भार्रतीय रिजर्व बैंक के कार्य
एक केन्द्रीय बैंक के रूप में ‘‘ भार्रतीय रिजर्व बैंक’’ पार्रम्परिक कार्यों के सार्थ विविध प्रकार के विकास एवं प्रचार्र के कार्य भी करतार् है। भार्रतीय रिजर्व बैंक, अधिनियम 1934, के अनुसार्र यह विविध कार्य करतार् है जैसे नोट जार्री करने वार्लार् प्रार्धिकारी, सरकार क बैंकर, बैंको क बैंकर, इत्यार्दि। हमार्रे देश की मुद्रार् में एक रूपये के नोट व सिक्के (सहार्यक सिक्के सहित) आते है जिन्हे भार्रत सरकार जार्री करती है व बैंक अधिनियम, 1934 की धार्रार् 38 के अनुसर, एक रूपये के सिक्के व नोटो क प्रसार्र सरकार केवल भार्रतीय रिजर्व बैंक के मार्ध्यम से करती है। नोट जार्री करने क एकाधिकार रिजर्व बैंक को प्रार्प्त है। भार्रतीय रिजर्व बैंक नोट एवं सरकार एक रूपये के नोट व सिक्के जार्री करती है जिसकी असीमित कानूनी निविदार् सरकार द्वार्रार् की जार्ती है। जनतार् की आवश्यकतार् के अनुसार्र बैंक नोट को बदलने व सिक्को को अन्य मूल्यवर्ग में बदलनार् भार्रतीय रिजर्व बैंक की जिम्मेदार्री है।

भार्रतीय रिजर्व बैंक के कार्य 

हमार्रे देश की मुद्रार् में सम्मिलित एक रूपये के नोट व सिक्के (सहार्यक सिक्के सहित) आते है जिन्हे भार्रत सरकार जार्री करती है व बैंक अधिनियम, 1934 की धार्रार् 38 के अनुसार्र, एक रूपये के सिक्के व नोटो क प्रसार्र केवल भार्रतीय रिजर्व बैंक के मार्ध्यम से होतार् है। नोट जार्री करने क एकाधिकार रिजर्व बैंक को प्रार्प्त है। भार्रतीय रिजर्व बैंक नोट व सरकार एक रूपये के नोट व सिक्के जार्री करतार् है जिसकी असीमित कानूनी निविदार् की जार्ती है। जनतार् की आवश्यकतार् के अनुसार्र बैंक नोट को बदलने व सिक्को को अन्य मूल्यवर्ग में बदलनार् भार्रतीय रिजर्व बैंक की जिम्मेदार्री है।

भार्रतीय रिजर्व बैंक अधिनियम के अनुसार्र नोटो को जार्री करनार् और बैंक के सार्मार्न्य बैंकिंग कारोबार्र को दो अलग-अलग विभार्गों द्वार्रार् कियार् जार्तार् है। निर्गम विभार्ग की जिम्मेदार्री नये नोटो को जार्री करने की है। नये नोट जार्री करने के लिए विभार्ग अपनी सम्पत्ति रखतार् है जो कि बैंकिग विभार्ग की संपत्ति से अलग होती है। कारोबार्र बैंकिंग विभार्ग के अन्र्तगत आतार् है जो अपने पार्स मुद्रार् क भण्डार्र रखती है। जरूरत पड़ने पर बैंक विभार्ग मुद्रार् क भण्डार्र रखती है। जरूरत पड़ने पर , बैंक विभार्ग मुद्रार् क भण्डार्र उपलब्ध करार्तार् है, निर्गम विभार्ग से जिसके लिए समार्न मूल्य की आस्तियार्ं क अन्तरण कियार् जार्तार् है। इसी तरह से बैंकिग विभार्ग के पार्स मुद्रार् क भण्डार्र यदि जरूरत से ज्यार्दार् है तो निर्गत विभार्ग अतिरिक्त मुद्रार् को समार्न मूल्य की आस्तियों से बदल लेतार् है। निर्गम विभार्ग की सम्पत्ति जिसके विरूद्व नोट जार्री किये जार् सकते है, वह है:-

  1. सोने के सिक्के और बहुमूल्य धार्तुऐं।
  2. विदेशी प्रतिभूतियॉ।
  3. रूपये के सिक्के।
  4. भार्रत सरकार की रूपयार् प्रतिभूतियार्ं।
  5. विनियमन के बिल व वचनपत्र भार्रत में देय हो जो कि बैंक द्वार्रार् खरीदे जार् सके।

भार्रतीय रिजर्व बैंक संशोधन अधिनियम, 1957 के अनुसार्र, बैंक अब रू 200 करोड़ सोने के सिक्को के लार्यक स्वर्ण बुलियन और विदेशी प्रतिभूतियों की जो सोने क सिक्क और बुलियन के मूल्य रू 115 करोड़ से कम नही होनार् चार्हिए की एक न्यूनतम आरक्षित बनार्ये रखनार् चार्हिए। रिजर्व बैंक सशक्त है केन्द्रीय सरकार की पूर्व मंजूरी से निर्गत विभार्ग द्वार्रार् जमार् की हुर्इ विदेशी प्रतिभूतियों को कम कर सकतार् है।

करेंसी चेस्ट

मुद्रार् नोटो और सिक्को के वितरण क कार्य रिजर्व बैंक द्वार्रार् प्रशार्सित कियार् जार्तार् है। इस उद्देश्य को पूरार् करने के लिये निर्गम विभार्ग द्वार्रार् 10 बड़े शहरो में इसक कार्यार्लय खोलार् गयार्। करेंसी चेस्ट (अर्थार्त बार्क्स यार् कंटेनर) है जिसमें नये यार् पुन:जार्री सिक्के , रूपये के सिक्को के सार्थ जमार् करतार् है। भार्रतीय रिजर्व बैंक, भार्रतीय स्टेट बैंक, भार्रतीय स्टेट बैंक के सार्हयक सावजनिक क्षेत्र के बैंको, सरकारी भण्डार्रों व उप भण्डार्रो के द्वार्रार् करेंसी चेस्टों व कोशों क प्रबन्धन कियार् जार्तार् है। नये नोटो क भण्डार्र देश भर में फैले हुये करेंसी चेस्ट में रखे जार्ते है जो अधिकांश मार्मलों में सावजनिक क्षेत्रों के बैंको द्वार्रार् संचार्लित किये जार्ते है। करेंसी चेस्ट को बनार्ये रखने में बैंक व सरकारी भण्डार्र (कोशार्गार्र) के कर्इ लार्भ है :-

  1. यदि किसी दिन बैलेंस से अधिक भुगतार्न हो जार्ये, तो तुरन्त ही चेस्ट से धन निकाल लियार् जार्तार् है। इसी तरह अगर फंड जरूरत से ज्यार्दार् अधिक हो तो, धन को तुरन्त ही जमार् कर दियार् जार्तार् है। ऐसार् करने से धन के भौतिक हस्तार्न्तरण से बचार् जार् सकतार् है। भण्डार्र व बैंक की शार्खार्यें सार्पेक्षतयार्: कम अन्त: शेश के सार्थ काम करते है।
  2. करेंसी चेस्ट रूपये व सिक्कों को नोटो से बदलने की सुविधार् देती है और छोटे मूल्यवर्ग के नोटो की जगह बड़े मूल्यवर्ग के नोटो की आपूर्ति व निकासी क कार्य करती है सार्थ ही सार्थ पुरार्ने व फटे हुये नोटो को बदल कर नये नोट निर्गत करती है।
  3. करेंसी चेस्ट जनतार् व बैंको को प्रेषण सुविधार् भी प्रदार्न करती है।

सरकार के बैंकर के रूप में रिजर्व बैंक

केन्द्रीय व रार्ज्य सरकारों के लिये भार्रतीय रिजर्व बैंक बैंकर के रूप में कार्य करतार् है। धार्रार् 20 के अनुसार्र, सरकारी लेनदेन करनार् एवं सावजनिक क्षेत्र के ऋण क प्रबन्धन करनार् भार्रतीय रिजर्व बैंक के लिये अनिवाय है। धार्रार् 21 के द्वार्रार् केन्द्र सरकार को बार्ध्य कियार् गयार् है कि अपने समस्त नकद धन को एवं ब्यार्ज मुक्त जमार् रार्शियों को एवं धन, धन के प्रेषण, धन के अन्तरण एवं बैंकिंग लेन देन को वह बैंको को सौंप दे और विशेश रूप से धार्रार् 21 ए के अनुसार्र भार्रतीय रिजर्व बैंक, केन्द्र सरकार एवं रार्ज्य सरकारो की तरफ से भी उक्त सभी कार्य करतार् है। भार्रतीय रिजर्व बैंक ने इन कार्यो को करने के लिए केन्द्र व रार्ज्य सरकारो के सार्थ अनुबन्ध कियार् है। सरकार के सार्धार्रण बैंकिंग व्यवसार्य को करने के लिये बैंको को किसी प्रकार की पार्रिश्रमिक नही दी जार्येगी। यह सरकार की नकदी ब्यार्जमुक्त रखती है। सावजनिक ऋण के प्रबंधन के लिए बैंक कमीशन प्रार्प्त करतार् है। सरकार द्वार्रार् घोशित किये गये स्थार्नो पर निर्गम विभार्ग के करेंसी चेस्ट क अनुरक्षण करनार् और सार्थ ही सार्थ पर्यार्प्त नोट व सिक्के बनार्ये रखनार् भी भार्रतीय स्टेट की जिम्मेदार्री है। धार्रार् 45 के अनुसार्र, रिजर्व बैक के लिए अनिवाय है कि वह अपने एकमार्त्र प्रतिनिधि के रूप में भार्रतीय स्टेट बैंक की नियुक्ति सभी स्थार्नों पर करतार् है जहार्ं भार्रतीय रिजर्व बैंक की कोर्इ शार्खार् यार् कार्यार्लय नही है लकिन वहॉ स्टेट बैंक यार् उसके सहार्यक बैंक की शार्खार् हो। स्टेट बैंक ने अपने सहार्यक बैको के सार्थ अभिकरण व्यवस्थार् के लिये अनुबन्ध स्थार्पित कियार् है। एजेंसी और उप एजेंसी बैंको के द्वार्रार् सरकार के सार्मार्न्य बैंकिग व्यार्पार्र क परिचार्लन करते हैं और उसी के लिए कमीशन प्रार्प्त करते है। रिजर्व बैंक केन्द्र व रार्ज्य सरकारो को ऐसे मार्ध्यम एवं प्रकीर्ण अग्रिम देने के लिये अधिकृत है जो कि अग्रिम प्रदार्न करने की तार्रीख से 3 महीने के भीतर वार्पसी योग्य हो। भार्रतीय रिजर्व बैंक महत्वपूर्ण आर्थिक और वित्तीय मार्मलो में सरकार के वित्तीय सलार्हकार के रूप में भी कार्य करतार् है।

बैंकर्स बैंक के रूप में रिजर्व बैंक

भार्रतीय रिजर्व बैंक सभी वार्णिज्यिक बैंको, क्षेत्रीय ग्रार्मीण बैंको और सहकारी के लिये एक बैंकर के रूप में कार्य करतार् है। इसक संबंध तभी स्थार्पित हो जार्तार् है जैसे ही बैंक क नार्म भार्रतीय रिजर्व बैंक अधिनियम 1934 की दूसरी अनुसूची में शार्मिल हो जार्तार् है। ऐसे बैको को अनुसूचित बैंक कहार् जार्तार् है जो रिजर्व बैक से पुनर्वित्त की सुविधार् क लार्भ उठार् सकते है। 1935 में भार्रतीय रिजर्व बैंक के उदघार्टन के समय वार्णिज्यिक बैको क वर्गीकरण अनुसूचित व गैर अनूसूचित में कियार् गयार् । इसक उद्देश्य रिजर्व बैक और वार्णिज्यिक बैंक के बीच में सुदृढ़ वित्तीय सम्बन्ध स्थार्पित करनार् थार्। इस प्रकार इस अधिनियम के अन्र्तगत बैको को अनुसूचित बैको की सूची में शार्मिल करने के लिय कुछ शर्ते रखी गयीं । 1966 से रार्ज्य सहकारी बैंको को भी अधिनियम के दूसरी अनूसूची में शार्मिल कर लियार् गयार् है। 1975 से क्षेत्रीय ग्रार्मीण बैंको की स्थार्पनार् अनुसूचित बैंको में की गयी। सावजनिक क्षेत्रों के बैको (स्टेट बैंक समूह सहित) को केन्द्र सरकार द्वार्रार् अनुसूचित बैको के अंतर्गत अधिसूचित कियार् गयार् है केन्द्र सरकार के द्वार्रार् अनुसूचित बैको की श्रेणी के अन्र्तगत सम्मिलित हैं-

  1. वार्णिज्यिक बैंक-भार्रतीय और विदेशी
  2. रार्ज्य सहकारी बैंक और
  3. क्षेत्रीय ग्रार्मीण बैंक ।

अनुसूचित बैंक क मतलब है वह बैक जो भार्रतीय रिजर्व बैक अधिनियम 1934 की दूसरी अनुसूची के अन्र्तगत आते है। रिजर्व बैक दूसरी अनुसूची में उन बैको क नार्म शार्मिल करनें के लिये सशक्त है जो भार्रत में बैंकिंग व्यार्पार्र क संचार्लन करते हो और धार्रार् 42(6) में निर्धार्रित शर्तो को संतुष्ट करतार् हो :-

  1. चुकतार् पूंजी और भण्डार्र कुल मूल्य के 5 लार्ख से कम नही होनार् चार्हिए ।
  2. इसे रिजर्व बैक को संतुष्ट करनार् होगार् कि यह अपनी कार्यवार्हियों को तरीके से अंजार्म नहीं देगार् जिससे जमार्कर्तार्ओं के हितों को हार्नि पहुंचे।
  3. यह
    1. एक रार्ज्य सहकारी बैक;
    2. कम्पनी अधिनियम 1956 के अन्र्तगत कंपनी के रूप में परिभार्षित;
    3. केन्द्रिय सरकार द्वार्रार् इस निमित्त अधिसूचित एक संस्थार्, यार्
    4. भार्रत से बार्हर किसी भी जगह पर लार्गू कानून के तहत निगमित निगम यार् कम्पनी होनी चार्हिए। दूसरी अनुसूची में बैंक क नार्म शार्मिल करने से पहले, रिजर्व बैंक की संतुष्टि के लिये बैंक को दो शर्तो को पूरार् करनार् होगार् 
  1. चुकतार् पूंजी और भण्डार्र की न्यूनतम मूल्य :-अधिनियम के अनुसार्र बैंक के पार्स चुकतार् पूंजी और भण्डार्र क कुल मूल्य 5 लार्ख से कम नही होनार् चार्हिए। इस उद्देश्य के लिये मुल्य क अर्थ है वार्स्तविक यार् विनिमय मूल्य न कि अंकित मूल्य जो कि बैंक की पुस्तकों में दिखार्यार् गयार् है। चुकतार् पूंजी और भण्डार्र के वार्स्तविक मूल्य को खोजने के लिए शेयर धार्रको की पूंजी (मुक्त भण्डार्र सहित) क अनुमार्न लगार्यार् जार्तार् है और बार्हरी देनदार्रियो की रार्शि को घटार्यार् जार्तार् है। प्रत्येक परिसम्पत्ति क निरीक्षण एवं परिवीक्षण यार् छार्नबीन की जार्ती है तार्कि वर्तमार्न मूल्य मिल सके। अगर बैंक की कुल परिसम्पत्ति के मूल्य से बार्हरी देनदार्रियों को घटार् करके 5 लार्ख के बरार्बर यार् उससे अधिक आतार् है तभी बैंक को दूसरी अनुसूची मे शार्मिल कियार् जार् सकतार् है। यदि कोर्इ विवार्द बैंक की कुल परिसम्पत्ति के अनुमार्नित मूल्य यार् भण्डार्र के मूल्य पर उठतार् है तो रिजर्व बैंक द्वार्रार् मूल्य निर्धार्रण अंतिम होगार्।
  2. जमार्कर्तार्ओ क हित :-रिजर्व बैंक संतुष्ट होनार् चार्हिये कि बैंक जमार्कर्तार्ओं के हितो के विरूद्ध किसी भी प्रकार क कार्य नहीं करेगार्। बैंक के काम करने के सभी पहलुओं की पूरी तरह विस्तृत जॉच की आवश्यकतार् होती है और अंतत: जमार्कर्तार्ओं के हितों के लिये रिजर्व बैंक, बैंक के विभिन्न पहलुओं पर जैसे प्रबंधन की गुणवत्तार्, निवेश एवं अग्रिमों की सुरक्षार् वित्तीय सुदुढतार् आदि के संबंध में अपनी रार्य रखती है।

रिजर्व बैंक किसी भी बैंक के नार्म को दूसरी अनुसूची से बार्हर निकालने के लिये अधिकृत है यदि बैंक द्वार्रार् उपर्युक्त शर्तो को पूरार् नही कियार् जार्ये यार् बैंक के व्यार्पार्र क परिसमार्पन हो जार्ये यार् ऐसार् देखार् जार् रहार् है कि बैंक अपने बैंकिंग व्यार्पार्र को चलार् पार्ने में अक्षम है। फिर भी रिजर्व बैक उन अनुसूचित बैंको को चुकतार् पूँजी के मूल्य में वृद्वि करने एवं अपने व्यार्पार्र प्रणार्ली की कमियो को दूर करने के लिये एक अवसर दे सकतार् हैं।बैंको को अनुसूचित बैंक क दर्जार् प्रार्प्त करने पर विषेशार् धिकार प्रदार्न किये जार्ते हैं उदार्हरण के लिये रिजर्व बैंक से लार्भ उठार्ने के लिये पार्त्र हो जार्ते है। दूसरी तरफ अनुसूचित बैंकों के लिये रिजर्व बैक के सार्थ वैधार्निक भण्डार्र बनार्ये रखने क दार्यित्व भी हो जार्तार् है।

रिजर्व बैक और वार्णिज्यिक बैंको के बीच सम्बंध

भार्रतीय रिजर्व बैंक अधिनियम, 1934 और बैंकिग विनियमन अधिनियम, 1949 द्वार्रार् प्रदत्त शक्तियों के आधार्र पर भार्रतीय रिजर्व बैक और अनुसूचित वार्णिज्यिक बैको के बीच बहुत करीब और विविध प्रकृति क सम्बंध होतार् है।

बैंकों क पर्यवेक्षण एवं नियंत्रण करने के प्रार्धिकारी के रूप में 

बैंकिग विनियमन अधिनियम 1948 भार्रतीय रिजर्व बैक को बैंकिग कम्पनियों पर पर्यवेक्षण व नियंत्रण करने के लिये व्यार्पक अधिकार प्रदार्न करतार् है जो है:-

बैंकिंग कम्पनियों को लाइसेंस 

धार्रार् 22 के अनुसार्र भार्रत में बैकिंग कारोबार्र करने के लिये हर कम्पनी को भार्रतीय रिजर्व बैक से लार्इसेंस प्रार्प्त करने की जरूरत है। इसके लिये रिजर्व बैक को बैंकिंग कम्पनियो की कितार्बों क निरीक्षण करने क अधिकार प्रार्प्त है और अगर वह संतुष्ट है तो लार्इसेंस जार्री कर सकती है, इन शर्तो पर :-

  1. कम्पनी वर्तमार्न यार् भविष्य में ऐसी परिस्थिति में हो कि वह वर्तमार्न यार् भविष्य जमार्कर्तार्ओं के दार्वों को पूरी तरह अर्जित कर सके।
  2. अपने वर्तमार्न यार् भविष्य जमार्कर्तार्ओं के हितों के लिये हार्निकारक तरीके में कार्य करने की कम्पनी को कोर्इ सम्भार्वनार् न हो।
  3. कम्पनी के प्रस्तार्वित प्रबंधन क सार्मार्न्य चरित्र जनतार् के हित में यार् जमार्कर्तार्ओं के हित में हार्निकारक नही होगार्।
  4. कंपनी के लिये पर्यार्प्त पूंजी संरचनार् और कमाइ की संभार्वनार्एं हो।
  5. भार्रत में बैंकिग व्यार्पार्र करने के लिये कम्पनी को लार्इसेंस जार्री कियार् जार्ये जो कि सावजनिक हित में हो।
  6. यह कि बैंकिंग कम्पनी को लार्इसेस दियार् जार्नार् बैंकिंग तंत्र के संचार्लन एवं समग्रतार् के विरूद्व नहीं होगार्।

इस प्रकार कम्पनी को लार्इसेंस देने के लिये संतोषजनक वित्तीय स्थिति होनी चार्हिए। विदेशी बैंक के मार्मले में रिजर्व बैक को संतुष्ट करने हेतु तथ्य पूर्ण होने चार्हिये –

  1. भार्रत में ऐसे बैको द्वार्रार् बैंकिग व्यार्पार्र करने के लिये जनतार् के हित को ध्यार्न में रखार् जार्नार् चार्हिये ।
  2. जिस सरकार यार् रार्ष्ट्र के विधार्न के अन्तर्गत इसक गठन कियार् गयार् हो वह भार्रतीय बैंकिंग कम्पनियों के सार्थ कोर्इ भेदभार्व न रखती हों।
  3. कम्पनी ऐसी सभी कम्पनियों के लिये लार्गू कम्पनी अधिनियम के सभी प्रार्वधार्नों क अनुपार्लन करती हों।

रिजर्व बैंक किसी भी बैंकिंग कम्पनी के लार्इसेंस को रद्द करने के लिये एवं शार्खार्ओं को खोलने के लिये अनुमति देने हेतु सशक्त है । धार्रार् 23 के अनुसार्र भार्रत में नयी जगह पर व्यार्पार्र करनार् यार् वर्तमार्न स्थार्न को भार्रत के अन्दर यार् बार्हर बदलने के लिये सभी बैकिंग कम्पनी को रिजर्व बैक की पूर्व अनुमति लेने की आवश्यकतार् है। रिजर्व बैक किसी भी बैंकिंग कम्पनी को लार्इसेंस देने से पूर्व यह ध्यार्न रखती है कि बैंक की वित्तीय स्थिति, इतिहार्स , प्रबंधन क सार्मार्न्य चरित्र और पूंजी संरचनार् में पर्यार्प्ततार् और कमाइ की संभार्वनार्ये और यह तथ्य कि क्यार् अनुमति देने से पहले सावजनिक हित में कार्य कियार् गयार् है यार् नही।

बैंकिग कम्पनियों क निरीक्षण करने की शक्ति

धार्रार् 35 के तहत, रिजर्व बैंक यार् तो खुद से पहल करके यार् केन्द्रीय सरकार के कहने पर किसी भी बैकिंग कम्पनी व उसकी पुस्तको व खार्तों क भी निरीक्षण कर सकतार् है। यदि रिजर्व बैंक की निरीक्षण आख्यार् पर केन्द्र सरकार यह विचार्र करती है कि कम्पनी की कार्यप्रणार्ली उसके जमार्कर्तार्ओं के हितों के विपरीत है,तब यह कम्पनी को नर्इ जमार्रार्शियों को लेने से निशिद्व कर सकती है यार् रिजर्व बैंक को कम्पनी क व्यार्पार्र समेटने के लिये लिखित रूप में निर्देषित कर सकती है।

निर्देश देने की शक्ति :-

धार्रार् 35 ए रिजर्व बैंक को निर्देश देने की शक्तियॉ प्रदार्न करतार् है जिसके अनुसार्र बैंकिंग कम्पनी यार् कम्पनियॉ जनतार् के हित में यार् बैंकिंग नीतियों के हित में ही कार्य करें एवं भार्रतीय रिजर्व बैंक बैंकिंग कम्पनियों को जमार्कर्तार्ओं के हितो के विरूद्व कार्य करने से रोकने यार् बैकिंग कम्पनी के हित के विपरीत कार्य करने से रोकने के लिये निर्देषित कर सकती है तथार् बैंकिंग कम्पनी को सुनिश्चित ढंग से प्रबंधन करने के लिये भी निर्देषित कर सकती है। धार्रार् 36 रिजर्व बैंक को शक्ति देतार् है कि वह बैकिंग कम्पनियों को किसी भी प्रकार के विशेष लेन-देन में प्रवेश करने पर चेतार्वनी दे सकती है यार् निशेध कर सकती है और सार्मार्न्यत: किसी भी बैंकिंग कम्पनी को सलार्ह दे सकतार् है। यह बैंको को सुचार्रू रूप से कार्य करने के लिये निर्देश देने क आदेश भी पार्रित कर सकतार् है।

शीर्ष प्रबंधन पर नियंत्रण :-

भार्रतीय रिजर्ब बैंक को बैंको के शीर्ष प्रबंधन पर सम्पूर्ण नियंत्रण रखने के लिये व्यार्पक शक्तियार्ं प्रार्प्त है। बैंकिंग कम्पनी के अध्यक्ष, प्रबंध निदेशक, प्रबंधक यार् मुख्य कार्यकारी अधिकारी की नियुक्ति यार् पुनर्नियुक्ति यार् नियुक्ति के समार्पन के सम्बंध में रिजर्व बैक से पूर्व अनुमोदन लेनार् आवश्यक है। धार्रार् 36 ए भार्रतीय रिजर्व बैंक को शक्ति प्रदार्न करतार् है कि वह किसी भी बैंक के कार्यार्लय से अध्यक्ष , निदेशक, मुख्य कार्यकारी अधिकारी यार् अन्य अधिकारी यार् बैक के कर्मचार्री को आवश्यक यार् अवॉछनीय समझने पर हटार् सकतार् है। एवं उस हटार्ये हुये व्यक्ति के स्थार्न पर किसी अन्य व्यक्ति को नियुक्त कर सकतार् है। रिजर्व बैक बैंकिग नीति के हित में यार् सावजनिक हित में यार् बैंक और उसके जमार्कर्तार्ओं के हित में आवश्यक समझे तो बैको के निदेशक मंडल में एक यार् अधिक अतिरिक्त निदेशक को नियुक्त कर सकतार् है,।

क्रेडिट के नियंत्रक के रूप मे :-

भार्रतीय रिजर्व बैक निम्न तरीको से वार्णिज्यिक बैको द्वार्रार् प्रदार्न क्रेडिट पर नियंत्रण रखतार् है :-
तरल सम्पत्ति के रखरखार्व से संबंधित वैधार्निक आवश्यकतार्ओं को बदल कर क्रेडिट पर नियंत्रण रखतार् है । बैंकिंग विनियमन अधिनियम, 1949 की धार्रार् 24 के अनुसार्र, हर बैकिंग कम्पनी के लिये आवश्यक है कि वह भार्रत में नकद, सोनार् यार् भार्र रहित अनुमोदित प्रतिभूतियों को कारोबार्र के किसी भी दिन, 25 प्रतिशत की शुद्व मार्ंग व समय देनदार्रियो से कम न हो। इसे वैधार्निक चलनिधि अनुपार्त (एस0एल0आर0) कहार् जार्तार् है। रिजर्व बैक इसे 40 प्रतिशत तक बढार्ने के लिये सशक्त है । सार्ंविधिक तरलतार् अनुपार्त को बढार्कर , रिजर्व बैक अन्य बैंको को तरल सम्पत्ति के जमार् देनदार्रियों के एक बडे अनुपार्त को विशेश रूप से सरकारी व अन्य अनुमोदित प्रतिभूतियों में बनार्ये रखने के लिये मजबूर करतार् है, जिससे इस प्रकार बैको के ऋण सक्षम संसार्धनो को तदनुसार्र कम कियार् जार् सके। वर्तमार्न में सभी अनुसूचित वार्णिज्यिक बैको को 30 सितम्बर 1994 को बकायार् जमार् देनदार्रियों पर 31.8% दर से एवं इस तार्रीख के बार्द जमार् की गर्इ धनरार्शियों पर 25 प्रतिशत की दर से एस0एल0आर0 बनार्ये रखनार् आवश्यक है जो कि वृद्विषील है।

बैंकिग विनियमन अधिनियम, 1948 की धार्रार् 21 के अन्तर्गत भार्रतीय रिजर्व बैंक बैकिंग कम्पनियों को निर्देश जार्री करने के लिये सशक्त कियार् गयार् है एवं निर्देश जार्री करतार् है कि रिजर्व बैंक सशक्त है कि उनके द्वार्रार् पार्लन किये गये अग्रिम के सम्बंध में नीति क निर्धार्रण करें। इन निर्देषों निम्न से संबंधित हो सकते हैं-

  1. अग्रिम बनार्ने यार् न बनार्ये जार्ने क उद्देश्य।
  2. सुरक्षित अग्रिम के सम्बंध में माजिन बनार्ये रखनार्।
  3. किसी भी उधार्रकर्तार् को दी गयी अग्रिम की अधिकतम रार्शि ।
  4. बैंकिग कम्पनी द्वार्रार् किसी भी फर्म, कम्पनी इत्यार्दि के द्वार्रार् ली गयी अधिकतम रार्शि की गार्रंटी, और
  5. अग्रिम देने के लिये ब्यार्ज दर और अन्य शर्ते।

रिजर्ब बैंक ने अपने में निहित शक्तियों क काफी व्यार्पक प्रयोग कियार् है। बढ़ती कीमतों और अटकलो की जॉच करने के इरार्दे से निर्देश जार्री करतार् है।

बैको के लिये बैंकर के रूप में:-

बैको के लिये बैकर के रूप में, रिजर्व बैक ऋणदार्तार् के रूप में कार्य करतार् है और निम्न रूपों में अनुसूचित बैको को अनुदार्न दे सकतार् है।

  1. योग्य बिलों को पुन: रियार्यत करनार् यार् खरीद करनार्।
  2. निश्चित प्रतिभूतियों के विरूद्व ऋण व अग्रिम प्रदार्न करनार्

धार्रार् 17(2) और 17(3) रिजर्व बैक को विभिन्न प्रकार के विनिर्दिश्ट बिलों को खरीद यार् फिर रियार्यत के मार्ध्यम से अनुदार्न देने को अधिकृत करतार् है । धार्रार् 17(4) रिजर्व बैक को कुछ निर्दिश्ट प्रतिभूतियों के विरूद्व ऋण व अग्रिम को प्रदार्न करने के लियें अधिकृत करतार् हैं।

(अ) बिलों पर पुन: छूट :-

धार्रार् 17(2) के अनुसार्र बिलों की श्रेणियो पर रिजर्व बैक से पुन: छूट ली जार् सकती है।

  1. वार्णिज्यक बिल:-वार्ार्िज्यिक विल की उत्पत्ति वार्णिज्यिक यार् व्यार्पार्र लेन-देन से होती है। यह भार्रत में देय होनार् चार्हिए व खरीद यार् छूट की तार्रीख से 90 दिनो के भीतर परिपक्व हो जार्नार् चार्हिए। अगर भार्रत से वस्तुओं क निर्यार्त होतार् है तो परिपक्वतार् की अवधि को 180 दिनो की अवधि के अन्दर लेन-देन करनार् होतार् है। यह जरूरी है कि बिल पर दो यार् दो से अधिक हस्तार्क्षर हो जिनमे एक अनुसूचित बैक यार् रार्ज्य सहकारी बैक शार्मिल हो।
  2. कृषि कार्यो के वित्त पोशण के लिये बिल:- इस तरह के बिल तब जार्री किये जार्ते है जब मौसमी कृषि संचार्लन के लिये वित्त यार् फसलो के विपणन खरीद यार् पुन: छूट की तार्रीख से 15 महीने के अन्दर परिपक्व होनार् हो। इन्हे भार्रत में दर्शार्यार् व देय होनार् चार्हिये व दो यार् दो से अधिक हस्तार्क्षर जिनमे एक अनुसूचित बैक यार् रार्ज्य सहकारी बैक सहित हो।
  3. लघु उघोगो को वित्त उपलब्ध करार्ने के लिये बिल – इस बिल को लार्ने क उद्वेष्य कुटीर एवं लघु उघोगो में उत्पार्दन व विपणन गतिविधियो के लिये वित्त उपलब्ध करार्नार् है जो कि रिजर्व बैक द्वार्रार् अनुमोदित हो व छूट की तार्रीख से 12 महीने के अन्दर परिपक्त हो। भार्रत मे देय हो व दो यार् दो से अधिक हस्तार्क्षर हो जिनमे रार्ज्य सहकारी बैक यार् रार्ज्य वित्त निगम शार्मिल हो और बिल क मूलधन व उस व्यार्ज के भुगतार्न की गार्रंटी रार्ज्य सरकार देती है।
  4. सरकारी प्रतिभूतियों में व्यार्पार्र करने के लिये विधेयक-इस तरह के बिल पर अनुसूचित बैक के हस्तार्क्षर होने चार्हिए व खरीद यार् पुन: छूट की तार्रीख से 90 दिन के भीतर परिपक्व होनार् चार्हिए और भार्रत मे देय हो।
  5. विदेशी बिल –  इस तरह के बिल तब बनते है जब भार्रत से वस्तुओं क निर्यार्त होतार् है और 180 दिनो के भीतर परिपक्त होतार् है। ऐसार् बिल भार्रत से बार्हर किसी ऐसे देश के नार्म निर्गत होनार् चार्हिये जो अन्र्तरार्श्ट्रीय मुद्रार् कोश क सदस्य हो। अगर बिल भार्रत से वस्तुओं के निर्यार्त से सम्बंधित नही है तो परिपक्वतार् की अवधि 90 दिन हो जार्येगी। यह ध्यार्न रखनार् चार्हिए कि वह बिल पुन: छूट के पार्त्र हो उनके निष्चित परिपक्वतार् हो। पुन: छूट के बिलो की प्रथार् को प्रोत्सार्हित करने के लिये, रिजर्व बैक ने 1 नवम्बर 1971 से पुन: छूट योजनार् लार्गू की है। भार्रतीय रिजर्व बैक (संशोधन) अधिनियम, 1974 लार्गू होने के बार्द, विनिमय पत्रों में श्रेणियार्ं आती है उपरोक्त (i),(ii),(iii) और किसी भी वित्तीय संस्थार् के हस्तार्क्षर जो कि मुख्य रूप से विनिमय पत्रों की छूट पर स्वीकृति और वचन पत्रों और इस सम्बंध में रिजर्व बैक से मंजूरी प्रार्प्त है जो कि पुन: छूट के लिये भी पार्त्र होगार्।

(ब) ऋण व अग्रिम:-

धार्रार् 17 (4) रिजर्व बैक को सक्षम बनार्तार् है, अनुसूचित बैको को अग्रिम व ऋण देने के लिये, जो मॉग पर पुन:देय यार् निर्धार्रित अवधि की समार्प्ति पर जो कि सुरक्षार्ओं के 90 दिन से अतिरिक्त न हो देय, की प्रतिभूति के बदले में:-

  1. स्टार्क , फंड यार् प्रतिभूतियों (अचल सम्पत्तियों के अलार्वार्) जिसमे एक न्यार्सी अधिकृत है न्यार्स धन को निवेश करने के लिये।
  2. समार्न स्वार्मित्व के सोने यार् चॉदी यार् दस्तार्वेज
  3. इस तरह के विनिमय पत्र और वचन पत्र, रिजर्व बैक से खरीदने यार् पुन: छूट (ऊपर वर्णित) के लिये पार्त्र है और मूलधन व ब्यार्ज के पुर्नभुगतार्न के लिये रार्ज्य द्वार्रार् गार्रंटी दी जार्ती है। 
  4. वस्तुओं के स्वार्मित्व के दस्तार्वेजो द्वार्रार् समर्थित किसी भी अनुसूचित बैक यार् सहकारी रार्ज्य बैक के वचन पत्र, (इस तरह के दस्तार्वेजो क स्थार्नार्न्तरण, सुपुर्दगी यार् किसी अन्य बैक को ऋण के लिये सुरक्षार् क वचन देनार् यार् वार्णिज्यिक यार् व्यार्पार्र के लिये वार्स्तविक अग्रिम उपलब्ध करार्नार् यार् कृषि प्रयोजन के लिये वित्तपोशण यार् फसलो क विपणन)। धार्रार् 17 (3-A) 1962 में सम्मिलित की गयी थी जो बैको को सक्षम बनार्ती है रिजर्व बैक से आसार्न शर्तों पर सुरक्षित समार्योजन के लिए निर्यार्त वित्त के सम्बंध में जो भार्रतीय रिजर्व बैक प्रदार्न करतार् है। भार्रतीय रिजर्व बैक वचन पत्र के बदले ऋण और अग्रिम किसी भी अनूसुचित बैक को दे सकतार् है अगर मॉग पर वचन पत्र प्रतिदेय हो यार् 180 दिन की समय सीमार् से अधिक न हो। उधार्र लेने वार्लार् बैंक यह लिखित रूप में धोशणार् प्रस्तुत करें :-
  1. यह इन विनिमय पत्रों को धार्रण करेगार् जिनकी उत्पत्ति भार्रत से वस्तुओं के निर्यार्त से सम्बंधित लेन-देन से होती है, जो कि भार्रत में और भार्रत के बार्हर देश के किसी भी स्थार्न से जो कि आर्इ0एम0एफ0 क सदस्य होयार् रिजर्व बैक द्वार्रार् अधिसूचित हो में लिखित हैं और ऋण व अग्रिम की तार्रीख से 180 दिनों में परिपक्व हों। उधार्र लेने वार्लार् बैंक रिजर्व बैक से ली गयी ऋण रार्शि के बरार्बर मूल्य के बिल अपने पार्स रखेगार् एवं उन्हें अपने पार्स तब तक बनार्ए रखेगार् जब तक बकायार् ऋण की रार्शि क कीमत तक क ऋण चुकतार् न कर दियार् जार्ये।
  2. यह भार्रत में निर्यार्तक यार् किसी अन्य व्यक्ति को भार्रत से वस्तुओं के निर्यार्त के लिये सक्षम बनार्ने के लिए पूर्व षिपमेन्ट ऋण यार् अग्रिम प्रदार्न करेगार्। इस तरह के ऋण की रार्शि बैंक द्वार्रार् रिजर्व बैक से उधार्र ली गयी रार्शि से कम नही होनार् चार्हिये। इस प्रार्वधार्न को प्रभार्वी करने के लिये भार्रतीय रिजर्व बैक ने माच 1963 में निर्यार्त बिल क्रेडिट योजनार् क शुभार्रम्भ कियार्। इस योजनार् और विदेशी बिल में छूट में मुख्य अन्तर यह है पूर्व के मार्मले में बैको को विदेशी बिल रिजर्व बैक से विवर (lodge) करने की आवश्यकतार् नही (जो कि पुन: छूट के तहत आवश्यक है)। उन्हे सिर्फ घोषणार् कर देनी चार्हिये कि वह ऋण की रार्शि के बरार्बर बिल धार्रण कर चुके है। एक नयी उप धार्रार् 3 ब भार्रतीय रिजर्व बैक अधिनियम (संशोधन) 1974 द्वार्रार् स्थार्पित की गर्इ। इस उपधार्रार् के तहत भार्रतीय रिजर्व बैक किसी भी अनुसूचित बैक यार् रार्ज्य सहकारी बैक को ऋण यार् अग्रिम देतार् है ऐसे बैको के बचन पत्रो के विरूद्व जो मॉग पर प्रतिदेय हो यार् तय अवधि के भीतर जो कि 180 दिनो से अधिक न हो। उधार्र लेने वार्ले बैक के लिये यह लिखित में घोषणार् करनार् आवश्यक है कि के लिए ऋण और अग्रिम कियार् गयार् है-
    1. सद्भार्वनार्पूर्ण व्यवसार्यिक यार् व्यार्पार्र लेन-देन यार्
    2. वित्तपोशक कृशि संचार्लन यार् फसलो के विपणन यार् अन्य कृषि के उद्वेष्यो की उद््घोशणार् के लिये । इस घोषणार् के अन्र्तगत अन्य विवरण भी शार्मिल होगे जो रिजर्व बैक को आवश्यक हो।

आपार्तकालीन अग्रिम

धार्रार् 18 के तहत रिजर्व बैक वार्णिज्यिक बैको और सहकारी बैको को आपार्तकालीन अग्रिम दे सकतार् है विशेष अवसरो पर जब रिजर्व बैक संतुष्ट हो कि भार्रतीय व्यार्पार्र वार्णिज्य , उघोग और कृशि के हित में क्रेडिट विनियमन के उद्देश्य के लिए यह आवश्यक है। धार्रार् 17 में निहित सीमार्ओ के होते हुए भी आपार्तकालीन अग्रिम स्थिति दी गयी है। 1978 में संशोधन भार्रतीय रिजर्व बैक को अधिकृत करतार् है –

  1. किसी भी ऐसे विनिमय पत्र यार् वचनपत्र के खरीद, बेचने यार् रियार्यत करने की, जो कि धार्रार् 17 के अन्र्तगत भार्रतीय रिजर्व बैक द्वार्रार् खरीद यार् रियार्यत के लिये पार्त्र न हो ।
  2. ऋण और अग्रिम प्रदार्न करने के लिये
    1. रार्ज्य सहकारी बैक को यार्
    2. रार्ज्य सहकारी बैक की सिफार्रिश पर पंजीकृत सहकारी समिति जो कि रार्ज्य सहकारी बैक के क्षेत्र के भीतर हो यार्
    3. किसी अन्य व्यक्ति, मॉग पर प्रतिदेय यार् निर्धार्रित अवधि की समार्प्ति पर जो 90 दिनो से अधिक न हो, इस तरह के नियम व शर्तो पर बैक विचार्र कर सकतार् है।

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