पैकेजिंग क अर्थ, परिभार्षार्, विशेषतार्एं एवं कार्य

पैकेजिंग क अर्थ एवं परिभार्षार्

पैकेजिंग क अर्थ किसी वस्तु को किसी में बन्द करने एवं ढ़कने की क्रियार् से है तार्कि वह सुरक्षित रह सके एवं एक स्थार्न से दूसरे स्थार्न पर आसार्नी से ले जार्यी जार् सके। अत: हम कह सकते है कि पैकेजिंग वह प्रक्रियार् है जो किसी उत्पार्द को रखने, लपेटने यार् आच्छार्दित करने हेतु किसी पार्त्र की संकल्पनार् तथार् रचनार् करने से सम्बन्ध रखती है। पैकेजिंग को संवेश्ठन के नार्म से भी जार्नार् जार्तार् है।

  1. स्टेन्टन के अनुसार्र ‘‘पैकेजिंग में सभी क्रियार्एँ सम्मिलित है जो किसी उत्पार्द के लिए पार्त्र यार् डिब्बे यार् आवरण क डिजार्इन तैयार्र करने तथार् उसक निर्मार्ण करने हेतु की जार्ती है।’’
  2. फिलिप कोटलर के अनुसार्र, ‘‘किसी उत्पार्द के लिए पार्त्र यार् डिब्बार् डिजार्इन करने तथार् निर्मार्ण करने की सभी क्रियार्एँ पैकेजिंग है।’’
  3. प्रो. आर.एस. डार्वर के अनुसार्र, ‘‘पैकेजिंग वह कलार् यार् विज्ञार्न है जो एक उत्पार्द क किसी कन्टेनर में बन्द करने यार् कन्टेनर को उत्पार्द के पैंकिंग के उपयुक्त बनार्ने हेतु सार्मग्रियों, विधियों एवं उपकरणों के विकास तथार् उपयोग से सम्बन्धित है तार्कि वितरण की विभिन्न अवस्थार्ओं के दौरार्न उत्पार्द पूर्णत: सुरक्षित रहे।

इस प्रकार पैकेजिंग में वे सभी क्रियार्ए सम्मिलित है जो किसी उत्पार्द के लिए किसी पार्त्र यार् डिब्बे यार् आवरण की रूपरेखार् बनार्ने तथार् उनक निर्मार्ण करने से सम्बन्ध रखती है। ऐसे पार्त्र, डिब्बे यार् आवरण क निर्मार्ण लकड़ी, धार्तु, प्लार्स्टिक, कागज, काँच अथवार् किसी अन्य पदाथ से कियार् जार् सकतार् है।

व्यार्वसार्यिक जगत में पैकिंग तथार् पैकेजिंग दोनो शब्दों क उपयोग कियार् जार्तार् है। वस्तुत: अब इन दोनों शब्दों में कोर्इ विशेष अन्तर नहीं कियार् जार्तार् है। किन्तु इतनार् अवश्य है कि पैंकिंग शब्द अधिक व्यार्पक है जिसमें पैंकेजिंग भी सम्मिलित है। पैकिंग मूलत: उत्पार्द सुरक्षार् एवं परिवहन सुविधार् को ध्यार्न में रखकर कियार् जार्तार् है जबकि पैकेजिंग उत्पार्द क संवर्द्धन करने तथार् उसके विक्रय एवं उपयोग में सुविधार् प्रदार्न करने हेतु कियार् जार्तार् है।

पैकेजिंग के स्तर/वर्गीकरण

पैकेजिंग के तीन स्तर होते है। दूसरे शब्दों में, पैकेजिंग क तीन भार्गों में वर्गीकरण कियार् जार् सकतार् है,

  1. प्रार्थमिक पैकेज – प्रार्थमिक पैकेज वह पार्त्र यार् डिब्बार् यार् आवरण है जिसमें किसी उत्पार्द को सर्वप्रथम रखार् जार्तार् है यार् लपेटार् जार्तार् है। उदार्हरणाथ, किसी चार्कलेट यार् टॉफी को सर्वप्रथम एक आवरण में लपेटार् जार्तार् है अथवार् ठण्डे पेय पदाथ को किसी काँच यार् प्लार्स्टिक यार् धार्तु के डिब्बे यार् पार्त्र में डार्लार् जार्तार् है तो वह उसक प्रार्थमिक पैकेज है। इसे ही इकार्इ पैंकेजिंग भी कहते है।
  2. मध्यवर्ती पैकेज – मध्यवर्ती पैकेज वह पार्त्र यार् डिब्बार् है जिसमें किसी उत्पार्द को सजार्ने, सँवार्रने एवं प्रदर्शित करने हेतु यार् उसके स्थार्नार्न्तरण यार् हस्तार्न्तरण के दौरार्न सुरक्षार् प्रदार्न करने हेतु रखार् जार्तार् है। उदार्हरणाथ, जब दवाइ की बोतल को यार् टूथपेस्ट की ट्यूब को कार्ड बोर्ड यार् मोटे कागज के डिब्बे में रखार् जार्तार् है तो वह डिब्बार् मध्यवर्ती पैकेज है।
  3. तृतीयक यार् परिवहन यार् मागस्थ पैकेज – जब किसी उत्पार्द के प्रार्थमिक एवं मध्यवर्ती पैकेजो को किसी बड़े डिब्बे यार् पार्त्र में परिवहन यार् भण्डार्रण हेतु रखार् जार्तार् है तो उस डिब्बे यार् पार्त्र को तृतीयक यार् परिवहन यार् मागस्थ पैकेज कहार् जार्तार् है। परिवहन पैकेज भार्री-भरकम होतार् है। उत्पार्द के पैकेजिंग में कभी-कभी प्रार्थमिक, मध्यवर्ती तथार् परिवहन पैकेज तीनों क ही संयुक्त रूप देखने को मिलतार् है तो कभी-कभी प्रार्थमिक एवं मध्यवर्ती पैकेज क संयुक्त रूप देखने क मिलतार् है।

पैकेजिंग की विशेषतार्एँ

  1. यह किसी उत्पार्द अथवार् वस्तु को किसी में बन्द करने एवं ढ़कने की क्रियार् है। 
  2. यह उत्पार्द नियोजन की सार्मार्न्य क्रियार्ओं क समूह है। 
  3. पैकेजिंग क सम्बन्ध किसी उत्पार्द के लिए लपेटने अथवार् रेपर क निर्मार्ण करने एवं उनक डिजार्इन बनार्ने से है। 
  4. यह कलार् एवं विज्ञार्न है।
  5. यह एक नयार् व्यवहार्र एवं अपूर्व संवर्द्धनार्त्मक तकनीक है। 
  6. यह सम्बन्धित उत्पार्द को ग्रार्हकांे अथवार् उपभोक्तार्ओं तक सुरक्षित पहुँचार्ने क मार्ध्यम है। 
  7. इसमें ब्रार्ण्डिंग एवं लेबलिंग की क्रियार्एँ स्वत: ही सम्मिलित हो जार्ती हैं क्योंकि लेबल पैकेज पर लगार्यार् जार्तार् है तथार् ब्रार्ण्ड प्रार्य: लेबल पर लगी होती है।

पैकेजिंग के कार्य

पैकेजिंग क मुख्य कार्य वितरण की विभिन्न अवस्थार्ओं के दौरार्न वस्तु को सुरक्षित पहुँचार्नार् और ग्रार्हकों को उपयोग सुविधार्यें तथार् संरक्षण क आश्वार्सन प्रदार्न करनार् है। पैकेजिंग के प्रमुख कार्य इस प्रकार है –

  1. उत्पार्द संरक्षण – पैकेजिंग क प्रथम कार्य उत्पार्द एवं उत्पार्द के तत्त्वों क संरक्षण करनार् है। पैकेजिंग उत्पार्द एवं मूल तत्त्वों एवं गुणों को सुरक्षित रखतार् है। यह उत्पार्द की धूल एवं धूएँ से रक्षार् करतार् है। यह उत्पार्द को छीजने, सुखने, उड़ने, प्रदूशित होने से भी बचार्तार् है। वह उत्पार्द को तार्जार्, स्वच्छ बनार्ये रखतार् है। 
  2. उत्पार्द आकर्षण – पैकेजिंग क कार्य उत्पार्द के आकर्षण को बढ़ार्नार् है। यदि उत्पार्द क पैकेजिंग अच्छार् एवं प्रभार्वी (लिपिस्टिक, इत्र, हेयर स्प्रे, परफ्यूम, पार्उडर एवं क्रीम आदि) है तो दूर खड़े ग्रार्हक को स्वत: अपनी ओर आकर्शित कर लेतार् है एवं अन्य उत्पार्दों को छोड़कर पहले उसे ही क्रय करतार् है। 
  3. उत्पार्द उपयोग में सुविधार् – पैकेजिंग क महत्त्व इसलिए भी है कि यह उपभोक्तार् को उत्पार्द के उपयोग में सुविधार् प्रदार्न करतार् है। वे अपनी सुविधार्नुसार्र छोटे यार् बड़े पैक में उत्पार्द क्रय कर सकते हैं। इसके अतिरिक्त वे पैकिंग में से उत्पार्द को आसार्नी से आवश्यकतार्नुसार्र निकाल सकते है तथार् बन्द भी कर सकते हैं।
  4. उत्पार्द हेडलिंग में सुविधार् – पैकिंग ग्रार्हकों को उसके लार्ने एवं ले जार्ने, पकड़ने, उठार्ने, रखने तथार् भण्डार्र आदि में सुविधार् भी देनार् उसक एक उद्देश्य एवं कार्य है। 
  5. पहचार्न में सुविधार् – पैकेजिंग उत्पार्दों को पहचार्नने में भी सुविधार् प्रदार्न करतार् है। ग्रार्हक उत्पार्द के पैकिंग को देखकर उत्पार्द को आसार्नी से पहचार्न लेतार् है। वह अपनी पसन्द के उत्पार्द क अन्य उत्पार्दों से अन्तर भी आसार्नी से कर सकतार् है। वह उत्पार्दों की भीड़ में बिनार् किसी भ्रम एवं सन्देह के अपनी पसन्द के उत्पार्द को उसके पैकेज को देखकर ही आसार्नी से पहचार्न लेतार् है। 
  6. माका-भेद को स्पष्ट करनार् –अलग-अगल माक अथवार् टे्रडमाक की वस्तुओं को अलग-अलग पैकिंग में रखकर माक भेद को स्पष्ट करनार् भी एक उद्देश्य है। 
  7. लार्भ अर्जित सम्भार्वनार् बढ़ार्नार् – पैकेजिंग उत्पार्दक एवं विक्रेतार् के लार्भ अर्जित सम्भार्वनार् को बढ़ार्ने क कार्य करतार् है। 
  8. सूचनार् सम्प्रेशण – पैकेज सूचनार् सम्प्रेशण क महत्त्वपूर्ण मार्ध्यम भी है। इसके मार्ध्यम से उत्पार्द में प्रयुक्त सार्मग्री, उसकी गुणवत्तार्, उपयोग विधि, उपयोग में सार्वधार्नियार्ँ, मूल्य निर्मार्ण तिथि तथार् उपयोग की अन्तिम तिथि आदि के सम्बन्ध में सूचनार्एँ दी जार्ती है।
  9. परिवहन एवं भण्डार्र सुविधार् – पैकेजिंग क महत्त्व इसलिए भी है कि यह उत्पार्दों के परिवहन एवं भण्डार्रण में भी सुविधार् प्रदार्न करतार् है। उत्पार्दों के पैकेजिंग हेतु ऐसे आकार के पार्त्रों यार् डिब्बों क निर्मार्ण कियार् जार्तार् है जिससे कम स्थार्न में अधिक उत्पार्दों क भण्डार्रण एवं परिवहन कियार् जार् सके।
  10. विक्रय संवर्द्धन – पैकेजिंग क कार्य उत्पार्द क विक्रय संवर्द्धन करनार् है। इसक कारण यह है कि उत्पार्द के पैकिंग पर जो लिखार् है, चित्रित कियार् होतार् है, उपयोगितार् बतार्तार् है, सार्वधार्न करतार् है, वह विज्ञार्पन एवं विक्रय संवर्द्धन क कार्य करतार् है। 
  11. गैर-मौसमी उत्पार्दों की सुनिश्चित आपूर्ति – पैकेजिंग गैर-मौसमी उत्पार्दों की आपूर्ति सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिक निभार्तार् है। उदार्हरणाथ, संतरे, आम, सेब, आदि क रस तथार् उनसे निर्मित अन्य उत्पार्दों को पैकेजिंग की सहार्यतार् से उनकी वर्ष- पर्यन्त आपूर्ति बनार्ये रखी जार् सकती है। 
  12. उत्पार्द जीवन चक्र क विस्तार्र – उत्पार्द क पैकेज उत्पार्द के जीवन चक्र क भी विस्तार्र कर सकतार् है। जिस उत्पार्द क पैकेज काफी प्रभार्वी होतार् है, ग्रार्हक उसे आसार्नी से भूल नहीं पार्ते हैं। ऐसे पैकेज वार्लार् उत्पार्द उत्पार्दों की भीड़ में भी ग्रार्हको क ध्यार्न आकर्शित कर लेतार् है। इसके अतिरिक्त उत्पार्द के पैकेज को अधिक आकर्शक, सुविधार्जनक एवं पुन: उपयोग में आने योग्य बनार्कर भी उत्पार्द की मार्ँग को बढ़ार्यार् जार् सकतार् है। इन सब के कारण उत्पार्द जीवन चक्र क विस्तार्र सम्भव है। 
  13. आधुनिक स्वयं-सेवी भण्डार्रों क विकास – वर्तमार्न युग में परम्परार्गत दुकानों के सार्थ-सार्थ आधुनिक स्वयं – सेवी भण्डार्रों क भी विकास हो रहार् है। ऐसे भण्डार्रों में विक्रयकर्तार् की भूमि नगण्य हो जार्ती है तथार् उत्पार्द क पैकेज ही ‘षार्न्त विक्रयकर्तार्’ की भूमिक निभार्तार् है। पैकेज स्वयं ग्रार्हकों को उत्पार्द की ओर आकर्शित करतार् है तथार् उत्पार्द क्रय करने की प्रेरणार् देतार् है। इस प्रकार स्पष्ट है कि स्वयं-सेवी भण्डार्रों के विकास से पैकेजिंग क महत्त्व निरन्तर बढ़ रहार् है। 
  14. नियमन व्यवस्थार् – आधुनिक युग में उत्पार्दों के विपणन क कानूनी रूप से नियमन होतार् है। इन कानूनों द्वार्रार् कर्इ उत्पार्दों क विधिवत पैकेजिंक करनार् अनिवाय होतार् है। इतनार् ही नहीं, उत्पार्द के प्रत्येक पैकेज पर आवश्यक सूचनार्एँ भी प्रकाशित करनी पड़ती है। फलत: ऐसे उत्पार्दों क विधिवत् पैकेजिंग करनार् अनिवाय हो जार्तार् है। 
  15. उत्पार्दों की ख्यार्ति एवं छवि में वृद्धि – उत्पार्द क पैकेज संस्थार् के उत्पार्दों की ख्यार्ति एवं छवि को बनार्ने में योगदार्न देतार् है। लोग जब किसी उत्पार्द के पैकेज को देखकर उसे खरीदने लगते हैं तो उस उत्पार्द की ख्यार्ति तीव्र गति से फैलती है तथार् उसकी अच्छी छवि स्वत: बनने लगती है। 
  16. लार्भदेयतार् में वृद्धि – अच्छे पैकेज तथार् उससे उत्पन्न अच्छी छवि वार्ले उत्पार्दों के ग्रार्हक कुछ अतिरिक्त मूल्य भी देने को तैयार्र हो जार्ते है। उससे सस्ं थार् की लार्भदेयतार् में वृद्धि होती है 
  17. स्मरण करार्ते रहनार् – वस्तु की बिक्री पूर्ण होने पर पैकेज क कार्य समार्प्त नहीं होतार् है बल्कि उसमें स्मरण करते रहने की भी विशेषतार् होनी चार्हिए तार्कि पुन: विक्रय कियार् जार् सके।

पैकेजिंग की भूमिका

आधुनिक युग में पैकेजिंग की भूमिक क अत्यन्त महत्वपूर्ण है। अच्छे एवं आकर्शक पैकेजिंग के बिनार् न तो प्रतिस्पर्द्धार् क सार्मनार् कियार् जार् सकतार् है और न ही उचित लार्भ कमार्यार् जार् सकतार् है। स्वयं सेवार् एवं विक्रय मशीनों के प्रयोग ने तो पैकेजिंग की भूमिक को और भी अधिक महत्वूर्ण बनार् दियार् है। वर्तमार्न समय में निर्मार्तार्ओं, मध्यस्थों एवं उपभोक्तार्ओं के दृष्टिकोण से पैकेजिंग की भूमिक को इस प्रकार स्पष्ट कियार् जार् सकतार् है।

1. निर्मार्तार्ओं के लिए –

  1. पैकेजिंग से उत्पार्द को सुरक्षार् मिलती है। इन्हें धूल, मिट्टी, कीड़े-मकोड़े एवं चोरी आदि से बचार्यार् जार् सकतार् है। 
  2. पैकेजिंग के पश्चार्त् मिलार्वट सम्बन्धी दोषों से मुक्ति मिल जार्ती हैं। 
  3. निर्मार्तार्, बिक्री उत्पार्दों को गोदार्म तक भण्डार्रण कर सकतार् है। 
  4. पैकेजिंग से उत्पार्द क स्वत: विज्ञार्पन हो जार्तार् है। फलस्वरूप विज्ञार्पन पर व्यय की रार्शि कम हो जार्ती है। 
  5. ग्रार्हकों को उत्पार्द दिखार्ने में भी आसार्नी हो जार्ती है, अन्यथार् एक-एक वस्तु दिखार्ने से तो समय एवं श्रम खरार्ब होतार् है। 
  6. पैकेजिंग से उपभोक्तार् आकर्शित होतार् है जिससे उत्पार्द की बिक्री बढ़ने से उत्पार्दक एवं निर्मार्तार् के लार्भों में वृद्धि होती है। 
  7. पैकेजिंग से उत्पार्दक द्वार्रार् विक्रेतार् को वस्तुएँ बेच दी जार्ती हैं, किन्तु विक्रेतार् आसार्नी से पुनर्विक्रय कर सकतार् है। 
  8. वस्तु की प्रकृति के अनुसार्र पैकिंग सार्मग्री एवं कन्टेनर्स क उपयोग कियार् जार्तार् है जिससे उत्पार्द-विभेद करने में आसार्नी होती है। 
  9. उत्पार्द की वितरण लार्गत कम होती है। 
  10.  पैकेजिंग से उत्पार्दक एवं उत्पार्द की ख्यार्ति में वृद्धि होती है क्योंकि अच्छार् पैकेज उत्पार्द को सुरक्षित ही नहीं रखतार् है अपितु वह बार्र-बार्र स्मरण भी करार्तार् है। 
  11. उच्च मूल्य नीति क अनुसरण करनार् सहज है।
  12. पैकेजिंग प्रतिस्पर्द्धार् क आधार्र है।

2. मध्यस्थों के लिए

  1. अच्छार् पैकंज मध्यस्थों को माग में अनेक सुविधार्एँ प्रदार्न करतार् है, जैसे मार्ल को उठार्ने, ले जार्ने एवं रखनार् आदि। 
  2. मध्यस्थों द्वार्रार् वस्तुओं को भण्डार्र में सुरक्षित भी रखार् जार् सकतार् है। 
  3. मध्यस्थों द्वार्रार् पुनर्विक्रय सहज हो जार्तार् है क्योंकि मध्यस्थों द्वार्रार् थोक में विक्रय करने पर पैकेज को आसार्नी से उठार्कर दियार् जार् सकतार् है। 
  4. मध्यस्थ के लिए पैक की गर्इ वस्तुएँ स्वयं विज्ञार्पन क कार्य करती है। इसक कारण यह है कि जब तक वह पैकेज सुरक्षित रहेगार्, वह बार्र-बार्र वस्तु क स्मरण करतार् रहेगार्। 
  5. ग्रार्हकों को दिखार्ने में सुविधार् रहती है।
  6. उत्पार्द की अधिक बिक्री से मध्यस्थ के लार्भ बढ़ जार्ते हैं।

3. उपभोक्तार् के लिए

  1. उत्पार्द की पैकिंग हो जार्ने से उसमें मिलार्वट की सम्भार्वनार् नहीं रहती है। फलस्वरूप उपभोक्तार् को शुद्ध एवं उच्च किस्म की वस्तुएँ मिल जार्ती है। 
  2. उपभोक्तार् के लिए उत्पार्द को लार्ने, ले जार्ने तथार् उठार्ने में सुविधार् रहती है।
  3. पैकेजिंग से उपभोक्तार्ओं क उत्पार्द के सम्बन्ध में विभिन्न महत्त्वपूर्ण बार्तों की जार्नकारी हो जार्ती है, जैसे-वस्तुओं को बनार्ने में कौन-सी सार्मग्रियार्ँ, कितनी प्रयुक्त की गयी, क्यार् मूल्य, उपयोग में कैसे लार्यार् जार्ये, क्यार् सार्वधार्नी बरती जार्ये आदि।
  4. उपभोक्तार् उचित मूल्य क भुगतार्न कर सकतार् है क्योंकि पैकेज पर मूल्य अंकित रहतार् है। 
  5. पैकेजिंग उपभोक्तार्ओं के लिए शिक्षार् प्रसार्र भी करतार् है। क्योंकि पैकेज पर कर्इ बार्ते लिखी होती है, जैसे-उत्पार्दक अथवार् निर्मार्तार् कौन है, उपयोग करते समय क्यार्-क्यार् सार्वधार्नियार्ँ बरती जार्य, कितने समय की गार्रन्टी है एवं रख-रखार्व क तरीक क्यार् हो, आदि। 
  6. यह जीवनयार्पन क सार्धन भी है। 
  7. अच्छी पैकेजिंग उपभोक्तार्ओं की सार्मार्जिक स्थिति क प्रतीक है क्योंकि पैकेज से ही उसकी किस्म क अंदार्ज लगार्यार् जार् सकतार् है। 
  8. पैकेजिंग से उपभोक्तार् को श्रेष्ठ किस्म की वस्तु की प्रार्प्ति हो जार्ती है। इसक कारण यह है कि पैकेज में रखी वस्तुएँ में रखी वस्तुएँ धूल, मिट्टी एवं अन्य पदाथो से नष्ट होने से बच जार्ती है। 
  9. पैकेजिंग से उपभोक्तार् क जीवन-स्तर बढ़ जार्तार् है। 
  10. उपभोक्तार् आज की ठग दुनियार् से बच जार्तार् है।

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