सार्मुदार्यिक विकास क अर्थ, परिभार्षार्
शार्ब्दिक रूप से सार्मुदार्यिक विकास क अर्थ- समुदार्य क विकास यार् प्रगति। इसके पश्चार्त भी सार्मुदार्यिक विकास की अवधार्रणार् इतनी व्यार्पक और जटिल है कि इसे केवल परिभार्षार् द्वार्रार् ही स्पष्ट कर सकनार् बहुत कठिन है। जो परिभार्षार् दी गयी है, उनमें किसी के द्वार्रार् एक पहलू पर अधिक जोर दियार् गयार् है और किसी में दूसरे पहलु पर। इसके पश्चार्त भी कैम्ब्रिज में हुए एक सम्मेलन में सार्मुदार्यिक विकास को स्पष्ट करते हुए कहार् गयार् थार् कि ‘‘सार्मुदार्यिक विकास एक ऐसार् आन्दोलन है जिसक उद्देश्य सम्पूर्ण समुदार्य के लिए एक उच्चतर जीवन स्तर की व्यवस्थार् करनार् है। इस कार्य में प्रेरणार्-शक्ति समुदार्य की ओर से आनी चार्हिए तथार् प्रत्येक समय इसमें जनतार् क सहयोग होनार् चार्हिए।’’ इस परिभार्षार् से स्पष्ट होतार् है कि सार्मुदार्यिक विकास ऐसार् कार्यक्रम है जिसमें लक्ष्य प्रार्प्ति के लिए समुदार्य द्वार्रार् पहल करनार् तथार् जन-सहयोग प्रार्प्त होनार् आधार्रभूत दशार्एँ है। इस आन्दोलन क मुख्य उद्देश्य किसी वर्ग विशेष के हितों तक ही सीमित न रहकर सम्पूर्ण समुदार्य के जीवन-स्तर को ऊँचार् उठार्नार् है। योजनार् आयोग (Planning Commission) के प्रतिवेदन में सार्मुदार्यिक विकास के अर्थ को स्पष्ट करते हुए कहार् गयार् कि ‘‘सार्मुदार्यिक विकास एक ऐसी योजनार् है जिसके द्वार्रार् नवीन सार्धनों की खोज करके ग्रार्मीण समार्ज के सार्मार्जिक एवं आर्धिक जीवन में परिवर्तन लार्यार् जार् सकतार् है।

प्रो.ए.आर.देसाइ के अनुसार्र ‘‘सार्मुदार्यिक विकास योजनार् एक ऐसी पद्धति है जिसके द्वार्रार् पंचवश्रीय योजनार्ओं में निर्धार्रित ग्रार्मों के सार्मार्जिक तथार् आर्थिक जीवन में रूपार्न्तरण की प्रक्रियार् प्रार्रम्भ करने क प्रयत्न कियार् जार्तार् है।’’ इनक तार्त्पर्य है कि सार्मुदार्यिक विकास एक मार्ध्यम है जिसके द्वार्रार् पंचवश्रीय योजनार्ओं द्वार्रार् निर्धार्रित ग्रार्मीण प्रगति के लक्ष्य को प्रार्प्त कियार् जार् सकतार् है।

रैनार् (R.N. Raina) क कथन है कि ‘‘सार्मुदार्यिक विकास एक ऐसार् समन्वित कार्यक्रम है जो ग्रार्मीण जीवन से सभी पहलुओं से संबंधित है तथार् धर्म, जार्ति सार्मार्जिक अथवार् आर्थिक असमार्नतार्ओं को बिनार् कोर्इ महत्व दिये, यक सम्पूर्ण ग्रार्मीण समुदार्य पर लार्गू होतार् है।

उपर्युक्त परिभार्षार्ओं से स्पष्ट होतार् है कि सार्मुदार्यिक विकास एक समन्वित प्रणार्ली है जिसके द्वार्रार् ग्रार्मीण जीवन के सर्वार्गीण विकास के लिए प्रयत्न कियार् जार्तार् है। इस योजनार् क आधार्र जन-सहभार्ग तथार् स्थार्नीय सार्धन है। एक समन्वित कार्यक्रम के रूप में इस योजनार् में जहॉ एक ओर शिक्षार्, प्रशिक्षण, स्वार्स्थ्य, कुटीर उद्योगों के विकास, कृषि संचार्र तथार् समार्ज सुधार्र पर बल दियार् जार्तार् है, वहीं यह ग्रार्मीणों के विचार्रों, दृष्टिकोण तथार् रूचियों में भी इस तरह परिवर्तन लार्ने क प्रयत्न करती है जिससे ग्रार्मीण अपनार् विकास स्वयं करने के योग्य बन सकें। इस दृष्टिकोण से सार्मुदार्यिक विकास योजनार् को सार्मार्जिक-आर्थिक पुनर्निमार्ण तथार् आत्म-निर्भरतार् में वृद्धि करने वार्ली एक ऐसी पद्धति कहार् जार् सकतार् है जिसमें सार्मार्जिक, आर्थिक तथार् सार्ंस्कृतिक विशेषतार्ओं क समार्वेश होतार् है।

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