भोज्य विषार्क्ततार् क्यार् है ?

सार्मार्न्य तौर पर भोजन करने के पश्चार्त व्यक्ति अच्छार् अनुभव करतार् है। उसे संतुष्टि प्रार्प्त होती है। किन्तु कभी-कभी कर्इ कारणों से भोजन प्रदूषित हो जार्तार् है। जिससे उसे ग्रहण करने के पश्चार्त व्यक्ति अस्वस्थ महसूस करतार् है भोजन क दूषित होनार् ही भोज्य विषार्क्ततार् क कारण बनतार् है।
‘‘व्यक्ति द्वार्रार् भोजन ग्रहण करने के तुरन्त बार्द यार् कुछ समय पश्चार्त हार्निकारक प्रभार्व (वमन, दस्त, चक्कर, पेट दर्द) दिखाइ देनार् ही, भोज्य विषार्क्ततार् कहलार्तार् है।’’

भोज्य विषार्क्ततार् के कारण 

भोज्य विषार्क्ततार् दो कारणों से पार्यी जार्ती है – 1. बार्ह्य कारणों से होने वार्ली भोज्य विषार्क्ततार् 2. आन्तरिक कारणों से होने वार्ली भोज्य विषार्क्ततार्।

1. बार्ह्य कारणों से होने वार्ली भोज्य विषार्क्ततार्- 

बार्ह्य भोज्य विषार्क्ततार् बार्हरी कारणों से होने वार्ली भोज्य विषार्क्ततार् बार्ह्य भोज्य विषार्क्ततार् कहलार्ती है। यह चार्र कारणों से पार्यी जार्ती है।

    1. बैक्टीरियार्
    2. विषार्णु 
    3. परजीवी कृमि 
    4. टोमेन विषार्क्ततार् 
      1. 1. बैक्टीरियार् द्वार्रार् भोज्य विषार्क्ततार्- 

    भोज्य विषार्क्ततार् क प्रमुख कारण है। बैक्टीरियार् द्वार्रार् भोजन क संदूषित होनार्। ये बैक्टीरियार् धूल, मिट्टी, पार्नी तथार् वार्यु आदि वार्हको द्वार्रार् भोजन में पहुँचकर उसे विषार्क्त बनार् देते है। कभी-कभी मिट्टी से सार्फ करने से तथार् सब्जियों को बिनार् धोये प्रयोग में लार्ने से यार् सही प्रकार से न धोने से, ये बैक्टीरियार् हमार्रे शरीर तक पहुॅच जार्ते है। बैक्टीरियार् द्वार्रार् होने वार्ली भोज्य विषार्क्ततार् के लक्षण 2 से 36 घंटे में दिखार्यी देते है। भोजन को विषार्क्त करने वार्ले वैक्टीरियार् विभिन्न प्रकार के होते है जो निम्न प्रकार की विषार्क्ततार् फैलार्ते है-

      1. स्टेफिलो कोकार्इ विषार्क्ततार् 
      2. सेल्मोनेलार् कोकार्इ विषार्क्ततार् 
      3. क्लार्स्टीडियम वेलकार्इ विषार्क्ततार् 
      4. क्लार्स्टीडियम बोटयूल्सिम विषार्क्ततार् 
        1. 1. स्टेफिलोकोकार्इ विषार्क्ततार् विषार्क्ततार्- यह विषार्क्ततार् स्टेफिलोकोकार्इ समूह के बैक्टीरियार् के कारण पार्यी जार्ती है। ये बैक्टीरियार् मनुष्य के घार्व फोडे, फुंसी, बहतार् हुआ कान आदि के द्वार्रार् तथार् संक्रमित गार्य क दूध पीने से ये हमार्रे शरीर में प्रवेश कर जार्ते है। ये एक विषैलार् पदाथ उत्पन्न करते है। जिसके कारण विषार्क्ततार् के लक्षण देखे जार्ते है जीवार्णु आमार्शय तथार् ऑत पर आक्रमण करते है।

          • लक्षण- भोज्य पदाथ ग्रहण करने के 1 घंटे से 5 घंटे के अन्दर ही वमन, पेट, दर्द, दस्त क लगनार् और कभी-कभी बुखार्र के लक्षण भी देखे जार्ते है। अत्यधिक उच्च तार्पक्रम पर भोज्य पदाथ को पकाने से इन बैक्टीरियार् की क्रियार्शीलतार् को समार्प्त कियार् जार् सकतार् है। 
          • बचार्व- इस समूह के जीवार्णुओं के बचने के लिए भोज्य पदाथो को उच्च तार्पक्रम पर पकायार् जार्नार् चार्हिए। 
        2. सेल्मोनेलार् विषार्क्ततार्-भोज्य विशार्क्ततार् सेल्मोनेलार् समूह के जीवार्णुओं द्वार्रार् उत्पन्न होती है। इस समूह में ‘सार्लम टार्इफी म्यूरियम’ सर्वार्धिक विषार्क्ततार् को फैलार्तार् है। ये दूध, दूध से बने भोज्य पदाथो द्वार्रार्, संक्रमित मार्ँस द्वार्रार्, संक्रमित व्यक्ति के मल आदि के द्वार्रार् हमार्रे “ार्रीर में प्रवेश कर जार्ते है।

        • उद्भवन काल- भोजन ग्रहण करने के कुछ घंटो पश्चार्त ही इसके लक्षण दिखार्यी देने लगते है। 
        • लक्षण- मितली, वमन, अधिक प्यार्स क लगनार्, पेट दर्द, दस्त होनार् सिर दर्द और बुखार्र के लक्षण देखे जार्ते है। 
        • बचार्व-भोज्य पदाथो को भली प्रकार से धोकर पकाने से इनसे मुक्त रह सकते है। 
        3. क्लार्स्ट्रीडियम बेलचाइ विषार्क्ततार्- यह विषार्क्ततार् क्लार्स्ट्रीडियम वेलचाइ समूह के जीवार्णुओं द्वार्रार् उत्पन्न होती है। ये जीवार्णु मनुष्य तथार् जार्नवरों के मल में, मिट्टी, हवार् तथार् पार्नी में पार्ये जार्ते है। ये अस्वच्छ हार्थों तथार् मक्खियों द्वार्रार् हमार्रे भोजन में प्रवेश करते है। ये जीवार्णु ‘‘अल्फार्’’ ‘‘थीटार्’’ नार्मक विष उत्पन्न करते है। बार्सी भोजन में ये जीवार्णु अधिक संख्यार् में पार्ये जार्ते है।

        • उद्भवन काल- इन जीवार्णुओं द्वार्रार् विषार्क्त भोजन करने के 8 से 12 घंटे के उपरार्न्त रोग के लक्षण दिखार्यी देने लगते है। 
        • लक्षण- पेट में दर्द, मॉसपेशियों में ऐंठन, दस्त एवं वमन होनार्। 
        • बचार्व- उचित तार्पक्रम पर उचित समय तक पकाने पर तथार् तुरन्त ही भोज्य पदाथ क उपयोग करके इस विषार्क्ततार् से बचार् जार् सकतार् है। 
        4. क्लार्स्ट्रीडियम बोट्यूलिनम विषार्क्ततार्-यह क्यार्स्ट्रीडियम बोट्यूलिनम समूह के जीवार्णुओं द्वार्रार् होती है। ये बैक्टीरियार् धूल, हवार्, जल में पार्ये जार्ते है। ये बिनार् वार्यु के भी भोज्य पदाथो में वृद्धि कर सकते है। इसलिये ये अधिकतर डिब्बे बन्द भोज्य पदाथो में तीव्र गति से वृद्धि करते है। इसके द्वार्रार् विषार्क्त भोजन से व्यक्ति की मृत्यु भी हो सकती है।

        • उदभवनकाल- इसमें संक्रमण के लक्षण 12 से 24 घंटो में दिखार्यी देने लगते है। 
        • लक्षण- सिर दर्द, बेचैनी, चक्कर आनार्, वमन, दस्त, पक्षार्घार्त होनार्। इसमें 70 प्रतिशत व्यक्तियों की मृत्यु हो जार्ती है। 
        • बचार्व- डिब्बार् बन्द भोज्य पदाथो क संरक्षण करने से पूर्व डिब्बों को जीवार्णु रहित करनार् आवश्यक है। 

        2. विषार्णु द्वार्रार् भोज्य विषार्क्ततार्- 

        वार्यरस जार्नवरों के मल द्वार्रार् शरीर के बार्हर आतार् है और जल व अन्य मार्ध्यमों से भोजन में पहुॅचकर भोजन को विषार्क्त बनार् देतार् है।

        • लक्षण-वार्यरस के द्वार्रार् विषार्क्तार् भोजन क उपयोग करने पोलियो नार्मक रोग हो सकतार् है। 
        • बचार्व-इससे बचने के लिये भोजन को अच्छे से पकाकर खार्नार् चार्हिए। यह 550C तार्प पर 30 मिनट तक गर्म करने पर नष्ट हो जार्तार् है। 

        3. परजीवी कृमि- 

        ये मनुष्यों व जार्नवार्रों की ऑत में पार्ये जार्ते है और मल के द्वार्रार् वे परजीवी कृमि बार्हर आ जार्ते है। मिट्टी के द्वार्रार् एवं मक्खियों के द्वार्रार् परजीवी भोजन तक पहुॅच जार्ते है। और भोजन को विषार्क्त बनार् देते है। जैसे-एण्ट अमीबार् हिस्टोलिटिक नार्मक परजीवी पेचिश उत्पन्न करतार् है। अन्य परजीवी भी जैसे हूक वर्म सूअर के मॉस के द्वार्रार्, एस्केरिस गन्दे हार्थों से भोजन करने पर शरीर में प्रवेश करतार् है।

        • लक्षण- पेट में दर्द, ऑव, दस्त होनार्। बचार्व-भोजन सम्बन्धी स्वच्छतार् क पूरार् ध्यार्न रखकर इस विषार्क्त से बच सकते है। 

        4. टोमेन विषार्क्ततार्- 

        टोमेन से तार्त्पर्य है मृत शरीर। भोजन के लिये टोमेन शब्द क प्रयोग छ2 युक्त भोज्य पदाथ से होतार् है। ये हमार्रे लिये बहुत विषार्क्त होते है। इनको छूने मार्त्र से भी हार्नि हो सकती है। 

        2. आन्तरिक भोज्य विषार्क्ततार्-

        जब भोज्य पदाथ की स्वयं की आन्तरिक दशार् ही विषार्क्त होती है। अर्थार्त् ये भोज्य पदाथ प्रार्कृतिक रूप से ही विषक्त होते है। इस प्रकार की विषार्क्ततार् आन्तरिक भोज्य विषार्क्तार् कहलार्ती है। आंतरिक भोज्य विषार्क्ततार् निम्न प्रकार की होती है- 

        1. वार्नस्पतिक भोज्य विषार्क्ततार्, 
        2. मॉसार्हार्री भोज्य विषार्क्ततार्, 
        3. रार्सार्यनिक भोज्य विषार्क्ततार् यार् रेडियो ऐक्टिव फार्ल आउट विषार्क्ततार्। 

        1. वार्नस्पतिक भोज्य विषार्क्ततार्- 

        1. आलुओं के छिलकों के नीचे हरे भार्ग में तथार् अँकुरित भार्गों में सोलेनार्इन नार्मक विष होतार् है। जिसको अधिक मार्त्रार् में ग्रहण करने से वमन, दस्त, बैचेनी तथार् पीलियार् आदि रोग हो जार्ते है। 
        2. कुछ विषयुक्त पौधे पार्लक व मेथी से बहुत मिलते जुलते होते है। भूलवश इनक प्रयोग करने पर स्वार्स्थ पर कुप्रभार्व पड़तार् है। ये पौधे है-एटरोपिन, सोलेनार्इन, स्कोपोलेनार्इन। 3पुरार्नी फँगस लगी मूॅगफली में एसफैंजिल्स फ्लेक्स नार्मक फफूॅदी पार्यी जार्ती है। इससे एफ लोटोक्सिन नार्मक विष उत्पन्न होतार् है। 
        3. कच्चे सोयार्बिन में पार्ये जार्ने वार्ले ट्रिप्सिन इनहीविटर तथार् हीमोग्लूटिनिन स्वार्स्थ को हार्नि पहुॅचार्ते है।
        4. कुछ मशरूम विषार्क्त होती है, जिनको खार्ने से पेट दर्द, दस्त आदि की शिकायत होती है। 
        5. कड़वे बार्दार्म क प्रयोग हार्निकारक होतार् है। यह पार्चन संस्थार्न पर बुरार् प्रभार्व डार्लते है। 
        6. केसरी दार्ल में B.N.OXYL ALANINE नार्मक विषैलार् तत्व पार्यार् जार्तार् है। जिससे लकवार् हो जार्तार् है। 

        2. मॉसार्हार्री खार्द्य पदाथो से होने वार्ली भोज्य विषार्क्ततार् –

        1. कर्इ मछलियार्ँ विषैले जीव जन्तु को खार्ने के कारण स्वयं भी विषार्क्त हो जार्ती है। ऐसी मछलियों के सेवन से पार्चन सम्बंधी विकार उत्पन्न होते है। कर्इ बार्र मृत्यु हो जार्ती है। 
        2. दूध देने वार्ले जार्नवरों के द्वार्रार् घार्स के सार्थ ही सार्थ विषैले पौधे भी खार् लिये जार्ते है जिससे दूध विषार्क्त हो जार्तार् है। जैसे- गार्जर, घार्स। 

        3. रार्सार्यनिक भोज्य विषार्क्ततार्- 

        कुछ रार्सार्यनिक पदाथ जैसे सीसार्, टिन, तॉबार्, निकल, एल्यूमिनियम, कैडमियम आदि प्रार्य: उस भोजन में जार्ते है। जो इन धार्तु के बर्तनों में पकाये जार्ते है यार् संग्रहित किये जार्ते है। इनसे होने वार्ली विषार्क्ततार् निम्नार्नुसार्र है-

        1. तॉबार् और पीतल के बर्तनों के खार्द्य पदाथ को (विशेषकर खट्टे) अधिक देर तक पकाने यार् रखने धार्तु के अतशेष इनमें मिलकर भोजन को विषार्क्त करते है। खट्टे पदाथ पीतल के बर्तन में अधिक समय तक रखने से नीले रंग क लवण नीलार् थोथार् (कापर सल्फेट) बनतार् है जो कि एक प्रकार क विष है। 
        2. जस्ते की कड़ाइ वार्ले बर्तनों में खार्द्य पदाथ को अधिक समय तक रखने से उसमें जस्तार् प्रवेश कर भोजन को विषार्क्त बनार् देतार् है। 
        3. स्टील के बर्तनों में खार्द्य पकाने से निकल उसमें प्रवेश कर जार्तार् है। जो कि स्वार्स्थ के लिए हार्निकारक है।
        4. एल्यूमिनियम के बर्तनों में खट्टे पदाथ पकाने से धार्तु प्रवेश कर जार्ती है। अधिक समय तक ऐसार् भोजन खार्ने से विषैलार् प्रभार्व दिखाइ देतार् है। 
        5. कभी-कभी कीटनार्शकों क छिड़कात असार्वधार्नी से करने पर भोज्य पदाथ भी विषार्क्त हो जार्ते है। 
        6. अखबार्र, कितार्बें व पत्रिकाओं के कागज में भोज्य पदाथ को बार्ंधने से उनमें लैड की विषार्क्ततार् देखी जार्ती है क्योंकि छपाइ की स्यार्ही में लैड होतार् है।
        7. खार्द्य पदाथो की पैकिंग के लिये उपयोग की सस्ती मोनी कागज क प्रयोग स्वार्स्थ के लिए हार्निकारक होतार् है। 
        8. रंगीन पोलीथिन से भी भोज्य विषार्क्ततार् होती है। 

        4. रेडियोएक्टिव फौलआउट- 

        न्यूक्लीय बम विस्फोट के कारण रेडियो आइसोटोप्स वार्तार्वरण में घुल जार्ते है और जल तथार् भूमि को संदुषित कर देते है। यहॉ से सब्जी, दूध, मॉस, मछली आदि के द्वार्रार् ये रेडियो-एक्टिव पदाथ मनुष्य के शरीर में पहुँच जार्ते है जिससे कैंसर की संभार्वनार् रहती है।

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