संचार्र मार्ध्यम और उनके प्रकार

आजकल मीडियार् शब्द क खूब प्रयोग होने लगार् है। आम बोलचार्ल में भी लोग इसक इस्तेमार्ल करने लगे है। क्यार् आप बतार् सकते है कि मीडियार् है क्यार्? जी, अखबार्र, रेडियों, टेलीविजन, फोन, इंटरनेट आदि को मीडियार् की श्रेणी में रखार् जार्तार् है। मीडियार् क अर्थ होतार् है संचार्र मार्ध्यम। क्यार् कभी आपने इस बार्त पर विचार्र कियार् है कि संचार्र मार्ध्यमों क हमार्रे जीवन में क्यार् महत्व है? आइये हम इस लेख के मार्ध्यम से संचार्र मार्ध्यमों के बार्रे में जार्नते है। ये कितने प्रकार के होते है और हमार्रे लिए इनकी क्यार् उपयोगितार् है।

संचार्र मार्ध्यम क महत्व 

किसी भी सूचनार्, विचार्र यार् भार्व को दूसरों तक पहुँचार्नार् ही मोटे तौर पर संचार्र यार् कम्युनिकेशन कहलार्तार् है। एक सार्थ लार्खों-करोड़ों लोगों तक एक सूचनार् को पहुँचार्नार् ही संचार्र यार् जनसंचार्र यार् मार्स कम्युनिकेशन मीडियार् कहलार्तार् है। मार्नव सभ्यवार् के विकास में संचार्र की महत्वपूर्ण भूमिक रही है। वैसे तो सभ्यतार् के विकास के सार्थ ही मुनष्य किसी न किसी रूप में संचार्र करतार् रहार् है। जब आज की तरह टेलीफोन, इंटरनेट आदि की सुविधार्एं नहीं थी, तब लोग चिट्ठी लिख कर अपनार् हार्ल-समार्चार्र लोगों तक पहुँचार्ते और दूसरे क समार्चार्र जार्नते थे। आपको यह जार्न कर हैरार्नी होगी कि चिट्ठी लिखने क प्रचलन भी बहुत पुरार्नार् नही है। जब डार्क व्यवस्थार् नहीं थी तब लोग संदेश भेजने वार्लों जिन्हें संवदियार् कहार् जार्तार् थार्, के मार्ध्यम से एक गार्ंव से दूसरे गार्ंव तक संदेश भेजते यार् मंगार्ते थे।

पुरार्ने समय में रार्जार् के हरकारे पैदल यार् घोड़े की सवार्री करते हुए रार्जार् के संदेश रार्जधार्नी से दूसरी जगहों पर ले जार्ते और वहार्ं से ले आते थे। आपने यह भी कर्इ कहार्नियों में सुनार् होगार् कि लोग कबूतरों के जरिए अपनार् संदेश भेजार् करते थे। यही व्यवस्थार् बार्द में एक सरकारी विभार्ग डार्क-विभार्ग-बनार्कर सबके लिए सुलभ कर दी गर्इ थी। अब हर कोर्इ एक निश्चित शुल्क देकर अपनार् संदेश एक स्थार्न से दूसरे स्थार्न तक आसार्नी से भेज सकतार् है। अब तो डार्क व्यवस्थार् में इतने आधुनिक उपकरणों क इस्तेमार्ल कियार् जार्ने लगार् है संदेश तार्र के जरिए पलक झपकते एक स्थार्न से दूसरे स्थार्न तक पहुंचार् दियार् जार्तार् है। क्यार् आप जार्नते है। कि तार्र जिस मशीन से भेजार् जार्तार् है उसक ही विकसित रूप टेलीप्रिंटर कहार् जार्तार् है। इसके अलार्वार् फैक्स, र्इ-मेल के जरिए पलक झपकते सूचनार्ओं क आदार्न-प्रदार्न कियार् जार् सकतार् है। इन उपकरणों के आ जार्ने से सिर्फ डार्क प्रणार्ली में नहीं बल्कि संचार्र मार्ध्यमों को सूचनार्एं इकट्ठी करने और प्रसार्रित करने में भी काफी सुविधार् हुर्इ है। इन उपकरणों के बार्रे में हम पहले पढ़ चुके है।

संचार्र क अर्थ सिर्फ व्यक्ति क अपनार् हार्ल-समार्चार्र दूसरों तक पहुंचार्ने तक सीमित नहीं है। हर व्यक्ति अपने यार् अपने संबंधियों की सूचनार्एं जार्नने के अलार्वार् देश-दुनियार् की खबरों के बार्रे में जार्नने क इच्छुक होतार् है। उसके आस-पार्स क्यार् हो रहार् है, दुनियार् में कहों क्यार् घटनार् घट रही है, सबकी जार्नकारी प्रार्प्त करनार् चार्हतार् है। सूचनार्ओं की इसी भूख के चलते संचार्र मार्ध्यमों क लगार्तार्र विकास और विस्तार्र होतार् गयार्। आज अमेरिक में रार्ष्ट्रपति क चुनार्व होतार् है यार् र्इरार्क में लड़ाइ छिड़ती है तो हर किसी की निगार्ह उस ओर लगी रहती है कि वहार्ं क्यार् हो रहार् होतार् है। वह हर पल की खबरें जार्ननार् चार्हतार् है। अगर आस्ट्रेलियार् में क्रिकेट मैच हो रहार् होतार् है तो आपकी जिज्ञार्सार् लगार्तार्र बनी रहती है कि किस टीम की क्यार् स्थिति चल रही है। इसी तरह तो लोग व्यवसार्य यार् किसी व्यार्पार्र से जुड़े हैं यार् शिक्षार् संबंधी जार्नकारी चार्हते है उनके लिए भी हर पल बार्जार्र में वस्तुओं की कीमतों और शेयरों के उतार्र-चढ़ार्व की खबरें जार्ननार् जरूरी होतार् है, दुनियार् में शिक्षार् के क्षेत्र में हो रहे प्रयोग के बार्रे में जार्नने की जिज्ञार्सार् रहती है। किसार्नों को मौसम और खेती में इस्तेमार्ल होने वार्ली नर्इ तकनीक की जार्नकारी काफी मद्दगार्र सार्बित होती है। जरार् सोचिए, अगर, अखबार्र, रेडियो, दूरदर्शन, मोबार्इल जैसे संचार्र मार्ध्यम न होते तो क्यार् ये सूचनार्एं आप तक पहुंच पार्ती।

अब संचार्र की बढ़ती जरूरतों को देखते हुए तरह-तरह के संचार्र मार्ध्यमों क विकास कर लियार् गयार् है। जल्दी-से-जल्दी सूचनार्एं पहुंचार्ने की दुनियार् भर में होड़ लगी हुर्इ है। पहले निर्धार्रित समय पर और एक निश्चित समय के लिए समार्चार्रों क प्रसार्रण हुआ करतार् थार्, वह चौबीसों घंटे देश दुनियार् की खबरों के प्रसार्रण लगार्तार्र दूरदर्शन के चैनलों में चलते रहते हैं। आप में से बहुत से लोगों को शार्यद यह जार्नकारी भी हो कि जल्दी-से-जल्दी सूचनार्एं पहुंचार्ने के लिए संचार्र मार्ध्यम क्यार् उपार्य करते हैं, कर्इ लोगों के लिए यह जार्ननार् अभी भी काफी रोचक होगार्।

संचार्र मार्ध्यमों के उद्देश्य

विचार्रों, भार्वों और सूचनार्ओं को एक स्थार्न से दूसरे स्थार्न पर पहुंचार्नार् ही संचार्र मार्ध्यम क मुख्य काम होतार् है। आप यह भी जार्न चुके है कि संचार्र मार्ध्यमों में समार्चार्र पत्र, रेडियों, दूरदर्शन आदि क महत्व बहुत अधिक है जिस कारण इन से जुड़ार् प्रेस वर्ग यार्नी पत्रकार वर्ग आज चौथार् खंभार् के नार्म से जार्नार् जार्तार् है। पत्रकारितार् की दुनियार् को (Fourth Estate) की संज्ञार् दी गर्इ है। संचार्र मार्ध्यमों के मोटे तौर पर तीन उद्देश्य मार्ने जार् सकते है-

  1. सूचनार् पहुंचार्नार् 
  2. मनोरंजन और 
  3. शिक्षार्

हार्लार्ंकि यह मार्नार् जार्तार् है कि संचार्र मार्ध्यम क मुख्य उद्देश्य सूचनार्एं पहुंचार्नार् होतार् है लेकिन जब आप रेडियों सुनते है यार् टेलीविजन देखते है तो उसमें कार्यक्रमों क बहुत बड़ार् हिस्सार् मनोरंजन को ध्यार्न में रखकर प्रसार्रित कियार् जार्तार् है। जरार् सोचिए, रेडियों पर अगर चौबीसों घंटे सिर्फ समार्चार्र प्रसार्रित किए जार्एं तो आप उसे कितनी देर सुनेगे। यार् इसके उलट अगर केवल उस पर गार्ने प्रसार्रित किए जार्ंए तो कभी न कभी आपको ऐसार् अवश्य लगेगार् कि कुछ समार्चार्र प्रसार्रित किए जार्ते यार् देश दुनियार् से जुड़ी जार्नकारियार्ं प्रसार्रित की जार्ती तो कितनार् अच्छार् होतार्। क्योंकि कोर्इ भी व्यक्ति मार्त्र मनोरंजन, जार्नकारी यार् समार्चार्र से संतुष्ट नहीं होतार्। इन तीनों के प्रति उसमें सहज जिज्ञार्सार् होती है।

आजकल टेलीविजन पर इन तीनों के लिए अलग चैनल शुरू हो गए है। अगर आपको समार्चार्र सुनने हैं तो आप समार्चार्र क चैनल ट्यून करते हैं, फिल्म देखनी है तो उसके चैनल पर जार्ते हैं यार् मनोरंजन चार्हिए तो उसके लिए कर्इ दूसरे चैनल हैं। सूचनार् क अर्थ आमतौर पर समार्चार्र लगार्यार् जार्तार् है। यह काफी हद तक सही भी है, क्योंकि समार्चार्रों क विस्तार्र आज सिर्फ रार्जनीतिक क्षेत्र-तक सीमित न होकर समार्ज के हर क्षेत्र तक हो चुक है। जब आप कोर्इ अखबार्र पढ़ते है यार् समार्चार्र क कोर्इ चैनल देखते हैं तो उसमें रार्जनीतिक हलचलों के अलार्वार् खेल, शिक्षार्, कृषि, बार्जार्र भार्व, शेयर, अर्थ, स्वार्स्थ्य जगत, अपरार्ध, मौसम आदि की जार्नकारियार्ँ भी प्रकाशित प्रसार्रित की जार्ती है। बल्कि अखबार्रों में विज्ञार्पनों के मार्ध्यम से कंपनियार्ं अपने उत्पार्द अथवार् सेवार्ओं के बार्रे में उपभोक्तार्ओं के विविध प्रकार की सूचनार्एं भी देती रहती है। आपको यह सूचनार् कहार्ं से और किस प्रकार मिली कि नेशनल इस्टीट्यूर ऑफ ओपन स्कूलिंग के जरिए मुक्त शिक्षार् मार्ध्यम से आप बार्रहवी की परीक्षार् भी दे सकते है। आपको सार्मार्न खरीदनार् है और वह सार्मार्न कर्इ कम्पनियार्ं बनार्ती हैं आपको ठीक से जार्नकारी नहीं है कि किस कंपनी क सार्मार्न खरीदनार् आपके लिए ठीक रहेगार्। ऐसे में अखबार्रों में यार् टेलीविजन पर विज्ञार्पन के मार्ध्यम से उस वस्तु की जार्नकारी मिल जार्ती है और सार्मार्न खरीदने में आसार्नी हो जार्ती है। इसी तरह नौकरियों के विज्ञार्पन भी संचार्र मार्ध्यमों के जरिये आपको मिलते रहते है।

इसके अलार्वार् जनसंख्यार् नियंत्रण, एड्स के प्रति जार्गरूकतार्, बार्ल विवार्ह के कुप्रभार्व, नशे से समार्ज और मार्नव स्वार्स्थ्य पर पड़ने वार्ले प्रभार्व, पर्यार्वरण, प्रदूषण, जल संचय आदि समस्यार्ओं के प्रति लोगो में जार्गरूकतार् लार्ने और उन्हें इनमें सहभार्गितार् निभार्ने के लिए प्रेरित करने संबंधी अनेक सूचनार्एं संचार्र मार्ध्यमों के जरिए प्रार्प्त होनी है। कुल मिलार्कर कहार् जार् सकतार् है संचार्र मार्ध्यम सूचनार्ओं क एक सशक्त मार्हध्यम होते है।

कुछ दिनों पहले भार्रत सरकार ने अंतरिक्ष में एजूसेट नार्मक उपग्रह स्थार्पित कियार्। इस उपग्रह क मकसद दूरस्थ शिक्षार् में विद्याथियों-शिक्षाथियों को लार्भ पहुंचार्नार् है। आप जार्नते हैं कि मुक्त शिक्षार् मार्ध्यम से पढ़ाइ करने वार्ले विद्याथियों को मुद्रित सार्मग्री अलार्वार् रेडियो, टेलीविजन, टेलीफोन आदि के मार्ध्यम से भी पार्ठ्यक्रम सहार्यक सार्मग्री और शिक्षार् से संबंधित जार्नकारियार्ं उपलब्ध कराइ जार्ती है। अभी तक इस तरह कर्इ जार्नकारियार्ं दूसरे उपग्रहों के मार्ध्यम से उपलब्ध कराइ जार्ती थीं, लेकिन एजूसेट स्थार्पित हो जार्ने के बार्द शिक्षार् के लिए स्वतंत्र उपग्रह अस्तित्व में आ गयार् है और शिक्षार् संबंधी सार्मग्री के प्रसार्रण में काफी सुविधार् हो गर्इ है।

आप यह भी जार्नते है कि अब ज्यार्दार्तर रेडियों और टेलीविजन कार्यक्रम उपग्रह के मार्ध्यम से प्रसार्रित किए जार्ते है। अब समार्चार्र पत्रों के प्रकाशन और उनकी सूचनार्ओं क संग्रह भी उपग्रह के मार्ध्यम से होने लगार् है।

संचार्र मार्ध्यम के प्रकार और उनकी उपयोगितार्- 

काफी लोग अखबार्र पढ़ते है, रेडियो सुनते है और टेलीविजन देखते हैं। ये सभी संचार्र मार्ध्यम है। इसके अलार्वार् अन्य मार्ध्यमों द्वार्रार् सूचनार्एं प्रार्प्त की जार् सकती है। उसके अतिरिक्त विभिन्न कपनियों विभार्गों द्वार्रार् उपलब्ध करार्ए जार्ने वार्ली प्रचार्र सार्मग्री भी संचार्र क मार्ध्यम सार्बित हुर्इ है। संचार्र मार्ध्यमों को तीन मार्गों में बार्ंटार् जार् सकतार् है-

  1. मुद्रित मार्ध्यम 
  2. श्रत्य मार्ध्यम 
  3. दृश्य श्रव्य मार्ध्यम 

1. मुद्रित मार्ध्यम- 

अखबार्र और पत्रिकाएं मुद्रित संचार्र मार्ध्यम के अंतर्गत आती है। अखबार्रों में समार्चार्र प्रकाशित होते हैं। शिक्षार् से लेकर, खेती बार्ड़ी, खेलकूद, स्वार्स्थ्य, सिनेमार्, टेलीविज के कार्यक्रम, बार्जार्र भार्व, भविष्यफल, विश्व के विभिन्न समार्चार्र प्रकाशित होते हैं। समार्चार्र पत्रों के मार्ध्यम से प्रतिदिन घटने वार्ली घटनार्ओं की जार्नकारी होती है। समार्चार्र पत्रों में देश विदेश की महत्वपूर्ण खबरे प्रकाशित की जार्ती है। समार्चार्र पत्र में अलग-अलग खबरों के लिए अलग-अलग पन्ने निर्धार्रित होते हैं। बीच क पन्नार् संपार्दकीय के लिए निश्चित होतार् है।
अखबार्र क महत्व-लोकतंत्र के तीन खंभे होते है- विधार्यिका, कार्यपार्लिका, न्यार्यार्पार्लिका। चौथार् खंभार् अखबार्र (खबर पार्लिका) कहलार्तार् है। विधार्नपार्लिक कानून बनार्ती है कार्यपार्लिक उसे लार्गू करती है और न्यार्यपार्लिक कानून तोड़ने वार्लो को दंडित करती है परन्तु इन तीनों में होने वार्ली गड़बड़ियों को अखबार्र उजार्गर करतार् है। सरकार योजनार् बनार्ती है तथार् उसमें जो खार्मियार् होती है उसे अखबार्र लोगों के सार्मने लार्तार् है। कर्इ बार्र सरकार को सार्मार्जिक मुद्दों पर अखबार्र के प्रकाशित करने पर अपने निर्णय बदलने भी पड़ते है। अखबार्र लोंगो को जार्गरूक और खबरदार्र करतार् है जिससे लोकतंत्र की रक्षार् होती है। इसीलिए संविधार्न में प्रेस को स्वतंत्रतार् दी जार्ती है। सरकार उसकी आजार्दी में बार्धार् नही डार्लती। यदि प्रेस नहीं होती तो हम अपने अधिकारों के प्रति इतने सजग नही हो पार्ते तथार् लोकतंत्र की रक्षार् नहीं हो पार्ती। अखबार्र सरकार की योजनार्ओं, नीतियों यार् कामकाज की ओर ही ध्यार्न आकर्षित नही करती बल्कि समार्ज के दूसरे विभिन्न मुद्रओं पर भी ध्यार्न आकर्षित कर लोंगो को जार्गरूक करतार् है। सार्मार्जिक मुद्दो जैसे-जनसंख्यार् वृद्धि, भ्रूण हत्यार्, लिंग भेद, अन्य सार्मार्जिक बुरार्इयों को अखबार्र प्रकाशित कर लोगों को जार्गरूक बनार्ने क प्रयार्स करतार् है। प्रार्कृतिक आपदार्ओं, प्रदूषण, प्रार्कृतिक संपदार् के दोहन से होने वार्ली हार्नियों को प्रकाशित कर अखबार्र लोगों को जार्नकारी देतार् है। इस प्रकार अखबार्र आज के युग में मुद्रित संचार्र मार्ध्यमों में सर्वश्रेष्ठ स्थार्न रखतार् है।

पत्रिकाएँ-पत्रिकाओं क प्रकाशन आज सर्वार्धिक हो रहार् है। पत्रिकाओं क प्रकाशन अखबार्रों की तरह प्रतिदिन न होकर सार्प्तार्हिक, पार्क्षिक, मार्सिक, द्विमार्सिक, त्रैमार्सिक छमार्ही यार् वाषिक आधार्र पर प्रकाशित होती है। अवधि पर आधार्रित होने के कारण तार्जार् खबरों क प्रकाशन पत्रिकाओं में नही हो पार्तार्। ज्यार्दार्तर पत्रिकाओं में घटनार्ओं, समार्चार्रों, कलार् जगत तथार् सार्मार्जिक-सार्हित्यिक हलचलों पर वैचार्रिक टिप्पणियार्ँ प्रकाशित की जार्ती है। इन्हें पढ़कर यह लार्भ होतार् है कि लोगों को उन पर प्रतिक्रियार्यें जार्नने उनकी तह में छिपी वार्स्तविकतार् को जार्नने और विस्तार्र से समझने क अवसर मिलतार् है। सार्वधिक होने के कारण तार्जार् घटनार्क्रमों क प्रकाशन संभव नहीं होतार्। इनके सार्वधिक होने क लार्भ यह होतार् है कि सूचनार्ओं क विस्तार्र से प्रकाशन तथार् विवेचन की सुविधार् होती है। कर्इ बार्र पत्रिकाएं खबरों की तह में छिपी घटनार्ओं को ढूंढ ले आती है। ऐसे उदार्हरण हमार्रे सार्मने अक्सर आते रहते है। 

कुल मिलार्कार पत्र पत्रिकाएं सूचनार्ओं क तेजी से तथार् प्रार्मार्णिक तौर पर प्रकाशन कर सरकार की योजनार्ओं नीतियों के बार्रे में जार्नकारी देकर लोगों में जार्गरूकतार् पैदार् करती है।

2. श्रव्य मार्ध्यम- 

श्रव्य मार्ध्यम सूचनार्ओं के प्रसार्रण क एक सशक्त मार्ध्यम है जिन्हें सिर्फ सुनार् जार् सकतार् है। मुद्रित मार्ध्यमों की तरह इनकी सूचनार्ओं को पढ़ार् यार् देखार् नही जार् सकतार्। रेडियों एक श्रव्य मार्ध्यम है जिसमे समार्चार्र, विज्ञार्पन, सूचनार्ओं क प्रसार्रण कियार् जार्तार् है। मुद्रित मार्ध्यमों क लार्भ केवल सार्क्षर लोग ही उठार् पार्ते हैं परन्तु श्रव्य मार्ध्यमों क लार्भ कम पढ़े लिख्ेार् यार् निरक्षर उठार् सकते है। मुद्रित मार्ध्यमों की तरह इसक लार्भ उठार्ने के लिए रोज पैसे खर्च नही करने पड़ते। रेडियो सेट एक बार्र खरीद कर लंबे समय तक सूचनार्एं प्रार्प्त की जार् सकती है। इसके अलार्वार् इसे कहीं भी किसी भी जगह ले जार्यार् जार् सकतार् है। रेडियों पर आजकल एक.एम.चैनल ज्ञार्नवार्णी के जरिए विद्ययाथियों के लिए पार्ठ्यक्रम पर आधार्रित कार्यक्रम भी प्रसार्रित होते है। जो विद्ययार्थ्र्ार्ी कक्षार् में नहीं जार् पार्ते वे इसक लार्भ उठार् पार्ते है। रेडियों में भी लगभग वे सभी समार्चार्र एवं सूचनार्एं होती है जो पत्र पत्रिकाओं में प्रकाशित होती है। अंतर केवल इतनार् है रेडियों में समार्चार्रों तथार् सूचनार्ओं क प्रसार्रण समय निश्चित होने के कारण इनके विस्तार्र की गुंजार्इश कम होती है। इनमे विशेष रूप से प्रमुख समार्चार्र ही प्रसार्रित हो पार्ते है। जबकि अखबार्रों में स्थार्नीय और रार्ष्ट्रीय अंतर्रार्ष्ट्रीय समार्चार्रों के लिए पर्यार्प्त स्थार्न बन जार्तार् है। सार्थ ही इसमें चित्र भी प्रकाशित किए जार् सकते है जो कि रेडियों में संभव नही है। रेडियों मे प्रसार्रित होने वार्ले समार्चार्रों को यदि ठीक से सुनार् न जार्ए तो वे छूट जार्ते है परन्तु अखबार्र में ऐसार् नही है उन्हें दुबार्रार् पढ़ार् जार् सकतार् है।

रेडियो के अलार्वार् श्रव्य मार्ध्यम के रूप में इन दिनों टेपरिकार्ड क भी प्रचलन तेजी से बढ़ार् है। इसमें सूचनार्ओं को रिकार्ड करके रखार् जार् सकतार् है, जिसे अपनी मर्जी से सुनार् जार् सकतार् है। यह विद्याथियों के लिए उपयोगी सार्बित हो रही है। पार्ठ्यपुस्तों के अलार्वार् दूर शिक्षार् प्रणार्ली के जरिए शिक्षार् प्रदार्न करार्ने वार्ले संस्थार्न आडियों कैसेट भी देते है। जिनमें पार्ठ्यक्रम के अलार्वार् कर्इ पार्ठ्यक्रम सहार्यक सार्मग्री उपलब्ध होती है। इन कैसेटो को अपनी सुविधार्नुसार्र सुन कर लार्भ उठार् सकते है। चुनार्वों के समय रार्जनीतिक पाटियार्ं अपने प्रचार्र प्रसार्र के लिए इसक उपयोग करते है। कर्इ कंपनियार्ं अपने विज्ञार्पनों क प्रसार्रण इसके मार्ध्यम से करती है। लार्उडस्पीकर भी संचार्र क एक श्रव्य मार्ध्यम है इसके जरिए कस्बों में सिनेमार् क प्रचार्र करने वार्ले वार्हनों में इनक उपयोग होतार् है महार्नगरों में लार्ल बतियों पर टे्रफिक पुलिस क प्रचार्र प्रसार्रित होतार् रहतार् है।

3. दृश्य-श्रव्य मार्ध्यम- 

दृश्य-श्रव्य मार्ध्यम के जार्रिए न सिर्फ कार्यक्रमों को सुनार् जार् सकतार् है बल्कि घटनार्ओं को चित्र के रूप में देखे भी जार् सकते है। टेलीविजन दृश्य- श्रव्य मार्ध्यम है। इसके कार्यक्रम रेडियों की अपेक्षार् अधिक रोचक होते हैं क्योकि इस पर चित्र भी प्रसार्रित होते है। टेलीविजन के कार्यक्रमों में श्रव्य के सार्थ-सार्थ दृश्य सार्मग्री भी होते हैं इसलिए ये अधिक समय के लिए मन में अंकित रहते है। जिन बार्तों को सुनकर यार् पढ़कर आसार्नी से समझ नही पार्ते उन्हें देखकर आसार्नी से समझ जार्ते है। टेलीविजन पर समार्चार्रों को बोलकर तो प्रसार्रित कियार् ही जार्तार् है। उनसे संबधित चित्रों को दिखार्कर और जहार्ं जरूरी हुआ लिखित रूप में भी प्रस्तुत कर अधिक प्रभार्व पैदार् कियार् जार् सकतार् है। इसी तरह टेलीविजन पर प्रसार्रित होने वार्ले पार्ठ्यक्रम विषयक कार्यक्रम की रोचक और प्रभार्वशार्ली होते है। आजकल दूरदर्शन एक महत्पूर्ण संचार्र मार्ध्यम के रूप में विकासित हो चुक है। चौबीसों घंटे इसक प्रसार्रण होने के कारण समार्ज के विविध पक्षों को दिखार्ने, हर पल की घटनार्ओं को प्रसार्रित करने में आसार्नी होती है। यह एक अत्यार्धुनिक उपकरण होने के कारण इसके मार्ध्यम से सूचनार्एं एक स्थार्न से दूसरे स्थार्न पर पहुंचार्नार् आसार्न हो गयार् है तथार् घटनार् स्थल से भी सीधे आंखों देखार् हार्ल प्रसार्रित कियार् जार् सकतार् है। टेलीविजन पर किसी भी घटनार् के तत्काल समार्चार्र हमार्रे सार्मने होते हैं। किसी दूसरे देश में बैठे व्यक्ति से टिप्पणी ली और प्रसार्रित की जार् सकती है। विभिन्न कंपनियार्ं अपने उत्पार्दों क विज्ञार्पन टेलीविजन पर प्रसार्रित करार्ते हैं।

टेलीविजन के ज्ञार्नदर्शन चैनल द्वार्रार् पार्ठ्य-सार्मग्री यार् पार्ठ्यक्रम सहार्यक सार्मग्री क प्रसार्रण भी काफी महत्वपूर्ण संचार्र मार्ध्यम के रूप में उभर कर सार्मने आयार् है। पार्ठ्यक्रमों के प्रसार्रण के लिए अब एक अलग से एजूसेट नार्मक उपग्रह भी अंतरिक्ष में स्थार्पित कियार् गयार् है जिससे विद्याथियों, शोधाथियों यहार्ँ तक कि अध्यार्पको के लिए शिक्षार् संबंधी सूचनार्एं प्रार्प्त करने दुनियार् मे चल रहे शिक्षार् संबंधी प्रयोगो केार् बार्रे में जार्नने में आसार्नी हो जार्ती है। इस चैनल के मार्ध्यम से रार्ष्ट्रीय मुक्त विद्यार्लयी शिक्षार् संस्थार्न भी अपने विद्याथियों के लिए कार्यक्रम क प्रसार्रण करतार् है। कभी-कभी टेली क्रार्न्फेंसिग कर विद्याथियों की समस्यार्ओं क समार्धार्न की कियार् जार्तार् है।

नए संचार्र मार्ध्यम- 

कम्प्यूटर- कम्प्यूटर से अब कोर्इ व्यक्ति अपरिचित नहीं है। आज यह संचार्र क एक महत्वपूर्ण एवं सशक्त मार्ध्यम है। यह ऐसार् उपकरण है जिसके कारण संचार्र के क्षेत्र में क्रार्ंति आ गर्इ है। आज संसार्र भर में ऐसार् केाइ क्षेत्र नही है जहार्ँ कम्प्यूटर की पहुंच नही है। इस पर अखबार्रों, रेडियो, टेलीविजन के लिए समार्चार्र लिखे जार् सकते है, संपार्दित किए जार्ते है तथार् प्रकाशित प्रसार्रित किये जार्ते है।

इंटरनेट- इंटरनेट क अर्थ होतार् है कम्प्यूटरों क जार्ल-इंटरनेट हजार्रों नेटवर्को क एक नेटवर्क है। सार्री दुनियार् के नेटवर्क इस व्यवस्थार् से आपस में जोडे जार् सकते हैं यार् जुड़े हुए है। संसार्र के किसी भी कोने से कोर्इ भी सूचनार् देनी यार् लेनी हो तो वह कुछ ही पलों में भेजी यार् प्रार्प्त की जार् सकती है। इसके द्वार्रार् व्यवसार्य, स्टॉक माकेट, शिक्षार्, चिकित्सार्, मौसम, खेलकूद आदि के अतिरिक्त अन्य किसी भी क्षेत्र में जार्नकारी प्रार्प्त की जार् सकती है। यहार्ं तक कि यदि मन में कोर्इ विचार्र आतार् है और हम उससे संबंधित जार्नकारी प्रार्प्त करनार् चार्हते है तो वह भी हमें इंटरनेट के मार्ध्यम से प्रार्प्त हो सकती है। इंटरनेट एक तरह से मुद्रित दृश्य-श्रव्य मार्ध्यमों क मिलार् जुलार् रूप है।

मोबार्इल फोन-यह घर के सार्धार्रण फोन से अलग होतार् है। घर के फोन को एक तार्र के जरिए जोड़ार् जार्तार् है इसलिए इसके उठार्कर कही नहीं ले जार्यार् जार् सकतार् जबकि मोबार्इल फोन बिनार् तार्र के काम करतार् है जिसे लेकर आसार्नी से कहीं भी ले जार्यार् जार् सकतार् है। इसे जेब में रखकर ले चलने की सुविधार् के कारण इनके सेट काफी छोटे-छोटे तैयार्र किए जार्ने लगे हैं। यह एक दूसरे से बार्तचीत करने के अलार्वार् इसक उपयोग संदेश भेजने पार्ने (एस.एम.एस.) फोटो खीचने और तुरंत उसे दूसरे व्यक्ति के पार्स भेजने, बार्तचीत रिकार्ड करने और उसे दूसरे व्यक्ति के पार्स भेजने, फिल्में देखने, गार्ने सुनने, समार्चार्र सुनने के लिए भी कियार् जार्त है।

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