सार्मार्जिक क्रियार् क अर्थ, परिभार्षार् एवं प्रार्रूप

सार्मार्जिक क्रियार् समार्ज कार्य की सहार्यक प्रणार्ली है। प्रार्रम्भ से ही समार्ज कार्य क आधार्र मार्नवतार् रही है। सार्मार्जिक क्रियार् क जिसे प्रार्रम्भ में समार्ज सुधार्र क नार्म दियार् गयार् है, समार्ज कार्य के अभ्यार्स में एक महत्वपूर्ण स्थार्न रहार् है।1922 में मेरी रिचमंड ने सार्मार्जिक क्रियार् क उल्लेख समार्ज कार्य की चार्र प्रमुख प्रणार्लियों के अंतर्गत एक प्रणार्ली के रूप में कियार् थार्। 1940 में जॉन फिच द्वार्रार् एक कांफ्रेंस में सार्मार्जिक क्रियार् पर एक निबन्ध प्रस्तुत कियार् गयार्।1945 में केनिथ एलियम प्रे ने ‘सोशल वर्क एण्ड सोशल एक्षन’ नार्मक लेख लिखार् जिसके अनुसार्र यह मार्नार् गयार् कि सार्मार्जिक क्रियार् सार्मुदार्यिक संगठन क एक अंग नहीं है। एक अलग विधि के रूप में इसकी पहचार्न बनी।कालार्ंतर में यह स्पष्ट रूप से स्वीकार कर लियार् गयार् कि सार्मुदार्यिक संगठन में कार्य एक सीमित क्षेत्र में होतार् है किन्तु सार्मार्जिक क्रियार् में यह बडे़ स्तर पर कियार् जार्तार् है।

सार्मार्जिक क्रियार् की परिभार्षार्

सार्मार्जिक क्रियार् के सिद्धार्ंतों के बार्रे में जार्न सकेंग प्रमुख विचार्रकों द्वार्रार् दी गर्इ सार्मार्जिक क्रियार् की परिभार्षार्यें  हैं-

  1. मेरी रिचमंड (1922) : ‘प्रचार्र एवं सार्मार्जिक विधार्न के मार्ध्यम से जनसमुदार्य क कल्यार्ण सार्मार्जिक क्रियार् कहलार्तार् है।’ 
  2. ग्रेस क्वार्यल (1937) : समार्ज कार्य के एक भार्ग के रूप में सार्मार्जिक क्रियार् सार्मार्जिक पर्यार्वरण को इस प्रकार बदलने क प्रयार्स है जो हमार्रे जीवन को अधिक संतोशप्रद बनार्तार् है। इसक उद्देश्य व्यक्ति को प्रभार्वित न करके सार्मार्जिक संस्थार्ओं, कानूनों, प्रथार्ओं तथार् समुदार्य को प्रभार्वित करनार् है। 
  3. सैनफोर्ड सोलेण्डर (1957) : समार्ज कार्य क्षेत्र में सार्मार्जिक क्रियार् समार्ज कार्य दर्शन, ज्ञार्न तथार् निपुणतार्ओं के संदर्भ में व्यक्ति, समूह तथार् प्रयार्सों की एक प्रक्रियार् है। इसक उद्देश्य नवीन प्रगति तथार् सेवार्ओं की प्रार्प्ति हेतु कार्य करते हुए सार्मार्जिक नीति व सार्मार्जिक संरचनार् की क्रियार् में संशोधन के मार्ध्यम से समार्ज कल्यार्ण में वृद्धि करनार् है। 
  4. हिल जॉन (1951) : सार्मार्जिक क्रियार् को व्यार्पक सार्मार्जिक समस्यार्ओं के समार्धार्न क संगठित प्रयार्स कहार् जार् सकतार् है यार् मौलिक सार्मार्जिक एवं आर्थिक दशार्ओं को प्रभार्वित करके वार्ंछित सार्मार्जिक उद्देश्यों को प्रार्प्त करने के लिए संगठित सार्मूहिक प्रयार्स कहार् जार् सकतार् है। 
  5. फ्रीडलैण्डर (1963) : सार्मार्जिक क्रियार् समार्ज कार्य दर्शन तथार् अभ्यार्स की संरचनार् के अंतर्गत एक वैयक्तिक, सार्मूहिक अथवार् सार्मुदार्यिक प्रयत्न है जिसक उद्देश्य सार्मार्जिक प्रगति को प्रार्प्त करनार्, सार्मार्जिक नीति में परिवर्तन करनार् तथार् सार्मार्जिक विधार्न, स्वार्स्थ्य तथार् कल्यार्ण सेवार्ओं में सुधार्र लार्नार् है। 

सार्मार्जिक क्रियार् की विशेषतार्एं

  1. सार्मार्जिक क्रियार् में समार्ज कार्य के सिद्धार्ंत, मार्न्यतार्ओं, ज्ञार्न तथार् कौशल क प्रयोग कियार् जार्तार् है, अत: यह समार्ज कार्य क ही एक अंग है। 
  2. इसक उद्देश्य सही अर्थों में सार्मार्जिक न्यार्य और समार्ज कल्यार्ण की प्रार्प्ति है। 
  3. इस प्रक्रियार् में आवश्यकतार्नुसार्र सार्मार्जिक व्यवस्थार् में परिवर्तन लार्ने एवं अनार्वष्यक तथार् अवार्ंछनीय सार्मार्जिक परिवर्तन को रोकने क प्रयार्स कियार् जार्तार् है। 
  4. यथार्सम्भव अहिंसार्त्मक ढंग से कार्य कियार् जार्तार् है। 
  5. उद्देश्यपूर्ति के लिए सार्मूहिक सहयोग अपेक्षित होतार् है। 
  6. इसमें कार्य जनतार्ंत्रिक मूल्यों और संविधार्न में दिये गये नार्गरिक अधिकारों पर आधार्रित सहमतिपूर्ण आन्दोलन के रूप में होतार् है।

सार्मार्जिक क्रियार् के मौलिक तथ्य 

  1. समुदार्य की सक्रियतार् नियोजित एवं संगठित होनी चार्हिए। सार्मार्जिक क्रियार् तभी सफल हो सकती है जब समूह अथवार् समुदार्य सक्रिय हो। 
  2. नेतृत्व क विकास करते समय यह ध्यार्न में रखनार् चार्हिए कि नेतार् क चयन समार्ज की सहमति से हो। 
  3. इसमें कार्य प्रणार्ली जनतार्ंत्रिक तथार् विधि जनतार्ंत्रिक मूल्यों पर आधार्रित होनी चार्हिए। 
  4. संबंधित समूह यार् समुदार्य के सभी भौतिक यार् अभौतिक सार्धनों पर पूर्व विचार्र कर लेनार् चार्हिए। 
  5. सार्धनों क सही अनुमार्न लगार्ने के बार्द ही समस्यार् क चयन कियार् जार्नार् चार्हिए। 
  6. सार्मार्जिक क्रियार् के लिए स्वस्थ जनमत आवश्यक है। 
  7. सार्मार्जिक क्रियार् के लिए समुदार्य के सदस्यों क सहयोग अपेक्षित है। 

    सार्मार्जिक क्रियार् के उद्देश्य 

    1. सार्मार्जिक नीतियों के क्रियार्न्वयन के लिए सार्मार्जिक पृश्ठभूमि तैयार्र करनार्।
    2. स्वार्स्थ्य एवं कल्यार्ण के क्षेत्र में स्थार्नीय, प्रार्ंतीय तथार् रार्ष्ट्रीय स्तर पर कार्य करनार्। 
    3.  आंकड़ों क एकत्रीकरण एवं सूचनार्ओं क विश्लेशीकरण करनार्। 
    4. अविकसित तथार् पिछडे़ समूहों के विकास के लिए आवश्यक मार्ंग करनार्। 
    5. समस्यार्ओं के लिए ठोस निरार्करण एवं प्रस्तार्व प्रस्तुत करनार्।
    6. नवीन सार्मार्जिक स्रोतों क अंवेशण। 
    7.  सार्मार्जिक समस्यार्ओं के प्रति जनतार् में जार्गरूकतार् लार्नार्।
    8. जनतार् क सहयोग प्रार्प्त करनार्। 
    9. सरकारी तंत्र क सहयोग लेनार्। 
    10. नीति निर्धार्रक सत्तार् से प्रस्तार्व स्वीकृत करार्नार्। 

    सार्मार्जिक क्रियार् के सिद्धार्ंत 

    सार्मार्जिक क्रियार् नीतियों में परिवर्तन कर स्वस्थ जनमत क निर्मार्ण करती हैं। इसके प्रमुख सिद्धार्ंत इस प्रकार हैं:-

    1. विश्वनीयतार् क सिद्धार्ंत : वह समूह यार् समुदार्य, जिसके लिए नेतृत्व कार्यक्रम क्रियार्ंवित करतार् है, उसे नेतृत्व के प्रति विश्वार्स को अक्षुश्ण रखनार् चार्हिए। 
    2. स्वीकृति क सिद्धार्ंत : समूह यार् समुदार्य को उसकी वर्तमार्न स्थिति में स्वीकार करते हुए प्रार्थमिकतार् के आधार्र पर आवश्यकतार्ओं की पूर्ति के लिए एक स्वस्थ जनमत तैयार्र कियार् जार्नार् इस सिद्धार्ंत के अंतर्गत आतार् है। 
    3. वैधतार् क सिद्धार्ंत : संदर्भित जनतार् जिसके लिए आंदोलन चलार्यार् जार् रहार् है यार् कार्य कियार् जार् रहार् है तथार् जनसार्मार्न्य को विश्वार्स हो कि आंदोलन नैतिक तथार् सार्मार्जिक रूप से उचित है। इस मार्न्यतार् के आधार्र पर ही सहयोग प्रार्प्त होतार् है।
    4. नार्टकीकरण क सिद्धार्ंत : नेतार् कार्यक्रम को इस प्रकार जनतार् के समक्ष प्रस्तुत करतार् है तार्कि जनतार् स्वयं सार्ंवेगिक रूप से उस कार्यक्रम से जुड़ जार्ये एवं अति आवश्यक मार्नकर उसके सार्थ अनवरत एवं सक्रिय रूप से सम्बद्ध हो जार्ये। 
    5. बहुआयार्मी रणनीति क सिद्धार्ंत : चार्र प्रकार की रणनीतियॉ सार्मार्जिक क्रियार् में प्रयुक्त होती हैं- 
    • शिक्षार् संबंधी रणनीति-  1. प्रौढ़ शिक्षार् द्वार्रार् 
    • समझार्ने की रणनीति   2. प्रदर्शन द्वार्रार् 
    •  सुगमतार् की रणनीति 
    • शक्ति की रणनीति 
  1. बहुआयार्मी कार्यक्रम क सिद्धार्ंत : इसमें तीन प्रकार के कार्यक्रम सम्मिलित होते हैं- 
    1. सार्मार्जिक कार्यक्रम 
    2. आर्थिक कार्यक्रम 
    3. रार्जनैतिक कार्यक्रम 

    सार्मार्जिक क्रियार् के क्षेत्र 

    सार्मार्जिक क्रियार् को समार्ज कार्य की एक सहार्यक प्रणार्ली के रूप में वर्तमार्न समय में अधिकांष समार्ज कार्यकर्तार्ओं और विद्वार्नों ने स्वीकार कर लियार् है, इन्होनें इस बार्त को भी स्वीकृति प्रदार्न की है कि सार्मार्जिक क्रियार् में सार्मूहिक प्रयार्स क होनार् आवश्यक है चार्हे इस प्रयार्स क आरम्भ किसी एक व्यक्ति ने ही कियार् हो। इसके लिए आवश्यक है कि सार्मार्न्य उद्देश्यों की प्रार्प्ति के लिए संयुक्त रूप से प्रयार्स कियार् जार्ये और यह प्रयार्स सार्मार्जिक विधार्न के अनुरूप हो। सार्मार्जिक क्रियार् के दो सार्धन हैं, पहलार्, जनमत को शिक्षार् एवं सूचनार् की उपलब्धि द्वार्रार् परिवर्तित करनार्, और दूसरार् सार्मार्जिक विधार्न को प्रभार्वित करनार् अर्थार्त् परिवर्तित करनार् यार् उसक निर्मार्ण करनार्। जनमत को प्रभार्वित करने के लिए आवश्यक है कि जन संदेशवार्हन की प्रणार्लियों क उपयोग कियार् जार्ये और सार्मार्जिक विधार्नों को प्रभार्वित करने के लिए प्रशार्सकों से सम्पर्क कियार् जार्ये।

    जब हम सार्मार्जिक क्रियार् के विषय क्षेत्र की बार्त करते हैं तब एक बार्त स्पष्ट होती है कि सार्मार्जिक क्रियार् क विषय क्षेत्र समार्ज कार्य के विषय-क्षेत्र से पृथक नहीं हैं, क्योंकि समार्ज कार्य क क्षेत्र मुख्यत: समार्ज से सम्बन्धित विभिन्न समस्यार्ओं क निरार्करण है और सार्मार्जिक क्रियार् समार्ज कार्य की एक प्रणार्ली है जोकि समार्ज कार्य की उसके उद्देश्यों को प्रार्प्त करने में सहार्यतार् करती है। सार्मार्जिक क्रियार् क उपयोग समार्ज कार्यकर्तार् द्वार्रार् समार्ज कल्यार्ण के अन्तर्गत आने वार्ले विभिन्न वर्गो क कल्यार्ण समार्ज कार्य के क्षेत्र में सम्मिलित है। समार्ज कार्य के क्षेत्र में मुख्यत: बार्ल, युवार्, महिलार्, वृद्ध, असहार्य, निर्धन, शोषण क सरलतार्पूर्वक शिकार बनने वार्ले वर्गो आदि के कल्यार्ण को रखार् गयार् है और इसके लिए समार्ज कार्य की विभिन्न प्रणार्लियों क प्रयोग कियार् जार्तार् है यथार्-वैयक्तिक समार्ज कार्य, सार्मूहिक समार्ज कार्य, सार्मुदार्यिक संगठन, समार्ज कल्यार्ण प्रशार्सन, समार्ज कार्य अनुसंधार्न और सार्मार्जिक क्रियार्।

    सार्मार्जिक क्रियार् के क्षेत्र के बार्रे में विवेचनार् करने से पूर्ण यह जार्ननार् आवश्यक जार्न पड़तार् है कि क्यार् सार्मार्जिक क्रियार् समार्ज में महत्वपूर्ण बदलार्व लार्ने में सक्षम है अथवार् नहीं है ? क्यार् सार्मार्जिक क्रियार् सार्मार्जिक संरचनार् में व्यार्प्त समस्यार्ओं क निरार्करण कर सकती है अथवार् नही है ?, चूंकि सार्मार्जिक क्रियार् समार्जकार्य में एक व्यार्वसार्यिक पद्धति के रूप में प्रयोग की जार्ती है जो कि समार्ज कार्य आवार्स के मार्ध्यम से विभिन्न क्षेत्रों की समस्यार्ओं को दूर करने क प्रयार्स करती है। वार्स्तव में सार्मार्जिक क्रियार् क क्षेत्र समार्ज द्वार्रार् निर्धार्रित की गर्इ आवश्यकतार्ओं पर निर्भर होतार् है क्योंकि समार्ज के लोग अपनी आवश्यकतार्ओं की पहचार्न कर लक्ष्यों क निर्धार्रण करते हैं तथार् इन्हीं लक्ष्यों  की पूर्ति हेतु सार्मार्जिक क्रियार् क प्रयोग कियार् जार्तार् है। सार्मार्जिक क्रियार् द्वार्रार् समार्ज के लक्ष्यों की पूर्ति हेतु विभिन्न मार्ध्यमों को अपनार्कर समार्ज की संरचनार् में परिवर्तन लार्ने क प्रयार्स कियार् जार्तार् है। आज वहार्ं एक तरफ भार्रतीय समार्ज विभिन्न तरह की समस्यार्ओं से जुझ रहार् है, तथार् नित नयी समस्यार्यें जन्म लें रही है। वहीं दूसरी तरफ समार्ज में असभ्यतार् भी अपनार् पैर फैलार् रही है। इस संदर्भ में समार्ज में सार्मार्जिक क्रियार् के क्षेत्र वृहत्तर होते जार् रहे। आज भी हमार्रे देश में गरीबी, भृश्टार्चार्र, बेरोजगार्री, वेथ्यार्वृत्ति, कानूनों क उल्लंघन जैसी समस्यार्यें आम हो चली हैं इन क्षेत्रों में सार्मार्जिक क्रियार् क अमूल्य योगदार्न हो सकतार् है। सार्मार्जिक क्रियार् समार्ज में फैली हुर्इ कुरीतियों, रूढ़ियों, विशमतार्ओं को दूर करने में भी अपनार् योगदार्न दे सकती है। सार्मार्जिक क्रियार् क क्षेत्र बहुत ही व्यार्पक है जिसमें कुछ क्षेत्र है –

    1. सार्मार्जिक सुधार्र -सार्मार्जिक सुधार्र वार्स्तव में समार्ज में होने वार्ली विशमतार्ओं के लिए कियार् जार्तार् है जिनमें समार्ज में व्यार्प्त समस्यार्ओं, कुरीतियों को दूर कर समार्ज में एक सौहाद पूर्ण मार्हौल उत्पन्न कियार् जार्तार् है। सार्मार्जिक क्रियार् समार्ज में विभिन्न प्रकार की सार्मार्जिक कुरीतियों, विशमतार्ओं, समस्यार्ओं, शोषणों को दूर करने में अपनार् योगदार्न प्रदार्न करती है। वर्तमार्न समय में सार्मार्जिक सुधार्र एक अतिआवश्यक मुद्दार् है, क्योंकि समार्ज क विकास करनार् है तो समार्ज सुव्यवस्थित एवं कुरीतियों से दूर होनार् चार्हिए और इस हेतु सार्मार्जिक क्रियार् अपने विभिन्न प्रविधियों के मार्ध्यम से समार्ज में बदलार्व लार्कर समार्ज सुधार्र करती है जिससे समार्ज विकास करतार् है।
    2. सार्मार्जिक मनोवृत्ति में बदलार्व-सार्मार्जिक क्रियार् लोगों के मनोवृत्तियों में बदलार्व करने में सक्षम है, क्योंकि समार्ज के लोग अगर किसी समस्यार् के निरार्करण के प्रति सकारार्त्मक सोच नहीं रखते हैं तो सार्मार्जिक कार्यकर्त्तार् सार्मार्जिक क्रियार् के विभिन्न प्रविधियों क उपयोग कर समार्ज के लोगों की मनोवृत्तियों में बदलार्व लार्ने की कोशिश करतार् है। चूंकि सार्मार्जिक मनोवृत्ति समार्ज के लोगों से जुड़ी हुर्इ होती है। जिसे परिवर्तित करनार् आसार्न काम नही है। अत: सार्मार्जिक कार्य कर्तार् समार्ज के लोगों के बीच में जार्कर समस्यार् के बार्रे में बतार्तार् है तथार् समस्यार् के प्रति लोगों को एकजुट करतार् है एवं उनकी सकारार्त्मक ऊर्जार् को सार्मार्जिक समस्यार् को दूर करने में लगार्तार् है।
    3. सार्मार्जिक कुरीतियों को दूर करनार्-हमार्रार् देश विभिन्न प्रकार के धर्मो, सम्प्रदार्यों, जार्तियों वार्लार् देश है जहार्ं पर सार्मार्जिक कुरीतियार्ं अत्यधिक मार्त्रार् में पाइ जार्ती है। ये कुरीतियार्ं समार्ज के विकास में बार्धक होती है। इनको सार्मार्जिक क्रियार् की सहार्यतार् से दूर कियार् जार् सकतार् है। देखार् जार्य तो सार्मार्जिक क्रियार् कार्य कर्तार् समार्ज क ही एक अंग है जो इन कुरीतियों के बार्रे में पूर्णत: जार्नकारी रखतार् है तथार् इनसे होने वार्ले हार्नियों के बार्रे में भी ज्ञार्न रखतार् है। इन कुरीतियों को दूर करने के लिए सार्मार्जिक कार्यकर्तार्  समार्ज के लोगों के बीच में कुरीतियों से होने वार्ले दुश्परिणार्मों को रखतार् है तथार् उन्हें बतार्तार् है कि हमार्रार् समार्ज तब तक विकसित नही होगार् जब तक इन कुरीतियों को दूर नहीं कियार् जार्येगार्। कुरीतियों को दूर करने के लिए सार्मार्जिक क्रियार् कार्य कर्तार् प्रबुद्धजनों, विशेषज्ञों इत्यार्दि की सहार्यतार् लेतार् है तथार् समार्ज के लोगों एवं प्रबुद्धजनों, विशेषज्ञों को एक मंच पर लार्तार् है एवं विचार्र विमर्श करतार् है तथार् एक जार्गरूकतार् अभियार्न के तहत कुरीतियों को दूर करने क प्रयार्स करतार् है। इस प्रकार देखार् जार्य तो सार्मार्जिक क्रियार् क क्षेत्र सार्मार्जिक कुरीतियों को दूर करनार् भी है।
    4. गरीबी उन्मूलन-हमार्रार् देश वार्स्तव में गार्ंवों में निवार्स करतार् है ऐसार् इसलिए कहार् जार्तार् है क्योंकि हमार्रे देश की 70 प्रतिशत जनसंख्यार् गार्ंव में निवार्स करती है। आज भी हमार्रे देश में गरीबी एक भयार्वह समस्यार् के रूप में है क्योंकि एक तरफ जहार्ं लोग अमीर होते जार् रहे है वहीं दूसरी तरफ निर्धन वर्ग के लोग और गरीब होते जार् रहे है। गरीबी उन्मूलन में सार्मार्जिक क्रियार् अपनार् महत्वपूर्ण योगदार्न प्रदार्न करती है। चूंकि सार्मार्जिक नीति बनार्ने वार्ले केवल अपने कार्यार्लयों में बैठकर नीतियों क निर्मार्ण करते हैं। उन्हें वार्स्तविक स्थिति क पतार् नही रहतार् है। अत: सार्मार्जिक क्रियार् कार्य कर्तार् समार्ज की वार्स्तविक स्थिति क सही-सही निरूपण सार्मार्जिक नीति बनार्ने वार्लों के सार्मने प्रस्ुतत कर सकतार् है क्योंकि सार्मार्जिक क्रियार् कार्य कर्तार् समार्ज में रह कर कार्य करतार् है और उसे पूरी यथार् स्थिति पतार् रहती है। इस प्रकार यदि सार्मार्जिक नीति बनार्ने वार्ले सार्मार्जिक क्रियार् कार्यकर्तार्ओं की सहार्यतार् लें तो गरीबी उन्मूलन से सम्बन्धित सभी कार्यक्रम सफल होते और गरीबी की समस्यार् से कुछ हद निजार्त पार्यार् जार् सकतार् है। इस प्रकार हम देखे तो गरीबी उन्मूलन के क्षेत्र में अपनार् योगदार्न प्रस्तुत करती है।
    5. शिक्षार् संबंधी जार्गरूकतार्-शिक्षार् वर्तमार्न भार्रत की महत्वपूर्ण आवश्यकतार्ओं में एक है। चूंकि किसी भी देश क विकास तभी सम्भव है जब उस देश के सभी लोग शिक्षित हो। भार्रत जैसे देश में आज भी 60 प्रतिशत आबार्दी ही शिक्षित है। जहार्ं पर आज भी लोग शिक्षार् क महत्व पूरी तरह से नही समझ पार्ये है, विशेषकर ग्रार्मीण अन्चलों में। सरकार ने शिक्षार् के लिये विभिन्न कार्यक्रम चलार्ये है लेकिन पूरी तरह से सफलतार् प्रार्प्त नही हो रही है। शिक्षार् सम्बन्धी जार्गरूकतार् के क्षेत्र में सार्मार्जिक क्रियार् अपने महत्वपूर्ण प्रविधियों के आधार्र पर समार्ज के लोगों के बीच में शिक्षार् के महत्व को बतार्ते हुए जार्गरूकतार् फैलार् सकती है तथार् लोगों को शिक्षित करने में अपनार् महत्वपूर्ण योगदार्न दे सकती है।
    6. बेरोजगार्री की समस्यार् से संबंधी निरार्करण- आज वर्तमार्न समय में हमार्रे देश की जनसंख्यार् जहार्ं 1 अरब 21 करोड़ हो चुकी है वहीं दूसरी तरफ जनसंख्यार् की तीव्र वृद्धि के कारण बेरोजगार्री की समस्यार् विकरार्ल रूपधार्रण कर चुकी है। बेरोजगार्री की समस्यार् के निरार्करण हेतु सार्मार्जिक क्रियार् कार्य कर्तार् अपने सुझार्व नीति निर्धार्रकों के पार्स प्रेशित कर  सकतार् है तथार् उन्हें स्वरोजगार्र परक कार्यो हेतु कार्यक्रम एवं योजनार् बनार्ने हेतु सुझार्व दे सकतार् है जिससे बेरोजगार्री की समस्यार् से निजार्त पार्यार् जार् सकतार् है। दूसरी तरफ सार्मार्जिक क्रियार् कार्यकर्तार् समार्ज के लोगों के बीच में स्वरोजगार्र करने हेतु प्रेरित कर सकतार् है।
    7. सार्मार्जिक भ्रष्टार्चार्र- सार्मार्जिक भ्रष्टार्चार्र के क्षेत्र में सार्मार्जिक क्रियार् अपनार् योगदार्न दे सकती है जोकि समार्ज के लोगों को सार्मार्जिक भ्रष्टार्चार्र के खिलार्फ एकजुट कर सकती है तथार् सार्मार्जिक भ्रष्टार्चार्र को मिटार्ने में समार्ज के लोगों की सहार्यतार् ले सकती है।
    8. नियम कानूनों क निर्मार्ण- हमार्रे देश में प्रगति के सार्थ-सार्थ बहुत सी समस्यार्ओं ने जन्म लियार् है जिन्हें नियंत्रण में करनार् वर्तमार्न नियम कानूनों के अन्तर्गत असम्भव जार्न पड़तार् है। अत: समय के सार्थ-सार्थ होने वार्ले भ्रष्टार्चार्र, समस्यार्यें इत्यार्दि से सम्बन्धित नियम कानूनों को बनार्ने में सार्मार्जिक क्रियार् विधि विशेषज्ञों के सार्मने वार्स्तविक स्थिति प्रस्तुत कर सकती है, जिससे नये नियम कानूनों क निर्मार्ण कियार् जार् सकतार् है।
    9. सार्मार्जिक आंदोलन- सार्मार्जिक आन्दोलन हमार्रे देश में बहुत पुरार्ने समय से होतार् आयार् है। चार्हे वह विनोवार् भार्वे द्वार्रार् कियार् गयार् हो अथवार् महार्त्मार् गार्ंधी जी द्वार्रार् कियार् गयार् हो। आज वर्तमार्न भार्रत में भी सार्मार्जिक आन्दोलनों की आवश्यकतार् है जिससे समार्ज में व्यार्प्त भ्रष्टार्चार्र को दूर कियार् जार् सके। अन्नार् हजार्रे तथार् अन्य समार्ज कार्य कर्तार्ओं द्वार्रार् कियार् जार् रहार् आन्दोलन एक सार्मार्जिक क्रियार् क ही रूप है जो वर्तमार्न समय में सरकार के खिलार्फ भ्रष्टार्चार्र मिटार्ने हेतु कियार् जार् रहार् है।
    10. असहार्य लोगों की स्थिति में सुधार्र – प्रत्येक देश में कुछ न कुछ ऐसे लोग होते है जो परिस्थिति वष असहार्य हो जार्ते है। ये असहार्य लोग बीमार्री, दुर्घटनार्, वृद्धार् अवस्थार् अथवार् प्रकृति प्रदत्त कारणों के आधार्र पर असहार्य होते है। चूंकि असहार्य लोगों हेतु सरकार समय-समय पर नियम कानून, कार्यक्रम बनार्ती रहती है लेकिन ये कार्यक्रम एवं कानून अपर्यार्प्त जार्न पड़ते है। असहार्य लोगों की स्थिति में सुधार्र हेतु सार्मार्जिक क्रियार् अपनार् योगदार्न समार्ज सुधार्र प्रविधि के मार्ध्यम से दे सकती है तथार् सरकार पर असहार्य लोगों के पुनर्वार्स हेतु नये कार्यक्रमों के निर्मार्ण के लिए दबार्व डार्ल सकती है।
    11. सार्मार्जिक सेवार्ओं की अप्रचुरतार् – सार्मार्जिक सेवार्ओं की अप्रचुरतार् समार्ज में असन्तोष उत्पन्न करती है। अत: सार्मार्जिक क्रियार् के द्वार्रार् सार्मार्जिक सेवार्ओं की अप्रचुरतार् को दूर कियार् जार् सकतार् है तथार् सार्मार्जिक क्रियार् कार्यकर्तार् सार्मार्जिक सेवार्ओं को प्रदार्न करने वार्ले तन्त्र के खिलार्फ आन्दोलन कर सार्मार्जिक सेवार् प्रदार्न करने के लिए विवष कर सकती है।
    12. निश्क्रीय कानूनों को क्रियार्न्वयन में – समार्ज ज्यो-ज्यों प्रगति की ओर बढ़तार् है त्यों-त्यों वे अपने पुरार्ने मूल्यों को भूलतार् जार्तार् है जिससे समस्यार् उत्पन्न होने लगती है। कुछ ऐसे नियम कानून जो सार्मार्जिक समस्यार्ओं को दूर करने के लिए बनार्ये जार्ते है यार् तो वे धनिक वर्ग के हार्थ की कठपुतली हो जार्ती है। अथवार् लोग उन नियम कानूनों से डरनार् छोड़ देते है। चूंकि कोर्इ भी नियम कानून समार्ज की भलाइ के लिए ही बनार्यार् जार्तार् है अत: निश्क्रिय हुये कानूनों को पुन: पुर्नजीवित करने हेतु सार्मार्जिक क्रियार् समार्ज के लोगों को सार्थ लेकर आन्दोलन करती है और निश्क्रिय हुये कानूनों को पुन: क्रियार्न्वित करार्ती है।
    13. नये समस्यार्ओं के निरार्करण हेतु नये कानूनों क निर्मार्ण – समार्ज क विकास जहार्ं एक तरफ देश को ऊंचाइयार्ं प्रार्प्त करार्तार् है वहीं दूसरी तरफ समार्ज क विकास अगर संग्रहणीय न हुआ तो नर्इ समस्यार्ओं को भी जन्म देतार् है। इसक एक उदार्हरण सार्इबर क्रार्इम है। अत: इस प्रकार नर्इ समस्यार्ओं के समार्धार्न हेतु सार्मार्जिक क्रियार् अपने प्रयार्स से सरकार को समय-समय पर सूचित कर मैं नये कानूनों क निर्मार्ण हेतु दबार्व डार्लती रहती है।
    14. सार्मार्जिक मुद्दों पर चेतनार् जार्गृत करनार् – समार्ज क विकास सार्मार्जिक समस्यार्ओं के निरार्करण पर निर्भर है चूंकि सार्मार्जिक समस्यार्यें कुछ दिनों बार्द सार्मार्जिक मुद्दों क रूपधार्रण करती है और यही मुद्दे आन्दोलन क रूपधार्रण करते है। सार्मार्जिक क्रियार् समार्ज के लोगों के बीच सार्मार्जिक मुद्दों पर चेतनार् जार्गृत करती है तथार् आन्दोलन हेतु प्रेशित करती है।
    15. वैयक्तिक एवं पार्रिवार्रिक मूल्यों से संबंधित समस्यार्ओं क समार्धार्न – व्यक्ति क विकास बिनार् समार्ज के सम्भव नहीं है और व्यक्ति, परिवार्र, समुदार्य तथार् समार्ज एक दूसरे से अन्त:क्रियार् करते है। समार्ज क ज्यो-ज्यों विकास होतार् है उसी क्रम में व्यक्ति एवं पार्रिवार्रिक मूल्यों से सम्बन्धित समस्यार्यें उत्पन्न होती है। जैसे आज की परिप्रेक्ष्य में एकल परिवार्र की महत्तार्। सार्मार्जिक क्रियार् वैयक्तिक एवं पार्रिवार्रिक मूल्यों से संबंधित समस्यार्ओं क समार्धार्न करती है।
    16. लोकतार्ंत्रिक मूल्यों की स्थार्पनार् – समार्ज कार्य पूरी तरह से लोकतार्ंत्रिक मूल्यों पर आधार्रित है और यह हमेषार् प्रयार्सरत रहतार् है कि समार्ज में लोकतार्ंत्रिक मूल्य यथार्वत बने रहे। लोकतार्ंत्रिक मूल्यों की स्थार्पनार् में सार्मार्जिक क्रियार् अपनार् महत्वपूर्ण योगदार्न प्रस्तुत करती है क्योंकि कोर्इ भी आन्दोलन बिनार् समार्ज के लोगों को एकजुट किए नही हो सकतार्।
    17. लोक चेतनार् क प्रसार्र – सार्मार्जिक क्रियार् लोक चेतनार् के प्रसार्र हेतु प्रयार्सरत रहती है तथार् समसार्मयिक मुद्दों को लोगों के सार्मने आन्दोलन, जार्गरूकतार् इत्यार्दि के मार्ध्यम से लोक चेतनार् क प्रसार्र करती रहती है।
    18. उपभोक्तार् संरक्षण – वर्तमार्न समय में जहार्ं एक तरफ वैष्वीकरण की प्रक्रियार् से व्यार्पार्र करनार् आसार्न हुआ है वही दूसरी तरफ वार्णिज्य के क्षेत्र में नर्इ समस्यार्ओं ने जन्म लियार् है। देखार् जार्य तो आज क उपभोक्तार् बहुत ही जार्गरूक हो गयार् है लेकिन फिर भी अपने अधिकारों की संरक्षार् नहीं कर पार्तार् है। उपभोक्तार् संरक्षण में सार्मार्जिक क्रियार् अपनार् महत्वपूर्ण योगदार्न प्रस्तुत करती है जिससे उपभोक्तार् के अधिकारों की संरक्षार् हो पार्ती है। ‘जार्गो ग्रार्हक जार्गो’ क “लोगन सार्मार्जिक क्रियार् द्वार्रार् उपभोक्तार् संरक्षण हेतु एक महत्वपूर्ण प्रयार्स है।

    सार्मार्जिक क्रियार् द्वार्रार् सार्मार्जिक विधार्न को लार्गू करार्नार् 

    व्यक्ति क समार्ज के सार्थ घनिष्ट संबंधार् है। उसकी आवश्यकतार्ओं की संतुष्टि समार्ज में ही समार्ज के सार्मार्जिक संरचनार् क निर्मार्ण एवं पुनर्गठन इसलिए कियार् जार्तार् है, तार्कि इन आवश्यकतार्ओं की समुचित एवं प्रभार्वपूर्ण ढंग से संतुष्टि हो सके दुर्भार्ग्य की बार्त है कि कालार्न्तर में नगर तथार् सार्मार्जिक संरचनार् में ऐसे दोष उत्पन्न हुए जिनके कारण कुछ लो सबल तथार् कुछ निर्बल हो गये और सबर्लो द्वार्रार् निर्बलों क शोषण दियार् जार्ने लगार्। परिणार्मत: यह अनुभव कियार् गयार् कि निर्बल वर्गो के हितों क संरक्षण करने हेतु रार्ज्य द्वार्रार् कुछ प्रयार्स किये जार्ने तार्कि निर्बलों को भी व्यक्तित्व के विकास एवं सार्मार्जिक क्रियार् कलार्पों में मार्पनी योग्यतार्ओं एवं क्षमतार्ओं के अनुसार्र भार्ग लेने के अवसर प्रार्प्त हो सके। यद्यपि ऐसे प्रयार्स सदैव से होते रहे है, किन्तु इस दिशार् में व्यवस्थित चेतन एवं योजनार्बद्ध प्रयार्स स्वतंत्रतार् के बार्द ही प्रार्रम्भ किये जार् सके। जब रार्ज्य एक कल्यार्णकारी रार्ज्य के रूप में उमर कर सार्मने आयार्। ये प्रयार्स निर्बल एवं शोषण क सरलतार्पूर्वक शिकार बनने वार्ले वर्गो के हितों के संरक्षण एवं सम्बर्द्धन हेतु सार्मार्जिक विधार्नों के रूप में सार्मने आये।

    सार्मार्जिक विधार्न समार्ज में होने वार्ले नित नये परिवर्तनों से उत्पन्न समस्यार्ओं के निरार्करण एवं नियंत्रण हेतु बनार्ये जार्ते है। जब भी कोर्इ व्यार्पक समस्यार् मुद्दों क रूपधार्रण करती है तो मुद्दों के निरार्करण के लिए एवं समार्ज को नर्इ दिशार् प्रदार्न करने के लिए सरकार सार्मार्जिक विधार्नों क निर्मार्ण करती है। लेकिन कभी-कभी कुछ ऐसे ज्वलन्त मुद्दों पर ध्यार्न नहीं देती है जिसके कारण समार्ज में असन्तोष व्यार्प्त होने लगतार् है। यही असन्तोष समार्ज में सार्मार्जिक क्रियार् के रूप में उत्पन्न होतार् है। चूंिक सार्मार्जिक क्रियार् लोकतार्ंत्रिक मूल्यों पर आधार्रित है अत: कोर्इ भी सार्मार्जिक विधार्न को लार्गू करने के लिये समार्ज में व्यार्प्त समस्यार् वृहद रूप में होनी चार्हिए तथार् समस्यार् मुद्दें के रूप में परिवर्तित होनी चार्हिए। सार्मार्जिक क्रियार् समार्ज में व्यार्प्त समस्यार्ओं के निरार्करण एवं नियंत्रण के लिये सार्मूहिक प्रयार्स करती है जिसमें कर्इ विधियों क प्रयोग करती है।

    सार्मार्जिक क्रियार् के द्वार्रार् सार्मार्जिक विधार्न लार्गू करवार्ने की विधियार्ं -सार्मार्जिक क्रियार् किसी भी सार्मार्जिक विधार्न को लार्गू करार्ने के लिए दो प्रविधियों की सहार्यतार् लेती है जिनमें (1) अहिंसार्त्मक प्रविधि (2) हिंसार्त्मक प्रविधि इनक वर्णन है –

    1. अहिंसार्त्मक प्रविधि – 

    सार्मार्जिक क्रियार् सर्वप्रथम किसी भी सार्मार्जिक समस्यार् के निरार्करण हेतु अंिहसार्त्मक प्रविधि क सहार्रार् लेती है तथार् इसी अहिंसार्त्मक प्रविधि क प्रयोग करते हुए सार्मार्जिक विधार्न बनार्ने के लिए सरकार पर दबार्व डार्लती है। इस प्रविधि में कुछ मार्ध्यम क उपयोग सार्मार्जिक क्रियार् कार्य कर्तार् करतार् है –

    1. प्रचार्र-सार्मार्जिक क्रियार् के द्वार्रार् किसी भी सार्मार्जिक समस्यार् से सम्बन्धित विधार्नों के निर्मार्णों के लिये प्रचार्र क सहार्रार् लियार् जार्तार् है इसमें सार्मार्जिक समस्यार् से सम्बन्धित सभी पहलुओं को समार्ज के जनमार्नस के सार्मने रखार् जार्तार् है तथार् उनसे समस्यार् के निरार्करण हेतु सुझार्व मार्ंगे जार्ते है। प्रचार्र ही एक ऐसार् मार्ध्यम है जिससे सार्मार्जिक मुद्दों के बार्रे में जनमार्नस को जार्नकारी प्रार्प्त होती है तथार् जब उन्हें लगतार् है कि उक्त समस्यार् हेतु विधार्न अवश्य बनने चार्हिए तो सार्मार्न्य जनमार्नस भी अपनार् सहयोग प्रदार्न करतार् है। 
    2. शोध-सार्मार्जिक क्रियार् में शोध एक ऐसार् मार्ध्यम है जिसके द्वार्रार् सार्मार्जिक मुद्दों एवं समसार्मयिक मुद्दों पर गुढ मंथन कियार् जार् सकतार् है तथार् आन्तरिक स्तर पर लोगों के सार्मार्जिक समस्यार्ओं के प्रति क्यार् विचार्र है निकलकर सार्मने आ सकते है। शोध के मार्ध्यम से सार्मार्जिक मुद्दों पर सार्ंख्यिकी आंकड़े प्रस्तुत किये जार् सकते है। जो सार्मार्जिक विधार्न को लार्गू करार्ने अथवार् बनवार्ने हेतु सरकार को प्रेशित किये जार् सकते है। शोध के मार्ध्यम से लोगों के विचार्र उपर्युक्त सरकार तक पहुचार्यें जार् सकते है। 
    3. रैलियों क आयोजन-सार्मार्जिक क्रियार् जनमार्नस क सहयोग लेने के लिये तथार् सार्मार्जिक मुद्दों को उपर्युक्त सरकार तक पहुचार्ने के लिये रैलियों क आयोजन करती है ये रैलियार्ं लोगों की भार्वनार्ओं को व्यक्त करने क एक सशक्त मार्ध्यम होती है। जहार्ं पर जनमार्नस अपने-अपने विचार्र रखते है तथार् उन्हीं विचार्रों को एक रूपरेखार् प्रस्तुत कर सरकार के सार्मने प्रस्तुत कियार् जार्तार् है कि उक्त समस्यार् कितनी भयार्वह है तथार् इसके लिए कानून क निर्मार्ण अतिआवश्यक है। 
    4. हस्तार्क्षर शिविर-हस्तार्क्षर शिविर मार्ध्यम से सार्मार्जिक क्रियार् हस्तार्क्षर अभियार्न चलार्ती है जिससे समसार्मयिक समस्यार्ओं एवं मुद्दों हेतु लोगों के विचार्र सार्मने आते है। यही विचार्र हस्तार्क्षर शिविर के मार्ध्यम से उपयुक्त सरकार प्रेशित किये जार्ते है तथार् सार्मार्जिक विधार्न बनार्ने के लिये आग्रह कियार् जार्तार् है। मण् बैनर लगवार्नार्-सार्मार्जिक क्रियार् सार्मार्जिक समस्यार्ओं के निरार्करण के लिये सार्मार्जिक तथ्यों को बैनर के मार्ध्यम से समार्ज के सार्मने प्रस्तुत करती है तथार् जनमार्नस क सहयोग मार्ंगती है जिससे कि सरकार तक लोगों के विचार्र पहुचार्ये जार् सके। जब समार्ज के लोग बैनरों के मार्ध्यमों से समस्यार् की यथार् स्थिति से अवगत हो जार्ते है तो वे लोग भी सार्मार्जिक विधार्न बनवार्ने के लिए समार्ज के मुख्य धार्रार् से जुड़ जार्ते है। जिससे सरकार पर सार्मार्जिक विधार्न बनार्ने के लिए दबार्व पड़ने लगतार् है। 
    5. प्रदर्शन-प्रदर्शन एक ऐसार् मार्ध्यम है जिसके द्वार्रार् समार्ज के लोग बड़ी मार्त्रार् में सरकारी तन्त्र के सार्मने उपस्थित होते है तथार् अपने हार्थ में विभिन्न प्रकार के श्लोगन वार्ली दफ्तियार्ं, बैनर इत्यार्दि लिये रहते है जिससे उनके विचार्र सरकारी तन्त्र तक पहुचे तथार् सार्मार्जिक विधार्न बनार्ने हेतु प्रेरित हो सके। 
    6. असहयोगार्त्मक प्रतिरोध-सार्मार्जिक क्रियार् में असहयोगार्त्मक प्रतिरोध ऐसार् मार्ध्यम है जिसके द्वार्रार् समार्ज के लोग समस्यार्ओं के निरार्करण के लिए सार्मार्जिक विधार्न बनार्ने हेतु सरकारी तन्त्र के कार्यो में असहयोग करते है जिससे सरकारी तन्त्र प्रभार्वित होतार् है और वह सार्मार्जिक विधार्न बनार्ने के लिए विवश हो जार्तार् है।
    7. प्रतिरोधार्त्मक प्रतिरोध-सार्मार्जिक क्रियार् में प्रतिरोधार्त्मक प्रतिरोध के अन्तर्गत सरकारी तन्त्र द्वार्रार् संचार्लित कार्यक्रमों एवं योजनार्ओं क प्रतिरोध करते है तथार् सरकारी तन्त्र द्वार्रार् किये जार् रहे क्रियार्कलार्पों में अवरोध उत्पन्न करते है जिससे विवष होकर सरकार सार्मार्जिक विधार्न बनार्ने के लिए प्रेरित होती है। 
    8. जार्गरूकतार् शिविर-सार्मार्जिक क्रियार् में जार्गरूकतार् शिविर के मार्ध्यम से सरकारी तन्त्र के लोगों के बीच सार्मार्जिक समस्यार्ओं की वार्स्तविक रूपरेखार् प्रस्तुंत की जार्ती है तथार् उनमें बतार्यार् जार्तार् है कि वर्तमार्न समय में इस सार्मार्जिक समस्यार् के निरार्करण एवं नियन्त्रण हेतु इस सार्मार्जिक विधार्न की महत्वपूर्ण आवश्यकतार् है जो अवश्य ही बननार् चार्हिए। 
    9. आमरण अनशन-आमरण अनशन एक ऐसी प्रविधि है जो उपरोक्त प्रविधियों के विफल होने के बार्द की जार्ती है, क्योंकि सार्मार्जिक क्रियार् कार्यकर्तार् समार्ज के लोगों को एक सार्थ लेकर सार्मार्जिक विधार्न बनार्ने के लिए पूर्व प्रस्तार्वित जगह एवं स्थार्न पर एकत्रित होते है तथार् सरकार के खिलार्फ अनिश्चित कालीन धरने पर बैठ जार्ते है तथार् सरकार को यह सूचनार् प्रेशित करते है कि जब तक सार्मार्जिक विधार्न बनार्ने के क्षेत्र में कोर्इ उद्घोशणार् नही होगी तब तक यह अनशन समार्प्त नही होगार्। इस प्रविधि के द्वार्रार् अत्यधिक सार्मार्जिक विधार्नों क निर्मार्ण करवार्यार् जार् चुक है। भ्रष्टार्चार्र जन लोक पार्ल विधेयक पार्रित करवार्ने के लिए अन्नार् हजार्रे जी ने आमरण अनशन क ही सहार्रार् लियार् है।
    10. भूख हड़तार्ल-भूख हड़तार्ल भी एक आमरण अनशन क ही एक प्रतिरूप है जिसमें सार्मार्जिक क्रियार् कार्यकर्तार् तथार् अन्य जनमार्नस भी अन्न जल क त्यार्ग करतार् है  एवं उपयुक्त सरकार पर दबार्व बनार्ते है कि जब तक सार्मार्जिक विधार्न क निर्मार्ण नही होगार् अथवार् आवश्वार्सन नही मिलेगार् तब तक भूख हड़तार्ल समार्प्त नही करेगें। 

    2. हिंसार्त्मक प्रविधि – 

    सार्मार्जिक क्रियार् में हिंसार्त्मक प्रविधि को बहुत अच्छे नजरिये से नही देखार् जार्तार् क्योंकि इस प्रकार की प्रविधि में जन तथार् धन दोनों की हार्नि होती है जिससे समार्ज विकास की बजार्य पतन की ओर उन्मुख हो जार्तार् है। इस प्रकार की प्रविधि को सबसे अन्तिम हथियार्र के रूप में अपनार्यार् जार्तार् है। हिंसार्त्मक प्रविधि की कर्इ सहार्यक प्रविधियार्ं है जो बिन्दुओं के मार्ध्यम से प्रस्तुत की जार् रही है –

    1. आगजनी : आगजनी एक ऐसी सहार्यक प्रविधि है जिसमें सार्मार्जिक विधार्न बनवार्ने के लिये जनमार्नस इकट्ठार् होतार् है तथार् उसकी बार्तों पर सरकार कोर्इ ध्यार्न नही देती है। तो जनमार्नस उग्र हो जार्तार् है एवं जगह-जगह पर आगजनी करने लगतार् है एवं लूट मचार्ने लगतार् है। इस प्रविधि से त्रस्त होकर कभी-कभी सरकारी तन्त्र सार्मार्जिक विधार्नों क निर्मार्ण करवार्ने क आश्वार्सन प्रदार्न करतार् है। 
    2. उग्रवार्दी क्रियार् : हिंसार्त्मक प्रविधि के रूप में अपनार् महत्वपूर्ण स्थार्न रखती है। इस प्रविधि में जब किसी समस्यार्, निरार्करण एवं नियन्त्रण हेतु विधार्नों क निर्मार्ण नही होतार् है तो सार्मार्न्य जनमार्नस क युवार्वर्ग उग्रवार्दी क्रियार्ये करने लगतार् है तथार् बन्दूकों एवं अन्य अग्निमार्रक यन्त्रों क प्रयोग सरकारी तन्त्र के खिलार्फ करने लगतार् है। इस प्रकार की क्रियार् में जन एवं धन की अत्यधिक हार्नि होती है।
    3. तोड़फोड़ मचार्नार् : हिंसार्त्मक प्रक्रियार् में सार्मार्जिक क्रियार् के तहत कभी-कभी जनमार्नस इतनार् उग्र हो जार्तार् है कि उसके सार्मने जो भी वस्तु होती है उसे तोड़ने फोड़ने लगतार् है तथार् सरकारी तन्त्र क ध्यार्न अपने तरफ करने क प्रयार्स करतार् है। यह प्रक्रियार् आगजनी के जैसी ही भयार्नक होती है तथार् जनहार्नि होती है। 
    4. सरकारी सार्मार्नों को छति पहुचार्नार् : सार्मार्जिक विधार्न बनार्ने के लिए सार्मार्जिक क्रियार् के हिंसार्त्मक प्रविधि के तहत जब कोर्इ निर्णय नही निकलतार् है तो आम जनमार्नस सरकारी सार्मार्नों को छति पहुचार्ने लगतार् है तथार् लूटने लगतार् है। जिससे कि सरकार त्वरित निर्णय ले और सार्मार्जिक विधार्न क निर्मार्ण करे। मण् सरकारी तंत्र के अधिकारियों को बंधक बनार्नार् : सार्मार्जिक क्रियार् के तहत कभी-कभी जनमार्नस इतनार् उग्र हो जार्तार् है कि वह सरकारी तंत्र को भी बंधक बनार्ने लगतार् है एवं बंधक अधिकारियों के बदले सरकार से सार्मार्जिक विधार्न बनार्ने क समझौतार् चार्हतार् है। 
    5. रेल रोकनार्, बसों को छति पहुचार्नार् : सार्मार्जिक क्रियार् के हिंसार्त्मक प्रार्रूप में रेल रोकनार्, बसों को छति पहुचार्नार् भी समार्योजित होतार् है चूंकि जनमार्नस क विचार्र  होतार् है कि जब इस प्रकार की घटनार्यें होगी तो सरकार अपने आप सार्मार्जिक विधार्न क निर्मार्ण करेगी। 

    इस प्रकार हम देख सकते है कि उपरोक्त सार्मार्जिक क्रियार् की प्रविधियों के आधार्र पर सार्मार्जिक विधार्नों क निर्मार्ण करार्यार् जार् सकतार् है तथार् उनको लार्गू करार्यार् जार् सकतार् है जिससे समार्ज में व्यार्प्त समस्यार्ओं क निरार्करण एवं नियंत्रण हो सकतार् है।

    सार्मार्जिक क्रियार् रणनीतियार्ं और तकनीक 

    सार्मार्जिक क्रियार् की रणनितियार्ं और तकनीक वार्स्तविक रूप से सार्मुदार्यिक संगठन, सार्मुदार्यिक विकास, सार्मार्जिक आन्दोलन और गार्ंधीयन समार्ज कार्य के रणनितियों और तकनीकों पर आधार्रित हैं। यह सभी प्रकार की रणनितियार्ं और तकनीक समार्ज के लिए सुधार्रार्त्मक एवं अतिवार्दी रणनितियार्ं और तकनीक पर आधार्रित हैं तथार् समार्ज को एक नर्इ दिशार् प्रदार्न करने क प्रयार्स करती हैं। वार्स्तविक रूप से देखार् जार्ए तो सार्मार्जिक क्रियार् की रणनितियार्ं और तकनीक लोगों की सहभार्गितार् एवं लोकतंत्रार्त्मक मूल्यों पर आधार्रित हैं। सार्मार्जिक रणनितियार्ं और तकनीक की विवेचनार् की जार् रही है।

    किसी भी प्रविधि को सफल बनार्ने में उस प्रविधि की रणनीतियार्ं एवं तकनीक अपनार् महत्वपूर्ण योगदार्न प्रस्तुत करती है। देखार् जार्ए तो कोर्इ भी प्रविधि के पार्स अगर उसकी स्वयं की रणनीति और तकनीकि न हो तो उसे प्रविधि नही कह सकते। सार्मार्जिक क्रियार् 109 भी समार्ज कार्य की एक ऐसी प्रविधि है जिसमें स्वयं की कुछ रणनीति एवं तकनीकि पार्यी जार्ती है जिससे यह सार्मार्जिक समस्यार्ओं को दूर करने में सहार्यतार् प्रदार्न करती है। रणनीतियों से तार्त्पर्य इस प्रकार की एक ब्यूह रचनार् से है जिसमें समस्यार्ओं के निरार्करण एवं नियंत्रण से सम्बन्धित कुछ ऐसी रचनार् की जार्ती है जिससे समस्यार् क निदार्न कियार् जार् सके। सार्मार्जिक क्रियार् में कुछ ऐसी तकनीकियार्ं भी पाइ जार्ती है जो सार्मार्जिक क्रियार् को सहार्यतार् प्रदार्न करती है ये तकनीकियार्ं समय-समय पर परिवर्तित होती रहती है। क्योंकि सार्मार्जिक क्रियार् सम सार्मयिक मुद्दों पर आधार्रित होती है। अत: इस प्रकार के मुद्दों को हल करने के लिए सार्मार्जिक क्रियार् को नर्इ-नर्इ तकनीकों क विकास करनार् होतार् है जिससे समस्यार् क समार्धार्न हो सके।

    सार्मार्जिक क्रियार् समार्ज कार्य की एक सहार्यक प्रणार्ली है जिसक उपयोग समार्ज कार्यकर्तार् द्वार्रार् अन्य प्रणार्लियों में असफल होने के पश्चार्त् कियार् जार्तार् है। कार्यकर्तार् वैयक्तिक समार्ज कार्य, सार्मूहिक समार्ज कार्य, सार्मुदार्यिक संगठन, समार्ज कल्यार्ण प्रशार्सन, समार्ज कार्य अनुसंधार्न क उपयोग जनमार्नस के कल्यार्ण के लिए करने क प्रयार्स करतार् है और यदि वह उपरिलिखित प्रणार्लियों के मार्ध्यम से कार्य करने में असफल हो जार्तार् है, तो वह समार्ज कार्य की सहार्यक प्रणार्ली सार्मार्जिक क्रियार् के मार्ध्यम से स्वस्थ जनमत तैयार्र करने एवं विधार्नों में आवश्यक परिवर्तन करने क प्रयार्स करतार् है। लीस ने सार्मार्जिक क्रियार् की तीन प्रकार की रणनीतियों क उल्लेख कियार् है :-

    1. सहभार्गितार् की रणनीति : सार्मार्जिक क्रियार् कार्यकर्तार् किसी भी समस्यार् को दूर करने के लिए अथवार् नियंत्रित करने के लिए सबसे पहले लोगों की सहभार्गितार् से सम्बन्धित रणनीतियों क निर्मार्ण करतार् है, ऐसार् इसलिए कि कोर्इ भी सार्मार्जिक क्रियार् तब तक सफल नही हो सकती जब तक जनसार्मार्न्य सार्मार्जिक क्रियार् में अपनी सहभार्गितार् न करे। चूंकि सार्मार्जिक क्रियार् लोगों के कल्यार्ण के लिए ही की जार्ती है। अत: सार्मार्जिक क्रियार् कार्यकर्तार् जब जनसार्धार्रण को समस्यार् की गम्भीरतार् के बार्रे में विस्तृत रूप से बतार्तार् है तो लोग समझ जार्ते है कि यह सार्मार्जिक क्रियार् उन्हीं के कल्यार्ण हेतु की जार् रही है। इस प्रकार सार्मार्जिक क्रियार् कार्यकर्तार् के सार्थ जनसार्धार्रण सहभार्गितार् करने लगते है तथार् सार्मार्जिक क्रियार् से सम्बन्धित विभिन्न प्रकार के आन्दोलनों में हिस्सार् लेने लगते है। वार्स्तव में देखार् जार्ए तो सहभार्गितार् की रणनीति एक जमीनी स्तर की रणनीति है। क्योंकि इसमें लोग मन से वचन से तथार् कर्म से सहभार्गितार् करते है एवं सार्मार्जिक क्रियार् को सफल बनार्ने में सहयोग प्रदार्न करते है। इस प्रकार हम कह सकते है कि सहभार्गितार् की रणनीति के अन्तर्गत कार्यकर्तार् स्वस्थ जनमत तैयार्र करतार् है और सार्मार्जिक नीतियों को परिवर्तित करने के लिए जन सहभार्गितार् को प्रोत्सार्हित करतार् है। इस रणनीति के मार्ध्यम से 110 जनसमुदार्य की रूचियोंं, मूल्यों और व्यवहार्रों में परिवर्तन होतार् है, इसमें आपसी विद्वेश की भार्वनार् नहीं आती और न ही किसी की शक्ति क हार्ंस होतार् है।
    2. प्रतिस्पर्धार् की रणनीति : प्रतिस्पर्धार् की रणनीति में सार्मार्जिक क्रियार् कार्यकर्तार् समार्ज के लोगों के बीच विभिन्न प्रकार के मुद्दों के अन्तर्गत विशिष्ट मुद्दों पर लोगों के विचार्र जार्नने की कोशिश करतार् है तथार् उन्हीं के अनुसार्र प्रमुख मुद्दों पर सार्मार्जिक क्रियार् करने हेतु उन्हीं को प्रेरित करतार् है। इस प्रकार की रणनीति में सार्मार्जिक क्रियार् कार्यकर्तार् विभिन्न प्रकार के प्रचार्र एवं प्रसार्र सार्मग्री क उपयोग करते हुए जैसे रैली, पर्चो क वितरण, भार्शण, होिर्ड़ग एवं विभिन्न प्रकार के ध्वनि प्रसार्रक यंत्रों क उपयोग करते हुए जन सार्मार्न्य को समस्यार् की गम्भीरतार् के बार्रे में जार्गरूक करतार् है। वार्स्तव में देखार् जार्ए तो समार्ज अगर किसी भी प्रकार की समस्यार् के बार्रे में प्रचुर जार्नकारी प्रार्प्त कर ले तो समार्ज के लोग समस्यार् को दूर करने हेतु सार्मार्जिक क्रियार् के लिए उपस्थित हो जार्ते है। इस प्रकार हम कह सकते हैं कि प्रतिस्पर्धार् की रणनीति में सार्मार्जिक कार्यकर्तार् प्रचार्र एवं प्रसार्र के मार्ध्यम से वर्तमार्न परिस्थितियों को परिवर्तित करने के लिए नेतृत्व इस रणनीति क उपयोग करतार् है। नेतृत्व के द्वार्रार् ऐसे कार्यक्रमों क चयन कियार् जार्तार् है कि जिससे समूह यार् समुदार्य के सदस्य अपने उत्तरदार्यित्वों क उचित रूप से निर्वहन करते हुए कार्यक्रमों में अपनी सहभार्गितार् करें और विभिन्न कार्यक्रमों की प्रगति के लिए प्रयार्स करें।
    3. व्यवधार्नार्त्मक रणनीति : व्यवधार्नार्त्मक रणनीति के अन्तर्गत समार्ज के लोग जब किसी भी समस्यार् से ग्रसित हो जार्ते है तथार् पूर्णरूप से अपने आपको असहार्य पार्ते है तो वे सरकार के खिलार्फ आवार्ज उठार्ने लगते है। यह आवार्ज भूख हड़तार्ल, बहिश्कार, तार्लार्बन्दी, के रूप में होती है। वार्स्तव में देखार् जार्ए तो व्यवधार्नार्त्मक रणनीति सार्मार्जिक क्रियार् की बहुत ही प्रिय एवं पुरार्नी रणनीति है। इस प्रकार यह रणनीति पूर्णत: हड़तार्ल, बहिश्कार, भूख हड़तार्ल, कर अदार्यगी न करने, प्रचार्र एवं प्रसार्र, तार्लार्बन्दी आदि से सम्बन्धित है, इसमें जनमार्नस वर्तमार्न परिस्थिति के विरूद्ध असन्तोष प्रकट करतार् है और ऐसार् वह नेतृत्व के द्वार्रार् दिये गये सुझार्वों को ध्यार्न में रखकर करतार् है।

    ली ने नौ प्रकार की तकनीकों क वर्णन कियार् है तथार् उन्होनें बतार्यार् है कि यह सभी प्रकार की तकनीक सार्मार्जिक क्रियार् की प्रक्रियार् में प्रयोग किये जार्ने चार्हिए। वर्तमार्न में सभी प्रकार के सार्मार्जिक कार्यकर्तार् इन्हीं तकनीकों क प्रयोग करते हैं। ली द्वार्रार् बतार्ये गये तकनीकियार्ं  है –

    तकनीक         स्तर 
    1. अनुसंधार्न –
    2. शिक्षार् –        जगरूकतार् क विकास करनार्
    3. सहयोग –
    4.संगठन –        संगठन
    5. विवार्चन –
    6. समझौतार् –        रणनीतियार्ं
    7. सूक्ष्म उत्पीड़न –
    8. विधिक मूल्यों को न मार्ननार्
    9. संयुक्त क्रियार्-        क्रियार्

    उपरोक्त सभी प्रकार की तकनीकियों क वर्णन हम अप्रस्तुत कर रहे है जिससे सार्मार्जिक क्रियार् की तकनीक को समझने में आसार्नी होगी।

    1. अनुसंधार्न : अनुसंधार्न तकनीकि ऐसी तकनीक है जिसमें समस्यार् के बार्रे में वैज्ञार्निक पद्धति को अपनार्कर जार्नकारी प्रार्प्त की जार्ती है। सार्मार्जिक क्रियार् के अन्तर्गत कोर्इ भी सार्मार्जिक क्रियार् कार्यकर्तार् अथवार् संगठन समस्यार् की भयार्वहतार् एवं स्थिति को जार्नने के लिए सर्वप्रथम अनुसंधार्न तकनीकि क ही सहार्रार् लेतार् है। ऐसार् इसलिए कियार् जार्तार् है क्योंकि यदि अनुसंधार्न वैज्ञार्निक रूप से कियार् जार्ए तो समस्यार् के सार्ंख्यिकीय आंकड़े स्पष्ट हो जार्ते है तथार् इन आंकड़ों को जनमार्नस एवं सरकार के समक्ष रखकर सार्मार्जिक परिवर्तन की लहर पैदार् की जार् सकती है। देखार् जार्ए तो अनुसंधार्न वार्स्तविक सच्चाइ को उजार्गर करने में महत्वपूर्ण भूमिक निभार्तार् है तथार् सार्मार्जिक कार्यकर्तार् एवं समार्ज के लोगों को समस्यार् निवार्रण एवं परिवर्तन हेतु पे्ररित करतार् है।
    2. शिक्षार् : शिक्षार् वह तकनीकि है जिसमें सार्मार्जिक क्रियार् कार्यकर्तार् समार्ज के लोगों के बीच समस्यार् से सम्बन्धित जार्गरूकतार् फैलार्तार् है तथार् लोगों के मन में शिक्षार् के द्वार्रार् समस्यार् की वार्स्तविक स्थिति रखतार् है। चूंकि शिक्षार् समार्ज क अभिन्न अंग है जिससे समार्ज के लोग जार्गरूक होते है एवं अपने उत्तरदार्यित्व को समझते हुए सार्मार्जिक समस्यार्ओं एवं सार्मार्जिक मुद्दों के निवार्रण हेतु आगे आते है। सार्मार्जिक क्रियार् की तकनीकि के रूप में शिक्षार् क दूसरार् स्थार्न है तथार् यह तकनीक सार्मार्जिक क्रियार् के जार्गरूकतार् विकास के रूप में अपनार् स्थार्न रखती है।
    3. सहयोग : सहयोग एक ऐसी तकनीक है जिसके मार्ध्यम से सार्मार्जिक क्रियार् कार्यकर्तार् समार्ज के लोगों को एक सार्थ एकत्रित कर सहार्यतार् लेतार् है तथार् समस्यार् के प्रति उनकी मनोवृत्तियों को जार्गृत कर क्रियार् करने के लिए प्रेरित करतार् है। सहयोग की तकनीक सार्मार्जिक क्रियार् के संगठन चरण के अन्र्तगत कार्य करती है।
    4. संगठन : चूंकि हम जार्नते है कि कोर्इ भी सार्मार्जिक क्रियार् सार्मार्जिक कार्यकर्तार् द्वार्रार् अथवार् संगठन द्वार्रार् की जार्ती है। चूंकि यदि सार्मार्जिक क्रियार् के किसी संगठन के द्वार्रार् संगठन रणनीतियार्ं क्रियार् 112 की जार्ये तो उसक मूल्य लोगों के मनोभार्वों में ज्यार्दार् होतार् है तथार् जनतार् तीव्रगति से समस्यार् निवार्रण हेतु एकत्रित होती है। यह तकनीक सार्मार्जिक क्रियार् के संगठन स्तर पर कार्य करती है।
    5. विवार्चन : विवार्चन वह तकनीक है जिसमें सार्मार्जिक क्रियार् कार्यकर्तार् सार्मार्जिक मुद्दों एवं समस्यार्ओं को वैधार्निक रूप से जनसार्मार्न्य के सार्मने विशेषज्ञ व्यक्तियों द्वार्रार् विवेचित करार्तार् है तथार् समस्यार् की वैधार्निक स्थिति को स्पष्ट करतार् है जब जनसार्धार्रण लोग विवार्चन के मार्ध्यम से समस्यार् की वैधार्निक स्थिति से परिचित हो जार्ते है तो वे सार्मार्न्य रूप से सार्मार्जिक क्रियार् हेतु प्रेरित होते है तथार् सार्मार्जिक क्रियार् में भार्ग लेते है। यह तकनीक सार्मार्जिक क्रियार् के संगठन स्तर पर कार्य करती है।
    6. समझौतार् : समझौतार् तकनीक वह तकनीक है जिसके अन्तर्गत समस्यार् से ग्रसित लोग सरकारी तंत्र अथवार् नियोजक से कुछ मुद्दों पर समझौतार् करते है तथार् इसमें सार्मार्जिक समस्यार् को दूर करने हेतु दोनों पक्षों के बीच मध्यम स्तर की पहल को अपनार्यार् जार्तार् है। यह तकनीक वार्स्तव में नौ लॉस, नो गेन पर आधार्रित है। यह तकनीक सार्मार्जिक क्रियार् की रणनीति स्तर पर कार्य करती है।
    7. सूक्ष्म उत्पीड़न : सूक्ष्म उत्पीड़न तकनीक में सार्मार्जिक क्रियार् कार्यकर्तार् सार्मार्जिक लोगों को एक सार्थ लेकर सरकारी तंत्र के खिलार्फ कुछ ऐसी प्रविधियों क उपयोग करते है जिससे सरकारी तंत्र के लोग कठिनाइ महसूस करे तथार् समस्यार् के प्रति चिन्तन करे और समस्यार् को दूर करने के लिए कार्यक्रमों क निर्मार्ण करे। इस प्रकार की तकनीक में रोड़ जार्म एवं तोड़ फोड़ की क्रियार् को अपनार्यार् जार्तार् है। यह तकनीक भी सार्मार्जिक क्रियार् की रणनीति स्तर पर कार्य करती है।
    8. विधिक मूल्यों को न मार्ननार् : विधिक मूल्यों को न मार्नने की तकनीकि के अन्तर्गत सार्मार्जिक क्रियार् द्वार्रार् जनसार्धार्रण ऐसार् प्रयार्स करतार् है कि सरकार द्वार्रार् बनार्ये गये विधार्नों क विरोध हो जिससे सरकार तक जनतार् की आवार्ज पहंचु े और सरकार लोगों की समस्यार्यें सुनने के लिए विवष हो तथार् जन सार्धार्रण की समस्यार् दूर हो सके। यह तकनीक सार्मार्जिक क्रियार् के क्रियार् स्तर पर कार्य करती है।
    9. संयुक्त क्रियार् : संयुक्त क्रियार् तकनीक सार्मार्जिक क्रियार् तकनीकि सबसे अन्तिम तकनीक है जिसमें सरकार यदि उपरोक्त सभी प्रकार के तकनीकों के आधार्र पर समस्यार् क निवार्रण नही करती है तो इस तरह की तकनीक को अपनार् कर समार्ज के सभी वर्ग के लोग एक सार्थ इकट्ठार् होकर क्रियार् करते है तथार् सार्मार्जिक क्रियार् के विभिन्न प्रविधियों के द्वार्रार् अपनी समस्यार् को हल करने क प्रयार्स करवार्ते है। यह तकनीक सार्मार्जिक क्रियार् की क्रियार् स्तर पर कार्य करती है।

    सार्मार्जिक क्रियार् के प्रार्रूप 

    सार्मार्जिक क्रियार् क प्रार्रूप वार्स्तविक रूप से सार्मुदार्यिक संगठन, सार्मुदार्यिक विकास, सार्मार्जिक आन्दोलन और गार्ंधीयन समार्ज कार्य के प्रार्रूप पर आधार्रित है। यह सभी प्रकार के प्रार्रूप समार्ज के लिए सुधार्रार्त्मक एवं अतिवार्दी प्रार्रूपों पर आधार्रित है तथार् समार्ज को एक नर्इ दिशार् प्रदार्न करने क प्रयार्स करते हैं। वार्स्तविक रूप से देखार् जार्ए तो सार्मार्जिक क्रियार् के प्रार्रूप लोगों की सहभार्गितार् एवं लोकतंत्रार्त्मक मूल्यों पर आधार्रित है। सार्मार्जिक प्रार्रूपों की विवेचनार्  की जार् रही है।

    सार्मार्जिक क्रियार् के प्रार्रूपों में अलग-अलग विद्वार्नों ने समय-समय पर अलग-अलग प्रार्रूप प्रस्तुत किये कुछ प्रार्रूप जो सार्मार्जिक क्रियार् को एक व्यवस्थित प्रविधि के रूप में स्थार्पित करते हैं उनक वर्णन इस इकार्इ में कर रहे है। वार्स्तव में गार्ंधीयन परम्परार् के चिन्तन अतिवार्दी उपार्गमों पर अत्यधिक विश्वार्स करते हैं। गार्ंधीयन एवं अतिवार्दी प्रार्रूप वार्ले चिंतक लोकशक्ति में विश्वार्स रखते है। वार्स्तव में कोर्इ भी प्रार्रूप समार्ज की  आवश्यकतार्ओं प्रक्रियार्ओं और लक्ष्यों पर आधार्रित होते हैं। किसी भी समार्ज में पूर्ण परिवर्तन केवल अतिवार्दी सुधार्र और अहिंसार्त्मक अथवार् हिंसार्त्मक आंदोलनों से ही कियार् जार् सकतार् है। वहीं पर रार्जनैतिक अथवार् आर्थिक तंत्र में परिवर्तन हेतु पूर्ण संरचनार्त्मक परिवर्तन की आवश्यकतार् नहीं होती है।

    समार्ज विज्ञार्न के तथ्य बतार्ते है कि सार्मार्जिक क्रियार्, सार्मार्जिक नीति, सार्मार्जिक कल्यार्ण, विकास और सार्मार्जिक आंदोलन से सम्बन्धित है। कृशक आंदोलन के संदर्भ में अवलोकन करे तो सार्मार्जिक क्रियार् पूर्णत: जमीनी स्तर से शुरू हुर्इ और इसकी सफलतार् पूर्ण रार्ष्ट्रीय स्तर के सहयोग पर समार्प्त हुर्इ। इस प्रकार हम कह सकते हैं कि किसार्नों की समस्यार् हेतु सार्मार्जिक क्रियार् जो रार्जनैतिक दृढ़ इच्छार् शक्ति और संगठनार्त्मक तथार् शैक्षिक स्थिति से सम्बन्धित थी, वह जमीनी स्तर सहभार्गितार् प्रार्रूप पर आधार्रित थी।

    इस प्रकार हम सार्मार्जिक क्रियार् के प्रार्रूपों को विभिन्न अंग परिप्रेक्ष्यों में देखे तो पतार् चलतार् है कि सार्मार्जिक क्रियार् क प्रार्रूप अन्य कर्इ विषयों के प्रार्रूपों से सम्बन्धित है। इसक प्रमुख सम्मुख कुछ प्रश्नों पर आधार्रित है। जैसे – समार्ज की मुख्य अवधार्रणार् क्यार् होनी चार्हिए ? वे कौन से लक्ष्य है जो सार्मार्जिक क्रियार् के द्वार्रार् प्रार्प्त किये जार् सकते हैं ? वे कौन से शोध एवं प्रविधियार्ं है ? कौन-कौन से लोग अभिकर्तार् के रूप में कार्य करेगें ? कितने सदस्य है ? लोगों तथार् रार्ज्य की भूमिक क्यार् है ? समार्ज क आदर्शवार्द क्यार् है ? इन तथ्यों के आधार्र पर अन्य प्रार्रूपों की रूपरेखार् बनाइ जार् सकती है। कुछ ऐसे ही प्रार्रूप होते हैं, जो एक दूसरे के विरोधार्भार्सी होते है। जैसे – संचेतनार्त्मक अथवार् संघर्शार्त्मक प्रार्रूप यह प्रार्रूप वार्स्तव में अभ्यार्स में प्रयोग नही होतार् है लेकिन यह प्रार्रूप केवल निरन्तरतार् के विभिन्न स्तरों की व्यार्ख्यार् करतार् है। सार्मार्जिक क्रियार् के किसी भी प्रार्रूप की विवेचनार् अग्रलिखित के रूप में करनार् चार्हिए। 1. क्रियार् की पहल कौन करेगार् ? 2. यह किसके सार्थ होगी तथार् कौन उत्तरदार्यी होगार् ? 3. यह क्रियार् कहार्ं होगी ? प्रथम प्रश्न क उत्तर अभिकर्तार् के रूप में ही है तथार् इसके सार्थ रार्ज्य भी पहल कर्इ क्षेत्रों की नीतियार्ं बनार्ने में कर सकतार् है तथार् दूसरे प्रश्न क उत्तर सार्मार्जिक क्रियार् के लक्ष्य में व्यक्ति, समूह तथार् समुदार्य हो सकते हैं तथार् सार्मार्जिक क्रियार् इन्हीं को लेकर क्रियार् करेगी अथवार् संस्थार्ओं और सभ्य लोगों को लेकर चलेगी, यह निर्णय अवश्य कर लेनार् चार्हिए। तृतीय प्रश्न के आधार्र पर यह क्रियार् रार्ज्य स्तर पर हो सकती है जिसमें संस्थार्यें, समितियार्ं, समूह और लोग जमीनी स्तर पर भार्ग लेगें, बार्द में मध्यम स्तर पर क्रियार् होगी तथार् अन्त में वृहद स्तर पर सार्मार्जिक क्रियार् की जार्येगी।

    वार्स्तव में सार्मार्जिक क्रियार् क पहल किसी संस्थार्न अथवार् संगठन द्वार्रार् की जार् सकती है मगर यह संस्थार्गत नही हो सकती है। सार्मार्जिक क्रियार् एक प्रक्रियार् के रूप में चलती रहनी चार्हिए। क्रियार् को हमेशार् क्रियार्न्वित रहनार् चार्हिए जब तक कि लक्ष्यों की पूर्ति न हो जार्ए। इन्हीं उपरोक्त तथ्यों के आधार्र पर सार्मार्जिक क्रियार् की एक रूपरेखार् प्रस्तुत की जार् रही है जो है –

    सार्मार्जिक क्रियार् के प्रार्रूप

    उपरोक्त चाट को हम बिन्दुबार्र वर्णन प्रस्तुत कर रहे है-

    1. संस्थार्गत प्रार्रूप : इस प्रार्रूप के अन्तर्गत सार्मार्जिक क्रियार् बिनार् किसी सहभार्गितार् के आधार्र पर कार्य करती है क्योंकि किसी भी रार्ष्ट्र क परम कर्तव्य है कि वह अपने नार्गरिकों को एक सौहादपूर्ण मार्हौल तथार् कल्यार्णकारी योजनार्यें प्रदार्न करें, जिससे उसके नार्गरिक एक उच्च जीवन यार्पन कर सके। वार्स्तव में इस प्रकार के प्रार्रूप में सार्मार्न्य रूप से रार्ज्य प्रत्यक्ष यार् अप्रत्यक्ष रूप से जन सहभार्गितार् के सार्थ अथवार् जन सहभार्गितार् के बिनार् जन कल्यार्ण हेतु कदम उठार्तार् है। इस प्रार्रूप के अधीन संसद अथवार् विधार्नमण्डल कोर्इ कानून बनार्तार् है और उसी के अनुरूप कार्यक्रम क क्रियार्न्वयन कियार् जार्तार् है। उदार्हरण के लिए, अवैध बरितयों को कानून बनार्ते हुए मार्न्यतार् प्रदार्न करनार्।
    2. संस्थार्गत सार्मार्जिक प्रार्रूप : संस्थार्गत सार्मार्जिक प्रार्रूप ऐसार् प्रार्रूप है जो ऐच्छिक रूप से कार्य करने वार्ली संस्थार्यें अपनार्ती है। ऐसार् इसलिए मार्नार् जार्तार् है क्योंकि कोर्इ भी ऐच्छिक संस्थार् समार्ज के उत्थार्न के लिए कार्य करती है तथार् वह चार्हती है कि समार्ज अग्रेतर वृद्धि करे इस हेतु वह किसी भी सरकारी अथवार् गैर सरकारी संस्थार् से यार् तो अनुदार्न लेकर कार्य करती है अथवार् बिनार् अनुदार्न के कार्य करती है, जिससे समार्ज की समस्यार्यें दूर होती है। इस प्रकार हम कह सकते हैं कि जब गैर सरकारी संस्थार्एं अनुदार्न प्रार्प्त करते हुए यार् अनुदार्न के बिनार् जनहित में कार्यक्रम आयोजित करती है तो उसे संस्थार्गत सार्मार्जिक प्रार्रूप कहते हैं। जन समर्थन धीरे-धीरे बढ़ने लगतार् है। प्रार्रम्भ में संस्थार् लोगों के लिए कदम उठार्ती है लेकिन कालार्न्तर में जनसमुदार्य स्वयं उसे अपनार् लेतार् है। संस्थार्गत प्रार्रूप संस्थार्गत सार्मार्जिक प्रार्रूप सार्मार्जिक संस्थार्गत प्रार्रूप सर्वमार्न्य/ आन्दोलनार्त्मक प्रार्रूप गार्ंधीवार्दी प्रार्रूप अहिंसार्त्मक उग्रवार्दी परम्परार् प्रार्रूप सभ्य अहिंसार्त्मक परम्परार् प्रार्रूप नार्गरिकों के संरचनार्त्मक कार्य क प्रार्रूप
    3. सार्मार्जिक संस्थार्गत प्रार्रूप : सार्मार्जिक संस्थार्गत प्रार्रूप वार्स्तव में लोकतार्ंत्रिक मूल्यों पर आधार्रित होतार् है ऐसार् इसलिए कि समार्ज के लोग अपनी समस्यार्ओं क निवार्रण एवं नियंत्रण स्वयं करने की कोशिश करते हैं। इस प्रकार की सार्मार्जिक क्रियार् में सार्मार्जिक सहभार्गितार् अत्यन्त आवश्यक होती है क्योंिक कोर्इ भी सार्मार्जिक लक्ष्य जो सार्मार्जिक समस्यार्ओं से जुड़ार् हुआ हो तब तक प्रार्प्त नही हो सकतार् जब तक कि समार्ज के लोग जमीनी स्तर पर एक सार्थ एकत्रित होकर कार्य न करें। इस प्रकार हम देखते हैं कि इस प्रार्रूप के अन्र्तगत नार्गरिक, स्वयं सहार्यतार् समूह, तथार् विशिष्ट जन अपने कल्यार्ण के लिए सार्मार्जिक क्रियार् करते हैं। धीरे-धीरे वे औपचार्रिक समूहों तथार् संस्थार्ओं क सहयोग प्रार्प्त करते हैं।
    4. सर्वमार्न्य/आन्दोलनार्त्मक प्रार्रूप : सर्वमार्न्य/आन्दोलनार्त्मक प्रार्रूप एक ऐसार् प्रार्रूप है जिसे आदर्श प्रार्रूप कहार् जार्तार् है तथार् यह प्रार्रूप लोगों को आत्मविश्वार्स के सार्थ समस्यार्ओं से लड़ने की प्रेरणार् प्रदार्न करतार् है। इस प्रकार के प्रार्रूप में लोग जब समस्यार्ओं से त्रस्त हो जार्ते है तो वे एक मंच पर एक सार्थ एकत्रित होकर समस्यार् को दूर करने की कोशिश करते हैं। यह प्रार्रूप लोगों को सार्मार्न्य तौर पर अहिंसार्त्मक क्रियार् करने की प्रेरणार् प्रदार्न करतार् है जिससे समस्यार् पैदार् करने वार्ले कारक अपने आप ही विशार्ल जन समूह को देखते हुए अलग हो जार्ते है अथवार् अलग कर दिये जार्ते हैं। इस प्रकार के प्रार्रूप में अधिकांश व्यक्ति परिवर्तन के लिए तैयार्र होते है विघ्न पैदार् करने वार्ली सभी शक्तियों को जड़ से उखार्ड़ फैकते हैं तथार् आत्मनिर्भरतार् पर बल देते है। इसमें व्यार्पक सहभार्गितार् होती है और इसीलिए यह आदर्श प्रार्रूप मार्नार् जार्तार् है।
    5. गार्ंधीवार्दी प्रार्रूप : गार्ंधीवार्दी प्रार्रूप वार्स्तव में एक ऐसार् प्रार्रूप है जो लोगों के अन्दर अध्यार्त्मिकतार्, विचार्रों की शुद्धतार्, अहिंसार् तथार् नैतिकतार् पर विशेष बल देतार् है। चूंकि यह प्रार्रूप गार्ंधी जी के द्वार्रार् बतार्ये गये सार्मार्जिक क्रियार् प्रार्रूप पर आधार्रित है अत: इस प्रार्रूप के आधार्र पर महार्त्मार् गार्ंधी जी ने कर्इ प्रकार के आन्दोलन किये जिनमें असहयोग आन्दोलन, डार्ंडी यार्त्रार्माच इत्यार्दि प्रमुख थे। गार्ंधी जी मार्ननार् थार् कि कोर्इ भी सरकार चार्हे वह रार्ज सत्तार्त्मक हो अथवार् लोकतंत्रार्त्मक हो उसे आसार्नी से समार्ज कल्यार्ण हेतु मनार्यार् जार् सकतार् है क्योंकि यदि किसी भी व्यक्ति के सार्मने नैतिकतार्, अध्यार्त्मिकतार् क प्रदर्शन कियार् जार्ए तो उसक हृदय अवश्य परिवर्तित होगार्, ऐसार् इसलिए कि वह भी एक सार्मार्न्य हृदय क भी प्रार्णी होतार् है। इस प्रकार हम कह सकते है कि यह प्रार्रूप आध्यार्त्मिकतार्, उद्देश्यों तथार् सार्धनों दोनों की शुद्धतार्, अहिंसार् तथार् नैतिकतार् पर बल देतार् है और इन्हीं सार्धनों के मार्ध्यम से परिवर्तन क उद्देश्य पूरार् करने पर बल देतार् है।
      1. अहिंसार्त्मक उग्रवार्दी परम्परार् प्रार्रूप : अहिंसार्त्मक उग्रवार्दी परम्परार् प्रार्रूप सार्मार्जिक क्रियार् क ऐसार् प्रार्रूप है जो महार्त्मार् गार्ंधी द्वार्रार् अपनार्ये गये अहिंसार्, आन्दोलन से प्रेरित  है। इस प्रकार के प्रार्रूप में समार्ज के लोग किसी भी समस्यार् को दूर करने हेतु अहिंसार्त्मक आन्दोलनों क सहार्रार् लेते है, लेकिन कभी-कभी वे उग्र भी हो जार्ते है ऐसार् इसलिए कि उनके द्वार्रार् किये जार् आन्दोलन पर रार्ज्य सरकार अथवार् सरकार ध्यार्न नही देती है। चूंकि लोगों क लक्ष्य सार्मार्जिक कल्यार्ण से सम्बन्धित होतार् है। अत: वे उग्रवार्दी के अनुरूप कुछ ऐसी घटनार्यें कर जार्ते है जो हिंसार् की श्रेणी में नही आती है लेकिन कहीं न कहीं उग्रवार्द क समर्थन करती है। इस तरह की घटनार्ओं में रेल रोकनार्, यार्तार्यार्त रोकनार्, धरनार् देनार् इत्यार्दि आती है। इस प्रकार हम कह सकते है कि व्यक्ति, समूह, समुदार्य, समार्ज इस प्रकार की क्रियार् करतार् है जो उग्र होती है लेकिन हिंसार् से परे होती है जो लक्ष्यों की पूर्ति हेतु की जार्ती है।
      2. सभ्य अहिंसार्त्मक परम्परार् प्रार्रूप : सभ्य अहिंसार्त्मक परम्परार् प्रार्रूप ऐसार् प्रार्रूप है जिसमें समार्ज के सभ्य एवं विशेषज्ञ जनतार् समस्यार् को समार्प्त करने के लिये प्रतिकात्मक आन्दोलन करती है जिनमें लोग अहिंसार्त्मक रूप से सरकारी तंत्र क विरोध करते हैं तथार् सरकारी तंत्र द्वार्रार् चलाइ जार् रही योजनार्ओं क प्रतिरोध करते हैं। इस प्रकार सभ्य अहिंसार्त्मक परम्परार् प्रार्रूप में लोग प्रतिकात्मक आन्दोलन करते हुए काली पट्टी तथार् अन्य सार्धनों क उपयोग करते हैं जिससे उनकी आवार्ज सरकार तक पहुचे एवं उनकी समस्यार्ओं क समार्धार्न हो। इस प्रार्रूप को सभ्य अहिंसार्त्मक परम्परार् प्रार्रूप इसलिए कहार् जार्तार् है कि इसमें भार्ग लेने वार्ले लोग एक ही समूह के होते हैं जो शिक्षित एवं विशेषज्ञ होते है।
      3. नार्गरिकों के संरचनार्त्मक कार्य क प्रार्रूप : सार्मार्जिक क्रियार् क यह प्रार्रूप अमेरिक में अत्यधिक प्रिय है। वार्स्तव में इस प्रार्रूप क जन्म महार्त्मार् गार्ंधी द्वार्रार् किये गये आन्दोलनों पर ही आधार्रित है। महार्त्मार् गार्ंधी जी मार्ननार् थार् कि समार्ज के व्यक्तियों को अपने कल्यार्ण हेतु सरकार से मार्ंग रखनी चार्हिए लेकिन उसके सार्थ-सार्थ ऐसे संरचनार्त्मक कार्य करने चार्हिए जिससे कि समार्ज उत्तरोत्तर वृद्धि करतार् रहे। उनक मार्ननार् थार् कि सभी प्रकार की समस्यार्यें केवल रार्ज्य स्तर से ही नही सुलझार्यी जार् सकती बल्कि इनक निरार्करण स्वयं जनतार् भी कर सकती है।सार्मार्जिक क्रियार् के उपरोक्त प्रार्रूपों के अलार्वार् भी कुछ अन्य चिन्तकों ने अपने-अपने प्रार्रूप प्रस्तुत किये है जिनमें ब्रिटों ने भी सार्मार्जिक क्रियार् क प्रार्रूप प्रदार्न कियार् है। स्वार्स्थ्य एवं कल्यार्ण के क्षेत्र में स्थार्नीय, क्षेत्रीय एवं रार्ष्ट्रीय सार्मार्जिक संस्थार्ओं के रूप में कार्य करती है, इसक स्वरूप मुख्यत: दो बार्तों पर बल देतार् है, जैसार् कि ब्रिटो ने उल्लेख कियार् है। 
        1. अभिजार्त वर्ग सार्मार्जिक क्रियार् प्रार्रूप : अभिजार्त वर्ग से अभिप्रार्य उस वर्ग से है जिसमें विषय-विशेषज्ञ एवं शिक्षित लोग आते हैं। अभिजार्त वर्ग के लोग सबसे पहले समस्यार् क अवलोकन करके विचार्र विमर्श करते है तत्पश्चार्त् समस्यार् क्यार् है एवं समस्यार् क विस्तार्र क्यार् है तथार् समस्यार् के उत्तरदार्यी कारक क्यार् है क गहन अध्ययन करते है उसके बार्द सार्मार्जिक क्रियार् के मार्ध्यम से समस्यार् को दूर करने की कोशिश करते हैं। उपरिलिखित प्रार्रूप के अन्तर्गत ब्रिटो ने तीन उप-प्रार्रूपों क उल्लेख कियार् है :
          1. विधार्यी क्रियार् प्रार्रूप : विधार्यी क्रियार् वह क्रियार् है जिसमें प्रयार्स कियार् जार्तार् है कि समार्ज में व्यार्प्त समस्यार्ओं को सार्मार्जिक विधार्न बनार्कर दूर कियार् जार्ए। इसके लिए समार्ज के कुछ अभिजार्त वर्ग के लोग समस्यार्ओं क आंकलन कर उससे सम्बन्धित विधार्यी नीतियों क अवलोकन करते हैं। यदि अवलोकन में समस्यार् से सम्बन्धित कुछ विधार्न ऐसे होते है जो समस्यार् को दूर कर सकने में सक्षम होते हैं लेकिन उनक क्रियार्न्वयन उचित तरीके से नही होतार् है। अत: उनमें संशोधन आवश्यक हो जार्तार् है अथवार् नये विधार्न बनार्ने की आवश्यकतार् होती है तो अभिजार्त वर्ग के लोग सार्मार्जिक क्रियार् के विभिन्न मार्ध्यमों से सार्मार्जिक नीति के अन्तर्गत बदलार्व लार्ने की कोशिश करते है जिससे समस्यार्ओं क निरार्करण कियार् जार् सके। अत: हम कह सकते है कि विधार्यी क्रियार् प्रार्रूप के अन्तर्गत सार्मार्जिक नीति में परिवर्तन लार्ने के लिए कुछ विशिष्ट व्यक्ति समस्यार् के प्रति समार्ज में जनचेतनार् क प्रसार्र करते हैं।
          2. स्वीकृत प्रार्रूप : इस प्रकार के प्रार्रूप में समार्ज के विशिष्ट व्यक्ति समार्ज के कल्यार्ण हेतु तथार् समार्ज को लार्भ पहंचु ार्ने के लिए समार्ज में आर्थिक, सार्मार्जिक, रार्जनैतिक तथार् धामिक कारकों पर नियंत्रण रखने की कोशिश करते हैं। वार्स्तव में देखार् जार्ए तो किसी भी समार्ज में आर्थिक, सार्मार्जिक, रार्जनैतिक तथार् धामिक कारक समार्ज को एक उत्तरोत्तर दिशार् प्रदार्न करते हैं। यदि इनक उचित नियंत्रण नही कियार् जार्ए तो ये समार्ज को गर्त में ले जार् सकते है जिससे समार्ज क अस्तित्व ही खतरे में पड़ जार्येगार्। चूंकि रार्जनैतिक एवं धामिक कारक समार्ज क एक अभिन्न अंग है। अत: इसके प्रति समार्ज के लोगों को जार्गरूक होनार् आवश्यक होतार् है। देखे तो रार्जनैतिक कारक समार्ज के परिपार्टी को प्रजार्तार्ंत्रिक मूल्यों के आधार्र पर चलार्तार् है वही धामिक कारक समार्ज में अध्यार्त्म एवं संतोश की भार्वनार् क प्रसार्र करतार् है। इस प्रकार इन उपरोक्त चार्रों कारकों पर यदि नियंत्रण कर लियार् जार्ए तो समार्ज विकास उन्मुख हो सकतार् है। इस प्रकार हम कह सकते हैं कि समार्ज को लार्भार्न्वित करने के लिए विशिष्ट व्यक्ति आर्थिक, सार्मार्जिक, रार्जनैतिक, धामिक आदि कारकों पर नियंत्रण करते हैं।
          3. प्रत्यक्ष भौतिक प्रार्रूप : इस प्रकार के प्रार्रूप में समतार् के सार्थ न्यार्य पर समार्ज के अभिजार्त वर्ग के लोग विशेष ध्यार्न देते है तथार् वे हमेषार् यह प्रयार्स करते है कि समार्ज के दबे, कुचले वर्ग के लोगों को भी उचित न्यार्य मिले। इस प्रकार प्रत्यक्ष भौतिक प्रार्रूप में  न्यार्य को प्रोत्सार्हित करने एवं अन्यार्य के विरूद्ध आवार्ज उठार्ने में विशिष्ट व्यक्ति आगे आते हैं।
        2. लोकप्रिय सार्मार्जिक क्रियार् प्रार्रूप : इस प्रार्रूप के अन्तर्गत ब्रिटो ने तीन उप प्रार्रूपों को सम्मिलित कियार् है :
          1. संचेतनार् प्रार्रूप : इस प्रकार के प्रार्रूप में जन सार्धार्रण के बीच जार्गरूकतार् क प्रसार्र कियार् जार्तार् है। ऐसार् इसलिए क्योंकि यदि व्यक्ति अपनी समस्यार्ओं की पहचार्न स्वयं कर ले तो समस्यार्ओं को सुलझार्ने में ही प्रयार्स बेहतर तरीके से कर सकतार् है। इस प्रकार की सार्मार्जिक क्रियार् प्रार्रूप में प्रचार्र के मार्ध्यम से लोगों के बीच में चेतनार् फैलार्यी जार्ती है जिससे समार्ज के जन सार्मार्न्य लोग समस्यार्ओं के कारकों की पहचार्न कर सके तथार् उनको दूर करने में अपनी सहभार्गितार् सुनिश्चित कर सके। इस प्रकार हम कह सकते हैं कि इस प्रार्रूप के अन्तर्गत जन समुदार्य को शिक्षित करके उनमें चेतनार् क प्रसार्र कियार् जार्तार् है।
          2. द्वन्द्वार्त्मक प्रार्रूप : द्वन्द्वार्त्मक प्रार्रूप एक ऐसार् प्रार्रूप है जो लोगों के बीच में सरकार एवं जनतार् के बीच में संघर्श उत्पन्न करवार्तार् है चूंकि किसी भी समार्ज की समस्यार् क निरार्करण सरकारी तंत्र द्वार्रार् नहीं कियार् जार् रहार् है तो उसके प्रति समार्ज के लोगों में असन्तोष व्यार्प्त हो जार्तार् है जिससे जन सार्मार्न्य सरकारी तंत्र के प्रति रूश्ट होने लगतार् है तथार् यही रूश्टतार् लोगों को एक मंच पर लार्ती है एवं सरकार के प्रति संघर्श करने को प्रेरित करती है। इस प्रकार हम कह सकते हैं कि इस प्रार्रूप में यह विश्वार्स दिलार्कर संघर्श उत्पन्न कियार् जार्तार् है कि कुछ समय के उपरार्न्त इससे अच्छी व्यवस्थार् हो जार्येगी।
          3. प्रत्यक्ष गतिशीलतार् प्रार्रूप : प्रत्यक्ष गतिशीलतार् प्रार्रूप में किसी विशेष कारण क होनार् आवश्यक है और यह कारण समसार्मयिक भी होनार् चार्हिए। प्रत्यक्ष गतिशीलतार् प्रार्रूप क वर्तमार्न उदार्हरण भ्रष्टार्चार्र के लिये जन लोकपार्ल विधेयक पार्स करवार्नार् है। भ्रष्टार्चार्र निवार्रण के लिए आज सम्पूर्ण देश के नार्गरिक इसलिए एक जुट हो गये है क्योंकि कही न कहीं वे भी भ्रष्टार्चार्र से ग्रसित है तथार् वे भ्रष्टार्चार्र को मिटार्नार् चार्हते है। इस प्रकार हम कह सकते हैं कि इस प्रार्रूप में किसी विशेष कारण को लेकर जनसार्मार्न्य को हड़तार्ल के लिए उत्सार्हित कियार् जार्तार् है।

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