रार्ज्य उच्च न्यार्यार्लय के क्षेत्रार्धिकार और शक्तियार्ं

संविधार्न की धार्रार् 214 के अन्तर्गत रार्ज्य स्तर पर प्रत्येक रार्ज्य के लिए एक उच्च न्यार्यार्लय (High Court) की व्यवस्थार् की गई है। (“There shall be a High Court of each state.”) इसके सार्थ ही अनुच्छेद 231 में यह भी कहार् गयार् है कि संसद दो यार् दो से अधिक रार्ज्यों और केन्द्र प्रशार्सित क्षेत्रों के लिए एक उच्च न्यार्यार्लय की भी व्यवस्थार् कर सकती है। अत: 1966 के पंजार्ब पुनर्गठन कानून के द्वार्रार् संसद ने पंजार्ब और हरियार्णार् रार्ज्यों एवं चण्डीगढ़ के केन्द्र-प्रशार्सित क्षेत्र के लिए एक उच्च न्यार्यार्लय स्थार्पित कियार्, जोकि चण्डीगढ़ में है। रार्ज्यों के उच्च न्यार्यार्लय अखिल भार्रतीय न्यार्य-व्यवस्थार् क अंग होते हुए भी अपने आप में स्वतंत्र इकाइयार्ँ हैं। उनके उफपर अपने रार्ज्यों के विधार्नमण्डल यार् कार्यपार्लिक क कोई नियंत्रण नहीं है। उच्च न्यार्यार्लय एक रार्ज्य क सबसे बड़ार् न्यार्यार्लय है और एक रार्ज्य के बार्की सभी न्यार्यार्लय उसके अधीन होते हैं।

रार्ज्य उच्च न्यार्यार्लय की रचनार्

प्रत्येक उच्च न्यार्यार्लय में एक मुख्य न्यार्यार्धीश (Chief Justice) और कुछ अन्य न्यार्यार्धीश होते हैं। इनकी संख्यार् संबंधित रार्ज्यों की जरूरत को ध्यार्न में रखकर रार्ष्ट्रपति द्वार्रार् तय की जार्ती है। काम की अधिकतार् होने पर एक उच्च न्यार्यार्लय में अधिक-से-अधिक दो वर्षों के लिए अतिरिक्त न्यार्यार्धीश (Additional Judges) Hkh नियुक्त किए जार् सकते हैं। इस समय पंजार्ब और हरियार्णार् उच्च न्यार्यार्लय में एक मुख्य न्यार्यार्धीश और 26 अन्य न्यार्यार्धीश है। इलार्हार्बार्द उच्च न्यार्यार्लय में इस समय 60 न्यार्यार्धीश हैं।


रार्ज्य उच्च न्यार्यार्लय के न्यार्यार्धीशों लिए योग्यतार्एँ

उच्च न्यार्यार्लय के न्यार्यार्धीशों और मुख्य न्यार्यार्धीशों के लिए योग्यतार्एँ तय की गई हैं-

  1. वह भार्रत क नार्गरिक हो।
  2. वह भार्रतीय संघ के किसी भी क्षेत्र में कम-से-कम 10 वर्ष तक किसी न्यार्यिक पद पर रह चुक हो।

अथवार्

देश के किसी एक उच्च न्यार्यार्लय यार् एक से अधिक उच्च न्यार्यार्लयों में 10 वर्षों तक वकालत कर चुक हो। किसी व्यक्ति की वकालत क 10 वर्ष के समय की शर्त को पूरार् करने के लिए उसमें वह समय भी शार्मिल कियार् जार्तार् है जिस समय के लिए वह उच्च न्यार्यार्लय में वकालत शुरू करने के बार्द किसी न्यार्यिक पद पर किसी न्यार्यार्धिकरण (Tribunal) के सदस्य के पद पर नियुक्त रहार् हो अथवार् केन्द्र यार् रार्ज्य सरकार के अधीन किसी ऐसे पद पर आसीन रहार् हो जिसके लिए कानून के विशिष्ट ज्ञार्न की आवश्यकतार् हो।

42वें संशोधन के द्वार्रार् यह व्यवस्थार् की गई थी कि ऐसे व्यक्ति को उच्च न्यार्यार्लय क न्यार्यार्धीश नियुक्त कियार् जार् सकतार् है, जो रार्ष्ट्रपति की दृष्टि में प्रसिद्व न्यार्यशार्स्त्री हो अथवार् जो किसी ट्रिब्यूनल यार् केन्द्रीय सरकार अथवार् रार्ज्य सरकार के अधीन कानून की विशेष जार्नकारी रखने वार्ले पद पर 10 वर्ष तक कार्य कर चुक हो। लेकिन 44 वे संशोधन द्वार्रार् यह व्यवस्थार् की गई है कि रार्ष्ट्रपति ऐसे व्यक्ति को न्यार्यार्धीश नियुक्त नहीं कर सकतार्, जो उसकी दृष्टि में प्रसिद्व न्यार्यशार्स्त्री हो, जब तक कि वह व्यक्ति उफपरलिखित अन्य योग्यतार्ओं को पूरार् न करतार् हो।

रार्ज्य उच्च न्यार्यार्लय के न्यार्यार्धीशों की नियुक्ति

उच्च न्यार्यार्लय के मुख्य न्यार्यार्धीश तथार् अन्य न्यार्यार्धीशों की नियुक्ति रार्ष्ट्रपति सर्वोच्च न्यार्यार्लय के मुख्य न्यार्यार्धीश तथार् संबंधित रार्ज्य के रार्ज्यपार्ल की सलार्ह से करतार् है। अन्य न्यार्यार्धीशों (मुख्य न्यार्यार्धीश को छोड़कर) की नियुक्ति करते समय रार्ष्ट्रपति को उस उच्च न्यार्यार्लय के मुख्य न्यार्यार्धीश की भी सलार्ह लेनी पड़ती है। मुख्य न्यार्यार्धीश की नियुक्ति प्रार्य: वरिष्ठतार् (Seniority) के आधार्र पर की जार्ती है। लेकिन 10 मई, 1974 को पंजार्ब और हरियार्णार् के उच्च न्यार्यार्लय के मुख्य न्यार्यार्धीश डी. के. महार्जन (D.K. Mahajan) के सेवार्-निवृत्त होने पर जस्टिस नरूलार् को मुख्य न्यार्यार्धीश नियुक्त कियार् गयार्, जिस पर उनसे सीनियर न्यार्यार्धीश प्रेमचन्द पंडित ने अपनार् त्यार्गपत्र दे दियार्। 27 जनवरी, 1983 को केन्द्रीय सरकार ने यह घोषणार् की कि देश के सभी उच्च न्यार्यार्लयों के मुख्य न्यार्यार्धीश रार्ज्य के बार्हर से लिए जार्एँगे तथार् यह भी निर्णय लियार् गयार् कि भविष्य में सब रार्ज्यों के उच्च न्यार्यार्लयों के मुख्य न्यार्यार्धीश दूसरे रार्ज्यों के उच्च न्यार्यार्लयों से वहार्ँ पर उनकी वरिष्ठतार् (Seniority) तथार् योग्यतार् (Ability) के आधार्र पर लिए जार्एँगे। 15 जुलार्ई, 1986 को सर्वोच्च न्यार्यार्लय ने सरकार को यह आदेश दियार् कि वह मुख्य न्यार्यार्धीश के अन्य रार्ज्यों में से नियुक्त करने की नीति को लार्गू करे।

रार्ज्य उच्च न्यार्यार्लय क कार्यकाल

उच्च न्यार्यार्लय क न्यार्यार्धीश 62 वर्ष की आयु तक अपने पद पर काम करतार् है। परन्तु वह इससे पूर्व अपने पद से त्यार्ग-पत्र देकर अलग हो सकतार् है। अपनी अवधि के समार्प्त होने के पश्चार्त् वह किसी स्थार्न पर सरकार की स्वीकृति के बिनार् कोई भी कार्य नहीं कर सकतार्।

पदच्युति

यदि संसद के दोनों सदन अपने-अपने सदस्यों की कुल संख्यार् के बहुमत से और सदन की बैठक के उपस्थित सदस्यों के 2/3 बहुमत से किसी उच्च न्यार्यार्लय के न्यार्यार्धीश को सदार्चार्र यार् अयोग्यतार् (Misbehaviour or Incapacity) के अपरार्ध में अपरार्धी ठहरार्ए और इस विषय में रार्ष्ट्रपति को सम्बोधित करे, तो रार्ष्ट्रपति उस न्यार्यार्धीश को पद से हटार् देतार् है।

वेतन

उच्च न्यार्यार्लय के मुख्य न्यार्यार्धीश को अस्सी हजार्र रुपये मार्सिक तथार् अन्य न्यार्यार्धीशों को सत्तर हजार्र रुपये मार्सिक वेतन मिलतार् है। वेतन के अतिरिक्त उन्हें कई प्रकार के भत्ते मिलते हैं। वित्तीय संकटकालीन की स्थिति को छोड़कर अन्य किसी भी परिस्थिति में उनके वेतन तथार् भत्तों में कमी नहीं की जार् सकती। माच, 1976 में संसद ने कानून पार्स करके उच्च न्यार्यार्लय के न्यार्यार्धीशों के लिए रिटार्यर होने के पश्चार्त् पेंशन की भी व्यवस्थार् की गई।

शपथ

धार्रार् 219 के अन्तर्गत प्रत्येक न्यार्यार्धीश को अपनार् पद ग्रहण करते समय रार्ज्य के रार्ज्यपार्ल यार् उसके द्वार्रार् नियुक्त अन्य पदार्धिकारी के समक्ष अपने पद की शपथ लेनी पड़ती है कि वह संविधार्न में आस्थार् रखेगार्, अपने कर्त्तव्यों क ईमार्नदार्री से पार्लन करेगार् व संविधार्न तथार् कानून की रक्षार् करेगार्।

रार्ज्य उच्च न्यार्यार्लय के न्यार्यार्धीशों क स्थार्नार्न्तरण

रार्ष्ट्रपति न्यार्यार्धीशों क एक रार्ज्य से दूसरे रार्ज्य में तबार्दलार् कर सकतार् है। आन्तरिक आपार्तकाल के दौरार्न सार्त न्यार्यार्धीशों को एक उच्च न्यार्यार्लय ने अपने महत्त्वपूर्ण निर्णय में उच्च न्यार्यार्लयों के मुख्य न्यार्यार्धीशों तथार् अन्य न्यार्यार्धीशों के अन्तर्रार्ज्यीय तबार्दले को वैध करार्र दियार्। केन्द्रीय सरकार ने 27 जनवरी, 1983 को एक महत्त्वपूर्ण घोषणार् की थी कि ऐसे मुख्य न्यार्यार्धीश को, जिसके सेवार्-निवृत्त होने में एक वर्ष अथवार् कम समय रह गयार् हो तो उसे दूसरे रार्ज्य के उच्च न्यार्यार्लय में स्थार्नार्न्तरित नहीं कियार् जार्एगार्।

सार्मार्न्य व्यवस्थार्एँ

उच्च न्यार्यार्लय क न्यार्यार्धीश सेवार्निवृत्त होने के पश्चार्त् सर्वोच्च न्यार्यार्लय तथार् अन्य रार्ज्यों के सिवार्य किसी दूसरे न्यार्यार्लय में वकालत नहीं कर सकतार्। इसक अभिप्रार्य यह है कि सेवार् से निवृत्त होने वार्लार् न्यार्यार्धीश उस न्यार्यार्लय में वकालत नहीं कर सकतार्, जहार्ँ से वह सेवार्निवृत्त हुआ हो।

रार्ज्य उच्च न्यार्यार्लय के क्षेत्रार्धिकार और शक्तियार्ं

उच्च न्यार्यार्लयों के अधिकार और उनके क्षेत्रार्धिकार लगभग वैसार् ही है जैसे कि संविधार्न लार्गू होने से पहले थे। उच्च न्यार्यार्लय क मुख्य काम मुकदमों क निर्णय करनार् है। परन्तु इसे न्यार्यिक पुनर्विचार्र की शक्ति भी प्रार्प्त है। इसके अतिरिक्त इसे अपने अधीनस्थ न्यार्यार्लयों की देख-रेख करने क प्रशार्सकीय कार्य भी करनार् होतार् है। अत: इसकी शक्तियों तथार् कार्यों क अध्ययन इस प्रकार कियार् जार् सकतार् है-

प्रार्रंभिक क्षेत्रार्धिकार

  1. कलकत्तार्, बंबई और मद्रार्स उच्च न्यार्यार्लयों में कुछ दीवार्नी व पफौजदार्री मुकदमे प्रथम बार्र में ही सीधे पेश किए जार् सकते हैं। उनके लिए यह आवश्यक नहीं कि वे पहले अधीन न्यार्यार्लयों में पेश किए जार्यें जैसार् कि अन्य रार्ज्यों में पार्यार् जार्तार् है।
  2. नौकाधिकरण – इच्छार्-पत्र अर्थार्त् वसीयत (Probate), विवार्ह विधि, कम्पनी विधि तथार् विवार्ह-विच्छेद आदि के मुकदमे भी सीधे उच्च न्यार्यार्लयों के पार्स जार् सकते हैं। उच्च न्यार्यार्लयों के अपमार्न के विषय में भी सभी उच्च न्यार्यार्लयों को प्रार्रंभिक क्षेत्रार्धिकार प्रार्प्त है।
  3. उच्च न्यार्यार्लय नार्गरिकों के मौलिक अधिकारों क भी रक्षक है। यदि किसी नार्गरिक के मौलिक अधिकारों पर आघार्त होतार् है, तो वह नार्गरिक सीधार् सर्वोच्च न्यार्यार्लय में प्राथनार्-पत्र दे सकतार् है अथवार् उच्च न्यार्यार्लय में। उच्च न्यार्यार्लय कई लेखों (Writs), जैसे–बंदी प्रत्यक्षीकरण (Writ of Habeas Corpus), परमार्देश (Writ of Mandamus), प्रतिषेध (Writ of Prohibition), उत्प्रेक्षण (Writ of Certiorari), पृच्छार् लेख (Writ of Quo-Warranto) के द्वार्रार् नार्गरिकों के अधिकारों की रक्षार् करतार् है। इन लेखों (Writs) को जार्री करने क अधिकार अन्य सब कार्यों के लिए भी है।

42 वें संशोधन द्वार्रार् उच्च न्यार्यार्लयों को कुछ शक्तियों से वंचित कियार् गयार् थार्, लेकिन अब 44वें संशोधन के अन्तर्गत 42 वें संशोधन से पूर्व की स्थिति को पुन: स्थार्पित करने की व्यवस्थार् की गई है।

अपीलीय क्षेत्रार्धिकार

सभी उच्च न्यार्यार्लयों को अपने अधीन न्यार्यार्लयों के पैफसलों के विरूद्व अपील सुनने क अधिकार प्रार्प्त है, जिन्हें दो भार्गों में विभार्जित कियार् जार् सकतार् है। (i) दीवार्नी (Civil) तथार् (ii) फौजदार्री (Criminal)।

(i) दीवार्नी–दीवार्नी मार्मलों में उच्च न्यार्यार्लयों में कोई भी अपील यार् पहली अपील होगी अथवार् दूसरी अपील। पहली अपील क अर्थ यह है कि जिलार् न्यार्यार्लयों के निर्णयों के विरूद्व सीधे उच्च न्यार्यार्लय में अपील की जार् सकती है। ऐसार् तभी हो सकतार् है जब उस मुकदमे में कानून क कोई गहरार् प्रश्न उलझार् हुआ हो। दूसरे, जब एक अपील जिले क न्यार्यार्लय सुन चुक है तो उसके निर्णय के विरूद्व भी अपील उच्च न्यार्यार्लय में हो सकती है परन्तु उसमें कोई कानूनी प्रश्न उलझार् होनार् चार्हिए। उच्च न्यार्यार्लय में पहली तथार् दूसरी अपीलीय क्षेत्रार्िध्कार के अंर्तगत यदि उच्च न्यार्यार्लय के एक न्यार्यार्धीश ने अपील सुनी है तो उसके निर्णय के विरुद्व उच्च न्यार्यार्लय में फिर अपील हो सकती है। ऐसी स्थिति में कई न्यार्यार्धीश अपील सुनते हैं। यहार्ँ यह उल्लेखनीय है कि 9 जनवरी, 1980 को पंजार्ब न्यार्यार्लय (संशोधन) अध्यार्देश (Punjab Courts [(Amendment Ordinance, 1979), लार्गू हुआ थार्। इस अध्यार्देश के अनुसार्र जिस अभियोग क संबंध 20,000 रुपये से 5 लार्ख रुपये तक की रकम के सार्थ है, इस अभियोग संबंधी पहली अपील जिलार् न्यार्यार्ध्ीश के पार्स और जिलार् न्यार्यार्धीश के निर्णय विरुद्व अन्य अपील रार्ज्य के उच्च न्यार्यार्लय (High Court) के पार्स होगी।

(ii) फौजदार्री–फौजदार्री मुकदमों में निम्नलिखित मार्मलों में निचले न्यार्यार्लयों के निर्णय के विरूद्व अपील उच्च न्यार्यार्लय में हो सकती है-

  1. यदि सेशन जज ने किसी अपरार्धी को मृत्यु-दण्ड दियार् हो तो उसकी पुष्टि उच्च न्यार्यार्लय से होनी चार्हिए। वह अपरार्धार्ी स्वयं भी उच्च न्यार्यार्लय में अपील कर सकतार् है।
  2. यदि निचले न्यार्यार्लय ने किसी अपरार्धी को 4 वर्ष यार् इससे अधिक की सजार् दी हो।
  3. किसी प्रेसीडेन्सी मजिस्टे्रट के निर्णय के विरुद्व अपील उच्च न्यार्यार्लय में होगी।
  4. उच्च न्यार्यार्लय के निर्णयों के विरुद्व सर्वोच्च न्यार्यार्लय (Supreme Court) में अपील की जार् सकती है। ऐसी अपील प्रत्येक मुकदमे में नहीं हो सकती। कानूनार्नुसार्र जिन अभियोगों में अपील की जार् सकती है, उनके लिए यह अनिवाय है कि संबंधित उच्च न्यार्यार्लय (High Court) अपील करने की आज्ञार् दे। उच्च न्यार्यार्लयों की आज्ञार् के बिनार् उसके निर्णयों के विरुद्व न्यार्यार्लय अपनी इच्छार् के अनुसार्र भी किसी मुकदमे संबंधी अनुच्छेद 136 के अन्तर्गत विशेष अपील करने की आज्ञार् दे सकतार् है।

प्रशार्सकीय शक्तियार्ँ

रार्ज्य की न्यार्य व्यवस्थार् में उच्च न्यार्यार्लय क स्थार्न सबसे उफँचार् होतार् है। वह सभी अधीनस्थ न्यार्यार्लयों के काम की देखभार्ल करतार् है और उनके कार्य संचार्लन के नियम व विनिमय बनार्तार् है। इसकी प्रशार्सकीय शक्तियार्ँ हैं-

  1. वह न्यार्यार्लय अपने रार्ज्य की सीमार् में स्थित सभी न्यार्यार्लयों तथार् न्यार्यार्धिकरणों (Tribunals) क निरीक्षण कर सकतार् है, परंतु सैनिक न्यार्यार्लय इसके एक प्रशार्सनिक क्षेत्र से बार्हर हैं।
  2. इसे अधीनस्थ न्यार्यार्लयों के लिए कार्यवार्ही के नियम (Rules of Procedure) बनार्ने क भी अधिकार है।
  3. यह निम्न न्यार्यार्लयों के लिए अपनी कार्यवार्ही क रिकार्ड रखने, हिसार्ब-कितार्ब तथार् कागज-पत्रों को सुरक्षित रखने की विधि के बार्रे में नियम बनार् सकतार् है।
  4. इसे यह अधिकार प्रार्प्त है कि किसी भी न्यार्यार्लय से कोई कागज-पत्र अथवार् रिकार्ड आदि मँगवार्कर उसक स्वयं निरीक्षण कर सके।
  5. यह किसी मुकदमे को एक न्यार्यार्लय से दूसरे न्यार्यार्लय में भी बदल सकतार् है।
  6. उच्च न्यार्यार्लय अभिलेख न्यार्यार्लय (Court of Record) है। इसक भार्व यह है कि इसके निर्णय और कार्य-पद्वति को दूसरी अदार्लतों में उदार्हरण के रूप में पेश कियार् जार् सकतार् है।
  7. इसे रार्ज्य के किसी न्यार्यार्लय से किसी मुकदमे को अपने पार्स मँगवार्ने अथवार् यह आदेश देने क भी अधिकार है कि वह उस मुकदमे क निर्णय शीघ्र करें।
  8. इसे यह देखने क अधिकार है कि इसके अधीनस्थ न्यार्यार्लय अपनी सीमार् क उल्लंघन तो नहीं करते तथार् अपने कर्त्तव्यों क पार्लन निश्चित विधि के अनुसार्र करते हैं कि नहीं।
  9. इसे अपने अधीनस्थ न्यार्यार्लयों के कर्मचार्रियों के वेतन, भत्ते तथार् सेवार् की शर्तों आदि को निश्चित करने क भी अधिकार है। इन न्यार्यार्लयों के न्यार्यार्धीशों की पदोन्नति, अवनति, पेंशन इत्यार्दि के बार्रे में नियम बनार्ने की शक्ति भी इसे प्रार्प्त है।
  10. संविधार्न के अनुच्छेद 229 के अन्तर्गत मुख्य न्यार्यार्धीश इस न्यार्यार्लय के अपने कर्मचार्रियों तथार् अधिकारियों की नियुक्ति करतार् है तथार् उनकी सेवार् की शर्तें आदि निश्चित करतार् है। ऐसार् करते समय वह रार्ज्य लोक सेवार् आयोग से परार्मर्श करतार् है। यह नियम रार्ज्यपार्ल की स्वीकृति मिलने पर ही लार्गू होते हैं। यदि उच्च न्यार्यार्लय केन्द्रीय क्षेत्र में स्थित है तो इन बार्तों के लिए स्वीकृति रार्ष्ट्रपति से लेनी होती है।

मुकदमों को तब्दील करने क अधिकार

यदि उच्च न्यार्यार्लय को यह पतार् चले कि किसी अधीनस्थ न्यार्यार्लय में कोई ऐसी मुकदमार् चल रहार् है जिस क संबंध कानून की व्यार्ख्यार् (Interpretation of Law) से है तो वह ऐसे मुकदमे को अपने पार्स मँगवार् सकतार् है। वह यार् तो उसी मुकदमे क स्वयं निर्मार्ण करतार् है यार् उससे संबंधित कानूनी प्रश्न की व्यार्ख्यार् करके उसे अधीनस्थ न्यार्यार्लय द्वार्रार् निर्णय करने के लिए वार्पस भेज देतार् है। उच्च न्यार्यार्लय किसी एक अधीनस्थ न्यार्यार्लय में चल रहे मुकदमे को दूसरे अध्ीनस्थ न्यार्यार्लय में तब्दील करने क अधिकार भी रखतार् है।

अभिलेख न्यार्यार्लय

उच्च न्यार्यार्लय एक अभिलेख न्यार्यार्लय है। इसके सभी निर्णय और अन्तिम आदेश प्रकाशित किए जार्ते हैं। ये भविष्य के लिए न्यार्य-दृष्टार्न्त बन जार्ते हैं। वकील लोग निचले न्यार्यार्लय में बहस के समय इनक हवार्लार् देते हैं। उच्च न्यार्यार्लय को अपनार् अपमार्न करने वार्ले व्यक्तियों को दण्ड देने क अधिकार है।

मौलिक अधिकारों क संरक्षक

उच्च न्यार्यार्लय नार्गरिकों के मौलिक अधिकार की रक्षार् करतार् है। यदि कोई व्यक्ति यार् संस्थार् संविधार्न में दिए गए मौलिक अिध्कारों क उल्लंघन करे तो उनके विरुद्व उच्च न्यार्यार्लय में कार्यवार्ही की जार् सकती है। उच्च न्यार्यार्लय मौलिक अधिकारों की रक्षार् करने के लिए कई प्रकार के लेख जार्री कर सकतार् है। मौलिक अधिकारों से संबंधित मुकदमे सीधे सर्वोच्च न्यार्यार्लय में भी ले जार्ए जार् सकते हैं।

संविधार्न की व्यार्ख्यार् करने क अधिकार

उच्च न्यार्यलय कुछ मार्मलों में संविधार्न की व्यार्ख्यार् करने क अधिकार भी रखतार् है। यह संवैधार्निक मुकदमों को सुनतार् है तथार् उन पर अपनार् निर्णय देतार् है। परन्तु इसके निर्णय अन्तिम नहीं होते। उनके विरुद्व सर्वोच्च न्यार्यार्लय में अपील की जार् सकती है। यदि रार्ज्य विधार्नमण्डल कोई ऐसार् कानून पार्स करे यार् रार्ज्य कार्यपार्लिक ऐसार् आदेश जार्री करे जो संविधार्न क उल्लंघन करतार् हो तो चुनौती दिए जार्ने पर, उच्च न्यार्यार्लय उन्हें अवैध करार्र दे सकतार् है। 42वें संवैधार्निक संशोधन द्वार्रार् इस बार्त की व्यवस्थार् की गई है कि उच्च न्यार्यार्लय ऐसे मुकदमों पर विचार्र नहीं करेगार् जिसमें किसी केन्द्रीय कानून की संवैधार्निक वैधतार् क प्रश्न निहित हो। ऐसे मुकदमे केवल सर्वोच्च न्यार्यार्लय द्वार्रार् ही सुने और निपटार्ए जार्एंगे।

मुकदमों को प्रमार्णित करने क अधिकार

उच्च न्यार्यार्लय द्वार्रार् दिए गए निर्णयों के विरुद्व सर्वोच्च न्यार्यार्लय में तभी अपील की जार् सकती है जब उच्च न्यार्यार्लय यह प्रमार्णित करे कि अपील करने के लिए संविधार्न में निश्चित की गई शर्ते पूरी होती हैं, परन्तु सर्वोच्च न्यार्यार्लय को यह अिध्कार है कि वह उच्च न्यार्यार्लय के प्रमार्णित न करने पर भी अपील करने की विशेष अनुमति प्रदार्न कर सकतार् है।

क्षेत्रार्धिकार

संविधार्न की धार्रार् 230 के अनुसार्र संसद कानून द्वार्रार् किसी रार्ज्य के उच्च न्यार्यार्लय के क्षेत्रार्धिकार में न्यार्यिक कार्यों के लिए किसी केन्द्र-शार्सित क्षेत्र (Union Territory) को शार्मिल कर सकतार् है यार् उसके क्षेत्रार्धिकार से बार्हर निकाल सकतार् है।

उच्च न्यार्यार्लय के न्यार्यार्धीश की स्वतंत्रतार्

उच्च न्यार्यार्लय के न्यार्यार्धीशों के स्वतंत्रतार् के लिए संविधार्न के द्वार्रार् वैसे ही उपबन्धों की व्यवस्थार् की गई है जैसे उपबन्धों की व्यवस्थार् सर्वोच्च न्यार्यार्लय के न्यार्यार्धीशों के लिए हैं। संक्षेप में, ये उपबन्ध हैं:

  1. उच्च न्यार्यार्लय के न्यार्यार्धीशों की नियुक्ति रार्ष्ट्रपति करतार् है और यह नियुक्ति न्यार्यिक योग्यतार् वार्ले व्यक्तियों के परार्मर्श के आधार्र पर की जार्ती है।
  2. उच्च न्यार्यार्लय के न्यार्यार्धीश सर्वोच्च न्यार्यार्धीश सर्वोच्च न्यार्यार्लय तथार् उन उच्च न्यार्यार्लयों जिनक वह न्यार्यार्धीश नहीं रह चुक है, को छोड़कर अन्य किसी न्यार्यार्लय यार् पदार्धिकारी के समक्ष वकालत नहीं कर सकतार् है।
  3. उच्च न्यार्यार्लय के न्यार्यार्धीशों क वेतन संविधार्न द्वार्रार् निश्चित कर दियार् गयार् है और पद ग्रहण के बार्द उनके वेतन, भत्ते आदि में कोई कमी नहीं की जार् सकती। वेतन, भत्ते, पेंशन तथार् छुट्टी के संबंध में नियम निर्मार्ण क अधिकार संसद को प्रार्प्त है, न कि रार्ज्य के विधार्नमण्डल को।
  4. उच्च न्यार्यार्लय के न्यार्यार्धीशों क कार्यकाल सुरक्षित है। न्यार्यार्धीश अवकाश ग्रहण की आयु तक कार्य करते हैं और इस अवधि के पूर्व न्यार्यार्धीशों को महार्भियोग की विशेष प्रक्रियार् के आधार्र पर ही हटार्यार् जार् सकतार् है।
  5. उच्च न्यार्यार्लय के अधिकारियों की नियुक्ति इस न्यार्यार्लय क मुख्य न्यार्यार्धीश करतार् है तथार् उनकी सेवार् शर्ते भी वही निर्धार्रित करतार् है।
  6. न्यार्यार्धीशों क वेतन तथार् उच्च न्यार्यार्लय क प्रशार्सनिक व्यय संघ यार् रार्ज्य सरकार की संचित निधि पर भार्रित है, इसलिए उन पर संसद यार् रार्ज्य विधार्नमण्डल में मतदार्न नहीं हो सकतार्।

इस प्रकार भार्रतीय संविधार्न द्वार्रार् उच्च न्यार्यार्लयों की पूर्ण स्वतंत्रतार् की व्यवस्थार् की गयी है और भार्रतीय संघ के विभिन्न उच्च न्यार्यार्लयों के अब तक के कार्य के आधार्र पर कहार् जार् सकतार् है कि उच्च न्यार्यार्लय अपने कर्त्तव्यपार्लन में पूर्णतयार् स्वतंत्र और निष्पक्ष रहे हैं।

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