व निम्नलिखित हैं:-

  1. विनियोग की सीमार् 
  2. डिजिटल शिक्षार् 
  3. सूचनार् समार्ज के प्रभार्वपूर्ण उपयोग की क्षमतार् 
  4. पहुँच सुनिश्चित करनार् 
  5. सुरक्षार् की कठिनाइ 

निजतार् बनार्ए रखनार्पर्यार्प्त कानूनी उपचार्रों क निर्मार्ण कर उन्हे प्रभार्व में लार्ए जार्ने पर उपरोक्त बार्धार्ओं को दूर कर सूचनार् समार्ज हेतु आधार्रभूत नियमन संरचनार् तैयार्र की जार् सकती है। जिससे निम्न क्षेत्रों में विकास संभव हो सकेगार् :-

  1. वर्चुअल अथर्व्यवस्थार्, र्इ-व्यवसार्य, र्इ-वार्णिज्य के क्षेत्र में 
  2. नेटवर्क सुरक्षार् 
  3. साइबर अपरार्ध, गैरकानूनी तथार् क्षतिपूर्ण सार्मग्री से बचार्व 
  4. बौद्धिक सम्पदार् अधिकार बनार्ए रखने 
  5. लोक हित में सूचनार् तक पँहुच बढार्नें में तथार् 
  6. वैज्ञार्निक आँकडे और सूचनार्ओं की सुरक्षार् करने हेतु।

सूचनार् समार्ज में सार्मार्जिक मूल्यों को बनार्ए रखने और मार्नव सभ्यतार् के निरंतर विकास को जार्री रखने हेतु विभिन्न अद्योसंरचनार्त्मक , सार्मार्जिक, शैक्षणिक, आर्थिक एवं तकनीकी सुधार्र कियार् जार्नार् अतिआवश्यक है। प्रत्येक समार्ज में सार्मार्जिक व्यवस्थार् के नियमन हेतु सार्मार्जिक और काूननी नियमों क उपयोग कियार् जार्तार् है, सूचनार् समार्ज में समार्ज के बदलते स्वरूप के अनुरूप कानूनी व्यवस्थार्ओं को लार्गू कर सूचनार् क समुचित उपयोग कियार् जार् सकतार् है।

सूचनार् समार्ज की भार्वी संभार्वनार्ओं को ध्यार्न में रख कर वर्तमार्न व्यवस्थार् में परिवर्तन कियार् जार्नार् आवश्यक है। बढतें सार्इबर अपरार्धों को रोकने हेतु न्यार्यिक व्यवस्थार् में बदलार्व तथार् व्यार्पार्रिक गतिविधियों को बढार्वार् देने हेतु आर्थिक क्षेत्र की चुनौतियों के लिए विभिन्न स्तरों पर न्यार्यिक और कानूनी उपचार्रों को आरोपित करके ही इस समार्ज की नीव को मजबूत कियार् जार् सकतार् है।

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