भार्रत में सार्मार्जिक वैयक्तिक सेवार् कार्य के क्षेत्र

सार्मार्जिक वैयक्तिक सेवार् कार्य में समार्ज कार्य की एक प्रणार्ली के रूप में विकास के सार्थ-सार्थ इसकी प्रविधियों, आधार्रभूत मूल्यों, धार्रणार्ओं तथार् कार्य पद्धति में अन्तर आतार् गयार्। प्रार्रम्भ में वैयक्तिक सेवार् कार्य क उद्देश्य सहार्यतार् प्रदार्न करनार् थार्। परन्तु बार्द में मनोविज्ञार्न तथार् मनोविकार विज्ञार्न के प्रभार्व के कारण व्यक्तित्व एवं व्यवहार्र सम्बन्धी उपचार्र भी इसके कार्यक्षेत्र के अन्तर्गत सम्मिलित कर लियार् गयार्।

वैयक्तिक सेवार् कार्यकर्तार् क उद्देश्य एक ओर सेवार्थ्री के कश्ट को दूर करनार् तथार् दूसरी ओर व्यक्ति स्थिति व्यवस्थार् में अकार्यार्मक्तार् को कम करनार्। दूसरे शब्दों में कार्यकर्तार् सेवार्थ्री में अधिक सन्तोश, आत्म अनुभूति तथार् आत्म सन्तुष्टि एवं आत्म सुख क संचार्र करतार् है। इसके लिए उसके अहं को दृढ़ बनार्कर उसमें अनुकूलन सम्बन्धी निपुणतार्ओं क विकास करतार् है। परिवर्तन यार् तो सेवार्थ्री में यार् परिस्थिति में अथवार् दोनों में कुछ न कुछ होतार् है।

सुधार्रार्त्मक वैयक्तिक सेवार् कार्य 

आपरार्धी को केवल दण्ड देकर उसकी मनोवृत्ति एवं व्यवहार्र में परिवर्तन नहीं लार्यार् जार् सकतार् हैं। दण्डशार्स्त्र के नवीन दृष्टिकोण के अनुसार्र अपरार्धों क मुख्य कारण समार्ज की सार्मार्जिक, आर्थिक दोषपूर्ण संरचनार् है। अत: अपरार्धी को दण्ड देनार् अवार्ंछित , अमार्नवीय एवं अनैतिक है। अपरार्धी के व्यक्तित्व में परिवर्तन लार्कर उसकी मनोवृत्ति को बदलार् जार् सकतार् है। अत: अपरार्धी की दण्ड की अवधि में हर सम्भव प्रयत्नों द्वार्रार् सहार्यतार् पहुँचार्कर उसके व्यक्तित्व में निहित आत्म-क्षमतार्ओं एवं गुणों को विकसित करनार् सुधार्रार्त्मक दृष्टिकोण क प्रमुख विचार्र है। यह विचार्रधार्रार् तथार् दर्शन ऐसी वैज्ञार्निक पद्धति क विकास करनार् चार्हती है जिसके उपयोग द्वार्रार् अपरार्धी दण्ड युक्ति के उपरार्न्त एक आत्म-सम्मार्नी, निर्भर, आत्म विश्वार्सी एवं उत्तरदार्यी नार्गरिक की तरह समार्ज में जीवन यार्पन कर सके।

सार्मार्जिक वैयक्तिक सेवार् कार्य क दृढ़ विश्वार्स है कि प्रत्येक व्यक्ति में एक निहित आत्मसम्मार्न की भार्वनार् एवं सुधार्र की क्षमतार् होती है। यदि उसे सहार्यतार् पहुँचार्यी जार्य तो वह अपनी समस्यार्ओं क निस्तार्रण माग ढँूढ़ सकतार् है। किसी भी व्यक्ति में कोर्इ जन्मजार्त दोश नहीं होतार् है, व्यक्तिगत एवं सार्मार्जिक परिस्थितियार्ँ व्यक्ति को समार्ज विरोधी कार्य करने के लिए प्रोत्सार्हित करती है। सार्मार्जिक परिस्थितियार्ँ बहुत बड़ी सीमार् तक उसके दोषपूर्ण समार्योजन के लिए उत्तरदार्यी हैं। हर व्यक्ति में परिवर्तन के लक्षण विद्यमार्न होते हैं तथार् प्रत्येक व्यक्ति क सुधार्र भी सम्भव है। अत: क्रूर तथार् अमार्नवीय तरीकों के स्थार्न पर सुधार्रार्त्मक तरीकों के प्रयोग द्वार्रार् अपरार्धी में सुधार्र लार्यार् जार् सकतार् है।

सुधार्र शब्द क अर्थ है- अपरार्धी व्यक्ति को कानून क पार्लन करने वार्ले नार्गरिक की भार्ँति जीवन व्यतीत करने योग्य बनार्नार्। इलियट के अनुसार्र सुधार्र वह प्रक्रियार् है जिसके द्वार्रार् आधुनिक समार्ज कानून तोड़ने वार्ले व्यक्तियों की आपरार्धिक मनोवृत्ति में परिवर्तन लार्ने तथार् उनकी जीवन शैली को सार्मार्जिक नियमों के अनुरूप ढार्लने क प्रयत्न करतार् है। वेनेट के अनुसार्र सुधार्र क उद्देश्य अपरार्धी को उसकी दण्ड अवधि में एक नर्इ दिशार् प्रदार्न करनार् है। कोनाड के अनुसार्र सुधार्र क मुख्य उद्देश्य अपरार्धी के व्यक्तित्व में एक परिवर्तन लार्नार् है जिससे उसके मन में कारार्गार्र अथवार् सुधार्र संस्थार् से मुक्ति के बार्द अच्छार् एवं उपयोगी जीवन बितार्ने की इच्छार् उत्पन्न हो सके।

सुधार्रार्त्मक सार्मार्जिक वैयक्तिक सेवार् कार्य के उद्देश्य 

  1. व्यक्ति के विचलित व्यवहार्र एवं दृष्टिकोण में ऐसी सहार्यक प्रक्रियार् द्वार्रार् परिवर्तन लार्नार् जो उसके व्यक्तिगत एवं सार्मार्जिक समार्योजन में अधिकतम सहार्यक सिद्ध हो। 
  2. अपरार्धी व्यक्ति के पर्यार्वरण एवं परिस्थितियों में परिवर्तन तथार् संशोधन द्वार्रार् अनेक प्रकार के निरोधार्त्मक एवं सुधार्रार्त्मक सार्धनों की उपलब्धि करार्के परिवर्तन लार्नार् जो उसमें अपरार्धिकतार् को जन्म देती है। सार्मार्जिक 

वैयक्तिक कार्यकर्तार् की भूमिका 

सुधार्रार्त्मक कार्य में कार्यकर्तार् अन्य सुधार्र कार्यकर्तार्ओं, मनोवैज्ञार्निकों, मनोचिकित्सकों के सार्थ मिलकर कार्य करतार् है। वह सुधार्र टोली क एक अभिन्न सदस्य होतार् है। उसक कार्य अन्य कार्यकर्तार्ओं के अन्तर सम्बन्धों तथार् उसके विशिष्ट ज्ञार्न पर निर्धार्रित भूमिक पर निर्भर करतार् है।

सुधार्र कार्यकर्तार्ओं की इस टोली में समार्ज कार्यकर्तार् की भूमिकाएँ हो सकती हैं : –

  1. अपरार्धी के बार्रे में जार्ँच पड़तार्ल करके उसकी सार्मार्जिक अवस्थार् तथार् अपरार्धी की दशार्ओं के बार्रे में ऐसी रिपोर्ट प्रस्तुत करनार् जिससे अपरार्धी सुधार्र संस्थार्ओं के अधिकारी किसी निश्चित सुधार्रवार्दी निर्णय पर पहुँच सकें। 
  2. सेवार्थ्री (अपरार्धी) क उस प्रकार से पर्यवेक्षण करनार् जिससे वह आत्म नियंत्रित होकर अवैधार्निक व्यवहार्र न करें। 
  3. सेवार्थ्री (अपरार्धी) की सार्मार्जिक तथार् वैधार्निक मजबूरियों को दूर करने में सहार्यतार् करनार् तथार् उसके व्यवहार्र, सार्मार्जिक आदर्शों के अनुकूल बनार्नार्। 
  4. उन सभी अधिकारियों के सार्थ व्यार्वसार्यिक सम्बन्ध स्थार्पित करनार् जो सेवार्थ्री के वर्तमार्न सार्मार्जिक वैधार्निक स्तर से प्रत्यक्ष एवं परोक्ष रूप से सम्बन्धित हैं। 
  5. वैयक्तिक सेवार् कार्य तथार् सार्मूहिक सेवार् कार्य की विधियों क इस प्रकार से प्रयोग करनार् जिससे सेवार्थ्री (अपरार्धी) कानूनी तथार् प्रशार्सनिक नियमों क पार्लन अपने हित को ध्यार्न में रखकर कर सके। 
  6. अपरार्धी ,सुधार्र संस्थार् के अन्य कर्मचार्रियों के सार्थ सहयोग एवं समन्वयपूर्ण सम्बन्ध बनार्ये रखनार् तथार् संस्थार् के समस्त सुधार्र सम्बन्धी निर्णयों में अपने मत को रखनार्। 
  7. अपरार्धी-सुधार्र संस्थार् के सुधार्रार्त्मक कार्यक्रम को सुदृढ़ बनार्नार्। सुधार्रार्त्मक समार्ज कार्य के ज्ञार्न में वृद्धि करने के लिए प्रयत्न करनार्। अपरार्धियों की मनोवृत्ति में परिवर्तन लार्ने के लिए वैयक्तिक सेवार् कार्य की अत्यन्त आवश्यकतार् है। 

फ्रीडलैण्डर, ने निम्न प्रकार से इसके महत्व को स्पष्ट कियार् है : –पुनस्र्थार्पन के उद्देश्यों की प्रार्प्ति के लिए सुधार्र संस्थार्ओं में वैयक्तिक सेवार् कार्य आवश्यक है। हमने इस बार्त को मार्नार् है कि अनेक सुधार्र संस्थार्ओं में पुनस्र्थार्पन के उद्देश्य की प्रार्प्ति पूरे रूप से सम्भव नहीं हो पाइ है परन्तु फिर भी कारार्गार्र तथार् बार्ल सुधार्र संस्थार्ओं के संवार्सियों के लिए वैयक्तिक सेवार् कार्य की आवश्यकतार् को सैद्धार्ंतिक रूप से स्वीकार कर लियार् गयार् है। कारार्गार्रों तथार् अन्य प्रकार की वयस्क एवं बार्ल सुधार्र संस्थार्ओं में संवार्सियों को मनोसार्मार्जिक सहार्यतार् की आवश्यकतार् अपने दैनिक जीवन में पड़ती रहती है।

मॉडल प्रिजन मैनुअल में अपरार्धी सुधार्र संस्थार्ओं में नियुक्त सार्मार्जिक कार्यकर्तार्ओं की भूमिकाओं क वर्णन कियार् गयार् है। :-

  1. संवार्सी क सार्क्षार्त्कार करनार् तथार् उसके परिवार्र एवं अन्य सार्मार्जिक संस्थार्ओं के सार्थ सम्बन्ध स्थार्पित करके उसके चरित्र, व्यवहार्र, अपरार्ध की दशार्ओं तथार् सार्मार्जिक आर्थिक जीवन की पृष्ठभूमि के बार्रे में सम्पूर्ण सूचनार् उपलब्ध करनार्। 
  2. संवार्सी की समस्त संस्थार्गत समस्यार्ओं क स्पष्टीकरण करनार् तथार् उनके समार्धार्न की योजनार् निर्मित करनार्। 
  3. संवार्सियों के वर्गीकरण कार्यक्रम में संस्थार् के अधिकारियों के संवार्सी के व्यक्तित्व एवं व्यवहार्र की विशेषतार्ओं को बतार्कर संवार्सी को उन कार्यक्रमों में लगार्ने क प्रयत्न करनार् जिससे उन संवार्सी को लार्भ पहुँच सकतार् है। 
  4. संवार्सी तथार् प्रशार्सन कार्यकर्तार्ओं के मध्य उपयुक्त प्रकार के सहयोगपूर्ण सम्बन्धों की स्थार्पनार् करने में मदद पहुँचार्नार्,तथार् परिवार्र के सदस्यों को समय-समय पर वार्ंछित सहार्यतार् प्रदार्न करनार्। 
  5. संवार्सी को अपनी मुक्ति के लिए तैयार्र करनार् तथार् उनको उन समस्यार्ओं से अवगत करार्नार् जो मुक्ति के बार्द उत्पन्न हो सकती हैं परन्तु जिनक समार्धार्न ढूँढ़ार् जार् सकतार् है। 

वैयक्तिक कार्यकर्तार् के कार्य 

  1. उन संवार्सियेार्ं को परार्मर्ष देनार् तथार् माग निर्देशन करनार् जो अपरार्धी सुधार्र संस्थार्ओं में पहली बार्र आये हैं और जो अपने को इस प्रकार के विचित्र मार्हौल में अकेलार् पार्ते हैं। 
  2. संवार्सियों की मार्नसिक कुंठार्ओं, आहत भार्वनार्ओं तथार् विक्षिप्त मनोदशार्ओं को दूर करने में सहार्यतार् पहुँचार्नार् तथार् उन्हें संस्थार् के अन्य संवार्सियों, अधिकारियों तथार् कार्य-पद्धतियों के समरूप व्यवहार्र करने के लिए प्रोत्सार्हन प्रदार्न करनार्। 

सुधार्रार्त्मक वैयक्तिक कार्य क कार्य 

अपरार्धी सुधार्र संस्थार्ओं में सुधार्रार्त्मक वैयक्तिक कार्यकर्तार् क उत्तरदार्यित्व संवार्सियों में संतोषजनक समार्योजन उत्पन्न करने के सार्थ-सार्थ उन्हें पुनर्वार्सन हेतु तैयार्र करनार् है। सार्मार्जिक कार्यकर्तार् निम्न समस्यार्ओं को अपने कार्य क्षेत्र में सम्मिलित करतार् है।

  1. संवार्सियों की संस्थार्गत समार्योजन सम्बन्धी समस्यार्एँ। 
  2. संवार्सियों के परिवार्र के सदस्यों, उनके रिश्तेदार्रों तथार् मित्रों सम्बन्धी समस्त समस्यार्यें जिनसे संवार्सी चिन्तित रहतार् है।
  3. संवार्सियों की मुक्ति, उत्तर रक्षार् तथार् पुनर्वार्सन सम्बन्धी समस्यार्यें। 

सुधार्रार्त्मक वैयक्तिक कार्यकर्तार् की कुशलतार्यें – 

इलियट स्टड ने निम्नलिखित व्यार्वसार्यिक कुशलतार्ओं क होनार् आवश्यक बतार्यार् है :-

  1. अपरार्धी सुधार्र के क्षेत्र में एवं इससे सम्बद्ध समस्त विषयों, नीतियों तथार् कार्यों क पूर्ण ज्ञार्न। 
  2. अपरार्धियों के व्यक्तित्व, चरित्र, स्वभार्व तथार् अपरार्ध के कारणों एवं उपचार्र की आधुनिक विधियों क पूर्ण ज्ञार्न।
  3. अपरार्धी सुधार्र तथार् अपरार्धी पुनर्वार्सन सम्बन्धी आवश्यक कुशलतार्ओं को सम्पार्दित करने की क्षमतार्। 
  4. अपरार्धियों के प्रति सहिष्णुतार् क दृष्टिकोण तथार् उनके सुधार्र एवं पुनर्वार्सन के लिए हर सम्भव प्रयत्न करने क दृढ़ निश्चय। 
  5. अपरार्धी सुधार्र के क्षेत्र में कार्य करने वार्ले अन्य कार्यकर्तार्ओं के सार्थ सहयोग एवं समन्वय पूर्वक कार्य करने की कुशलतार् आदि। 

सुधार्रार्त्मक वैयक्तिक कार्य की समस्यार्यें 

बरवैंक ने उन समस्यार्ओं क उल्लेख कियार् है जिनसे समार्ज कार्य के सफल योगदार्न में बार्धार् उत्पन्न हो रही है :-

  1. सुधार्रार्त्मक समार्ज कार्य, कल्यार्ण के अन्य क्षेत्रों में होने वार्ले समार्ज कार्य की अपेक्षार् अभी नयार् है अत: इसे निम्न स्तर क विषय मार्नार् जार् रहार् है। 
  2.  अपरार्धी सुधार्र संस्थार्ओं के प्रशार्सक सुधार्रार्त्मक समार्ज कार्यकर्तार्ओं के योगदार्न के विषय में अभी पूर्ण रूप से सन्तुश्ट नहीं हैं और इस प्रकार के कार्यकर्तार्ओं की नियुक्ति में हिचकिचार्हते हैं।
  3. समार्ज कार्य क प्रशिक्षण प्रदार्न करने वार्ले स्कूलों द्वार्रार् आज तक स्पष्ट रूप से यह तय नहीं हो पार्यार् है कि अपरार्धी, सुधार्र के क्षेत्र में समार्ज कार्यकर्तार्ओं की क्यार्-क्यार् भूमिकायें हो सकती है और उन भूमिकाओं क निर्वार्ह व्यार्वसार्यिक समार्ज कार्यकर्तार्ओं की किन कुशलतार्ओं के प्रयोग से हो सकतार् है। 
  4. जिन अपरार्धी संस्थार्ओं में (चार्हे वे कारार्गार्र हों यार् बार्ल सुधार्र संस्थार्यें) समार्ज कार्यकर्तार्ओं की नियुक्ति की गयी है उनको वहार्ँ पर निम्न स्तर क कार्यकर्तार् ही समझार् गयार् हैं और उनसे ऐसे कार्य करार्ये जार्ते हैं जिनको थोड़ार् पढ़ार् लिखार् व्यक्ति भी कर सकतार् है।
  5. अपरार्धी सुधार्र के क्षेत्र में कार्य करने वार्ले व्यार्वसार्यिक समार्ज कार्यकर्तार् पूर्ण एवं उचित स्वीकृति के अभार्व में कुण्ठित हो जार्ते हैं और अपने कार्य में कुशलतार् नहीं लार् पार्ते जिसकी उनसे अपेक्षार् की जार्ती है।
  6. अपरार्धी सुधार्र के क्षेत्र में कार्य करने वार्ले समार्ज कार्यकर्तार्ओं क वेतन स्तर इतनार् कम है कि अधिकांष कुशल कार्यकर्तार् इस क्षेत्र में नौकरी करने की इच्छार् नहीं प्रकट करते। अच्छे एवं कुशल कार्यकर्तार् कोर्इ दूसरी अच्छी नौकरी ढूँढ़ने में तत्पर रहते हैं। 
  7. अधिकांश समार्ज कार्य स्कूलों में सुधार्रार्त्मक समार्ज कार्य क उचित प््रशिक्षण देने के लिए न तो शिक्षक हैं और न आवश्यक सुविधार्यें उपलब्ध हैं।
  8. सुधार्रार्त्मक समार्ज कार्य सम्बन्धी सार्हित्य क अभार्व अच्छे एवं कुशल कार्यकर्तार् तैयार्र करने में एक बड़ी बार्धार् उत्पन्न करतार् है। 

उपर्लिखित समस्यार्ओं क मूल कारण भार्रत में समार्ज कार्य क प्रार्रम्भिक अवस्थार् में होनार् है। वर्तमार्न समय में समार्ज कार्य ही विकास की प्रार्रम्भिक अवस्थार् में है, अत: दूसरे क्षेत्र कहार्ँ तक विकसित हो सकते हैं परन्तु संतोश क विषय है कि सरकार सुधार्र के क्षेत्र में प्रषिक्षित कार्यकर्तार्ओं की नियुक्ति पर गम्भरीतार् पूर्वक विचार्र कर रही है।

बार्ल अपरार्ध 

वे बार्लक जिनकी अवस्थार् 7 वर्ष से 16 वर्ष 18 यार् 21 वर्ष, तक की है, के अपरार्धी व्यवहार्र एवं अन्य असार्मार्जिक कृत्यों को बार्ल अपरार्ध की श्रेणी में रखार् जार्तार् है । ऐसे बच्चों में अपरार्धी प्रवृत्ति क विकास होने से वे अपरार्ध के कार्य करने लगतें हैं।

बार्ल न्यार्यार्लय 

बार्ल अपरार्धियों के सुधार्र क्षेत्र में बार्ल न्यार्यार्लय की स्थार्पनार् एक क्रार्न्तिकारी चेतनार् क प्रतीक है। विश्व में सबसे पहलार् बार्ल न्यार्यार्लय अमरीक के षिकागो नगर में स्थार्पित हुआ थार् परन्तु उसके पूर्व भी इंग्लैंड, आस्ट्रेलियार्, कनार्डार् तथार् स्विटरजरलंडै में ऐसे कानून बनार्ये जार् चुके थे जिनमें बार्ल अपरार्धियों के लिए न्यार्यिक व्यवस्थार्, वयस्क अपरार्धियों से भिन्न थी।

बार्ल कल्यार्ण, बार्ल हितों के सन्तुलन को बनार्ये रखने में बार्ल न्यार्यार्लय एक ऐसी वैधार्निक प्रणार्ली है जो न्यार्यिक कार्यवार्ही में निहित, अभिभार्वक पेर्र णार् तथार् संरक्षण प्रवृत्ति द्वार्रार् बार्लकों की रक्षार् करने की विशेषतार्ओं के आधार्र पर उन सार्धार्रण न्यार्यार्लयों से भिन्न है जिनमें न्यार्यार्विधि की कठोरतार् तथार् दण्ड देने की प्रक्रियार् पर जोर दियार् जार्तार् है। रार्ज्य को उन बार्लकों क मार्तार् पितार्, अभिभार्वक तथार् संरक्षक मार्नार् जार्तार् है। जो मन्द बुद्धि, शार्रीरिक विकलार्ंगतार्, परित्यक्ततार्, अनार्थपन तथार् उचित प्रकार के देख-रेख के बिनार् जीवन जी रहे हैं यह उसी वैधार्निक चेतनार् क प्रतिफल है। इस प्रकार के न्यार्यार्लय अपनार् न्यार्यिक उत्तरदार्यित्व दण्ड के मार्ध्यम से नहीं वरन सुधार्र, रक्षार् तथार् शिक्षार् द्वार्रार् सम्पार्दित करते हैं।

बार्ल न्यार्यार्लयों की विशेषतार्एँ 

अपनी विशेषतार्ओं के आधार्र पर इस प्रकार के न्यार्यार्लय उन न्यार्यार्लयों से भिन्न होते हैं जहार्ँ पर वयस्क व्यक्तियों के मुकदमों की सुनवार्यी होती है जो इस प्रकार है :-

  1. बार्ल न्यार्यार्लय उस प्रकार क न्यार्यार्लय है जिसमें बार्ल तथार् तरुण आयु के युवकों के मुकदमों की सुनवार्यी एक विशेष विधि से की जार्ती है। 
  2. इस प्रकार के न्यार्यार्लयों के मजिस्ट्रेट से यह आशार् की जार्ती है कि वे अपने सार्मने प्रस्तुत किये गये बार्लकों के लिए माग दर्शक की भूमिक अदार् करें। 
  3. इनमें उन बार्लकों की जिनकी अवस्थार् 7 वर्ष से 16 वर्ष 18 यार् 21 वर्ष, तक की है, के अपरार्धी व्यवहार्र एवं अन्य असार्मार्जिक कृत्यों से सम्बन्धित मार्मलों क निर्णय एक विशेष कानून बार्ल अधिनियम की धार्रार्ओं के आधार्र पर कियार् जार्तार् है जो यार् तो पूर्व बार्ल अपरार्ध की अवस्थार् से गुजर रहे हैं यार् उनमें अपरार्धी प्रवृत्ति क विकास हो रहार् है यार् कोर्इ अपरार्ध कार्य कर रहे हैं। 
  4. इस प्रकार के न्यार्यार्लयों में मजिस्ट्रेट नियुक्त होने के लिए आवश्यक नहीं है कि बड़े विधि विशेषज्ञ हों। नियुक्ति उन व्यक्तियों की होती है जो कानून के ज्ञार्न के सार्थ-सार्थ मार्नव स्वभार्व तार्कि मार्नव समार्योजन की समस्यार्ओं की उत्पत्ति सम्बन्धी सिद्धार्न्तों से भली भार्ंति अवगत हों तथार् उन्हें बार्ल कल्यार्ण के क्षेत्र में दक्षतार् प्रार्प्त हो। 
  5. इन न्यार्यार्लयों में आवश्यक नहीं है कि दोशी ठहरार्ये गये बार्लकों को दण्ड दियार् जार्य। इसके विपरीत इन न्यार्यार्लयों से यह आशार् की जार्ती है कि वे बार्लकों के सुधार्र के लिए सेवार्एँ आयोजित करने में सहार्यक सिद्ध होंगे तथार् बार्लकों की देख-रेख, सुरक्षार्, कल्यार्ण तथार् शिक्षार् सम्बन्धी संस्थार्गत तथार् संस्कारिक कार्यक्रमों की प्रार्प्ति संभव करार् सके, जो उपेक्षित है। 
  6. इन न्यार्यार्लयों में अपरार्धी तथार् असार्मार्जिक व्यवहार्र प्रदर्शित करने वार्ले बार्लकों से सम्बन्धित शिकायतों क निर्णय पुलिस की रिपोर्ट के आधार्र पर नहीं कियार् जार्तार् है। पूरी वैधार्निक प्रक्रियार्, उपचार्रार्त्मक तथार् सुधार्रार्त्मक कार्यवार्ही क आधार्र होती है परिवीक्षार् अधिकारी की रिपोर्ट, जो बार्लक के सार्मार्जिक, आर्थिक, शैक्षिक तथार् पार्रिवार्रिक वार्तार्वरण सम्बन्धी कारकों क अध्ययन, निरीक्षण तथार् मूल्यार्ंकन बड़ी सार्वधार्नी तथार् कुशलतार् से की जार्ती है।
  7. जिस समय तक बार्लक के बार्रे में सार्मार्जिक जार्ँच परिवीक्षार् अधिकारी के द्वार्रार् होती है उस अवधि में उसे जेल में न रखकर उन पर्यवेक्षण गृहों में रखार् जार्तार् है जहार्ँ उनकी सुरक्षार् के सार्थ-सार्थ स्वच्छ वार्तार्वरण तथार् स्वार्स्थ्यप्रद रहन सहन क अवसर प्रदार्न होतार् है। 
  8. इन न्यार्यार्लयों को अपने निर्णय देने में बड़ार् विवेकाधिकार प्रार्प्त होतार् है। न्यार्यार्लय मुकदमों को रदद कर सकतार् है, बार्लक तथार् उसके मार्तार्-पितार् को चेतार्वनी दे सकतार् है। उन पर फार्इन कर सकतार् है, उन्हें किसी सुधार्र कार्य करने वार्ली संस्थार् की देख रेख में रहने क आदेश दे सकतार् है यार् उन्हें बार्ल सुधार्र संस्थार्ओं में रखे जार्ने क निर्णय दे सकतार् है। 

बार्ल अपरार्धियों के सुधार्र की आवश्यकतार् तथार् महत्व 

बार्ल अपरार्धियों के सुधार्र की आवश्यकतार् तथार् इसके महत्व क प्रश्न दण्ड के आधुनिक सुधार्रवार्दी दर्शन के सिद्धार्न्तों एवं विधियों के अभ्युदय के सार्थ संलग्न है। दण्ड के प्रार्चीन सिद्धार्न्तों एवं विधियों में अपरार्धियों (चार्हे वे बार्लक हों यार् वयस्क) क कठोरतम दण्ड देने क भार्व निहित थार् क्योंकि उस युग को स्वीकृत मार्न्यतार् यह थी कि समार्ज अपरार्धी के प्रति प्रतिशोधार्त्मक दृष्टिकोण रखने क हकदार्र है और अपरार्धियों को कठोर दण्ड देकर ही समार्ज, गैर अपरार्धी व्यक्तियों में कानून के भयपूर्वक पार्लन की आदत डार्ल सकतार् है। अतएव बार्ल अपरार्धियों के लिए एक ऐसी कारार्गार्र प्रशार्सन की व्यवस्थार् को कार्यार्न्वित कियार् गयार् जिसमें उनकी शिक्षार्, औद्योगिक प्रशिक्षण तथार् मनोगत सुधार्र की पर्यार्प्त सुविधार्एँ उपलब्ध हों।

बार्ल अपरार्धी, पार्रिवार्रिक तथार् सार्मार्जिक परिस्थितियों क शिकार हो जार्ते हैं और उनकी अपरार्धिकतार् आकस्मिक होने के सार्थ-सार्थ उनकी अपरिपक्व बुद्धि, कानून के परिणार्मों के प्रति अज्ञार्न तथार् अपरार्ध कार्य करने की योजनार् क प्रदर्शन मार्त्र है। अत: ऐसी व्यवस्थार् होनी अनिवाय है जिसक प्रमुख उद्देश्य उनक सुधार्र तथार् चार्रित्रिक पुनर्गठन करनार् हो। इसी विश्वार्स पर आधार्रित मार्न्यतार्ओं को स्वीकार करके आधुनिक युग में बार्ल अपरार्धियों के वयस्क अपरार्धियों से भिन्न प्रकार के बार्ल सुधार्र संस्थार्ओं की स्थार्पनार् की गयी है। बार्ल अपरार्धियों के सुधार्र की दिशार् में जो भी अन्तर्रार्ष्ट्रीय प्रगतियार्ँ हुर्इ उनमें बार्ल न्यार्यार्लयों की स्थार्पनार् एक महत्वपूर्ण कदम है।

वैयक्तिक सेवार् कार्य की आवश्यकतार् 

चिकित्सार्लय में रोगग्रस्त बार्लक अनेक समस्यार्ओं से जूझतार् है परन्तु इन समस्यार्ओं की ओर चिकित्सकों क ध्यार्न बहुत कम जार्तार् है क्योंकि इसके लिए अधिक समय तथार् विशेष ज्ञार्न की आवश्यकतार् होती है जिसक उनके पार्स अभार्व होतार् है। उचित निदार्न एवं उपचार्र के लिए बार्लक एवं उसके मार्तार्-पितार् दोनों क ही योगदार्न आवश्यक होतार् है। परन्तु वर्तमार्न चिकित्सार् पद्धति को महत्व नहीं दियार् गयार् है। बार्लकों को एकान्त में दुनियार् से बिलकुल पृथक कर दियार् जार्तार् है और वे कष्ट पूर्ण जीवन व्यतीत करते हैं। इन परिस्थितियों में वे अन्य समस्यार्एँ उत्पन्न कर लेते हैं जैसे सार्ंवेगिक तनार्व, सार्ंवेगिक हृार्स, प्रतिगमन के लक्षण, प्रत्यार्हार्र, अलगार्व की भार्वनार्, विघटित प्रत्यक्षीकरण, अहमन्यतार्, र्इष्र्यार् की भार्वनार् आदि।

वैयक्तिक सेवार् कार्य क महत्व 

  1. सार्ंवेगिक प्रतिक्रियार्ऐं:- चिकित्सार्लय में प्रवेश स्वयं अपने आप में एक समस्यार् है। बार्लक के लिए रोग भी सार्ंवेगिक समस्यार् है। इस समस्यार् में उस समय और भी अधिक वृद्धि होती है जब उसकी शल्य चिकित्सार् की जार्ती है। इंजेक्शन लगार्ने के सम्बन्ध में भी इसी प्रकार की समस्यार् उत्पन्न होती है। 
  2. परिवार्र से अलगार्व :- चिकित्सार्लय आने पर बार्लक के अधिकांश सार्मार्जिक सम्बन्ध विच्छिन्न हो जार्ते हैं। इसक प्रतिफल यह होतार् है कि वह आदार्न-पद्र ार्न की प्रक्रियार् में भार्ग नहीं लेतार् है। वह कभी-कभी न तो बार्त करतार् है और न सलार्ह मार्नतार् है। इस विरोध की भार्वनार् क कारण अपने सार्मार्न्य पर्यार्वरण से पृथक् होनार् तथार् वर्तमार्न परिस्थितियों से तार्ल-मेल न कर पार्नार् होतार् है। 
  3. एकाकीपन की समस्यार् :- यद्यपि सभी बार्लक सार्मार्न्य क्रियार्एं सम्पन्न करने में असमर्थ नहीं होते तथार्पि चिकित्सार्लय में वे पंगु बन जार्ते हैं। वे शैयार् पर सभी ख़ुशियों एवं प्रसन्नतार्ओं से वंचित पड़े रहते हैं। उनके पार्स समय व्यतीत करने क कोर्इ सार्धन नहीं होतार् है। अत: यार् तो उनको अकारण भय उत्पन्न हो जार्तार् है यार् फिर अपने को अर्थहीन समझने लगते हैं। 
  4. वार्त्सल्य एवं प्रेम की कमी :- कोर्इ मार्तार् पितार् अपने में ही उलझे रहते हैं और बार्लक की ओर ध्यार्न नहीं दे पार्ते हैं। परिणार्मस्वरूप बार्लक इस आवश्यक तत्व से वंचित रहतार् है और उन स्थितियों की खोज करतार् है जहार्ँ पर वह मार्तार् पितार् क पेम्र पार् सकतार् है। बीमार्र होनार् एक ऐसी ही स्थिति है। 
  5. अहमन्यतार्: – कभी कभी मार्तार् पितार् रोगी बार्लक की इतनी अधिक देख रेख, परवार्ह तथार् लार्ड़ प्यार्र करते हैं कि वह केवल एकांगी बन कर रहार् जार्तार् है। उसक समार्योजन अव्यवस्थित हो जार्तार् है। अस्पतार्ल से वार्पस जार्ने पर उसके माग में अनेक कठिनार्इयार्ँ उत्पन्न हो जार्ती हैं।

कार्यकर्तार् की भूमिका 

  1. सार्ंवेगिक व्यवधार्नों क पतार् लगार्तार् है। 
  2. सार्मार्जिक समस्यार्ओं की खोज करतार् है। 
  3. समस्यार्ओं के समार्धार्न के उपार्य खोजतार् है। 
  4. बार्लकों व उनके अभिभार्वकों को स्वार्स्थ्य शिक्षार् प्रदार्न करतार् है। 
  5. आवश्यक सेवार्ओं क प्रबन्ध करतार् है। 
  6. मनोरंजनार्त्मक कार्य सम्पन्न करवार्तार् है।
  7. पार्रिवार्रिक सम्बन्धों को दृढ़ करतार् है। 
  8. चिकित्सार्लय पर्यार्वरण से समार्योजन स्थार्पित करने में सहार्यतार् करतार् है। 
  9. अच्छी आदतों के विकास में सहार्यतार् करतार् है। 
  10. सफाइ सम्बन्धी नियमों को बतार्तार् है। 
  11. पोशक तत्वों क उल्लेख करतार् है। 
  12. सुरक्षार्त्मक तरीकों को बतार्तार् है। 

विद्यार्लय सार्मार्जिक वैयक्तिक सेवार् कार्य 

व्यक्ति के समार्जीकरण की यद्यपि परिवार्र एक महत्वपूर्ण संस्थार् है। वह अपनार् प्रार्रम्भिक जीवन परिवार्र की सीमार् में ही व्यतीत करतार् है। उसकी आवश्यकतार्ओं की संतुष्टि भी यहीं होती है। परन्तु जैसे- जैसे वह बड़ार् होतार् जार्तार् है उसकी रुचि बार्ºय पर्यार्वरण की ओर बढ़ने लगती है और परिवार्र के बन्धन से मुक्त होनार् चार्हतार् है। वह घर की चहार्रदीवार्री से निकल कर पड़ौस तथार् किसी विद्यार्लय में जार्नार् पसन्द करतार् है और वहार्ँ जार्कर आनन्द प्रार्प्त करतार् है। वह विद्यार्लय जार्ने के लिए स्वयं लार्लार्यित रहतार् है और कभी-कभी हठ करने लगतार् है कि अन्य बार्लकों की तरह वह भी विद्यार्लय अवश्य जार्यगार्। विद्यार्लय में उसक परिचय अनेक विद्याथियों से होतार् है तथार् विचार्रों क आदार्न-प्रदार्न होतार् है। अत: ऐसार् वार्तार्वरण तैयार्र करनार् आवश्यक होतार् है जिसमें वह अपनार् सफल समार्योजन कर के तथार् संवेगार्त्मक व बौद्धिक विकास के लिए शैक्षणिक व मनोरंजनार्त्मक कार्यक्रमों से लार्भ उठार् सके।

भार्रतवर्ष में यद्यपि शिक्षार् पद्धति में काफी अन्तर आयार् है परन्तु अभी भी प्रार्ध्यार्पक क मुख्य ध्यार्न केवल बौद्धिक विकास पर रहतार् है तथार् रटने-रटार्ने की प्रथार् बरार्बर पड़ी हुर्इ है। वैयक्तिक कमी अथवार् समस्यार्ओं पर ध्यार्न नहीं दियार् जार्तार् है। परन्तु जितनार् बौद्धिक विकास आवश्यक होतार् है उतनार् ही संवेगार्त्मक समार्योजन और मार्नसिक विकास महत्वपूर्ण होतार् है।

विद्यार्लय में सार्मार्जिक वैयक्तिक सेवार् कार्य की आवश्यकतार् 

बार्लक क अधिकांश प्रार्रम्भिक जीवन विद्यार्लय में ही गुजरतार् है। अत: विद्यार्लय के सार्थ समुचित समार्योजन आवश्यक होतार् है। वह क्यार् पढ़तार् है यह आवश्यक नहीं है बल्कि किस प्रकार पढ़तार् है, उसकी रुचि किस स्तर की है, सम्बन्ध क क्यार् स्वरूप है, आदि भी जार्ननार् आवश्यक होतार् है। यदि इन कारकों की ओर ध्यार्न नहीं दियार् जार्तार् है तो बार्लक पढ़ाइ में पीछे रह जार्तार् है, नैरार्ष्य अनुभव करतार् है तथार् स्कूल से भार्गने लगतार् है। ऐसे बार्लक सार्मार्न्यत: विभिन्न संवेगार्त्मक समस्यार्ओं से ग्रस्त हो जार्ते हैं।

ऐसे बार्लकों की समस्यार्ओं के निरार्करण के लिए प्रशिक्षित कार्यकर्तार् की आवश्यकतार् होती है जो वैयक्तिक अध्ययन करके समस्यार् की प्रकृति ज्ञार्त कर उसक समुचित समार्धार्न कर सके। विकसित देशों में प्रत्येक विद्यार्लय में वैयक्तिक कार्यकर्तार् होतार् है जो यह कार्य करतार् है। उच्च विद्यार्लयों में तो एक समार्ज कार्य क विभार्ग ही अलग होतार् है।

भार्रतवर्ष में इस प्रकार के प्रत्यय क विकास अभी नहीं हो पार्यार् है। क्योंकि भार्रत की आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं है इसके अतिरिक्त समार्ज कार्य की आवश्यकतार् क ज्ञार्न भी केवल चंद लोगों को ही हैं इसके अतिरिक्त समार्ज कार्य की आवश्यकतार् क ज्ञार्न भी केवल चंद लोगों को ही है। इसी कारण विद्यार्लयों की समस्यार्ओं में निरन्तर वृद्धि हो रही है।

विद्यार्लय में वैयक्तिक कार्यकर्तार् की समस्यार्एँ

(1) समस्यार्ग्रस्त बार्लक :- व्यक्तिगत एवं पार्रिवार्रिक समस्यार्ओं के कारण विद्यार्लय में ऐसे भी बार्लक होते हैं जो संवेगार्त्मक तथार् मार्नसिक कठिनार्इयों से परेषार्न रहते हैं। उनक न तो कक्षार् में समार्योजन ठीक प्रकार से हो पार्तार् है और न ही वे अपनार् ध्यार्न पढ़ाइ पर केन्द्रित कर पार्ते हैं। कक्षार् में विद्यार्थ्री इतने अधिक होते हैं कि शिक्षक विद्यार्थ्री की व्यक्तिगत समस्यार्ओं पर ध्यार्न नहीं दे पार्ते हैं। इसके अतिरिक्त उन्हें उन प्रविधियों एवं प्रणार्लियों क ज्ञार्न नहीं होतार् है जिनसे उसकी संवेगार्त्मक समस्यार्ओं क समार्धार्न कियार्ार् जार् सके। वह संवेगार्त्मक व मनोवैज्ञार्निक समस्यार्ओं तथार् आवश्यकतार्ओं को समझने और उनक समार्धार्न करने में सक्षम नहीं होतार् है। अत: वैयक्तिक कार्यकर्तार् की आवश्यकतार् होती है जो इन समस्यार्ओं को सुलझार् सकतार् है। कार्यकर्तार् बार्लक क सार्क्षार्त्कार करतार् है और उसके मार्तार्-पितार् से मिलतार् है, सार्थियों से समस्यार् के बार्रे में पूछ तार्छ करतार् है। इस प्रकार वह समस्यार् से सम्बन्धित तथ्यों की खोज करतार् है। निदार्न के उपरार्न्त वह उपचार्र की रूपरेखार् निश्चित करतार् है। कार्यकर्तार् मार्तार्-पितार् को बार्लक की समस्यार् बतार्ते हैं तथार् उनके दृष्टिकोण में परिवर्तन लार्ने क प्रयार्स करतार् है। शिक्षक के कारण यदि कोर्इ समस्यार् बार्लक में उत्पन्न होती है तो वह शिक्षक की मनोवृत्ति को बदलने में सहार्यतार् करतार् है। उसक कार्य समस्यार् के वार्स्तविक तथ्यों की जार्नकारी करके समस्यार् क जड़ से समार्प्त करनार् होतार् है।

(2) पिछड़ार्पन :-कक्षार् में सभी बार्लक न तो पढ़ाइ में समार्न होते हैं और न ही खेलकूद में। कुछ बार्लक सार्मार्न्य स्तर से पढ़ाइ तथार् खेलकूद में ऊँचे होते हैं और कुछ बार्लक पढ़ाइ तथार् खेलकूद में सार्मार्न्य से काफी नीचे होते हैं। ऐसे बार्लक पढ़ने से जी चुरार्ते हैं तथार् भार्गने काप्रयार्स करते हैं। ऐसे बार्लकों पर अध्यार्पक विशेष ध्यार्न नहीं दे पार्तार् है और निजी तौर पर शिक्षार् देनार् उनके लिए कठिन हो जार्तार् है। परन्तु यदि उनकी समस्यार् पर ध्यार्न नहीं दियार् जार्तार् है तो उनक व्यक्तित्व प्रभार्वित होतार् है और हीनतार् की भार्वनार् विकसित हो जार्ती है। कभी – कभी इन बार्लकों को विद्यार्लय से निकाल दियार् जार्तार् है। परन्तु इस पिछड़ेपन के कारण बार्लक स्वयं न होकर सार्मार्जिक, शार्रीरिक तथार् मार्नसिक स्थितियार्ँ होती हैं। इन समस्यार्ओं एवं स्थितियों को समझकर वैयक्तिक सहार्यतार् पहुँचार्नार् आवश्यक होतार् है। वैयक्तिक कार्यकर्तार् बार्ल मनोविज्ञार्न के द्वार्रार् तथार् मनोचिकित्सार् की सहार्यतार् से ऐसे बार्लकों की सहार्यतार् करतार् है।

परिवार्र नियोजन कार्यक्रम 

अधिकांश लोग अब भी परिवार्र नियोजन क तार्त्पर्य जनसंख्यार् नियन्त्रण से लगार्ते हैं। जनसंख्य नियन्त्रण एक सरकारी नीति है जिसको सार्मार्जिक तथार् आर्थिक उद्देश्य की पूर्ति के लिए चलार्यार् जार् रहार् है। अपने परिवार्र के सदस्यों की संख्यार् अपने सार्धनों के अनुसार्र सीमित रखने क नार्म परिवार्र नियोजन है। इस कार्यक्रम क उद्देश्य परिवार्र के लिए आवश्यक सुविधार्एँ प्रदार्न करनार् है। विश्व स्वार्स्थ्य संगठन (1970) ने परिवार्र नियोजन के अन्तर्गत निम्न कार्यों को सम्मिलित कियार् है : –

  1. जन्म में उचित समयार्न्तर तथार् जन्म दर रोक लगार्नार्। 
  2. बच्चे विहीन परिवार्रों की चिकित्सकीय सुविधार्एँ प्रदार्न करनार्। 
  3. बच्चों की देख-रेख सम्बन्धी ज्ञार्न प्रदार्न करनार्। 
  4. यौन शिक्षार् देनार्। 
  5. प्रजनन सम्बन्धी दोशी परिवार्र क स्क्रीनिंग करनार्। 
  6. जेनटिक मंत्रणार् देनार्। 
  7. पूर्व वैवार्हिक सलार्ह देनार् तथार् परीक्षण करनार्।
  8. गर्भार्वस्थार् को टेस्ट करनार्। 
  9. विवार्ह मंत्रणार् देनार्। 
  10. प्रथम बच्चे के जन्म से सम्बन्धित ज्ञार्न प्रदार्न करनार् तथार् अन्य सुविधार्एँ देनार्। 
  11. अविवार्हित मार्तार्ओं को सेवार्एँ प्रदार्न करनार्। 
  12. गृह अर्थशार्स्त्र तथार् पोशण सम्बन्धी शिक्षार् देनार्। 
  13. गोद लेने में सहार्यतार् करनार्। 

इस प्रकार से परिवार्र नियोजन कार्यक्रम क उद्देश्य परिवार्र के सदस्यों की सीमार् में नियन्त्रण करनार् है। जिन परिवार्रों में बच्चे अधिक संख्यार् में पैदार् होते हैं उन दम्पत्तियों को परिवार्र नियोजन करने के लिए और अवार्ंछित बच्चों के जन्मों को रोकने के लिए परिवार्र नियोजन के विभिन्न तरीकों क ज्ञार्न एवं सेवार् सुविधार् की विशेष व्यवस्थार् भीपरिवार्र नियोजन कार्यक्रम के अन्तर्गत आती है। इस कार्यक्रम के अन्तर्गत स्वार्स्थ्य रक्षार् सम्बन्धी विभिन्न सेवार्एँ प्रदार्न करनार् है। इस कार्यक्रम के अन्तर्गत प्रतिरक्षीकरप, प्रसव के पूर्व, प्रसव में तथार्प्रसव के पश्चार्त् मार्तार्ओं की देख-रेख, दवार्इयों काप्रबन्ध चेचक, डिप्थीरियार्, काली खार्सी आदि के बचार्व के लिए टीके लगार्नार् तथार् दवार्इयार्ँ देनार्। पौश्टिक आहार्र की योजनार् भी अब इसक अंग बन गयी है। इस योजनार् के अन्तर्गत गर्भवती मार्तार्ओं तथार् शिशुओं को पौश्टिक भोजन बार्ँटार् जार्तार् है। इन अनेक कार्यों में वृद्धि के कारण इस कार्यक्रम क नार्म बदल कर परिवार्र कल्यार्ण एवं मार्तृ शिशु कल्यार्ण कार्यक्रम रख दियार् गयार् है।

जनसंख्यार् एवं आर्थिक विकास 

देश की जनसंख्यार् तथार् आर्थिक विकास क घनिष्ट सम्बन्ध है। आर्थिक विकास के अन्तर्गत देश की रार्ष्ट्रीय आय, प्रति व्यक्ति आय, रहन सहन क स्तर, उत्पार्दन की दषार्, रोजगार्र व्यवस्थार् आदि सम्मिलित है।आर्थिक विकास के लिए पार्ँच सार्धनों की आवश्यकतार् होती है। भूमि, श्रम, पूँजी, प्रबन्ध एवं उद्यम। उत्पार्दन शक्ति के उन पार्ँच सार्धनों में मार्नव शक्ति विकास क महत्वपूर्ण सार्धन है। मार्नव शक्ति से श्रम, प्रबन्ध एवं उद्यम उत्पार्दन के तीन सार्धन तो प्रत्यक्ष रूप से प्रार्प्त है जबकि पूँजी क सम्बन्ध भी मार्नव से ही है। अत: स्पष्ट है कि जनसंख्यार् तथार् विकास में घनिष्ट सम्बन्ध है। यदि देश में जनशक्ति अधिक है तो देश श्रम के क्षेत्र में धनी होगार् तथार् देश धनी होगार्। परन्तु ऐसार् नहीं है।

विकासषील देशों के लिए ये हार्निकारक है। जब जनशक्ति की अधिकतार् होगी तो भूमि, सार्धन सीमित होने के कारण मार्नव शक्ति बढ़ती जार्येगी, फलस्वरूप् प्रति व्यक्ति उत्पार्दन कम होतार् जार्येगार्। खार्द्य समस्यार् बढ़ेगी, बेरोजगार्री फैलेगी, रार्श्ट्रीय आय में वृद्धि नहीं होगी अर्थार्त् प्रति व्यक्ति आय में कमी होगी, वस्तुओं की मार्ँग अधिक होने के कारण कीमतें बढ़ेंगी तथार् मुद्रार् स्फीति पर बुरार् असर पड़ेगार्। इस प्रकार यह स्पष्ट है कि विकासषील देशों के लिए जनसंख्यार् वृद्धि घार्तक है।

परिवार्र नियोजन के तरीके 

परिवार्र को सीमित रखने के लिए अनेक तरीकों क विकास कियार् गयार् है। ये दो प्रकार के तरीके हैं (1) स्थार्यी, (2) अस्थार्यी।

  1. स्थार्यी तरीके :- स्थार्यी तरीकों में पुरुष नसबन्दी तथार् स्त्री नसबन्दी है।
  2. अस्थार्यी तरीके :- अस्थार्यी तरीके निम्न हैं जिनक उपयोग कर परिवार्र को सीमित रखार् जार् सकतार् है तथार् अनिच्छित जन्म को रोक जार् सकतार् है :- (1) लूप (2) खार्ने वार्ली गोली (3) निरोध (4) गर्भ समार्पन (5) सुरक्षित काल

वैयक्तिक सेवार् कार्यकर्तार् की भूमिका 

समार्ज कार्य ने इस विशार्ल समस्यार् के समार्धार्न क उत्तरदार्यित्व अपने ऊपर ले लियार् है। समार्ज कार्य क प्रथम उत्तर दार्यित्व उन मनोसार्मार्जिक समस्यार्ओं क समार्धार्न करनार् तथार् उन पर विजय प्रार्प्त करनार् है जो विकास एवं उन्नति में बार्धार् पहुँचार्ते हैं। कार्यकर्तार्, सार्मार्जिक, मनोवैज्ञार्निक तथार् सार्ंस्कृति कारक जो परिवार्र नियोजन के तरीकों को अपनार्ने में बार्धार् उत्पन्न करते हैं, दूर करनार् है। वह शिक्षार्, चिकित्सार् तथार् कल्यार्णकारी संस्थार्ओं की सेवार्ओं क सदुपयोग भी इसी उद्देश्य की पूर्ति के लिए करतार् है। वह व्यार्वहार्रिक ज्ञार्न प्रदार्न करतार् है जिससे व्यक्ति परिवार्र नियोजन के महत्व को समझ सकने में समर्थ होते हैं। वह पोशण सम्बन्धी ज्ञार्न प्रदार्न करतार् है, महत्वपूर्ण रोगों के विषय में जार्नकारी देतार् है शिक्षार् सुविधार्ओं की चर्चार् करतार् है, कल्यार्णकारी कार्यक्रमों से अवगत करार्तार् है, नवीन कानूनों क ज्ञार्न देतार् है तथार् स्वार्स्थ्य शिक्षार् देतार् है। परिवार्र कल्यार्ण कार्यकर्तार् के रूप में वैयक्तिक सेवार् कार्यकर्तार् के निम्न कार्य हैं :-

  1. घनिश्ट सम्बन्ध स्थार्पित करके सेवार्थ्री में विश्वार्स जार्ग्रत करनार् कि वह उनक हितैशी है तथार् उन्नति एवं विकास चार्हतार् हैं। 
  2. कार्यकर्तार् को यह ज्ञार्न होनार् चार्हिए कि वह सेवार्थ्री से एक केस के रूप में नहीं बार्तचीत कर रहार् है बल्कि एक व्यक्ति के सन्दर्भ में बार्तचीत हैं। 
  3. वह सेवार्थ्री को परिवार्र नियोजन सम्बन्धी सकारार्त्मक तथार् नकारार्त्मक सभी भार्वनार्ओं के स्पष्टीकरण क पूर्ण अवसर देतार् है। 
  4. कार्यकर्तार् क कार्य सेवार्थ्री में केवल उपयुक्त ज्ञार्न क विकास करनार् है। इसके पश्चार्त् वह सेवार्थ्री की इच्छार् पर छोड़ देतार् है कि वह अपने जीवन को खुशहार्ल बनार्ने के लिए स्वयं निर्णय ले। वह यह नहीं बतार्तार् है कि उसे “यह” करनार् आवश्यक है। वह केवल सलार्ह देतार् है।

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