समार्चार्र तथार् जनमत के लिए लोगों क सार्क्षार्त्कार

आज के जमार्ने में जन संचार्र के विभिन्न मार्ध्यमों के कारण हमार्री जिन्दगी पर गहरार् असर पड़ रहार् है। हमार्रार् समार्ज, हमार्री संस्कृति, हमार्री जीवन शैली, हमार्री विचार्रधार्रार् यार्नी हर एक चीज को जनसंचार्र के अलग-अलग मार्ध्यम गहराइ से प्रभार्वित कर रहें हैं । जनसंचार्र के अलग-अलग मार्ध्यम जैसे रेडियो, टेलीविजन, इंटरनेट और समार्चार्र पत्र-पत्रिकाएं जिस प्रकार देश विदेश के समार्चार्र और जार्नकारियार्ँ जन सार्मार्न्य तक पहुंचार्ती हैं उसमें सार्क्षार्त्कार क भी महत्वपूर्ण अंशदार्न होतार् है। आज जनसंचार्र की बेहद तेज और प्रतिस्पर्धार् पूर्ण प्रक्रियार् में सार्क्षार्त्कार क महत्व बहुत बढ़ गयार् है। किसी भी सार्मार्न्य समार्चार्र में उससे जुड़े किसी विशिष्ट व्यक्ति अथवार् संगठन के अहम प्रतिनिधि क सार्क्षार्त्कार, चार्र चार्ँद लगार् देतार् है। सार्क्षार्त्कार से उस समार्चार्र क प्रभार्व और उपयोगितार् दोनों बढ़ जार्ती हैं ।

28 मर्इ 2010 को पश्चिम बंगार्ल में नक्सलवार्दियों द्वार्रार् रेल लाइन में विस्फोट की घटनार्ओं के सन्दर्भ में देखें तो ज्ञार्नेश्वरी एक्सपे्रस के इस रेल हार्दसे में घटनार् स्थल पर मौजूद एक रेल यार्त्री ने सबसे पहले एक टीवी चैनल को अपने मोबार्इल के जरिए घटनार् की सूचनार् दी। टेलीविजन चैनल ने उस यार्त्री से अनुरोध कियार् कि वह मौके पर घार्यलों की संख्यार्, बचे हुए लोगों की जार्नकारी आदि सूचनार्यें जुटार्ए और जब पार्ंच मिनट बार्द चैनल ने उस यार्त्री क उसी के मोबार्इल फोन के जरिए सार्क्षार्त्कार लियार् तो यह बार्त स्पष्ट हो गर्इ कि ट्रेन की कौन-कौन सी बोगियार्ँ पभ््रार्ार्वित हुर्इ है। और किन-किन बोगियों के यार्त्री सकुशल है। । इस तीन मिनट के सार्क्षार्त्कार ने टे्रन में सफर कर रहे उन यार्त्रियों के हजार्रों परिजनों को तत्काल मार्नसिक रार्हत पहुंचाइ जिनकी बोगियार्ँ दुर्घटनार् ग्रस्त नहीं हुर्इ थीं ।

इसी तरह मर्इ 2010 में उड़ीसार् में आए समुद्री तूफार्न ‘लैलार्’ के मार्मले में भी मौसम विज्ञार्नियों के सार्क्षार्त्कार ने लोगों के खतरे की पूर्व सूचनार्एं विस्तार्र से देकर पहले से ही सचेत कर दियार् जिससे बहुत से लोग खतरों में फंसने से बच गए ।

आज सार्क्षार्त्कार जनसंचार्र क एक उपयोगी अंग तो हो ही चुक है लेकिन पत्रकारितार् के क्षेत्र में यह एक कलार्त्मक विधार् भी है। सार्क्षार्त्कार में उत्तर देने वार्ले क महत्व जितनार् है उससे कहीं अधिक महत्व प्रश्न पूछने वार्ले क होतार् है। एक आदर्श पत्रकार के लिए यह बेहद जरूरी है कि वह इस कलार् में पार्रंगत बनने क प्रयार्स करे क्योंकि आज इस कलार् में निपुणतार् के बिनार् पत्रकार क व्यक्तित्व अधूरार् है।

सार्क्षार्त्कार की विकास यार्त्रार् 

पत्रकारितार् की शुरूआत से ही सार्क्षार्त्कार इसक अभिन्न अंग रहार् है। दुनियार् के प्रार्रम्भिक समार्चार्र पत्रों, लन्दन गजट (1666 र्इस्वी) और पब्लिक आकरेंसेज (अमेरिक में 1690 र्इस्वी में प्रकाशित) में भी लोगों और शार्सकीय प्रतिनिधियों से बार्तचीत के आधार्र पर जार्नकारियार्ँ छपती थीं । 29 जनवरी 1780 को प्रकाशित भार्रत के पहले अखबार्र बंगार्ल गजट (इसे इसके सम्पार्दक-प्रकाशक के नार्म पर हिकीज गजट भी कहार् जार्तार् है।) में भी र्इस्ट इंण्डियार् कंपनी के अधिकारियों से बार्तचीत के अंश प्रकाशित होते थे, जिनमें व्यार्पार्र की व्यवस्थार्ओं और सावजनिक जीवन के नियम-कानूनों की जार्नकारी दी जार्ती थी । विश्व की सबसे बड़ी न्यूज एजेंसी रॉयटर ने भी अपनी शुरूआत, लम्बी समुद्री यार्त्रार्ओं से आए समुद्री व्यार्पार्रियों और जहार्जियों से बार्तचीत के बार्द मिली जार्नकारियों को समार्चार्र बनार्कर ही की थी । प्रथम स्वार्धीनतार् संग्रार्म के दौरार्न मुगल सम्रार्ट बहार्दुरशार्ह जफर क विश्वप्रसिद्व संदेश-’हिन्दुस्तार्न के हिन्दुओ और मुसलमार्नों! उठो, भार्इयों उठो, खुदार् ने इन्सार्न को जितनी बरकतें अतार् की उनमें सबसे कीमती बरकत आजार्दी है।’ यह संदेश ‘पयार्मे आजार्दी’ नार्मक एक तत्कालीन अखबार्र में छपार् थार् और यह बहार्दुरशार्ह जफर की अपने एक दीवार्न से हुर्इ बार्तचीत पर आधार्रित थार्। उस दीवार्न ने इसे अन्य लोगों तक पहुंचार्यार् और तब यह अखबार्र में भी प्रकाशित हुआ।

अखबार्री पत्रकारितार् के शुरूआती दिनों से चलकर ‘सार्क्षार्त्कार’ ने आज बड़ी दूरी तय कर ली है। आज टीवी के कारण सार्क्षार्त्कार खबरों क एक चमत्कारिक सार्धन बन गयार् है। इलेक्ट्रार्निकी के विकास के कारण अब सार्क्षार्त्कार को ऑडियो अथवार् वीडियो स्वरूप में रिकार्ड करनार् भी सम्भव हो गयार् है। लेकिन जब यह सिर्फ लिखकर रिकार्ड कियार् जार्तार् थार्, उस दौर में इसकी विश्वसनीयतार् को लेकर कर्इ बार्र, सही यार् गलत, आरोप-प्रत्यार्रोप भी लग जार्ते थे। एक उदार्हरण से इसे समझार् जार् सकतार् है। लक्ष्मण नार्रार्यण गर्दे नार्मक नार्मी पत्रकार ने एक बार्र कोलकातार् में देशबन्धु चितरजंन दार्स के निवार्स पर आए महार्त्मार् गार्ंधी क सार्क्षार्त्कार कियार् । तत्कालीन सार्मार्जिक, आर्थिक और रार्जनीतिक मुद्दों पर हुए इस सार्क्षार्त्कार के पूरार् होने पर गर्दे ने बार्तचीत के दौरार्न जो प्रश्न उन्होंने पूछे थे और जो उत्तर महार्त्मार् गार्ंधी ने दिए थे उसक अपने हार्थ से लिखार् पूरार् विवरण गार्ंधी जी के सार्मने रख दियार् और उनसे अनुरोध कियार् कि अगर आपके उत्तरों को मैने सही-सही लिखार् है तो आप कृपयार् इस पर अपने हस्तार्क्षर कर दीजिए। गार्ंधी जी ने हस्तार्क्षर करवार्ने क प्रयोजन पूछार् तो गर्दे ने कहार् कि ‘भार्रत मित्र‘ के दिल्ली संवार्ददार्तार् ने अभी हार्ल में मौलार्नार् शौकत अली क एक इंटरव्यू लियार् थार् । इसमें मौलार्नार् ने कहार् थार् कि मस्जिद के आगे बार्जे क प्रश्न कोर्इ धामिक प्रश्न नहीं है। यह बार्त भार्रतमित्र के बार्द अन्य कर्इ अखबार्रों में छपी और बार्द में जब एक मुकदमे के दार्रौन नार्गपुर की एक अदार्लत में इसे एक नजीर के तौर पर पेश कियार् गयार् तो मौलार्नार् ने सावजनिक तौर पर यह कह दियार् कि भार्रत मित्र में मेरार् जो इंटरव्यू छपार् है वह गलत है। इस पर भार्रत मित्र को पुन: सफाइ पेश करनी पड़ी और अनार्वश्यक विवार्द हुआ । इसलिए इस घटनार् के बार्द मैने यह निश्चय कियार् है कि इंटरव्यू पर, इंटरव्यू देने वार्ले क हस्तार्क्षर करार् लेनार् चार्हिए ।

आज इंटरव्यू को रिकार्ड करने की तरह-तरह की सुविधार्एं उपलब्ध है डिक्टार्फोन और कैसेट रिकार्डर के बार्द आज डिजिटल रिकार्डर, वीडियो कैमरार्, एमपी 3-4 स्पार्इकैम, मोबार्इलफोन आदि तरह तरह के यंत्र और तकनीक है। जिनके जरिए सार्क्षार्त्कार को रिकार्ड कियार् जार् सकतार् है। हार्लार्ँकि विवार्द होने पर आज भी अनेक मार्मलों में सार्क्षार्त्कार देने वार्लार् रिकार्डेड होने पर भी तथ्यों से मुकर जार्तार् है लेकिन फिर भी आज रिकाडिंर्ग की सुविधार् के कारण सार्क्षार्त्कार की विश्वसनीयतार् बहुत अधिक बढ़ गर्इ है।

समार्चार्र तथार् जनमत के लिए लोगों क सार्क्षार्त्कार : वर्गीकरण एवं प्रकार 

सार्क्षार्त्कार क प्रमुख उद्देश्य पार्ठकों, श्रोतार्ओं अथवार् दर्शकों के लिए समसार्मयिक विषयों, घटनार्ओं, समस्यार्ओं यार् विवार्दों के बार्रे में विस्तृत एवं प्रमार्णिक जार्नकारी उपलब्ध करार्नार् है। सार्क्षार्त्कार के जरिए किसी महत्वपूर्ण व्यक्ति, विषय विशेषज्ञ, विशिष्ट अधिकारी यार् घटनार् के प्रत्यक्षदश्र्ार्ी से सूचनार्एं एकत्र की जार् सकती हैं। सार्क्षार्त्कार के जरिए जनमत क अनुमार्न कियार् जार् सकतार् है और जनमत के लिए लोगों क सार्क्षार्त्कार भी कियार् जार्तार् है। हार्लार्ँकि आज सार्क्षार्त्कार क क्षेत्र बहुत विविधतार्पूर्ण हो गयार् है और इसकी सीमार्एं बहुत व्यार्पक हो गर्इ हैं फिर भी मोटे तौर पर सार्क्षार्त्कार को दो श्रेणियों में बार्ँटार् जार् सकतार् है ।

1. व्यक्तिपरक 

व्यक्तिपरक सार्क्षार्त्कार में जिस व्यक्ति क सार्क्षार्त्कार कियार् जार्तार् है वह व्यक्ति सबसे अधिक महत्वपूर्ण होतार् है। इसमें विषय भी उस व्यक्ति से जुड़ार् हो सकतार् है। लेकिन सार्क्षार्त्कार क मुख्य फोकस व्यक्ति विशेष के जीवन, अभिरूचि, विचार्र, कार्य, उपलब्धि, प्रेरणार् आदि पर केन्द्रित होतार् है। उदार्हरणाथ मर्इ 2010 में सबसे कम उम्र में एवरेस्ट विजय हार्सिल कर वार्पस लौटे भार्रतीय छार्त्र अर्जुन वार्जपेयी क एवरेस्ट विजय के बार्द लियार् गयार् सार्क्षार्त्कार। इस सार्क्षार्त्कार में एवरेस्ट विजय की उपलब्धि क विवरण तो थार् ही, अर्जुन की जीवनशैली, उसकी मेहनत, लगन और उसके जीवन के भार्वी लक्ष्यों क भी उल्लेख थार्।

2.  विषयपरक : 

विषयपरक सार्क्षार्त्कार में विषय को सबसे अधिक महत्व दियार् जार्तार् है । इसमें जिस व्यक्ति क सार्क्षार्त्कार कियार् जार्तार् है उसके व्यक्तित्व के स्थार्न पर उससे सम्बन्धित विषय को प्रमुखतार् दी जार्ती है और पूरार् सार्क्षार्त्कार विषय केन्द्रित होतार् है। उदार्हरण के लिए जून 2010 में कोलकातार् और पश्चिम बंगार्ल के स्थार्नीय निकाय चुनार्वों में तृणमूल कांगे्रस की हैरतअंगेज जीत के बार्द तृणमूल कांगे्रस की नेतार् ममतार् बनर्जी के व्यक्तित्व के बजार्य चुनार्वी नतीजों के प्रभार्व और पश्चिम बंगार्ल की रार्जनीति पर इसके दूरगार्मी असर क विश्लेषण कियार् गयार् थार्।

सार्क्षार्त्कार कर्इ प्रकार के हो सकते हैं। जैसे शैली के आधार्र पर सार्क्षार्त्कार – विवरणार्त्मक, वर्णनार्त्मक, विचार्रार्त्मक और भार्वनार्त्मक आदि हो सकते हैं। इसी तरह मार्ध्यम के आधार्र पर सार्क्षार्त्कार भेंटवातार्, पत्रवातार्, यार् फोनवातार् पर आधार्रित हो सकते हैं। सार्क्षार्त्कार के प्रमुख प्रकारों में पूर्व निर्धार्रित, आकस्मिक, अनौपचार्रिक और सर्वेक्षण सार्क्षार्त्कार शार्मिल हैं।

  1. पूर्व निर्धार्रित : इस तरह के सार्क्षार्त्कार में समय पहले से निर्धार्रित होतार् है । प्रार्य: विषय और स्थार्न भी पूर्व निर्धार्रित होते हैं । कभी-कभी इसमें सार्क्षार्त्कार देने वार्ले को विषय अथवार् पूछे जार्ने वार्ले प्रश्नों की भी जार्नकारी दे दी जार्ती है। अति विशिष्ट व्यक्तियों, बड़े फिल्म कलार्कारों, रचनार्कारों व अन्य कलार्कारों, आदि के सार्क्षार्त्कार इस श्रेणी में आते हैं । 
  2. आकस्मिक सार्क्षार्त्कार : इस तरह के सार्क्षार्त्कार के लिए कुछ भी पूर्व निर्धार्रित नहीं होतार् । जैसे किसी घटनार् से सम्बन्धित कोर्इ व्यक्ति कहीं अचार्नक मिल जार्ए और उससे तत्काल विषय पर बार्तचीत कर ली जार्ए । उदार्हरणाथ मर्इ 2010 में कारगिल युद्ध के बार्रे में हुए एक अदार्लती फैसले के बार्द सेनार् मुख्यार्लय में आ रहे एक वरिष्ठ सैन्य अधिकारी क सार्क्षार्त्कार । कुछ टीवी चैनलों के पत्रकार रार्ष्ट्रपति भवन की ओर जार् रहे थे । इसी बीच उन्हें अदार्लती फैसले की जार्नकारी मिली और तभी उन्हें एक बड़े सैन्य अधिकारी की कार दिखाइ दी । सेनार् मुख्यार्लय में उस अधिकारी के कार से उतरते ही टीवी पत्रकार वहार्ं पहुंच गए और उस सैन्य अधिकारी से सार्क्षार्त्कार कर लियार् । यह सार्क्षार्त्कार उस दिन खूब चर्चार् में रहार् थार्। 
  3. अनौपचार्रिक सार्क्षार्त्कार : इस तरह के सार्क्षार्त्कार में औपचार्रिकतार्एं नहीं होती। किसी खार्स मार्मले पर किसी व्यक्ति विशेष यार् विषय विशेषज्ञ के पार्स जार्कर उससे सार्क्षार्त्कार क प्रस्तार्व कियार् जार्तार् है और उसके रार्जी होने पर बार्तचीत शुरू हो जार्ती है । इसमें समय सीमार् क ध्यार्न रखार् जार्तार् है और प्रार्य: यह विषय केन्द्रित होतार् है । 
  4. सर्वेक्षण सार्क्षार्त्कार : इस तरह के सार्क्षार्त्कार एक प्रकार से जनमत संग्रह क काम भी करते है । पश्चिमी देशों में इस तरीके क प्रयोग अधिक कियार् जार्तार् है। इसमें विषय तो पूर्व निर्धार्रित होतार् है लेकिन प्रश्नों के उत्तर यार् तो तीन चार्र सम्भार्वित उत्तरों में से एक को चुनकर अथवार् प्रश्न क विस्तृत उत्तर प्रार्प्त कर जनमत क रूझार्न तय कियार् जार्तार् है। सर्वेक्षण सार्क्षार्त्कार क इस्तेमार्ल रेडियो और टीवी में अधिक होतार् है । चुनार्वों के नतीजों, मंहगाइ, खेलों में जीत-हार्र, भ्रष्टार्चार्र आदि हर तरह के मार्मलों में इस तरह के सार्क्षार्त्कार पूरे देश की भार्वनार्ओं को समझने में उपयोगी होते हैं । सर्वेक्षण सार्क्षार्त्कार पर आधार्रित समार्चार्र अधिक पढ़े, सुने अथवार् देखे जार्ते हैं । 
  5. पत्रकार सम्मेलन : पत्रकार सम्मेलन भी एक प्रकार क सार्क्षार्त्कार ही है । लेकिन समार्न्य प्रकार के सार्क्षार्त्कार में जहार्ँ एक प्रश्न पूछने वार्लार् और एक उत्तर देने वार्लार् होतार् है, पत्रकार सम्मेलन में सवार्ल पूछने वार्लों की संख्यार् बहुत अधिक होती है और उत्तर देने वार्लों की एक-दो यार् तीन । इसमें सार्क्षार्त्कार देने वार्लार् तय करतार् है कि उसे किस विषय पर और क्यार् बार्त करनी है । हार्लार्ँकि प्रश्न पूछने वार्लों को भी अपनी सुविधार् और जरूरत के मुतार्बिक प्रश्न पूछने क अवसर मिलतार् है।

सार्क्षार्त्कार हेतु पूर्व तैयार्री 

सार्क्षार्त्कार एक ऐसी विधार् है जिसमें प्रश्न पूछने वार्ले की चतुराइ, उसकी व्यार्वहार्रिकतार्, विषय की जार्नकारी और उसक धैर्य बहुत महत्वपूर्ण होतार् है । लेकिन अच्छे सार्क्षार्त्कार के लिए जो बार्त सबसे अधिक जरूरी होती है वह है सार्क्षार्त्कार की तैयार्री । सार्क्षार्त्कार करने वार्ले ने किस तरह की तैयार्री की है उसी पर सार्क्षार्त्कार की सफलतार् निर्भर होती है।

सबसे पहली बार्त जो जरूरी है वह है सार्क्षार्त्कार के लिए व्यक्ति क चयन। जिस विषय पर सार्क्षार्त्कार होनार् है उस विषय के सबसे अधिक जार्नकार और बार्त को सार्फ तरह से कह सकते वार्ले व्यक्ति क चयन सार्क्षार्त्कार को सफल बनार्ने के लिए पहलार् कदम है। व्यक्तिपरक सार्क्षार्त्कार के मार्मले में सार्क्षार्त्कार देने वार्ले क चयन तो स्वत: ही हो जार्तार् है इसलिए इस तरह के सार्क्षार्त्कार में सार्क्षार्त्कार करने वार्ले को अपनी तैयार्री की शुरूआत सार्क्षार्त्कार देने वार्ले के बार्रे में जरूरी जार्नकारी एकत्र करके करनी चार्हिए।

विषय की व्यार्पक जार्नकारी, सार्क्षार्त्कार की तैयार्री क दूसरार् महत्वपूर्ण चरण है। जिस व्यक्ति यार् विषय के विशेषज्ञ से सार्क्षार्त्कार कियार् जार्नार् हो उसके बार्रे में सार्क्षार्त्कारकर्तार् को जितनी अधिक जार्नकारी होगी, उतने ही बेहतर तरीके से वह सार्क्षार्त्कार ले सकेगार्। विषय की जार्नकारी न होने पर सार्क्षार्त्कारकर्तार् अच्छे प्रश्न पूछ ही नहीं सकतार् और ऐसे में सार्क्षार्त्कार के नतीजे भी बेहतर नहीं हो सकते । मसलन अगर शार्स्त्रीय संगीत की किसी बड़ी हस्ती क सार्क्षार्त्कार लेनार् है तो उस व्यक्ति की जीवन यार्त्रार्, उसकी उपलब्धियार्ँ, उसकी खूबियार्ं- खार्सियतें, उसकी कमजोरियार्ँ, संगीत की उस विद्यार् की जार्नकारी आदि सब विषयों के बार्रे में सार्क्षार्त्कारकर्तार् को ज्ञार्न होनार् जरूरी है। ऐसार् ही मौसम, विज्ञार्न, खेल, रार्जनीति अथवार् आर्थिक मार्मलों के सार्क्षार्त्कार में भी होनार् चार्हिए।
विषय के बार्द सार्क्षार्त्कार क स्थार्न भी तैयार्री की दृष्टि से महत्वपूर्ण है। खार्स कर रेडियो और टीवी के लिए होने वार्ले सार्क्षार्त्कारों में सार्क्षार्त्कार की सफलतार् क दार्रोमदार्र काफी हद तक स्थार्न पर निर्भर होतार् है। किसी संगीतकार के सार्क्षार्त्कार के लिए स्टूडियों एक अच्छार् स्थार्न हो सकतार् है जबकि एक खिलार्ड़ी क सार्क्षार्त्कार मैदार्न यार् खेल की पृष्ठभूमि में हो तो वह बेहतर हो सकतार् है। बहुत महत्वपूर्ण विषय पर किसी एक्सक्लूसिव सार्क्षार्त्कार के लिए स्थार्न ऐसार् होनार् चार्हिए जहार्ं बार्तचीत की निरन्तरतार् भंग न हो और आने-जार्ने वार्लों की वजह से व्यवधार्न न हो । कर्इ बार्र व्यवधार्न से सार्क्षार्त्कार की लय बिगड़ जार्ती है और महत्वपूर्ण सवार्लों के उत्तर छूट जार्ते हैं यार् गड़बड़ार् जार्ते हैं।

सार्क्षार्त्कार की तैयार्री क अंतिम चरण है सार्क्षार्त्कार के सार्धन। पत्र-पत्रिकाओं के सार्क्षार्त्कार के लिए पैन-नोटबुक के अलार्वार् रिकाडिंर्ग के लिए उपयुक्त उपकरण जरूरी हैं तो रेडियो और टेलीविजन के सार्क्षार्त्कारों के लिए ऑडियो-वीडियो रिकार्डिंग के उपकरण, मार्इक आदि को पहले से जार्ंच-परख लियार् जार्नार् जरूरी है तार्कि ऐन मौके पर चूक न हो जार्ए। टेप यार् रिकार्डिंग की अन्य जरूरी सार्मग्री को भी सार्क्षार्त्कार से पूर्व भलीभार्ंति जार्ंच लेनार् जरूरी है।

सार्क्षार्त्कार की तकनीक 

सार्क्षार्त्कार जनसंचार्र की एक महत्वपूर्ण विधार् है तो यह पत्रकारितार् क एक कलार्रूप भी है। एक अच्छे सार्क्षार्त्कारकर्तार् की तुलनार् शब्दों, भार्वनार्ओं और जार्नकारियों के एक कलार्कार से की जार् सकती है जो अपनी कलार् द्वार्रार् सार्क्षार्त्कार देने वार्ले के काम और व्यक्तित्व को निखार्र सकतार् है।

सार्क्षार्त्कार की तकनीक क सबसे अहम पहलू यह है कि उसमें प्रश्न पूछने वार्ले क व्यक्तित्व हार्वी न हो । सार्क्षार्त्कारकर्तार् को बेहद सहज होनार् चार्हिए । उसे इस बार्त क खार्स ध्यार्न रखनार् चार्हिए कि उसकी अपनी विचार्रधार्रार् यार् मार्न्यतार् अथवार् स्थार्पनार् सार्क्षार्त्कार देने वार्ले पर थोपी न जार्ए । उसे जवार्ब देने वार्ले को पूरार् अवसर देनार् चार्हिए । इस बार्त क ध्यार्न रखनार् चार्हिए कि सार्क्षार्त्कार प्रश्न-उत्तर के रूप में ही हो न कि बहस के रूप में । प्रश्न भी छोटे और स्पष्ट होने चार्हिए तार्कि उनके उत्तर भी स्पष्ट मिल सकें । बहुत लम्बार् प्रश्न होने से यार् प्रश्न के सार्थ विषय की व्यार्ख्यार् होने से असल प्रश्न गुम हो जार्ते हैं और निरर्थक उत्तर मिलने लगते हैं । इसी तरह प्रश्न अगर ऐसे हों कि उनक जवार्ब हार्ँ यार् नार् में ही दियार् जार् सकतार् हो तो वह भी सार्क्षार्त्कार के लिहार्ज से अधिक लार्भप्रद नहीं होतार् । इस तरह के प्रश्न सिर्फ सर्वेक्षण सार्क्षार्त्कार में ही उपयोगी होते हैं ।

सार्क्षार्त्कार देने वार्ले क सम्मार्न भी जरूरी है। उसक सम्मार्न होने से एक तरह क विश्वार्स बढ़तार् है और प्रश्नों के सहज उत्तर मिलने की सम्भार्वनार् बढ़ जार्ती है । कभी भी सार्क्षार्त्कार क आरम्भ कठिन प्रश्नों से नहीं होनार् चार्हिए । व्यक्तिपरक सार्क्षार्त्कार में इस बार्त क खार्स ध्यार्न रखार् जार्नार् चार्हिए कि उस व्यक्ति के व्यक्तित्व के अधिक से अधिक पहलू उजार्गर हो सकें । कर्इ बार्र किसी अभियुक्त यार् किसी घार्घ रार्जनेतार् के सार्क्षार्त्कार में प्रश्नों को घुमार् फिरार् कर पूछने से भी मनमुतार्बिक उत्तर प्रार्प्त किए जार् सकते हैं लेकिन इसके लिए यह जरूरी है कि जवार्ब पूरे धैर्य से सुने जार्ंए । कर्इ बार्र उत्तरों से ही बार्त आगे बढ़ जार्ती है, लेकिन सार्क्षार्त्कारकर्तार् के दिमार्ग में प्रश्नों क खार्क एकदम सार्फ होनार् चार्हिए तार्कि प्रश्नों के अभार्व में सार्क्षार्त्कार के तार्रतम्य गड़बड़ार् न जार्ए । सार्क्षार्त्कारकर्तार् क व्यक्तित्व, प्रश्न पूछने की विनम्र शैली, उसकी सतर्क दृष्टि, व्यवहार्र कुशलतार् और वार्ार्क पटुतार् से सार्क्षार्त्कार देने वार्ले के मन के गूढ़ रहस्य भी आसार्नी से बार्हर आ जार्ते हैं । रेडियो और टीवी के सार्क्षार्त्कारों में जहार्ं समय सीमार् बेहद महत्वपूर्ण होती है, वहीं यह बार्त भी बहुत जरूरी है कि प्रश्नकर्तार् के प्रश्न विषय पर एकदम केन्द्रित हों, तार्कि अनार्वश्यक रूप से समय व्यर्थ न हो और जरूरत के मुतार्बिक सही उत्तर “ार्ीघ्र मिल सकें। यदि जवार्ब देने वार्लार् व्यक्ति विषय से भटक रहार् हो और बार्तचीत की दिशार् गड़बड़ार् रही हो, तब भी प्रश्न करने वार्ले में यह क्षमतार् होनी चार्हिए कि वो तत्काल बार्तचीत क सूत्र अपने हार्थ में लेकर हस्तक्षेप करे और पुन: सार्क्षार्त्कार को पटरी पर ले जार्ए।

सार्क्षार्त्कार की तकनीक क सबसे अहम पहलू यह है कि उसमें प्रश्न पूछने वार्ले क व्यक्तित्व हार्वी न हो । सार्क्षार्त्कारकर्तार् को बेहद सहज होनार् चार्हिए । उसे इस बार्त क खार्स ध्यार्न रखनार् चार्हिए कि उसकी अपनी विचार्रधार्रार् यार् मार्न्यतार् अथवार् स्थार्पनार् सार्क्षार्त्कार देने वार्ले पर थोपी न जार्ए । उसे जवार्ब देने वार्ले को पूरार् अवसर देनार् चार्हिए । इस बार्त क ध्यार्न रखनार् चार्हिए कि सार्क्षार्त्कार प्रश्न-उत्तर के रूप में ही हो न कि बहस के रूप में । प्रश्न भी छोटे और स्पष्ट होने चार्हिए तार्कि उनके उत्तर भी स्पष्ट मिल सकें ।
यह भी जरूरी है कि सार्क्षार्त्कारकर्तार् स्वयं अधिक न बोले । उसक प्रयोजन यह होनार् चार्हिए कि जिस व्यक्ति क सार्क्षार्त्कार लियार् जार् रहार् है वह विषय और प्रश्नों में दिलचस्पी ले । सार्क्षार्त्कार की तकनीक क मूल मंत्र यह है कि प्रश्नकर्तार् एक उत्पे्ररक की तरह काम करे और सार्क्षार्त्कार देने वार्ले को इस तरह मंत्र मुग्ध कर ले कि वह सार्री जरूरी जार्नकारी संगीत की लहर की तरह सिलसिलेवार्र देतार् चलार् जार्ए । ।

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