मुसोलिनी क परिचय एवं नीति

फार्सीवार्द के सिद्धार्तं के प्रणेतार् बेनिटो मुसोलिनी क जन्म एक लुहार्र परिवार्र में सन् 1883 में हुआ थार्। उसक पितार् समार्जवार्दी विचार्रधार्रार् क समर्थक थार्, इसलिए मुसोलिनी भी अपने पितार् के विचार्रों से प्रभार्वित हुआ थार्। उसकी मार्तार् अध्यार्पनकार्य करती थीं। उनकी प्रेरणार् से मुसोलिनी ने भी एक छोटे स्कूल में अध्यार्पन प्रार्रंभ कर दियार्। कालार्न्तर में उच्च शिक्षार् प्रार्प्त करने के लिए वह स्विट्जरलैण्ड चलार् गयार्। वहार्ं पर उसने टे्रड यूनियन के गठन के लिए कठोर परिश्रम कियार्। उसने पत्रकारितार् के क्षेत्र में भी कार्य कियार् थार् और समार्जवार्दी पत्रों में कर्इ क्रार्ंतिकारी लेख लिखे। उसकी क्रार्ंतिकारी गतिविधियों के कारण उसे स्विट्जरलैण्ड से निष्कासित कर दियार्। वहार्ं से मुसोलिनी इटली वार्पस आ गयार् और इटली की जनतार् में अपने क्रार्ंतिकारी विचार्रों क प्रचार्र करनार् प्रार्रंभ कर दियार्। सन् 1908 में सरकार ने उसे बंदी बनार्कर जेल भेज दियार् किन्तु कुछ समय पश्चार्त् उसे जेल से छोड़ दियार् गयार्। सन् 1912 में मुसोलिनी ने विख्यार्त समार्जवार्दी पत्रिक ‘अवन्ति’ क सम्पार्दन कार्य प्रार्रंभ कर दियार्। इस पत्रिक में उसके अनेक लेख प्रकाशित हुए जिनके मार्ध्यम से मुसोलिनी के रार्जनीतिक, सार्मार्जिक व आर्थिक विचार्रों क ज्ञार्न जनतार् को सरलतार् से हो गयार्। उसके विचार्रों पर मार्क्र्सवार्द तथार् संघवार्द क स्पष्ट प्रभार्व थार्। मुसोलिनी इटली के रार्ष्ट्रीय ध्वज एवं चर्च क कट्टर विरोधी थार्। रार्ष्ट्रीय ध्वज को वह गार्बे र की पहार्ड़ी पर टँगार् हुआ कपड़े क टुकड़ार् बतार्यार् थार्।

सन् 1914 में प्रथम विश्वयुद्ध प्रार्रंभ होने पर जब इटली की सरकार ने युद्ध से अलग रहने क निर्णय लियार् तो मुसोलिनी ने सरकार के इस निर्णय की कटु आलार्चे नार् की। इस कृत्य के आरोप में उसे ‘अवन्ति’ पत्रिक के संपार्दन कार्य से मुक्त कर दियार् गयार्। किन्तु सार्हसी मुसोलिनी निरार्श नहीं हुआ और अपने विचार्रों को निरंतर जनतार् में फैलतार् रहार्। फलस्वरूप सरकार को अपनार् निर्णय बदलकर सन् 1915 में मित्ररार्ष्ट्रों के पक्ष में युद्ध में सम्मिलित होने की घोषणार् करनी पड़ी। इस घटनार् के कारण मुसोलिनी की लोकप्रियतार् में और अधिक वृद्धि हो गयी। उसने एक सैनिक के रूप में प्रथम विश्वयुद्ध में भार्ग लियार् थार्। वह कहतार् थार्- ‘‘आज क यह युद्ध जनतार् क युद्ध है। कालार्न्तर में यह एक क्रार्ंति के रूप में विकसित होगार्।’’

फार्सी दल क गठन

युद्ध-काल में इटली की जनतार् रूस की बोल्शेविक क्रार्ंति से प्रभार्वित हुर्इ थी। इटली के कम्यूनिस्टों ने भी अपने देश में रूस जैसी क्रार्ंति करने की योजनार् बनार्यी। मुसोलिनी सार्म्यवार्दियों तथार् बोल्शेविकों से घृणार् करतार् थार्। अत: उसने बोल्शेविकों के विरूद्ध संघर्ष करने तथार् सार्मार्जिक अधिकारों को पुन: स्थार्पित करने के लिए नवीन दल क गठन करने क निश्चय कियार्। इसी निश्चय के आधार्र पर माच 1919 र्इ. में फार्सिस्ट दल की स्थार्पनार् की गयी। मुसोलिनी के नेतृत्व में इस दल ने अत्यधिक लार्के प्रियतार् प्रार्प्त की तथार् सेवार्निवृत्त सैनिकों, समार्जवार्दियों, विद्याथियों, किसार्नो, मजदूरों, पजूं ीपतियों तथार् मध्यम वर्ग के व्यक्तियों ने बड़े उत्सार्ह के सार्थ फार्सिस्ट दल की सदस्यतार् को स्वीकार कियार्। मुसोलिनी ने अपनी योग्यतार् व कुशलतार् के द्वार्रार् दल के सभी सदस्यों को एकतार् व संगठन के सूत्र में बार्ंधने में सफलतार् प्रार्प्त की। फार्सिस्ट दल के सदस्य काली कमीज पहनते थे तथार् हथियार्रों से सुसज्जित रहते थे। मुसोलिनी अपने दल क चीफ कमार्ण्डर थार्। वह एक महार्न् वक्तार् थार्। फार्सिस्ट दल क अपनार् निजी ध्वज होतार् थार्।

फार्सिस्ट दल क प्रथम अधिवेशन मिलार्न नार्मक नगर में आयोजित कियार् गयार् थार्। इस अधिवेशन में दल के कार्यक्रम की घोषणार् के सार्थ-सार्थ एक मार्ंग-पत्र भी तैयार्र कियार् गयार्। इसमें अग्रलिखित मार्ंगों को प्रमुखतार् दी गयी थी :

  1. युद्ध-सार्मग्री को बनार्ने वार्ले कारखार्नों क रार्ष्ट्रीयकरण कियार् जार्य। 
  2. युद्ध-काल में पूजीपतियों द्वार्रार् कमार्ये गये धन के 85 प्रतिशत भार्ग को जब्त कियार् जार्य। 
  3. कुछ उद्योगों पर श्रमिकों क नियंत्रण स्थार्पित कियार् जार्य। 
  4. सावजनिक मतार्धिकार को लार्गू कियार् जार्य।
  5. इटली को रार्ष्ट्र-संघ की सदस्यतार् प्रदार्न की जार्य। 
  6. चर्च की सम्पत्ति को जब्त कियार् जार्य। 
  7. श्रमिकों को अधिकतम आठ घण्टे प्रतिदिन कार्य करने की सुविधार्न प्रदार्न की जार्य। 
  8. पजूं ीवार्दी भार्वनार् क विरोध कियार् जार्य। 
  9. देश के नवीन संविधार्न क निर्मार्ण करने हेतु एक असेम्बली क गठन कियार् जार्य।

मुसोलिनी की सफलतार्

फार्सिस्ट दल क कार्यक्रम और मार्ंगपत्र इटली की जनतार् में शीघ्र ही लोकप्रिय हो गयार् और इस दल की सदस्य-संख्यार् तीव्र गति से बढ़ने लगी। सन् 1919 में फार्सिस्ट दल की सदस्य-संख्यार् सत्रह हजार्र थी, किन्तु यह संख्यार् सन् 1920 में बढ़कर तीस हजार्र तथार् सन् 1922 में तीन लार्ख हो गयी। इस उल्लेखनीय लार्के प्रियतार् को प्रार्प्त करने के बार्द फार्सिस्टवार्दियों ने इटली में समार्जवार्दियों एवं सार्म्यवार्दियों के कार्यार्लयों पर कब्जार् करनार् प्रार्रंभ कर दियार्। किन्तु तत्कालीन सरकार फार्सिस्टवार्दियों की आक्रार्मक व आतंकवार्दी नीति पर काब ू पार्ने में सफल नहीं हो सकी। इसी मध्य अक्टूबर 1922 र्इ. में फार्सिस्ट दल क अधिवेशन नेपिल्स में आयोजित कियार् गयार्। इस अधिवेशन में लगभग पचार्स हजार्र कायर्क र्तार्ओं ने भार्ग लियार्। उन्होनें सर्वसम्मति से एक मार्ंगपत्र पार्रित कियार् जिसमें निम्नलिखित मार्गें थीं :

  1. फार्सी दल के कम से कम पार्ंच सदस्यों को मंत्रिमंडल में स्थार्न दियार् जार्य। 
  2. नवीन चुनार्वों की घोषणार् की जार्य। 
  3. सरकार प्रभार्वी विदेश-नीति क पार्लन करे।

इस अधिवेशन में लिये गये निर्णय के अनुसार्र फार्सिस्ट दल ने सरकार को उपर्युक्त मार्ंगें स्वीकार करने के लिए 27 अक्टूबर तक क समय दियार् तथार् यह चेतार्वनी दे दी कि उक्त तिथि तक मार्ंगें स्वीकार न होने की स्थिति में फार्सिस्ट दल के स्वयंसवे क इटली की रार्जधार्नी रोम पर आक्रमण कर देगें । सरकार द्वार्रार् उपर्युक्त मार्ंगों को स्वीकार करने से इन्कार करने के फलस्वरूप फार्सिस्टवार्दियों ने मुसोलिनी के नेतृत्व में रार्मे की तरफ बढ़नार् प्रार्रभ कर दियार्। उन्होंने रेलवे स्टेशनो, डार्कघरों व सरकारी कार्यार्लयों पर अधिकार कर लियार्। सम्रार्ट विक्टर इमन्े युअल तृतीय ने भयभीत होकर मुसोलिनी के समक्ष देश क प्रधार्नमंत्री पद संभार्लने क प्रस्तार्व रख दियार्। 30 अक्टूबर को मुसोलिनी ने अपने दल के पचार्स हजार्र स्वयंसेवकों सहित रोम में प्रवेश कियार् और वह देश क प्रधार्नमंत्री नियुक्त कियार् गयार्। इटली के इतिहार्स में यह एक रक्तहीन क्रार्ंति थी।

मुसोलिनी-इटली क तार्नार्शार्ह

मुसोलिनी जनतंत्र और बहुमत के सिद्धार्ंतों से घृणार् करतार् थार्। रार्ज्य की सर्वोच्चतार् में उसे अगार्ध विश्वार्स थार्। रार्ज्य के सम्मुख उसने व्यक्तिगत अधिकारों को कभी स्वीकार नहीं कियार्। अपनी स्थिति को अधिक सुदृढ़ करने के लिए मुसोलिनी ने प्रशार्सनिक क्षेत्र में तीन अंगों क गठन कियार्- (1) मंत्रि-परिषद, (2) फार्सिस्ट दल की वृहद परिषद, (3) संसद।

मंत्रि-परिषद के सभी सदस्य मुसोलिनी के कट्टर समर्थक थे। वृहद् परिषद फार्सिस्ट दल की प्रबंध समिति थी जिसक नेतार् मुसोलिनी थार्। इसकी सदस्य संख्यार् 25 थी। संसद के दो सदस्य बनार्ये गये-सीनेट तथार् चेम्बर ऑफ डेपुटीज। सीनेट के सदस्यों को स्वयं मुसोलिनी मनोनीत करतार् थार्, जबकि चेम्बर ऑफ डेपुटीज के सदस्यों को मंत्रि-परिषद एवं वृहद् परिषद द्वार्रार् नियुक्त कियार् जार्तार् थार्। इस प्रकार नवीन व्यवस्थार् के द्वार्रार् मुसोलिनी ने शार्सन की सम्पूर्ण शक्ति पर पूरार् अधिकार कर लियार्। देश की जनतार् ने मुसोलिनी के इन कार्यों क भी भरपूर समर्थन कियार् क्योंकि मुसोलिनी ने गणतंत्रीय सरकार के अधूरे कार्यों को पूरार् करने क आश्वार्सन जनतार् को दियार् थार्। इस प्रकार मुसोलिनी अन्तत: इटली क वार्स्तविक स्वार्मी बन गयार् तथार् उसने देश में अपनी तार्नार्शार्ही को स्थार्पित करने में सफलतार् प्रार्प्त की।

मुसोलिनी की गृह-नीति

सुदृढ़ केन्द्रीय सरकार की स्थार्पनार्

मुसोलिनी अत्यंत महत्वार्कांक्षी व्यक्ति थार्। प्रधार्नमंत्री पद ग्रहण करने के पश्चार्त् उसने धीरे-धीरे अपनी शक्ति में वृद्धि करनार् प्रार्रंभ कर दियार् थार्। इस संबंध में उसने दोहरी नीति को अपनार्यार्। उसक विचार्र थार् कि केन्द्र में मजबूत सरकार के अभार्व में देश उन्नति कर सकतार्। इस दृष्टि से मुसोलिनी ने निम्नलिखित कदम उठार्ये :

  1. प्रधार्नमंत्री बनने के पश्चार्त् उसने संसद-सदस्य को डरार्-धमकाकर संसदीय अधिकारों को एक वर्ष के लिए अपने हार्थों में ले लियार्। 
  2. सन् 1923 में एक कानून बनार्कर यह व्यवस्थार् कर दी गयी कि चुनार्वों में स्पष्ट बहुमत अथवार् सर्वार्धिक स्थार्नों पर विजय प्रार्प्त करने वार्ले दल को संसद में दो- तिहाइ बहुमत प्रार्प्त करने क अधिकार होगार्। इस व्यवस्थार् के अनुसार्र सन् 1924 में फार्सिस्ट दल को संसद में दार्-े तिहाइ बहुमत प्रार्प्त करने में सफलतार् मिल गयी। 
  3. सन् 1926 में सभी विरोधी दलों को अवैध घोषित कर दियार् गयार्। प्रमुख विपक्षी नेतार्ओं को गिरफ्तार्र करके अनिश्चित काल के लिए जेल में बंद कर दियार् गयार्। 
  4. सरकार की आलोचनार् करनार् रार्जनीतिक अपरार्ध घोषित कर दियार् गयार्। 
  5. प्रेस पर कठोर सरकारी नियंत्रण स्थार्पित कियार् गयार्। समार्चार्र-पत्रों की संख्यार् कम कर दी गयी। 
  6. जनतार् की स्वतंत्रतार् को समार्प्त करने के लिए विभिन्न कदम उठार्ये गय।े रार्जनीतिक अपरार्धियों के मार्मलों को निपटार्ने के लिए विशेष अदार्लतों क गठन कियार् गयार्। स्थार्नीय निकायों को समार्प्त कर दियार् गयार्। 
  7. सन् 1928 में चुनार्व प्रणार्ली में पुन: परिवर्तन कियार् गयार्। मतदार्तार् सूची को फार्सिस्ट दल द्वार्रार् तैयार्र कियार् गयार्। जिसके फलस्वरूप संसद पर फार्सिस्ट दल क एकाधिकार स्थार्पित हो गयार्। 

इस प्रकार मुसोलिनी ने सुदृढ़ केन्द्रीय सरकार की स्थार्पनार् की जिसमें कोर्इ विपक्ष नहीं थार्, कोर्इ प्रजार्तार्ंत्रिक संस्थार् नहीं थी, कोर्इ स्थार्नीय स्वशार्सी संस्थार् नहीं थी, कोर्इ जनमत नहीं थार् तथार् बहुमत क कोर्इ प्रश्न ही नहीं थार्।

इटली क आर्थिक विकास

इटली के आर्थिक ढार्ंचे में फार्सिस्ट दल के सिद्धार्ंतों व कायर्क्र मों ने क्रार्ंतिकारी परिवर्तन कर दियार्। देश के आर्थिक विकास की दृष्टि से निम्नलिखित कदम उठार्ये गये :

  1. जिस समय मुसोलिनी ने सत्तार् संभार्ली, उस समय जनतार् की आर्थिक दशार् शोचनीय थी। रार्ष्ट्रीय बजट पिछले कर्इ वर्षों से घार्टे में चल रहार् थार्। मुद्रार् क मूल्य दिन-प्रतिदिन गिर रहार् थार्। जबकि वस्तुओं की कीमतों में निरंतर वृद्धि हो रही थी। इस समस्यार् को हल करने के लिए मुसोलिनी ने रार्ज्य के व्यय को कम कियार् तथार् धनवार्नों पर अधिक ;ज्ंगद्ध कर लगार्य।े इस व्यवस्थार् के फलस्वरूप सन् 1925 में मुसोलिनी ने देश के बजट को संतुलित कर दियार्। बजट क घार्टार् पूरार् हो गयार् तथार् वस्तुओं की बढ़ती हुर्इ कीमतों पर भी काबू पार् लियार् गयार्।
  2. प्रथम विश्वयुद्ध के बार्द इटली में बेरोजगार्र व्यक्तियों की संख्यार् में तेजी से वृद्धि हुर्इ थी। मुसोलिनी ने इस समस्यार् को अत्यंत गंभीर मार्नकर इसक समार्धार्न करने के उद्देश्य से सावजनिक निर्मार्ण कार्यों तथार् स्कूल-कॉलेजों के भवनों के निर्मार्ण को प्रोत्सार्हित कियार्। देश में विभिन्न सड़कों, पुलों व विश्रार्मघरों क निमाण् ार् करार्यार् गयार्। पुरार्नी इमार्रतों की मरम्मत करार्यी गयी। कुछ बंदरगार्हों क भी निर्मार्ण हुआ। इस निर्मार्ण कार्य के फलस्वरूप हजार्रों बेरोजगार्रों को रोजगार्र प्रार्प्त हुआ। 
  3. उस समय देश की रेल व्यवस्थार् भी निरंतर पतन की ओर अग्रसर हो रही थी। इसक बजट भी घार्टे में चल रहार् थार्। मुसोलिनी ने रेलवे की आर्थिक स्थिति को सुधार्रने की ओर अपनार् पूरार् ध्यार्न लगार् दियार्। उसके प्रयत्नों से रेलवे बजट के घार्टे को शीघ्र ही पूरार् कर दियार् गयार्। 
  4. खजिन पदाथ एवं कच्चे मार्ल की दृष्टि से इटली एक गरीब देश थार्। इटली क लगभग दार्-े तिहाइ भार्ग पहार्ड़ियों से घिरार् हुआ थार्। कोयलार्, लोहार् तार्ंबार्, तेल आदि के अभार्व के कारण देश के औद्योगिक विकास एवं आर्थिक उत्थार्न में बहुत बड़ी बार्धार् उत्पन्न हो गयी थी। किन्तु मुसोलिनी अपने देश को सार्धन-सम्पन्न एवं स्वार्वलम्बी बनार्ने के लिए कृत-संकल्प थार्। उसने देश में कच्चे मार्ल एवं खनिज पदाथों के संसार्धनों क पतार् लगार्ने के लिए योग्य वैज्ञार्निकों एवं इंजीनियरों से परार्मर्श कियार् तथार् इस दिशार् में उसे काफी सीमार् तक सफलतार् भी प्रार्प्त हो गयी किन्तु कच्चे मार्ल एवं खनिज पदाथो के क्षेत्र में इटली को स्वार्वलम्बी बनार्ने क मुसोलिनी क स्वप्न पूरार् नहीं हो सका।
  5. मुसोलिनी की गृह-नीति क मुख्य उद्देश्य उत्पार्दन में वृद्धि करनार् थार्। उस समय कृषि की दशार् चिन्तार्जनक थी। अत: मुसोलिनी ने कृषि की स्थिति को सुधार्रने की ओर पूरार् ध्यार्न लगार्यार्। बंजर भूमि को कृषि-योग्य बनार्यार् गयार्। कृषकों को सरकार की ओर से पुरस्कार देने की व्यवस्थार् की गयी तार्कि उनमें अधिकतम उत्पार्दन करने की प्रतियोगी भार्वनार् उत्पन्न हो सके। किसार्नों को कृषि करने के नवीन और वैज्ञार्निक तरीकों की शिक्षार् दी गयी। मुसोलिनी के इन कार्यों के फलस्वरूप कृषि-क्षेत्र में उत्पार्दन पहले की अपेक्षार् बहुत अधिक बढ़ गयार्।

मुसोलिनी की शिक्षार् संबंधी नीति

अपने दल को सुदृढ़ बनार्ने के उद्देश्य से मुसोलिनी ने इटली की शिक्षार्-प्रणार्ली में कुछ महत्वपूर्ण परिवर्तन किये। देश के युवार् वगर् को फार्सिस्ट दल के सिद्धार्ंतों से होने वार्ले लार्भों की शिक्षार् देने के लिए एक ‘फार्सिस्ट युवार् फेडरेशन’ क गठन कियार् गयार्। प्रार्इमरी तथार् मार्ध्यमिक स्तर तक फार्सिज्म के सिद्धार्ंतों की शिक्षार् को अनिवाय कर दियार् गयार्। नवीन शिक्षार्-नीति के अंतर्गत शिक्षण-संस्थार्ओं को विद्याथियों की आयु के आधार्र पर पार्ंच विभिन्न वर्गों में विभार्जित कियार् गयार्। सभी शिक्षण-संस्थार्ओं को फार्सिज्म के सिद्धार्ंतों के सार्थ सम्बद्ध कर दियार् गयार्। इसके अतिरिक्त लड़कियों को फार्सिज्म की शिक्षार् देने की भी पृथक व्यवस्थार् की गयी।

पोप के सार्थ समझौतार्- मुसोलिनी के प्रयार्सों से 11 फरवरी, 1929 को एक समझौतार् सम्पन्न हुआ। इसके अन्तर्गत निम्नलिखित निर्णय लिये गये :

  1. पोप ने रोम से अपनार् अधिकार त्यार्ग दियार् और रोम को इटली की रार्जनीतिक के रूप में स्वीकार कर लियार्। 
  2. मुसोलिनी ने पोप को कैथोलिक जगत क सावभौमिक स्वार्मी स्वीकार कियार्। 
  3. पार्पे को विदेशों के सार्थ संबंध स्थार्पित करने, विदेशों में अपने रार्जदतू नियुक्त करने तथार् विदेशी रार्जदूतों क स्वार्गत करने क अधिकार दे दियार् गयार्। वह अपनी निजी डार्क टिकट एवं मुद्रार् जार्री कर सकतार् थार्। 
  4. सरकार ने पोप को प्रति वर्ष दस करोड़ डार्लर की धनरार्शि देने क वचन दियार्।
  5. रोमन कैथोलिक धर्म को इटली क रार्जधर्म घोषित कियार् गयार्।
  6. रोमन कैथोलिकों द्वार्रार् संचार्लित शिक्षण-संस्थार्ओं को मुसोलिनी ने फार्सिस्ट दल के विद्यार्लयों में विलीन कर दियार्। चौदह वर्ष से अधिक आयु के प्रत्येक रोमन कैथोलिक को फार्सिस्ट दल के नेतार् के प्रति स्वार्मिभक्त रहने की घोषणार् करनार् अनिवाय कर दियार् गयार्। मुसोलिनी ने धीरे-धीरे शिक्षार् के क्षेत्र में चर्च के प्रभार्व को बिल्कुल समार्प्त कर दियार्।

मुसोलिनी की विदेश नीति

इटली यद्यपि विश्वयुद्ध में विजयी हुआ थार् किंतु मित्ररार्ष्ट्रों ने उससे जो भी वार्यदे किये थे, पूरने नहीं किये थे। मुसोलिनी क विचार्र थार् कि यह इटली क अपमार्न है। वह चार्हतार् थार् कि इस अपमार्न क बदलार् मित्र रार्ष्ट्रों पर भरोसे की नीति छोड़ कर सार्म्रार्ज्यवार्दितार् की नीति अपनार्कर लियार् जार् सकतार् है। उसक मार्ननार् थार् कि मित्र रार्ष्ट्रों द्वार्रार् बनाइ गर्इ अंतर्रार्ष्ट्रीय संस्थार्एँ किसी देश के निवार्सियों की भार्वुकतार् एवं सिद्धार्ंतों से धरार्शार्यी हो जार्ती है। इनक अस्तित्व देशवार्सियों की भार्वनार्ओं तक ही सीमित है।

1. डोडिकानीज तथार् रोड्स द्वीपों क सैन्यीकरण

1920 र्इ. में हुर्इ सेव संधि के अनुसार्र डोडिकानीज और रोड्स इन दोनों द्वीपों पर यूनार्ने ने अधिकार लियार् जबकि ये पूर्व में इटली के अधीन थे। इटली की निगार्ह अभी भी इन दोनों द्वीपों पर लगी थी। टर्की के सुल्तार्न कलार्मपार्शार् द्वार्रार् यूनार्न को परार्जित करने के उपरार्ंत स्रेत की संधि तोड़े जार्ने से इटली को अप्रत्यार्शित लार्भ हो गयार्। 24 जुलाइ, 1923 र्इ .को हुर्इ लोजार्न की संधि में सेव्र को संशार्ंधित कियार् और ये दोनों द्वीप इटली को प्रार्प्त हो गये। वार्स्तव में मुसोलिनी भूमध्य सार्गर को इटैलियन झील बनार्नार् चार्हतार् थार्। अत: उसने पूर्वी भमू ध्य सार्गर में स्थित इन दोनों द्वीपों क सैन्यीकरण शुरू कर दियार्। इस उसकी विदेशी नीति क प्रथम अभियार्न थार्।

2. टार्इरोल के प्रति नीति

पेरिस की संधि के अनुसार्र ठार्अरोल क टे्रण्टिनो नार्मक क्षेत्र इटली को सौंप दियार् गयार् थार्। टार्इरोल क यह भार्ग जो कि जर्मन बहुल थार्, इटली के क्षेत्र में आ गयार्। इटली ने अपने इस वार्यदे को कि उनके सार्थ समार्नतार् क व्यवहार्र करेगार्, भुलार्कर कोर्इ परवार्ह नहीं की। मुसोलिनी ने गैर इटैलियन को इटैलियन प्रभार्व में लार्नार् शुरू कर दियार्। उसने यह भी स्पष्टतयार् घोषित कियार् कि वह इटली के मार्लों में कोर्इ विदेशी हस्तक्षेप स्वीकार नहीं कर सकतार् है। इस प्रकार मुसोलिनी के हौसले बढ़ते चले गये।

3. करफू पर बम बर्षार्

यूनार्न तथार् अल्बार्नियार् के सीमार् विवार्द को सुलझार्ने के लिए ‘डीलिमिटेशन कमीशन’ कार्य कर रहार् थार् कि यूनार्न में अगस्त 1923 र्इ. की कुछ इटैलियन अधिकारियों की हत्यार् कर दी गर्इ। मुसोलिनी ने जो यूनार्न को चते ार्वनी दी कि 5 दिन के भीतर यूनार्न मार्मले की जार्ँच करार्कर आपरार्धियों को दण्ड दे तथार् इटली को 5 करोड़ थोरार् युद्ध क हर्जार्नार् दे। यूनार्न ने इस बार्त को रार्ष्ट्र संघ के सम्मुख रखार् मुसोलिनी ने यूनार्न के करफू टार्पू पर बम वर्षार् की और उस पर अधिकार कर लियार् किंतु इंग्लैण्ड के दबार्व के कारण उसे टार्पू खार्ली करनार् पड़ार् परंतु उसने क्षतिपूर्ति की रकम वसूल कर ही ली, यह मुसोनिली एक महत्वपूर्ण सफलतार् थी। इससे रार्ष्ट्र संघ की निर्बलतार् सिद्ध हुर्इ और मुसोलिनी को अग्रिम कार्यवार्ही हेतु प्रोत्सार्हन मिलार्।

4. यूगोस्लार्वियार् से संधि 27 जनवरी 1924 इटली

और यूगोस्लार्वियार् के संबंध बहुत अच्छे नहीं थे। इटली वासार्य की संधि में परिवर्तन क इच्छुक थार् जबकि यूगोस्लार्वियार् वासार्य की संधि को यथार्वत् रखनार् चार्हतार् थार्। एड्रियार्टिक सार्गर में दोनों के हित आपस में टकरार्ते थे। किंतु मुसोलिनी फ्यूम पर अधिकार कर भूमध्य सार्गर में अपनी स्थिति को दृढ़ करनार् चार्हतार् थार्। अत: उसने यूगोस्लार्वियार् से 27 जनवरी, 1924 र्इ. की संधि की। इस संधि से जार्रार् क बंदरगार्ह और डार्लमेशियार् क समुद्र तट यूगोस्लार्वियार् को दियार् गयार्। इटली क फ्यूम पर अधिकार हो गयार्। परंतु फ्यूम क बंदरगार्ह यूगोस्लार्वियार् के पार्स ही रहार्। फ्यूम क नगर प्रार्प्त करनार् मुसोलिनी की विदेशी नीति के संदर्भ में एक महत्वपूर्ण  सफलतार् थी।

5. रूस से 1924 र्इ. की संधि

मुसोलिनी यूरोप की रार्जनीति में किसी शक्तिशार्ली मित्र क सार्थ ढूँढ रहार् थार्। उसने देखार् कि रूस वार्साय संधि क विरोधी है और परिवर्तन क इच्छुक है। अत: मुसोलिनी ने फरवरी 1924 र्इ. में रूस के सार्थ व्यार्पार्रिक संधि की और सार्थ ही रूसी सरकार को मार्न्रूतार् प्रदार्न की। इस संधि से हार्लार्ंकि इटली को कुछ प्रार्प्त नहीं हुआ किंतु उसने यूरोपीय रार्जनीति में रूस सार् मित्र बनार् लियार् जिससे रार्जनैतिक मंच पर इटली क सम्मार्न बढ़ गयार्।

6. रोम पैक्ट 1935 इटली

के सार्थ फ्रार्ंस के व्यार्पार्रिक संबंध अच्छे नहीं थे। जहार्ँ ट्यूनिस, कार्सिक और सेवार्य पर मुसोलिनी अधिकार करनार् चार्हतार् थार्, वहीं इन पर फ्रार्ंस क अधिकार थार्। भूमध्यसार्गर में भी दोनों के हित टकरार्ते थे। परंतु हिटलर के उत्कर्ष में दोनों को करीब लार्ने में महत्वपूर्ण भूमिक निभाइ। हिटलर एवं मुसोलिनी दोनों आस्ट्रियार् संबंधी विचार्रों ने रोम पैक्ट को जन्म दे दियार्। इसके अनुसार्र –

  1. फ्रार्ंस के 44500 वर्ग मील अफ्रीकी क्षेत्र इटली को प्रार्प्त हो गये। 
  2. दोनों देशों में प्रतिद्विन्द्वतार् समार्प्त हो गर्इ। 
  3. आस्ट्रियार् पर संकट आने पर दोनों देश परस्पर विचार्र-विमर्श करेगेंं 
  4. यूरोप की स्थिति यथार्वत् रहेगी। 

7. स्ट्रेसार् की संधि

यह संधि भी हिटलर के भय से 1935 र्इ. में स्ट्रेसार् नार्मक स्थार्न पर इंग्लैण्ड से की गर्इ। इसक महत्व इस बार्त से है कि इंग्लैण्ड इटली और फ्रार्ंस के गठबंधन ने हिटलर के विरोध में एक मोर्चे क कार्य कियार्।

8. अन्य देशों से संधियार्ँ

मुसोलिनी ने अपनी स्थिति दृढ़ करने के लिए 1926 र्इ. में रूमार्नियार् और स्पेन से, 1927 र्इ. में हंगरी से, 1928 र्इ. में यूनार्न व टर्की से 1932 र्इ. में रूस से संधियार्ँ कीं। इन संधियों से यूरोपीय जगत में इटली ने अपनार् सम्मार्नित स्थार्न बनार् लियार्। वेन्स महोदय ने तो यहार्ँ तक कहार् है कि 1930 र्इ. तक मुसोलिनी व्यार्वसार्यिक एवं कूटनीतिक प्रभार्व बढ़ार्ने में सफल रहार्।

9. रार्ष्ट्र संघ क परित्यार्ग

इसके तुरंब बार्द इटली ने रार्ष्ट्र संघ की सदस्यतार् से हार्थ खींच लिये।

10. रोम-बर्लिन धुरी की स्थार्पनार् 

हिटलर इस बार्त कसे पूर्णतयार् भिज्ञ थार् कि मुसोलिनी को अपनी और करके ही आस्ट्रियार् पर अधिकार पार्यार् जार् सकतार् है। अबीसीनियार् के प्रति इटली के रवैये ने फ्रार्ंस, इंग्लैण्ड एवं रूस को चौकन्नार् कर दियार् थार्। फ्रार्ंस, इंग्लैण्ड एवं रूस के व्यवहार्र से भी इटली खिन्न थार् कष्ट के समय हिटलर ने इटली की पर्यार्प्त मदद की। मुसोलिनी समझ गयार् थार् कि हिटलर सच्चार् मित्र है। अत: इटली व जर्मनी के बीच 26 अक्टूबर, 1936 र्इ. को एक समझौतार् हुआ जो इतिहार्स में रोम-बर्लिन धुरी के नार्म से प्रख्यार्त है, इस समझौते की शर्ते इस प्रकार थी –

  1. दोनों देश समार्जवार्दी व्यवस्थार् क विरोध करेगेंं 
  2. स्पने की रक्षार् की जार्यगे ी। 
  3. दोनों देश समय-समय पर वातार् करेगें। 
  4. जर्मनी क आस्ट्रियार् तथार् चेकस्लोवार्कियार् पर मौन अधिकार स्वीकार कर लियार् गयार्। शीघ्र ही इस संधि में जार्पार्न को शार्मिल कर लियार् गयार् और रोम-बर्लिन टोक्यो धुरी क निर्मार्ण हो गयार्।

12. अल्बार्नियार् पर अधिकार

इटली क अल्बार्नियार् के लिए विशेष महत्व थार्। अल्बार्नियार् आर्थिक दृष्टि से अत्यंत पिछड़ार् थार्। अत: 27 नवम्बर, 1926 र्इ. को अल्बार्नियार् ने इटली की संधि की। इस संधि की धार्रार्एँ निम्नवत थीं –

  1. अल्बार्नियार् के सैनिकों को इटलीके सैनिक पदार्धिकारी प्रशिक्षित करेगेंं
  2. अल्बार्नियार् इटली के अहित में किसी अन्य देश से संधि नहीं करेगार्। 
  3. दोनों देश बार्ह्य आक्रमणकारी क सार्मनार् मिलकर करेगेंं यह शर्त 20 वर्ष तक रहगे ी। तत्पश्चार्त मुसोलिनी ने अल्बार्नियार् में उसकी सहार्यतार् के बहार्ने अपनी सेनार्एँ भेज दीं और 1936 र्इ. में आक्रमण कर इटली में मिलार् लियार्। 

13. इटली व जर्मनी क समझौतार् 22 मर्इ, 1939 र्इ. 

22 मर्इ, 1939 र्इ. को इटली ने जर्मनी के सार्थ रार्जनैतिक समझौतार् कियार्। इस समझौते को फौलार्दी समझौते भी कहार् जार्तार् है। इसके अनुसार्र दोनों एक-दूसरे की सैन्य सहार्यतार् करेगेंं

14. द्वितीय विश्वयुद्ध व इटली

हिटलर ने 1 सितम्बर, 1939 र्इ. को पोलैण्ड पर आक्रमण करके द्वितीय विश्वयुद्ध को जन्म दे दियार्। स्अील पैक्ट के अनुसार्र इस समय मुसोलिनी को हिटलर क सार्थ देनार् चार्हिए थार्। किंतु जैसार् कि हेजन ने लिखार् है, ‘‘एक कारण इटली अशक्त थार्, जर्मनी के हित में उसक तटस्थ रहनार् ठीक थार्। स्पने के गृहयुद्ध में वह पूर्णतयार् थक चुक थार् – वह युद्ध क विचार्र भी नहीं कर सकतार् थार्। कुछ भी हो अंतत: 11 जून, 1940 र्इ. की मुसोलिनी ने हिटलर की ओर से मित्र रार्ष्ट्रों के विरोध में युद्ध की घोषणार् कर दी। प्रार्रंभ में उन्हें विजय मिली किंतु बार्द में उसे असफलतार् मिली और एक दिन ऐसार् भी आयार् जब 25 जुलाइ, 1943 र्इ. को उसे बंदी बनार् लियार् गयार् और 18 अपै्रल, 1945 र्इ. को देश की जनतार् ने उसे उसकी प्रेयसी के सार्थ मृत्यु-दण्ड दे दियार् गयार्।

इस प्रकार अंतत: कहार् जार् सकतार् है मुसोलिनी ने इटली को चरम उत्कर्ष तक तो उठार्यार् किंतु उसके फार्सीवार्द की संवर्धन की महत्वकांक्षार् उसके वध क कारण बनी।

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