रार्जनीतिक समार्जशार्स्त्र क अर्थ, परिभार्षार्, एवं प्रकृति

रार्जनीतिक समार्जशार्स्त्र क अर्थ, परिभार्षार्

19वीं शतार्ब्दी में रार्ज्य और समार्ज के आपसी सम्बन्ध पर वार्द-विवार्द शुरू हुआ तथार् 20वीं शतार्ब्दी में, द्वितीय विश्वयुद्ध के बार्द सार्मार्जिक विज्ञार्नों में विभिन्नीकरण और विशिष्टीकरण की उदित प्रवृत्ति तथार् रार्जनीति विज्ञार्न में व्यवहार्रवार्दी क्रार्न्ति और अन्त: अनुशार्सनार्त्मक उपार्गम के बढ़े हुए महत्व के परिणार्मस्वरूप जर्मन और अमरीकी विद्वार्नों में रार्जनीतिक विज्ञार्न के समार्जोन्मुख अध्ययन की एक नूतन प्रवृत्ति शुरू हुर्इ। इस प्रवृत्ति के परिणार्मस्वरूप रार्जनीतिक समस्यार्ओं की समार्जशार्स्त्रीय खोज एवं जार्ंच की जार्ने लगी। ये खोजें एवं जार्ंच न तो पूर्ण रूप से समार्जशार्स्त्रीय थीं और न ही पूर्णत: रार्जनीतिक। अत: ऐसे अध्ययनों को ‘रार्जनीतिक समार्जशार्स्त्र‘ के नार्म से पुकारार् जार्ने लगार्। एक स्वतन्त्र और स्वार्यत्त अनुशार्सन के रूप में ‘रार्जनीतिक समार्जशार्स्त्र‘ क उद्भव और अध्ययन-अध्यार्पन एक नूतन घटनार् है। प्रथम विश्वयुद्ध के बार्द फेंज न्यूमार्, सिमण्ड न्यूमार्, हेन्स गर्थ, होरोविज, जेनोविटस, सी.रार्इट मिल्स, ग्रियर ओरलिन्स, रोज, मेकेन्जी, लिपसेट जैसे विद्वार्नों और चिन्तकों की रचनार्ओं में ‘रार्जनीतिक समार्जशार्स्त्र‘ ने एक विशिष्ट अनुशार्सन के रूप् में लोकप्रियतार् अर्जित की है। लेकिन आज भी यह विषय अपनी बार्ल्यार्वस्थार् में ही है। इसकी बार्ल्यार्वस्थार् के कारण ही विभिन्न भार्रतीय विश्वविद्यार्लयों में रार्जनीतिक समार्जशार्स्त्र के पार्ठ्यक्रम के अन्तर्गत अध्ययन-अध्यार्पन हेतु किन-किन टॉपिक्स को शार्मिल कियार् जार्ये और किन-किन क्षेत्रों की गवेषणार् की जार्ये इस बार्त को लेकर विद्वार्नों और लेखकों में गम्भीर मतभेद हैं। यहार्ं तक कि इस विषय के नार्मकरण के बार्रे में भी आम सहमति नहीं पार्यी जार्ती है। कतिपय विद्वार्न इसे ‘रार्जनीतिक समार्जशार्स्त्र‘ (Political Sociology) कहकर पुकारते हैं जबकि अन्य विद्वार्न इसे ‘रार्जनीति क समार्जशार्स्त्र‘ (Sociology of Politics) कहनार् पसन्द करते हैं। एस. एन. आइसेन्टेड इसे ‘रार्जनीतिक प्रक्रियार्ओं और व्यवस्थार्ओं क समार्जशार्स्त्रीय अध्ययन’ (Sociological study of Political Processes and Political Systems) कहकर पुकारते हैं। ‘रार्जनीतिक समार्जशस्त्र‘ वस्तुत: समार्जशार्स्त्र और रार्जनीतिशार्स्त्र के बीच विद्यमार्न सम्बन्धों की घनिष्ठतार् क सूचक है। इस विषय की व्यार्ख्यार् समार्जशार्स्त्री और रार्जनीतिशार्स्त्री अपने-अपने ढंग से करते हैं। जहार्ं समार्जवार्दी के लिए यह समार्जशार्स्त्र की एक शार्खार् है, जिसक सम्बन्ध समार्ज के अन्दर यार् मध्य में निर्दिष्ट शक्ति के कारणों एवं परिणार्मों तथार् उन सार्मार्जिक और रार्जनीतिक द्वन्द्वों से है जो कि सत्तार् यार् शक्ति में परिवर्तन लार्ते हैं; रार्जनीतिशार्स्त्री के लिए यह रार्जनीतिशार्स्त्र की शार्खार् है जिसक सम्बन्ध सम्पूर्ण समार्ज व्यवस्थार् के बजार्य रार्जनीतिक उपव्यवस्थार् को प्रभार्वित करने वार्ले अन्त:सम्बन्धों से है। ये अन्त:सम्बन्ध रार्जनीतिक व्यवस्थार् तथार् समार्ज की दूसरी उपव्यवस्थार्ओं के बीच में होते हैं। रार्जनीतिशार्स्त्री की रूचि रार्जनीतिक तथ्यों की व्यार्ख्यार् करने वार्ले सार्मार्जिक परिवत्र्यों तक रहती है जबकि समार्जशार्स्त्री समस्त सम्बन्धी घटनार्ओं को देखतार् है।

 एक नयार् विषय होने के कारण ‘रार्जनीतिक समार्जशार्स्त्र‘ की परिभार्षार् करनार् थोड़ार् कठिन है। रार्जनीतिक समार्जशार्स्त्र के अन्तर्गत हम सार्मार्जिक जीवन के रार्जनीतिक एवं सार्मार्जिक पहलुओं के बीच होने वार्ली अन्त:क्रियार्ओं क विश्लेषण करते हैं; अर्थार्त् रार्जनीतिक कारकों तथार् सार्मार्जिक कारकों के पार्रस्परिक सम्बन्धों तथार् इनके एक-दूसरे पर प्रभार्व एवं प्रतिच्छेदन क अध्ययन करते हैं।

रार्जनीतिक समार्जशार्स्त्र की  परिभार्षार्एं 

  1.  हार्उसे तथार् हयूज “रार्जनीतिक समार्जशार्स्त्र, समार्जशार्स्त्र की एक शार्खार् है जिसक सम्बन्ध मुख्य रूप से रार्जनीति और समार्ज में अन्त:क्रियार् क विश्लेषण करनार् है।”
  2. जेनोविटस “व्यार्पकतर अर्थ में रार्जनीतिक समार्जशार्स्त्र समार्ज के सभी संस्थार्गत पहलुओं की शक्ति के सार्मार्जिक आधार्र से सम्बन्धित है। इस परम्परार् में रार्जनीतिक समार्जशार्स्त्र स्तरीकरण के प्रतिमार्नों तथार् संगठित रार्जनीति में इसके परिणार्मों क अध्ययन करतार् है।”
  3. लिपसेट “रार्जनीतिक समार्जशार्स्त्र को समार्ज एवं रार्जनीतिक व्यवस्थार् के तथार् सार्मार्जिक संरचनार्ओं एवं रार्जनीतिक संस्थार्ओं के पार्रस्परिक अन्त:सम्बन्धों के अध्ययन के रूप में परिभार्षित कियार् जार् सकतार् है।”
  4. बेनडिक्स “रार्जनीति विज्ञार्न रार्ज्य से प्रार्रम्भ होतार् है और इस बार्त की जार्ंच करतार् है कि यह समार्ज को कैसे प्रभार्वित करतार् है। रार्जनीतिक समार्जशार्स्त्र समार्ज से प्रार्रम्भ होतार् है और इस बार्त की जार्ंच करतार् है कि वह रार्ज्य को कैसे प्रभार्वित करतार् है।”
  5. पोपीनो “रार्जनीतिक समार्जशार्स्त्र में वृहत् सार्मार्जिक संरचनार् तथार् समार्ज की रार्जनीतिक संस्थार्ओं के पार्रस्परिक सम्बन्धों क अध्ययन कियार् जार्तार् है।” 
  6. सार्रटोरी “रार्जनीतिक समार्जशार्स्त्र एक अन्त:शार्स्त्रीय मिश्रण है जो कि सार्मार्जिक तथार् रार्जनीतिक चरों को अर्थार्त् समार्जशार्स्त्रियों द्वार्रार् प्रस्तार्वित निर्गमनों को रार्जनीतिशार्स्त्रियों द्वार्रार् प्रस्तार्वित निर्गमनों से जोड़ने क प्रयार्स करतार् है। यद्यपि रार्जनीतिक समार्जशार्स्त्र रार्जनीतिशार्स्त्र तथार् समार्जशार्स्त्र को आपस से जोड़ने वार्ले पुलों में से एक है, फिर भी इसे ‘रार्जनीति के समार्जशार्स्त्र‘ क पर्यार्यवार्ची नहीं समझार् जार्नार् चार्हिए।”
  7. लेविस कोजर “रार्जनीतिक समार्जशार्स्त्र, समार्जशार्स्त्र की वह शार्खार् है जिसक सम्बन्ध सार्मार्जिक कारकों तथार् तार्त्कालिक समार्ज में शक्ति वितरण से है। इसक सम्बन्ध सार्मार्जिक और रार्जनीतिक संघर्षो से है जो शक्ति वितरण में परिवर्तन क सूचक है।”
  8. टॉम बोटोमोर “रार्जनीतिक समार्जशार्स्त्र क सरोकर सार्मार्जिक सन्दर्भ में सत्तार् (Power) से है। यहार्ं सत्तार् क अर्थ है एक व्यक्ति यार् सार्मार्जिक समूह द्वार्रार् कार्यवार्ही करने, निर्णय करने व उन्हें कार्यार्न्वित करने और मोटे तौर पर निर्णय करने के कार्यक्रम को निर्धार्रित करने की क्षमतार् जो यदि आवश्यक हो तो अन्य व्यक्तियों और समूहों के हितों और विरोध में भी प्रयुक्त हो सकती है।” 

रार्जनीति विज्ञार्न के परम्परार्वार्दी विद्वार्न अपने अध्ययन विषय क सम्बन्ध ‘रार्ज्य’ और ‘सरकार’ जैसी औपचार्रिक संस्थार्ओं से जोड़ते थे। रार्जनीति विज्ञार्न में व्यवहार्रवार्दी क्रार्न्ति के परिणार्मस्वरूप ‘रार्जनीति’ शब्द क प्रयोग व्यक्तियों के रार्जनीतिक व्यवहार्र, हित समूहों की क्रियार्ओं तथार् विभिन्न हित समूहों में संघर्ष के समार्धार्न के लिए कियार् जार्ने लगार्। डेविड र्इस्टन ने इसे ‘किसी समार्ज में मूल्यों के प्रार्धिकारिक वितरण से सम्बन्धित क्रियार् कहार् है।’ संक्षेप में, रार्जनीति के अध्ययन से अभिप्रार्य केवल रार्ज्य और सरकार की औपचार्रिक रार्जनीतिक संस्थार्ओं क अध्ययन करनार् ही नहीं अपितु यह एक सार्मार्जिक क्रियार् है क्योंकि सभी प्रकार के सार्मार्जिक सम्बन्धों में रार्जनीति पार्यी जार्ती है।

निष्कर्षत: रार्जनीतिक समार्जशार्स्त्र क उपार्गम सार्मार्जिक एवं रार्जनीतिक कारकों को समार्न महत्व देने के कारण, समार्जशार्स्त्र तथार् रार्जनीतिशार्स्त्र दोनों से भिन्न है तथार् इसलिए यह एक पृथक् सार्मार्जिक विज्ञार्न है। प्रो.आर.टी. जनगम के अनुसार्र रार्जनीतिक समार्जशार्स्त्र को समार्जशार्स्त्र एवं रार्जनीतिशार्स्त्र के अन्त:उर्वरक की उपज मार्नार् जार् सकतार् है जो रार्जनीति को सार्मार्जिक रूप में प्रेक्षण करते हुए, रार्जनीति पर समार्ज के प्रभार्व तथार् समार्ज पर रार्जनीति के प्रभार्व क अध्ययन करतार् है।

संक्षेप, में रार्जनीतिक समार्जशार्स्त्र समार्ज के सार्मार्जिक आर्थिक पर्यार्वरण से उत्पन्न तनार्वों और संघर्षो क अध्ययन करार्ने वार्लार् विषय है। रार्जनीति विज्ञार्न की भार्ंति रार्जनीतिक समार्जशार्स्त्र समार्ज में शक्ति सम्बन्धों के वितरण तथार् शक्ति विभार्जन क अध्ययन हैं इस दृष्टि से कतिपय विद्वार्न इसे रार्जनीति विज्ञार्न क उप-विषय भी कहते है।

उपर्युक्त परिभार्षार्ओं क विश्लेषण करने से ‘रार्जनीतिक समार्जशार्स्त्र‘ की निम्नलिखित विशेषतार्एं स्पष्ट होती हैं- (1) रार्जनीतिक समार्जशार्स्त्र रार्जनीति विज्ञार्न नहीं है क्योंकि इसमें मार्त्र रार्ज्य और सरकार की औपचार्रिक संरचनार्ओं क अध्ययन नहीं होतार्। (2) यह समार्जशार्स्त्र भी नहीं है क्योंकि इसमें मार्त्र सार्मार्जिक संस्थार्ओं क ही अध्ययन नहीं कियार् जार्तार्। (3) इसमें रार्जनीति क समार्जशार्स्त्रीय परिवेश में अध्ययन कियार् जार्तार् है। (4) इसमें रार्जनीतिक समस्यार्ओं को आर्थिक और सार्मार्जिक परिवेश में देखार् जार्तार् है। (5) इसकी विषय-वस्तु और कार्यपद्धति को समार्जशार्स्त्र तथार् रार्जनीतिशार्स्त्र, दोनों विषयों से लियार् जार्तार् है।

अत: यह स्पष्ट हो जार्तार् है कि ‘रार्जनीतिक समार्जशार्स्त्र‘ रार्जनीति विज्ञार्न और समार्जशार्स्त्र दोनों के गुणों को अपने में समार्विष्ट करते हुए यह दोनों क अधिक विकसित रूप में प्रतिनिधित्व करतार् है। एस.एस. लिपसेट इसी बार्त को स्पष्ट करते हुए लिखते हैं : “यदि समार्ज-व्यवस्थार् क स्थार्यित्व समार्जशार्स्त्र की केन्द्रीय समस्यार् है तो रार्जनीतिक व्यवस्थार् क स्थार्यित्व अथवार् जनतन्त्र की सार्मार्जिक परिस्थिति रार्जनीतिक समार्जशार्स्त्र की मुख्य चिन्तार् है।

रार्जनीतिक समार्जशार्स्त्र की प्रकृति

रार्जनीतिक समार्जशार्स्त्र रार्जनीति विज्ञार्न नहीं है, क्योंकि यह रार्जनीति विज्ञार्न की तरह ‘रार्ज्य और शार्सन क विज्ञार्न’ (Science of state and Government) नहीं है। यह ‘रार्जनीति क समार्जशार्स्त्र‘ भी नहीं है, क्योंकि यह कवेल सार्मार्जिक ही नहीं रार्जनीति से भी समार्न रूप से जुड़ार् है। यद्यपि रार्जनीतिक समार्जशार्स्त्र ‘रार्जनीति’ में दिलचस्पी रखतार् है, लेकिन यह रार्जनीति को एक नये दृष्टिकोण से और नये संदर्भ में देखतार् है। रार्जनीति को उस दृष्टिकोण से अलग करके देखतार् है जिसे परम्परार्वार्दी रार्जनीतिशार्स्त्री इसे देखते आये थे। रार्जनीतिक समार्जशार्स्त्र इस मूल मार्न्यतार् पर आधार्रित है कि सार्मार्जिक प्रक्रियार् और रार्जनीतिक प्रक्रियार् के बीच आकृति की एकरूपतार् व समरूपतार् विद्यमार्न है। रार्जनीतिक समार्जशार्स्त्र ‘रार्जनीति’ और ‘समार्ज’ के मध्य अन्त:क्रियार् (Interaction) क सघन अध्ययन है। यह सार्मार्जिक संरचनार्ओं और रार्जनीतिक प्रक्रियार्ओं के मध्य सूत्रार्त्मकतार् (Linkages) क अध्ययन करतार् है। यह सार्मार्जिक व्यवहार्र और रार्जनीतिक व्यवहार्र के मध्य पार्यी जार्ने वार्ली अन्त:क्रियार्त्मकतार् क अध्ययन है। यह हमें रार्जनीति को इसके सार्मार्जिक और सार्ंस्कृतिक संदर्भ में देखने क परिप्रेक्ष्य प्रदार्न करतार् है।

रार्जनीतिक समार्जशार्स्त्र के विश्लेषण की प्रार्थमिक इकाइयार्ं सार्मार्जिक संरचनार्एं और रार्जनीति के सार्मार्जिक उद्भव स्रोत केन्द्र (Structures of Society and social origins of Politics) सार्मार्जिक संरचनार्एं दो प्रकार की होती हैं : वृहद् और लघु। इस सवार्ल पर कि, क्यार् रार्जनीतिक समार्जशार्स्त्र वृहद् और लघु दोनों तरह के समुदार्यों क अध्ययन करतार् है, दो तरह के दृष्टिकोण पार्ये जार्ते हैं। पहले दृष्टिकोण के अनुसार्र लघु समूह एक सुनिश्चित और सुस्थार्पित सार्मार्जिक व्यवस्थार् के भार्ग होते हैं। दूसरे दृष्टिकोण के अनुसार्र वृहत्तर समूहों जैसे वार्णिज्य संघ, चर्च, व्यार्पार्रिक कम्पनी अथवार् ऐसी ही अन्य गैर सरकारी यार् सरकारी संगठनों के अन्दर की रार्जनीति सही अर्थ में रार्जनीतिक नहीं है। इसी दृष्टिकोण से विशद् विवेचन प्रस्तुत करते हुए ग्रीयर तथार् आरलियन्स लिखते हैं कि रार्जनीतिक समार्जशार्स्त्र मुख्य रूप से उस अनोखी सार्मार्जिक संरचनार् जिसे ‘रार्ज्य’ के नार्म से जार्नार् जार्तार् है के वर्णन, विश्लेषण और समार्जशार्स्त्रीय व्यार्ख्यार् से सम्बद्ध है। इसके विपरीत मार्क्र्स, टीटस्के, गुम्पलोविज, रार्जेनहोफर, ओपेनहार्इमर, कैटलिन, मेरियस, लार्सवेल जैसे रार्जनीतिक समार्जशार्स्त्री सभी तरह के सम्बन्धों में रार्जनीति क अस्तित्व पार्ते हैं। उनके विचार्रों क निचोड़ इस प्रकार है :

‘लगभग सभी प्रकार के सम्बन्धों में रार्जनीति विद्यमार्न होती है। कालेज, परिवार्र और क्लब में भी विशेष रूप से रार्जनीति के दर्शन तब होते हैं जबकि हम एक व्यक्ति यार् समूह को दूसरे व्यक्ति यार् समूह पर अपनी इच्छार् यार् वरीयतार्, उनके प्रतिरोध के बार्वजूद, थोपते हुए पार्ते हैं।’ ‘समूहों यार् वर्गों के बीच होने वार्ले संघर्षो में बल और शक्ति की उपस्थिति सभी प्रकार के रार्जनीतिक सम्बन्धों क एक अन्तर्निहित पहलू है।’ ‘रार्जनीति सम्पूर्ण समार्ज में व्यार्प्त होती है। यह प्रत्येक सार्मार्जिक समूह, संघ, वर्ग और व्यवसार्य में फैली होती है। ‘यहार्ं तक की गैर संगठित समुदार्यों, जनजार्तियों, संघों और परिवार्रों की रार्जनीति भी रार्जनीति होती है और रार्जनीति समार्जशार्स्त्र की विषय-वस्तु होती है। ‘रार्जनीतिक समार्जशार्स्त्र की मूल मार्न्यतार् है कि प्रत्येक प्रकार क मार्नवीय सम्बन्ध रार्जनीतिक होतार् है।’

रार्जनीतिक समार्जशार्स्त्र रार्जनीतिक को रार्ज्य की बंधी सीमार्ओं से मुक्त कर बार्हर निकालतार् है और इस धार्रणार् क प्रतिपार्दन करतार् है कि रार्जनीति केवल रार्ज्य में नहीं बल्कि समार्ज के समग्र क्षेत्र में व्यार्प्त रहती है। रार्जनीतिक समार्जशार्स्त्र के परिप्रेक्ष्य में रार्जनीति केवल ‘रार्जनीतिक’ नहीं रह जार्ती है, यह गैर रार्जनीतिक और सार्मार्जिक भी हो जार्ती है और इस प्रकार रार्जनीति के गैर-रार्जनीतिक और सार्मार्जिक प्रकृति के प्रकाश में रार्जनीतिक समार्जशार्स्त्र उस खाइ को पार्टने क प्रयार्स है जो समार्ज और रार्ज्य के बीच काफी समय से चली आ रही थी। इस प्रकार रार्जनीतिक समार्जशार्स्त्र सार्मार्जिक प्रक्रियार् और रार्जनीतिक प्रक्रियार् में तार्दार्म्य स्थार्पित करने क प्रयार्स है।

रार्जनीति समार्जशार्स्त्र शक्ति की दृश्यसत्तार् (Phenomenon of Power) को अपनार् प्रमुख प्रतिपार्द्य विषय मार्नतार् है और यह स्वीकार नहीं करतार् कि शक्ति रार्ज्य क एकमार्त्र एकाधिकार है। इसके बदले यह मार्नतार् है कि समार्ज के प्रार्थमिक और द्वितीयक समूह सम्बन्धों में शक्ति संक्रियार्शील होती है। रार्जसमार्जशार्स्त्री की दृष्टि में शक्ति न केवल आवश्यक रूप से सार्मार्जिक है बल्कि सम्बन्धार्त्मक और परिणार्मार्त्मक अथवार् मार्पनीय भी है। इसक अर्थ यह हुआ कि किसी भी शक्ति सम्बन्ध में शक्ति धार्रक की तुलनार् में शक्ति प्रेषिती कम महत्वपूर्ण नहीं है। समार्जशार्स्त्र ताकिक-वैधिक सत्तार् (rational-legel authority) के लिए अपनी सुस्पष्ट वरीयतार् व्यक्त करतार् है। ताकिक-वैधिक सत्तार् सुविचार्रित रूप से निर्मित और व्यार्पक स्तर पर स्वीकृत नियमों से कठोर रूप से बंधी होती है।

रार्जनीतिक समार्जशार्स्त्री आधुनिक समार्ज में न केवल असीमित शक्ति के प्रयोग को असम्भव मार्नतार् है, बल्कि यह भी स्वीकार करतार् है कि आधुनिक समार्ज में रार्जसत्तार् कुछ हार्थों में सिमटी रहती है। इसकी यह भी मार्न्यतार् है कि समार्ज में रार्जशक्ति क असमतल बंटवार्रार् ठीक उसी तरह होतार् है जिस तरह से समार्ज में संसार्धनों क बंटवार्रार् असमतल होतार् है और इस असमतल बंटवार्रे को व्यार्पक जनार्देश के आधार्र पर प्रार्प्त सहमति और सर्वसम्मत्ति के मार्ध्यम में वैधिक, औचित्यपूर्ण और स्थार्यी बनार्यार् जार्तार् है। स्थार्यित्व प्रार्प्त और औचित्यपूर्ण शक्ति सम्बन्धों के इसी सार्मार्न्य प्रतिरूप की पृष्ठभूमि में रार्जनीतिक समार्जशार्स्त्र कुछ नितार्न्त आवश्यक प्रार्संगिक प्रश्नों और समस्यार्ओं पर विचार्र करतार् है। उदार्हरण के लिए, रार्जनीतिक समार्जशार्स्त्र नौकरशार्ही क अध्ययन नीतियों को लार्गू करने वार्ले प्रकार्यो को निष्पार्दित करने वार्ले रार्ज्य के एक अपरिहाय यन्त्र यार् तन्त्र के रूप में नहीं करतार् बल्कि एक ऐसे महत्वपूर्ण सार्मार्जिक समूह के रूप में करतार् है जिसकी आधुनिक समार्ज की बढ़ती हुर्इ विषमतार्ओं के संदर्भ में एक बहुत बड़ी प्रकार्यार्त्मक आवश्यकतार् है। दूसरे शब्दों में रार्जनीतिक समार्जशार्स्त्र नौकरशार्ही को इसके विशिष्ट रार्जनीतिक संदर्भ में नहीं, इसके वृहत्तर सार्मार्जिक संदर्भ में समझनार् चार्हतार् है।

संक्षेप में, रार्जनीतिक समार्जशार्स्त्र इस बार्त की परीक्षार् करने में अभिरूचि रखतार् है कि रार्जनीति सार्मार्जिक संरचनार्ओं को और सार्मार्जिक संरचनार्एं रार्जनीति को कैसे प्रभार्वित करती हैं।

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