रार्जभार्षार् अधिनियम, 1963 क्यार् है ?

संविधार्न के अनुच्छेद 343(3) के अनुसार्र संसद को यह शक्ति प्रदार्न की गर्इ थी कि वह अधिनियम पार्रित करके 26 जनवरी, 1965 के बार्द भी विनिर्दिष्ट सरकारी कार्य में अंग्रेजी क प्रयोग जार्री रख सकती है। इस शक्ति क उपयोग करके रार्जभार्षार् अधिनियम, 1963 पार्रित कियार् गयार्, जिसे बार्द में 1967 में संशोधित कियार् गयार्। रार्जभार्षार् अधिनियम, 1963 निम्नवत है।

रार्जभार्षार् अधिनियम, 1963 

रार्जभार्षार् अधिनियम, 1963 (रार्जभार्षार् संशोधन अधिनियम सं. 1967 द्वार्रार् 1967 में संशोधित) उन भार्षार्ओं का, जो संघ के रार्जकीय प्रयोजनों, संसद में कार्य के संव्यवहार्र, केन्द्रीय और रार्ज्य अधिनियमों और उच्च न्यार्यार्लयों में कतिपय प्रयोजनों के लिए प्रयोग में लाइ जार् सकेंगी, उपबन्ध करने के लिए अधिनियम भार्रत गणरार्ज्य के चौदहवें वर्ष में संसद द्वार्रार् निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित हो :-

1.संक्षिप्त नार्म और प्रार्रम्भ- 

  1. यह अधिनियम रार्जभार्षार् अधिनियम, 1963 कहार् जार् सकेगार्। 
  2. धार्रार् 3, जनवरी, 1965 के 26वें दिन को प्रवृत्त होगी और इस अधिनियम के शेष उपबंध उस तार्रीख को प्रवृत्त होंगे जिसे केन्द्रीय सरकार, शार्सकीय रार्जपत्र में अधिसूचनार् द्वार्रार् नियत करे और इस अधिनियम के विभिन्न उपबंधों के लिए विभिन्न तार्रीखें नियत की जार् सकेंगी। 

2. परिभार्षार्एँ- 

इस अधिनियम में, जब तक कि सन्दर्भ से अन्यथार् अपेक्षित न हो,-
1. ‘नियत दिन’ से, धार्रार् 3 के सम्बन्ध में जनवरी, 1965 क 26वार्ँ दिन अभिप्रेत है और इस अधिनियम के किसी अन्य उपबन्ध के सम्बन्ध में वह दिन अभिप्रेत है जिस दिन को वह उपबंध प्रवृत्त होतार् है;
2. ‘हिन्दी’ से वह हिन्दी अभिप्रेत है, जिसकी लिपि देवनार्गरी है।
3. संघ के रार्जकीय प्रयोजनों के लिए और संसद में प्रयोग के लिए अंग्रेजी भार्षार् क रहनार्-

  1. संविधार्न के प्रार्रम्भ से पन्द्रह वर्ष की कालार्वधि की समार्प्ति हो जार्ने पर भी, हिन्दी के अतिरिक्त अंग्रेजी भार्षार्, नियत दिन से ही- 
    • संघ के उन सब रार्जकीय प्रयोजनों के लिए जिनके लिए वह उस दिन से ठीक पहले प्रयोग में लाइ जार्ती थी; तथार् 
    • संसद में कार्य के संव्यवहार्र के लिए; प्रयोग में लाइ जार्ती रह सकेगी : परन्तु संघ और किसी ऐसे रार्ज्य के बीच, जिसने हिन्दी को अपनी रार्जभार्षार् के रूप में नहीं अपनार्यार् है, पत्रार्दि के प्रयोजनों के लिए अंग्रेजी भार्षार् प्रयोग में लाइ जार्एगी, परन्तु यह और कि जहार्ँ किसी ऐसे रार्ज्य के, जिसने हिन्दी को अपनी रार्जभार्षार् के रूप में अपनार्यार् है और किसी अन्य रार्ज्य के जिसने हिन्दी को अपनी रार्जभार्षार् के रूप में नहीं अपनार्यार् है, बीच पत्रार्दि के प्रयोजनों के लिए हिन्दी को प्रयोग में लार्यार् जार्तार् है, वहार्ँ हिन्दी में ऐसे पत्रार्दि के सार्थ-सार्थ उसक अनुवार्द अंग्रेजी भार्षार् में भेजार् जार्एगार् : परन्तु यह और भी कि इस उपधार्रार् की किसी भी बार्त क यह अर्थ नहीं लगार्यार् जार्एगार् कि वह किसी ऐसे रार्ज्य को, जिसने हिन्दी को अपनी रार्जभार्षार् के रूप में नहीं अपनार्यार् है, संघ के सार्थ यार् किसी ऐसे रार्ज्य के सार्थ, जिसने हिन्दी को अपनी रार्जभार्षार् के रूप में अपनार्यार् है, यार् किसी अन्य रार्ज्य के सार्थ, उसकी सहमति से, पत्रार्दि के प्रयोजनों के लिए हिन्दी को प्रयोग में लार्ने से निवार्रित करती है, और ऐसे किसी मार्मले में उस रार्ज्य के सार्थ पत्रार्दि के प्रयोजनों के लिए अंग्रेजी भार्षार् क प्रयोग बार्ध्यकर न होगार्। 
  1. उपधार्रार् (1) में अन्तर्विष्ट किसी बार्त के होते हुए भी, जहार्ँ पत्रार्दि के प्रयोजनों के लिए हिन्दी यार् अंग्रेजी भार्षार्- 
    • केन्द्रीय सरकार के एक मंत्रार्लय यार् विभार्ग यार् कार्यार्लय के और दूसरे मंत्रार्लय यार् विभार्ग यार् कार्यार्लय के बीच, 
    • केन्द्रीय सरकार के एक मंत्रार्लय यार् विभार्ग यार् कार्यार्लय के और केन्द्रीय सरकार के स्वार्मित्व में के यार् नियंत्रण में के किसी निगम यार् कम्पनी यार् उसके किसी कार्यार्लय के बीच; 
    • केन्द्रीय सरकार के स्वार्मित्व में के यार् नियंत्रण में के किसी निगम यार् कम्पनी यार् उसके किसी कार्यार्लय के और किसी अन्य ऐसे निगम यार् कम्पनी यार् कार्यार्लय के बीच; प्रयोग में लाइ जार्ती है, वहार्ँ उस तार्रीख तक, जब तक पूर्वोक्त सम्बन्धित मंत्रार्लय, विभार्ग, कार्यार्लय यार् निगम यार् कम्पनी क कर्मचार्रीवृद हिन्दी क कार्यसार्धक ज्ञार्न प्रार्प्त नहीं कर लेतार्, ऐसे पत्रार्दि क अनुवार्द, यथार्स्थिति, अंग्रेजी भार्षार् यार् हिन्दी में भी दियार् जार्एगार्। 
  1. उपधार्रार् (1) में अन्तर्विष्ट किसी बार्त के होते हुए भी, हिन्दी और अंग्रेजी भार्षार् दोनों ही- 
    • संकल्पों, सार्धार्रण आदेशों, नियमों, अधिसूचनार्ओं, प्रशार्सनिक यार् अन्य प्रतिवेदनों यार् प्रेस विज्ञप्तियों के लिए, जो केन्द्रीय सरकार द्वार्रार् यार् उसके किसी मंत्रार्लय, विभार्ग यार् कार्यार्लय द्वार्रार् यार् केन्द्रीय सरकार के स्वार्मित्व में के यार् नियंत्रण में के किसी निगम यार् कम्पनी द्वार्रार् यार् ऐसे निगम यार् कम्पनी के किसी कार्यार्लय द्वार्रार् निकाले जार्ते हैं यार् किए जार्ते हैं, 
    • संसद के किसी सदन यार् सदनों के समक्ष रखे गए प्रशार्सनिक तथार् अन्य प्रतिवेदनों और रार्जकीय कागज-पत्रों के लिए, 
    • केन्द्रीय सरकार यार् उसके किसी मंत्रार्लय, विभार्ग यार् कार्यार्लय द्वार्रार् यार् उसकी ओर से यार् केन्द्रीय सरकार के स्वार्मित्व में के यार् नियंत्रण में के किसी निगम यार् कम्पनी द्वार्रार् यार् ऐसे निगम यार् कम्पनी के किसी कार्यार्लय द्वार्रार् निष्पार्दित संविदार्ओं और करार्रों के लिए तथार् निकाली गर्इ अनुज्ञप्तियों, अनुज्ञार्पत्रों, सूचनार्ओं और निविदार्-प्ररूपों के लिए, प्रयोग में लाइ जार्एगी। 
  1. उपधार्रार् (1) यार् उपधार्रार् (2) यार् उपधार्रार् (3) के उपबंधों पर प्रतिकूल प्रभार्व डार्ले बिनार् यह है कि केन्द्रीय सरकार धार्रार् 8 के अधीन बनार्ए गए नियमों द्वार्रार् उस भार्षार् यार् उन भार्षार्ओं क उपबंध कर सकेगी जिसे यार् जिन्हें संघ के रार्जकीय प्रयोजन के लिए, जिसके अन्तर्गत किसी मंत्रार्लय, विभार्ग, अनुभार्ग यार् कार्यार्लय क कार्यकरण है, प्रयोग में लार्यार् जार्नार् है और ऐसे नियम बनार्ने में रार्जकीय कार्य के शीघ्रतार् और दक्षतार् के सार्थ निपटार्रे क तथार् जन सार्धार्रण के हितों क सम्यक् ध्यार्न रखार् जार्एगार् और इस प्रकार बनार्ए गए नियम विशिष्टतयार् यह सुनिश्चित करेंगे कि जो व्यक्ति संघ के कार्यकलार्प के सम्बन्ध में सेवार् कर रहे हैं और जो यार् तो हिन्दी में यार् अंग्रेजी भार्षार् में प्रवीण हैं वे प्रभार्वी रूप से अपनार् काम कर सकें और यह भी कि केवल इस आधार्र पर कि वे दोनों ही भार्षार्ओं में प्रवीण नहीं हैं, उनक कोर्इ अहित नहीं होतार् है
  2. उपधार्रार् (1) के खंड (क) के उपबन्ध और उपधार्रार् (2), उपधार्रार् (3) और उपधार्रार् (4), के उपबन्ध तब तक प्रवृत्त बने रहेंगे जब तक उनमें वर्णित प्रयोजनों के लिए अंग्रेजी भार्षार् क प्रयोग समार्प्त कर देने के लिए ऐसे सभी रार्ज्यों के विधार्न-मण्डलों द्वार्रार्, जिन्होंने हिन्दी को अपनी रार्जभार्षार् के रूप में नहीं अपनार्यार् है; संकल्प पार्रित नहीं कर दिए जार्ते और जब तक पूर्वोक्त संकल्पों पर विचार्र कर लेने के पश्चार्त् ऐसी समार्प्ति के लिए संसद के हर एक सदन द्वार्रार् संकल्प पार्रित नहीं कर दियार् जार्तार्। 

      4. रार्जभार्षार् के सम्बन्ध में समिति- 

      1. जिस तार्रीख को धार्रार् 3 प्रवृत्त होती है उससे दस वर्ष की समार्प्ति के पश्चार्त्, रार्जभार्षार् के सम्बन्ध में एक समिति, इस विषय क संकल्प संसद के किसी भी सदन में रार्ष्ट्रपति की पूर्व मंजूरी से प्रस्तार्वित और दोनों सदनों द्वार्रार् पार्रित किए जार्ने पर, गठित की जार्एगी।
      2. इस समिति में तीस सदस्य होंगे जिनमें से बीस लोक सभार् के सदस्य होंगे तथार् दस रार्ज्य सभार् के सदस्य होंगे, जो क्रमश: लोक सभार् के सदस्यों तथार् रार्ज्य सभार् के सदस्यों द्वार्रार् आनुपार्तिक प्रतिनिधित्व पद्धति के अनुसार्र एकल संक्रमणीय मत द्वार्रार् निर्वार्चित होंगे। 
      3. इस समिति क कर्तव्य होगार् कि वह संघ के रार्जकीय प्रयोजनों के लिए हिन्दी के प्रयोग में की गर्इ प्रगति क पुनर्विलोकन करें और उस पर सिफार्रिशें करते हुए रार्ष्ट्रपति को प्रतिवेदन करें और रार्ष्ट्रपति उस प्रतिवेदन को संसद के हर एक सदन के समक्ष रखवार्एगार् और सभी रार्ज्य सरकारों को भिजवार्एगार्। 
      4. रार्ष्ट्रपति उपधार्रार् (3) में निर्दिष्ट प्रतिवेदन पर और उस पर रार्ज्य सरकारों ने यदि कोर्इ मत अभिव्यक्त किए हों तो उन पर विचार्र करने के पश्चार्त् उस समस्त प्रतिवेदन के यार् उसके किसी भार्ग के अनुसार्र निदेश निकाल सकेगार् : (परन्तु इस प्रकार निकाले गए निदेश धार्रार् 3 के उपबन्धों से असंगत नहीं होंगे।) 

        5. केन्द्रीय अधिनियमों आदि क प्रार्धिकृत हिन्दी अनुवार्द- 

        1. नियत दिन को और उसके पश्चार्त् शार्सकीय रार्जपत्र में रार्ष्ट्रपति के प्रार्धिकार से प्रकाशित- 
          • किसी केन्द्रीय अधिनियम क यार् रार्ष्ट्रपति द्वार्रार् प्रख्यार्पित किसी अध्यार्देश का, अथवार् 
          • संविधार्न के अधीन यार् किसी केन्द्रीय अधिनियम के अधीन निकाले गए किसी आदेश, नियम, विनियम यार् उपविधि क हिन्दी में अनुवार्द उसक हिन्दी में प्रार्धिकृत पार्ठ समझार् जार्एगार्। 
        1. नियत दिन से ही उन सब विधेयकों के, जो संसद के किसी भी सदन में पुर:स्थार्पित किए जार्ने हों और उन सब संशोधनों के, जो उनके सम्बन्ध में संसद के किसी भी सदन में प्रस्तार्वित किए जार्ने हों, अंग्रेजी भार्षार् के प्रार्धिकृत पार्ठ के सार्थ-सार्थ उनक हिन्दी में अनुवार्द भी होगार् जो ऐसी रीति से प्रार्धिकृत कियार् जार्एगार्, जो इस अधिनियम के अधीन बनार्ए गए नियमों द्वार्रार् विहित की जार्ए।

        6. कतिपय दशार्ओं में रार्ज्य अधिनियमों क प्रार्धिकृत हिन्दी अनुवार्द- 

        जहार्ँ किसी रार्ज्य के विधार्न-मंडल ने उस रार्ज्य के विधार्न-मंडल द्वार्रार् पार्रित अधिनियमों में अथवार् उस रार्ज्य के रार्ज्यपार्ल द्वार्रार् प्रख्यार्पित अध्यार्देशों में प्रयोग के लिए हिन्दी से भिन्न कोर्इ भार्षार् विहित की है वहार्ँ, संविधार्न के अनुच्छेद 348 के खण्ड (3) द्वार्रार् अपेक्षित अंग्रेजी भार्षार् में उसके अनुवार्द के अतिरिक्त, उसक हिन्दी में अनुवार्द उस रार्ज्य के शार्सकीय रार्जपत्र में, उस रार्ज्य के रार्ज्यपार्ल के प्रार्धिकार से, नियत दिन को यार् उसके पश्चार्त् प्रकाशित कियार् जार् सकेगार् और ऐसी दशार् में ऐसे किसी अधिनियम यार् अध्यार्देश क हिन्दी में अनुवार्द हिन्दी भार्षार् में उसक प्रार्धिकृत पार्ठ समझार् जार्एगार्।

        7. उच्च न्यार्यार्लयों के निर्णयों, आदि में हिन्दी यार् अन्य रार्जभार्षार् क वैकल्पिक प्रयोग- 

        नियत दिन से ही यार् तत्पश्चार्त् किसी भी दिन से किसी रार्ज्य क रार्ज्यपार्ल, रार्ष्ट्रपति की पूर्व सम्मति से, अंग्रेजी भार्षार् के अतिरिक्त हिन्दी यार् उस रार्ज्य की रार्जभार्षार् क प्रयोग, उस रार्ज्य के उच्च न्यार्यार्लय द्वार्रार् पार्रित यार् दिए गए किसी निर्णय, डिक्री यार् आदेश के प्रयोजनों के लिए प्रार्धिकृत कर सकेगार् और जहार्ँ कोर्इ निर्णय, डिक्री यार् आदेश (अंग्रेजी भार्षार् से भिन्न) ऐसी किसी भार्षार् में पार्रित कियार् यार् दियार् जार्तार् है, वहार्ँ उसके सार्थ-सार्थ उच्च न्यार्यार्लय के प्रार्धिकार से निकालार् गयार् अंग्रेजी भार्षार् में उसक अनुवार्द भी होगार्।

        8. नियम बनार्ने की शक्ति- 

        1. केन्द्रीय सरकार इस अधिनियम के प्रयोजनों को कार्यार्न्वित करने के लिए नियम शार्सकीय रार्जपत्र में अधिसूचनार् द्वार्रार् बनार् सकेगी।
        2. इस धार्रार् के अधीन बनार्यार् गयार् हर नियम, बनार्ए जार्ने के पश्चार्त् यथार्समय शीघ्र, संसद के हर एक सदन के समक्ष, उस समय जब वह सत्र में हो, कुल मिलार्कर तीस दिन की कालार्वधि के लिए, जो एक सत्र में यार् दो क्रमवर्ती सत्रों में समार्विष्ट हो सकेगी, रखार् जार्एगार् और यदि उस सत्र के, जिसमें वह ऐसे रखार् गयार् हो, यार् ठीक पश्चार्त्वर्ती सत्र के अवसार्न के पूर्व दोनों सदन उस नियम में कोर्इ उपार्न्तर करने के लिए सहमत हो जार्एँ यार् दोनों सदन सहमत हो जार्एँ कि वह नियम नहीं बनार्यार् जार्नार् चार्हिए तो तत्पश्चार्त् यथार्स्थिति, वह नियम ऐसे उपार्न्तरित रूप में ही प्रभार्वशार्ली होगार् यार् उसक कोर्इ भी प्रभार्व न होगार्, किन्तु इस प्रकार कि ऐसार् कोर्इ उपार्न्तर यार् बार्तिलकरण उस नियम के अधीन पहले की गर्इ किसी बार्त की विधिमार्न्यतार् पर प्रतिकूल प्रभार्व डार्ले बिनार् होगार्।

        9. कतिपय उपबन्धों क जम्मू-कश्मीर को लार्गू न होनार्- 

        धार्रार् 6 और धार्रार् 7 के उपबन्ध जम्मू-कश्मीर रार्ज्य को लार्गू न होंगे।

        रार्जभार्षार् अधिनियम, 1963 के अन्तर्गत की गर्इ व्यवस्थार् 

        संशोधित रार्जभार्षार् अधिनियम, 1963 के अन्तर्गत की गर्इ व्यवस्थार् इस प्रकार है :

        1. अधिनियम की धार्रार् 3(1) के अनुसार्र (क) संघ के उन सभी सरकारी प्रयोजनों के लिए जिनके लिए 26 जनवरी, 1965 के तत्काल-पूर्व अंग्रेजी क प्रयोग कियार् जार् रहार् थार् और (ख) संसद में कार्य निष्पार्दन के लिए 26 जनवरी, 1965 के बार्द भी हिन्दी के अतिरिक्त अंग्रेजी क प्रयोग जार्री रखार् जार् सकेगार्। 
        2. केन्द्र सरकार और हिन्दी को रार्जभार्षार् के रूप में न अपनार्ने वार्ले किसी रार्ज्य के बीच पत्रार्चार्र अंग्रेजी में होगार्, बशर्ते उस रार्ज्य ने उसके लिए हिन्दी क प्रयोग करनार् स्वीकार न कियार् हो। इसी प्रकार हिन्दी भार्षी रार्ज्यों की सरकारें भी ऐसे रार्ज्यों की सरकारों के सार्थ अंग्रेजी में पत्रार्चार्र करेंगी और यदि वे ऐसे रार्ज्यों को कोर्इ पत्र हिन्दी में भेजती हैं तो सार्थ में उनक अंग्रेजी अनुवार्द भी भेजेंगी। पार्रस्परिक समझौते से यदि कोर्इ दो रार्ज्य आपसी पत्रार्चार्र में हिन्दी क प्रयोग करें तो इसमें कोर्इ आपत्ति नहीं होगी। 
        3. केन्द्रीय सरकार के कार्यार्लयों आदि के बीच पत्र व्यवहार्र के लिए निर्धार्रित अनुपार्त में हिन्दी क प्रयोग कियार् जार्एगार् लेकिन ‘ग’ क्षेत्र में जब तक सम्बन्धित कार्यार्लयों आदि के कर्मचार्री हिन्दी क कार्यसार्धक ज्ञार्न प्रार्प्त न कर लें, तब तक पत्रार्दि क अंग्रेजी भार्षार् में अनुवार्द उपलब्ध करार्यार् जार्तार् रहेगार्। 
        4. अधिनियम की धार्रार् 3(3) के अनुसार्र निम्नलिखित कागज-पत्रों के लिए हिन्दी और अंग्रेजी दोनों क प्रयोग अनिवाय है : संकल्प 2. सार्मार्न्य आदेश 3. नियम 4. अधिसूचनार्एँ 5. प्रशार्सनिक तथार् अन्य रिपोर्ट 6. प्रेस विज्ञप्तियार्ँ 7. संसद के किसी सदन यार् दोनों सदनों के समक्ष रखी जार्ने वार्ली प्रशार्सनिक तथार् अन्य रिपोर्ट, सरकारी कागज-पत्र 8. संविदार्एँ 9. करार्र 10. अनुज्ञप्तियार्ँ 11. अनुज्ञार्पत्र 12. टेंडर नोटिस और 13. टेंडर फाम 
        5. धार्रार् 3(4) के अनुसार्र, अधिनियम के अधीन नियम बनार्ते समय यह सुनिश्चित कर लेनार् होगार् कि केन्द्रीय सरकार क कोर्इ कर्मचार्री हिन्दी यार् अंग्रेजी में से किसी एक ही भार्षार् में प्रवीण होने पर भी अपनार् सरकारी कामकाज प्रभार्वी ढंग से कर सके और केवल इस आधार्र पर कि वह दोनों भार्षार्ओं में प्रवीण नहीं, उसक कोर्इ अहित न हो। 
        6. अधिनियम की धार्रार् 3(5) के रूप में यह उपबंध कियार् गयार् है कि उपर्युक्त विभिन्न कार्यों के लिए अंग्रेजी क प्रयोग जार्री रखने सम्बन्धी व्यवस्थार् तब तक जार्री रहेगी जब तक हिन्दी को रार्जभार्षार् के रूप में न अपनार्ने वार्ले सभी रार्ज्यों के विधार्न-मण्डल अंग्रेजी क प्रयोग समार्प्त करने के लिए आवश्यक संकल्प पार्रित न करें और इन संकल्पों पर विचार्र करने के बार्द संसद क प्रत्येक सदन भी इसी आशय क संकल्प पार्रित कर दे। 
        7. अधिनियम की धार्रार् 4 में 26 जनवरी, 1975 के बार्द एक संसदीय रार्जभार्षार् समिति के गठन क उपबंध है। इस समिति में 20 लोक सभार् सदस्य और 10 रार्ज्य सभार् सदस्य होंगे। यह समिति संघ के सरकारी प्रयोजनों के लिए हिन्दी के प्रयोग में हुर्इ प्रगति की जार्ँच करेगी। अपनी सिफार्रिशों सहित अपनार् प्रतिवेदन रार्ष्ट्रपति को प्रस्तुत करेगी। समिति क वर्ष 1976 में गठन कर दियार् गयार् थार् और यह इस समय भी कार्य कर रही है। समिति ने दिनार्ंक 12.3.1992 को अपने प्रतिवेदन क पार्ँचवार्ँ खण्ड रार्ष्ट्रपति जी को प्रस्तुत कियार्। इसे रार्ज्य सभार् तथार् लोक सभार् के पटल पर क्रमश: दिनार्ंक 9.3.1994 और 17.3.1994 को प्रस्तुत कियार् गयार्। 
        8. अधिनियम की धार्रार् 7 के अनुसार्र किसी रार्ज्य क रार्ज्यपार्ल, रार्ष्ट्रपति की पूर्व सम्मति से उस रार्ज्य के उच्च न्यार्यार्लय द्वार्रार् किए गए अथवार् पार्रित किए गए किसी निर्णय, डिक्री अथवार् आदेश के लिए अंग्रेजी भार्षार् के अलार्वार्, हिन्दी अथवार् रार्ज्य की रार्जभार्षार् क प्रयोग प्रार्धिकृत कर सकतार् है। तथार्पि, यदि कोर्इ निर्णय, डिक्री यार् आदेश अंग्रेजी से भिन्न किसी भार्षार् में दियार् गयार् यार् पार्रित कियार् जार्तार् है तो उसके सार्थ-सार्थ सम्बन्धित उच्च न्यार्यार्लय के प्रार्धिकार से अंग्रेजी भार्षार् में उसक अनुवार्द भी दियार् जार्एगार्। (अब तक उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, रार्जस्थार्न और बिहार्र के रार्ज्यपार्लों ने अपने-अपने उच्च न्यार्यार्लयों में उपर्युक्त उद्देश्यों के लिए हिन्दी के प्रयोग की अनुमति दे ही है।) 

        इस प्रकार रार्जभार्षार् अधिनियम, 1963 में यह व्यवस्थार् की गर्इ कि सन् 1965 के बार्द हिन्दी ही संघ की रार्जभार्षार् होगी। किन्तु अंग्रेजी क प्रयोग करने की छूट तब तक बनी रहेगी जब तक कि हिन्दी को अपनी रार्जभार्षार् के रूप में न अपनार्ने वार्ले सभी रार्ज्यों के विधार्न-मंडल अंग्रेजी क प्रयोग समार्प्त करने के लिए संकल्प न पार्रित कर दें और उन संकल्पों पर विचार्र करने के बार्द संसद के दोनों सदन इस सम्बन्ध में संकल्प पार्रित न कर दें। इस व्यवस्थार् के अनुसार्र आज हर कर्मचार्री को अपनार् कामकाज हिन्दी अथवार् अंग्रेजी दोनों में करने की छूट है। किन्तु कुछ कामों के लिए हिन्दी तथार् अंग्रेजी दोनों क प्रयोग अनिवाय है, इसमें एक तरफ पत्रार्दि हैं जिनमें पत्रार्चार्र तथार् फार्इलों क काम शार्मिल है और दूसरी तरफ सरकार की ओर से निकलने वार्ले आदेश और नियम आदि आम जनतार् के उपयोग के लिए हैं। आम जनतार् की आवश्यकतार् को ध्यार्न में रखते हुए यह व्यवस्थार् की गर्इ है कि आम आदमी के उपयोग के सार्रे कागज-पत्र द्विभार्षी रूप में हों। इस बार्त क उल्लेख रार्जभार्षार् अधिनियम की उपधार्रार् 3(3) में कियार् गयार् है।

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