प्रकाश का परावर्तन तथा अपवर्तन

क्या आप सोच सकते हैं, कोई वस्तु आपको कैसे दिखाई देती है? जब हम किसी वस्तु को देखते हैं, तो उस वस्तु से प्रकाश हमारी आँखों में प्रवेश करता है, जिससे हमें वह दिखाई देती है। कुछ वस्तुएँ जैसे Ultra site, तारे, जलती हुई मोमबत्ती, लैम्प आदि जो स्वयं से प्रकाश को उत्सर्जित करती हैं, दीप्तिमान वस्तुएँ कहलाती हैं। कुछ अन्य वस्तुएँ किसी दीप्तिमान वस्तु से उन पर पड़नेवाले प्रकाश के कुछ भाग को वापस मोड़ देती हैं। किसी सतह पर प्रकाश के गिरने के बाद प्रकाश किरणों के मुड़ने की यह घटना, प्रकाश का परावर्तन कहलाती है।

इस प्रकार, जब प्रकाश पुंज किसी वस्तु के सम्पर्क में जाता है तो इसका कुछ भाग अथवा पूरा प्रकाश पुंज ही वस्तु से टकराकर वापस उसी माध्यम में लौट जाता है। यह घटना ‘प्रकाश का परावर्तन’ कहलाती है। कुछ वस्तुएँ जिनकी सतह चिकनी And चमकदार होती हैं, अन्य वस्तुओं की अपेक्षा बेहतर परावर्तन करती हैं। Single चिकनी And चमकदार सतह जो आपतित प्रकाश के अधिकतम भाग को परावर्तित कर देती है, ‘दर्पण’ कहलाती है।

 प्रकाश का परावर्तन
 प्रकाश का परावर्तन

चित्र में समतल दर्पण से प्रकाश के परावर्तन को दर्शाया गया है। प्रकाश किरण के परावर्तन की घटना को समझने के लिए हम कुछ Wordों को परिभाषित करते हैं।

प्रकाश के गमन की दिशा में Single प्रकाश पुंज में प्रकाश की कई किरणें समाहित होती हैं। परावर्तक तल (सतह) पर पड़नेवाली प्रकाश की किरण, आपतित किरण कहलाती है। परावर्तक तल के जिस बिन्दु पर आपतित किरण टकराती है, परावर्तक तल के उस बिन्दु से 90°C के कोण पर खींची गई रेखा अभिलम्ब कहलाती है। परावर्तक तल से वापस लौटनेवाली प्रकाश की किरण को, परावर्तित किरण कहते हैं। आपतित किरण And अभिलम्ब के बीच के कोण को ‘आपतन कोण’ तथा परावर्तित किरण And अभिलम्ब के बीच के कोण को ‘परावर्तन कोण’ कहते हैं।

प्रकाश के परावर्तन के नियम

माना कि कोई प्रकाश किरण (IO) परावर्तक तल AB के O बिन्दु पर गिरती है तथा परावर्तन के बाद यह चित्र के According OR दिशा में चली जाती है। सतह से प्रकाश का परावर्तन दो नियमों के According होता है –

  1. आपतित किरण, परावर्तित किरण And आपतन बिन्दु पर अभिलम्ब तीनों Single ही तल में होते हैं।
  2. आपतन कोण का मान परावर्तन कोण के मान के बराबर होता है।

∠i = ∠r

परावर्तन के दौरान प्रकाश की गति, आवृत्ति तथा तरंगदैध्र्य में कोई परिवर्तन नहीं होता है। प्रकाश के परावर्तन को ‘नियमित परावर्तन’ And ‘विसरित परावर्तन’ में वर्गीकृत Reseller जा सकता है।

नियमित परावर्तन 

जब परावर्तक तल बहुत ही चिकना होता है तथा इस पर पड़नेवाला प्रकाश सीधे ही परावर्तित हो जाता है, तो इसे ‘नियमित परावर्तन’ कहते हैं। जैसा कि चित्र में दिखाया गया है

नियमित परावर्तन
चिकने समतल पृष्ठ से नियमित परावर्तन

विसरित परावर्तनजब प्रकाश का परावर्तन किसी खुरदरे पृष्ठ (सतह) से होता है, तो चित्र के According प्रकाश परावर्तित होकर All दिशाओं में फैल जाता है। इसे ‘विसरित परावर्तन’ कहते हैं।

विसरित परावर्तन
 खुरदरे सतह पर आपतित किरणें समान्तर हों तो परावर्तित किरणें समान्तर नहीं होतीं 

विसरित परावर्तन में सतह के खुरदरे होने के कारण आपतित समानान्तर किरणों के आपतन बिन्दु पर खींचे गए अभिलम्ब समानान्तर नहीं होते हैं, इसलिए परावर्तित किरणें All दिशाओं में परावर्तित होती हैं, किन्तु परावर्तन के नियमों का पालन करती हैं।

परावर्तन के कारण प्रतिबिम्बों का बनना

आपने अब तक यह सीख लिया होगा कि किसी वस्तु अथवा प्रतिबिम्ब को देखने के लिए वस्तु से प्रकाश का प्रेक्षक की आँखों तक पहुँचना आवश्यक है। Meansात् किसी वस्तु अथवा बिम्ब से आनेवाला प्रकाश रेटिना पर पड़ना चाहिए जहाँ से दृक्-तंत्रिकाओं की सहायता से मस्तिष्क द्वारा संवेदित Reseller जाता है। जब किसी वस्तु से आनेवाली प्रकाश किरणें आँख के रेटिना पर मिलती हैं, अथवा मिलती हुई प्रतीत होती हैं, तब वह वस्तु हमें दिखाई देने लगती है, और हम कहते हैं कि रेटिना पर उस वस्तु का प्रतिबिम्ब बन गया है।

जब किसी वस्तु को किसी दर्पण के सामने रखा जाता है, तो परावर्तन द्वारा इसके प्रतिबिम्ब का निर्माण होता है। वस्तु का प्रत्येक बिन्दु Single बिन्दु-स्रोत के Reseller में कार्य करता है जिससे कई किरणें निकलती हैं। बिन्दु-स्रोत के प्रतिबिम्ब को निर्धारित करने के लिए यह माना जा सकता है कि बिन्दु-स्रोत से अनेक किरणें निकलती हैं। लेकिन सुगमता के लिए, हम (बिन्दु-स्रोत से शुरू होनेवाली) प्रकाश की कोई दो किरणें लेते हैं। दर्पण से परावर्तन होने का मार्ग Meansात संगत परावर्तित किरणें परावर्तन के नियमों के आधार पर अनुरेखित Reseller जा सकता है। वह बिन्दु जहाँ ये दोनों परावर्तित किरणें वास्तव में मिलती हैं, बिन्दु-स्रोत का ‘वास्तविक प्रतिबिम्ब’ है। यदि ये किरणें वास्तव में नहीं मिलती हैं तथा केवल ऐसा आभास होता है, तो बिन्दु-स्रोत का ‘आभासी प्रतिबिम्ब’ बनता है। वास्तविक प्रतिबिम्ब, परावर्तित-किरणों के वास्तविक प्रतिछेदन से प्राप्त होती है, अत: इन्हें पर्दे पर प्रक्षेपित Reseller जा सकता है। आभासी प्रतिबिम्ब, तब बनते हैं, जब किरणें Single-Second से मिलती प्रतीत होती हैं, लेकिन वास्तव में वे Single-Second को नहीं काटती हैं। अत: आभासी प्रतिबिम्ब को पर्दे पर प्राप्त नहीं Reseller जा सकता है।

प्रकाश का अपवर्तन

क्या आपने कभी पानी से भरे गिलास की तली में रखे सिक्के को देखा है? सिक्का इसकी वास्तविक गहराई से कम गहराई पर रखा दिखाई देता है। ऐसा क्यों होता है? प्रकाश की किरणें जहाँ मिलती हैं, अथवा वह बिन्दु जहाँ से प्रकाश आता हुआ प्रतीत होता है वहाँ हम Single प्रतिबिम्ब देखते हैं।

जब प्रकाश पानी से बाहर आता है, यह मुड़ जाता है जिसके कारण सिक्का चित्रा में दिखाए According ऊध्र्वाधरत: विस्थापित दिखाई देता है। क्या यह सदैव घटित होता है? नहीं। यह केवल तभी होता है जब प्रकाश की किरणें Single माध्यम से Second माध्यम में जाती हैं तथा अपने मार्ग से विचलित हो जाती हैं। प्रकाश का मुड़ना, माध्यमों के घनत्व पर निर्भर करता है।

प्रकाश का अपवर्तन
पानी से भरे गिलास में रखा सिक्का

जब प्रकाश की किरण सघन-माध्यम से विरल-माध्यम में जाती है, तो वह अभिलम्ब से दूर मुड़ती है। जब यह विरल-माध्यम से सघन-माध्यम में प्रवेश करती है, तो यह अभिलम्ब की ओर मुड़ती है। प्रकाश के मुड़ने की यह घटना ‘प्रकाश का अपवर्तन’ कहलाती है। चित्र में प्रकाश का अपवर्तन दिखाया गया है।

प्रकाश का अपवर्तन
प्रकाश का अपवर्तन

चित्र में प्रकाश अपने पथ से विचलित होता है लेकिन चित्र में यह अपने पथ से विचलित नहीं होता है। क्या यह अपवर्तन है अथवा नहीं? निश्चित Reseller से यह अपवर्तन है। अभिलम्ब के समानान्तर आपतित प्रकाश की किरणें अपने मार्ग से विचलित नहीं होती है। अपवर्तन के दौरान प्रकाश की आवृत्ति अपरिवर्तित रहती है, लेकिन इसकी तरंगदैध्र्य बदल जाती है And इसी कारण प्रकाश की चाल भी बदल जाती है।

अपवर्तन के नियम

जब प्रकाश की किरण Single माध्यम से Second माध्यम में प्रवेश करती है, तो वह अपने मार्ग से विचलित हो जाती है। प्रकाश की किरण का अपने मार्ग से विचलन माध्यम के अपवर्तनांक And आपतन कोण पर निर्भर करता है। अपवर्तन के नियम हैं –

  1. अपवर्तन का First नियम : आपतित-किरण, अपवर्तित-किरण And अभिलम्ब तीनों Single ही तल में होते हैं। 
  2. अपवर्तन का द्वितीय नियम : प्रकाश की किरणों का अपवर्तन कितना होगा यह माध् यम पर निर्भर करता है। अपवर्तन के समय आपतन-कोण की ज्या (sine) And अपवर्तन कोण की ज्या (sine) का अनुपात किन्हीं दो माध्यमों के लिए स्थिर रहता है। इस राशि को First माध्यम के सापेक्ष, Second माध्यम का अपवर्तनांक कहते हैं। इसे ‘‘स्नैल का नियम’’ भी कहते हैं। 

आपतन कोण की ज्या 

अपवर्तनांक (n) =  ——————–                              

अपवर्तन कोण की ज्या क्या 

या

sin i

n=———–

sin r

अपवर्तन के दौरान प्रकाश का रंग बदल जाता है : प्रकाश की तरंगदैध्र्य And आवृत्ति, प्रकाश की चाल से, समीकरण ν = νλ के According सम्बन्धित होती है। जहाँ ν = प्रकाश की आवृत्ति And λ = प्रकाश का तरंगदैध्र्य है।

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