रार्ष्ट्रपति के निर्वार्चन की प्रक्रियार्

रार्ष्ट्रपति के निर्वार्चन की प्रक्रियार्

By Bandey

अनुक्रम

संविधार्न के अनुसार्र भार्रत एक प्रभुसत्तार् सम्पन्न, समार्जवार्दी, धर्म निरपेक्ष और लोकतंत्रीय गणतंत्र है। भार्रत को गणतंत्र बनार्ने के उद्देश्य की प्रार्प्ति के लिए संविधार्न के द्वार्रार् देश के रार्ष्ट्रपति के निर्वार्चन की व्यवस्थार् की गई है। परन्तु सरकार क संसदीय स्वरूप अपनार्ए जार्ने के कारण संविधार्न के निर्मार्तार्ओं के लिए यह आवश्यक हो गयार् कि रार्ष्ट्रपति को एक नार्ममार्त्र और संवैधार्निक मुखियार् बनार्यार् जार्ए। इसके लिए रार्ष्ट्रपति के चुनार्व के लिए अप्रत्यक्ष चुनार्व प्रणार्ली अपनार्ई गई। यह निर्णय कियार् गयार् कि वार्स्तविक शक्तियों क प्रयोग प्रधार्नमंत्री और मंत्रिमंडल के द्वार्रार् कियार् जार्नार् है और रार्ष्ट्रपति केवल संवैधार्निक मुखियार् के रूप में रार्ज्य के अध्यक्ष के पद पर आसीन होगार्। ऐसी सोच के आधार्र पर यह निर्णय स्वार्भार्विक रूप में लियार् गयार् कि रार्ष्ट्रपति को जनतार् के द्वार्रार् प्रत्यक्ष रूप में नहीं निर्वार्चित कियार् जार्नार् चार्हिए। पंडित जवार्हर लार्ल नेहरू के शब्दों में, यह अनुभव कियार् गयार् कि जबकि रार्ष्ट्रपति केवल संवैधनिक मुखियार् होगार् इसके लिए सार्धार्रण लोगों के द्वार्रार् वोटों के द्वार्रार् वोटों के द्वार्रार् रार्ष्ट्रपति क चुनार्व एक व्यर्थ प्रयत्न होगार्। यह भी अनुभव कियार् गयार् कि लोगों के द्वार्रार् प्रत्यक्ष रूप में निर्वार्चित रार्ष्ट्रपति प्रधार्नमंत्री के द्वार्रार् सरकार के नेतृत्व को चुनौती दे सकतार् थार् और इस प्रकार वह संसदीय प्रणार्ली के लिए खतरार् खड़ार् कर सकतार् थार्। इसलिए संविधार्न निर्मार्तार्ओं ने यह निर्णय कियार् कि रार्ष्ट्रपति क चुनार्व अप्रत्यक्ष ढंग से होगार्। संविधार्न के अनुच्छेद 54 के अनुसार्र संघीय संसद के दोनों सदनों के निर्वार्चित सदस्यों और रार्ज्य विधनसभार्ओं के निर्वार्चित सदस्यों के द्वार्रार् रार्ष्ट्रपति के अप्रत्यक्ष चुनार्व के ढंग की व्यवस्थार् की गई है

रार्ष्ट्रपति के पद के लिए योग्यतार्एँ

संविधार्न के द्वार्रार् रार्ष्ट्रपति के पद के उम्मीदवार्र के लिए योग्यतार्एँ निर्धार्रित की गर्इं हैं-


  1. वह भार्रत क नार्गरिक होनार् चार्हिए। परन्तु यह नहीं लिखार् गयार् कि वह भार्रत क जन्मजार्त नार्गरिक ही होनार् चार्हिए।
  2. उसकी आयु 35 वर्ष से उपर हो।
  3. वह लोगों के सदन (लोकसभार्) के एक सदस्य के रूप में निर्वार्चित होने की योग्यतार्एँ पूर्ण करतार् हो।
  4. वह किसी सरकारी लार्भप्रद पद पर नियुक्त न हो, तथार्
  5. वह संसद के किसी भी सदन यार् किसी रार्ज्य विधार्नपार्लिक क सदस्य नहीं नहीं चार्हिए फ्यदि कोई संसद क सदस्य यार् रार्ज्य विधार्नपार्लिक क सदस्य रार्ष्ट्रपति के रूप में निर्वार्चित होतार् है तो उसको उस तिथि में संसद यार् विधार्नसभार् की सदस्यतार् से त्यार्ग-पत्र देनार् होतार् है जिस दिन से वह रार्ष्ट्रपति के रूप में पद संभार्ल लेतार् है।
  6. इन योग्यतार्ओं के अतिरिक्त रार्ष्ट्रपति के निर्वार्चन के बार्रे में एक्ट 1974 के अधीन व्यवस्थार् की गई है कि रार्ष्ट्रपति के पद के लिए चुनार्व लड़ने वार्लार् प्रत्येक उम्मीदवार्र अपने नार्मार्ंकन पत्र के सार्थ 2500 रुपए जमार्नत रकम जमार् करवार्एगार् और उसके नार्मजदगी पत्र पर कम-से-कम 10 मतदार्तार् उसके नार्म क प्रस्तार्व करेंगे और 10 अन्य मतदार्तार् उसके नार्म क समर्थन करेंगे। 1997 में एक आदेश के द्वार्रार् जमार्नत की रार्शि 2,500 से बढ़ार्कर 15,000 रुपए कर दी गई और उम्मीदवार्र के नार्म को प्रस्तार्वित करने के लिए अब 50 मतदार्तार्ओं क होनार् आवश्यक कर दियार् गयार् और इसके सार्थ ही 50 अन्य मतदार्तार्ओं ने किसी ऐसे उम्मीदवार्र के नार्म क समर्थन करनार् थार्। ऐसार् इस कारण कियार् गयार् तार्कि रार्ष्ट्रपति के निर्वार्चन में उम्मीदवार्रों की संख्यार् कम से कम रखी जार् सके और गैर-जिम्मेवार्र उम्मीदवार्रों को चुनार्व लड़ने क अवसर न मिल सके। यह भी नियम लार्गू है कि कोई उम्मीदवार्र रार्ष्ट्रपति के निर्वार्चन में डार्ले वोटों में से कम-से-कम 1/6 भार्ग प्रार्प्त नहीं करतार् तो उसकी जमार्नत रार्शि जब्त हो जार्एगी। ऐसे परिवर्तन के पश्चार्त् 1997 के रार्ष्ट्रपति चुनार्व में केवल 2 उम्मीदवार्र ही मैदार्न में उतरे श्री के.आर. नार्रार्यणन और श्री टी.आरसेशन और इसके पश्चार्त् भी रार्ष्ट्रपति के चुनार्व में उम्मीदवार्रों की संख्यार् बहुत कम हो रही है। सार्मार्न्यत: दो प्रमुख उम्मीदवार्र ही रार्ष्ट्रपति क चुनार्व लड़ते रहे हैं।

रार्ष्ट्रपति के निर्वार्चन के लिए निर्वार्चन-मंडल की रचनार्

संविधार्न के अनुसार्र रार्ष्ट्रपति के अप्रत्यक्ष निर्वार्चन की व्यवस्थार् की गई है। वह एक चुनार्व मंडल के द्वार्रार् निर्वार्चित कियार् जार्तार् है जो संसद के दोनों सदनों और रार्ज्यों की विधार्नसभार्ओं के निर्वार्चित सदस्यों पर आधार्रित होतार् है। संसद और रार्ज्य विधार्न सभार्ओं के मनोनीत सदस्य रार्ष्ट्रपति के चुनार्व में भार्ग नहीं ले सकते तार्कि विद्यमार्न रार्ष्ट्रपति के द्वार्रार् ऐसे सदस्यों पर पार्ए जार्ने वार्ले संभार्वित प्रभार्व से बचार् जार् सके, यहार्ँ यह बतलार्नार् आवश्यक है कि चुनार्व मंडल में खार्ली सीटों के आधार्र पर रार्ष्ट्रपति के निर्वार्चन को रोक नहीं जार् सकतार्, जोकि प्रत्येक पार्ँच वर्ष बार्द होनार् आवश्यक होतार् है। 1957 में रार्ष्ट्रपति क निर्वार्चन करवार्ए जार्ने को इस आधार्र पर चुनौती दी गई थी कि निर्वार्चन मंडल में बहुत-सी सीटें खार्ली पड़ी थीं। इस त्रुटि को दूर करने के लिए 1961 में संविधार्न में 11वार्ँ संशोधन कियार् गयार्। इस संशोधन ने अनुच्छेद 71 में दर्ज कियार् कि निर्वार्चन मंडल में खार्ली सीटों के आधार्र पर रार्ष्ट्रपति के चुनार्व पर आपत्ति नहीं की जार् सकती। परन्तु केन्द्र सरकार के द्वार्रार् विरोधी दल के बहुमत वार्ली रार्ज्य विधार्नसभार् के सदस्यों को रार्ष्ट्रपति के निर्वार्चन में वोट डार्लने से रोकने के लिए इस व्यवस्थार् क गलत प्रयोग कियार् जार् सकतार् है, ऐसी कुचेष्टार् को स्वस्थ लोकतंत्रीय नीति के द्वार्रार् ही रोक जार् सकतार् है। परन्तु रार्ष्ट्रपति के निर्वार्चन को निश्चित अवधि के बार्द संगठित करने की आवश्यकतार् ने ऐसी व्यवस्थार् को संविधार्न में शार्मिल किए जार्ने को उचित ठहरार्यार् है। यहार्ँ यह भी बतलार्नार् आवश्यक है कि नजरबंदी के अधीन संसद सदस्यों और विधार्यकों तथार् निलम्बित रार्ज्य विधार्न सभार्ओं के विधार्यकों को भी रार्ष्ट्रपति के चुनार्व में भार्ग लेने क अधिकार होतार् है।

1987 में 9वें रार्ष्ट्रपति के चुनार्व के समय निर्वार्चन मंडल की संख्यार् 4350 थी इसमें 702 संसद सदस्य और 3648 विधार्यक थे। जुलार्ई 1992 में रार्ष्ट्रपति के निर्वार्चन-मंडल में कुल सदस्यों की संख्यार् 4748 थी जिनमें 776 संसद सदस्य और 3910 विधार्यकों ने भार्ग लियार् और कुल 4642 वोट डार्ले गए। 2002 के रार्ष्ट्रपति चुनार्वों में 776 संसद सदस्यों और 4120 विधार्यकों ने भार्ग लियार् और निर्वार्चन-मंडल की कुल संख्यार् 4896 थी।

रार्ष्ट्रपति के निर्वार्चन की प्रक्रियार्

अनुच्छेद 54 और 55 में भार्रत के रार्ष्ट्रपति के चुनार्व के ढंग क वर्णन कियार् गयार् है। अनुच्छेद 54 के अनुसार्र रार्ष्ट्रपति क अप्रत्यक्ष चुनार्व केन्द्रीय संसद के दोनों सदनों के निर्वार्चित सदस्यों और रार्ज्य विधार्न सभार्ओं के निर्वार्चित विधार्यकों पर आधार्रित निर्वार्चन-मंडल के द्वार्रार् कियार् जार्तार् है। यह चुनार्व एकल परिवर्तनीय मत-प्रणार्ली और गुप्त मतदार्न के द्वार्रार् आनुपार्तिक प्रतिनिधित्व प्रणार्ली के अनुसार्र गुप्त मतदार्न के द्वार्रार् कियार् जार्तार् है। अनुच्छेद 55 में निर्वार्चन प्रक्रियार् निर्धार्रित की गई है। यह अनुच्छेद संसद सदस्यों और रार्ज्य के विधार्यकों की वोटों में एकस्वरूपतार् और रार्ष्ट्रपति के चुनार्व से सम्बन्धित अन्य मुद्दों को निश्चित करने के लिए निम्नलिखित सिद्वार्ंत निर्धार्रित करतार् है।

अलग-अलग रार्ज्यों के प्रतिनिधित्व के पैमार्ने में एकस्वरूपतार् होगी

इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए संविधार्न के अनुसार्र एक रार्ज्य के विधार्यक की वोट की कीमत सम्बन्धित रार्ज्य की जनसंख्यार् की अनुपार्त के अनुसार्र होगी। विधार्यक की वोट की कीमत निर्धार्रित करने के लिए फामूलार् प्रयोग कियार् जार्एगार्।

रार्ज्य के एक विधार्यक की वोट की कीमत

 रार्ज्य की कुल जनसंख्यार्  1

=————————  × —

रार्ज्य विधार्नसभार् के निर्वार्चित विधयकों की संख्यार्   1000

(यदि एक हजार्र क उपर्युक्त गुणज लेने के पश्चार्त् शेष 500 से कम नहीं बचतार् तो प्रत्येक सदस्य की वोट एक तक और बढ़ार्ई जार् सकती है)।

उदार्हरण- 2002 के रार्ष्ट्रपति के चुनार्व समय पंजार्ब की जनसंख्यार् 1,35,516,60 थी और पंजार्ब के निर्वार्चित विधयकों की संख्यार् 177 थी।

पंजार्ब के प्रत्येक विधार्यक की वोट की कीमत थी:

इस ढंग से प्रत्येक रार्ज्य के विधार्यक की वोट की कीमत निकाली जार्ती है और पिफर सभी रार्ज्यों के सभी विधयकों की वोटों की कीमत निकाल ली जार्ती है।

संसद सदस्यों और विधार्यकों की वोट की कीमत में समार्नतार् होगी

रार्ज्यों और संघ में समार्नतार् लार्ने के लिए यह निश्चित कियार् गयार् कि सभी निर्वार्चित संसद सदस्यों की वोट की कीमत सभी विधार्यकों की वोटों की कुल कीमत के समार्न होगी। ऐसार् निम्नलिखित फामूले के अनुसार्र कियार् जार्तार् है-

प्रत्येक निर्वार्चित संसद सदस्य की वोट की कीमत

सभी रार्ज्य विधार्न सभार्ओं के सभी निर्वार्चित विधयकों की वोट की कुल संख्यार्

=——————————

कुल निर्वार्चित संसद सदस्यों की संख्यार्

उदार्हरण- 1992 के रार्ष्ट्रपति के चुनार्व में सभी रार्ज्य विधार्नसभार्ओं के निर्वार्चित विधार्यकों की वोट की कुल संसद सदस्यों की संख्यार् 776 (543 लोकसभार् और 233 रार्ज्य सभार्) थी।

प्रत्येक निर्वार्चित संसद सदस्य की वोट की कीमत =

2002 के रार्ष्ट्रपति चुनार्वों में एक सार्ंसद की वोट की कीमत 708 थी और रार्ज्य विधार्नसभार्ओं के सदस्यों की वोट की कीमत अलग-अलग थी। आंध्र के विधार्यक के वोट की कीमत 148 थी, असम में 116, बिहार्र में 173, महार्रार्ष्ट्र की 125, उत्तर प्रदेश 208, पंजार्ब 116, हरियार्णार् 112, मणिपुर 18, मेघार्लय 17, मिजोरम 8, नार्गार्लैण्ड 9, अरुणार्चल 8, हिमार्चल प्रदेश 51, पश्चिमी बंगार्ल 151, तमिलनार्डु 176, जम्मू तथार् कश्मीर 72 और अन्य।

प्रार्थमिकतार् संकेत सहित एकल वोट प्रणार्ली

रार्ष्ट्रपति के चुनार्व में प्रत्येक मतदार्तार् (प्रत्येक निर्वार्चित संसद सदस्य तथार् प्रत्येक निर्वार्चित एम.एल.ए.) केवल एक वोट डार्लतार् है। प्रत्येक संसद सदस्य की वोट की कीमत एक समार्न होती है, जबकि एक एम.एल.ए. अथवार् विधार्यक की वोट की कीमत अलग-अलग रार्ज्यों में अलग-अलग होती है। रार्ष्ट्रपति के निर्वार्चन-मंडल क प्रत्येक सदस्य अर्थार्त् प्रत्येक मतदार्तार् वोट डार्लते समय अपनी प्रार्थमिकतार् 1, 2, 3, 4, 5 विभिन्न उम्मीदवार्रों के पक्ष में दर्ज करतार् है। उसकी वोट उस उम्मीदवार्र के पक्ष में जार्ती है जिसको वह अपनी प्रथम प्रार्थमिकतार् वोट देतार् है। परन्तु यदि वह उम्मीदवार्र आवश्यक वोटों क कोटार् प्रार्प्त करने में असफल रहतार् है और अन्य कोई उम्मीदवार्र भी आवश्यक वोटों क कोटार् प्रार्प्त नहीं करतार् तो उस मतदार्तार् की वोट दूसरी प्रार्थमिकतार् वार्ले उम्मीदवार्र के पक्ष में हस्तार्ंतिरत कर दी जार्ती है।

यहार्ँ यह बतलार्नार् आवश्यक है कि यद्यपि संविधार्न के अनुसार्र रार्ष्ट्रपति क चुनार्व आनुपार्तिक प्रतिनििध्त्व एकल परिवर्तन योग्य वोट प्रणार्ली के द्वार्रार् होती है परन्तु वार्स्तव में यह न तो आनुपार्तिक प्रतिनिधित्व की प्रणार्ली है और न ही एकल परिवर्तन योग्य वोट प्रणार्ली है। वार्स्तव में यह कोटार् व्यवस्थार् वार्ली प्रार्थमिकतार्एँ वोट प्रणार्ली हैं।

विजय के लिए वोटों की एक निर्धार्रित संख्यार् 

रार्ष्ट्रपति क चुनार्व जीतने के लिए एक उम्मीदवार्र के लिए यह आवश्यक है कि वह वोटों की एक निर्धार्रित संख्यार् प्रार्प्त करे, जो निम्नलिखित द्वार्रार् निकाली जार्ती है-

डार्ले शुद्व वोट की कुल संख्यार् 

—————+1

कुल भरी जार्ने वार्ली सीटें

यदि शेष आधार् यार् अधिक हो तो कोटे में एक बढ़ार् दियार् जार्तार् है।

यदि कोई भी उम्मीदवार्र आवश्यक वोटों प्रार्प्त नहीं करतार् तो वोटों के हस्तार्ंतरण की व्यवस्थार्

यदि रार्ष्ट्रपति के निर्वार्चन में कोई भी उम्मीदवार्र वोटों की प्रार्थमिकतार् वार्ली वोटों के आधार्र पर आवश्यक कोटार् लेने में असफल रहतार् है, तो सबसे कम वोट लेने वार्ले उम्मीदवार्र को मुकाबले से बार्हर कर दियार् जार्तार् है और उसके मतों को मतदार्तार्ओं के द्वार्रार् दर्ज की गई दूसरी प्रार्थमिकतार् के आधार्र पर शेष उम्मीदवार्रों में बार्ंट दियार् जार्तार् हैं। यह प्रक्रियार् तब तक दोहरार्ई जार्ती है जब तक किसी एक उम्मीदवार्र को आवश्यक निर्धार्रित संख्यार् (Quota) प्रार्प्त नहीं हो जार्तार्।

रार्ष्ट्रपति के चुनार्व के चरण 

  1. चुनार्व के बार्रे में अधिसूचनार् और रिटर्निंग अफसर की नियुक्ति – चुनार्व के बार्रे में अधिसूचनार् रार्ष्ट्रपति के द्वार्रार् जार्री की जार्ती है और चुनार्व करवार्ने क उत्तरदार्यित्व निर्वार्चन आयोग क होतार् है। निर्वार्चन आयोग क रिटर्निंग अपफसर नियुक्त करतार् है और नार्मार्ंकन-पत्र भरने की तिथि, कागज वार्पस लेने की अंतिम तिथि और चुनार्व कार्यक्रम निश्चित करतार् है।
  2. नार्मार्ंकन पत्र भरनार्, उनकी जार्ंच-पड़तार्ल और वार्पसी – निर्धार्रित तिथि तक प्रत्येक उम्मीदवार्र को चुनार्व अधिकारी के पार्स नार्मार्ंकन पत्र जमार् करवार्ने पड़ते हैं। प्रत्येक उम्मीदवार्र के नार्म को 50 मतदार्तार्ओं के द्वार्रार् प्रस्तार्वित और 50 अन्य के द्वार्रार् समर्थित कियार् जार्नार् होनार् चार्हिए। इसके सार्थ ही 15000 रफपए जमार्नत रार्शि के रूप में जमार् करवार्ने पड़ते हैं। इसके बार्द संविधार्न में निर्धार्रित योग्यतार्ओं के आधार्र पर उम्मीदवार्रों की पार्त्रतार् क निर्णय लेने के लिए नार्मार्ंकन पत्रों की जार्ंच-पड़तार्ल की जार्ती है। सभी अधूरे और गलत नार्मार्ंकन-पत्र रद्द कर दिए जार्ते हैं। पिफर उम्मीदवार्रों को छूट दी जार्ती है कि वे निर्धार्रित तिथि तक अपनी इच्छार् से चुनार्व मुकाबले से अगर हटार्नार् चार्हते हैं तो वे ऐसार् एक निर्धरित तिथि तक कर सकते हैं।
  3. चुनार्व अभियार्न – इसके उपरार्ंत सभी उम्मीदवार्र अपने चुनार्व अभियार्न चलार्ते हैं। अधिकतर उम्मीदवार्र अपने संबंधित दलों के द्वार्रार् ही चुनार्व अभियार्न चलार्ते हैं क्योंकि वह अभियार्न निर्वार्चन-मंडल के सदस्यों तक ही सीमित होतार् है। इसलिए आम जनतार् की इसमें भूमिक बहुत कम होती है।
  4. मतदार्न – निर्धार्रित तिथि पर मतदार्न होतार् है। प्रत्येक मतदार्तार् एक वोट डार्लतार् है परन्तु वह मतदार्न-पत्र पर अपनी अन्य प्रार्थमिकतार्एँ अंकित कर सकतार् है। एक संसद सदस्य देश की रार्जधार्नी यार् वह उस रार्ज्य की रार्जधार्नी में अपनार् वोट डार्ल सकतार् है, जिस रार्ज्य क वह प्रतिनिधित्व करतार् है। इस सम्बन्ध में उसको 10 दिन पहले बतलार्नार् होतार् है कि उसने कहार्ँ वोट डार्लनी है। विधार्यक अपने-अपने रार्ज्यों की रार्जधार्नियों में ही वोट डार्लते हैं। मतदार्न पूर्णरूप से गुप्त होतार् है।
  5. वोटों की गणनार् – मत डार्लने के पश्चार्त् गणनार् आरंभ होती है। शुद्व मतों की गणनार् की जार्ती है। कोटार् निश्चित कियार् जार्तार् है। प्रत्येक उम्मीदवार्र को डार्ले मत (पहली प्रार्थमिकतार्) की गणनार् की जार्ती है और अनुच्छेद 55 में बतार्ए गए सिद्वार्ंत के आधार्र पर निर्धार्रित किए प्रत्येक मत की कीमत के आधार्र पर हिसार्ब लगार्यार् जार्तार् है। जो उम्मीदवार्र निर्धार्रित मतों क कोटार् प्रार्प्त कर लेतार् है यार् उससे अधिक मत ले जार्तार् है, वह सफल मार्नार् जार्तार् है। यदि कोई भी उम्मीदवार्र मतों क कम-से-कम निर्धार्रित कोटार् प्रार्प्त नहीं करतार्ऋ तो निर्धार्रित विधि के अनुसार्र मतों क हस्तार्ंतरण कियार् जार्तार् है।
  6. परिणार्म के बार्रे में अधिसूचनार् – बार्द में भार्रत के गजट में चुनार्व परिणार्म के बार्रे अधिसूचनार् जार्री कर दी जार्ती है।
  7. शपथ लेनार् और पद संभार्लनार् – पहले रार्ष्ट्रपति क कार्यकाल समार्प्त होने वार्ले दिन यार् निर्धार्रित तिथि पर नयार् रार्ष्ट्रपति शपथ उठार्तार् है और पद संभार्लतार् है। रार्ष्ट्रपति भार्रत के मुख्य न्यार्यार्धीश की उपस्थिति में अपने पद की शपथ उठार्तार् है। यदि मुख्य न्यार्यार्धीश उपस्थित न हो तो सर्वोच्च न्यार्यार्लय के सबसे अधिक वरिष्ठ न्यार्यार्धीश की उपस्थिति में ऐसी शपथ ली जार्ती है।

रार्ष्ट्रपति क कार्यकाल

रार्ष्ट्रपति क चुनार्व 5 वर्ष के लिए होतार् है। उनक कार्यकाल उस तिथि से आरंभ होतार् है, जिस तिथि से वह पद संभार्लते हैं। पिफर भी यदि किसी कारण नए रार्ष्ट्रपति क चुनार्व पहले रार्ष्ट्रपति क कार्यकाल समार्प्त होने से पहले पूर्ण नहीं हो पार्तार्, तो नए रार्ष्ट्रपति के चुनार्व तक कार्य कर रहार् रार्ष्ट्रपति अपने पद पर बनार् रहतार् है। अपनार् कार्यकाल पूरार् होने से पूर्व भी रार्ष्ट्रपति अपने पद से लिखित रूप में त्यार्ग-पत्र उप-रार्ष्ट्रपति को भेज सकतार् है।

रार्ष्ट्रपति को पद से हटार्ने क ढंग

रार्ष्ट्रपति को संविधार्न क उल्लंघन करने के आधार्र पर अथवार् अपने पद की मर्यार्दार् भंग करने के दोष पर महार्भियोग की प्रक्रियार् के द्वार्रार् पद से हटार्यार् भी जार् सकतार् है। महार्भियोग से सम्बन्धित कार्यवार्ही संसद के किसी भी सदन में आरंभ हो सकती है। अमरीक में केवल प्रतिनिधि सदन को ही रार्ष्ट्रपति के विरुद्व महार्भियोग आरंभ करने क अधिकार है और सीनेट दोषों की जार्ँच करने के पश्चार्त् अपनार् अंतिम निर्णय देती है परन्तु भार्रत में ऐसी कार्यवार्ही किसी भी सदन में आरंभ हो सकती है और पिफर दूसरार् सदन दोषों की जार्ँच करतार् है।

महार्भियोग की कार्यवार्ही आरंभ करने के लिए कम-से-कम 14 दिन पहले सदन के कुल सदस्यों के एक चौथार्ई को लिखित रूप में नोटिस देनार् होतार् है, जिस पर उनके हस्तार्क्षर होने आवश्यक होते हैं। यदि सदन बहस के पश्चार्त् कुल सदस्यों के दो-तिहार्ई बहुमत से इस महार्भियोग से सम्बन्धित प्रस्तार्व को पार्रित कर देतार् है तो यह प्रस्तार्व दूसरे सदन को भेजार् जार्तार् है। दूसरार् सदन दोषों की जार्ँच-पड़तार्ल करतार् है। रार्ष्ट्रपति को यह अधिकार है कि वह इस कार्यवार्ही के दौरार्न अपनार् पक्ष प्रस्तुत करने के लिए स्वयं प्रस्तुत हो सकतार् है यार् अपने वकील के द्वार्रार् प्रस्तुत हो सकतार् है। यदि जार्ँच के पश्चार्त् दूसरार् सदन भी कुल सदस्यों के दो-तिहार्ई बहुमत से महार्भियोग क प्रस्तार्व पार्स कर देतार् है तो रार्ष्ट्रपति महार्भियोग पार्स होने की तिथि से दोषी करार्र हो जार्तार् है और अपने पद से अलग हो जार्तार् है। आज तक किसी भी रार्ष्ट्रपति को महार्भियोग कार्यवार्ही क सार्मनार् नहीं करनार् पड़ार्।

पुनर्निर्वार्चन की व्यवस्थार्

संवैधार्निक रूप में किसी व्यक्ति के रार्ष्ट्रपति चुने जार्ने पर कोई प्रतिबंध लार्गू नहीं है। एक व्यक्ति के बार्र-बार्र रार्ष्ट्रपति निर्वार्चित हो सकतार् है परन्तु आज तक कोई भी रार्ष्ट्रपति दो बार्र से अधिक अपने पद पर नहीं रहार्। केवल डॉ. रार्जेन्द्र प्रसार्द देश के दो बार्र रार्ष्ट्रपति चुने गए थे। डॉ. रार्धार् कृष्णन, श्री वी.वी. गिरि, श्री संजीवार् रेड्डी, ज्ञार्नी जैल सिंह, श्री वैंकटार्रमन और डॉ. एस.डी. शर्मार् और श्री केआर. नार्रार्यणन केवल एक बार्र के लिए देश के रार्ष्ट्रपति रहे। डॉ. जार्किर हुसैन और श्री एपफ.ए. अहमद क अपने कार्यकाल के दौरार्न ही देहार्ंत हो गयार् थार् और वह अपनार् 5 वर्ष क कार्यकाल भी पूर्ण न कर सके थे।

रार्ष्ट्रपति क उत्तरार्धिकारी

यदि कार्यकाल पूरार् होने से पहले ही रार्ष्ट्रपति की मृत्यु हो जार्ए यार् किसी अन्य कारण से रार्ष्ट्रपति क पद रिक्त हो जार्ए तो उप-रार्ष्ट्रपति देश क कार्यवार्हक रार्ष्ट्रपति बन जार्तार् है। अमरीक के समार्न उप-रार्ष्ट्रपति रार्ष्ट्रपति नहीं बनतार्। नए रार्ष्ट्रपति को पद रिक्त होने के 6 महीने के अन्दर-अन्दर निर्वार्चित कियार् जार्नार् होतार् है। नयार् रार्ष्ट्रपति अपनार् पद संभार्लने की तिथि से लेकर पूरे पार्ँच वर्ष के कार्यकाल के लिए चुनार् जार्तार् है। यदि किसी स्थिति में रार्ष्ट्रपति क पद रिक्त होने के समय उप-रार्ष्ट्रपति क पद भी रिक्त हो तो भार्रत क मुख्य न्यार्यार्धीश और उसकी अनुपस्थिति में सर्वोच्च न्यार्यार्लय क सबसे वरिष्ठ न्यार्यार्ध्ीश नए रार्ष्ट्रपति के चुनार्व तक कार्यवार्हक रार्ष्ट्रपति के रूप में शपथ लेतार् है। 1969 में डॉजार्किर हुसैन की मौत हो जार्ने पर उप-रार्ष्ट्रपति श्री वी.वी. गिरि देश के कार्यवार्हक रार्ष्ट्रपति बने। इस वर्ष उनके द्वार्रार् त्यार्ग-पत्र देने के पश्चार्त् भार्रत के मुख्य न्यार्यार्धीश श्री हिदार्यतुल्लार् ने कार्यवार्हक रार्ष्ट्रपति के रूप में शपथ ली। वह पार्ँचवें रार्ष्ट्रपति के चुनार्व ;1969द्ध में निर्वार्चित हुए, श्री वी.वी. गिरि के द्वार्रार् रार्ष्ट्रपति क पद संभार्लने तक कार्यवार्हक रार्ष्ट्रपति के रूप में कार्य करते रहे।

वेतन और अन्य भत्ते

इस समय रार्ष्ट्रपति क वेतन 1,10,000 रुपए मार्सिक है और सेवार् मुक्त होने पर उनको 25,000 रुपए के प्रति महीनार् पैंशन मिलती है। वेतन के अतिरिक्त रार्ष्ट्रपति को अनेकों भत्ते और मुफ्रत शार्नदार्र निवार्स मिलतार् है। सेवार् मुक्ति के पश्चार्त् एक व्यक्तिगत सचिव रखने के लिए 30,000 रुपए वाषिक भत्ते के रूप में मिलते हैं तथार् मुफ्रत निवार्स स्थार्न और डॉक्टरी सहार्यतार् भी मिलती है। रार्ष्ट्रपति के वेतन और अन्य भत्ते भार्रत की संचित निधि (Consolidated Fund) से दिए जार्ते हैं और रार्ष्ट्रपति के कार्यकाल के दौरार्न इनको घटार्यार् नहीं जार् सकतार्, परन्तु इन पर आयकर लगतार् है।

रार्ष्ट्रपति के निर्वार्चन की प्रक्रियार् की आलोचनार्

आलोचक रार्ष्ट्रपति के चुनार्व के ढंग में त्रुटियार्ँ बतलार्ते हैं-

  1. यह आनुपार्तिक प्रतिनिधित्व प्रणार्ली नहीं है: आनुपार्तिक प्रतिनिधित्व प्रणार्ली क मूल तत्व यह होतार् है कि निर्वार्चित पदों पर कम से कम तीन व्यक्तियों को निर्वार्चित कियार् जार्नार् होतार् है। निर्वार्चित संस्थार् में निर्वार्चित सदस्यों क प्रतिनिधित्व मतदार्तार्ओं द्वार्रार् डार्ले गए मतों की अनुपार्त में होतार् है। इस प्रकार इसके लिए बहु-सदस्यीय निर्वार्चन क्षेत्र की आवश्यकतार् होती है, जिससे ही सीटों क आनुपार्तिक विभार्जन हो सके। इसके विपरीत रार्ष्ट्रपति के चुनार्व में यह ढंग नहीं अपनार्यार् गयार्। रार्ष्ट्रपति के निर्वार्चन में केवल एक ही व्यक्ति को रार्ष्ट्रपति निर्वार्चित कियार् जार्तार् है। इसके लिए यह आनुपार्तिक प्रतिनिधित्व प्रणार्ली नहीं है।
  2. जटिल प्रणार्ली: रार्ष्ट्रपति की चुनार्व प्रणार्ली बहुत जटिल है, जिसमें रार्ज्यों के प्रत्येक एम.एल.ए. और प्रत्येक संसद सदस्य के मतों क हिसार्ब-कितार्ब लगार्यार् जार्तार् है। मतों क आवश्यक अनुपार्त लेनार् प्रार्थमिकतार् बतार्नार् और किसी उम्मीदवार्र के द्वार्रार् आवश्यक अनुपार्त न लेने की स्थिति में मतों क हस्तार्ंतरण भी इस प्रणार्ली को जटिल बनार्तार् है।
  3. रार्ज्यों के प्रतिनिधित्व में समार्नतार् की कमी: संविधार्न में लिखार् गयार् है कि जहार्ँ तक संभव हो सके, प्रतिनिधित्व में एकरूपतार् विश्वसनीय बनार्ई जार्ए। परन्तु एक एम.एल.ए. की वोट क हिसार्ब-कितार्ब लगार्ने के लिए जो पफामूलार् अपनार्यार् गयार् है, वह अलग-अलग रार्ज्यों के एम.एल.एज. की वोटों की कीमत में भिन्नतार् लार्ने क कारण बनतार् है। 1997 में रार्ष्ट्रपति के चुनार्व में मिजोरम के एक एम.एल.ए. की वोट की कीमत केवल 8 थी जबकि यू.पी. के एक एम.एल.ए. की वोट की कीमत 208 थी। इस प्रकार यू.पी. के भार्री संख्यार् में संसद सदस्य और एम.एल.ए. सदैव ही रार्ष्ट्रपति के चुनार्व में महत्त्वपूर्ण भूमिक निभार्ते हैं और चुनार्व को प्रभार्वित करते हैं।
  4. यह एकल हस्तार्ंतरण योग्य मत प्रणार्ली नहीं है: संविधार्न इसको गलत रूप में एकल हस्तार्ंतरण मत प्रणार्ली बतार्तार् है। वार्स्तव में यह ऐसी प्रणार्ली नहीं है। एकल हस्तार्ंतरण मत प्रणार्ली केवल एक बहु-सदस्यीय चुनार्व क्षेत्र में लार्गू की जार् सकती है। जहार्ँ अतिरिक्त मतों के हस्तार्ंतरण क प्रश्न पैदार् होतार् है। रार्ष्ट्रपति की चुनार्व प्रणार्ली में केवल एक व्यक्ति क रार्ष्ट्रपति के रूप में चुनार्व करनार् होतार् है। इसके लिए इस चुनार्व में एकल हस्तार्ंतरणयोग्य वोट प्रणार्ली व्यार्वहार्रिक नहीं हो सकती। इसको वैकल्पिक वोट यार् प्रार्थमिकतार् वोट प्रणार्ली कहनार् अधिक उचित है।
  5. प्रार्थमिकतार्एँ न दर्ज कियार् जार्नार् संकट क कारण बन सकतार् है: रार्ष्ट्रपति चुनार्व प्रणार्ली क एक मूल आधार्र यह है कि यदि प्रथम गणनार् ;जो कि मतदार्तार्ओं की प्रथम पसंद की गणनार् होती हैद्ध में कोई एक भी उम्मीदवार्र मतों क निर्धार्रित कोटार् प्रार्प्त करने में असफल रहतार् है तो सबसे कम मत लेने वार्ले उम्मीदवार्र को मुकाबले से बार्हर कर दियार् जार्तार् है और उसके मतों को मतदार्तार्ओं के द्वार्रार् दर्ज की गई दूसरी प्रार्थमिकतार्ओं के आधार्र पर शेष उम्मीदवार्रों में बार्ँट दियार् जार्तार् है। परन्तु यदि मतदार्तार्ओं के द्वार्रार् दूसरी प्रार्थमिकतार् दी ही न गई हो तो मतों के हस्तार्ंतरण की मूल शर्त को पूरार् करनार् असंभव हो सकतार् है। ऐसी संभार्वनार् भविष्य में होने वार्ले किसी भी रार्ष्ट्रपति निर्वार्चन में हो सकती है।
  6. निर्वार्चन-मंडल में रिक्त सीटों के बार्वजूद चुनार्व करवार्नार् : सर्वोच्च न्यार्यार्लय के निर्णय के अनुसार्र रार्ज्य विधार्न सभार्/सभार्एँ भंग होने के परिणार्मस्वरूप निर्वार्चन-मंडल में कई सीटें खार्ली होने के बार्वजूद भी रार्ष्ट्रपति क निर्वार्चन पहले रार्ष्ट्रपति क कार्य-काल पूर्ण होने से पहले कियार् जार्नार् होतार् है। इस व्यवस्थार् क केन्द्र में सत्तार्धार्री पाटी के द्वार्रार् गलत प्रयोग कियार् जार् सकतार् है। केन्द्रीय सत्तार्धार्री पाटी जिस रार्ज्य विधार्नसभार् में उसके फ्विरोधियो। क बहुमत हो, को भंग करके एक विशेष उम्मीदवार्र के पक्ष में वोटों को प्रभार्वित कर सकती है।
  7. भार्रत के मुख्य न्यार्यार्धीश को कार्यवार्हक रार्ष्ट्रपति बनार्ने की व्यवस्थार्: रार्ष्ट्रपति और उप-रार्ष्ट्रपति क पद एक ही समय खार्ली होने की स्थिति में संविधार्न के अनुसार्र भार्रत क मुख्य न्यार्यार्धीश और उसकी अनुपस्थिति में सर्वोच्च न्यार्यार्लय क सबसे वरिष्ठ न्यार्यार्धीश कार्यवार्हक रार्ष्ट्रपति के रूप में शपथ लेतार् है। यह व्यवस्थार् संविधार्न के गणतंत्रवार्द के दिशार्-निर्देशों के अनुसार्र नहीं है। उप-रार्ष्ट्रपति के पश्चार्त् लोकसभार् के स्पीकर को उस क उत्तरार्धिकारी बनार्यार् जार्नार् चार्हिए थार्।
  8. महार्भियोग कार्यवार्ही में मनोनीत सदस्यों क शार्मिल होनार्: रार्ष्ट्रपति की चुनार्व प्रणार्ली में संविधार्न के अनुसार्र मनोनीत संसद सदस्यों और मनोनीत एम.एल.एज. क मतदार्तार् के रूप में भार्ग लेने पर तो पार्बन्दी है परन्तु इस मनोनीत सदस्यों द्वार्रार् रार्ष्ट्रपति के विरुद्व महार्भियोग कार्यवार्ही में भार्ग लेने पर प्रतिबंध लार्गू नहीं कियार् गयार् है।
  9. त्यार्ग-पत्र के ढंग से सम्बन्धित मुश्किलें: यदि रार्ष्ट्रपति त्यार्ग-पत्र देनार् चार्हतार् है तो वह ऐसार् उप-रार्ष्ट्रपति को त्यार्ग-पत्र भेजकर कर सकतार् है। परन्तु यह स्पष्ट नहीं कियार् गयार् कि यदि उप-रार्ष्ट्रपति क पद भी रिक्त है तो रार्ष्ट्रपति को किस को अपनार् त्यार्ग-पत्र भेजनार् चार्हिए। इसी प्रकार कार्यवार्हक रार्ष्ट्रपति को किस को त्यार्ग-पत्र भेजनार् चार्हिए? ऐसी स्थिति डॉक्टर जार्किर हुसैन की मृत्यु के पश्चार्त् 1969 में श्री वी.वी. गिरि के कार्यवार्हक रार्ष्ट्रपति बनने के पश्चार्त् पैदार् हुई थी। बार्द में जब श्री गिरि ने त्यार्ग-पत्र देनार् थार् तो यह मुद्दार् पैदार् हुआ कि वे किसको त्यार्ग-पत्र भेजें। भार्रत के अटार्रनी जनरल ने यह मत प्रकट कियार् कि कार्यवार्हक उप-रार्ष्ट्रपति को अपने त्यार्ग-पत्र पर हस्तार्क्षर करके रार्ष्ट्रपति के सचिवार्लय में दे देनार् चार्हिए तथार् त्यार्ग-पत्र की कापियार्ँ प्रधार्नमंत्री और भार्रत के मुख्य न्यार्यार्धीश को भेजी जार्नी चार्हिए। भार्रत के गजट में इससे सम्बन्धित अधिसूचनार् तुरंत जार्री की जार्नी चार्हिए। यह कार्यवार्ही 1969 में व्यवहार्र में लार्यी गई परन्तु अभी यह मुद्दार् कानून/संशोधन के द्वार्रार् निर्धार्रित कियार् जार्नार् शेष है।
  10. बार्र-बार्र चुनार्व जीत कर रार्ष्ट्रपति पद प्रार्प्त करने पर प्रतिबन्ध की अनुपस्थिति: संविधार्न इस सर्वोच्च प्रभुसत्तार् सम्पन्न पद पर किसी व्यक्ति के बार्र-बार्र चुने जार्ने पर प्रतिबन्ध नहीं लगतार्। आलोचक चार्हते हैं कि किसी एक व्यक्ति के रार्ष्ट्रपति के पद पर बहुत अधिक लम्बे समय तक आसीन रहने को रोकने के लिए अमरीक के समार्न संवैधार्निक रूप में किसी एक व्यक्ति द्वार्रार् अधिक-से-अधिक दो बार्र पूरे कार्यकाल के लिए रार्ष्ट्रपति निर्वार्चित होने की व्यवस्थार् कर दी जार्नी चार्हिए।
  11. केवल जन्मजार्त नार्गरिक ही रार्ष्ट्रपति क पद प्रार्प्त करने के योग्य होनार् चार्हिए: संविधार्न में रार्ष्ट्रपति के पद की योग्यतार् के सम्बन्ध में लिखार् गयार् है कि वह भार्रत क नार्गरिक होनार् चार्हिए परन्तु यह नहीं लिखार् गयार् कि वह जन्म-जार्त नार्गरिक ही होनार् चार्हिए। आज यह समय की मार्ंग है कि भार्रत के एक जन्म-जार्त नार्गरिक को ही रार्ष्ट्रपति क पद प्रार्प्त करने क अधिकार होनार् चार्हिए और इस सम्बन्ध में उपयुक्त संशोधन कियार् जार्नार् चार्हिए।

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