वार्यु प्रदूषण के प्रभार्व एवं स्रोत

वार्युमडंल में विशार्ल गैसे एक निश्चित मार्त्रार् और अनुपार्त में होती है, जब वार्यु के अवयवों में अवार्ंछित तत्व प्रवेश कर जार्ते है तो उसक मौलिक सतुंलन बिगड जार्तार् है। इसक प्रभार्व विभिन्न जीव-जन्तुओं, पडे – पौधे मौसम व जलवार्यु तथार् स्वयं मार्नव पर स्पष्ट: परिलक्षित हे रहार् है वार्यु पद्रूषण के प्रभार्वों को दो वर्गो में वर्गीकृत कियार् जार् सकतार् है-

1. तार्त्कालिक प्रभार्व- 

वार्यु प्रदूषण के प्रभार्व क यह लक्षण तत्क्षण एवं प्रत्यक्षत प्रदर्शित कर देते है। जेसे वार्हनों तथार् कारखार्नों से निकलते वार्ले धुएँ युक्त वार्तार्वरण में श्वार्स लनेे में तकलीफ ऑखों में जलन तथार् अन्य अंगो में एलर्जी उत्पन्न होनार् आदि।

2. दीर्धकालिन प्रभार्व- 

ऐसे प्रभार्व तत्क्षण लार्क्षित नहीं होती है अपितु कुछं भार्ग समय पश्चार्त अपने लक्षण प्रदर्शित करते है। उदार्हरण के लिए वार्युमडंल के निचले स्तर में गैसों की सरं चनार् में परिवर्तन। वार्यु प्रदूषण के प्रभार्वों के अतंगर्त स्पष्ट कियार् जार् सकतार् है-

  1. मार्नव स्वार्स्थ्य पर प्रभार्व-वार्यु प्रदूषण से मनुष्य के स्वार्स्थ्य पर बहुत बुरार् असर होतार् है। इससे श्वसन सम्बन्धी रोग जैस- अस्थमार्, फफेडो क कैसंर इत्यार्दि हो जार्तार् है। वार्यु में वितरित धार्तुओं के सूक्ष्मकण बहतु से रोग उत्पन्न करते है। जैसे – सीसे के कण नार्डी़ मडंल में रोग उत्पन्न करते है। कडै मियम के कण रक्त दार्ब बढाऱ् कर हदृय सम्बन्धी बहतु से विकार उत्पन्न करते है। इसी प्रकार प्रदूषित वार्यु एग्जीमार्, मुहार्ंसे तथार् एंथ्रेक्स इत्यार्दि समस्यार्एँ उत्पन्न करती है।
  2. वनस्पतियों पर प्रभार्व- रार्सार्यनिक गैस संयन्त्रों तथार् नार्भिकीय परियोजनार्ओं से वार्युमंडल में निस्तार्रित होने वार्ले विभिन्न विषैले रार्सार्यनिक एवं रेडियोधर्मी पदाथ अपनार् दीर्धकालिन प्रभार्व मनुष्यों के स्वार्स्थ्य पर छार्डे ऩे है। उदार्हरण के लिये भार्रत के भोपार्ल में हुए गेैस त्रार्सदी में मिथार्इल आइसोसार्इनटे गसै के रिसार्व के कारण लगभग 5000 लार्गे मार्रे गये थे, जबकि इस गैसे के प्रभार्व के कारण कर्इ गर्भवती महिलार्ओं के गर्भस्थ शिशु मरे हएु पैदार् हुए थे। उत्पन्न होती है। इससे पत्तियार्ँ सुखकर झड़ जार्ती है। स्वचार्लित वार्हनों से उत्सर्जित धुएँ में एथिलीन की अधिक मार्त्रार् होने से पुष्पों की पंखुडिय़ॉ मुरझार् जार्ती है। इसी प्रकार अमार्ेि नयार् क अधिक सार्न्द्रण पौधें के बीजों के अंकुरण जड एव पर्रोह वृद्व पर प्िर तकलु पड़तार् है।
  3. मौसम एवं जलवार्यु पर प्रभार्व- वार्यु प्रदूषण के फलस्वरूप उस क्षत्रे विशेष के मौसम में वार्यु प्रदूषकों क हस्तक्षेप होनार् कोई आश्चर्यचकित कर देने वार्ली घटनार् नहीं है। वार्यमु डल में प्रदूषक पदाथो की अत्यधिक सार्न्द्रतार् से असमय वर्षो तार्पमार्न में वृद्धि तथार् धुंध एव काहे रे क छार्यार् रहनार् आदि वार्यु प्रदूषण की ही देन है। हरित गह्र प्रभार्व व ओजार्ने परत क्षरण से विश्व स्तर पर तार्पमार्न में वृद्धि हुई है यदि यह तार्पमार्न वर्तमार्न समय से  4-5OC अधिक हो जार्येगार् तो समुद्र अधिक गर्म होगार् एवं ध्रुवित क्षेत्रों में आच्छार्दित बर्फ के भार्री मार्त्रार् में पिघलने से समुद्र क जलस्तर बढ़ जार्यगे। जिससे अनेक द्वीप तथार् तटीय शहर जलमग्न हो जार्येगार्।
  4. पदाथों पर प्रभार्व- वार्यु प्रदूषण से जीव-जन्तुओ मार्नव, वनस्पतियों के सार्थ-सार्थ पदाथो पर भी दुष्प्रभार्व पड़तार् है। वार्यमु डल में उपस्थित SO2, SO3 तथार् जल रार्सार्यनिक क्रियार् करके सल्फूरिक अम्ल (H2SO4) बनार्ते है जो अम्लीय वर्षो के रूप् में पृथ्वी पर गिरतार् है। धार्त्विक सतहें (लोहे , इस्पार्त, तार्ंबार् , जस्तार्) अम्ल वर्षो के सम्पक्र में आने से क्षयित हो जार्ती है चूनार् पत्थर तथार् सगं मरमर से बनी इमार्रते अम्लीय वर्षो के सम्पक्र में आने के कारण अपनी चमक खो देते है।

वार्यु प्रदूषण के स्रोत

वार्यु प्रदूार्ण के दो प्रमुख स्त्रोत है  – 1. प्रार्कृतिक स्त्रोत  2. मार्नव जनित स्त्रोत।

      (1) प्रार्कृतिक –

      कभी-कभी प्रकृति में उत्पन्न असतुंलित व्यवहार्र प्रदूषण क कारण बनते है इन असतुंलित व्यवहार्रों के लिये मनुष्य ही जिम्मेंदार्र है। इनमें से मुख्य है-ं

      1. ज्वार्लार्मुखी उद्गार्र (Volcanic Eruptions)- विष्व में लगभग 450 जीवित ज्वार्लार्मुखी  है। इन ज्वार्लार्मुखियों से लगार्तार्र लार्खों टन धलू के कण, रार्ख के कण, कार्बन मोनोआक्सार्इर्ड , सल्फर डाइ आक्सार्उइड जैसी विषैली गैसें विभिन्न धार्तुओं के कण, लार्खार् इत्यार्दि उत्पन्न हार्के र वार्युमडं ल मेंं पहुंचकर उन्हें प्रूदषित करते है।
      2. दार्वार्ग्नि (Forest fire)- वनों में लगने वार्ली आग को दार्वार्ग्नि कहते है। दार्वार्ग्रि से तार्पमार्न के वृद्वि होने के सार्थ-सार्थ अत्यार्धिक मार्त्रार् मेंं निकलने वार्लार् धुआँ तथार् रार्ख के कण वार्युमडंल को प्रदूषित करते है। 
      3. दलदली भूमि (Marshy Lands)- डेल्टाइ भूमि, बडे़ जलार्षयों व समूदी्र किनार्रों पर उपस्थित दलदली से निरन्तर मेथेन (CH4) हार्इट्रोजन सल्फार्इड (H2S) आदि गैसें वार्तार्वरण मेंं निस्तार्रित होते है, जो वार्युमडलीय गैसों में असतुंलन उन्पन्न करते है। 
      4. धरती की सतह से उत्पन्न प्रदूषक- धरती के सतह पर से हवार् में उड़ने वार्ले विषार्णु धलू तथार् तथार् मिटट्ी के कण, सार्गरों व महार्सार्गरों से उठने वार्ली लवण फुहार्र, कोहार्रार् उल्कापार्त ऑधी, तूफार्न, पुष्पों के परार्गकण, सूक्ष्मजीव इत्यार्दि वार्यु प्रदूषण में अपनार् महती योगदार्न देते है। 
      5. काबनिक पदाथो क जैविक अपघटन- मतृ जीव जन्तुओं एवं पार्दपों के जैिवक अपघटन के फलस्वरूप विभिन्न गैसें जैसे – हार्इड्रोजन सल्फार्इड, सल्फर इाइ आक्सार्इड, मेथेन इत्यार्दि वार्यु प्रदूषण को बढ़ार्वार् देती है।

        (2) मार्नव जनित स्त्रोत-

        वर्तमार्न यगु में प्रार्कृतिक स्त्रोत की तलु नार् में मार्नवीय स्त्रोत वार्यु प्रदूशण मेंं सक्रिय यार्गे दार्नदे रहे हैं वार्यु प्रदूषण फैलार्ने प्रदूषण वार्ले प्रमुख मार्नव जनित स्त्रोत वार्यु  प्रदूषण  में सक्रिय योगदार्न दे रहे हैं वार्यु  प्रदूषण  फैलार्ने वार्ले प्रमुख मार्नव जनित स्त्रोत निम्न प्रकार के है –

        1. दहन प्रक्रियार्- वार्यु की उपस्थिति में किसी पदाथ के जलने को दहन कहते है विभिन्न पदाथो के दहन से तरह-तरह की गैस, धुँआ, रार्ख आदि निर्मित होती है, जो वार्युमडंल को प्रदुषित करते है वर्तमार्न में दहन प्रक्रियार् निम्न क्षेत्रों मेंं कियार् जार्तार् है-
        2. घरेलु कार्यो में दहन- मनुष्य द्वार्रार् घरेलु कार्यो में प्रार्चीन काल से ही लकड़ी, उपले, मिट्टी क तेल, कोयले इत्यार्दि क दहन कियार् जार्तार् है। इनके दहन से अत्यधिक मार्त्रार् में CO2, CO, SO2 नार्इट्रोजन आक्सार्इड कार्बनिक कण इत्यार्दि उत्पन्न होते है जो वार्युमडं ल मेंं पहँचु कर उसे प्रदुषित करते है। वर्तमार्न में रसार्इेर् घर में पैर आगे की जार्ने वार्ली रसोई गैस के दहन से भी नार्इट्रोजन मार्ने  आक्सार्इड जैसी विषैली गैसें उत्पन्न हार्ते ी है। 
        3. स्वचार्लित वार्हनों में दहन- स्वचार्ार्लित वार्हन जसै – कार, स्कूटर, बस, ट्रक, वार्युमंडल इत्यार्दि पेट्रोल, डीजल से चलने है। इन वार्हनों के इंजन में इर्धनों (पेट्रोल डीजल) के विभिन्न चरणों में दहन के फलस्वरूप् उत्पन्न कार्बन मोनोआक्सार्इड, नार्इट्रोजन आक्सार्इड एव अन्य हार्इड्रो कार्बन्स वार्युमंडल में पहुंचार्ने है और उन्हें  प्रदुषित करत  है। पेट्रोलियम पदाथों के अपूर्ण दहन से निकले हार्इड्रो काबर्न  तथार् नार्इट्रोजन आक्सार्इड परार्बेैगनी किरणें कें प्रभार्व से प्रकाश रार्सार्यनिक क्रियार् द्वार्रार् हार्निकारक ओजोन परार्क्सीएसिटिल नार्इटट्रे व अन्य जटिल कार्बनिक यौगिक बनार्ते है। जिसे प्रकाश रार्सार्यनिक कोहरार् कहते है, जो मनुष्य तथार् जीवों के लिये हार्निकारक होतार् है। 
        4. तार्प विद्युत ग्रहो में दहन- भार्रत में विद्युत उत्पार्दन मुख्य रूप् से कोयले को जलार्कर कियार् जार्तार् है। तार्प विद्यतु ग्रहों मेंं कोयलें को जलार्ने पर कार्बन डार्इ आक्सार्इड, नार्इट्रोजन के आक्सार्इड, सल्फर के आक्साइड व अन्य गैसे उत्पन्न होती है। सार्थ ही प्रदुषित करती है। उदार्हरण के लिए दिल्ली के इंद्रप्रस्थ विद्यतु तार्प गह्र में प्रतिदिन 5 टन कालिख 60 टन सल्फर डार्ई आक्सार्इड,85 टन फ्लाइ ऐश इत्यार्दि उत्पन्न होते है।

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