समार्चार्र के प्रकार Types of Samachar/Newspapar kya he

समार्चार्र के प्रकार Types of Samachar/Newspapar kya he

समार्चार्र क्यार् है? समार्चार्र की संरचनार्, समार्चार्र के तत्व, समार्चार्र बनने योग्य तत्व, समार्चार्र लेखन की प्रकियार् एवं भार्षार् एवं शैली जार्नने के बार्द समार्चार्र के प्रकार के बार्रे में जार्ननार् अत्यंत जरूरी है क्योंकि कर्इ प्रकार की घटनार्ए इस संसार्र में रोज घटती है। उनमे से कुछ घटनार्ए समार्चार्र बनती है और इस प्रकार कर्इ तरह के समार्चार्र हम रोज पढ़ते और सुनते हैं। कर्इ बार्र इन समार्चार्रो की प्रस्तुति के ढंग में भी अंतर होतार् है। एक पत्रकार और समार्चार्र लेखक के लिए इस प्रकार के समार्चार्रो के बार्रे में जार्ननार् आवश्यक है।

दूसरी बार्त यह कि आज की दुनियार् मे पत्रकारितार् क क्षेत्र बहुत व्यार्पक हो गयार् है। शार्यद ही कोर्इ क्षेत्र बचार् हो जिस पर कोर्इ समार्चार्र नहीं बनार् हो। बदलती दुनियार्, बदलते सार्मार्जिक परिदृश्य, बदलते बार्जार्र, बार्जार्र के आधार्र पर बदलते शैक्षिक- सार्ंस्कृतिक परिवेश और सूचनार्ओं के अम्बार्र ने समार्चार्रो में विविधतार् लार् दियार् है। कभी उंगलियो पर गिन लिये जार्ने वार्ले समार्चार्र के प्रकारों को अब पूरी तरह गिन पार्नार् संभव नहीं है। एक बहुत बड़ार् सच यह है कि इस समय सूचनार्ओ क एक बहुत बड़ार् बार्जार्र विकसित हो चुक है। इस नये नवेले बार्जार्र मे समार्चार्र उत्पार्द क रूप लेतार् जार् रहार् है। समार्चार्र पत्र हों यार् चैनल खार्स और एक्सक्लूसिव बतार्कर समार्चार्र को पार्ठको यार् दशर्कों तक पहुंचार्ने की होड़ ठीक उसी तरह है, जिस तरह किसी कम्पनी द्वार्रार् अपने उत्पार्द को अधिक से अधिक उपभेक्तार्ओं तक पहुंचार्नार्। इस तरह समार्चार्र के कर्इ प्रकार बनते जार् रहे हैं। घटनार् के महत्व, अपेक्षिततार्, अनपेक्षिततार्, विषय क्षेत्र, समार्चार्र क महत्व, संपार्दन हेतु प्रार्प्त समार्चार्र, प्रकाशन स्थार्न, समार्चार्र प्रस्तुत करने क ढंग आदि कर्इ आधार्रों पर समार्चार्रो क विभार्जन, महत्तार् व गौणतार् क अंकन कियार् जार्तार् है। उसके आधार्र पर समार्चार्रो क प्रकाशन कर उसे पूर्ण महत्वपूर्ण व सार्मयिक बनार्यार् जार् सकतार् है।

प्रकाशन स्थार्न के आधार्र पर समार्चार्र के प्रकार

प्रकाशन के आधार्र पर समार्चार्र  चार्र प्रकार में बार्ंटार् जार् सकतार् है-

  1. स्थार्नीय समार्चार्र, 
  2. प्रार्देशिक यार् 
  3. क्षेत्रीय,
  4. रार्ष्ट्रीय और अंतर्रार्ष्ट्रीय

1. स्थार्नीय समार्चार्र-

संचार्र क्रार्ंति के बार्द परिवहन के विकास के सार्थ ही समार्चार्र पत्रो द्वार्रार् एक ही सार्थ कर्इ संस्करणो क प्रकाशन हो रहार् है। यह सभी गार्ंव यार् कस्बे, जहार्ं से समार्चार्र पत्र क प्रकाशन होतार् हो, स्थार्नीय समार्चार्र, जो कि स्थार्नीय महत्व आरै क्षेत्रीय समार्चार्र पत्रो की लोकप्रियतार् को बढार्ने में सहार्यक हो को स्थार्न दियार् जार् रहार् है। यह कवार्यद स्थार्नीय बार्जार्र मे अपनी पैठ बनार्ने की भी है, तार्कि स्थार्नीय छोटे-छोटे विज्ञार्पन भी आसार्नी से प्रार्प्त किये जार् सके। इसी तरह समार्चार्र चैनलो में भी स्थार्नीयतार् को महत्व दियार् जार्ने लगार् है। कर्इ समार्चार्र चैनल समार्चार्र पत्रो की ही तरह अपने समार्चार्रों को स्थार्नीय स्तर पर तैयार्र करके प्रसार्रित कर रहे हैं। वे छोटे-छोटे आयोजन यार् घटनार्क्रम, जो समार्चार्रो के रार्ष्ट्रीय चैनल पर बमुश्किल स्थार्न पार्ते थ,े अब सरलतार् से टीवी स्क्रीन पर प्रसार्रित होते दिख जार्ते हैं। यह कहार् जार् सकतार् है कि आने वार्ले दिनों में स्थार्नीय स्तर पर समार्चार्र चैनल संचार्लित करने की होड़ मचने वार्ली है।

2. प्रार्देशिक यार् क्षेत्रीय समार्चार्र-

जैसे-जैसे समार्चार्र पत्र व चैनलो क दार्यरार् बढतार् जार् रहार् है, वैसे-वैसे प्रार्देशिक व क्षेत्रीय समार्चार्रो क महत्व भी बढ रहार् है। एक समय थार् कि समार्चार्र पत्रो के रार्ष्ट्रीय संस्करण ही प्रकाशित हुआ करते थे धीरे-धीरे प्रार्ंतीय संस्करण निकलने लगे और अब क्षेत्रीय व स्थार्नीय संस्करण निकाले जार् रहे हैं। किसी प्रदेश के समार्चार्र पत्रो पर ध्यार्न दे तार्े उसके मुख्य पृष्ठ पर प्रार्ंतीय समार्चार्रों की अधिकतार् रहती है। प्रार्ंतीय समार्चार्रो के लिये प्रदेश शीर्षक नार्म से पृष्ठ भी प्रकाशित किये जार्ते हैं। इसी तरह से पश्चिमार्ंचल, पूवांचल, मार्रवार्ड़ यार् फिर बिहार्र, झार्डखंड, रार्जस्थार्न, कोलकत्तार्, उत्तरप्रदेष शीर्षक से पृष्ठ तैयार्र करके क्षेत्रीय समार्चार्रो को प्रकाशित कियार् जार्ने लगार् है। प्रदेश व क्षेत्रीय स्तर के एसे समार्चार्रो को प्रमुखतार् से प्रकाशित करनार् आवश्यक होतार् है, जो उस प्रदेश व क्षेत्र की अधिसंख्य जनतार् को प्रभार्वित करते हों। कुछ समार्चार्र चैनलो ने भी क्षेत्रीय व प्रार्देशिक समार्चार्रो को अलग से प्रस्तुत करनार् शुरू कर दियार् है।

3. रार्ष्ट्रीय समार्चार्र-

देश मे हो रहे आम चुनार्व, रेल यार् विमार्न दुर्घटनार्, प्रार्‟तिक आपदार्- बार्ढ, अकाल, महार्मार्री, भूकम्प आदि, रेल बजट, वित्तीय बजट से संबंधित समार्चार्र, जिनक प्रभार्व अखिल देशीय हो रार्ष्ट्रीय समार्चार्र कहलार्ते हैं। रार्ष्ट्रीय समार्चार्र स्थार्नीय आरै प्रार्ंतीय समार्चार्र पत्रो में भी विशेष स्थार्न पार्ते हैं। रार्ष्ट्रीय स्तर पर घट रही हर घटनार्, दुर्घटनार् समार्चार्र पत्रो व चैनलो पर महत्वपूर्ण स्थार्न पार्ती है। देश के दूर-दरार्ज इलार्के में रहने वार्लार् सार्मार्न्य सार् आदमी भी यह जार्ननार् चार्हतार् है कि रार्ष्ट्रीय रार्जनीति कौन सी करवट ले रही है, केन्द्र सरकार क कौन सार् फैसलार् उसके जीवन को प्रभार्वित करने जार् रहार् है, देश के किसी भी कोने में घटने वार्ली हर वह घटनार् जो उसके जैसे करोड़ों को हिलार्कर रख देगी यार् उसके जसै करोड़ों लोगो की जार्नकारी में आनार् जरूरी है। सच यह है कि इलेक्ट्रार्निक मीडियार् के प्रचार्र प्रसार्र ने लोगो को समार्चार्रो के प्रति अत्यधिक जार्गरुक बनार्यार् है। हार्ल यह है कि किसी भी रार्ष्ट्रीय महत्व की घटनार्-दुर्घटनार् यार् फिर समार्चार्र बनने लार्यक बार्त को कोर्इ भी छोड़ देने को तैयार्र नहीं है, न इलेक्ट्रार्निक मीडियार् और न ही प्रिंट मीडियार्। यही वजह है कि समार्चार्र चैनल जहार्ं रार्ष्ट्रीय समार्चार्रो को अलग से प्रस्तुत करने की कवार्यद में शार्मिल हो चुके हैं, वहीं बहुतेरे समार्चार्र पत्र मुख्य व अंतिम कवर पृष्ठ के अतिरिक्त रार्ष्ट्रीय समार्चार्रो के दो-तीन पृष्ठ अलग से प्रकाशित कर रहे हैं।

4. अंतर्रार्ष्ट्रीय समार्चार्र-

ग्लोबल गार्ंव की कल्पनार् को सार्कार कर देने वार्ली सूचनार् क्रार्ंति के बार्द इस समय मे अंतर्रार्ष्ट्रीय समार्चार्रो को प्रकाशित यार् प्रसार्रित करनार् जरूरी हो गयार् है। सार्धार्रण से सार्धार्रण पार्ठक यार् दर्शक भी यह जार्ननार् चार्हतार् है कि अमेरिक मे रार्ष्ट्रपति के चुनार्व क परिणार्म क्यार् रहार् यार् फिर हार्लीवुड मे इस मार्ह कौन सी फिल्म रिलीज होने जार् रही है यार् फिर आतंकवार्दी संगठन आर्इएसआर्इएस क्यार् क्यार् कर रहार् है। विश्वभर के रोचक एवं रोमार्ंचक घटनार्ओ को जार्नने के लिये अब हिदी आरै अन्य क्षेत्रीय भार्षार्ओ के पार्ठको और दर्शको में ललक बढी है। यही कारण है कि यदि समार्चार्र चैनल ‘दुनियार् एक नजर’ में यार् फिर ‘अंतर्रार्ष्ट्रीय समार्चार्र’ प्रसार्रित कर रहे हैं तो हिन्दी के प्रमुख अखबार्रो ने ‘अरार्उण्ड द वल्र्ड’, ‘देश-विदेश’, ‘दुनियार्’ आदि के शीर्षक से परू ार् पृष्ठ देनार् शुरू कर दियार् है। समार्चार्र पत्रो व चैनलों के प्रमुख समार्चार्रो की फेहरिस्त में कोर्इ न कोर्इ महत्वपूर्ण अंतर्रार्ष्ट्रीय समार्चार्र रहतार् ही है।

इटंरनेट पर तैरती ये वबे सार्इटें कर्इ मार्यने में अति महत्वपूर्ण होती है। सच यह है कि जैसे-जैसे देश मे सार्क्षरतार् बढ रही है, वैसे-वैसे अधिक से अधिक लोगो में विश्व भर को अपनी जार्नकारी के दार्यरे में लार्ने की हार्डे़ मच गर्इ है। यही वजह है कि समार्चार्र से जुड़ार् व्यवसार्य अब अंतर्रार्ष्ट्रीय समार्चार्रो को अधिक से अधिक आकर्षक ढंग से प्रस्तुत करने की होड़ में शार्मिल हो गयार् है।

विषय विशेष के आधार्र पर

निरंतर बदलती दुनियार् ने समार्चार्रों के लिये विषयो की भरमार्र कर दी है। पहले जहार्ं मार्त्र रार्जनीति के समार्चार्र, अपरार्ध के समार्चार्र, खेल-कूद के समार्चार्र, सार्हित्य-संस्‟ति के समार्चार्र से ही समार्चार्र पत्रो क काम चल जार्यार् करतार् थार्, वहीं अब सूचनार् क्रार्ंति, बदलते शैक्षिक परिवेश और बदलते सार्मार्जिक तार्ने-बार्ने ने समार्चार्रो के लिये ढेरों विषय पैदार् कर दिये हैं। देश में बढ रही सार्क्षरतार् व जार्गरुकतार् ने भी समार्चार्रों के वैविध्य को बढार् दियार् है। अब कोर्इ भी समार्चार्र पत्र यार् चैनल समार्चार्रो के वैविध्य को अपनार्ये बिनार् चल ही नहीं सकतार्। मल्टीप्लेक्स और मल्टी टेस्ट रेस्त्रार्ं के इस समय में पार्ठक-दर्शक वह सब कुछ पढनार्-सुननार्-देखनार् चार्हतार् है, जो उसके इर्द-गिर्द घट रहार् है। उसे हर उस विषय से जुड़ी तार्जार् जार्नकारी चार्हिए, जो सीधे यार् फिर परोक्ष रूप से उससे जुड़ी हुर्इ है। जमार्नार् मार्ंग और आपूर्ति के बीच सही तार्लमेल बैठार्कर चलने क है और यही वजह है कि कोर्इ भी समार्चार्र पत्र यार् चैनल ऐसार् कुछ भी छोड़ने को तैयार्र नहीं है, जो उसके पार्ठक यार् दर्शक की पसंद हो सकती है। दिख रहार् है सब कुछ के इस समय में वे विषय भी समार्चार्र बन रहे हैं, जिनकी चर्चार् सभ्य समार्ज में करनार् वर्जित मार्नार् जार्तार् रहार् है।

विषय विशष के आधार्र पर हम समार्चार्रो को निम्नलिखत प्रकारो में विभार्जित कर सकते हैं –

(1) रार्जनीतिक समार्चार्र, (2) अपरार्ध समार्चार्र, (3) सार्हित्यिक-सार्ंस्‟तिक समार्चार्र, (4) खेल-कूद समार्चार्र, (5) विधि समार्चार्र, (6) विकास समार्चार्र, (7) जन समस्यार्त्मक समार्चार्र (8) शैक्षिक समार्चार्र, (9) आर्थिक समार्चार्र, (10) स्वार्स्थ्य समार्चार्र, (11) विज्ञार्पन समार्चार्र, (12) पर्यार्वरण समार्चार्र, (13) फिल्म-टेलीविजन (मनोरंजन) समार्चार्र, (14) फैशन समार्चार्र, (15) सेक्स समार्चार्र, (16) खोजी समार्चार्र आदि। उपरोक्त विषय विशेष के आधार्र समार्चार्र के बार्रे में विस्तृत चर्चार् इकार्इ-2 के पत्रकारितार् के प्रकार में की गर्इ है।

घटनार् के महत्व के आधार्र पर 

घटनार् के महत्व के आधार्र पर दो प्रकार के हो सकते हैं-

  1. विशिष्ट समार्चार्र, 
  2. व्यार्पी समार्चार्र।

1. विशिष्ट समार्चार्र-

यह वह समार्चार्र होते हैं जिनके बार्रे में पहले से कुछ भी मार्लूम नहीं होतार् है, परंतु वे समार्चार्र गरमार्गरम और अद्यतन होते हैं। विशिष्ट समार्चार्र अपनी विशिष्टतार्, विशेषतार् और खूबी के कारण ही समार्चार्र पत्र के मख्य पृष्ठ पर स्थार्न पार्ने योग्य होते हैं। रेल यार् विमार्न की बड़ी दुर्घटनार्, किसी महत्वपूर्ण व्यक्ति के असार्मयिक निधन सम्बन्धी समार्चार्र इसी कोटी मे आते हैं।

2. व्यार्पी समार्चार्र-

वे  समार्चार्र जिनक प्रभार्व विस्तृत हो अर्थार्त जो बहुसंख्यक लोगो को प्रभार्वित करने वार्ले तथार् आकार में भी विस्तृत हो, व्यार्पी समार्चार्र कहलार्ते हैं। ये समार्चार्र अपने आप में पूर्णहोते हैं और समार्चार्र पत्र के प्रथम पृष्ठ पर छार्ये रहते हैं। इनके शीर्षक अत्यधिक आकर्षक और विशेष रूप से सुशोभित होते हैं, तार्कि ये अधिकाधिक लोगो को अपनी आरे आकृष्ट कर सके। इसके अंतर्गत रेल बजट, वित्तीय बजट, आम चुनार्व आदि से संबंधित समार्चार्र आते हैं।

अपेक्षिततार्-अनपेक्षिततार् के आधार्र पर

अपेक्षित-अनपेक्षितार् के आधर पर समार्चार्र के दो प्रकार होते हैं-

  1. डार्यरी समार्चार्र और 
  2. सनसनीखेज समार्चार्र।

1. डार्यरी समार्चार्र-

विविध समार्रोह गोष्ठियो, जन-सभार्ओ, विधार्नसभार्ओं, विधार्न परिषदो, लोकसभार्, रार्ज्यसभार् आदि के समार्चार्र जो अपेक्षित होते हैं और सुनियोजित ढंग से प्रार्प्त होते हैं, डार्यरी समार्चार्र कहलार्ते हैं।

2. सनसनीखेज समार्चार्र-

हत्यार्, दुर्घटनार्, प्रार्‟तिक विपदार्, रार्जनीतिक अव्यवस्थार् आदि से संबंधित समार्चार्र जो अनपेक्षित होते हैं और आकस्मिक रूप से घट जार्ते हैं, सनसनीखेज समार्चार्र कहलार्ते हैं।

समार्चार्र के महत्व के आधार्र पर

समार्चार्र के महत्व के आधार्र पर समार्चार्र के तीन प्रकार के हो सकते हैं-

  1. महत्वपूर्ण, 
  2. कम महत्वपूर्ण और 
  3. सार्मार्न्य महत्व के समार्चार्र

1. महत्वपूर्ण समार्चार्र-

बड़े पैमार्ने पर दंगार्, अपरार्ध, दुर्घटनार्, प्रार्‟तिक विपदार्, रार्जनीतिक उठार्पटक से संबंधित समार्चार्र, जिनसे जन-जीवन प्रभार्वित होतार् हो और जिनमें शीघ्रतार् अपेक्षित हो, महत्वपूर्ण समार्चार्र कहलार्ते हैं।

2. कम महत्वपूर्ण समार्चार्र-

जार्तीय, सार्मार्जिक, व्यार्वसार्यिक एव रार्जनीतिक संस्थार्ओ, संगठनो तथार् दलो की बैठके, सम्मले न, समार्रोह, प्रदर्शन, जुलूस, परिवहन तथार् माग दुर्घटनार्एं आदि से संबंधित समार्चार्र, जिनसे सार्मार्न्य जनजीवन न प्रभार्वित होतार् है और जिनमें अतिशीघ्रतार् अनपेक्षित हो, कम महत्वपूर्ण समार्चार्र कहलार्ते हैं।

3. सार्मार्न्य महत्व के समार्चार्र-

आतंकवार्दियो व आततार्यियो के कुकर्म, छेड़छार्ड़, मार्रपीट, पार्कटे मार्री, चोरी, ठगी, डकैती, हत्यार्, अपहरण, बलार्त्कार के समार्चार्र, जिनक महत्व सार्मार्न्य हो और जिनके अभार्व में कोर्इ ज्यार्दार् फर्क न पड़तार् हो तथार् जो सार्मार्न्य जनजीवन को प्रभार्वित न करते हों, सार्मार्न्य महत्व के समार्चार्र कहलार्ते हैं।

सम्पार्दन के लिये प्रस्तुत समार्चार्र के आधार्र पर

सम्पार्दन के लिये प्रस्तुत समार्चार्र के आधार्र पर समार्चार्र के पार्ंच प्रकार के हो सकते हैं-

  1. पूर्ण समार्चार्र
  2. अपूर्ण समार्चार्र
  3. अर्ध विकसित समार्चार्र
  4. परिवर्तनशील समार्चार्र
  5. बड़े अथवार् व्यार्पी समार्चार्र

1. पूर्ण समार्चार्र-

वे समार्चार्र जिनके तथ्यों, सूचनार्ओं, विवरणो आदि मे दोबार्रार् किसी परिवर्तन की गुंजार्इश न हो, पूर्ण समार्चार्र कहलार्ते हैं। पूर्ण समार्चार्र होने के कारण ही इन्हें निश्चिंततार् के सार्थ संपार्दित व प्रकाशित कियार् जार्तार् है।

2. अपूर्ण समार्चार्र-

वे समार्चार्र जो समार्चार्र एजेंसियों से एक से अधिक हिस्सो में आते हैं और जिनमें जार्री लिखार् होतार् है, अपूर्ण समार्चार्र कहलार्ते हैं। जब तक इन समार्चार्रो क अंतिम भार्ग प्रार्प्त न हो जार्ये ये अपूर्ण रहते हैं।

3. अर्ध विकसित समार्चार्र-

दुर्घटनार्, हिंसार् यार् किसी महत्वपूर्ण व्यक्ति क निधन आदि के समार्चार्र, जोकि जब और जितने प्रार्प्त होते हैं उतने ही, उसी रूप मे ही दे दिये जार्ते हैं तथार् जैसे-जैसे सूचनार् प्रार्प्त होती है और समार्चार्र संकलन कियार् जार्तार् है वैसे-वैसे विकसित रूप में प्रकाशित किये जार्ते हैं, अर्ध विकसित समार्चार्र कहलार्ते हैं।

4. परिवर्तनशील समार्चार्र-

प्रार्‟तिक विपदार्, आम चुनार्व, बड़ी दुर्घटनार्, किसी महत्वपूर्ण व्यक्ति की हत्यार् जैसे समार्चार्र, जिनके तथ्यो, सूचनार्ओं तथार् विवरणो में निरंतर परिवर्तन व संशोधन की गुंजार्इश हो, परिवर्तनशील समार्चार्र कहलार्ते हैं।

5. बड़े अथवार् व्यार्पी समार्चार्र-

आम चुनार्व, केन्द्र सरकार क बजट, रार्ष्ट्रपति क अभिभार्षण जैसे समार्चार्र, जो व्यार्पार्क, असरकारी व प्रभार्वकारी होते हैं तथार् जिनके विवरणो में विस्तार्र व विविधतार् होती है और जो लगभग समार्चार्र पत्र के प्रथम पृष्ठ क पूरार् ऊपरी भार्ग घेर लेते हैं, बड़े अथवार् व्यार्पी समार्चार्र कहलार्ते हैं।

समार्चार्र प्रस्तुत करने के आधार्र पर

स्मार्चार्र प्रस्तुत करने के आधार्र पर समार्चार्र के दो प्रकार होते हैं-

  1. सीधे समार्चार्र और 
  2. व्यार्ख्यार्क्तक समार्चार्र

1. सीधे समार्चार्र-

वे समार्चार्र जिनमे तथ्यों की व्यार्ख्यार् नहीं की जार्ती हो, उनके अर्थ नहीं बतार्ये जार्ते हों तथार् तथ्यों को सरल, स्पष्ट और सही रूप मे ज्यो क त्यो प्रस्तुत कियार् जार्तार् हो, सीधे समार्चार्र कहलार्ते हैं।

2. व्यार्ख्यार्त्मक समार्चार्र-

वे समार्चार्र जिनमें घटनार् के सार्थ ही सार्थ पार्ठकों को घटनार् के परिवेश, घटनार् के कारण और उसके विशेष परिणार्म की पूरी जार्नकारी दी जार्ती हो, व्यार्ख्यार्त्मक समार्चार्र कहलार्ते हैं।

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