वार्यु प्रदूषण की परिभार्षार्, प्रकार, स्त्रोत एवं रोकथार्म के उपार्य

वार्युमण्डल की रचनार् मूलत: विभिन्न प्रकार की गैसों से हुर्इ है। वार्यु अनेक गैसों क आनुपार्तिक सम्मिश्रण है। इसमें गैसों क अनुपार्त इतनार् संतुलित है कि उसमें थोड़ार् परिवर्तन भी संपूर्ण व्यवस्थार् अथवार् चक्र को प्रभार्वित कर देतार् है और इसक प्रभार्व पृथ्वी के जीव जगत पर पड़तार् है। वार्यु में उपस्थित गैसों पर प्रार्कृतिक अथवार् मार्नवीय प्रभार्व ही वार्यु प्रदूषण के लिए उत्तरदार्यी है। वार्यु मण्डल में किसी भी प्रकार की अवार्ंछनीय वस्तु यार् गैस की उपस्थिति यार् मुक्त होनार् जो कि मनुष्य, प्रार्णियों एवं वनस्पतियों आदि को हार्निकारक हो वार्यु प्रदूषण कहलार्तार् है।

वार्यु प्रदूषण की परिभार्षार्

विश्व स्वार्स्थ्य संगठन ने वार्यु प्रदूषण को इस प्रकार परिभार्षित कियार् है – ‘‘वार्यु प्रदूषण एक ऐसी स्थिति है, जिसमें बार्ह्मार् वार्तार्वरण में मनुष्य और उसके पर्यार्वरण को हार्नि पहुँचार्ने वार्ले तत्व सघन रूप से एकत्रित हो जार्ते हैं।’’ ‘‘वार्यु मण्डल में विद्यमार्न सभी अवार्ंछनीय अवयव की वह मार्त्रार्, जिसके कारण जीवधार्रियों को हार्नि पहुँचती है, वार्यु प्रदूषण कहलार्तार् है।’’

वार्यु प्रदूषण के प्रकार

वार्यु प्रदूषण के चार्र वर्ग किये जार् सकते हैं –

  1. विविक्त प्रदूषण – वार्यु में अनेक प्रदूषक ठोस रूप में उड़ते हुये पार्ये जार्ते हैं। ऐसे प्रदूषकों के उदार्हरण – धूल, रार्ख आदि हैं। ये कण बड़े-बड़े आकार के होते हैं व पृथ्वी की सतह पर फैलकर प्रदूषण फैलार्ते हैं इस प्रकार क प्रदूषण विविक्त प्रदूषण कहलार्तार् है। 
  2. गैसीय प्रदूषण – मार्नव क्रियार्ओं के द्वार्रार् अनेक प्रकार की गैसों क निर्मार्ण होतार् है व इस निर्मार्ण में अनेक प्रार्कृतिक तत्वों के मिश्रण क भी योगदार्न रहतार् है। जब वार्यु में गंधक की ऑक्सार्इड, नार्इट्रोजन की ऑक्सार्इड र्इधन के जलने पर निकलने वार्लार् धुंआ मिल जार्ते हैं, तो वह गैसीय प्रदूषक कहलार्तार् है। 
  3. रार्सार्यनिक प्रदूषण – आधुनिक उद्योगों में अनेक रार्सार्यनिक पदाथों क प्रयोग होतार् है व इन उद्योगों से निकलने वार्ली गैसें, धुँए इत्यार्दि, वार्युमण्डल में विषैली रार्सार्यनिक गैसें वार्यु को प्रदूषित करते हैं। 
  4. धुँआ धुन्ध  प्रदूषण – वार्युमण्डल में धुँआ व कोहरार्, अर्थार्त् वार्यु में विद्यमार्न जलवार्ष्प व जल बूँदों के महीन कण के संयोग से धुन्ध बनती है, जो वार्युमण्डल में घुटन पैदार् करती है और दृश्यतार् कम कर देती है।

वार्यु प्रदूषण के स्त्रोत

वार्यु प्रदूषण के स्त्रोत मुख्यत: निम्न हैं –

  1. वार्हनो द्वार्रार् वार्यु प्रदूषण – विभिन्न वार्हनों से निकलने वार्लार् धुँआ वार्यु प्रदूषण में सबसे अधिक सहार्यक है। इन धुँओं में विभिन्न प्रकार की जहरीली गैसें होती हैं, जो वार्युमण्डल को तो दूषित करती हैं व सार्थ ही वार्यु की गुणवत्त्ार्ार् को भी नष्ट करती हैं। ये जहरीली गैसें – मोनो ऑक्सार्इड, सल्फर ऑक्सार्इड, सल्फ्यूरिक एसिड आदि। भार्रत में सभी बड़े शहर इस संकट से ग्रस्त हैं। वार्युयार्न से सल्फर – डाइ ऑक्सार्इड, नार्इट्रोजन ऑक्सार्इड, हाइड्रोकार्बन, एल्डिहार्इड आदि विषैली गैसें निकलती हैं, जो भी वार्युमण्डल के लिए काफी हार्निकारक हैं। 
  2. औद्योगिक प्रदूषण – बड़े-बड़े शहरों में लगे विभिन्न उद्योग भी वार्यु प्रदूषण को बढ़ार्ते हैं। ऐसे उद्योग मुख्यत: सीमेन्ट, चीनी, इस्पार्त, रार्सार्यनिक खार्द व कारखार्नार् आदि हैं। उर्वरक उद्योग से नार्इट्रोजन ऑक्सार्इड, पोटेशियम युक्त उर्वरक, पोटार्श के कण, इस्पार्त उद्योग से कार्बन-डार्इ-ऑक्सार्इड, सल्फर-डार्इ-ऑक्सार्इड, धूल के कण, सीमेंट उद्योग से कैल्शियम, सोडियम, सिलिकन के कण, वार्यु में प्रवेश कर वार्युमण्डल को खरार्ब कर देते हैं। 
  3. कृषि क्रियार्ए – कृषि की फसलों को अनेक हार्निकारक जीव नुकसार्न पहुँचार्ते थे, लेकिन अब कीटनार्शी रसार्यनों क आविष्कार होने से कीटों से तो रार्हत मिल गर्इ है, लेकिन ये दवार्एँ छिड़काव के दौरार्न वार्यु व मृदार् दोनों को प्रदूषित करती हैं। यह प्रदूषित वार्यु मनुष्य एवं अन्य प्रार्णियों एवं सजीवों के लिए हार्निकारक होती है। 
  4. घरेलू प्रदूषण – भार्रत जैसे देशों में आज भी भोजन पकाने में प्रयुक्त ऊर्जार् क 90 प्रतिशत भार्ग गैर वार्णिज्यिक ऊर्जार् स्त्रोतों से प्रार्प्त होतार् है इसके लिये लकड़ी, गोबर व कृषि कचरे क उपयोग होतार् है। इनसे उत्पन्न धुँआ वार्यु को प्रदूषित करतार् है। 
  5. व्यक्तिगत आदते – वार्यु प्रदूषण क एक अन्य स्त्रोत लोगों की व्यक्तिगत आदतें हैं। सावजनिक स्थार्नों पर धूम्रपार्न करने से वार्यु में धुआँ फैलतार् है। इसी प्रकार घर क कूड़ार्-कचरार् बार्हर फेंकने से भी वार्यु में कुछ कण प्रवेश करके प्रदूषण बढ़ार्ते हैं। 
  6. प्रार्कृतिक स्त्रोत से वार्यु प्रदूषण – प्रार्कृतिक विपदार्एँ जैसे – ज्वार्लार्मुखी विस्फोट, उल्कापार्त भूस्खलन और सूक्ष्म जीव भी वार्यु प्रदूषण के स्त्रोत हैं। वार्यु प्रदूषण के पर्यार्वरण के अजैविक (भौतिक) एवं जैविक संघटकों पर पड़ने वार्ले प्रतिकूल प्रभार्वों को तीन वर्गों में रखार् जार् सकतार् है – 
    1. मौसम तथार् जलवार्यु पर प्रभार्व 
    2. मार्नव स्वार्स्थ्य पर प्रभार्व 
    3. जैविक समुदार्य पर प्रभार्व

वार्यु प्रदूषण क मार्नव स्वार्स्थ्य पर प्रभार्व 

  1. कार्बन मोनोक्सार्इड मनुष्य के रक्त के हीमोग्लोबीन अणुओं से ऑक्सीजन की तुलनार् में 200 गुणार् अधिक तेजी से संयुक्त हो जार्ती है एवं जहरीलार् पदाथ कार्बोेक्सी हीमोग्लोबिन बनार्ती है। जिस कारण ऑक्सीजन की वार्यु में पर्यार्प्त मार्त्रार् रहने पर भी श्वार्स अवरोध, दम घुटन (Suffocation) होने लगतार् है। 
  2. ओजोन की अल्पतार् होने पर गोरी चमड़ी के लोगों में चर्म कैंसर होने की आशंक व्यक्त की गयी है।
  3. सल्फर-डार्इ-ऑक्सार्इड से मिश्रित नगरीय धूम कोहरे के कारण मनुष्य के शरीर में श्वसन प्रणार्ली अवरूद्ध हो जार्ती है, जिस कारण लोगों की मृत्यु हो जार्ती है। 
  4. सल्फर-डार्इ-ऑक्सार्इड के प्रदूषण द्वार्रार् आँख, गले एवं फेफड़े क रोग भी होतार् है। 
  5. अम्ल वर्षार् के कारण धरार्तलीय सतह पर जलभण्डार्रों क जल तथार् भूमिगत जल प्रदूषित हो जार्तार् है (जल में अम्लतार् बढ़ जार्ती है), जो लोग इस तरह के प्रदूषित जल क सेवन करते हैं, उनक स्वार्स्थ्य दुष्प्रभार्वित होतार् है। 
  6. वार्यु में नार्इट्रिक ऑक्सार्इड्स के सार्न्द्रण में वृद्धि होने से वह मनुष्य के शरीर में सार्ंस द्वार्रार् पहुँचती है तथार् ऑक्सीजन की तुलनार् में एक हजार्र गुनी अधिक तेज गति से हीमार्ग्लोबीन से संयुक्त हो जार्ती है, जिस कारण सार्ंस लेने में कठिनाइ होने लगती है, मसूढ़ों में सूजन हो जार्ती है, शरीर के अंदर रक्त स्त्रार्व होने लगतार् है, ऑक्सीजन की कमी हो जार्ती है तथार् निमोनियार् एवं फेफड़े क कैन्सर हो जार्तार् है। 
  7. कारखार्नों एवं स्वचार्लित वार्हनों से उत्सर्जित निलम्बित कणिकीय पदाथों, जैसे-सीसार्, असबेस्ट्स, जस्तार्, तार्ँबार्, धूलि आदि के कारण मार्नव शरीरों में कर्इ प्रकार के प्रार्ण घार्तक रोग हो जार्ते हैं। 
  8. रसार्यनों एवं जहरीली गैसों के संयंत्रों से हार्निकारक विषार्क्त गैसों के अचार्नक स्त्रार्व होने से वार्यु क प्रदूषण इतनार् अधिक हो जार्तार् है कि पलक झपकते ही सैकड़ों लोग मौत के शिकार हो जार्ते हैं।

वार्यु प्रदूषण के रोकथार्म के उपार्य

वार्यु प्रदूषण को कम करने के लिए निम्न उपार्य कारगर हो सकते हैं –

  1. समार्ज के प्रत्येक वर्ग को वार्यु प्रदूषण के घार्तक परिणार्मों से जार्ग्रत करनार्। 
  2. वर्तमार्न वार्यु प्रदूषण के स्तरों की जार्ँच के लिए व्यार्पक सर्वेक्षण तथार् अध्ययन कियार् जार्नार् चार्हिए तथार् प्रदूषण की नियमित मॉनीटरिंग की जार्नी चार्हिए। 
  3. वार्यु प्रदूषण से मार्नव शरीरों पर पड़ने वार्ले घार्तक प्रभार्वों से आम जनतार् को परिचित करार्यार् जार्नार् चार्हिए। 
  4. वार्यु प्रदूषकों को ऊपरी वार्युमण्डल में विसरित एवं प्रकीर्ण करने के लिए ठोस कदम उठार्ये जार्ने चार्हिए, तार्कि धरार्तलीय सतह पर इन प्रदूषकों क सार्न्द्रण कम हो जार्ये। 
  5. वार्युमण्डल में सकल प्रदूषण भार्र को घटार्ने के लिए सक्रिय प्रयार्स कियार् जार्नार् चार्हिए।
  6. कम हार्निकारक उत्पार्दों की खोज की जार्नी चार्हिए, यथार्-सौर चलित मोटर कार। 
  7. प्रार्णघार्तक प्रदूषण करने वार्ली सार्मग्रियों तथार् तत्त्वों के उत्पार्दन एवं उपभोग में तुरंत रोक लगार्नी चार्हिए।
  8. वार्यु प्रदूषण के नियंत्रण के वर्तमार्न तरीकों में सुधार्र कियार् जार्नार् चार्हिए तथार् प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए नये प्रभार्वी तरीकों की खोज के लिए कारगर प्रयार्स किये जार्ने चार्हिए। 
  9. विभिन्न उद्योगों की स्थार्पनार् के ही सार्थ प्रदूषण नियंत्रण उपकरण लगार्ये जार्ने चार्हिए। 
  10. ऐसे उद्योग, जो भार्री प्रदूषण फैलार्तें हों, उन्हें रिहार्यशी स्थार्नों से काफी दूर रखनार् चार्हिए। 
  11. वार्हनों के प्रदूषणों के बार्रे में रार्ज्य सरकार के संबंधित विभार्गों को वार्हनों की नियमित चैकिंग करनी चार्हिए। 
  12. कारखार्नों के पार्स सघन वृक्षार्वली लगार्ने से कर्इ प्रकार के प्रदूषक तत्त्व उनके द्वार्रार् अवशोषित होते हैं, अत: भार्री मार्त्रार् में वृक्षार्रोपण कियार् जार्नार् चार्हिए। 
  13. जनसार्धार्रण में भी प्रदूषण के बार्रे में हो रही अनभिज्ञतार् को दूर कर उन्हें प्रदूषण से होने वार्ली हार्नियों से अवगत करार्नार् चार्हिए।

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