सींग खार्द बनार्ने की विधि

सींग खार्द बनार्ने के लिए मुख्यतयार् दो वस्तुओं की आवश्यकतार् होती है- मृत गार्य के सींग क खोल तथार् दूध देती गार्य क गोबर। यह सभी जार्नते हैं कि भार्रतीय संस्कृति में गार्य क स्थार्न अत्यधिक महत्वपूर्ण है तथार् गार्य क गोबर नक्षत्रीय एवं आकाशीय प्रभार्वों से युक्त होतार् है। नक्षत्रीय प्रभार्व नाइट्रोजन बढ़ार्ने वार्ली तार्कतों से युक्त होतार् है तथार् आकाशीय प्रभार्व आक्सीजन बढ़ार्ने वार्ली तार्कतों से युक्त है। इन्हीं शक्तियों के प्रभार्व से गोबर क भूमि पर जीवनदार्यी असर होतार् है। गोबर में जीवों को आकर्षित करने की तार्कत होती है तथार् गार्य के चार्र पेट वार्ले पार्चन संस्थार्न क इसमें बहुत योग होतार् है। गार्य के सींग नक्षत्रीय तार्कतों को ग्रहण करके उन्हें पार्चन संस्थार्न तक पहुंचार्ते हैं। गार्य के सींग के खोल गोबर क असर बढ़ार्ने के लिए उत्तम पार्त्र होते हैं। जीवार्णुओं की जार्ंच के अनुसार्र सींग में उपस्थित गोबर बनार्ने वार्ले जीवार्णु कम होकर ह्यमस बनार्ने वार्ले जीवार्णुओं की संख्यार् अधिक हो जार्ती है जबकि गोबर को किसी अन्य पार्त्र में रखकर गार्ड़ार् जार्ए तो उसक वह प्रभार्व नहीं होतार्।

सीग खार्द बनार्ने के लिए प्रमुख आवश्यकतार्एं 

सींग खार्द बनार्ने के लिए प्रमुख आवश्यकतार् होगी- (क) ऐसी मृत गार्य के सींग जो कम से कम एक-दो बार्र ब्यार्ही हुर्इ हो; (ख) सीग पर रंग न हो तथार् इसमें दरार्रें न हों; तथार् (ग) दुधार्रू गार्य क गोबर। यह गोबर ऐसी गार्य क ही होनार् चार्हिए जो स्वस्थ हों तथार् गोबर प्रार्प्त करने से 15 दिन पूर्व तक इस गार्य को कोर्इ औषधि न दी गर्इ हो। सींग के खोल में भरने के लिए सदार् तार्जार् गोबर ही प्रयुक्त कियार् जार्नार् चार्हिए।

सींग खोल गार्ड़ने के लिए गड्ढार् 

सींग खोल गार्ड़ने के लिए अच्छी उपजार्ऊ जमीन में गड्ढार् बनार् लियार् जार्नार् चार्हिए। सींग गार्ड़ने के लिए एक से सवार् फीट गहरार् गड्ढार् किसी ऐसी जगह पर खोद लियार् जार्नार् चार्हिए जहार्ं जल भरार्व न होतार् हो। गड्ढे की लंबाइ-चौड़ाइ उतनी होनी चार्हिए जितनी मार्त्रार् में इसमें सींग रखे जार्ने प्रस्तार्वित हों।

सींग खार्द बनार्ने क उपयुक्त समय 

सींग खार्द बनार्ने क सर्वार्धिक उपयुक्त समय अक्टूबर क महीनार् होगार्। भार्रतीय पंचार्ंग के अनुसार्र कुंवार्र महीने की नवरार्त्रि में यार् शरदपूर्णिमार् तक क समय सींग खार्द बनार्ने के लिए सर्वार्धिक उत्तम होतार् है। इस समय सींग खार्द में चन्द्रमार् की शक्तियों को काम करने क समय मिलतार् है। ठण्ड के दिनों में दिन छोटे होते हैं तथार् सूर्य की गरमी भी कम होती है अत: चन्द्रमार् की शक्तियों को अपनार् असर बढ़ार्ने के लिए काफी समय मिलतार् है। बार्योडार्यनार्मिक पंचार्ंग के अनुसार्र अक्टूबर मार्ह में जब चन्द्रमार् दक्षिणार्यन हो तो सींग खार्द बनार्यार् जार्नार् चार्हिए। अत: इस समय दूध दे रही गार्य क गोबर नर्म करके सींग में अच्छी प्रकार से भरकर गड्ढे में गार्ड़ दियार् जार्नार् चार्हिए। सींग इस प्रकार गार्ड़े जार्ने चार्हिए कि उनक नुकीलार् सिरार् ऊपर रहे।

गोबर से भरे सींग के खोलों को सार्मार्न्यतयार् छ: मार्ह तक गड्ढे में रखार् जार्तार् है। चैत्र नवरार्त्रि में यार् माच-अप्रैल महीने में जब चन्द्रमार् दक्षिणार्यन हो तो सींगों को जमीन से निकाल करके उनके ऊपर लगी मिट्टी को सार्फ कर लियार् जार्तार् है। तदुपरार्न्त एक पौलीथीन की शीट अथवार् अखबार्र पर इन सींगों को झार्ड़ करके इनमें से पक हुआ गोबर (खार्द) एकत्रित कर लियार् जार्तार् है।

खार्द क भण्डार्रण 

सींगों से खार्द निकाल लिए जार्ने के उपरार्न्त मिट्टी में उसके ढेले आदि तोड़कर अथवार् मसलकर एक मिट्टी के मटके में संग्रहित कर लियार् जार्तार् है। मटके में नमी क पूरार् ध्यार्न रखार् जार्नार् चार्हिए तार्कि यह सूखे नहीं। इस घड़े को किसी ठंडे स्थार्न पर रखार् जार्तार् है तथार् इसक ढक्कन थोड़ार् ढीलार् रखार् जार्तार् है तार्कि उसके अंदर हवार् क आवार्गमन हो सके। इस समय जीवार्णुओं के प्रभार्व से सींग में से निकले हुए खार्द बार्रीक खार्द में परिवर्तित हो जार्ती हैं। इ. सींग खार्द के उपयोग क समय सींग खार्द क उपयोग फसल पर तीन बार्र करनार् चार्हिए। पहली बार्र बोनी से एक दिन पहले सार्यंकाल में, दूसरी बार्र जब फसल बीस दिन की हो जार्ए तथार् तीसरी बार्र तब जब फसल 50-60 दिन की हो जार्ए। क्योंकि इस खार्द में चन्द्रमार् क प्रभार्व होतार् है अत: बेहतर परिणार्म प्रार्प्त करने हेतु इसे शुक्ल पक्ष में पंचमी से पूर्णिमार् के बीच प्रयुक्त कियार् जार्नार् चार्हिए। इस प्रकार जब भी चन्द्रमार् दक्षिणार्यन हो तब इसक उपयोग कियार् जार् सकतार् है। अमार्वस के आस-पार्स कियार् गयार् इसक उपयोग चन्द्रवल की कमी के कारण लार्भप्रद नहीं रहतार्।

उपयोग की विधि 

30 ग्रार्म सींग खार्द 13 लीटर पार्नी में मिलार्एं पार्नी कुएं अथवार् ट्यूबवेल क होनार् चार्हिए नल क नहीं। इस मिश्रण को एक बार्ल्टी में निकाल कर एक डंडे की मदद से गोल घुमार्यार् जार्तार् है तार्कि उसमें भंवर पड़ जार्यें। एक बार्र भंवर पड़ जार्ने पर उसे उल्टी दिशार् में घुमार्यार् जार्तार् है तथार् तदुपरार्न्त पुन: उसे दिशार् पलट कर घुमार्यार् जार्तार् है। इस प्रकार यह प्रक्रियार् एक घंटे तक जार्री रखी जार्ती है। पूरी तरह घुल जार्ने पर झार्ड़ू की मदद से इस मिश्रण को खेत में छिड़क दियार् जार्तार् है। इस मिश्रण क उपयोग एक घंटे के भीतर हो जार्नार् चार्हिए तथार् इसक उपयोग शार्म में ही कियार् जार्नार् चार्हिए जब भूमि में नमी हो। घोल अधिक हो तो बड़े बर्तन तथार् स्प्रे पम्प क उपयोग भी कियार् जार् सकतार् है। ऐसार् स्प्रे पम्प सार्फ होनार् चार्हिए तार्कि इसमें किसी प्रकार क रार्सार्यनिक अवशेष नहीं होनार् चार्हिए।

सींग खार्द के लार्भ 

सींग खार्द क दो-तीन सार्ल तक नियमित उपयोग करने से जमीन में गुणार्त्मक सुधार्र आ जार्ते हैं। इससे जमीन में जीवार्णुओं की संख्यार् के सार्थ-सार्थ केंचुओं तथार् ह्यूमस बनार्ने वार्ले जीवों की संख्यार् भी बढ़ जार्ती है। इससे जमीन भुरभुरी हो जार्ती है, जड़ें ज्यार्दार् गहराइ तक जार्ती हैं तथार् मिट्टी अधिक समय तक नम रहती है इससे भूमि की नमी धार्रण की क्षमतार् चार्र गुनार् बढ़ जार्ती है तथार् दलहनी फसलों की जड़ों में नोड्यूल्स की संख्यार् बढ़ जार्ने से जमीन की उपजार्ऊ शक्ति भी बढ़ जार्ती है।

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