पार्ठकों की पुस्तकों के संबंध में सभी प्रश्नों क उत्तर देने के लिए किन किन बार्तों क ध्यार्न रखनार् आवश्यक है?

पार्ठकों की पुस्तकों के संबंध में सभी प्रश्नों क उत्तर देने के लिए किन किन बार्तों क ध्यार्न रखनार् आवश्यक है? 

तो संदर्भ सहार्यक उनके बार्रे में सही सूचनार् पार्ठकों को देने में असमर्थ रहेगार् । कभी-कभीपार्ठक सूक्ष्म से सूक्ष्म विषयों की जार्नकारी चार्हतार् है इसलिए वर्गीकरण पद्धति ऐसी होनी चार्हिए जिससे सूक्ष्म से सूक्ष्म विषयों को विश्लेषित करके उनके बार्रे में सही जार्नकारी देने में सक्षम हो। कभी कभी पार्ठकों द्वार्रार् ऐसे प्रश्न पूछे जार्ते हैं जिनक उत्तर किसी एक पुस्तक से देनार् संभव नहीं होतार् है इसलिए एक विषय पर अनेक पुस्तकों को देखनार् आवश्यक होतार् है । वर्गीकरण जितनार् अच्छार् होगार् उतनी ही सूक्ष्म से सूक्ष्म विषयों र्को जार्नकारी मिल सकेगी । अच्छी वर्गीकरण पद्धति में पक्ष विश्लेषण (facet analysis) क प्रार्वधार्न होनार् जरूरी होतार् है। इस प्रकार से वर्गीकरण तथार् संदर्भ सेवार् में घनिष्ठ संबध है । एक दूसरे की सहार्यतार् से संदर्भ सेवार् प्रदार्न करनार् सुगम होगार् ।
प्रसूची पुस्तकालय की कुंजी कही गयी है | किसी विषय पर कौन कौन सी पुस्तकें पुस्तकालय में उपलब्ध हैं । किसी लेखक द्वार्रार् लिखित तथार् किसी लेखक के ऊपर लिखित कौन-कौन सी पुस्तकें हैं अथवार् किसी संपार्दक, अनुवार्दक, संकलनकर्तार् द्वार्रार् सम्पार्दित, अनुवार्दित तथार् संकलित कौन-कौन सी पुस्तकें पुस्तकालय में है । इसी प्रकार किसी पुस्तकमार्लार् (series) की कौन सी पुस्तकें हैं इन सभी बार्तों की जार्नकारी पुस्तकालय प्रसूची द्वार्रार् प्रार्प्त होती है |

अच्छी वर्गीकरण पद्धति

पार्ठकों की पुस्तकों के संबंध में सभी प्रश्नों क उत्तर देने के लिए यह आवश्यक है कि पुस्तकालय में प्रार्प्त होने वार्ली सभी प्रकाशनों की प्रसूची समय से तैयार्र कर ली जार्ये जिससे पार्ठकों को किसी लेखक, आख्यार्, विषय, सम्पार्दक, अनुवार्दक और पुस्तकमार्लार् संबंधी प्रश्नों क सही सही एवं शीघ्रतार् से उत्तर दियार् जार् सके । संदर्भ सहार्यक को प्रसूची के व्यवस्थार्पन (arrangements) संबंधी ज्ञार्न होनार् चार्हिए | प्रसूची बनार्ते समय इस बार्त क विशेष ध्यार्न दियार् जार्नार् चार्हिए कि ऐसी पुस्तकों के बार्रे में भी सूचनार् प्रदार्न करे जिससे एक से अधिक विषयों क प्रतिपार्दन होतार् है । ऐसी व्यवस्थार् में प्रसूची द्वार्रार् वर्गीकरण की सहार्यतार् की जार्ती है । इससे पार्ठकों की विषय संबधी मार्गों की पूर्ति होतार् है । पुस्तकालय प्रसूची जितनी सक्षम होगी संदर्भ सेवार् प्रदार्न करने में आसार्नी रहेगी । तथार् संदर्भ अनुभार्ग उससे लार्भार्न्वित होगार् । इस प्रकार से अच्छी संदर्भ सेवार् प्रदार्न करने के लिए पुस्तकालय प्रसूची की सहार्यतार् लेनार् आवश्यक हो जार्तार् है।

3.3 पुस्तकालय संगठन . संचार्लन अनुभार्ग और संदर्भ अनुभार्ग

किसी पुस्तकालय द्वार्रार् अच्छी से अच्छी सेवार् प्रदार्न करने के लिए अनेक बार्तें आवश्यक हैं पुस्तकालय क भवन अच्छार् होनार् तथार् कुशल कर्मचार्री, आवश्यक पुस्तकें, तथार् पत्र पत्रिकाओं क होनार् नितार्न्त आवश्यक है । इसके सार्थ ही पुस्तकालय की व्यवस्थार् उपयुक्त होनार् आवश्यक है । जिससे पार्ठकों की आवश्यकतार्ओं की पूर्ति सुगमतार् से होगी । पुस्तकालय जितनार् ही व्यवस्थित एवं संगठित होगार् पार्ठकों को उतनार् ही लार्भ मिलेगार् | पार्ठक पुस्तकालय के प्रति आकर्षित होगार् तथार् वह बार्र-बार्र पुस्तकालय में आनार् चार्हेगार् । पुस्तकालय में संदर्भ अनुभार्ग किस स्थार्न पर है, प्रसूची सरलतार् से देखी जार् सकती है अथवार् नहीं, पुस्तकालय में खुली प्रणार्ली है अथवार् नहीं, पार्ठकों द्वार्रार् मार्ंग करने पर क्यार् फोटो कॉपी दिलार्ने की व्यवस्थार् है अथवार् नहीं । इन सभी बार्तों से संदर्भ सेवार् निश्चित रूप से प्रभार्वित होती है । अत: ये सभी व्यवस्थार्यें यदि पुस्तकालय में है तो निश्चित रूप से वहार्ं संदर्भ सेवार् प्रदार्न करने में आसार्नी होगी तथार् उसे सफल बनार्यार् जार् सकेगार्।

3.4 प्रलेखन अनुभार्ग और संदर्भ अनुभार्ग

ज्ञार्न और विज्ञार्न में चौमुखी विस्तार्र हो रहार् है । एक ही विषय पर अनेकानेक प्रकाशन विभिन्न भार्षार्ओं में प्रतिदिन प्रकाशित हो रहार् है । इसलिए इस विषय पर सभी प्रकाशित सार्मग्रियों क चयन, संकलन, वर्गीकरण प्रसूचीकरण सार्रार्ंशीकरण अनुक्रमणिकरण और एक भार्षार् से दूसरी भार्षार् में अनुवार्द कार्य इत्यार्दि कुछ ऐसे कार्यों क प्रलेखन कार्य कहार् गयार् है । उपरोक्त सभी कार्य वर्तमार्न में संदर्भ सेवार् के आवश्यक अंग बन गये हैं । यदि प्रकाशनों क सही ढंग से चयन एवं प्रसूचीकरण उसी गति से नहीं कियार् जार्तार् है जिस गति से उनक प्रकाशन हो रहार् है तो निश्चित ही शोधकर्तार् उन सभी प्रकाशनों के उपयोग से वंचित रह जार्येगार् जो किसी कारण से उनके सार्मने नहीं रखार् जार्तार् है | पार्ठकों क समय बहुत मूल्यवार्न है । पार्ठक प्रकाशनों की दुनियार्ं में अकेले तब तक भटकते रहेंगे जब तक कि संदर्भ अनुभार्ग द्वार्रार् अनेक प्रलेखन कार्य द्वार्रार् सार्हित्य उनके सार्मने नहीं रखार् जार्तार् है । इसलिए संदर्भ एवं सूचनार् अनुभार्ग द्वार्रार् प्रलेखन कार्य लगार्तार्र करते रहनार् चार्हिए जिससे आवश्यकतार् होने पर मार्ंगी गई सूबनार् को समय पर उपलब्ध करार्यार् जार् सके । | इस प्रकार से संदर्भ सेवार् और संदर्भ अनुभार्ग के कार्य अत्यन्त महत्वपूर्ण है । उसे कुशलतार् पूर्वक संचार्लन करने के लिए आवश्यक है कि पुस्तकालय के अन्य अनुभार्गों से उसक सही तार्लमेल बनार् रहे ।

3.5 पुस्तक लेन-देन अनुभार्ग एवं तकनीकी अनुभार्ग 

दोनों अनुभार्गों के मध्य समन्वय होनार् आवश्यक है | पार्ठकों को पुस्तकें पढने के लिए जार्री करने से पूर्व तकनीकी अनुभार्ग द्वार्रार् उसक सही वर्गीकरण एवं प्रसूचीकरण करनार् आवश्यक होतार् है, इससे पुस्तकों को देने लेने में सुगमतार् रहती है तथार् पुस्तकालय क प्रबंध व्यवस्थित रूप से हो सकतार् है । इसके लिए पुस्तक लेन देन अनुभार्ग को तकनीकी अनुभार्ग के सहयोग की आवश्यकतार् पड़ती है | नई पुस्तकों को तकनीकी कार्य सम्पन्न कर शीघ्रार्तिशीघ्र पार्ठकों को निर्गम हेतु भेजार् जार्नार् चार्हिए ।
कभी कमी किसी कारण से तकनीकी अनुमार्ग द्वार्रार् कोई तकनीकी सूक्ष्म गलती हो गयी हो तो इस अनुभार्ग क पुस्तक लेन-देन अनुभार्ग के मध्य सहयोग होगार् तो इस अनुभार्ग को वह पुस्तक पुनः भेजकर उस गलती को सही करवार् सकतार् है । इससे पुस्तकालय तकनीकी कार्य सुगमतार् से उत्कृष्ट रूप में हो सकेगार् ।।

3.6 पत्र-पत्रिक अनुभार्ग एवं तकनीकी अनुभार्ग

कुछ पत्र-पत्रिकाएँ ऐसी होती है जिनक प्रसूचीकरण करनार् आवश्यक है जैसे वाषिकीयार् मंगवार्यी जार्ती हैं जिनक क्रयार्देश पत्र-पत्रिक अनुभार्ग द्वार्रार् मेजार् जार्तार् है । यदि ये वाषिकीयार् तकनीकी अनुभार्ग में समयार्नुसार्र नहीं भेजी जार्ती हैं तो इनक प्रसूचीकरण लेखार् जोखार् सही रूप में नहीं रखार् जार् सकेगार् । पत्र-पत्रिक अनुभार्ग अनुक्रमणिकायें एवं सार्रकरण पत्रिकाएँ भी मंगवार्तार् है । इनक उपयुक्त उपयोग समय पर हो सके इसलिए इनक तकनीकी अनुभार्ग द्वार्रार् प्रसूचीकरण करनार् अतिआवश्यक है । अत: पत्र-पत्रिक अनुभार्ग को तकनीकी अनुभार्ग के सहयोग की आवश्यकतार् होती है और इसी प्रकार तकनीकी अनुभार्ग क कार्य अच्छी तरह से समय पर हो इसके लिए पत्र-पत्रिक अनुभार्ग समय समय पर पुस्तकालय में प्रार्प्त पत्र पत्रिकाओं को तकनीकी कार्य के लिए भिजवार्तार् है ।

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