समार्जमिति विधि क्यार् है ?

समार्जमिति तकनीक क प्रयोजन समूह में व्यक्ति विशेष के सार्मार्जिक सम्बन्धों क अध्ययन करनार् है। इसके द्वार्रार् विशेषकर से एकाकी और उपेक्षितों तथार् अस्वीकृत व्यक्तियों की व्यक्तित्व सम्बन्धी समस्यार्ओं क पतार् लगार्ने के लिए कियार् जार्तार् है। व्यक्तियेार्ं के सार्मार्जिक व्यवहार्र क आकलन करने हेतु यह तकनीक सूचनार् प्रार्प्त करने क एक उपयोग मार्ध्यम है। इस तकनीक में यह प्रयार्स कियार् जार्तार् है कि समूह के सदस्यों में, उनसे यह पूछकर कि वे विभिन्न स्थितियों में किसे चुनेंगे यार् नहीं चुनेंगे। इस तकनीक क प्रयोग विभिन्न शिक्षण स्थितियों में, सार्मार्जिक समार्योजन, सार्मूहिक गतिकी, अनुशार्सन तथार् अन्य सार्मार्जिक सम्बन्धों की समस्यार्ओं के अध्ययन में प्रयोग कियार् जार्तार् है। समूहों के अन्दर सार्मार्जिक सम्बन्धों के मार्पन के लिए भिन्न-भिन्न प्रकार की तकनीकों क प्रयोग कियार् जार्तार् है। शिक्षार् के क्षेत्र में निम्नलिखित तकनीकों क प्रयोग मुख्य रूप से कियार् जार्तार् है।

समार्जमिति तकनीक की प्रविधियार्ँ

  1. सोशियोग्रार्म (Sociogram)
  2. सार्मार्जिक मार्प मैट्रिक्स (Sociometric Matrices )
  3. समार्जमितीय सूचकांक (Sociometric Index)
  4. गेस-हू-टेकनीक (Guess who Technic )
  5. सार्मार्जिक दूरी स्केल (Social Distance Scale )
1. सोशियोग्रार्म (Sociogram) – सोशियोग्रार्म में समूह के सदस्यों द्वार्रार् एक-दूसरें के प्रति किये गये पसन्दों केार् एक आलेख यार् सार्दे कागज पर चित्र बनार्कर दिखार्यार् जार्तार् है। शोधकर्तार् ऐसे प्रश्नों से आरम्भ करतार् है जैसे ‘‘प्रत्येक सदस्य से यह पूछार् जार्तार् है कि आप किसके सार्थ कार्य करनार् सर्वार्धिक पसन्द करेंगें ? अपनी पहली, दूसरी तथार् तीसरी पसन्द बतार्इए।’’ यदि समूह में लड़के तथार् लड़कियॉ दोनो हैं तो लड़कों क चिन्ह ‘त्रिकोण’ (∆) और लड़कियों क ‘वृत्त’ (0) हो सकतार् है। पसन्द क एक दिशार् सूचक तीर से प्रदर्शित कर सकते हें और आपसी चयन को दोनों दिशार्ओं की ओर इंगित करते हुए तीर (↔ ) से प्रदर्शित कियार् जार् सकतार् है। जो सदस्य सबसे अधिक लोगों के द्वार्रार् चुने जार्ते हैं उन्हें ‘तार्रार्’(Stars) कहार् जार्तार् है। जो सदस्य दूसरे के द्वार्रार् नहीं चुने जार्ते हैं उन्हें ‘आइसोलेट्स’ कहार् जार्तार् है। समूह के सदस्यों द्वार्रार् एक-दूसरे को चुनकर बनार्ए गये छोटे समूह केार् ‘क्लिक’ कहार् जार्तार् है। सोशियोग्रार्म के निर्मार्ण में दूसरे चरण में तार्लिक बनार्यी जार्ती है। तार्लिक में छार्त्र क नार्म तथार् उसकी क्रम संख्यार् लिखी जार्ती है । पहले तीन कालमों में विद्यार्थ्र्ार्ी की अपनी पसन्द /चयन क्रम भरी जार्ती है। अगले तीन कालमों में प्रत्येक छार्त्र दूसरों द्वार्रार् जितनी बार्र चुनार् गयार् तथार् अन्तिम कालम में कुल चयनों क योग दर्शार्यार् है।
सोशियोग्रार्म

आंकड़ार् पत्र पर पहलार् छार्त्र अनिल कुमार्र है। उसने ‘छार्त्र की चयन’ कालम में छार्त्र संख्यार् पहले चयन में 3 लिखार्, पहलार् चयन ललित कुमार्र, दूसरी पसन्द आशीष तथार् तीसरी पसन्द अखिलेश है। ‘कितनी बार्र चुनार् गयार्’ कालम में अनिल कुमार्र एक छार्त्र द्वार्रार् दूसरी चयन में चुनार् गयार् और पहली व तीसरी चयन में किसी भी विद्यार्थी ने उसे नहीं चुनार्। अन्य विद्याथियों द्वार्रार् वह केवल एक बार्र चुनार् गयार् और उसे ‘कुल चयन’ के कालम में दिखार्यार् गयार्।

कुल चयन कालम में स्पष्ट है कि ‘सतीष’ तथार् ‘ललित कुमार्र’ के क्रमश: 5 बार्र तथार् 4 बार्र चुनार् गयार्। यह विद्याथी ‘स्टास’ कहे जार्ते हैं। ‘अखिलेश’ को किसी अन्य विद्याथी द्वार्रार् नही चुनार् गयार्। ऐसे विद्यार्थ्र्ार्ी को ‘आइसोलेट’ कहार् जार्एगार्। अनिल कुमार्र, कुलदीप कुमार्र, सुरेश, आशीष कम बार्र चुने गये इन्हें उपेक्षित (नेगेलक्टीज) कहेंगे।

सोशियोग्रार्म समूह के सम्बन्धों क आकृति चित्र प्रस्तुत कियार् जार्तार् है। इसके निर्मार्ण में निम्न प्रक्रियार् अपनार्यी जार्ती है।

  1. ‘स्टास’ के नार्म सोशियोग्रार्म के मध्य में रखार् जार्तार् है। लड़को के चिन्ह त्रिकोण में तथार् लड़कियों को वृत्त में रखार् जार्तार् है।
  2. ‘आइसोलेट्स’ जिन्हें बहुत कम चुनार् गयार्, उन्हें सोशियोग्रार्म के बार्हरी क्षेत्र में रखिए।
  3. ज्यार्दार् अंक प्रार्प्त करने वार्लेार्ं को ‘स्टास’ के पार्स रखार् जार्तार् है।
  4. पूरी रेखार् से पहले चयन को तथार् खण्डित रेखार् दूसरे चयन केार् तथार् बिन्दु -डैश चिन्ह तीसरे चयन को दर्शार्ते हैं।

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