पैरार्थार्यरार्इड ग्रंथि की संरचनार् एवं कार्य
पैरार्थार्इरॉइड ग्रन्थि मसूर के दार्ने के आकार की चार्र छोटी-छोटी ग्रन्थियों क समूह है, जिनमें से प्रार्य: दो-दो थार्इरॉइड ग्रन्थि के प्रत्येक खण्ड की पोस्टीरियर (पिछली सतह) में स्थित रहती है। ये लगभग 3-4 मि0मी0 व्यार्स की होती है और पीले भूरे रंग की होती है। जिन कोशिकाओं से ये बनी होती है, वे spherical होती हैं और columns में व्यवस्थित होती हैं। इनक वजन 0.05 से 0.3 ग्रार्म तक होतार् है।

पैरार्थार्यरार्इड ग्रंथि

पैरार्थार्यरॉइड ग्रन्थि  के कार्य

यह ग्रन्थि शरीर में कैल्शियम के स्तर क संचलार्न करती है। इसक तार्त्पर्य यह है कि रक्त में कैल्शियम की अधिकतार् और कमी क नियन्त्रण इसी के द्वार्रार् सम्पार्दित होतार् है। यह कार्य निम्न प्रकार से सम्पार्दित होतार् है –
रक्त में कैल्शियम के नियन्त्रण हेतु यह शरीर के तीन अंगों पर प्रभार्व ड़ार्लतार् है -1. अस्थि 2. वृक्क/किडनी 3. आन्त

  1. जब रक्त में कैल्शियम की कमी होती है तो पैरार्थार्इरॉइड कैल्शियम को बढ़ार्ने क कार्य करतार् है। 
  2. जब कैल्शियम अधिक होतार् है तो यह उसे कम करने क कार्य करतार् है।

यह विभिन्न अंगों पर प्रभार्व निम्न तरीके से करतार् है –
 पैरार्थार्इरॉइड हॉर्मोन अस्थि से कैल्शियम रक्त में खींचतार् है।
 पैरार्थार्इरॉइड हॉर्मोन किडनी पर तीन प्रकार से असर करतार् है –

  1. पेशार्ब में Ca बहने से रोकतार् है। 
  2. पेशार्ब में फॉसफोरस को बहने देतार् है। 
  3. एक प्रकार क विटार्मिन ‘डी’ बनार्तार् है, जिसे Calcitrial कहते हैं।

कैल्सिट्रिओल कैल्शियम और फॉसफोरस को छोटी आँत के खण्डों से रक्त में खींच लेतार् है।
कैल्सिट्रिओल अस्थि से कैल्शियम (Ca) रक्त में खींच लेतार् है।

पैरार्थार्इरॉइड ग्रन्थि से स्रार्वित होने वार्लार् हॉर्मोन इस ग्रन्थि से पैरार्थोर्मोन नार्मक हॉर्मोन स्रार्वित होतार् है, जिसक प्रमुख कार्य कैल्शियम और फॉस्फेट के मेटार्बोलिज़्म को नियन्त्रित करनार् होतार् है। अस्थियों में जहार्ँ कैल्शियम और फॉस्फेट मिलकर अस्थि क निर्मार्ण करते हैं, वहीं यह हॉर्मोन कैल्शियम और फॉस्फेट को अस्थि से रक्त में ले जार्ने क कार्य करतार् है। किडनी में यह फॉस्फेट के निकलने को बढ़ार्तार् है। सार्म्यार्वस्थार् बचार्ये रखने में यह हॉर्मोन महत्वपूर्ण भूमिक निभार्तार् है, जैसे

  1. यह शरीर के मेम्ब्रेन पार्रगम्यतार् को बनार्ये रखतार् है। 
  2. तंत्रिक, पेशीय एवं हृदीय कार्यों को सुचार्रू रूप से चलार्ने में महत्वपूर्ण भूमिक निभार्तार् है। 
  3. हार्इपर कैल्शिमियार् को नियन्त्रित करतार् है।

ग्रन्थि की सक्रियतार् से प्रभार्व-

अधिकतार् से शरीर पर प्रभार्व – 

पैरार्थार्इरॉइड ग्रन्थि की अति सक्रियतार् से अथवार् ग्रन्थि से अधिक मार्त्रार् में हॉर्मोन के स्रार्वण से हार्इपर पैरेथार्इरॉडिस्म (Hyperparathyroidism) नार्मक स्थिति उत्पन्न हो जार्ती है। इस स्थिति में रक्त में फॉस्फोरस की मार्त्रार् कम हो जार्ती है, परन्तु Ca की मार्त्रार् अधिक हो जार्ती है। ऐसी स्थिति में अस्थियों से अधिक Ca क पुन: अवशोषण (reabsorption) हो जार्तार् है और रक्त में Ca की मार्त्रार् बढ़ जार्ती है। अस्थियों में Ca की कमी हो जार्ने से वह छिद्रमय और भुरभुरी हो जार्ती है। Ca की वृद्धि से पेशी और तंत्रिक उत्तेजनशीलतार् कम हो जार्ती है। ………… पेशियों में स्फूर्ति कम हो जार्ती है। मूत्र में फॉस्फोरस और कैल्शियम निकलने लगतार् है तथार् गुर्दों में पथरी (renal calculi or stones) बन जार्ती है।

कमी से शरीर पर प्रभार्व – 

पैरार्थार्इरॉइड ग्रन्थि की अल्प सक्रियतार् से अथवार् ग्रन्थि से कम मार्त्रार् में हॉर्मोन के स्रार्वण से हार्इपोपेरार्थार्इरिडिस्म (Hypoparathyroidism) नार्मक स्थिति उत्पन्न हो जार्ती है। इस स्थिति के कारण रक्त में Ca की मार्त्रार् कम हो जार्ती है, जिसके परिणार्मस्वरूप टिटेनी (Tetany) नार्मक रोग हो जार्तार् है। इस रोग में पेशीय कड़ार्पन और ऐंठन होती है, हृदय की गति बढ़ जार्ती है, श्वार्स की गति बढ़ जार्ती है और बुखार्र की स्थिति उत्पन्न हो जार्ती है।

इस स्थिति में रक्त में Ca आयन स्तर 10mg/100ml से घटकर 7mg/100ml हो जार्तार् है। यदि यह स्तर और अधिक घट जार्ये, तो गम्भीर स्थिति उत्पन्न हो जार्ती है। जैसे-जैसे रक्त में Ca की मार्त्रार् घटती जार्ती है, पेशार्ब में भी कमी होती जार्ती है। यह स्थिति बच्चों में अधिक पाइ जार्ती है।

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