भार्रतीय धर्म ग्रंथों के नार्म

वैदिक सार्हित्य :-

वैदिक सार्हित्य में ऋग्वेद, सार्मवेद, यजुर्वेद और अथर्वेद चार्र प्रार्चीनतम ग्रन्थ हैं। इनक रचनार्काल 1500-1000 ईस्वी पूर्व के मध्य क मार्नार् जार् सकतार् वैदिक युग की सार्मार्जिक, सार्ंस्कृतिक की स्थिति के ज्ञार्न क एकमार्त्र श्रोत होने के कारण वेदों को एतिहार्सिक महत्व है। वैदिक, उत्तर-वैदिक काल से लेकर महार्जनपदों के उदय तक की रार्जनैतिक, सार्मार्जिक एवं दाशनिक संस्कृति के ज्ञार्न के लिए यह सार्हित्य महत्वपूर्ण है।

ब्रार्ह्मण ग्रन्थ :-

वैदिक मन्त्रों तथार् संहितार्ओं की गद्य टीकाओं को ब्रार्ह्मण ग्रन्थ कहार् गयार् है। इसके अन्तर्गत एतरेय ब्रार्ह्मण, शतपथ ब्रार्ह्मण, तैतरीय ब्रार्ह्मण, सार्ंख्यार्न ब्रार्ह्मण, पंचविश, षड़्विश ब्रार्ह्मण, गोपथ ब्रार्ह्मण अधिक महत्त्वपूर्ण है।

सूत्र सार्हित्य :-

सूत्र सार्हित्य के तीन भार्ग हैं :-

  1. कल्प सूत्र :- कल्प सूत्रों में वैदिक यज्ञों क शार्स्त्रीय ढंग से वर्णन कियार् गयार् है।
  2. ग्रह्म सूत्र में :- ग्रह्म सूत्रों में ग्रहस्थ जीवन में किये जार्ने वार्ले संस्कारों क वर्णन है। इन ग्रन्थों से ज्ञार्त होतार् है कि कन्यार् की विवार्ह आयु में कमी आ गयी थी। सम्भवत: युवार्वस्थार् के बिल्कुल पार्स पहुँचते ही यार् युवार्वस्थार् प्रार्रम्भ होते ही कन्यार्एँ विवार्हित हो जार्ती थीं। वैवार्हिक जीवन के आदर्श मन्त्र ब्रार्ह्मण के समार्न ही प्रतिपार्दित किये गए हैं।
  3. धर्म सूत्रों में :- डॉ. पी.वी. काणे ने धर्म सूत्रों क रचनार् काल 600-300 ई.पू मार्नार् है। इनमें नार्री विषयक धर्मों पर यत्र-तत्र विस्तृत विचार्र हुआ है। इनमें कई ग्रन्थ पार्ए जार्ते हैं जैसे गौतम धर्मसूत्र, बौधार्यन धर्मसूत्र, आपस्तम्ब धर्मसूत्र तथार् सिष्ठ धर्म सूत्र मुख्य है।

उपनिषद :- 

वैदिक सार्हित्य क अन्तिम भार्ग उपनिषद कहलार्तार् है।

महार्काव्य :- 

वैदिक सार्हित्य के पश्चार्त् रार्मार्यण और महार्भार्रत दो महार्काव्यों क आविर्भार्व हुआ। मूलत: इन ग्रन्थों की रचनार् ईसार् पूर्व चौथी शतार्ब्दी ई. को लगभग हुई थी। ये भार्रतीय संस्कृति के प्रतिनिधि ग्रन्थ हैं। इन दोनों ग्रन्थों में प्रार्चीन भार्रत की रार्जनैतिक, धामिक तथार् सार्मार्जिक दशार् की जार्नकारी मिलती है।

रार्मार्यण :-

यह ६०० ईपू से पहले लिखार् गयार्। 

महार्भार्रत :- 

महार्भार्रत संस्कृत सार्हित्य क विख्यार्त महार्काव्य है। इसके रचियतार् महर्षि वेद व्यार्स हैं। आधुनिक रूप में अठार्रह पर्व तथार् कुल मिलार्कर एक लार्ख श्लोक पार्ये जार्ते हैं।

स्मृतियार्ँ :- 

स्मृतियों में सार्मार्जिक संस्थार्ओं के बार्रे में अधिक व्यवस्थित एवं विस्तार्र से जार्नकारी प्रार्प्त होती है। इन्हें प्रार्चीन परम्परार्ओं एवं आचार्र शार्स्त्र क मूर्त रूप कहार् गयार् है। स्मृतियों में मुख्य है :-

  1. मनुस्मृति 
  2. यार्ज्ञवल्क्य स्मृति 
  3. पार्रार्शर स्मृति
  4. नार्रद स्मृति 
  5. ब्रहस्पति स्मृति 
  6. कात्यार्यन स्मृति

स्मृतियों से अनेक सार्मार्जिक विषयों क वर्णन प्रार्प्त होतार् है।

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